पीएम गतिशक्ति से 18.66 लाख करोड़ रुपए की 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन, 256 को मिली मंजूरी
नई दिल्ली। अक्टूबर 2021 में शुरू किया गया पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) देश में एकीकृत और समन्वित अवसंरचना योजना को सक्षम बना रहा है। यह पहल विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा मंच पर लाकर अवसंरचना परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित क्रियान्वयन को बढ़ावा देती है। अब तक नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) के माध्यम से करीब 18.66 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 396 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीएम गतिशक्ति एक एकीकृत योजना फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। परियोजनाओं की मंजूरी और उनका क्रियान्वयन संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी योजनाओं, प्रक्रियाओं और बजटीय एवं वित्तीय प्रावधानों के तहत किया जाता है। इसलिए पीएम गतिशक्ति पहल के तहत कोई मात्रात्मक लक्ष्य या अलग व्यय आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है। पीएम गतिशक्ति एनएमपी का उद्देश्य मंत्रालयों और राज्यों को डेटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। इसके लिए भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एपीआई इंटीग्रेशन का उपयोग किया जा रहा है। इससे अवसंरचना विकास की निगरानी, योजना और उसे बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। योजना के तहत परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने के साथ सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की भी एकीकृत और समन्वित योजना बनाने में सुविधा हो रही है।
पीएम गतिशक्ति फ्रेमवर्क के तहत गठित नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप केंद्र सरकार की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का योजना स्तर पर मूल्यांकन करता है। इसका उद्देश्य एकीकृत नियोजन, मल्टी-मोडल और इंटर-मोडल कनेक्टिविटी, प्रयासों में तालमेल, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और परियोजना स्थल एवं आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। अब तक एनपीजी तंत्र के जरिए 18.66 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 198 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं।
एनपीजी के माध्यम से मूल्यांकन की गई 396 परियोजनाओं में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 171 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें 108 को मंजूरी मिल चुकी है और 53 कार्यान्वयन के अधीन हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 9,01,668 करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय की 162 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें 102 को मंजूरी मिली है और सभी 102 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 5,43,315 करोड़ रुपए है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 31 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें 17 को मंजूरी मिली है और 17 कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 2,88,614 करोड़ रुपए है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की चार, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की तीन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की छह परियोजनाओं का भी मूल्यांकन किया गया है। इसके अलावा एनआईसीडीसी और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की 12, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक तथा वस्त्र मंत्रालय की पांच परियोजनाएं एनपीजी मूल्यांकन के दायरे में आई हैं।
सरकार के विभिन्न अध्ययनों और मूल्यांकनों के अनुसार पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, प्रगति, सागरमाला और एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, समर्पित रेल फ्रेट कॉरिडोर, औद्योगिक गलियारों जैसी कनेक्टिविटी अवसंरचना पहलों ने लॉजिस्टिक्स दक्षता, टर्न-अराउंड टाइम, कारोबार सुगमता और औद्योगिक विकास को बेहतर करने में योगदान दिया है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने 2025 में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के सहयोग से लॉजिस्टिक्स लागत का मूल्यांकन किया। इसके अनुसार भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 7.9% रहने का अनुमान है, जो दुनिया की उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के स्तर के बराबर है।
आर्थिक समीक्षा 2023-24 में भी इन पहलों से घरेलू विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार की बात कही गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के एक अध्ययन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर खर्च किए गए प्रत्येक एक रुपए से जीडीपी में 3.2 रुपए की वृद्धि होती है। अब तक 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पीएमजीएस-एनएमपी में शामिल किया जा चुका है। इसमें सड़क, रेल, बंदरगाह एवं जलमार्ग, बिजली, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार और औद्योगिक गलियारों समेत प्रमुख अवसंरचना क्षेत्र शामिल हैं।
सितंबर 2025 में पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म शुरू किया गया, जिसके जरिए निजी संस्थाओं और आम जनता को पीएम गतिशक्ति डेटा एनालिटिक्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। प्रश्न आधारित इस तंत्र के माध्यम से सार्वजनिक और निजी संस्थाएं सरल प्रक्रिया के जरिए पीएमजीएस-एनएमपी पोर्टल से डेटा एनालिटिक्स रिपोर्ट प्राप्त कर अपनी परियोजनाओं की योजना बना सकती हैं। राज्यों को जिला स्तरीय योजना में भी पीएम गतिशक्ति के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। हितधारकों के उपयोग के लिए करीब 1,800 डेटा लेयर्स एकीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल/टूल और 100 से अधिक मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन विकसित कर प्लेटफॉर्म से जोड़े गए हैं।
मंत्रालयों, विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों की जरूरतों के अनुसार पीएम गतिशक्ति पहल का विस्तार लगातार जारी है। इसके तहत नए डेटा लेयर्स का मैपिंग और इंटीग्रेशन, अतिरिक्त सुविधाओं का विकास, योजना एवं विश्लेषण के लिए नए सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और टूल तथा मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन विकसित करने का काम किया जा रहा है










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