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 जिन्हें बेकार समझकर पाट दिये, वही तालाब अब बुझा रहे फसलों की प्यास

 -    धमधा में विलुप्त हो चुके तालाबों के पुनर्निर्माण से हो रहा किसानों को फायदा
 -    दर्जनों एकड़ क्षेत्र में धान की फसल की हो रही सिंचाई
 धमधा । धमधा के जिन सात तालाबों को किसानों ने अनुपयोगी समझकर पाट दिया था, उनमें खेती करने लगे थे, लेकिन अब जब उन विलुप्त तालाबों को पुनर्जीवित किया गया, तब जाकर उन तालाबों का महत्व समझ में आ रहा है। धमधा के ये सात तालाब किसानों की फसलों के लिए जीवनदायी साबित हो रहे हैं। इस साल बारिश नहीं होने से धान की फसल संकट में आ गई है। ऐसे में फिर से खोदे गए ये तालाब ही उन फसलों की प्यास बुझा रहे हैं। यह किसानों के लिए अमृत का काम कर रहे हैं।
दुर्ग जिले के ऐतिहासिक नगर धमधा को छह आगर छह कोरी तरिया यानी 126 तालाबों की नगरी के नाम से जाना जाता है। ये तालाब बौद्ध काल से गोंडवाना शासन तक धीरे-धीरे खोदे गए थे। लेकिन समय के साथ लोगों ने इसे बिसार दिया। ट्यूबवेल आने के बाद लोगों ने इन तालाबों से सिंचाई करना बंद कर दिया और ये समय के साथ पटते चले गए। धमधा के 56 से ज्यादा तालाब विलुप्त हो चुके हैं। इनमें से 36 तालाब तो आज भी सरकारी भूमि के रूप में अंकित हैं। धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने इन तालाबों को खोज और उन्हें फिर से खोदने की पहल की, जिसके बाद शासन-प्रशासन व नागरिकों के सहयोग से अब तक सात तालाबों को पुनर्जीवन प्रदान किया जा चुका है। उनकी खुदाई करके उनमें काष्ठस्तंभ की स्थापना भी की गई है, जिसके बाद यह सबके लिए उपयोगी साबित हो रहा है। इस साल किसानों को इसकी सबसे अधिक जरूरत महसूस हुई, जब अक्टूबर महीने में बारिश नहीं होने से उनकी फसल सूखने लगी। किसानों ने फिर से खोदे गए तालाबों में मोटर पंप व डीजल पंप लगाकर पानी खींच रहे हैं और अपने खेतों में सिंचाई कर रहे हैं।
भानपुर स्थित बनफरा तालाब व कुकुरचब्बा तालाब से अशोक साहू, रोहित साहू, रमेशर साहू, रामचंद्र देवांगन ने अपने खेत में सिंचाई की है। इसके साथ ही हाथी बूढ़ान तालाब, तेली डबरी, घोड़ा बूढ़ान तालाब भी अच्छा जल संचय हुआ, जिससे जीव-जन्तु व मवेशियों के लिए पानी मिल रहा है। लोकईया तालाब और चरगोड़िया तालाब में कमल व कुमुदनी खिले हुए हैं, जिसे पूजा के लिए लोग बेचने ले जा रहे हैं। इसके अलावा तितुरघाट के चतुर्भुजी विष्णु कुंड का उपयोग श्रद्धालुओं के साथ मवेशियों के लिए हो रहा है। धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने गोपाल व गोपालीन तालाब में भी पानी भरने के लिए खेतों से निकलने वाले पानी को डायवर्ट किया, जिसके बाद वहां जलभराव हुआ है, जिससे विजय ढीमर और बड़कू साहू के खेतों में धान की फसल के लिए सिंचाई हो रही है। इस तरह सात तालाबों के फिर से बनने से अनेक लोगों को लाभ मिल रहा है।
 30 सरकारी तालाबों के लिए मांगी रिपोर्ट
 धमधा के तीस और तालाब हैं, जो विलुप्त हो चुके हैं। परन्तु सरकारी रिकार्ड में वे तालाब या डबरी के रूप में दर्ज हैं। ये सरकारी तालाब हैं, जिनका उपयोग निस्तारी व सिंचाई के लिए किया जाता था।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसे तालाबों के चिन्हांकन और सीमांकन के लिए तहसीलदार श्री ताराचंद खरे ने रिपोर्ट मंगाई है, उन्होंने इसके लिए राजस्व निरीक्षक को निर्देशित किया है। ऐसे तालाबों को चिन्हांकित कर कब्जा मुक्त करने व फिर से तालाब बनाने की मांग मुख्यमंत्री से की गई है।

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