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- मुंबई.भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से जोखिम आकलन को लेकर सभी स्रोतों से प्राप्त सूचना का उपयोग करने को कहा। आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक के दायरे में आने वाली इकाइयों (बैंक, एनबीएफसी समेत अन्य) को अपने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण की पहचान करने और उस पर लगाम लगाने को लेकर उपयुक्त कदम उठाने के लिए समय-समय पर आकलन करने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में बैंकों और एनबीएफसी को लेकर ‘मनी लॉन्ड्रिंग/आतंकवादी संगठनों को होने वाले वित्तपोषण के लिए आंतरिक जोखिम मूल्यांकन दिशानिर्देश' जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश विशेष रूप से मनी लांड्रिंग, आतंकवाद के वित्त पोषण/जन संहार से जुड़े हथियारों के प्रसार से संबंधित वित्तपोषण (सीपीएफ) पर अंकुश लगाने से जुड़े कर्मचारियों के लिए है। ये दिशानिर्देश आंतरिक जोखिम मूल्यांकन (आईआरए) के लिए प्रमुख बातों को निर्धारित करते हैं।आरबीआई ने कहा, ‘‘उसके दायरे में आने वाली इकाइयों को आंतरिक जोखिम आकलन के लिए सभी प्रासंगिक आंतरिक और बाहरी स्रोतों से प्राप्त जानकारी का उपयोग करना चाहिए।'' केंद्रीय बैंक के अनुसार लगातार बदलते कारोबारी माहौल और बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं के वित्तीय उत्पादों में जटिलताओं के बढ़ते स्तर के साथ मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण या प्रसार से जुड़े वित्तपोषण को लेकर जोखिम के बढ़ने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसमें कहा गया है कि उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग और भुगतान के नए तरीकों के सामने आने से जोखिम और भी बढ़ गया है।
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मुंबई। ‘बॉम्बे हाउस’ किसी भी अन्य समूह के मुख्यालय से अलग है। औपनिवेशिक युग की इस इमारत के प्रवेश द्वार पर वैसे तो हर आगंतुक की तलाशी ली जाती है, लेकिन यहां आवारा कुत्तों के आने जाने पर कोई पाबंदी नहीं है। ‘बॉम्बे हाउस’ मुंबई में एक ऐतिहासिक इमारत है जो कि निजी स्वामित्व वाली टाटा समूह के मुख्य कार्यालय के रूप में कार्य करता है।
दशकों से यहां काम करने वाले कर्मचारियों को यह निर्देश जारी किया जाता रहा है कि वे इन बेजुबानों के आने जाने पर रोक नहीं लगाएं और बेरोकटोक आने जाने दें। यह सब सिर्फ एक व्यक्ति रतन टाटा के कुत्तों के प्रति प्रेम और चिंता का परिणाम है, जो 1991 से 2012 तक टाटा संस के अध्यक्ष पद पर रहे तथा बाद में कुछ समय के लिए फिर से इस पद को संभाला।टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में बुधवार को 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कहा जाता है कि एक बार टाटा ने ‘बॉम्बे हाउस’ के बाहर बारिश में एक आवारा कुत्ते को बारिश से बचने के लिए संघर्ष करते देखा था।इसी के बाद उन्होंने परिसर के अंदर कुत्तों के प्रवेश के संबंध में विशेष निर्देश दिए। बेजुबान जीव के प्रति उनकी सहानुभूति इतनी गहरी थी कि जब समूह ने कुछ साल पहले ‘बॉम्बे हाउस’ का नवीनीकरण किया तो 2018 में उसने परिसर के भूतल पर विशेष तौर पर आवारा कुत्तों के लिए समर्पित एक हिस्से का निर्माण कराया। एक बड़े कमरे को कुत्तों के निवास स्थान के रूप में बनाया गया है जो कई सुविधाओं से लैस है और यह एक आम इंसान को भी उनसे (कुत्तों से) ईर्ष्या करने पर मजबूर कर देगा। कमरे में खाने पीने के लिए एक अलग स्थान है।उन्हें एक कर्मी द्वारा नहलाया जाता है। कमरे में कुत्तों के सोने के लिए भी जगह है जहां वे आराम की नींद ले सकते हैं। कुछ आवारा पशु बॉम्बे हाउस’ में स्थायी रूप से रहते हैं, लेकिन अक्सर कुछ आगंतुक भी होते हैं जिन्हें आने दिया जाता है और उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाता है।रतन टाटा का पालतू जानवरों खासकर आवारा जानवरों के प्रति प्यार ‘बॉम्बे हाउस’ के आस-पास के इलाकों से कहीं आगे तक फैला हुआ है। इस वर्ष की शुरुआत में टाटा समूह के आईएचसीएल द्वारा संचालित ताज होटल में ठहरे एक अतिथि ने एक हृदयस्पर्शी कहानी सुनाई थी।व्यक्ति ने बताया कि एक आवारा कुत्ता इस आलीशान होटल के प्रवेश द्वार पर शांति से सो रहा था और उसे बताया गया कि इसकी जड़ें रतन टाटा के निर्देशों से जुड़ी हैं। रतन टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स ने दक्षिण मध्य मुंबई के महालक्ष्मी में एक प्रमुख स्थान पर एक छोटा सा पशु चिकित्सालय भी बनवाया है। -
नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक, टाटा संस के चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा का बुधवार रात को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रतन टाटा पिछले कुछ समय से बीमार थे। उनके विश्वस्त सहायक शांंतनु नायडू ने आज सुबह एक भावुक पोस्ट साझा कर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।उद्योग और समाजसेवा के क्षेत्र के दिग्गज रतन टाटा के निधन को देशभर में एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनके जाने पर आनंद महिंद्रा और हर्ष गोयनका जैसे बड़े व्यापारियों ने शोक जताया है। हालांकि, उनके करीबी लोगों के लिए यह व्यक्तिगत दुख भी है।
रतन टाटा के करीबी सहयोगी शांतनु नायडू (30) ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके व्यावसायिक योगदान से अधिक उनकी दोस्ती पर जोर दिया।शांतनु नायडू ने अपने दोस्त के लिए लिखा भावुक संदेशरतन टाटा के ऑफिस में 30 वर्षीय जनरल मैनेजर ने लिखा, ‘इस दोस्ती से जो खालीपन अब मेरे साथ है, उसे भरने में मैं अपनी पूरी जिंदगी लगा दूंगा। दुख ही प्यार की कीमत है। अलविदा, मेरे प्यारे लाइटहाउस।’ इसके साथ ही उन्होंने एक पुरानी तस्वीर भी साझा की, जिसमें वे दोनों एक साथ नजर आ रहे हैं।कैसे हुई रतन टाटा और शांतनु की दोस्ती?शांतनु नायडू और रतन टाटा की अनोखी दोस्ती उनके जानवरों के प्रति साझा प्रेम से विकसित हुई। दोनों की मुलाकात 2014 में हुई, जब नायडू ने रात में गाड़ियों से कुत्तों को बचाने के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर बनाए। उनकी इस पहल से प्रभावित होकर टाटा सन्स के चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा ने नायडू को अपने साथ काम करने का निमंत्रण दिया।