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 अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा,  पुलिस ने 8 लोगों को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। चंपत राय ने शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। न्यास की स्थापना केंद्र सरकार ने 2020 में अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए की थी। एक अन्य न्यासी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया। इन दोनों के इस्तीफे से एक दिन पहले गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंदिर को दान की गई धनराशि में कथित घपले के लिए आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।राय के करीबी सूत्रों ने कहा कि उनके विरुद्ध कोई सीधा आरोप नहीं है लेकिन उन्होंने मामले की जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दिया। 79 वर्षीय राय संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और उन्हें 2018 में अंतरराष्ट्रीय विश्व हिंदू परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वहीं 65 वर्षीय मिश्रा न्यास के 15 न्यासियों में से एक हैं। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि संस्थान को राय द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव पद से इस्तीफा देने की कोई जानकारी नहीं है।
अयोध्या की एक अदालत ने कथित दान राशि गबन मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों को सोमवार तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया। अभियोजन अधिकारी के. सी. वर्मा ने अयोध्या में मीडिया को बताया कि जांच के दौरान 79.8 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार कि गए आठ लोग हैं अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव। यादव को चंपत राय का पूर्व चालक बताया जाता है।अभियोजन अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए पांच से छह लोग बैंक कर्मचारी थे जिन्हें मंदिर में प्राप्त नकद दान की गिनती के लिए नियुक्त किया गया था और वे बैंक से वेतन प्राप्त कर रहे थे। उन्होंने बताया कि टिन्नू यादव बैंक कर्मचारी नहीं था बल्कि चालक के रूप में काम करता था जबकि सुभाष श्रीवास्तव दान गिनती प्रक्रिया का प्रभारी था।उधर उत्तर प्रदेश के देवरिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि गबन के आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई एसआईटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के तुरंत बाद शुरू हो गई। उन्होंने इस विवाद को कुछ राजनीतिक दलों द्वारा ‘हताशा’ में राम भक्तों को निशाना बनाने और अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास बताया।अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने  बताया कि सभी आरोपी अयोध्या में ही थे और उन्हें गुरुवार देर रात पूछताछ के लिए उठाया गया। मामला भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 306 (क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक के कब्जे में संपत्ति की चोरी), 316 (आपराधिक विश्वासघात), 317 (चोरी की संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) और 61 (आपराधिक साजिश) सहित अन्य प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।
राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन का विवाद 7 जून को सामने आया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया जिसने 23 जून को सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर 25 जून की रात प्राथमिकी दर्ज की गई और अयोध्या पुलिस ने शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा 7 जून को यह मुद्दा उठाए जाने के बाद कुछ आरोपियों के नाम सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे थे। तीन-सदस्यीय एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एसआईटी ने इस सप्ताह राज्य सरकार को सौंपी गई अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कड़े सुझाव दिए हैं। विपक्षी नेताओं ने प्राथमिकी को आंखों में धूल झोंकने जैसा बताया है। उनका आरोप है कि इसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा सहित न्यास के वरिष्ठ पदाधिकारियों की कोई जिम्मेदारी नहीं तय की गई है।कांग्रेस ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को भंग करने की मांग की। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि एक ओर भाजपा पंजीकृत न्यासों को कड़े एफसीआरए नियमों के माध्यम से नियंत्रित करना चाहती है और दूसरी ओर आरएसएस जैसी पूरी तरह अपंजीकृत संस्थाएं हमारे देश के मंदिरों को ‘लूटने और बर्बाद करने’ के लिए स्वतंत्र हैं।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को अयोध्या में कहा कि चोरी के पीछे जो लोग हैं वे आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से हटाने की ‘साजिश’ भी कर रहे थे।
 

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