एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने नए नौसेना प्रमुख का पदभार संभाला
नयी दिल्ली. एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने तेजी से बदलते क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा परिदृश्य के बीच रविवार को भारत के नए नौसेना प्रमुख का पदभार संभाला। एडमिरल स्वामीनाथन ने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लिया, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। एडमिरल स्वामीनाथन इससे पहले पश्चिमी नौसैन्य कमान के 'फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' के रूप में कार्यरत थे। नए नौसेना प्रमुख ने पत्रकारों के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण को ''चुनौतीपूर्ण, जटिल और अप्रत्याशित'' बताया तथा कहा कि उच्चतम अभियानगत तत्परता बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''भारतीय नौसेना देश के हितों की रक्षा के लिए हर समय सतर्क है और वह ऐसे क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में सक्रिय रूप से तैनात है, जो लगातार चुनौतीपूर्ण, जटिल, अप्रत्याशित एवं अनिश्चित बना हुआ है।'' एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, ''मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होगी कि भारतीय नौसेना उच्चतम स्तर की अभियानगत तत्परता और युद्धक क्षमता बनाए रखे, ताकि वह देश के सुरक्षा और आर्थिक हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।'' उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना क्षमता-वृद्धि और आधुनिकीकरण की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
नौसेना प्रमुख ने कहा, ''मेरा प्रयास होगा कि नौसेना की प्रगति की गति को बनाए रखा जाए, जारी सभी परियोजनाओं को सुदृढ़ किया जाए, जहां आवश्यकता हो वहां उन्हें और विस्तार दिया जाए तथा अत्याधुनिक व उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल करके हमारी अभियानगत क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाया जाए।'' उन्होंने कहा, ''मैं अपने जीवन का हर एक दिन नौसेना को और अधिक बेहतर, मजबूत, सक्षम तथा प्रभावशाली बनाने के लिए समर्पित करूंगा, ताकि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय विकास और देश की आर्थिक समृद्धि के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।'' एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना एकीकृत सैन्य कमान, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की भी सराहना करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे ''उत्कृष्ट'' सैन्य पेशेवरों में से एक बताया। स्वामीनाथन एक जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे और वह संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ हैं। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला, ज्वाइंट सर्विसेस कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रीवेनहम, ब्रिटेन, कॉलेज ऑफ नेवल वारफेयर, करांजा और यूएस वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट के पूर्व छात्र हैं। परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित एडमिरल स्वामीनाथन ने अपने नौसैनिक करियर में अभियानों, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने मिसाइल पोत आईएनएस विद्युत और आईएनएस विनाश, मिसाइल कार्वेट आईएनएस कुलिश, दिशा निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मैसूरु तथा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली। रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैन्य कमान मुख्यालय में 'चीफ स्टाफ ऑफिसर' (प्रशिक्षण) के रूप में सेवा दी। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन भारतीय नौसेना सुरक्षा दल की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों में शामिल रहे। यह दल नौसेना की सभी शाखाओं में अभियान सुरक्षा की निगरानी करता है। पश्चिमी नौसैन्य कमान का नेतृत्व संभालने से पहले वह उप नौसेना प्रमुख के पद पर भी रहे।
उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बीएससी, कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से दूरसंचार में एमएससी, तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में एमए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से सामरिक अध्ययन में एमफिल और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है।


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