बॉम्बे हाईकोर्ट ने परीक्षा धोखाधड़ी मामलों के लिए दो विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए
नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर में दो विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए हैं। ये अदालतें सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों के अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, बोर्ड एवं अन्य निर्दिष्ट परीक्षाओं में कदाचार निवारण अधिनियम, 1982 के संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।
यह निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के 23 जुलाई, 2026 के पत्र के बाद लिया। मंत्रालय ने परीक्षा संबंधी कदाचार के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक अदालतें नामित करने का अनुरोध किया था।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (निरीक्षण-1) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, औरंगाबाद न्यायिक जिले के लिए एस.वी. पवार, 10वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया है। वहीं, नागपुर न्यायिक जिले के लिए गुलशन आर. कोल्टे, 7वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ स्तर) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को इस उद्देश्य के लिए नामित किया गया है। हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को संबंधित विशेष अदालतों को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी लंबित मामलों को तत्काल इन अदालतों में स्थानांतरित करने और अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजने के लिए कहा गया है।
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना है। इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के साथ ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।









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