छोटी उम्र, बड़ा सपना: मछलीपालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल बने पुरुषोत्तम राम मरकाम
-युवा ने बदली तस्वीर: मछलीपालन से लाखों की ओर बढ़ते कदम
धमतरी । कहते हैं कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। जिले के ग्राम केकराखोली निवासी युवा किसान पुरुषोत्तम राम मरकाम ने अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। कम उम्र में ही उन्होंने मछलीपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर न केवल आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने हैं।
पुरुषोत्तम बताते हैं कि वे पिछले तीन वर्षों से मछलीपालन से जुड़े हुए हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने पारंपरिक तरीके से कार्य शुरू किया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिलने से वे निराश हुए बिना नई तकनीकों और आधुनिक पद्धतियों की ओर आगे बढ़े। उन्होंने बड़ौदा आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहां उन्हें वैज्ञानिक तरीके से मछलीपालन, जल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी मिली। इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित मछलीपालन को अपनाकर सफलता की नई कहानी लिखनी शुरू कर दी।
शासन की महत्वाकांक्षी मत्स्य संपदा योजना का लाभ मिलने से उनके कार्य को नई गति मिली। योजना के तहत उन्हें लगभग 17 लाख रुपये की सामग्री प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। वर्तमान में वे पंगेसियस और रूपचंदा जैसी उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन कर रहे हैं। अपनी 80 डिसमिल निजी भूमि पर उन्होंने लगभग 8 लाख रुपये की लागत से आधुनिक टैंक का निर्माण कराया है, जहां वैज्ञानिक पद्धति से मछलियों का पालन किया जा रहा है।पुरुषोत्तम की मेहनत का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। हाल ही में उन्होंने अपने टैंक से 2 क्विंटल मछली निकालकर लगभग 40 हजार रुपये की आय अर्जित की है। वर्तमान में उनके टैंक में लगभग 10 टन मछली तैयार है, जिसे वे आगामी दिनों में बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी मिलने की उम्मीद है।
उनकी इस पहल का सकारात्मक प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। पुरुषोत्तम आज अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के 8 से 10 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। उनके इस कार्य में उनके माता-पिता, पत्नी और बहन का विशेष सहयोग है। पूरा परिवार मिलकर इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। यही कारण है कि उनका यह प्रयास आज एक सफल पारिवारिक उद्यम का रूप ले चुका है।
भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए पुरुषोत्तम बताते हैं कि उनका सपना मछली दाना (फीड) निर्माण इकाई स्थापित करने का है। उनका मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण फीड उपलब्ध होगा, तो क्षेत्र के अन्य मछली पालकों को भी लाभ मिलेगा और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने केकराखोली भ्रमण के दौरान पुरुषोत्तम राम मरकाम के मछलीपालन कार्य का अवलोकन करते हुए कहा कि,पुरुषोत्तम राम मरकाम जैसे युवा जिले के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, नवाचार और शासन की योजनाओं का बेहतर उपयोग कर आत्मनिर्भरता की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत की है। ऐसे प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। जिला प्रशासन युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”
पुरुषोत्तम राम मरकाम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि युवाओं को सही दिशा, तकनीकी प्रशिक्षण और शासन की योजनाओं का सहयोग मिले, तो वे गांव में रहकर भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और प्रोत्साहन से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला।
आज पुरुषोत्तम की कहानी केवल एक युवा किसान की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में उभरती नई संभावनाओं की प्रेरणादायक तस्वीर है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि मेहनत, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से गांव का युवा भी स्वरोजगार अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है






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