आज 26 के होगे मोर छत्तीसगढ़..
लेखक-अंशुमान शर्मा
आज 26 के होगे मोर छत्तीसगढ़,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
नदिया म पानी बने रहय,
जंगल म रूख-राई बचे रहय,
खेत म धान के बाली लहराय,
बखरी म साग-भाजी उगते रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
भले शहर-शहर म मॉल खुलय,
किसिम-किसिम के ब्रांड मिलय,
अउ घर बइठे सब जिनिस मिल जाय,
मगर दुआरी के दुकान घलो खुले रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
गाँव-गाँव म मोबाइल के टावर लगय,
हर घर म सोलर के पावर रहय,
भले हर हाथ म मोबाइल दिखय,
मगर फुगड़ी-बिल्लस के खेल बचे रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
आज 26 के होगे मोर छत्तीसगढ़,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
हमर गुड़ी के गोठ बचे रहय,
हमर पुरखा के चिन्हारी बचे रहय,
छत्तीसगढ़ के माटी के महक बचे रहय,
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया बचे रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
-अंश
छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के सब्बो झन ला गाड़ा-गाड़ा बधाई, जोहार









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