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 प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के तहत जैविक दंतेवाड़ा के किसानों को बड़ा सुरक्षा कवच

-खरीफ 2025 में 7 हजार से अधिक किसानों को मिला 14.15 करोड़ रुपये का बीमा लाभ
 दंतेवाड़ा । प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के अंतर्गत कृषि को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दक्षिण बस्तर का जैविक जिला दंतेवाड़ा लगातार नई मिसाल कायम कर रहा है। जैविक एवं पारंपरिक खेती के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। खरीफ 2025 सीजन में जिले के 7,000 से अधिक किसानों को 14 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की बीमा दावा राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुई, जिससे हजारों किसान परिवारों को आर्थिक संबल मिला और योजना के प्रति उनका भरोसा और मजबूत हुआ। अब खरीफ 2026 सीजन के लिए जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन का अभियान तेज गति से चल रहा है। कृषि विभाग ने सभी पात्र किसानों से 31 जुलाई 2026 तक अपनी फसलों का बीमा कराने की अपील की है। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष अल नीनो के आंशिक प्रभाव के कारण अनियमित मानसून और खंड वर्षा की संभावना जताई गई है। ऐसे में समय पर बीमा कराने से किसान संभावित नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
दंतेवाड़ा जिले की कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 11 प्रमुख खरीफ फसलों को बीमा योजना में शामिल किया गया है। इनमें धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली, मूंग, उड़द तथा जिले की पारंपरिक और पोषक मिलेट फसलें कोदो, कुटकी और रागी शामिल हैं। किसान अपने ग्राम की अधिसूचित फसलों की जानकारी संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से प्राप्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को बाधित बोनी, खड़ी फसल, स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं तथा कटाई के बाद 14 दिनों तक होने वाले नुकसान पर भी सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली, कीट एवं रोग जैसी परिस्थितियों में होने वाले नुकसान की भरपाई योजना के माध्यम से की जाती है।
कृषि विभाग ने किसानों को विशेष रूप से सलाह दी है कि यदि प्राकृतिक आपदा या जलभराव से फसल प्रभावित होती है तो 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देना अनिवार्य है। किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 पर जानकारी दे सकते हैं अथवा कृषि विभाग, पटवारी, संबंधित बैंक या बीमा कंपनी को भी सूचना देकर समय पर सर्वे और दावा प्रक्रिया सुनिश्चित करा सकते हैं। ऋणी किसानों (किसान क्रेडिट कार्ड धारकों) का बीमा संबंधित बैंक द्वारा स्वतः किया जाता है, जबकि अऋणी किसान निकटतम बैंक, सीएससीध्चॉइस सेंटर, अधिकृत बीमा एजेंट या राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बी-1, खसरा, पांचशाला तथा बुआई प्रमाण पत्र आवश्यक होंगे। जिला प्रशासन और कृषि विभाग का कहना है कि दंतेवाड़ा जैसे जैविक एवं आदिवासी बहुल जिले में खेती किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा देने के साथ-साथ उनकी आय को स्थिर रखने और कृषि को अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसलिए सभी किसान अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी खरीफ फसलों का बीमा अवश्य कराएं।

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