अल-नीनो और कम वर्षा की स्थिति पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह-शिवराज सिंह चौहान ने की समीक्षा, जलाशयों और भूजल की निगरानी के निर्देश
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अल-नीनो के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा और उसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार मानसून की स्थिति और संभावित सूखे पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अमित शाह ने कृषि मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों को राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को मौसम के अनुरूप फसल बुवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम करें ताकि संभावित चुनौतियों का समय रहते समाधान किया जा सके। गृह मंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय को देश के सभी बड़े और छोटे जलाशयों तथा भूजल की स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुओं के चारे, मिलेट्स और दलहन जैसी कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके अलावा ऊर्जा मंत्रालय को देश में बिजली की सुचारू और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देश में चावल, गेहूं सहित अन्य आवश्यक खाद्यान्न पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सरकार खाद्यान्न आपूर्ति और मूल्य स्थिति पर भी लगातार नजर रखे हुए है।
अमित शाह ने हाल में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित असम और अरुणाचल प्रदेश में नुकसान का आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में बुनियादी ढांचे, कृषि और रिहायशी क्षेत्रों को हुए नुकसान का मौके पर जाकर आकलन किया जाएगा, ताकि आवश्यक सहायता और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, उपभोक्ता विभाग, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), केंद्रीय जल आयोग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



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