राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत पुलिस कर्मियों की कार्यशाला
दुर्ग/ राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मनोज दानी के निर्देशन एवं जिला नोडल अधिकारी डॉक्टर अर्चना चौहान के मार्गदर्शन में 29 मई 2026 को रक्षित निरीक्षक केंद्र दुर्ग में कार्यशाला आयोजित की गई। कोटपा-2003 का प्रभावी क्रियान्वयन, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध - धारा 4, 18 वर्ष से कम को तंबाकू बेचना अपराध - धारा 6 अ, शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज में तंबाकू बिक्री प्रतिबंधित 6 ब, तंबाकू विज्ञापन पर रोक - धारा 5, तंबाकू उत्पाद बिना विशिष्ट चेतावनी के बेचना प्रतिबंध, कोटपा का पालन कराएं , बच्चों का भविष्य बचाएं, तंबाकू मुक्त समाज बनाएं इस बारे में जानकारी दी गई। जिला नोडल अधिकारी डॉ. अर्चना चौहान के द्वारा कोटपा एक्ट की निगरानी, चालान कार्यवाही व तंबाकू उत्पाद के क्रय/विक्रय पर किस तरीके से नियंत्रण रखा जा सकता है एवं युवाओं को हम तंबाकू के दुष्प्रभाव से किस तरह दूर रखें इस बारे में जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की जिला सलाहकार डॉ. सोनल सिंह के द्वारा कोटपा एक्ट की विभिन्न धाराओं धारा 4 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों में धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। धारा 6 ए में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पाद को बेचने एवं खरीदना प्रतिबंधित है ऐसे ही धारा 5 धारा 7 के विषय में विस्तृत रूप से जानकारी दिया गया और तंबाकू उत्पादों का हानिकारक प्रभावों के बारे में चर्चा की गई। शैक्षणिक संस्थाओं के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। जिला चिकित्सालय में संचालित तंबाकू नशामुक्ति केंद्र जिसमें व्यक्ति तंबाकू के गिरफ्त से मुक्त हो सके के विषय में भी जानकारी दिया गया। तद् उपरांत कार्यशाला में डॉ. विभोर लाल चिकित्सा अधिकारी के द्वारा जिले के पुलिस विभाग से आए हुए अधिकारी एवं कर्मचारियों को सीपीआर और कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन के बारे में जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया गया जिसमें कि आपातकालीन स्थिति में सीपीआर किस प्रकार दिया जाता है। डमी के जरिये आपातकालीन स्थिति में सीपीआर के समस्त क्रमबद्ध उपचार को प्रस्तुत किया गया । जिसके बाद अधिकारी एवं कर्मचारियों से प्रायोगिक प्रशिक्षण करवाया गया जिसमें कि बेहोश व्यक्ति को हिलाकर आवाज दें, सांस चेक करें, छाती के बीच में बार बार तेज दबाएं, सिर पीछे करें, ठुड्डी ऊपर उठाएं, मुंह से 2 बार सांस दे ताकि प्राइमरी उपचार से किसी की जान बचाई जा सके।
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