अब तक 2,68,901.52 मे. टन धान की हुई खरीदी
- धान खरीदी की व्यवस्था से किसान हुए संतुष्ट
- किसानों को 58,163.09 लाख रूपये ऑनलाईन भुगतान
- उपज का वाजिब दाम मिलने से किसान हुए खुश
- धान बेचने के बाद 25932 किसानों ने किया 501.86 हेक्टेयर रकबा समर्पण
- धान के उठाव में आई तेजी
- उपार्जन केन्द्रों से 65765.98 मे. टन धान का उठाव
दुर्ग /राज्य सरकार की सुचारू, पारदर्शी और किसान हितैषी नीति के कारण जिले में धान खरीदी में तेजी आ रही है। धान खरीदी को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार की निर्णायक कदम से धान विक्रय की प्रक्रिया सरल हुई है। जिसके तहत अब दिन-रात कभी भी मोबाईल एप तुंहर टोकन के माध्यम से किसानों को धान बेचने के लिए टोकन मिलने लगा है। किसानों के लिए यह बड़ी सहुलियत है कि उनके लिए तुंहर टोकन एप अब 24 घंटे उपलब्ध है। अब मोबाईल एप से टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नही है। धान बेचने के बाद त्वरित भुगतान का किसानों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सरकार की व्यवस्था से प्रभावित होकर किसान अपनी उपज बेचने टोकन प्राप्त निर्धारित तिथि अनुसार पहुंच रहे हैं। जिले में अब तक 63,749.45 लाख रूपए की लागत से 2,68,901.52 मे. टन धान की खरीदी हो चुकी है। समय पर भुगतान राशि मिलने पर 50718 किसान लाभान्वित हुए हैं। उपार्जन केन्द्रों से धान की उठाव भी तेजी से होने लगी है। जिससे अब दूसरे किसानों को धान बेचने का अवसर मिला है। उठाव हेतु 88,936.60 मे. टन धान का डीओ/टीओ जारी हुआ है। अब तक उपार्जन केन्द्रों से 65,765.60 मे. टन धान का उठाव किया जा चुका है। सरकार की इस पारदर्शी व्यवस्था में किसान भी सहभागी बनते हुए धान बेचने के पश्चात् रकबा समर्पण करने आगे आ रहे हैं। जिससे बिचौलियों को अपनी धान खपाने का अवसर नहीं मिला है। जिले में अब तक धान बेच चुके 25932 लघु कृषकों ने 501.86 हेक्टेयर रकबा समर्पण कर चुके हैं। उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने के लिए पहुंचने वाले किसानों हेतु जिला प्रशासन द्वारा समुचित प्रबंध किया गया है। वर्तमान में उपार्जन केन्द्रों में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था है। इसके तहत केन्द्रों में 38,20,547 बारदाने उपलब्ध है।












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