पिछले 10 वर्षों में शंतनु नायडू, रतन टाटा के करीबी और विश्वासपात्र दोस्त बन गए। रतन टाटा, जिन्होंने कभी शादी नहीं की और उनकी कोई संतान नहीं है, अपने आखिरी कुछ वर्षों में सार्वजनिक कार्यक्रमों में नायडू के साथ अक्सर देखे जाते थे। - मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने बुधवार को उन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी जो तेजी से आगे बढ़ने के लिए ‘अस्थिर' तरीके अपना रही हैं। आरबीआई गवर्नर दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कड़े शब्दों में ऐसी एनबीएफसी से ईमानदार, निष्पक्ष रहने और टिकाऊ व्यवहार का पालन करने को कहा। दास ने कहा, ‘‘ यह महत्वपूर्ण है कि एमएफआई (सूक्ष्म वित्त संस्थान) और एचएफसी (आवास वित्त कंपनियां) सहित एनबीएफसी स्थायी व्यावसायिक लक्ष्यों का पालन करें। ‘‘अनुपालन सर्वप्रथम'' संस्कृति अपनाएं, एक मजबूत जोखिम प्रबंधन ढांचा अपनाएं, निष्पक्ष व्यवहार संहिता का कड़ाई से पालन करें और ग्राहकों की शिकायतों पर ईमानदारी से गौर करें।'' उन्होंने आगाह करते हुए कहा, ‘‘ रिजर्व बैंक इन क्षेत्रों पर करीबी नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा।'' दास ने यह भी कहा कि आरबीआई चाहता है कि एनबीएफसी स्वयं सुधार करें।उन्होंने कहा कि एनबीएफसी क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में ‘‘प्रभावशाली वृद्धि'' दर्ज की है और ऐसे ऋणदाताओं ने वित्तीय समावेश के नीतिगत उद्देश्य में मदद की है। हालांकि, उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ एनबीएफसी टिकाऊ व्यावसायिक व्यवहार और जोखिम प्रबंधन ढांचे का निर्माण किए बिना आक्रामक रूप से वृद्धि की राह पर आगे बढ़ रही हैं। गवर्नर ने कहा, ‘‘किसी भी कीमत पर वृद्धि'' का अविवेकपूर्ण दृष्टिकोण उनके स्वयं के लिए प्रतिकूल होगा। उन्होंने संस्थाओं से अपने कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक प्रथाओं, परिवर्तनीय वेतन और प्रोत्साहन संरचनाओं की समीक्षा करने को भी कहा, क्योंकि उनका मानना है कि इनमें से कुछ विशुद्ध रूप से लक्ष्य-आधारित प्रतीत होते हैं। इनके परिणामस्वरूप प्रतिकूल कार्य संस्कृति तथा खराब ग्राहक सेवा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। दास ने बैंकों और एनबीएफसी से कहा कि वे इन क्षेत्रों में अपने व्यक्तिगत ऋणों के आकार और गुणवत्ता दोनों के संदर्भ में सावधानीपूर्वक आकलन करें तथा कर्ज की कड़ी निगरानी करें।
- नई दिल्ली। टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन हो गया है। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। बढ़ती उम्र से जुड़ी तकलीफों के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रतन टाटा ने मार्च 1991 से दिसंबर 2012 तक टाटा समूह की अगुवाई की। टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने टाटा ग्रुप को नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली कंपनी बनाया। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण किया। टाटा समूह आज देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक है।टाटा समूह ने ट्वीट किया, "हम रतन नवल टाटा को गहरी क्षति के साथ विदाई दे रहे हैं, वे वास्तव में एक असाधारण व्यक्ति थे, जिनके अतुलनीय योगदान ने न केवल टाटा समूह को बल्कि हमारे राष्ट्र के ढांचे को भी आकार दिया है...."दो दिन पहले ही रतन टाटा ने अपनी सेहत को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया था। सोमवार को खबरें आई थीं कि टाटा को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। टाटा ने बताया था कि वह अपनी उम्र संबंधी परेशानियों के इलाज के लिए अस्पताल गए हैं। उन्होंने लोगों से कहा था कि चिंता की कोई बात नहीं है। टाटा ने एक बयान में कहा था, 'मैं अपनी उम्र और उससे जुड़ी बीमारियों के कारण नियमित मेडिकल जांच करवा रहा हूं। चिंता की कोई बात नहीं है। मेरा मनोबल ऊंचा है।' उन्होंने लोगों और मीडिया से अपील की थी कि वे अफवाहें न फैलाएं।1937 में हुआ था जन्मरतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। 1962 में टाटा समूह में शामिल होने से पहले रतन टाटा ने अमेरिका में कुछ समय तक काम किया। 1981 में उन्हें टाटा इंडस्ट्रीज का चेयरमैन बनाया गया। 1991 में जेआरडी टाटा के रिटायरमेंट के बाद रतन टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला।कई बड़ी विदेशी कंपनियों का अधिग्रहणरतन टाटा ने अपने नेतृत्व में टाटा समूह को एक नई पहचान दी। उन्होंने कई बड़ी विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण किया, जिसमें टेटली, जगुआर लैंड रोवर और कोरस जैसी कंपनियां शामिल हैं। उनके नेतृत्व में टाटा समूह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन गया।रतन टाटा को उनके सामाजिक कार्यों के लिए भी जाना जाता था। वह टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन थे, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में काम करता है।सम्मानरतन टाटा को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इनमें शामिल हैं:1. पद्म भूषण (2000) - भारत सरकार द्वारा उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र में यह सम्मान दिया गया।2008 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा रतन टाटा को पद्म विभूषण से सम्मानित करते हुए2. पद्मविभूषण (2008) - यह भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उन्हें उनके व्यापारिक योगदान के लिए दिया गया।3. जर्मनी का आदेश - 2014 में, उन्हें जर्मनी के राष्ट्रपति द्वारा इस आदेश से सम्मानित किया गया।4. सर्वश्रेष्ठ सीईओ - 2012 में, रतन टाटा को "सर्वश्रेष्ठ सीईओ" का खिताब दिया गया।5. FICCI लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड - यह पुरस्कार उन्हें 2012 में दिया गया।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उपभोक्ता मांग तथा निवेश बेहतर रहने की संभावना के बीच चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर कायम रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने दूसरी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही। पहले इसके 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके अलावा आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को क्रमश: 7.3 और 7.