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अमेरिका से चीन को भेजा गया 'गोप्रो कैमरा' लश्कर आतंकवादियों के हाथ कैसे लगा, एनआईए कर रही जांच

पहलगाम (जम्मू-कश्मीर).  राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के संबंध में विस्तृत आरोपपत्र दाखिल करने के बावजूद, जांचकर्ता उस वैश्विक आपूर्ति शृंखला का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि चीन को भेजा गया अमेरिका निर्मित 'गोप्रो कैमरा' आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हाथों में कैसे पहुंचा। वरिष्ठ अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले साल जुलाई में दाचीगाम के जंगलों में मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों से बरामद उच्च तकनीक वाले कैमरे ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों का समर्थन करने के लिए साजो-सामान उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की जांच की एक महत्वपूर्ण नयी दिशा खोल दी है। जम्मू-कश्मीर में आतंकी समूह दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध में बढ़त हासिल करने के मद्देनजर हमलों को रिकॉर्ड करने के लिए कैमरों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि इस विशिष्ट आपूर्ति शृंखला का पता लगाने से उन भूमिगत नेटवर्क की मिलीभगत का खुलासा हो सकता है, जो भारत विरोधी संगठनों को सीमाओं के पार धन, साजो-सामान और सामरिक उपकरण पहुंचाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, उपकरण के स्रोत का पता लगाने के लिए एनआईए ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी निर्माता 'गोप्रो इंक' से संपर्क किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैमरा कहां बेचा गया था। अपने औपचारिक जवाब में, अमेरिकी कंपनी ने बताया कि यह उपकरण मूल रूप से चीन में एक अधिकृत वाणिज्यिक वितरक को भेजा गया था। घटनाक्रम से परिचित अधिकारियों ने बताया कि जांच अब इस बात पर केंद्रित हो गई है कि चीनी वितरक से प्राप्त कैमरा लश्कर-ए-तैयबा के आकाओं के हाथों में कैसे पहुंचा, और इस बात की प्रबल संभावना है कि ये कैमरे पाकिस्तानी सेना द्वारा खरीदे गए हों और बाद में आतंकी संगठनों को पहुंचाए गए हों। भारत की चीन के साथ कोई पारस्परिक कानूनी सहायता संधि नहीं है और ऐसे मामले राजनयिक माध्यमों से उठाए जाते हैं। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, ''आरोपपत्र में पहलगाम हमले के तात्कालिक परिचालन विवरण स्थापित किए गए हैं, लेकिन व्यापक जांच अब भी जारी है।'' उन्होंने कहा, ''हम खरीद माध्यमों की सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चीन से आयातित एक व्यावसायिक उपकरण जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तक कैसे पहुंचाया गया।'' पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पर्यटकों सहित 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान-नियंत्रित क्षेत्रों में स्थित आतंकी संगठनों को निशाना बनाया गया, जिनमें प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य ठिकाने भी शामिल थे।

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