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सिंगल स्क्रीन से पहचान बना जयपुर का 'राजमंदिर' मना रहा 'गोल्डन जुबली'

जयपुर। ओटीटी के दौर में सिनेमाघरों की चमक भले ही फीकी पड़ गई हो, लेकिन जयपुर का प्रतिष्ठित राजमंदिर अपनी शाही शैली और अनोखे माहौल के साथ आज भी सिने प्रेमियों का दिल जीत रहा है। एक जून को राजमंदिर के 50 साल पूरे होने पर सिने प्रेमियों को पांच फिल्में मुफ्त दिखाई जाएंगी। राजमंदिर सिनेमा के संचालकों ने बताया कि गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के तहत राजमंदिर में उन फिल्मों को दिखाया जाएगा, जिन्होंने सिनेमा प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई है। इन फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'राम तेरी गंगा मैली', 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' और 'चुपके-चुपके' शामिल हैं। फिल्मों का चयन परिवारों को ध्यान में रखकर किया गया है। दर्शकों को टिकट 'बुकमायशो' और राजमंदिर के बॉक्स ऑफिस विंडो से बुक करनी होगी। राजमंदिर के वित्त प्रबंधक किशोर काला ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि राजमंदिर सिनेमाघर ने मनोरंजन उद्योग के हर उतार चढ़ाव को देखा और झेला है। हर दौर से गुजरा राजमंदिर अपनी खास पहचान की बदौलत आज गुलाबी नगर के आकर्षणों में शुमार है।" अभिनेता राजकपूर, जितेन्द्र, अमिताभ बच्चन हो या धर्मेंद्र से लेकर सनी देओल, रणबीर कपूर, राजकुमार राव, विद्या बालन, विक्की कौशल, जाह्नवी कपूर तक, सभी ने राजमंदिर को भरपूर प्यार दिया है। जो आगंतुक डायरी में लिखी उनकी टिप्पणी से झलकता है। पूर्व राजमाता गायत्री देवी से लेकर वर्तमान में उपमुख्यंत्री दिया कुमारी भी राजमंदिर की मुरीद रही हैं। जयपुर की व्यस्ततम और विख्यात मिर्जा इस्माइल रोड (एमआईरोड) के पांच बत्ती चौराहे के पास स्थित राजमंदिर में पहली फिल्म 'चरस' लगी, जो 101 दिन तक चली। वित्त प्रबंधक किशोर ने बताया कि राजमंदिर में "हम आपके हैं कौन" फिल्म 525 दिन तक चली थी। उन्होंने कहा, राजमंदिर एक पैलेस सिनेमा है। राजमंदिर में प्रवेश करते ही महल जैसा महसूस होता है। इसको चारों तरफ चाप की लकड़ी से सजाया गया है। इसमें जगह-जगह कांच का काम हुआ है। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि यह दो तरह की रोशनी से सुसज्जित है। जब दर्शक फिल्म देखने के लिए अंदर आते हैं तो उन्हें सफेद रंग देखने को मिलता है। मध्यांतर में जब दर्शक बाहर आते हैं तो नीली रोशनी से उनका स्वागत होता है। वित्त प्रबंधक ने कहा, "राजमंदिर को काफी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक देखने आते हैं। जो भी जयपुर में घूमने आता है वह इस सिनेमाघर को जरूर देखने आता है। अब तो यह उनके टूर पैकेज में शामिल हो गया है।" किशोर का दावा है कि इसके परदे का आकार 73 गुणा 35 है, जोकि देश में सबसे बड़ा है और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सिनेमाघर है। इसमें एक समय में 1,186 लोग बैठकर फिल्म का आनंद ले सकते थे। अब इसे नए स्वरूप में लाने पर सीटों की संख्या 862 कर दी। राजमंदिर के कार्यालय प्रभारी अंकुर खंडेलवाल ने बताया कि इसके मालिकों ने कभी इसे कमाई का जरिया नहीं समझा। इस सिनेमाघर से जयपुरवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और यह अपने आप में सबसे अलग है इसलिए इसका विशेष रखरखाव किया जा रहा है ताकि यह पर्यटनस्थल हमेशा बना रहे। संचालकों ने बताया कि शहर के पर्यटनस्थल के रूप में भी प्रसिद्ध राजमंदिर का उद्घाटन एक जून 1976 को हुआ था। यह सिनेमाघर जयपुर के प्रतिष्ठित जौहरी राजमल सुराणा के पुत्र कुशलचंद सुराणा, विमलचंद सुराणा और कमलचंद सुराणा का है जिन्होंने अपने जवाहरात के व्यवसाय के अनुरुप ही इस सिनेमाघर की श्रेणियों का नाम डायमंड, एमरल्ड, रूबी, सफायर और पर्ल रखा। सीनियर प्रोजेक्शन हैड 84 वर्षीय कैलाश चंद शर्मा की भी राजमंदिर के साथ गोल्डन जुबली होगी। वे 50 साल से भी अधिक समय से यहां काम कर रहे हैं। कैलाश ने बताया कि जब वे 35 वर्ष के थे, तब यहां आए थे, लेकिन अब तक थिएटर में बैठकर पूरी फिल्म नहीं देखी। कैलाश ने कहा कि उन्होंने 50 साल में सैकड़ों फिल्में चलाई। एक भी फिल्म का प्रिंट खराब नहीं होने दिया। एक बार अभिनेता राज कपूर साहब यहां अपनी फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' देखने आए थे। देखने के बाद उन्होंने चीफ टेक्निशियन को बुलाया। मैं डरते हुए गया कि कोई गड़बड़ तो नहीं हो गई। तब उन्होंने पूछा कि इस फिल्म का प्रिंट अब तक कितनी बार बदला। मैंने कहा कि सर अभी तक एक बार भी नहीं बदला दो हफ्ते से चला रहा हूं। राजकपूर साहब हो यह सुनकर ताज्जुब हुआ तब उन्होंने कहा मैं मुंबई जाउंगा तो तुम्हारे लिए इनाम भेजूंगा। हालांकि इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। फिल्म वितरक राज बंसल का कहना है कि देश में सिंगल स्क्रीन में राजमंदिर पहले स्थान पर है। निश्चित रूप से राजमंदिर राजस्थान की शान है। हमारी यहां 50 से ज्यादा फिल्में चली हैं। फिल्म वितरक संजय छेतर ने कहा, " राजमंदिर देश का नंबर एक सिनेमाघर है, जो कि अपनी स्थापत्य कला को बनाए हुए हैं। हर फिल्म वितरक चाहता है कि उसकी यहां पर फिल्म लगे। मैं पिछले बीस साल से राजमंदिर से जुड़ा हुआ हूं।

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