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अतीत की धरोहर ही नहीं भविष्य की संभावना भी है सिरपुर, क्योंकि यहां प्रेम मौन और इतिहास है मुखर

-डॉ. नीरज गजेंद्र
सिरपुर, एक प्राचीन नगर ही नहीं, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में भारत की उस सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है, जिसने सदियों पहले धर्म, ज्ञान, प्रेम व सहिष्णुता को एक साथ साधा। आज भी यहां छठवीं शताब्दी और उससे भी पूर्व के पुरातात्विक अवशेष उसी गरिमा के साथ मौजूद हैं, जैसे वे समय की धारा को थामे खड़े हों। यही कारण है कि सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में संरक्षित करने के प्रयास तेज हो गए हैं। यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल करने की दिशा में गंभीर पहल चल रही है।
अब तक हुई खुदाइयों से जो तथ्य सामने आए हैं, वे सिरपुर के महत्व को और गहराई देते हैं। यहां ऐसा शिवलिंग मिला है, जिसे काशी विश्वनाथ में स्थापित प्राचीन शिवलिंग के समतुल्य माना जा रहा है। दो हजार वर्ष पुराने, पौरुष पत्थर से निर्मित इस विशाल शिवलिंग की गोलाई लगभग ढाई फीट है। पुरातत्व विभाग के अनुसार यह छत्तीसगढ़ में अब तक मिला सबसे प्राचीन और विशाल शिवलिंग है। यह खोज सिद्ध करती है कि सिरपुर शैव परंपरा का अत्यंत प्राचीन केंद्र रहा है।
सिरपुर की विशेषता शैव धर्म तक सीमित नहीं रही। यहां शैव, वैष्णव, जैन और बौद्ध चारों परंपराओं के अनुयायियों का समन्वय दिखाई देता है। बौद्ध विहारों की लंबी शृंखला यह संकेत देती है कि यह क्षेत्र बौद्ध शिक्षा और साधना का भी बड़ा केंद्र था। यह भी कहा जाता है कि भगवान बुद्ध स्वयं यहां आए थे, हालांकि इसके प्रत्यक्ष प्रमाण अभी नहीं मिले हैं, लेकिन बौद्ध स्थापत्य इस दावे को मजबूती जरूर देता है। यही बहुलतावादी सांस्कृतिक चरित्र सिरपुर को वैश्विक महत्व प्रदान करता है।
सिरपुर की पुरा विशेषताओं का केंद्र है लक्ष्मण मंदिर। यह एक मंदिर या स्थापत्य स्मारक नहीं, अपितु अगाध प्रेम और मौन समर्पण का अद्वितीय प्रतीक है। ईसवी 635–640 के बीच दक्षिण कौशल के राजा हर्षगुप्त की स्मृति में उनकी पत्नी, मगध नरेश सूर्यवर्मा की पुत्री रानी वासटादेवी ने इस मंदिर का निर्माण कराया। यह तथ्य खुदाई में प्राप्त शिलालेखों से प्रमाणित हुआ है। इस दृष्टि से लक्ष्मण मंदिर, आगरा के ताजमहल से लगभग 1100 वर्ष अधिक प्राचीन प्रेम-स्मारक सिद्ध होता है।
चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में श्रीपुर (आज का सिरपुर) और रानी वासटादेवी का उल्लेख किया है। लक्ष्मण मंदिर में अंकित विष्णु के दशावतार, शैव और वैष्णव संस्कृतियों के संगम को दर्शाते हैं। मिट्टी से बनी, पकी हुई ईंटों से निर्मित यह मंदिर दक्षिण कौशल की शैव परंपरा और मगध की वैष्णव संस्कृति के अद्भुत मिलन का गवाह है।
इतिहास की आपदाओं ने भी लक्ष्मण मंदिर की गरिमा को कम नहीं किया। 12वीं शताब्दी के भीषण भूकंप में पूरा श्रीपुर ध्वस्त हो गया। 14वीं–15वीं शताब्दी में महानदी की विकराल बाढ़ ने नगर को उजाड़ दिया, लेकिन इसके बावजूद लक्ष्मण मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। इसके समीप स्थित कुछ मंदिर पूरी तरह नष्ट हो गए और तिवरदेव विहार में दरारें पड़ गईं, फिर भी लक्ष्मण मंदिर का सुरक्षित रहना इसके स्थापत्य कौशल और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है।
साहित्यकारों ने ताजमहल को पुरुष के प्रेम की मुखर अभिव्यक्ति और लक्ष्मण मंदिर को नारी के मौन प्रेम और समर्पण का प्रतीक बताया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने ताजमहल को समय के गाल पर जमा आंसू कहा था, तो लक्ष्मण मंदिर को समय के भाल पर चमकती बिंदी कहना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। यूरोपीय साहित्यकार एडविन एराल्ड ने भी इसे लाल ईंटों से बना नारी के मौन प्रेम का साक्षी कहा है।
आज जब नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र को वैश्विक मानचित्र पर पुनः प्रतिष्ठित किया गया है, तब यह प्रमाणित हो चुका है कि सिरपुर नालंदा से भी प्राचीन है। ऐसे में सिरपुर को भी उसी दृष्टि और गंभीरता से विकसित किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार ने हाल के वर्षों में सिरपुर महोत्सव, पर्यटन अधोसंरचना, सड़क और सुविधाओं के विस्तार जैसे प्रयास शुरू किए हैं, जो स्वागतयोग्य हैं। लेकिन अभी और बहुत कुछ किया जाना शेष है टीलों की खुदाई, व्यापक शोध, अंतरराष्ट्रीय प्रचार, संरक्षित पर्यटन विकास और स्थानीय समुदाय की सहभागिता के साथ सिरपुर को नए स्वरूप में देखा जा सकता है।
सिरपुर को विश्व पर्यटन और वैश्विक धरोहर बनाने के लिए आवश्यक है कि इसे उत्सवों तक सीमित न रखा जाए, इसे एक जीवंत ऐतिहासिक-सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। यदि योजनाबद्ध संरक्षण और संवेदनशील विकास किया जाए, तो सिरपुर छत्तीसगढ़ ही नहीं भारत की वैश्विक पहचान का सशक्त आधार बन सकता है। सिरपुर अतीत की धरोहर ही नहीं, भविष्य की संभावना है। जहां इतिहास बोलता है, प्रेम मौन रहता है और संस्कृति समय को चुनौती देती है।
-लेखक, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक और चिंतनशील लेखक हैं।

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