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  बच्चों में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम पर आधारित राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित

 रायपुर,। बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), विशेषकर बाल मधुमेह, सिकल सेल रोग एवं जन्मजात हृदय रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रायपुर में श्री संजीव कुमार झा (संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना, बहु-विभागीय समन्वय को बढ़ावा देना तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार एवं सुदृढ़ रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों में एनसीडी की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों एवं भावी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, दवाओं की सतत उपलब्धता, उपचार अनुपालन तथा मजबूत रेफरल तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। सिकल सेल रोग प्रबंधन हेतु जशपुर मॉडल को एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
पैनल चर्चाओं में बाल मधुमेह एवं सिकल सेल रोग के समग्र प्रबंधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, सामुदायिक सहयोग तथा सामाजिक कलंक को कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्क्रीनिंग बढ़ाने, उपचार अनुपालन सुधारने तथा सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में AIIMS रायपुर एवं पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) एवं भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में, एकम फाउंडेशन के सहयोग से किया गया।
तकनीकी सत्रों में डॉ. खेमराज सोनवानी (उप संचालक, सिकल सेल), डॉ. वी.आर. भगत (उप संचालक, शिशु स्वास्थ्य)एवं श्री सुबोध धर शर्मा (राज्य सलाहकार, NP-NCD)  सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सलाहकार उपस्थित रहे।
परामर्श में ट्राइबल वेलफेयर विभाग, स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों की सहभागिता से बहु-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ किया गया। सहयोगी संस्थाओं की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन, संगवारी, क्लिंटन फाउंडेशन, NASCO, प्रतिनिधि जुवेनाइल डायबिटीज तथा पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय योगदान दिया।
इस राज्य स्तरीय परामर्श में कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही राज्य के उच्च प्राथमिकता वाले 8 जिलों—रायपुर, कांकेर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़ एवं राजनांदगांव से जिला स्तर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें जिला एनसीडी नोडल अधिकारी, सिकल सेल नोडल अधिकारी तथा एनसीडी सलाहकार/सहायक नोडल अधिकारी शामिल थे। इन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने जिलों के अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर की चुनौतियों एवं संभावित समाधान प्रस्तुत किए।
अंत में प्रतिभागियों ने राज्य में बच्चों हेतु एनसीडी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से कार्ययोजना को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की सहमति व्यक्त की गई। कार्यक्रम को सहयोग करने तथा सफल बनाने के लिए राज्य द्वारा यूनिसेफ की सराहना की गई और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम को करने के लिए विशेष सहयोग के लिए कहा गया।

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