खीरे की खेती से अश्वनी राजवाड़े बनीं लखपति दीदी, आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ गांव में रोजगार की भी खोली राह
-बिहान योजना से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर ढाई एकड़ में शुरू की खीरे की खेती, अच्छी पैदावार से बढ़ी आमदनी
-बिहार तक पहुंच रही खीरे की उपज, खेत से ही खरीद रहे व्यापारी, गांव के 20 से 25 लोगों को प्रतिदिन मिल रहा रोजगार
-आर्थिक स्थिति मजबूत होने से बच्चों को मिल रही बेहतर शिक्षा, परिवार में बढ़ी खुशहाली और समाज में मिला सम्मान
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रहा है। योजना के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहयोग और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे महिलाएं खेती-किसानी, पशुपालन और विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बगदरी की श्रीमती अश्वनी राजवाड़े इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने बिहान योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर ढाई एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू की और अपनी मेहनत से लखपति दीदी बनने का मुकाम हासिल किया है। आज उनकी उपज बिहार तक पहुंच रही है। साथ ही उनकी खेती से गांव के 20 से 25 लोगों को प्रतिदिन रोजगार भी मिल रहा है।
श्रीमती अश्वनी राजवाड़े दीप्ति महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि पहले खेती-किसानी के लिए पर्याप्त पूंजी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती थी। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे खेती का विस्तार नहीं कर पा रही थीं। बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से ऋण की सुविधा मिली, जिससे उन्होंने खेती को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया। समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ढाई एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू की। उनकी मेहनत और बेहतर फसल प्रबंधन से इस वर्ष खीरे की अच्छी पैदावार हुई है। वर्तमान में फसल की तुड़ाई और बिक्री का कार्य जारी है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। अश्वनी बताती हैं कि समूह से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ खेती में निवेश करने और अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है।
अश्वनी राजवाड़े की खीरे की खेती अब व्यावसायिक स्वरूप ले चुकी है। अच्छी गुणवत्ता और पर्याप्त उत्पादन के कारण व्यापारी स्वयं उनके पास पहुंचकर खीरे की खरीद कर रहे हैं। इससे उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बाजार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और परिवहन एवं विपणन संबंधी परेशानियों से भी राहत मिली है। उनके खेत में उत्पादित खीरा स्थानीय बाजारों के साथ बिहार तक भेजा जा रहा है। अश्वनी बताती हैं कि खीरे की अच्छी पैदावार और बाजार में मांग के कारण उन्हें बेहतर आमदनी मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे आने वाले समय में खेती को और आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।
अश्वनी राजवाड़े की सफलता केवल उनके परिवार की आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी खेती गांव के अन्य परिवारों के लिए भी आजीविका का माध्यम बन रही है। खीरे की खेती में फसल की देखरेख, तुड़ाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए प्रतिदिन लगभग 20 से 25 स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे ग्रामीणों को गांव में ही काम करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। अश्वनी बताती हैं कि अपनी मेहनत से अच्छी आमदनी अर्जित करने के साथ गांव के अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना उनके लिए विशेष संतोष की बात है। बिहान योजना से मिले सहयोग ने उन्हें इस योग्य बनाया है कि वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ अन्य परिवारों की आजीविका में भी योगदान दे रही हैं।
खीरे की खेती से बढ़ी आमदनी ने अश्वनी राजवाड़े के परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उनके पति भी खेती-किसानी से जुड़े हैं और दोनों मिलकर कृषि कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। पहले सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब खेती से अच्छी आमदनी होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है। अश्वनी अपने दोनों बच्चों को अच्छे स्कूल में शिक्षा दिला पा रही हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता से परिवार में उनकी निर्णय लेने की भूमिका मजबूत हुई है और समाज में भी उनका सम्मान बढ़ा है। वे बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि स्वयं की क्षमता पर भरोसा करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली।
श्रीमती अश्वनी राजवाड़े की सफलता यह दर्शाती है कि सही अवसर, आर्थिक सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं कृषि क्षेत्र में भी उद्यमिता की नई मिसाल स्थापित कर सकती हैं। महिला स्व-सहायता समूह से मिले डेढ़ लाख रुपये के ऋण को उन्होंने आय बढ़ाने के अवसर में बदला और आज लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियां अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
अश्वनी राजवाड़े ने अपनी इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बिहान योजना ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। पहले खेती के लिए पूंजी जुटाना कठिन था, लेकिन समूह से मिले ऋण ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज वे खीरे की खेती से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रही हैं, अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उनकी यह सफलता महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की प्रेरक कहानी बन गई है।


.jpg)









.jpg)
Leave A Comment