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दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न जलप्रदाय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
कलेक्टर श्री सिंह ने जिले में प्रगतिरत सात समूह जलप्रदाय योजनाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने योजनाओं का लाभ समय पर ग्रामीणों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत विकासखंड धमधा में ब्लॉक स्तरीय जल परीक्षण प्रयोगशाला के लिए भूमि आवंटन पर भी सहमति प्रदान की गई। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से धमधा विकासखंड के सभी ग्रामों में पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच एवं परीक्षण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जिससे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। बैठक में विभागीय अधिकारी मौजूद थे। -
दुर्ग/ छत्तीसगढ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों का प्रोत्साहित करने एवं सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष डॉ. खूबचंद बघेल, कृषक रत्न पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष 2026 का पुरस्कार वितरण राज्य स्थापना दिवस, 01 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में किया जाएगा। इस संबंध में कृषकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
संयुक्त संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी अनुसार इच्छुक कृषक जो खेती में नवाचार, जैविक कृषि, उत्पादन में वृद्धि, कृषि यात्रिकीकरण या जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, वे इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। समस्त पात्र कृषक वे निर्धारित तिथि तक आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन जिला कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक अर्हताएँ एवं अन्य जानकारी संबंधित विकासखंड / जिला कृषि कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।कृषकों से प्राप्त आवेदनों का सत्यापन संयुक्त संचालक कृषि द्वारा गठित विकासखंड स्तरीय छानबीन समिति द्वारा किया जाएगा। विकासखंड स्तरीय समिति कृषकों के प्रक्षेत्रों में जाकर आवेदन में उल्लेखित अधोसंरचना, कृषि आदान, सिंचाई संसाधन व अन्य जानकारी का प्रत्यक्ष निरीक्षण व अवलोकन सत्यापन उपरांत प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत करेगी। जिला स्तरीय समिति द्वारा सूक्ष्म जांच उपरांत जिला से अधिकतम 03 उत्कृष्ट कृषकों का चयन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से नामांकन संचालनालय कृषि को उपलब्ध कराया जाएगा।कृषक रत्न पुरस्कार छत्तीसगढ़ राज्य के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रखर कृषक नेता डॉ. खूबचंद बघेल के नाम पर दिया जाता है, जिनके योगदान को याद करते हुए यह सम्मान उन कृषकों को दिया जाता है जिन्होंने कृषि के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का कार्य किया है। -
दुर्ग/ छत्तीसगढ़ शासन की एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत दुर्ग जिले में "जनता के द्वार, डिजिटल सरकार" का सपना तेजी से साकार हो रहा है। इसी कड़ी में आज, 10 जुलाई 2026 को, सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नागरिक सेवाओं की सुगमता और त्वरित कार्यप्रणाली का एक बेहतरीन उदाहरण सामने आया है। दुर्ग जिले के डिप्टी कलेक्टर श्री उत्तम ध्रुव की धर्मपत्नी द्वारा नाम परिवर्तन के लिए सेवा सेतु पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया गया था। सेवा सेतु के सुदृढ़ और पारदर्शी सिस्टम के चलते, इस प्रकरण का निराकरण पूरी तरह से निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया गया। इसके उपरांत, सेवा सेतु प्रबंधक (जिला कार्यालय) द्वारा आवेदक को उनका आधिकारिक राजपत्र प्रकाशन (Gazette Notification) प्रमाण-पत्र सफलतापूर्वक प्रदान कर दिया गया। यह सफलता यह साबित करती है कि सेवा सेतु पोर्टल सरकारी प्रक्रियाओं को सुलभ और सरल बना रहा है, साथ ही समयबद्धता के साथ नागरिकों को घर बैठे ही पारदर्शी तरीके से सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ भी पहुंचा रहा है। इस डिजिटल बदलाव से अब जिले में विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन सेवा प्रदायगी आम जनता के लिए बेहद आसान और सुविधाजनक हो गई है।
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14 जुलाई को होगी काउंसलिंग
दुर्ग/ कार्यालय कलेक्टर (आदिवासी विकास शाखा) दुर्ग द्वारा 'मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना' (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के अंतर्गत शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास शाखा दुर्ग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों की कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए बीते 5 जुलाई 2026 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के संदर्भ में प्राप्त दावा-आपत्तियों के पूर्ण निराकरण के पश्चात 10 जुलाई 2026 को अंतिम मेरिट सूची आधिकारिक तौर पर घोषित कर दी गई है। परीक्षा के ये परिणाम जिले की आधिकारिक वेबसाइट तथा कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास दुर्ग के सूचना पटल पर आम नागरिकों और परीक्षार्थियों के अवलोकन हेतु उपलब्ध करा दिए गए हैं। योजना के अंतर्गत आयोजित इस चयन परीक्षा की अंतिम मेरिट सूची जारी होने के बाद अब आगामी प्रवेश प्रक्रिया के लिए काउंसलिंग की तिथि भी तय कर दी गई है। चयनित और पात्र विद्यार्थियों की काउंसलिंग आगामी 14 जुलाई 2026 को कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास शाखा जिला दुर्ग में आयोजित की जाएगी। इस काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सभी पात्र विद्यार्थियों को विभाग द्वारा पृथक से भी सूचित किया जा रहा है ताकि समय पर प्रवेश की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। -
62वीं जयंती पर सेवा-संकल्प को किया नमन
रायपुर। पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्व. कुलदीप निगम की 62वीं जयंती शुक्रवार को मनाई गई, इस अवसर पर माना स्थित कुलदीप निगम वृद्धाश्रम एवं मानसिक दिव्यांग बालगृह में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने स्व. निगम की प्रतिमा एवं छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनके सेवा-संकल्प को नमन किया।जयंती के अवसर पर वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों तथा मानसिक दिव्यांग बालक-बालिकाओं को फल एवं अन्य खाद्य सामग्री का वितरण भी किया गया।
