शिवाजी महाराज के द्वंद्व, संघर्ष और साहस की कहानी कह गया ‘शौर्य गाथा’
- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में बैठे सैकड़ों दर्शकों ने
अभिषेक बक्षी निर्देशित नाटक को देखते हुए बार- बार बजाईं तालियां
रायपुर। ‘लोगों को लगता है… शिवाजी होना बहुत आसान है, आगे-पीछे भगवा लहराया और बन गए शिवाजी। उन्हें दिखता है सिर्फ रण में तलवार लिए लड़ता हुआ शिवाजी, पर उस शिवाजी का भी एक मन है, जिसे दर्द होता है… तकलीफ़ होती है… यादें सताती हैं। क्या करें वो शिवाजी, छोड़ दे सब कुछ। मैंने ये नहीं किया, तो कोई भी नहीं करेगा। रण के युद्ध जीतने से पहले, मन के युद्ध जीतने पड़ते हैं, बाजी। अपने परममित्र बाजी प्रभु देशपांडे के सामने बोला गया शिवाजी महाराज का यह संवाद दर्शकों को भीतर तक झकझोर देता है।
बात हो रही है हिंदी नाटक ‘शिव शौर्य’ की, जिसका मंचन शनिवार की देर शाम महाराष्ट्र मंडल में रंगप्रेमी दर्शकों से खचाखच भरे संत ज्ञानेश्वर सभागृह में कुमुदिनी वरवंडकर स्मृति रंगमंच पर किया गया। शिवाजी महाराज की केंद्रीय भूमिका में नाटक के लेखक, संगीत संयोजक व निर्देशक अभिषेक विद्याधर बक्षी खूब जमे हैं। ‘शिव शौर्य’ में शिवाजी महाराज के विभिन्न प्रसंगों को कड़ी दर कड़ी मंच पर बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की अहम जिम्मेदारी सूत्रधार दीपक हटवार ने अच्छे से निभाई।
वहीं बाजी प्रभु देशपांडे की प्रभावी भूमिका में चेतन दंडवते असरदार रहे। शिवाजी महाराज के सामने बोले गए उनके डायलॉग ‘मैं आपके साथ इस मुहिम पर केवल इसलिए आया हूं क्योंकि मैं अपने बेटे की नज़रों में में खोई हुई इज़्ज़त और सम्मान वापस पाना चाहता हूँ, लोगों को प्रभावित करता है। उनकी पत्नी देशपांडे बाई के रोल में श्वेता निगम ने कमाल का अभिनय किया है। अफजल खान के क्रूर किरदार में शशि वरवंडकर अपनी भारी आवाज में शिवाजी महाराज के सामने बोले गए डॉयलॉग ‘अभी भी वक़्त है, शिवाजी। सल्तनत के आगे सर झुका दो, माफ़ी मिलेगी… जागीर मिलेगी… ओहदा… इज़्ज़त… सब मिलेगा, पर दर्शकों ने सीटियां... तालियां बजाईं।
कीर्ति हिशीकर (शिवाजी की पत्नी सई बाई), भारती पलसोदकर (जिजाऊ माता), पाटिल (रविंद्र ठेंगडी), यशस्वी दंडवते (दासी केसर बाई) ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया। विनोद राखुंडे, पवन ओगले, पंकज सराफ, अभय भागवतकर, पराग दलाल, अक्षदा मातुरकर, योगेश दंडवते, अनुष्का टेम्बे, प्रार्थना दंडवते, अतुल गद्रे, हेमंत मोहिते, गणेशा जाधव पाटिल, ज्योतिर्मय भोसले, रवि किरण दशपुत्रे ने भी अपनी भूमिकाओं से न्याय किया। मंच सज्जा प्रवीण क्षीरसागर, रूपसज्जा दिनेश धनगर, संगीत संचालन परितोष डोनगांवकर का रहा। नेपथ्य में प्रकाश गुरव व उत्कर्ष हटवार की भूमिका नोट की गई। शिव शौर्य में विशेष सहकार्य वैभव किशोर, लोकेश साहू सहित अन्य उनके साथियों का रहा।











Leave A Comment