टीबी-मुक्त भारत अभियान: नड्डा ने कर्नाटक और केरल के सांसदों से की चर्चा, जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ बैठक कर टीबी-मुक्त भारत अभियान की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में दोनों राज्यों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने टीबी-मुक्त कर्नाटक, टीबी-मुक्त केरल और टीबी-मुक्त भारत के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नड्डा ने सांसदों से जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय कर जांच, उपचार और मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की लगातार निगरानी करने का आह्वान किया।
‘टीबी-मुक्त भारत के लिए सांसदों की अग्रणी भूमिका’ विषय पर आयोजित बैठक विस्तारित संसद भवन परिसर में हुई। इसमें कर्नाटक और केरल के विभिन्न दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य टीबी उन्मूलन की दिशा में राजनीतिक स्तर पर एकजुट प्रयासों को गति देना और राज्यों में चल रही गतिविधियों की समीक्षा करना था।
बैठक में 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई। अभियान का पहला चरण 7 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ था, जिसमें शुरुआत में 347 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों को शामिल किया गया। बाद में इसका विस्तार पूरे देश में किया गया और यह चरण 24 मार्च 2025 को समाप्त हुआ। अभियान का दूसरा चरण 24 मार्च 2026 को शुरू हुआ और जुलाई 2026 में समाप्त हुआ। इसमें देशभर के करीब 1.58 लाख उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों को शामिल किया गया। नड्डा ने कहा कि वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के मामलों में 21% की कमी आई है, जो वैश्विक स्तर की प्रगति की तुलना में करीब दोगुनी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92% उपचार कवरेज दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली गति को जमीनी स्तर के प्रभाव में बदलने के लिए कर्नाटक और केरल में टीबी की जांच, उपचार और मरीजों को सहायता की पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय मंत्री ने हाल में संपन्न 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। 24 मार्च से 4 जुलाई 2026 तक चले अभियान में देशभर में 2.02 करोड़ से अधिक संवेदनशील लोगों की जांच की गई और 7 लाख से अधिक नए टीबी मामलों का पता लगाया गया। इनमें 1.97 लाख ऐसे मामले भी शामिल थे, जिनमें लक्षण नहीं थे और जिनका सामान्य परिस्थितियों में पता चलना मुश्किल था।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त सचिव अराधना पटनायक ने अभियान के तकनीकी आधार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले एक दशक में आणविक जांच की क्षमता को कुछ सौ मशीनों से बढ़ाकर 11,000 से अधिक मशीनों तक पहुंचाया है। देश में करीब 3,000 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयां भी क्षेत्र स्तर पर इस्तेमाल की जा रही हैं।
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने दोनों राज्यों में टीबी के अधिक बोझ से जुड़े संवेदनशील कारकों की जानकारी दी। इनमें शहरी क्षेत्र, प्रवासी आबादी, शहरी झुग्गियां, कुपोषण, शराब और तंबाकू का सेवन, एचआईवी एवं मधुमेह का अधिक बोझ, बुजुर्ग आबादी, निर्माण और औद्योगिक श्रमिक तथा पहाड़ी एवं जनजातीय क्षेत्र शामिल हैं। पत्थर की खदानों, रेशम बुनकरों, कॉफी और चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को भी संवेदनशील समूहों में शामिल किया गया है।
100-दिवसीय अभियान के दौरान कर्नाटक और केरल ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विशेष रणनीतियां अपनाईं। इसके तहत आयुष्मान आरोग्य शिविरों को शहरी झुग्गियों, निर्माण स्थलों और प्रवासी श्रमिकों के समूहों तक पहुंचाया गया, ताकि जांच और स्वास्थ्य सेवाएं जरूरतमंद लोगों के करीब उपलब्ध हो सकें। बैठक में सांसदों ने जागरूकता अभियान तेज करने, टीबी से जुड़े कलंक को कम करने और शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान को बढ़ावा देने के लिए निक्षय शिविरों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। वे जिला और प्रखंड स्तर पर टीबी सेवाओं की निगरानी भी मजबूत करेंगे, ताकि अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और मरीज-केंद्रित देखभाल पहुंच सके। नड्डा ने कहा कि टीबी-मुक्त भारत केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक स्वामित्व से संचालित जन आंदोलन है। उन्होंने सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क, प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक भागीदारी के जरिए अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया।
सांसदों ने टीबी से प्रभावित लोगों को पोषण संबंधी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग और आजीविका से जुड़ी मदद उपलब्ध कराने के लिए समुदायों को संगठित करने की प्रतिबद्धता जताई। नड्डा ने कहा कि 100-दिवसीय अभियान का समापन जिम्मेदारी का अंत नहीं, बल्कि अधिक गहन और निरंतर प्रयासों की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि कर्नाटक और केरल टीबी उन्मूलन की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।










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