अपने संबोधन में प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि स्व. कुलदीप निगम केवल एक वरिष्ठ पत्रकार ही नहीं, बल्कि समाज के कमजोर, निराश्रित और जरूरतमंद लोगों के सच्चे हितैषी थे। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ समाजसेवा को अपना जीवन-धर्म बनाया। माना कैंप में छत्तीसगढ़ के प्रथम वृद्धाश्रम की स्थापना कर उन्होंने बुजुर्गों की सेवा का जो अभियान शुरू किया, वह पिछले 37 वर्षों से निरंतर मानवता की मिसाल बना हुआ है।उन्होंने बताया कि स्व. कुलदीप निगम छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के संस्थापक सदस्य एवं प्रथम महासचिव रहे। उनके प्रयासों से मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की सेवा और संरक्षण का कार्य संगठित रूप से प्रारंभ हुआ। साथ ही उन्होंने ऐसे बहादुर बच्चों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों का जीवन बचाकर साहस का परिचय दिया। उनके प्रयासों से अनेक बच्चों को वीरता पुरस्कार प्राप्त हुए। मोहन तिवारी ने कहा कि स्व. निगम द्वारा बोया गया सेवा का बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है और उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।इस अवसर पर कुलदीप निगम वृद्धाश्रम के अध्यक्ष राजेन्द्र निगम, सचिव बिमल घोषाल, प्रीति निगम, पारूल चक्रवर्ती, लीला यादव, सत्यम निगम सहित वृद्धाश्रम एवं बालगृह के कर्मचारी उपस्थित रहे।वही स्व. कुलदीप निगम के पैतृक गांव नर्रा स्थित शासकीय कुलदीप निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं समाजसेवा के कार्यों को स्मरण किया। -
*- आगामी एक माह के भीतर शिवनाथ नदी का शुद्ध पेयजल पहुंचेगा 103 गांवों के हर घर*
*- मोतिमपुर के 53 गांव और अंजोरा ढ़ाबा के अंतर्गत 50 गांव होंगे लाभान्वित*दुर्ग/ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध एवं सतत पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आज धमधा विकासखंड के मोतिमपुर तथा दुर्ग विकासखंड के अंजोरा ढ़ाबा समूह जल प्रदाय योजनाओं का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान कलेक्टर ने इंटेकवेल, वाटर ट्रीटमेंट (फिल्टर) प्लांट तथा संपूर्ण जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आगामी एक माह के भीतर दोनों योजनाओं से नियमित जलापूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने दोनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों में चल रही ट्रायल रन एवं टेस्टिंग प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने प्लांट में शिवनाथ नदी के पानी के शुद्धिकरण की पूरी प्रक्रिया को देखा तथा जल गुणवत्ता परीक्षण की प्रगति की जानकारी ली। दोनों परियोजनाओं में शिवनाथ नदी से इंटेकवेल के माध्यम से पानी लाकर फिल्टर प्लांट तक पहुंचाने का कार्य पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में नदी का पानी फिल्टर प्लांट तक पहुंच रहा है, जहां उसका शुद्धिकरण किया जा रहा है। इसके बाद शुद्ध पेयजल को पाइपलाइन के माध्यम से गांवों में निर्मित टंकियों तक पहुंचाया जाएगा और वहां से प्रत्येक घर में नल कनेक्शन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।धमधा विकासखंड के मोतिमपुर में शिवनाथ नदी पर इंटेकवेल तथा गोबरानवा में 6.5 एमएलडी क्षमता के आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया है। इस योजना से 53 गांवों को शुद्ध पेयजल की नियमित आपूर्ति मिलेगी। वहीं दुर्ग विकासखंड की अंजोरा ढ़ाबा समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत भेड़सर-गनियारी शिवनाथ नदी से पानी लाकर 8.5 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जा रहा है, जिससे 50 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित होंगे। दोनों योजनाओं के तहत पाइपलाइन, जल टंकियों एवं गांवों तक पेयजल पहुंचाने की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। आगामी एक माह के भीतर दोनों योजनाओं से कुल 103 गांवों के घर-घर शिवनाथ नदी का शुद्ध पेयजल पहुंचने लगेगा, जिससे ग्रामीणों की बोरवेल और भू-जल पर निर्भरता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। कलेक्टर श्री सिंह ने कार्यपालन अभियंता श्री उत्कर्ष पाण्डेय को निर्देशित किया कि शेष तकनीकी परीक्षण एवं आवश्यक औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करते हुए दोनों योजनाओं से नियमित जलापूर्ति प्रारंभ की जाए, ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ मिल सके। -
*कलेक्टर ने तैयारियों की समीक्षा की, बोले— पौधे कम लगाएं, लेकिन उन्हें बचाना हमारी प्राथमिकता हो*
बिलासपुर/ जिले में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनभागीदारी के साथ सफल बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय ग्रामीणों, जन प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संस्थाओं तथा उद्योगों के सहयोग से इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना आसान है, लेकिन उन्हें बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए।जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित बैठक में बताया गया कि जिले में वर्तमान में करीब 14.50 लाख पौधे उपलब्ध हैं। इनमें लगभग 12.25 लाख पौधे वन विभाग तथा 2.25 लाख पौधे उद्यान विभाग की नर्सरियों में तैयार रखे हुए हैं। उद्यान विभाग द्वारा करीब 75 हजार पौधे इच्छुक नागरिकों को निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। इसके लिए सरकंडा, वेदपरसदा (मस्तूरी), बहतराई (तखतपुर) और करगीकला (कोटा) स्थित नर्सरियों से पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इस वर्ष अभियान में मुख्य रूप से फलदार एवं छायादार पौधों के रोपण पर जोर दिया जाएगा। बड़े आकार के पौधे लगाए जायेंगे।कलेक्टर ने कहा कि इस वर्ष ब्लॉक प्लांटेशन की अवधारणा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पौधों की नियमित देखरेख और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधरोपण के बाद पौधों की जिम्मेदारी बिहान की महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी जाए, ताकि भविष्य में फल उत्पादन से उन्हें अतिरिक्त आय का लाभ भी मिल सके। उन्होंने ऐसे पौधों के रोपण पर बल दिया, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने में भी सहायक हों। बैठक में कलेक्टर ने बताया गया कि 18 जुलाई को जिलेभर में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा। अभियान में स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थान और आम नागरिक भी सहभागी होंगे। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, शासकीय कार्यालयों तथा शासकीय भूमि पर पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने सहित अन्य तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं।कलेक्टर ने प्रत्येक विकासखंड में एक मॉडल गांव विकसित करने के निर्देश उद्यान विभाग को दिए। इन गांवों को किसी एक विशेष फलदार प्रजाति, जैसे आम, अमरूद या मुनगा के आधार पर विकसित किया जाएगा, ताकि भविष्य में ये गांव फल उत्पादन के साथ ग्रामीणों की आय बढ़ाने के मॉडल बन सकें। उन्होंने उद्योगों एवं सार्वजनिक उपक्रमों से भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उद्योग प्रतिनिधियों ने अभियान में सहयोग का भरोसा दिलाया। कलेक्टर ने कहा कि उद्योगों के आसपास उपलब्ध भूमि पर भी पौधरोपण किया जाए, जिससे उनकी नियमित देखरेख और संरक्षण बेहतर ढंग से हो सके।बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, डीएफओ नीरज सहित विभिन्न शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। -
*राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण पर दिखाई सख्ती*
