माता आई द्वार
स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
शारदीय नवरात्रि में, माता आई द्वार ।
लेकर माला हाथ में, भक्त खड़े तैयार ।।
रौनक नगरों की बढ़ी, सजा मात दरबार ।
शक्ति भक्ति के रंग में, रंगे हुए नर - नार ।।
मारें कन्या कोख में, करते कन्या-भोज ।
गली - गली में घूमकर, करते कन्या-खोज ।।
माता-पूजन जो करे , संयम रखे विचार ।
क्रोध-बैर से दूर हो, संयत हो व्यवहार ।।
दुर्गा माता कर दया , रखना मेरी लाज ।
श्रद्धा पूरित भाव से, पूर्ण करूँ सब काज ।।
प्रथम दिवस नवरात्रि का, पावन अवसर आज ।
शैलसुता को कर नमन, शुभारंभ हो काज ।।










Leave A Comment