केंद्र सरकार ने सेवा के दौरान दिव्यांग होने वाले सभी सेवारत कर्मचारियों को दिव्यांगता क्षति-पूर्ति देने का निर्णय लिया
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सेवा के दौरान दिव्यांग होने वाले सभी सेवारत कर्मचारियों को दिव्यांगता क्षति-पूर्ति देने का निर्णय लिया है। यदि कोई कर्मचारी सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार हो जाता है और उसकी सेवाएं दिव्यांग होने के बाद भी बरकरार रखी जाती हैं तो उन्हें दिव्यांगता क्षतिपूर्ति का लाभ दिया जाएगा। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कल यह घोषणा की।
उन्होंने कहा कि इससे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल जैसे सी.आर.पी.एफ., बी.एस.एफ., सी.आई.एस.एफ. इत्यादि के युवा जवानों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी सेवा की प्रकृति ऐसी है कि वे अपना दायित्व निभाते हुए दिव्यांगता का शिकार हो सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार सेवा के नियमों को सरल बनाने और विभेदकारी नियमों को खत्म करने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सभी प्रकार की नई पहलों का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के जीवन को सेवानिवृत्ति के बाद भी आसान बनाना है। इससे वह कर्मचारी भी लाभान्वित होंगे जो आज पेंशन भोगी हैं अथवा जिनके परिजन पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
सरकारी कर्मचारियों के हित में कार्मिक मंत्रालय ने हाल ही में एक और आदेश जारी किया था जिसके अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा शर्त में छूट दी गई थी। यदि कोई सरकारी कर्मचारी शरीर से या चिकित्सकीय अक्षमता के कारण सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त होता है, तो इस संदर्भ में नियमों में संशोधन करके आखिरी भुगतान के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन देने का नियम लागू किया गया है, भले ही कर्मचारी 10 वर्ष की न्यूनतम आवश्यक सेवा शर्त को पूर्ण नहीं कर पाया हो।


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