*नक्शा बटांकन और सीमांकन को प्राथमिकता देने के निर्देश*बिलासपुर/ कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने शुक्रवार को बिलासपुर एवं सकरी तहसीलों का निरीक्षण कर राजस्व कार्यों की प्रगति और अभिलेखों के संधारण का जायजा लिया। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा करते हुए लंबित मामलों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से निपटाने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विभिन्न राजस्व प्रकरणों की फाइलों का अवलोकन कर उनके निराकरण की गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों में नियमित एवं शीघ्र-शीघ्र पेशियां निर्धारित कर प्राथमिकता के साथ उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।कलेक्टर श्री अग्रवाल ने विशेष रूप से नक्शा बटांकन और सीमांकन के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नक्शा बटांकन लंबित रहने से भूमि संबंधी अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं और नागरिकों को विभिन्न शासकीय कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस कार्य में तेजी लाते हुए लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए।उन्होंने तहसीलों में रखे जाने वाले राजस्व अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव पर भी जोर दिया और कहा कि अभिलेख सुरक्षित, अद्यतन एवं व्यवस्थित होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर जानकारी तत्काल उपलब्ध हो सके।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने तहसील कार्यालय पहुंचे राजस्व प्रकरणों के पक्षकारों से सीधे चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अधिवक्ताओं से भी चर्चा कर राजस्व न्यायालयों में प्रकरणों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के संबंध में सुझाव प्राप्त किए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री शिवकुमार बनर्जी सहित राजस्व विभाग के अधिकारी एवं तहसील का अमला उपस्थित था। - -बलौदाबाजार, पलारी और सिमगा के 30 से अधिक गांवों में शेड-सह-चबूतरा निर्माण को मंजूरी-हर केंद्र को मिलेंगे 10-10 लाख रुपयेरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने बलौदाबाजार जिले के ग्रामीण अंचलों में धान खरीदी व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और किसान हितैषी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से जिले के धान उपार्जन केंद्रों में बड़े पैमाने पर शेड-सह-चबूतरा निर्माण के कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह पहल विशेष रूप से बलौदाबाजार, पलारी और सिमगा विकासखंड के उन हजारों किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी, जो हर खरीफ सीजन में अपनी फसल बेचने इन केंद्रों पर पहुंचते हैं। प्रशासनिक आदेश के अनुसार जिले के 30 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों की तस्वीर बदलने के लिए प्रत्येक केंद्र को 10 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसकी आधिकारिक मंजूरी 23 जून 2026 को जारी की गई।इस जनहितैषी पहल पर बात करते हुए राज्य के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की मेहनत का सम्मान करने और खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह सुचारू बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। धान उपार्जन केंद्रों में शेड और चबूतरों का निर्माण केवल एक ढांचागत काम नहीं, बल्कि किसान सुविधा का बुनियादी विस्तार है। क्डथ् निधि का मुख्य उद्देश्य ही खनिज प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जिससे जनता को सीधा लाभ मिले। इस अधोसंरचनात्मक सुधार से केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और किसानों को एक बेहतर व सुविधाजनक माहौल मिलेगा। इस महत्वपूर्ण निर्णय से साफ है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले धान खरीदी केंद्रों को मजबूत कर, सरकार सीधे तौर पर किसानों के हितों को सुरक्षित कर रही है।इस योजना के तहत सिमगा विकासखंड के सकरी, भटभेरा, गोरदी, जांगड़ा, केसली, हिरमी, सुहेला, सकलोर, शिकारी-केसली, रावन, मोहरा, बिटकुली, नवापारा, फूलवारी, फरहदा, जरौद और हथबंद जैसे प्रमुख केंद्रों में निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसी तरह बलौदाबाजार विकासखंड के सकरी, लटुवा, रिसदा, रसेड़ा, मोहतरा, कुकुरदी, बलौदाबाजार, धंवई, सलौनी, देवरी, दशरमा, खम्हरिया (चांपा), करमदा और अर्जुनी के उपार्जन केंद्रों का भी कायाकल्प किया जाएगा।अब तक पुख्ता इंतजाम न होने के कारण किसानों को अपनी मेहनत की उपज खुले आसमान के नीचे रखनी पड़ती थी, जिससे अचानक होने वाली बारिश, तेज धूप और जमीन की नमी से धान खराब होने का खतरा हमेशा बना रहता था। अब नए शेड और ऊंचे चबूतरों के बन जाने से फसल पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। इसके साथ ही केंद्रों पर तौल (तुलवाई) और बोरियों के भंडारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे कामकाज में तेजी आएगी और किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
- -12 जुलाई को रायपुर में प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के साथ होगी बैठक-मानसून-2026 के वृक्षारोपण अभियान, निगरानी व्यवस्था एवं उद्योगवार एक्शन प्लान पर होगी चर्चारायपुर / राज्य में मानसून-2026 के दौरान प्रमुख औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित वृक्षारोपण गतिविधियों की समीक्षा तथा आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की अध्यक्षता में 12 जुलाई 2026 को दोपहर 2:00 बजे बेबीलॉन कैपिटल, जी.ई. रोड, रायपुर में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में मानसून-2026 के दौरान किए जा रहे वृक्षारोपण कार्यक्रमों की प्रगति, उनके प्रभावी क्रियान्वयन, पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव, निगरानी व्यवस्था तथा उद्योगवार एक्शन प्लान की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 08 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में औद्योगिक इकाइयों को व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, पौधों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। उसी क्रम में अब विभागीय मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी स्वयं उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर वृक्षारोपण अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे तथा आगामी कार्ययोजना पर आवश्यक मार्गदर्शन देंगे। बैठक का उद्देश्य उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से राज्य में हरित आवरण का विस्तार करना, पर्यावरण संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाना तथा वृक्षारोपण कार्यक्रमों के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करना है।
