सुरक्षित बचपन अभियान:विद्यालयों में विशेष विधिक साक्षरता शिविर का हुआ आयोजन
- बालकों के लैंगिक शोषण और लैंगिक दुरूपयोग जघन्य अपराध
राजनांदगांव । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशन तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मागदर्शन में सुरक्षित बचपन अभियान का प्रथम चरण के समापन दिवस 31 अक्टूबर 2026 को राजनांदगांव एवं तहसील स्तर पर स्थित्त विद्यालयों में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के संबंध में जागरूक किए जाने हेतु विशेष विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
सुरक्षित बचपन अभियान के तहत आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कन्हारपुरी, वेसलियन इंग्लिश मीडियम स्कूल, स्टेट स्कूल पूर्व माध्यमिक शाला, शासकीय हाईस्कूल सोमनी में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में न्यायाधीशगणों द्वारा विद्यार्थियों को लैंगिक उत्पीडऩ से पीडि़त को कानूनी संरक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि कोई भी विद्यार्थी लैंगिक अपराध में शामिल होता है तो वह कानून की दृष्टि में जघन्य अपराध है। वर्तमान परिस्थिति में विद्यार्थी अत्यधिक सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं तथा नवीन एआई तकनीक का उपयोग कर सोशल मीडिया के फोटो को परिवर्तित कर देते हैं तथा परिवर्तित फोटो को सोशल मीडिया में अपलोड भी कर देते हैं। जिससे संबंधित फोटो, समाज में पीडि़त पर दुष्प्रभाव डालता है। पीडि़त ऐसी जानकारी को तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन में देना चाहिए। ऐसा कृत्य करने वाले कोई भी व्यक्ति कानून में दोषी पाए जा सकते हैं। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के उपयोग से बचना चाहिये।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती प्रीति नागवंशी द्वारा शासकीय हाईस्कूल सोमनी में ई-कचरा संग्रहण कॉर्नर का शुभारंभ किया गया। न्यायाधीश ने विद्यार्थियों को बताया कि लैंगिक अपराध से पीडि़त बालक-बालिका का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नि:शुल्क विधिक सलाह उपलब्ध कराता है तथा आवश्यक होने पर नि:शुल्क पैनल अधिवक्ता भी पीडि़त को उपलब्ध कराया जाता है। लैंगिक अपराध की जानकारी पीडि़त पक्ष अपने परिवार के नजदीकी सदस्य, जिन पर वह विश्वास करते हैं, उन्हें देना चाहिए तथा लैंगिक अपराध की जानकारी विद्यालय के अध्यापक अथवा अन्य किसी समझदार एवं विश्वासयोग्य व्यक्ति को दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त घटना की जानकारी नजदीकी पुलिस स्टेशन में दी जानी चाहिए। अपराध को छुपाने से अपराधी का बल बढ़ जाता है तथा वह अपराध की पुनरावृत्ति की ओर अग्रसर हो जाता है। विद्यालयों में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती प्रीति नागवंशी व अन्य न्यायाधीश श्री पार्थ दुबे, कुमारी माधुरी मरकाम, श्री शुभग राठौर, श्री यशवंत देवांगन, कुमारी समृद्धि जोशी द्वारा व्यापक स्तर पर विद्यालयीन छात्र-छात्राओं के मध्य पॉक्सो अधिनियम की जानकारी प्रदान करते हुए गुड टच व बैड टच के बीच के अंतर को स्पष्ट कर बच्चों को जागरूक किया गया।












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