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तालाबों को भरने गंगरेल का पट खोलने ज्ञापन
रायपुर। गर्मी बढ़ने के साथ - साथ ग्रामीण इलाकों में निस्तारी पानी का संकट गहराने लगा है । तालाब सूख चले हैं और भूगर्भीय जल स्त्रोत गिरने से ट्यूबवेलों /हेडपंपो ने पेयजल की भी समस्या खड़ी करना शुरू कर दिया है । इसके परिपेक्ष्य में महानदी मुख्य नहर पर चल रहे रेलवे क्रासिंग निर्माण कार्य को रूकवा गंगरेल का पट खोल प्राथमिकता के आधार पर तालाबों को भरने पानी देने की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय व मुख्य सचिव विकासशील को मेल से ज्ञापन भेज की गयी है । साथ ही क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल को भी ज्ञापन की प्रति भेज संसदीय क्षेत्र के ग्रामों में निस्तारी पानी की समस्या के मद्देनजर इस संबंध में अविलंब आवश्यक पहल का आग्रह किया गया है ।
रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र शर्मा ने प्रेषित ज्ञापन में जानकारी दी है कि बैशाख व जेठ मास में भीषण गर्मी पड़ती है और बैशाख माह शुरू होने में महज 02 दिन बाकी है । गहराते निस्तारी पानी व भूगर्भीय जल स्त्रोत के नीचे चले जाने की वजह से बढ़ रहे पेयजल की संकट के मद्देनजर अविलंब गंगरेल का पट खुलवा तालाबों को भरवाने का आग्रह किया गया है ताकि निस्तारी पानी की समस्या दूर होने के साथ - साथ भूगर्भीय जल स्त्रोत बढ़ने से पेयजल की समस्या भी कमतर हो सके । ज्ञापन में महानदी मुख्य नहर पर चल रहे रेलवे क्रासिंग निर्माण कार्य को फिलहाल रूकवा प्राथमिकता के आधार पर निस्तारी पानी दिलवाने का आग्रह किया गया है । बंगोली सिंचाई उपसंभाग के अधीन आने वाले सिंचाई पंचायतों के अध्यक्ष रहे थानसिंह साहू , गोविंद चंद्राकर , चिंताराम वर्मा , प्रहलाद चंद्राकर , मनमोहन गुप्ता , भारतेन्दु साहू , धनीराम साहू , हिरेश चंद्राकर , तुलाराम चन्द्राकार आदि ने भी तालाबों को भरने अविलंब गंगरेल से पानी देने की मांग की है । - -प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के घरों के सपनों के साथ आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी हो रहे सुनिश्चितरायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल करते हुए पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। राज्य ने न केवल सर्वाधिक आवास निर्माण पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है, बल्कि मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने हर्ष जताते हुए प्रदेशवासियों एवं हितग्राहियों को शुभकामनाएँ दी।उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत छत्तीसगढ़ ने 'एसएनए स्पर्श' के माध्यम से देश में सर्वाधिक व्यय कर उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2016 में योजना के प्रारंभ से अब तक एक ही वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण का रिकॉर्ड भी इसी वर्ष दर्ज किया गया है, जो राज्य की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि आवास से आजीविका’ के अभिनव प्रयास के अंतर्गत निर्माण सामग्री की आपूर्ति से हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। जिसमें रोजगार पाकर 9000 से अधिक बिहान दीदियाँ “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसके साथ ही इस वर्ष 6000 से अधिक राजमिस्त्रियों को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जो देश में सर्वाधिक है।उल्लेखनीय है कि इन प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों में 1400 महिलाएँ एवं 400 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल हैं, जो मुख्यधारा में जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। पीएम आवास ग्रामीण के हितग्राहियों को स्थायी आजीविका से जोड़ने हेतु महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत कार्य भी कराए गए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ग्रामीण विकास और गरीबों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल पक्के घरों का सपना साकार हो रहा है, बल्कि लोगों की आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित हो रही है। राज्य आगे भी इसी गति और प्रतिबद्धता के साथ विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा।
