आयुष मंत्रालय और भाषिणी डिवीजन के बीच समझौता, 22 भाषाओं में मिलेंगी डिजिटल सेवाएं
नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (डीआईबीडी) के बीच गुरुवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग का उद्देश्य एआई-संचालित भाषा प्रौद्योगिकी के जरिए आयुष सेवाओं और ज्ञान प्रणालियों को कई भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाना है। “भाषिणी राजयम – एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम” के तहत आयुष मंत्रालय के डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में भाषिणी प्लेटफॉर्म को एकीकृत किया जाएगा। इस पहल के जरिए आयुष ग्रिड के अंतर्गत विकसित पोर्टल, एप्लिकेशन और एआई-आधारित समाधान संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना है।
आयुष मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, औषधि प्रशासन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में आयुष ग्रिड पहल के माध्यम से कार्य कर रहा है। समझौते के तहत भाषिणी की अनुवाद एपीआई, वाक् और ध्वनि तकनीकों को आयुष ग्रिड पोर्टल, एप्लिकेशन और एआई टूल्स में जोड़ा जाएगा, जिससे देशभर में डिजिटल पहुंच और नागरिक सहभागिता मजबूत होगी।
इस सहयोग के तहत आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी से जुड़ी डोमेन-विशिष्ट बहुभाषी शब्दावली विकसित की जाएगी। साथ ही आयुष भाषा डेटासेट को मजबूत करने और भविष्य के लिए तैयार एआई मॉडल विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
समझौता ज्ञापन पर आयुष मंत्रालय के निदेशक डॉ. सुबोध कुमार और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि आयुष प्रणालियों में भारत की सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत समाहित है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय भाषा में इस ज्ञान को उपलब्ध कराना समावेशी स्वास्थ्य सेवा के लिए आवश्यक है।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने कहा कि बहुभाषी एआई समाधान जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेंगे। उन्होंने डॉक्टर-मरीज संवाद प्रणाली और एआई आधारित प्रिस्क्रिप्शन जनरेशन सिस्टम को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में परिवर्तनकारी पहल बताया।
बैठक के दौरान डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने कई नागरिक-केंद्रित एआई समाधानों का प्रदर्शन भी किया। इनमें बहुभाषी डॉक्टर-मरीज संवाद प्रणाली, तत्क्षण मीटिंग ट्रांसक्रिप्शन, आवाज आधारित सीवी निर्माण और प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण से जुड़े उपकरण शामिल थे। इसके अलावा मानकीकृत आयुष शब्दावलियों के लिए नमस्ते पोर्टल का उपयोग करने पर भी चर्चा हुई।
यह सहयोग आयुष मंत्रालय की एक समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित डिजिटल आयुष इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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