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने अगस्त में अपनी पिछली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के 7.2 प्रतिशत पर रहने का ही अनुमान लगाया था। गवर्नर दास ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि भारत की वृद्धि गाथा कायम है क्योंकि वृद्धि को रफ्तार देने वाले कारक उपभोग तथा निवेश मांग में मजबूती है। उन्होंने कहा, ‘‘कुल मांग में महत्वपूर्ण हिस्सा रखने वाले निजी उपभोग की संभावनाएं बेहतर हैं क्योंकि कृषि परिदृश्य और ग्रामीण मांग की स्थिति बेहतर हुई है। सेवाओं में तेजी से शहरी मांग को भी समर्थन मिलेगा। केंद्र और राज्यों के सरकारी खर्च के बजट अनुमान के अनुरूप तेजी पकड़ने की उम्मीद है।'' गवर्नर ने कहा कि उपभोक्ता और कारोबारी भरोसे से निवेश गतिविधियों को लाभ होगा। इसके अलावा सरकार निवेश पर जोर दे रही है और बैंकों तथा कॉरपोरेट जगत का बही-खाता भी मजबूत है। उन्होंने कहा, ‘‘ इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी। दूसरी तिमाही में इसके सात प्रतिशत, तीसरी में 7.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने बुधवार को उन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी जो तेजी से आगे बढ़ने के लिए ‘अस्थिर' तरीके अपना रही हैं। आरबीआई गवर्नर दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कड़े शब्दों में ऐसी एनबीएफसी से ईमानदार, निष्पक्ष रहने और टिकाऊ व्यवहार का पालन करने को कहा। दास ने कहा, ‘‘ यह महत्वपूर्ण है कि एमएफआई (सूक्ष्म वित्त संस्थान) और एचएफसी (आवास वित्त कंपनियां) सहित एनबीएफसी स्थायी व्यावसायिक लक्ष्यों का पालन करें। ‘‘अनुपालन सर्वप्रथम'' संस्कृति अपनाएं, एक मजबूत जोखिम प्रबंधन ढांचा अपनाएं, निष्पक्ष व्यवहार संहिता का कड़ाई से पालन करें और ग्राहकों की शिकायतों पर ईमानदारी से गौर करें।'' उन्होंने आगाह करते हुए कहा, ‘‘ रिजर्व बैंक इन क्षेत्रों पर करीबी नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा।'' दास ने यह भी कहा कि आरबीआई चाहता है कि एनबीएफसी स्वयं सुधार करें।
उन्होंने कहा कि एनबीएफसी क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में ‘‘प्रभावशाली वृद्धि'' दर्ज की है और ऐसे ऋणदाताओं ने वित्तीय समावेश के नीतिगत उद्देश्य में मदद की है। हालांकि, उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ एनबीएफसी टिकाऊ व्यावसायिक व्यवहार और जोखिम प्रबंधन ढांचे का निर्माण किए बिना आक्रामक रूप से वृद्धि की राह पर आगे बढ़ रही हैं। गवर्नर ने कहा, ‘‘किसी भी कीमत पर वृद्धि'' का अविवेकपूर्ण दृष्टिकोण उनके स्वयं के लिए प्रतिकूल होगा। उन्होंने संस्थाओं से अपने कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक प्रथाओं, परिवर्तनीय वेतन और प्रोत्साहन संरचनाओं की समीक्षा करने को भी कहा, क्योंकि उनका मानना है कि इनमें से कुछ विशुद्ध रूप से लक्ष्य-आधारित प्रतीत होते हैं। इनके परिणामस्वरूप प्रतिकूल कार्य संस्कृति तथा खराब ग्राहक सेवा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। दास ने बैंकों और एनबीएफसी से कहा कि वे इन क्षेत्रों में अपने व्यक्तिगत ऋणों के आकार और गुणवत्ता दोनों के संदर्भ में सावधानीपूर्वक आकलन करें तथा कर्ज की कड़ी निगरानी करें। -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पौष्टिक तत्वों से भरपूर चावल की मुफ्त आपूर्ति खाद्य कानून और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत 17,082 करोड़ रुपये के परिव्यय से वर्ष 2028 तक जारी रखने का बुधवार को फैसला किया। पौष्टिक तत्वों से भरपूर यानी फोर्टिफाइड चावल लोगों में खून की कमी (एनीमिया) के समाधान और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए अहम माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। चावल को पोषक तत्वों से भरपूर बनाने की प्रक्रिया में भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों (लौह, फोलिक एसिड, विटामिन बी12) से भरपूर ‘फोर्टिफाइड’ चावल कर्नेल (एफआरके) को नियमित चावल (कस्टम मिल्ड चावल) में मिलाया जाता है।आधिकारिक बयान के अनुसार, “मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत जुलाई, 2024 से दिसंबर, 2028 तक फोर्टिफाइड चावल की मुफ्त आपूर्ति जारी रखने को मंजूरी दे दी है।”सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि मुफ्त फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति के लिए कुल वित्तीय योजना 17,082 करोड़ रुपये की होगी। इस व्यय का पूरा वित्तपोषण केंद्र सरकार करेगी।बयान के अनुसार, चावल को पोषक तत्वों से भरपूर बनाने की पहल केंद्रीय क्षेत्र की पहल के रूप में जारी रहेगी। इसका 100 प्रतिशत वित्तपोषण पीएमजीकेएवाई (खाद्य सब्सिडी) के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा, जिससे कार्यान्वयन के लिए एक एकीकृत संस्थागत तंत्र उपलब्ध होगा।उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में पोषण सुरक्षा की जरूरत बताई थी। सरकार ने कहा है कि “लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस), अन्य कल्याणकारी योजनाओं, एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस), पीएम पोषण (पूर्ववर्ती एमडीएम) के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति” की पहल की गई है।अप्रैल, 2022 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने मार्च, 2024 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में चावल पौष्टीकरण पहल को लागू करने का निर्णय लिया था। तीनों चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और मार्च, 2024 तक सभी सरकारी योजनाओं में पोषक तत्वों से भरपूर चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।सरकार ने बयान में कहा, “साल 2019 और 2021 के बीच किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार, भारत में एनीमिया एक व्यापक समस्या बनी हुई है, जो विभिन्न आयु समूहों और आय स्तर के बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को प्रभावित कर रही है।” - नयी दिल्ली. त्योहारी मौसम की बिक्री के पहले चरण में सैमसंग संख्या के लिहाज से 20 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ स्मार्टफोन खंड में शीर्ष पर रही है। सेमीकंडक्टर सूचना मंच टेक इनसाइट्स ने मंगलवार को कहा कि उपभोक्ताओं ने 26 सितंबर से छह अक्टूबर के बीच आयोजित त्योहारी सेल के दौरान 10 लाख से अधिक आईफोन खरीद डाले। टेक इनसाइट ने एक ब्लॉग में कहा, ‘‘त्योहारी सेल के पहले दौर में सैमसंग 20 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ स्मार्टफोन की बिक्री में सबसे आगे रही जबकि एप्पल दूसरे स्थान पर रही।'' प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट ने अपने मंच पर त्योहारी सेल आयोजित की थी जिसमें ग्राहकों के लिए कई तरह की छूट एवं आकर्षक पेशकश भी की गई थीं। ब्लॉग में कहा गया है कि सैमसंग फ्लिपकार्ट और अमेजन पर त्योहारी बिक्री का मुख्य प्रायोजक भी थी जिससे इसे अतिरिक्त बढ़ावा मिला। टेक इनसाइट्स का अनुमान है कि त्योहारी बिक्री के पहले चरण की अवधि में हुई कुल स्मार्टफोन बिक्री में ऑनलाइन बिक्री का हिस्सा 78 प्रतिशत रहा। नवरात्रि की शुरुआत के साथ ऑफलाइन बिक्री ने भी रफ्तार पकड़ ली थी। इस त्योहारी सेल में दिग्गज कंपनी एप्पल का 16 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहना आश्चर्यजनक रहा। इसमें आईफोन 15 और आईफोन 13 मॉडल की बिक्री का प्रमुख योगदान रहा। ओप्पो समूह (ओप्पो और वनप्लस), शाओमी और रियलमी त्योहारी मौसम के पहले चरण में संख्या के लिहाज से शीर्ष पांच स्मार्टफोन विक्रेता कंपनियों में शामिल रहीं।
