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अश्विनी वैष्णव ने बताए भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ‘नमो ग्रीन रेल’ के खास फीचर्स, ‘भारतीय रेलवे के लिए बड़ा मील का पत्थर’

 नई दिल्ली। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज शुक्रवार को भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसके तकनीकी फीचर्स और महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शुक्रवार को जींद से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। रेल मंत्री ने कहा, “यह देश के लिए, खासकर इंजीनियरों के लिए गर्व की बात है कि इतनी जटिल तकनीक भारत में विकसित की गई है। पूरी प्रोपल्शन सिस्टम और टेक्नोलॉजी देसी है और इसके IP राइट्स भारत के पास हैं। साथ ही कहा कि रेलवे फिलहाल इसे आगे विकसित करने पर कार्य कर रहा है।”

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताए प्रमुख पॉइंट्स:
– स्वदेशी तकनीक: हाइड्रोजन प्रोडक्शन से लेकर मोटर तक पूरा सिस्टम भारत में डेवलप किया गया है।
– कैसे काम करती है ट्रेन: जीरो-एमिशन ट्रेन के पीछे के टेक्निकल मैकेनिज्म के बारे में उन्होंने बताया कि यह सिस्टम पानी को पावर में बदलता है। 
– पास में एक इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट लगाया गया है। हाइड्रोजन पानी से बनता है और फिर इस फ्यूल सेल के ज़रिए वापस बिजली में बदला जाता है। इस बिजली का इस्तेमाल फिर मोटर चलाने के लिए किया जाता है। अंत में सिर्फ पानी की भाप निकलती है।
– सुरक्षा: TUV SUD जैसी विश्वसनीय एजेंसी द्वारा गहन सुरक्षा जांच की गई। हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, हीट डिटेक्टर समेत एडवांस्ड सेंसर लगाए गए हैं। अगर हाइड्रोजन का स्तर 0.25% से ज्यादा होता है तो सेफ्टी सिस्टम एक्टिवेट हो जाते हैं। यह एक बहुत ही सुरक्षित गाड़ी है, जिसे अच्छी तरह से टेस्ट किया गया है, और लगातार टेस्टिंग और टेस्ट रन किए जाते हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ट्रेन न सिर्फ रेलवे के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भविष्य में हाइड्रोजन तकनीक को कई देशों में निर्यात करने की संभावना भी खोलती है।
ट्रेन की मुख्य विशेषताएं:
– 10 कोच वाली ट्रेन (2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार + 8 ट्रेलर कोच)
– 1200 kW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम
– अधिकतम गति: 110 किमी/घंटा
– यात्री क्षमता: लगभग 2600
– जीरो एमिशन – केवल पानी की भाप निकलती है
– जींद में समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांट
रेल मंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को RDSO के डिजाइन अप्रूवल के अनुसार विकसित किया गया है और यह नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन तथा नेट-जीरो लक्ष्य को मजबूती देगा। इसे पूरी तरह से भारत में डिज़ाइन और डेवलप किया गया यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत के विज़न को दर्शाता है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी
हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन से बिजली बनाती है। प्राइमरी एनर्जी सोर्स एक प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल (PEMFC) है। यह एक फ्यूल सेल है जो प्रोटॉन-कंडक्टिंग परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) पॉलीमर मेम्ब्रेन पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली बनाता है। इस प्रोसेस से बायप्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है। 
हाइड्रोजन एक हाई-एनर्जी फ्यूल है, डीजल की तुलना में 120 MJ/Kg (मेगाजूल प्रति किलोग्राम), जो 43 MJ/Kg है। इसका मेंटेनेंस कम होता है और कार्बन फुटप्रिंट मैनेज किया जा सकता है। यह हाइड्रोजन को रेल ट्रांसपोर्ट के लिए अभी उपलब्ध सबसे साफ प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी बनाता है। इसे सपोर्ट करने के लिए, इंडियन रेलवे ने डेडिकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ एक नए ट्रेन सेट की शुरुआत से कहीं अधिक है। यह भविष्य में हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ऑपरेशन के लिए ज़रूरी सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी बनाता है। इंडियन रेलवे के लगातार मॉडर्नाइजेशन के साथ यह पहल इसे बड़े पैमाने पर अपनाने की नींव रखती है।
ट्रेन का नाम: नमो ग्रीन रेल 
यह लॉन्च भारत को उन चुनिंदा देशों (यूरोप, चीन, अमेरिका) के एलीट ग्रुप में शामिल कर रहा है जो हाइड्रोजन ट्रेन चला रहे हैं। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक साबित होगा।

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