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पुलिस ने फर्जी सिम के खिलाफ कार्रवाई तेज की

 पटना। दूरसंचार विभाग के निर्देश पर बिहार और झारखंड में सिम कार्ड के 2,387 विक्रय केन्द्रों को काली सूची में डाले जाने के बाद बिहार में पुलिस ने अनैतिक और अवैध तरीके से सिम कार्ड की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। दूरसंचार विभाग ने पिछले एक सप्ताह में बिहार और झारखंड में 5,000 से अधिक मोबाइल फोन नंबरों को भी निष्क्रिय किया है क्योंकि अधिकांश सिम कार्ड कथित रूप से अवैध तरीके से खरीदे गए थे। दूरसंचार विभाग के विशेष महानिदेशक (लाइसेंस्ड सर्विस एरिया-एलएसए-बिहार) द्वारा गुरुवार को जारी एक बयान के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में दोनों राज्यों में 5,000 से ज्यादा मोबाइल नंबर निष्क्रिय कर दिए गए हैं क्योंकि अधिकांश सिम कार्ड अवैध, अनैतिक तरीकों से खरीदे गए थे। इसके अलावा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा पिछले एक सप्ताह में सिम कार्ड के 2,387 प्वाइंट ऑफ सेल्स (पीओएस) को काली सूची में डाल दिया है क्योंकि वे सिम कार्ड जारी करते समय अनैतिक और अवैध कार्यों में शामिल पाए गए थे। दूरसंचार सेवा प्रदाता फर्जी पीओएस के साथ-साथ ग्राहकों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर रहे हैं।
 झारखंड भी एलएसए-बिहार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
 बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के अपर महानिदेशक नय्यर हसनैन खान ने  बताया, ‘‘दूरसंचार विभाग की नवीनतम कार्रवाई रिपोर्ट का ईओयू द्वारा विश्लेषण किया जा रहा है ताकि आगे कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई।'' बिहार पुलिस ने पहले ही सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक को अपने अधिकार क्षेत्र के खुदरा डीलरों और दूरसंचार कंपनियों द्वारा अनिवार्य सिम कार्ड पंजीकरण नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से प्राप्त सिम कार्ड के उपयोग की जांच के लिए पुलिस कार्रवाई तेज कर दी गई है। उनको (पुलिस अधीक्षक) नियमित रूप से अपने संबंधित जिलों में सिम कार्ड खरीदने के लिए उपयोग किए जाने वाले दस्तावेजों की निगरानी और निरीक्षण करने के लिए कहा गया है। नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी।'' इससे पहले दूरसंचार विभाग ने अप्रैल महीने में बिहार और झारखंड में 2.25 लाख से अधिक मोबाइल फोन नंबरों को निष्क्रिय कर दिया था क्योंकि अधिकांश सिम कार्ड कथित रूप से जाली दस्तावेजों के माध्यम से खरीदे गए थे। इसके अलावा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने अप्रैल महीने में 517 पीओएस को काली सूची में डाल दिया जो सिम कार्ड जारी करते समय अनैतिक और अवैध कार्यों में शामिल पाए गए थे। प्राप्त नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, पटना और गया सहित बिहार के कई जिलों और झारखंड में भी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा संबंधित पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। ईओयू और पटना और गया की जिला पुलिस दूरसंचार विभाग के रिपोर्ट का विश्लेषण कर रही है।
 साइबर खतरे पर अंकुश लगाने के लिए पूरे देश में 87 करोड़ से अधिक सिम ग्राहकों के चेहरे का विश्लेषण किया गया है।

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