केंद्र सरकार राजकोषीय घाटा कम करने के लिए प्रतिबद्धः सीतारमण
तिरुचिरापल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार राजकोषीय घाटा कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और 2030 तक देश का कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 50 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य है। सीतारमण ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार के सालाना बजट में राजकोषीय घाटा कम करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। केंद्र सरकार का कर्ज घटाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी कर्ज प्रबंधन के प्रति भारत के अनुशासित रुख को स्वीकार किया है। उन्होंने देश के कर्ज से जुड़ी चिंताओं पर कहा कि कोविड महामारी के बाद से सभी देशों को कर्ज से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने महंगाई पर नियंत्रण के बारे में कहा कि 2014 से ही मंत्रियों का एक समूह कीमतों को स्थिर रखने के लिए आपूर्ति श्रृंखला के बेहतर प्रबंधन पर काम कर रहा है। उन्होंने चावल के निर्यात पर पाबंदी जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाने के साथ किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने में भी मदद मिली। सीतारमण ने प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के प्रयासों पर कहा कि सरकार इस दिशा में कई कदम उठा रही है। महामारी, आर्थिक सुधार की चुनौतियों, युद्धों और ईंधन एवं कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि इनका बोझ आम जनता पर अधिक न पड़े। उन्होंने राज्यों की वित्तीय स्थिति, खासकर तमिलनाडु के बढ़ते कर्ज पर पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु की चिंताओं पर कहा कि ऐसे मुद्दों पर राज्य विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी टीवीके की तरफ से पिछली द्रमुक सरकार के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ दर्ज मामलों को राज्य का विषय बताया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर उन्होंने कहा कि न्याय पाने के लिए अदालतों का रुख करना या सड़कों पर प्रदर्शन करना, दोनों ही तरीके विभिन्न समूह अपनाते हैं।



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