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 नारेबाजी और व्यवधान से नहीं, तथ्य और तर्क से बनता है नेतृत्व: ओम बिरला

 कोलकाता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि नारेबाजी, व्यवधान और विधायी गतिरोध से कोई नेता नहीं बनता बल्कि तथ्य, तर्क और रचनात्मक विचार ही प्रभावी नेतृत्व की पहचान हैं। बिरला ने यहां लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज' (प्राइड) और पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों के लिए दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि विधानमंडल चर्चा, विचार-विमर्श और समाधान का मंच है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति सार्थक संवाद, परस्पर सम्मान और जनकल्याण के प्रति साझा प्रतिबद्धता में निहित है। उन्होंने विधायकों से संवाद की गुणवत्ता को समृद्ध करने और सदन की चर्चाओं को जनहित तथा राज्य के विकास से जोड़ने का आह्वान किया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समाज के अंतिम कतार में खड़े व्यक्ति की आवाज बनना चाहिए और जनता की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं तथा सपनों को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही निर्वाचित प्रतिनिधियों की सबसे बड़ी शक्ति है और उनका दायित्व है कि वे लोगों की समस्याओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाएं। बिरला ने कहा कि विधानसभा सदस्य केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि पूरे राज्य के विकास और भविष्य के सहभागी भी हैं। उन्होंने उनसे व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और पश्चिम बंगाल को नयी दिशा देने वाली नीतियों तथा विकासोन्मुखी पहल में योगदान देने का आह्वान किया। इस बीच यहां कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में बिरला ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया जाए या नहीं, इस पर चर्चा कर निर्णय लेना राजनीतिक दलों का अधिकार है। बिरला ने यह टिप्पणी उस प्रश्न के जवाब में की, जिसमें उनसे दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायकों और सांसदों की अयोग्यता से संबंधित संवैधानिक एवं प्रक्रियात्मक व्यवस्था की समीक्षा के लिए उनके द्वारा गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति के बारे में पूछा गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा करना और उसके संबंध में निर्णय लेना राजनीतिक दलों पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि अतीत में विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। उनकी यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में हाल के दिनों में हुए दल-बदल के घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए बिरला ने कहा कि उनके विचार आज भी युवाओं और नेतृत्व दोनों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और यह संदेश देते हैं कि समर्पण, चरित्र और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से परिवर्तनकारी बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि बंगाल की समृद्ध आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत ने सदैव देश का मार्गदर्शन किया है। कार्यक्रम के समापन सत्र में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने समापन उद्बोधन दिया।
बिरला ने पत्रकारों से यह भी कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा से संबंधित रिपोर्ट मानसून सत्र में लोकसभा में पेश की जायेगी। वर्मा को पद से हटाने के आधार की जांच के लिए तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। यह मामला पिछले साल वर्मा के राष्ट्रीय राजधानी स्थित आवास से नोटों की अधजली गड्डियां मिलने से संबंधित है। इस घटना के समय वह दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे और बाद में उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने पिछले वर्ष 12 अगस्त को वर्मा को पद से हटाने के लिए एक बहुदलीय नोटिस स्वीकार करने के बाद इस समिति का गठन किया था। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा।

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