- - गंगरेल में 74% से अधिक जलभराव=धमतरी के चारों प्रमुख जलाशयों में पानी की भारी आवक; सिंचाई और पेयजल का संकट टलारायपुर ।छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून की झमाझम बारिश से महानदी परियोजना (MRP कॉम्प्लेक्स) के जलाशयों के दिन बहुर गए हैं। धमतरी जिले में स्थित प्रदेश के लाइफ-लाइन माने जाने वाले गंगरेल (रविशंकर सागर), मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर बांध में लगातार हो रही भारी वर्षा से जलस्तर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बांधों में पानी की इस बंपर आवक से न सिर्फ किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, बल्कि राजधानी रायपुर सहित कई शहरों के लिए पेयजल की चिंता भी पूरी तरह दूर हो गई है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चारों प्रमुख जलाशयों में कैचमेंट एरिया से लगातार पानी आ रहा है।प्रमुख जलाशयों की वर्तमान स्थिति पर एक नज़र-गंगरेल बांध अर्थात् रविशंकर सागर बांध का पूर्ण जलभराव स्तर (FRL) 347.75 मीटर है, जिसके मुकाबले जलस्तर 343.75 मीटर तक पहुंच चुका है। वर्तमान में इसमें 399.81 मिलियन घनमीटर (लगभग 74.68 प्रतिशत) उपयोगी जल (लाइव स्टोरेज) जमा हो चुका है। बीते 24 घंटों से बांध में पानी की रफ्तार तेज बनी हुई है।- मुरूमसिल्ली जलाशय का जलस्तर 423.21 मीटर दर्ज किया गया है। यहां अब तक 206.66 मिलियन घनमीटर यानी करीब 72.74 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। इसी तरह कांकेर और धमतरी की सीमा पर स्थित इस बांध का जलस्तर 1388.48 मीटर पर पहुंच गया है, जहां 137.98 मिलियन घनमीटर पानी का विशाल संग्रह हो चुका है। सोंढूर जलाशय बांध का जलस्तर भी बढ़कर 468.30 मीटर हो गया है, जिसमें वर्तमान में 137.89 मिलियन घनमीटर जल संचित है।जल संसाधन विभाग केअधिकारियों का कहना है कि महानदी परियोजना के सभी चारों प्रमुख बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार यदि मानसून की यही सक्रियता आगे भी बनी रही, तो अगले कुछ दिनों में ये जलाशय पूरी तरह लबालब हो जाएंगे। विभाग के इंजीनियरों और मैदानी अमले को बांधों की सुरक्षा और जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।मौसम की इस मेहरबानी से खरीफ फसलों की सिंचाई को लेकर अन्नदाताओं की चिंताएं खत्म हो गई हैं। महानदी परियोजना से जुड़े नहरों के अंतिम छोर तक के खेतों को अब आसानी से पानी मिल सकेगा। जल संसाधन विभाग स्थिति का आकलन कर जल प्रबंधन और नहरों में पानी छोड़ने की रणनीति तैयार कर रहा है।
- -छात्राओं को बाल विवाह, सुरक्षा, स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों की दी गई जानकारीरायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में बाल विवाह के दुष्परिणामों, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, सेफ टच-अनसेफ टच, नशे से बचाव, किशोर न्याय अधिनियम, यातायात नियमों तथा मासिक धर्म स्वच्छता पर जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि बाल विवाह कराना या उसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है तथा ऐसी किसी भी घटना की सूचना 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर दी जा सकती है।इसके साथ ही सखी वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं, महिला सुरक्षा, कानूनी सहायता एवं परामर्श सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, शिक्षा जारी रखने और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर हेल्पलाइन एवं संबंधित संस्थाओं से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार, महिला एवं बाल विकास विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
- -नौकरी के पीछे भागने के बजाय खेती को बनाया फायदे का सौदा, 10 एकड़ में एकीकृत जैविक खेती से कमा रहे सालाना 8 लाख रुपये से अधिकरायपुर। कहावत है कि जहाँ चाह होती है, वहाँ राह अपने आप बन जाती है। इसे सच कर दिखाया है कांकेर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र और कभी माओवाद से प्रभावित रहे आमाबेड़ा तहसील के ग्राम चिचगांव के प्रगतिशील किसान श्री सोनूराम ध्रुव ने उच्च शिक्षित होने के बावजूद नौकरी की अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय उन्होंने अपनी माटी की सेवा करने का संकल्प लिया। आज वे अपनी वैज्ञानिक सोच, दृढ़ संकल्प और सरकारी योजनाओं के समन्वय से क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़े प्रेरणास्रोत बन गए हैं। सोनूराम ध्रुव ने अर्थशास्त्र विषय में स्नातकोत्तर (M.A.) की उपाधि प्राप्त की है। अपनी इस शिक्षा का उपयोग उन्होंने नौकरी ढूंढने में नहीं, बल्कि खेती की अर्थव्यवस्था को सुधारने में किया। उनके पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने परंपरागत खेती के ढर्रे को छोड़कर आधुनिक तकनीक और जैविक पद्धतियों को अपनाया, जिससे आज वे एक आत्मनिर्भर और सफल कृषक के रूप में स्थापित हो चुके हैं।सोनूराम ने करीब 11 वर्ष पहले, यानी वर्ष 2015 में जैविक खेती की शुरुआत की थी। शुरुआत में मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत के दम पर आज वे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के अंतर्गत एक प्रमाणित किसान हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति (CGOCERT) तथा भारत वानिकी एवं कृषि द्वारा बाकायदा निरीक्षण के बाद जैविक खेती का प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है।सोनूराम अपने 10 एकड़ के खेत में समन्वित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) अपनाते हैं, जिसके तहत वे विविध प्रकार की फसलें लेते हैं:जैविक चिन्नौर व काला धान (ब्लैक राइस): करीब 4 एकड़ में वे शत-प्रतिशत जैविक सुगंधित चिन्नौर धान और औषधीय गुणों से भरपूर काला धान उगाते हैं।मसाला और नकदी फसलें: इस वर्ष उन्होंने अपने खेत में काली मिर्च के 400 पौधे लगाए हैं, जिनमें फल आने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा वे गेहूं, उड़द, कुल्थी, रागी और औषधीय काली हल्दी की भी खेती कर रहे हैं।गौ-पालन और बागवानी: फसलों के साथ-साथ वे आम की बागवानी और गौ-पालन भी करते हैं, जिससे खेत के लिए जरूरी खाद आसानी से मिल जाती है।आधुनिक जल प्रबंधन: उन्होंने अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली (टपक सिंचाई) अपनाई है, जिससे कम पानी में भी फसलों का भरपूर और बेहतर उत्पादन हो रहा है।सोनूराम अपनी खेती में ताराचंद बेलजी तकनीक का उपयोग करते हैं, जो वृक्ष आयुर्वेद आधारित प्राकृतिक खेती पर केंद्रित है। यह पद्धति पंचमहाभूत (भूमि, गगन, वायु, अग्नि और जल) के सिद्धांतों पर काम करती है। उनका मानना है कि प्रकृति के तत्वों के साथ संतुलन बनाकर खेती करने से न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है, बल्कि फसलें भी अधिक पौष्टिक और उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।सोनूराम बाजार की महंगी रासायनिक खादों पर निर्भर नहीं हैं। वे अपने खेत और आसपास उपलब्ध स्थानीय संसाधनों जैसे नींबू, पपीता, हर्रा और अन्य वनस्पतियों से स्वयं ही जैविक घोल, जीवामृत तथा जैविक कीटनाशक तैयार करते हैं। इससे उनकी खेती की लागत (Input Cost) बेहद कम हो गई है।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "खर्च कम करें और लाभ बढ़ाएं" के आह्वान और जैविक खेती को बढ़ावा देने के संदेश से सोनूराम को बड़ी प्रेरणा मिली।सॉइल हेल्थ कार्ड और मिट्टी सुधार: मिट्टी की जांच में कार्बन की मात्रा कम पाए जाने पर सोनूराम ने खेत में तिल की खेती शुरू की। फसल कटने के बाद वे उसके अवशेषों को मिट्टी में ही मिला देते हैं, जिससे भूमि का जैविक कार्बन और पीएच (pH) स्तर संतुलित हो रहा है।शानदार उत्पादन और मुनाफा: खरीफ सीजन में वे प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल धान का उत्पादन लेते हैं। उनका शत-प्रतिशत जैविक चिन्नौर चावल बाजार में 150 रुपए प्रति किलोग्राम तक की ऊंची कीमत पर बिकता है।सालाना आय: इन सभी कृषि गतिविधियों और पूरे परिवार के सक्रिय सहयोग से सोनूराम को हर साल 8 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय हो रही है।भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाले सुदूर चिचगांव के सोनूराम ध्रुव ने यह साबित कर दिया है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शासकीय योजनाओं का लाभ और पारंपरिक ज्ञान का सही तालमेल हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी समृद्धि के द्वार खोले जा सकते हैं। आज वे अपने क्षेत्र के दर्जनों अन्य किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहे हैं।