- नयी दिल्ली.दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी सैमसंग ने फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी), आईआईटी दिल्ली, इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और भारत में संयुक्त राष्ट्र के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत प्रमुख सीएसआर पहल ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो' के तीसरे संस्करण के विजेताओं की घोषणा की है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, असम के गोलाघाट के इको टेक इनोवेटर का दल इसका विजेता रहा। उसने पीने योग्य पानी तथा उसकी स्वच्छता तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर एक प्रौद्योगिकी मॉडल पेश किया था। वहीं कर्नाटक के उडुपी की एमईटीएएल ने भूजल से आर्सेनिक हटाने के लिए एक प्रौद्योगिकी विकसित की। सैमसंग साउथवेस्ट एशिया के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जे बी पार्क और भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर शोम्बी शार्प ने इन दलों को प्रमाण पत्र और ‘ट्रॉफी' प्रदान की। जे बी पार्क ने कहा, ‘‘ हमारी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के जरिये हमारा लक्ष्य युवा सोच-समझ को सशक्त बनाना है। उन्हें आवश्यक उपकरण, मार्गदर्शन तथा अवसर प्रदान करना है, जिससे वे अपने समुदाय तथा पर्यावरण की गंभीर चुनौतियों का समाधान कर सकें।'' इस प्रतियोगिता के आखिरी दौर के लिए 22 छात्रों के 10 दलों का चयन किया गया था। इन्हें ‘समुदाय व समावेश' तथा ‘पर्यावरण तथा स्थिरता' पर आधारित विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करने थे। निर्णायक मंडल के समक्ष इनके मॉडल पेश करने थे। निर्णायक मंडल में आईआईटी दिल्ली, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा सैमसंग अनुसंधान व विकास के सदस्य शामिल थे।
- नयी दिल्ली। नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने सोमवार को कहा कि भारत को 2030 तक 750 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखना चाहिए और स्वच्छ ऊर्जा निर्यातक बनना चाहिए। कांत ने यहां एक गोलमेज चर्चा में कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लिए वैश्विक कोष की कोई कमी नहीं है, लेकिन भारत को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निजी निवेश आकर्षित करने को एस्क्रो खातों जैसी मजबूत वित्तीय प्रणाली स्थापित करने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संघर्ष और अमेरिका तथा यूरोपीय देशों से व्यापार बाधाओं सहित कई वैश्विक संकट के बीच अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने में सक्षम हो। कांत ने कहा कि भारत का एजेंडा एकदम स्पष्ट होना चाहिए कि हम 180 अरब डॉलर मूल्य के जीवाश्म ईंधन के आयातक हैं, और हमें स्वच्छ ऊर्जा का निर्यातक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को 500 गीगावाट क्षमता से आगे बढ़कर 750 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य तय करना चाहिए।
- नयी दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष मिशन को पांच दशक से अधिक समय तक सहयोग प्रदान करने के बाद, भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार, विशेष रूप से अगले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अपनी नजरें टिका दी हैं। एलएंडटी पहले जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन के साथ कक्षीय प्रक्षेपण क्षमता और अंतरिक्ष में रहने से जुड़ी सामग्री की आपूर्ति के लिए बातचीत कर रही थी, लेकिन उसमें कुछ समस्या आ गई। एलएंडटी प्रिसिजन इंजीनियरिंग एंड सिस्टम्स के उपाध्यक्ष विकास खिता ने कहा, ‘‘अब यह बातचीत नासा के साथ की जा रही है। इसलिए, हमें उम्मीद है कि जब अमेरिका को अपने अगले अंतरिक्ष स्टेशन की आवश्यकता होगी, तो भारतीय कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका निभाएंगी।'' जियोस्पेशियल वर्ल्ड द्वारा आयोजित उद्योग सम्मेलन के अवसर पर खिता ने कहा कि कंपनी स्पेस पोर्ट, स्पेस पार्क और विनिर्माण क्लस्टर के निर्माण में भी रुचि रखती है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को 2020 में सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बाद बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘व्यावसायिक दृष्टि से, हम 2033 तक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के कारोबार में पांच गुना वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।'' एलएंडटी, इसरो की हर परियोजना के लिए उपकरणों के उत्पादन में शामिल रही है, जिसमें चंद्रयान, गगनयान और मंगल ऑर्बिटर मिशन शामिल हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड-एलएंडटी कंसोर्टियम पांच ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) का भी निर्माण कर रहा है।
- नयी दिल्ली. ऑनलाइन ऑर्डर पर खानपान के उत्पाद पहुंचाने वाली कंपनी जोमैटो के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) दीपिंदर गोयल ने रविवार को कहा कि मॉल को ‘डिलीवरी पार्टनर (ऑर्डर पर खान-पान के उत्पाद पहुंचाने वाले प्रतिनिधि) के प्रति अधिक मानवीय' होने की जरूरत है। उन्होंने जोमैटो के लिए ऑर्डर लेने वाले डिलीवरी प्रतिनिधि के रूप में अपने अनुभव को साझा किया।सोशल मीडिया पोस्ट पर अपना अनुभव साझा करते हुए गोयल ने कहा, “अपने दूसरे ऑर्डर के दौरान, मुझे एहसास हुआ कि हमें सभी डिलीवरी साझेदारों के लिए काम करने की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए मॉल के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। ...और मॉल को भी डिलीवरी साझेदारों के प्रति ज़्यादा मानवीय होने की ज़रूरत है। आप क्या सोचते हैं?” उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए एक वीडियो भी पोस्ट किया।