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 सुरक्षित दवाइयों के अनुप्रयोग को  बढ़ावा देने में फार्मेकोविजिलेंस महत्वपूर्ण

 रायपुर। आयुष में प्रयोग की जाने वाली औषधियों पर फार्मेकोविजिलेंस संबंधी जागरूकता के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें फार्मेकोविजिलेंस को सुरक्षित और सटीक दवाइयों के उपयोग को बढ़ावा देने और ड्रग मॉलीक्यूल के डेटा को तैयार करने में महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने आयुष को साक्ष्य आधारित चिकित्सा प्रणाली बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि आयुष को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने आयुष में फार्मेकोविजिलेंस को बढ़ावा देने और एडीआर रिपोर्टिंग पर बल दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. रचना पालीवाल, सहायक ड्रग कंट्रोलर, सीडीएससीओ, दिल्ली ने मैजिक रेमिडिज एक्ट और इसे लागू करने में फार्मेकोविजिलेंस की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनका कहना था कि आयुष प्रणाली के बढ़ते अनुप्रयोग से फार्मेकोविजिलेंस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसे में नियमित रूप से आयुष दवाइयों की रिपोर्टिंग की जरूरत है।
आयोजन सचिव डॉ. आशुतोष त्रिपाठी ने भारत में फार्मेकोविजिलेंस की पृष्ठभूमि और आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फार्मेकोविजिलेंस के माध्यम से दवाइयों की मात्रा और शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने गर्भावस्था और स्तनपान की अवस्था में प्रतिबंधित दवाइयों के उपयोग को रोकने के उपायों पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम में आयुष विभाग के डॉ. सुनील राय, डॉ. अखिलनाथ परिदा, डॉ. लक्ष्मण कुमार और डॉ. विक्रम पई ने भी भाग लिया।

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