भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पर एरिक सोल्हेम ने की सराहना, बोले- ‘शानदार है भारत’
नई दिल्ली। भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल (Hydrogen Fuel Cell) ट्रेन के शुभारंभ से पहले संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोल्हेम ने इसकी सराहना करते हुए कहा, “शानदार है, भारत!”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को हरियाणा के जिंद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन जिंद और सोनीपत के बीच चलेगी और 10 डिब्बों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन संचालित यात्री ट्रेनों में से एक मानी जा रही है।सोल्हेम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह परियोजना आधुनिक हाइड्रोजन तकनीक, ईंधन भंडारण, रीफ्यूलिंग और परिचालन ढांचे को एक साथ जोड़ती है तथा भारत में स्वच्छ रेल परिवहन की संभावनाओं को प्रदर्शित करेगी।
भारतीय रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन और वातावरण की ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, इसलिए इसे लगभग शून्य उत्सर्जन (Near Zero Emission) वाला परिवहन माध्यम माना जाता है।ट्रेन में दो हाइड्रोजन पावर कार और आठ ट्रेलर कोच हैं। प्रत्येक पावर कार 1,200 किलोवाट (करीब 1,600 हॉर्सपावर) बिजली पैदा करती है। ट्रेन की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के सफर की क्षमता है।
इस परियोजना के लिए भारतीय रेलवे ने जिंद में देश का पहला एकीकृत रेलवे हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित किया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक से हाइड्रोजन तैयार की जाती है, उसे संपीड़ित (कंप्रेस) कर संग्रहित किया जाता है और विशेष रीफ्यूलिंग स्टेशन के जरिए ट्रेन में भरा जाता है। यह सुविधा लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन के भंडारण की क्षमता रखती है।रेल मंत्रालय के मुताबिक, हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण ट्रेन और रीफ्यूलिंग स्टेशन पर हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर, आग, धुआं और तापमान सेंसर, स्वचालित शटडाउन सिस्टम और वेंटिलेशन जैसी कई सुरक्षा व्यवस्थाएं की गई हैं। इस परियोजना को स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के बाद पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के मानकों के अनुरूप मंजूरी मिली है। रेल मंत्रालय ने कहा कि ब्रॉड गेज नेटवर्क के 99 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण के बाद हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय रेलवे के हरित परिवर्तन की अगली बड़ी पहल है। यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को भी समर्थन देती है। भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेनों को अन्य रेल मार्गों, विशेषकर विरासत (हेरिटेज) रेल मार्गों पर भी चलाने की योजना है।




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