पूर्वोत्तर बनेगा व्यापार, पर्यटन और तकनीकी नवाचार का हब: अमित शाह
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में उत्तरपूर्वी परिषद (एनईसी) की 73वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति, विकास और संपर्क व्यवस्था के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि 12 से अधिक शांति समझौतों, बेहतर कानून-व्यवस्था और रेल, सड़क तथा हवाई संपर्क के विस्तार ने न केवल भौगोलिक दूरी कम की है, बल्कि दिल्ली और पूर्वोत्तर के बीच दिलों की दूरी भी मिटाई है।
बैठक में केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मेघालय के राज्यपाल सी.एच. विजय शंकर, मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री सुकांत मजुमदार, गृह सचिव गोविंद मोहन और मंत्रालय के सचिव संजय जाजू सहित पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री मौजूद रहे। अमित शाह ने कहा कि ‘Act East’, ‘Act First’ और ‘Act Fast’ की नीति के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी का ‘पूर्वोदय’ का लक्ष्य साकार हो रहा है। जो क्षेत्र कभी विवादों के लिए जाना जाता था, वह आज अवसरों और निवेश का केंद्र बन चुका है।
गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 12 से अधिक शांति समझौतों के जरिए पूर्वोत्तर के लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान किया गया और 10,800 से अधिक युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि उग्रवाद में उल्लेखनीय कमी आई है और नागरिक हताहतों की संख्या में 86% गिरावट दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप विकास और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।
अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर के विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने के लिए गठित हाई लेवल टास्क फोर्स की रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी राज्यों से आग्रह किया कि रिपोर्ट की सिफारिशों का 100% क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और भविष्य की विकास प्राथमिकताओं को इसी आधार पर तय किया जाए।
गृह मंत्री ने कहा कि सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सभी मुख्यमंत्री और राज्यपाल इसकी नियमित मासिक समीक्षा करें, ताकि निवेशकों के लिए पूर्वोत्तर सबसे आकर्षक गंतव्य बन सके। उन्होंने बताया कि राइजिंग नॉर्थईस्ट निवेश शिखर सम्मेलन और अन्य पहलों के माध्यम से क्षेत्र में बड़े निवेश आ रहे हैं। असम में 27 हजार करोड़ रुपए के सेमीकंडक्टर संयंत्र सहित कई परियोजनाएं पूरे क्षेत्र के औद्योगिक विकास को गति दे रही हैं।
अमित शाह ने कहा कि सबरूम लैंड पोर्ट तथा मेघालय और मिजोरम में स्थापित कस्टम्स केंद्रों के माध्यम से पूर्वोत्तर दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक देशों के साथ व्यापार का प्रमुख केंद्र बन सकता है। उन्होंने गुवाहाटी, इंफाल और अगरतला को मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों को मछली, अंडा और दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से उच्च दुग्ध उत्पादक पशुओं की आपूर्ति और मजबूत सहकारी नेटवर्क विकसित किया जाएगा। अगले वित्तीय वर्ष से हर वर्ष 50,000 से अधिक दुग्ध पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि अगरवुड, सुगंधित तेल, वेलनेस, कॉस्मेटिक और बांस आधारित उद्योगों में पूर्वोत्तर को वैश्विक उत्पादन एवं निर्यात केंद्र बनाने की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने प्रत्येक राज्य में जीआई टैग उत्पादों के लिए समर्पित टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया। साथ ही ऑर्गेनिक मिशन, हेल्थ टूरिज्म और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ जैसी योजनाओं को गति देने पर जोर दिया।
अमित शाह ने कहा कि नारकोटिक्स की तस्करी और खपत को जड़ से समाप्त करने के लिए भारत सरकार ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है। उन्होंने सभी राज्यों से ‘नशामुक्त पूर्वोत्तर’ अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का आग्रह किया। साथ ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, समयबद्ध न्याय और आपराधिक न्याय प्रणाली में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया।
गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी डिजिटल तकनीकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल अवसंरचना को मजबूत कर पूर्वोत्तर को आईटी उद्योग और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही जलविद्युत, सौर ऊर्जा और डेटा सेंटर निवेश की संभावनाओं पर भी जोर दिया।


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