- -हर घर शुद्ध जल सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी, होगा सोशल ऑडिटरायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता और सुचारू संचालन को लेकर आज मंत्रालय (महानदी भवन) में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन के अधिकारियों के साथ संचालन एवं रखरखाव नीति पर व्यापक चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राज्य में निर्मित सभी नल-जल योजनाओं का सफल संचालन शासन के निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण घरों में प्रतिदिन नल से शुद्ध जल मिले, इसके लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जाए। पेयजल योजनाओं की संस्थागत व्यवस्था को पूरी तरह से ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाएगा, जिसके लिए पंचायतों को हर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इन योजनाओं का रखरखाव ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से होगा, जिससे जन-सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि योजनाओं का सही संचालन और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की आपूर्ति जांचने के लिए सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) कराया जाए। इसके साथ ही, प्रत्येक गाँव की ग्राम सभा में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति के मुद्दे पर अनिवार्य रूप से चर्चा सुनिश्चित की जाए।बैठक के दौरान योजना के दीर्घकालिक क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से मंथन हुआ। योजनाओं के रखरखाव के लिए बजट प्रबंधन और उचित जल शुल्क निर्धारण पर चर्चा हुई। जल की बर्बादी (क्षति) को कम करने और बेहतर राजस्व प्राप्ति के लिए भविष्य में बजट प्रावधानों के अनुसार वाटर मीटर लगाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। पेयजल की गुणवत्ता का मूल्यांकन, विभिन्न स्तरों पर मॉनिटरिंग व्यवस्था, अनुपालन और सामुदायिक भागीदारी लेखा परीक्षा को लेकर अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ नीति के प्रारूप और उसके विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित जल जीवन मिशन, पीएचई और अन्य संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -जल जीवन मिशन ने बदली फुलबाई जी की जिंदगी, हर बूंद में मिला सम्मान, स्वास्थ्य और खुशहाल भविष्य का भरोसाएमसीबी/ एक समय था जब सुबह की पहली किरण के साथ फुलबाई जी की दिनचर्या पानी की तलाश से शुरू होती थी। घर के कामकाज से पहले सिर पर मटका उठाकर दूर स्थित कुएं तक जाना, लंबी कतार में अपनी बारी का इंतजार करना और फिर भारी बर्तनों में पानी भरकर घर लौटना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। यह केवल पानी लाने की जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि हर दिन समय, श्रम और संघर्ष की एक लंबी कहानी थी।आज वही फुलबाई जी मुस्कुराते हुए अपने घर के आंगन में लगे नल से बहते स्वच्छ पानी को देखकर कहती हैं-“अब लगता है कि हमारी जिंदगी सचमुच बदल गई है।“विकासखंड भरतपुर की ग्राम पंचायत बरौता में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल से जल योजना ने ग्रामीणों के जीवन में ऐसा बदलाव लाया है, जिसने वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान कर दिया है। अब गांव के घरों तक नियमित रूप से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है और ग्रामीणों का जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक बन गया है।फुलबाई जी बताती हैं कि पहले पानी लाने में प्रतिदिन कई घंटे लग जाते थे। गर्मी के दिनों में जलस्रोतों का जलस्तर घट जाने पर परेशानी और बढ़ जाती थी। कई बार दूर-दूर तक भटकने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। पानी की इस चिंता के कारण घर के अन्य जरूरी काम प्रभावित होते थे और परिवार की महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था।जल जीवन मिशन के तहत घर में नल कनेक्शन मिलने के बाद अब यह चिंता पूरी तरह समाप्त हो गई है। घर बैठे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। परिवार के सभी सदस्यों को सुरक्षित पानी मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम हुए हैं। अब फुलबाई जी अपने परिवार, बच्चों और अन्य घरेलू कार्यों को अधिक समय दे पा रही हैं। वे भावुक होकर कहती हैं, “पहले पानी लाने के लिए रोज कई चक्कर लगाने पड़ते थे। अब घर के नल से ही साफ पानी मिल जाता है। हमारी सबसे बड़ी परेशानी दूर हो गई है। यह सुविधा हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसी है।“फुलबाई जी बताती हैं कि इस योजना का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गांव को मिला है। महिलाओं का कठिन परिश्रम कम हुआ है, बच्चों और बुजुर्गों को आसानी से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है तथा गांव में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में आया यह परिवर्तन जल जीवन मिशन की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।वे इस जनकल्याणकारी योजना के लिए भारत के प्रधानमंत्री तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार ने ग्रामीण परिवारों की वर्षों पुरानी सबसे बड़ी आवश्यकता को पूरा किया है। आज गांव की महिलाएं पानी की चिंता से मुक्त होकर परिवार, बच्चों की शिक्षा और आजीविका से जुड़े कार्यों पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जिले में जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रहा है। यह योजना केवल हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचाने की पहल नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, बेहतर स्वास्थ्य, समय की बचत, सामाजिक बदलाव और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार का सशक्त माध्यम बन चुकी है।ग्राम बरौता की फुलबाई जी की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब वे केवल सुविधाएं नहीं देती, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास, आत्मसम्मान और खुशहाली का नया अध्याय लिखती हैं। जल जीवन मिशन की हर बूंद आज ग्रामीण भारत के उज्ज्वल भविष्य की कहानी कह रही है।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1 जून से 10 जुलाई 2026 तक औसत रूप से कुल 256.0 मि.मी. वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो कि इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा (287.4 मि.मी.) का 89.1 प्रतिशत है। आज (10 जुलाई) राज्य में औसतन 7.0 मि.मी. बारिश रिकॉर्ड की गई है।राज्य के अलग-अलग जिलों में मानसून का मिजाज काफी असमान बना हुआ है। जहां कुछ जिलों में उम्मीद से दोगुनी बारिश हो चुकी है, वहीं कुछ जिलों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है।’सारंगढ़-बिलाईगढ़ में रंग हरा: सामान्य से 198.9प्रतिशत अधिक बरसे बदरा’आंकड़ों के मुताबिक, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला बारिश के मामले में प्रदेश में सबसे आगे चल रहा है। यहाँ अब तक 465.3 मि.