उन्होंने कहा, हम हल्दीराम से ऑर्डर लेने गुरुग्राम के एंबियंस मॉल पहुंचे। हमें दूसरे प्रवेश द्वार से जाने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में पता चला कि वे मुझे सीढ़ियों से जाने के लिए कह रहे हैं। डिलीवरी पार्टनर के लिए कोई लिफ्ट तो नहीं है, यह सुनिश्चित करने के लिए हम फिर से मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर गए।” गोयल ने कहा कि वह सीढ़ियों से तीसरी मंजिल पर गए तो उन्हें पता चला कि डिलीवरी साझेदार मॉल में प्रवेश नहीं कर सकते और उन्हें ऑर्डर प्राप्त करने के लिए सीढ़ियों पर इंतजार करना पड़ता है। जोमैटो के सीईओ ने कहा, “अपने साथी डिलीवरी साझेदारों के साथ मौज-मस्ती की और उनसे बहुमूल्य प्रतिक्रियाएं भी प्राप्त कीं। उन्होंने कहा कि जब सीढ़ी के सुरक्षाकर्मी वहां से हटे तो वह अंततः ऑर्डर लेने के लिए अंदर घुसने में सफल हो गए।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की इस सप्ताह होने वाली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में प्रमुख ब्याज दर रेपो में कटौती की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है। उनका कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है, तथा पश्चिम एशिया संकट के और बिगड़ने की संभावना है, जिसका असर कच्चे तेल और जिंस कीमतों पर पड़ेगा। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की दर-निर्धारण समिति - मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का पुनर्गठन किया। इसमें तीन नए नियुक्त बाहरी सदस्यों के साथ पुनर्गठित समिति सोमवार को अपनी पहली बैठक शुरू करेगी। एमपीसी के चेयरमैन आरबीआई गवर्नर शक्तिकान्त दास बुधवार (नौ अक्टूबर) को तीन दिन की बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी, 2023 से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर में ही इसमें कुछ ढील की गुंजाइश है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर बनी रहे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई संभवतः अमेरिकी फेडरल रिजर्व का अनुसरण नहीं करेगा, जिसने बेंचमार्क दरों में 0.5 प्रतिशत की कमी की है। आरबीआई कुछ अन्य विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों का भी अनुसरण नहीं करेगा, जिन्होंने ब्याज दरों में कमी की है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, “हमें रेपो दर या एमपीसी के रुख में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसका कारण यह है कि सितंबर और अक्टूबर में मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से ऊपर रहेगी और मौजूदा कम मुद्रास्फीति आधार प्रभाव के कारण है। इसके अलावा, मुख्य मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ रही है।” सबनवीस ने कहा कि इसके अलावा, हाल ही में ईरान-इजराइल संघर्ष और भी गहरा सकता है, और यहां अनिश्चितता है। “इसलिए, नए सदस्यों के लिए भी यथास्थिति सबसे संभावित विकल्प है। मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को 0.1-0.2 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमान में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने पिछली बार फरवरी, 2023 में रेपो दर को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था और तब से, उसने दर को उसी स्तर पर बनाए रखा है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि शुरुआती पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि एमपीसी के अनुमान से कम रहने और दूसरी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के कम रहने के अनुमान को देखते हुए हमारा मानना है कि अक्टूबर, 2024 की नीतिगत समीक्षा में रुख को बदलकर ‘तटस्थ' करना उचित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद रेपो दर में दिसंबर, 2024 और फरवरी, 2025 में 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है। सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लि. के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि रियल एस्टेट उद्योग और डेवलपर समुदाय के साथ घर खरीदार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक संभवत: लगातार दसवीं बार ब्याज दरों को यथावत रखेगा।
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आने वाले दशक में जीवन स्तर में तेज सुधार होगा और यह वास्तव में भारतीयों के लिए जीवन जीने का एक युग होगा। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत के युवा लोग, खपत में बढ़त और नवोन्मेष उन ताकतों में हैं, जो भारत के इस युग को आकार देंगे।वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 10 साल के दौरान की गई आर्थिक व ढांचागत सुधार की कवायदों का असर आने वाले वर्षो में दिखेगा, क्योंकि अर्थव्यवस्था से कोविड-19 वैश्विक महामारी का असर कम हो जाएगा।’उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमानों के अनुसार हमें 2,730 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय तक पहुंचने में 75 साल लगे, लेकिन इसमें 2,000 अमेरिकी डॉलर और जोड़ने में केवल 5 साल लगेंगे।’सम्मेलन के थीम ‘द इंडियन एरा’के बारे में बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में खपत स्वाभाविक तौर पर आगामी दशकों में बढ़ेगी क्योंकि अभी 43 फीसदी आबादी 24 साल से कम उम्र की है, जिसके खपत व्यवहार का अभी पूरी तरह से दोहन होना है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना कि भारत के युवा संज्ञानात्मक रूप से सक्षम, भावनात्मक रूप से मजबूत और शारीरिक रूप से दुरुस्त हो, हमारी प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता है।
भारत के युग को आकार देने में वित्त मंत्री ने बढ़ते मध्यवर्ग की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिक खपत, विदेशी निवेश की आवक और गतिशील बाजार की राह प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की नवोन्मेष की क्षमता परिपक्व होगी और आने वाले दशकों में इसमें सुधार होगा।भारत की वित्तीय व्यवस्था की सराहना करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के वित्तीय बाजार ने एक सक्षम व्यवस्था विकसित की है, जिसका संकट प्रबंधन, नियामकीय और प्रशासनिक मानक विकसित बाजारों की तरह है।सीतारमण ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव भारत के लिए फायदे के हिसाब से संरचनात्मक ताकत के रूप में काम कर सकता है और इससे रणनीतिक सामंजस्य वाले देशों के साथ मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित हो सकती है।उन्होंने कहा, ‘भारत को नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से लाभ होगा, जो आज की दुनिया की शक्ति के वितरण को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए खुद को बदल रही है।’सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी 1.4 अरब की आबादी (जो वैश्विक कुल का 18 फीसदी है) के लिए कुछ वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का प्रयास करेगा। मंत्री ने कहा कि विकसित भारत विचारों, प्रौद्योगिकी तथा संस्कृति के जीवंत आदान-प्रदान का केंद्र बनकर न केवल भारतीयों के लिए बल्कि शेष विश्व के लिए भी समृद्धि लाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि 2000 दशक के शुरुआत में चीन जैसे उभरते बाजार तुलनात्मक रूप से ज्यादा आसानी से बढ़े क्योंकि अनुकूल वैश्विक व्यापार और निवेश का वातावरण था। यह भारत के लिए चुनौती और अवसर दोनों है।उन्होंने कहा कि 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 साल पूरे करेगा, भारत का नया काल शुरू होगा, जिसमें विकसित देशों जैसी स्थितियां होंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत से न सिर्फ भारतीयों में संपन्नता आएगी, बल्कि विचारों, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के आदान प्रदान से शेष विश्व के लिए भी यह समृद्धि लाएगा। -
नई दिल्ली। सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। सूत्रों ने चार अक्टूबर के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए बताया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने नौ अक्टूबर, 2024 से एक साल की अवधि के लिए या अगले आदेश तक राव की फिर से नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।एसीसी की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करते हैं। राव को अक्टूबर, 2020 में तीन साल की अवधि के लिए आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया था। राव को नवंबर, 2016 में आरबीआई के कार्यकारी निदेशक के रूप में पदोन्नत किया गया था। कोचीन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र स्नातक और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री प्राप्त राव 1984 में केंद्रीय बैंक में शामिल हुए थे।
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नई दिल्ली। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने पहली बार 700 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर पार कर लिया है। इसमें लगातार सातवें हफ्ते बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि RBI की तरफ से डॉलर की खरीद और वैल्यूएशन में बढ़ोतरी की वजह से आई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 27 सितंबर 2024 को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 12.6 अरब डॉलर बढ़कर 704.89 अरब डॉलर हो गया, जो जुलाई 2023 के मध्य के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है। भारत अब चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद 700 अरब डॉलर से अधिक विदेशी भंडार रखने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।2013 में कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण विदेशी निवेशकों के मोहभंग हुआ और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई। लेकिन उसके बाद से भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हो रही है। तब से सख्त महंगाई दर में नियंत्रण, उच्च आर्थिक विकास और कम वित्तीय घाटे ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है और विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा हुआ है। 2024 में अब तक विदेशी निवेशों से भारत के भंडार में 30 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है।रुपया और आरबीआई की भूमिकाRBI की तरफ से 4.8 अरब डॉलर की खरीद और 7.8 अरब डॉलर के वैल्यूएशन गेन से यह वृद्धि दर्ज की गई। वैल्यूएशन गेन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में गिरावट, कमजोर डॉलर और सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ। RBI ने रुपये को एक सीमित ट्रेडिंग रेंज में बनाए रखने के लिए बाजार में दोनों ओर हस्तक्षेप किया है, जिससे यह उभरते बाजारों की मुद्राओं में सबसे स्थिर बना रहा। पिछले महीने RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि अधिक अस्थिरता से अर्थव्यवस्था को कोई लाभ नहीं होता है। -
नई दिल्ली। आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में उछाल से सितंबर में घर का बना खाना एक साल पहले की तुलना में महंगा हो गया। शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।
घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 में शाकाहारी भोजन की लागत 28.1 रुपये से सितंबर में 11 प्रतिशत बढ़कर 31.3 रुपये हो गई। यह अगस्त में 31.2 रुपये से थोड़ी ही अधिक हुई।‘रोटी, राइस, रेट’ नामक इस रिपोर्ट में वृद्धि के लिए सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया गया है, जो थाली की लागत का 37 प्रतिशत हिस्सा है।इसमें कहा गया, ‘‘ सितंबर में प्याज, आलू तथा टमाटर की कीमतें क्रमश: 53 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और 18 प्रतिशत बढ़ीं। इसकी वजह प्याज तथा आलू की कम आवक, जबकि भारी बारिश से आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में टमाटर का उत्पादन प्रभावित रहना रही।’’रिपोर्ट में कहा गया, उत्पादन में कमी से दालों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि साल की शुरुआत में कीमतों में कटौती के कारण ईंधन की कीमतों में 11 प्रतिशत की गिरावट आई।मांसाहारी थाली भोजन की लागत पिछले वर्ष की तुलना में दो प्रतिशत घटकर 59.3 रुपये हो गई, जबकि ‘ब्रॉयलर’ (मांस) की कीमतों में 13 प्रतिशत की गिरावट आई जिसका इस थाली में 50 प्रतिशत योगदान है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगस्त की तुलना में मांसाहारी भोजन की कीमत स्थिर रही। -
