आरबीआई ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान, FY26 में 7.6% की उम्मीद
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर नया अनुमान जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ को 7.4% से बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता भी जताई है। आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में यह वृद्धि मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार और घरेलू मांग के चलते संभव होगी। यह रुझान देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान जताया है। यह संकेत देता है कि बाहरी जोखिम और लागत के दबाव के कारण वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। यह जानकारी आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद दी। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया गया है, जबकि दूसरी तिमाही का अनुमान 7% से घटाकर 6.7% किया गया है। इसके पीछे ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव और बढ़ते दबाव को प्रमुख कारण बताया गया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से महंगाई का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, जो पिछली तिमाही के 8.4% से कम है। आरबीआई को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र का निवेश आगे भी बढ़ता रहेगा, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग का स्तर ऊंचा बना हुआ है। गवर्नर ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी ताकि अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा किया जा सके। वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में 4%, दूसरी में 4.4%, तीसरी में 5.2% और चौथी तिमाही में 4.7% रहने की संभावना जताई गई है। 3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले नेट एफडीआई में सुधार हुआ है और भारत ग्रीनफील्ड निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।






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