मी. बारिश हो चुकी है, जो इसकी औसत वर्षा (233.9 मि.मी.) का 198.9ः है। इसके अलावा बलरामपुर (132.2प्रतिशत), सक्ती (123.1प्रतिशत), दंतेवाड़ा (119.9प्रतिशत), और रायपुर (118.3प्रतिशत) में भी सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे इन क्षेत्रों के जलाशयों और खेतों में भरपूर पानी दिखाई दे रहा है।’सुकमा और मोहला-मानपुर में सामान्य से आधी बारिश’दूसरी तरफ, दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून की बेरुखी साफ नजर आ रही है। सुकमा जिले में अब तक के औसत (429.6 मि.मी.) के मुकाबले महज 220.6 मि.मी. (51.4प्रतिशत) ही पानी गिरा है। इसी तरह मोहला-मानपुर-अं.चौकी में अब तक केवल 54.7 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है।’रायपुर में थमीं बूंदें, फिर भी कोटा पूरा, जशपुर में बरसे बदरा, बिलासपुर और बस्तर को अब भी अच्छी झड़ी का इंतजार’छत्तीसगढ़ में मानसून के इस दौर में जिलों के बीच बारिश का एक दिलचस्प उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अगर राजधानी रायपुर की बात करें, तो आज यहाँ मौसम साफ रहा और बादलों ने शून्य का आंकड़ा दिखाया। इसके बावजूद सामान्य औसत बारिश के कोटे को पार करते हुए 118.3 प्रतिशत (296.9 मि.मी.) की शानदार बढ़त बनाए हुए है। इसी तरह दुर्ग जिले में भी आज 3.2 मि.मी. की हल्की बौछारें ही पड़ीं, लेकिन यहाँ अब तक हुई 281.4 मि.मी. कुल वर्षा ने जिले को औसत के मुकाबले 111.4 प्रतिशत के साथ सुरक्षित जोन में ला खड़ा किया है।दूसरी ओर, प्रदेश के अन्य संभागों और जिलों में मानसून की रफ्तार अभी थोड़ी धीमी है। आज जशपुर में झमाझम 17.4 मि.मी. पानी गिरा, जिसने यहाँ अब तक की कुल वर्षा को 227.9 मि.मी. (76.6 प्रतिशत) तक पहुंचा दिया है। न्यायधानी बिलासपुर और आदिवासी अंचल बस्तर में आज क्रमशः 5.5 मि.मी. और 8.1 मि.मी. बारिश दर्ज की गई, जिससे दोनों ही जिलों का ग्राफ अपनी सामान्य औसत वर्षा के करीब 79.1 प्रतिशत और 78.4 प्रतिशत के आसपास मंडरा रहा है। इन सब के बीच सरगुजा जिले में 7.2 मि.मी. पानी गिरने के बाद भी कुल वर्षा का आंकड़ा महज 136.5 मि.मी. तक ही पहुंच पाया है, जो कि इसकी सामान्य औसत बारिश का सिर्फ 65 प्रतिशत है।
- -घर बैठे ऑनलाइन आवेदन, 15 दिनों में हुआ निराकरण, व्हाट्सएप पर मिली आदेश की प्रतिरायपुर। राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लागू की गई डिजिटल राजस्व सेवाओं ने जमीन से जुड़े कार्यों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया है। विशेष रूप से ऑटो डायवर्सन (स्वतः व्यवर्तन) और ऑटो म्यूटेशन (स्वतः नामांतरण) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के लागू होने से नागरिकों को अब राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। निर्धारित समय-सीमा में प्रकरणों के त्वरित निराकरण से लोगों का शासन की सेवाओं पर भरोसा भी बढ़ा है।इस व्यवस्था का लाभ सरगुजा जिले के अंबिकापुर निवासी श्री शैलेंद्र कुशवाहा को भी मिला। उन्होंने अपनी भूमि के डायवर्सन के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन किया, जिसका निराकरण मात्र 15 दिनों के भीतर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया बेहद सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल है। राजस्व विभाग के पोर्टल पर सिटीजन अकाउंट बनाकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन या यूपीआई के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है।नई डिजिटल व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी त्वरित सूचना प्रणाली है। आवेदन दर्ज होते ही उसकी पावती सीधे आवेदक के व्हाट्सएप पर प्राप्त हो जाती है। यदि आवेदन में किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि होती है, तो उसकी सूचना भी तत्काल ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है, जिससे समय रहते आवश्यक सुधार किया जा सकता है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद अंतिम आदेश की प्रति भी व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध करा दी जाती है।पहले भूमि डायवर्सन जैसे कार्यों के लिए नागरिकों को पटवारी, राजस्व निरीक्षक और तहसील कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा अनावश्यक भाग-दौड़ से भी राहत मिली है। श्री शैलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि डिजिटल राजस्व सेवाओं ने आम नागरिकों के लिए शासन की कार्यप्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और सुलभ बना दिया है। उन्होंने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रदेश शासन एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग से राजस्व संबंधी सेवाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक और जनहितैषी बन गई हैं।
- पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय केनापारा बैकुण्ठपुर में सत्र 2027-28 के लिए प्रवेश परीक्षा 28 नवंबर को होगी आयोजितएमसीबी/ पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, केनापारा बैकुण्ठपुर, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु निःशुल्क ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक एवं पात्र छात्र 31 जुलाई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा 28 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।प्रवेश के लिए पात्रता के अनुसार छात्र वर्तमान में किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कक्षा 5वीं में अध्ययनरत होना चाहिए। वहीं छात्र की जन्मतिथि 01 मई 2015 से 31 जुलाई 2017 के मध्य (दोनों तिथियां सम्मिलित) होनी चाहिए।योग्य छात्र इंटरनेट सुविधा वाले कंप्यूटर अथवा मोबाइल के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) अथवा लोक सेवा केंद्र के माध्यम से भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है।अधिक जानकारी एवं ऑनलाइन आवेदन के लिए अभ्यर्थी www-navodaya-gov-in तथा https:@@cbseitms-rcil-gov-in@nvs के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
- रायपुर। बस्तर अंचल का नारायणपुर जिला आज बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभर रहा है। कभी विकास की कड़ियों से कोसों दूर दिखने वाले इस क्षेत्र की तस्वीर अब बदलने लगी है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा निर्मित आधुनिक शासकीय भवन केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीणों की उम्मीदों, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और नौनिहालों के भविष्य को गढ़ने वाले सशक्त केंद्र बन चुके हैं।कलेक्टर के मार्गदर्शन में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और आजीविका के क्षेत्रों में किए गए इन अधोसंरचना विकास कार्यों ने शासन की जनहितैषी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों के घर-आंगन तक पहुंचा दिया है।नारायणपुर के बेनूर गांव में 24.70 लाख रुपये की लागत से बना 'महतारी सदन' आज ग्रामीण महिलाओं की तकदीर बदल रहा है। यह सदन महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के लिए सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का पावरहाउस है।यहां महिलाएं विभिन्न स्थानीय उत्पादों का निर्माण, पैकेजिंग और कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रही हैं।