मुंबई. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से पैदा हुई चिंता के बीच घरेलू स्तर पर शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को चौतरफा बिकवाली हुई और मानक सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक टूट गए। सेंसेक्स में 1,769 अंक और निफ्टी में 547 अंक की भारी गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों ने कहा कि विदेशी कोषों की सतत निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। यह शेयर बाजार में गिरावट का लगातार चौथा दिन रहा। बड़ी गिरावट के बीच निवेशकों की संपत्ति एक ही दिन में 9.78 लाख करोड़ रुपये घट गई। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक सेंसेक्स 1,769.19 अंक यानी 2.10 प्रतिशत गिरकर 82,497.10 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,832.27 अंक टूटकर 82,434.02 अंक पर आ गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 546.80 अंक यानी 2.12 प्रतिशत का गोता लगाते हुए 25,250.10 अंक पर आ गया। सेंसेक्स की कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, टाटा मोटर्स, बजाज फाइनेंस, मारुति, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स और एचडीएफसी बैंक में खासी गिरावट दर्ज की गई। बाजार की चौतरफा गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से अकेले जेएसडब्ल्यू स्टील ही बढ़त लेने में सफल रही। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘इजराइल पर ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद घरेलू बाजारों में तेज गिरावट आई। दरअसल, अब इजराइल की तरफ से तेल उत्पादक ईरान पर जवाबी कार्रवाई करने की आशंका बढ़ गई है जो इस संघर्ष को बड़ा रूप दे सकता है।'' नायर ने कहा, ‘‘वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) खंड के लिए सेबी के नए नियमों ने भी बाजार में सौदों की संख्या कम होने से जुड़ी चिंता बढ़ाने का काम किया है। इसके साथ चीन में बाजार का मूल्यांकन आकर्षक होने से विदेशी निवेशकों ने अब अपनी पूंजी का रुख उधर मोड़ दिया है जिससे भारतीय शेयरों पर दबाव बढ़ गया है।'' शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 5,579.35 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी। व्यापक बाजार में बीएसई मिडकैप सूचकांक 2.27 प्रतिशत की बड़ी गिरावट पर रहा जबकि स्मालकैप सूचकांक में 1.84 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार सूचकांकों में रियल्टी खंड में 4.49 प्रतिशत की सर्वाधिक गिरावट रही। पूंजीगत उत्पाद खंड 3.18 प्रतिशत और वाहन खंड 2.94 प्रतिशत के नुकसान में रहे। एक भी सूचकांक सकारात्मक दायरे में रहने में नाकाम रहा। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के उप प्रमुख (खुदरा शोध) देवर्ष वकील ने कहा, "विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और एफआईआई के भारत से निकलकर चीन का रुख करने की आशंकाएं हावी रहीं। चीन की तुलना में घरेलू बाजारों के अधिक मूल्यांकन से इसे बल मिला।" एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग के हैंगसेंग में गिरावट रही जबकि जापान का निक्की बढ़त के साथ बंद हुआ। चीन के शेयर बाजार सार्वजनिक अवकाश होने से सप्ताह के बाकी दिनों के लिए बंद रहेंगे। यूरोप के ज्यादातर बाजार दोपहर में गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। बुधवार को अमेरिकी बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुए थे। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.37 प्रतिशत बढ़कर 74.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर बुधवार को शेयर बाजार बंद रहे थे। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 33.49 अंक गिरकर 84,266.29 अंक और एनएसई निफ्टी 13.95 अंक की मामूली गिरावट के साथ 25,796.90 अंक पर बंद हुआ था।
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गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम में ‘ऑयल इंडिया लिमिटेड' द्वारा चार संपीड़ित बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्र के निर्माण के लिए बुधवार को आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम देशभर में सीबीजी के कई संयंत्रों के लिए नींव रखने के समारोह का हिस्सा था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी ने नयी दिल्ली से डिजिटल माध्यम से की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वच्छ भारत दिवस के मौके पर एक सतत और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा परिदृश्य को बढ़ावा देना है। असम में ये संयंत्र गुवाहाटी, जोरहाट, शिवसागर और तिनसुकिया में बनाए जाएंगे।
ऑयल इंडिया लिमिटेड ने एक बयान में कहा कि कंपनी की पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ मिलकर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) में निवेश या निजी उद्यमियों के साथ साझेदारी के जरिए 2024-25 तक 25 सीबीजी संयंत्र स्थापित करने की योजना है। -
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र का भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) चालू वित्त वर्ष में खोलेगा 600 नई शाखाएं,) चालू वित्त वर्ष (2024-25) में 600 नई शाखाएं खोलने की तैयारी कर रहा है। बैंक के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा है कि एसबीआई आवासीय टाउनशिप सहित उभरते क्षेत्रों में कारोबार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए देशभर में 600 नई शाखाएं खोलेगा। शेट्टी ने बातचीत में कहा, “हमारे पास शाखा विस्तार की मजबूत योजनाएं हैं…यह मुख्य रूप से उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित होगी। बहुत सी आवासीय कॉलोनियां हमारे दायरे में नहीं हैं। चालू वित्त वर्ष में हम लगभग 600 शाखाएं खोलने की योजना बना रहे हैं।”
एसबीआई ने पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में 137 नई शाखाएं खोली थीं। इनमें से 59 शाखाएं ग्रामीण क्षेत्र में थीं। एसबीआई की देशभर में मार्च, 2024 तक 22,542 शाखाएं थीं। एसबीआई के देशभर में 65,000 एटीएम और 85,000 बैंकिंग प्रतिनिधि भी हैं। उन्होंने कहा, “हम लगभग 50 करोड़ ग्राहकों को सेवा प्रदान करते हैं और हमें यह कहते हुए गर्व होता है कि हम प्रत्येक भारतीय, और उससे भी महत्वपूर्ण बात, प्रत्येक भारतीय परिवार के बैंकर हैं।” जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक आवर्ती जमा (RD) और SIP के संयुक्त उत्पाद सहित नवीन उत्पाद लाने पर विचार कर रहा है। - नयी दिल्ली. प्रसाधन तथा स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद बेचने वाली ‘डायरेक्ट सेलिंग' क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एमवे ने माइकल नेल्सन को अपना अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। कंपनी ने बयान में कहा, नेल्सन, मिलिंद पंत की जगह लेंगे जो जनवरी 2019 से सीईओ के रूप में कार्यरत थे। नेल्सन का एमवे में तीन दशकों से अधिक का अनुभव लेकर आ रहे हैं। वह रणनीति, आपूर्ति श्रृंखला, मानव संसाधन और प्रौद्योगिकी संबंधी कई महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं। एमवे निदेशक मंडल के सह-प्रमुख स्टीव वान एन्देल ने कहा, ‘‘ ...हमें पूरा विश्वास है कि वह एमवे को वर्तमान तथा भविष्य में उद्योग में अग्रणी बने रहने, वृद्धि करने और फलने-फूलने के लिए आवश्यक अनुभव लाएंगे।'' बयान में कहा गया, पूर्व सीईओ मिलिंद पंत के जाने पर एमवे निदेशक मंडल उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है।