जो महिलाएं कभी आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर थीं, वे आज स्वरोजगार के दम पर अपने परिवारों की रीढ़ बन चुकी हैं। जिले के पशुपालकों और किसानों की बड़ी चिंता को दूर करते हुए खनिज संस्थान न्यास (DMFT) निधि से 66.48 लाख रुपये की लागत से एक भव्य एवं आधुनिक जिला पशु चिकित्सालय भवन का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल में पशुओं के इलाज और सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब ग्रामीणों को अपने मवेशियों के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता। स्थानीय स्तर पर ही त्वरित और बेहतर इलाज मिलने से पशुधन सुरक्षित हो रहा है, जिससे डेयरी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत 50 लाख रुपये की लागत से तैयार 'सखी वन स्टॉप सेंटर' जिले की महिलाओं के लिए एक मजबूत संबल बनकर उभरा है। किसी भी प्रकार की हिंसा या विपरीत परिस्थितियों से पीड़ित महिलाओं को अब न्याय और सहायता के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। इस केंद्र में एक ही छत के नीचे कानूनी सलाह, आपातकालीन चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थाई आश्रय की सुविधा मिल रही है, जिसने बस्तर की महिलाओं में सुरक्षा की भावना और आत्मविश्वास को दोगुना कर दिया है।नीति आयोग के विशेष सहयोग से एड़समेटा जैसे दूरस्थ क्षेत्र में 23.33 लाख रुपये की लागत से 'ट्यूब्यूलर स्कूल शेड' का निर्माण किया गया है, जिसने बुनियादी शिक्षा का ढांचा ही बदल दिया। पहले जहां कड़े मौसम (कड़कती धूप और भारी बारिश) में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती थी, वहीं अब इस सुरक्षित शेड ने उन्हें एक बेहतरीन शैक्षणिक माहौल दिया है। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अंदरूनी इलाकों के बच्चों को भी अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है।नारायणपुर जिले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के माध्यम से किए गए ये सुनियोजित निर्माण कार्य इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि सही नीयत और सटीक योजना से बदलाव कैसे लाया जाता है। महिलाओं की सशक्तिकरण, बेजुबान पशुओं की सेवा, संकटग्रस्त बहनों को सुरक्षा और नौनिहालों को सुरक्षित शिक्षा देकर नारायणपुर आज छत्तीसगढ़ के विकास मानचित्र पर अपनी एक नई और सुनहरी पहचान दर्ज करा रहा है। यह सफर केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण का नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का महायज्ञ है।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के शहरों एवं नगरों में आधारभूत अधोसंरचना और सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के पत्थलगांव में निर्माणाधीन जूदेव चौक एवं बीटीआई तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने दोनों स्थलों का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया तथा अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कहा कि जूदेव चौक का विकास नगर की पहचान के अनुरूप आकर्षक, सुव्यवस्थित एवं जनोपयोगी स्थल के रूप में किया जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसी को गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करने और सभी कार्यों को तय समय में पूर्ण करने के निर्देश दिए।पत्थलगांव- अंबिकापुर मार्ग पर बस स्टैंड से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर लगभग 31.13 लाख रुपये की लागत से जूदेव चौक का निर्माण कराया जा रहा है। चौक में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा के समीप आकर्षक मिनी गार्डन विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, कलात्मक पेंटिंग, हरित क्षेत्र और अन्य सौंदर्यीकरण कार्यों के माध्यम से चौक को आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है।कलेक्टर श्री व्यास ने इसके बाद जूदेव चौक के समीप स्थित निर्माणाधीन बीटीआई तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। लगभग 24 लाख रुपये की लागत से तालाब का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्य में और तेजी लाने तथा सभी निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जूदेव चौक और बीटीआई तालाब का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण पूरा होने के बाद यह क्षेत्र स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों एवं आगंतुकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। साथ ही इससे पत्थलगांव नगर की सुंदरता, पहचान और पर्यटन संभावनाओं को भी नई पहचान मिलेगी। निरीक्षण के दौरान एसडीएम पत्थलगांव श्री ऋतुराज सिंह बिसेन, नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री मोहम्मद जावेद खान, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कमलकांत श्रीवास सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
- -डोंगाकोहरौद बस्ती मार्ग निर्माण के लिए 605.09 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति-4.337 किलोमीटर लंबी सड़क बनने से ग्रामीणों को मिलेगा सुरक्षित और सुगम आवागमन का लाभरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आवागमन सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत पामगढ़दृलाहौद मार्ग स्थित डोंगाकोहरौद बस्ती तक सड़क निर्माण कार्य के लिए 605.09 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।इस स्वीकृति के तहत 4.337 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जाएगा। यह मार्ग लंबे समय से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रहा है। सड़क निर्माण से डोंगाकोहरौद बस्ती सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को वर्षभर सुरक्षित, सुगम और बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी। नई सड़क बनने से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उपज के परिवहन तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। राज्य सरकार ग्रामीण संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
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0 रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल और रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा शामिल हुए
रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल और रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और पत्रकारों से संवाद किया तथा प्रेस क्लब के विकास, मीडिया की बदलती चुनौतियों और जनसंपर्क की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने कहा कि डिजिटल दौर में अटेंशन की होड़ ने पत्रकारिता के स्वरूप को बदल दिया है और मिसलीडिंग (भ्रामक) खबरों की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने कहा, "आज अटेंशन पाने का दौर है। लोगों का ध्यान आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में कई बार ऐसी खबरें सामने आती हैं जो भ्रामक होती हैं। अटेंशन के लिए हो रही पत्रकारिता का यह स्वरूप हम सभी को सोचने पर मजबूर करता है।"रजत बंसल ने कहा कि सोशल मीडिया और न्यू मीडिया माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच विश्वसनीय, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज और मीडियातीनों की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि सही और प्रमाणिक जानकारी लोगों तक पहुंचे।उन्होंने मीडिया से तथ्य आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि बदलते दौर में विश्वसनीयता ही मीडिया की सबसे बड़ी पूंजी है। पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के लिए उन्होंने प्रेस क्लब जैसी विश्वनीय संस्था से इस संबंध में आगे आने की अपील भी कीइस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व अध्यक्ष प्रेस क्लब प्रकाश शर्मा ने कहा कि जनसंपर्क विभाग और पत्रकारिता एक-दूसरे के पूरक हैं। जनसंपर्क के माध्यम से शासन की योजनाएं और नीतियां समाज तक पहुंचती हैं, जबकि पत्रकार तथ्यपरक और संतुलित तरीके से उन्हें जनता के सामने रखते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच नियमित संवाद, पारदर्शिता और विश्वास का रिश्ता लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है।वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व अध्यक्ष प्रेस क्लब बृजेश चौबे ने कहा कि पत्रकारों और जनसंपर्क विभाग के बीच बेहतर समन्वय, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और परस्पर सहयोग की भावना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ संवाद और विश्वसनीय सूचना व्यवस्था से न केवल मीडिया की साख मजबूत होती है, बल्कि शासन और आमजन के बीच भी प्रभावी संचार स्थापित होता है। ऐसे संवाद कार्यक्रम दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग को और सुदृढ़ करने का माध्यम बनते हैं।इस अवसर पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने आज के डिजिटल युग में खबरे की तीव्रता के साथ-साथ भ्रम की धुंध फ्री फैलने की बात भी कही , उन्होंने पत्रकारिता के सिद्धांतों को नए माध्यमों में भी परंपरागत रूप से जिंदा रखने पर जोर दिया और पत्रकारिता में सच की लौ से भ्रम के जाल को काटने की पत्रकारों की असली जवाबदेही से काम करने की जरूरत की बात कहीइस अवसर पर महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित कार्यकारिणी सदस्य संदीप पुराणिक , ज़ाकिर घुड़सेना , संतोष साहू चंदन साहू , नीरज मिश्रा, संजीव सिन्हा,रायपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष रामावतार तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, विजय मिश्रा, यशवंत धोटे, प्रफुल्ल पारे, रवि भोई, राजेश जोशी, ,संजीव वर्मा, ई व्ही मुरली, समीर शुक्ला, संदीप तिवारी,मनीष वोरा, शंकर चंद्राकर, पप्पू फरिश्ता, प्रदीप चंद्रवंशी, विजय मिश्रा, प्रहलाद दमाहे, मनोज बघेल, चंद्रकांत दौंड़,रमेश पाण्डेय, विनय घाटगे जतिन नचरानी,मनोज बघेल, गिरीश केसरवानी, वरिष्ठ पत्रकार एवं नगर निगम के अधिकारी उपस्थित रहे। - बलौदाबाजार। बारनवापारा अभयारण्य के वन परिक्षेत्र में मृत 3 चीतलों की पोस्टमार्टम कराई गई हैं एवं मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक एवं विधि सम्मत जांच कराई जाएगी।वनमण्डलाधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 जुलाई 2026 को बारनवापारा अभयारण्य के वन परिक्षेत्र बारनवापारा अंतर्गत पकरीद बीट के रामपुर चारागाह, कक्ष क्रमांक 127 में नियमित वन गश्त के दौरान 2 नर चीतल मृत अवस्था में पाए गए। दोनों चीतलों का शासकीय शल्य पशु चिकित्सालय, कसडोल के पशु चिकित्सकों द्वारा विधिवत पोस्टमार्टम कराया गया। प्रथम दृष्टया दोनों नर चीतलों के गले में आपसी संघर्ष (लड़ाई) के कारण चोट के निशान पाए गए। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के अन्य किसी भाग पर किसी मांसाहारी वन्यप्राणी द्वारा हमला किए जाने के निशान नहीं पाए गए। दोनों चीतलों के गले में रक्त के धब्बे अवश्य पाए गए हैं, किन्तु मृत्यु का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत ही स्पष्ट हो सकेगा। यह एक प्राकृतिक घटना प्रतीत होती है।इसी प्रकार 8 जुलाई 2026 को उसी कक्ष क्रमांक 127 के चारागाह क्षेत्र में वन गश्त के दौरान 1 अन्य चीतल मृत अवस्था में पाया गया। मौके के निरीक्षण में मृत चीतल के गले पर किसी हिंसक वन्यप्राणी द्वारा किए गए हमले के स्पष्ट निशान पाए गए। मृत चीतल के सभी अंग, सींग एवं खाल घटनास्थल पर सुरक्षित पाए गए, जिससे शिकार की कोई घटना परिलक्षित नहीं होती है। घटना के संबंध में निगरानी हेतु 8 जुलाई 2026 की शाम को उक्त क्षेत्र में ट्रैप कैमरा भी स्थापित किया गया है। वन्यप्राणियों के प्राकृतिक आवास में अनावश्यक हस्तक्षेप न करते हुए वन विभाग द्वारा आवश्यक निगरानी की जा रही है।बारनवापारा अभयारण्य के वन क्षेत्रों में अधिकारी एवं कर्मचारी प्रतिदिन नियमित रूप से गश्त कर वन्यप्राणियों की सुरक्षा एवं संरक्षण का कार्य कर रहे हैं।प्रकरण की वैज्ञानिक एवं विधिवत जांच की जा रही है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी। वन विभाग वन्यजीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है तथा अभ्यारण्य क्षेत्र में नियमित गश्त एवं निगरानी का कार्य सतत रूप से जारी है।
- बलौदाबाजार। प्राकृतिक आपदा से मृत परिवार के निकट परिजन के लिए 4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने राजस्व पुस्तक परिपत्र की धारा 6-4 के तहत ये स्वीकृतियां प्रदान की हैं। जिला कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित परिजन जानमति चेलक के पति ईतवारी चेलक निवासी ग्राम मटिया, तहसील टुण्डरा क़ी नहर नाली के पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। कलेक्टर ने संबंधित तहसीलदार को आरटीजीएस के जरिये पीड़ित के खाते में राशि जमा करने के निर्देश दिये हैं।
- -विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र-26 करोड़ के रेल ओवरब्रिज में दरारों पर डॉ. रमन सिंह गंभीर, लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की मांगरायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव जिले के बरगा, आलीवारा एवं मुसरा के समीप निर्मित रेल ओवरब्रिज में आई दरारों को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (बिलासपुर जोन, नागपुर मंडल) अंतर्गत डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड पर ग्राम बरगा, आलीवारा एवं मुसरा के समीप प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से रेल ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया था, जिसका लोकार्पण जून 2026 में हुआ था।उन्होंने बताया कि 4 एवं 5 जुलाई को जिले में हुई भारी वर्षा के बाद ओवरब्रिज में लगभग 60 से 70 फीट लंबी तथा 15 से 20 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें दिखाई दी हैं। इससे पुल की सुरक्षा एवं निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं। लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद इस प्रकार की क्षति अत्यंत चिंताजनक है तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासियों में भी इसे लेकर गहरी चिंता और नाराजगी है।डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री से आग्रह किया है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए तथा निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, परामर्शदाता और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि ओवरब्रिज का तत्काल सुरक्षा परीक्षण कराया जाए तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो।


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