- नयी दिल्ली. जापान की सोनी ग्रुप कॉरपोरेशन और सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट (एसपीई) ने रवि आहूजा को अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की मंगलवार को घोषणा की। उनकी नियुक्ति दो जनवरी 2025 से प्रभावी होगी। सोनी समूह ने बयान में कहा, एसपीई के ग्लोबल टेलीविजन स्टूडियोज के वर्तमान चेयरमैन, अध्यक्ष एचं मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) आहूजा एसपीई के अध्यक्ष एवं सीईओ टोनी विन्सीक्वेरा की जगह लेंगे। इसमें कहा गया, विन्सीक्वेरा दिसंबर 2025 के अंत तक गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एसपीई के लिए सलाहकार की भूमिका में बने रहेंगे। बयान में कहा गया, आहूजा सोनी ग्रुप कॉर्पोरेशन के चेयरमैन एवं सीईओ केनिचिरो योशिदा और सोनी ग्रुप कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष, सीओओ एवं मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) हिरोकी तोतोकी के अधीन काम करेंगे। आहूजा सोनी पिक्चर्स टेलीविजन (एसपीटी) के सभी निर्माण व्यवसायों और ग्लोबल टेलीविजन स्टूडियोज के चेयरमैन के रूप में स्टूडियो के भारत व्यवसाय की देखरेख के लिए 2021 में एसपीई में शामिल हुए थे। सोनी ग्रुप कॉरपोरेशन के चेयरमैन एवं सीईओ केनिचिरो योशिदा ने कहा, ‘‘ रवि 2021 में एसपीई में शामिल होने के बाद से टोनी नीत दल के केंद्र में रहे हैं....'' उन्होंने कहा, ‘‘ रवि अपने साथ दुनिया की कुछ सबसे सफल मनोरंजन कंपनियों में काम करने का वर्षों का अनुभव लेकर आए हैं। हम एसपीई के अध्यक्ष एवं सीईओ के रूप में उनके साथ और निकटता से काम करने को उत्सुक हैं।''
- वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 48.5 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ीनयी दिल्ली. विमान ईंधन या एटीएफ की कीमत 6.3 प्रतिशत की कटौती के बाद मंगलवार को इस साल के निचले स्तर पर आ गई। वहीं, होटलों तथा रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले वाणिज्यिक एलपीजी (19 किलोग्राम) की कीमत में 48.5 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के रुझान के अनुरूप मासिक आधार पर इसकी कीमत में यह वृद्धि की गई है। सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत 5,883 रुपये प्रति किलोलीटर या 6.29 प्रतिशत घटकर 87,597.22 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई। यह विमान ईंधन की इस साल सबसे कम कीमत है। इसमें लगातार दूसरी बार कटौती से विमानन कंपनियों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी, जिनकी परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत होता है। इससे पहले एक सितंबर को कीमतों में 4,495.5 रुपये प्रति किलोलीटर या 4.58 प्रतिशत की कटौती की गई थी। एटीएफ की कीमत मुंबई में मंगलवार को 87,432.78 रुपये प्रति किलोलीटर से घटाकर 81,866.13 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई। स्थानीय करों के आधार पर कीमतें हर राज्य में अलग-अलग होती हैं। इसके साथ ही तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 48.5 रुपये बढ़ाकर 1,740 रुपये प्रति 19 किलोग्राम सिलेंडर कर दी है। कीमतों में लगातार तीसरी बार मासिक वृद्धि की गई। इससे पहले एक अगस्त को कीमतों में 6.5 रुपये प्रति सिलेंडर और एक सितंबर को 39 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम) की कीमत अब मुंबई में 1,692.50 रुपये, कोलकाता में 1,850.50 रुपये और चेन्नई में 1,903 रुपये हो गई है। हालांकि, घरेलू इस्तेमाल में आने वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 803 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम पर यथावत है। सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) हर महीने की पहली तारीख को बेंचमार्क अंतरराष्ट्रीय ईंधन की औसत कीमत और विदेशी विनिमय दर के आधार पर एटीएफ तथा रसोई गैस की कीमतों में संशोधन करती हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। मार्च के मध्य में कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर है जबकि डीजल की कीमत 87.62 रुपये प्रति लीटर है।
- नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का सितंबर महीने में सकल संग्रह सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.73 लाख करोड़ रुपये रहा। सरकार की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। पिछले साल सितंबर में जीएसटी राजस्व 1.63 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, मासिक आधार पर जीएसटी संग्रह में कमी आई है। अगस्त, 2024 में कुल संग्रह 1.75 लाख करोड़ रुपये रहा था। पिछले महीने घरेलू लेनदेन से सकल जीएसटी 5.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा वस्तुओं के आयात से प्राप्त राजस्व आठ प्रतिशत बढ़कर 45,390 करोड़ रुपये हो गया। समीक्षाधीन अवधि में जीएसटी विभाग ने 20,458 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। रिफंड राशि को समायोजित करने के बाद सितंबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 3.9 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर अवधि) में जीएसटी संग्रह 9.5 प्रतिशत बढ़कर 10.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। कर विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर में कर संग्रह मासिक आधार पर सुस्त पड़ने के बावजूद आने वाले महीनों में त्योहारों के दौरान कर संग्रह बेहतर हो सकता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में साझेदार प्रतीक जैन ने कहा कि दरों को युक्तिसंगत बनाने की कवायद को देखते हुए जीएसटी परिषद को इस पर बारीकी से गौर करने की जरूरत हो सकती है। हालांकि, त्योहारी मौसम आने से अगले कुछ महीनों में संग्रह बेहतर हो सकता है। डेलॉयट इंडिया में साझेदार एम एस मणि ने कहा कि आने वाले महीनों के लिए जीएसटी राजस्व पर उत्सुकता से नजर रखी जाएगी क्योंकि वे आर्थिक वृद्धि के भी संकेतक हैं और उन्हें जीडीपी आंकड़ों से जोड़कर देखा जा सकता है। सलाहकार फर्म टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज में साझेदार विवेक जालान ने उम्मीद जताई कि मौजूदा स्थिति में जीएसटी परिषद की अगली बैठक में राजस्व वृद्धि पर कुछ दूरदर्शी उपाय देखने को मिलेंगे।


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