- -कप्तान किरण ने छत्तीसगढ़ को फुटबॉल फाइनल में पहुंचाया-मेजबान महिलाएँ हॉकी में कांस्य के लिए भिड़ेंगींरायपुर । कप्तान किरण पिस्दा की शानदार दोहरी भूमिका से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ की महिला फुटबॉल टीम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के फाइनल में जगह बना ली है, जबकि राज्य की महिला हॉकी टीम ने भी कांस्य पदक मुकाबले में पहुंचकर अपनी उम्मीदें बरकरार रखी हैं। भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी किरण ने मंगलवार को स्वामी विवेकानंद कोटा स्टेडियम में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच की स्टार रहीं। उनके हरफनमौला खेल की बदौलत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित समय के बाद 2-2 की बराबरी रहने पर पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से रोमांचक जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में अब तक करीब 20 गोल कर चुकीं किरण ने एक बार फिर आक्रामक भूमिका निभाते हुए 18वें मिनट में गोल कर मेजबान टीम को 2-0 की बढ़त दिलाई।हालांकि अरुणाचल प्रदेश ने 41वें और 86वें मिनट में गोल कर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया और मैच को शूटआउट में पहुंचा दिया। इसके बाद किरण ने साहसिक फैसला लेते हुए नियमित गोलकीपर योगिता की जगह खुद दस्ताने पहनकर गोलपोस्ट संभालने का निर्णय लिया। उनका यह निर्णय कप्तानी की मिसाल बन गया, जब उन्होंने दो शानदार बचाव किए और खुद एक पेनल्टी भी सफलतापूर्वक गोल में बदली, जिससे टीम को फाइनल का टिकट मिला। अंतिम पेनल्टी के गोल के साथ ही मेजबान टीम ने मैदान पर जश्न मनाना शुरू कर दिया।अपने प्रदर्शन पर किरण ने साई मीडिया से कहा, “मैं अपनी टीम को हर हाल में फाइनल में पहुंचाना चाहती थी। मुझे गोलकीपर के रूप में अच्छा करने का भरोसा था। मैंने पहले भी अपनी राज्य टीम के लिए यह भूमिका निभाई है। मेरी मेहनत सफल रही और हम फाइनल में हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।” अब फाइनल में छत्तीसगढ़ का सामना झारखंड और गुजरात के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। उल्लेखनीय है कि ग्रुप चरण में मेजबान टीम गुजरात को 2-1 से हरा चुकी है, जिसमें किरण ने भी एक गोल किया था।वहीं, इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में चल रही प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की महिला हॉकी टीम 1 अप्रैल को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में उतरेगी। सेमीफाइनल में मेजबान टीम को ओडिशा से 1-5 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब कप्तान कुजूर अश्विन के मार्गदर्शन में टीम पदक जीतने के लिए तैयार है। हॉकी का फाइनल भी 1 अप्रैल को झारखंड और ओडिशा के बीच खेला जाएगा।
- -सूरज नासिक में रहते हैं और ट्रेनिंग का खर्च हर महीने 2-3 दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से निकालते हैं-खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भाग लेने के लिए उन्हें एक साथी धावक से स्पाइक्स उधार लेने पड़ेरायपुर । नासिक के एथलेटिक्स ट्रैक पर सूरज माशी और उनके कुछ साथी अक्सर अपने सीनियर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग करते हुए बड़े ध्यान से देखते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे सिर्फ देख नहीं रहे होते, बल्कि हर छोटी-बड़ी चीज को समझकर उसे अपनी ट्रेनिंग में लागू करने की कोशिश करते हैं। सूरज उन आदिवासी खिलाड़ियों के समूह का हिस्सा हैं, जो हर महीने कोच की फीस नहीं दे सकते और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए जो भी मदद मिलती है, उसी पर निर्भर रहते हैं। दौड़ना ही उनका सबसे बड़ा हुनर है, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया है और जो एक दिन उनकी जिंदगी बदल सकता है।सूरज नासिक में रहते हैं और ट्रेनिंग का खर्च हर महीने 2-3 दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से निकालते हैंसूरज ने कहा, “कोचिंग फीस 4000 रुपये प्रति माह है, जिसे मैं वहन नहीं कर सकता। मैं नासिक में किराये पर रहकर पढ़ाई करता हूं और किराया मुझे महाराष्ट्र और गुजरात में दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से ही देना पड़ता है। इसलिए मैं खुद ही ट्रेनिंग करता हूं और जब कहीं अटकता हूं तो सीनियर्स या ट्राइबल विभाग के कोच से सलाह लेता हूं।” यही सूरज खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पुरुष 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतने में सफल रहे।सूरज हर महीने सिर्फ 300 रुपये देकर ट्रेनिंग सुविधा का उपयोग करते हैं और सेकेंड हैंड जूते और स्पाइक्स में अभ्यास करते हैं। उनके स्पाइक्स काफी घिस चुके थे, इसलिए उन्हें इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एक साथी धावक से स्पाइक्स उधार लेने पड़े। पालघर जिले के मोखाडा तालुका के एक छोटे से गांव से आने वाले सूरज की जिंदगी संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी है। वारली जनजाति से ताल्लुक रखने वाले सूरज, जो एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं और चार बहनों के बाद पैदा हुए पहले बेटे हैं, बचपन से ही आत्मनिर्भर रहे हैं। सरकारी आश्रम शाला में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने दौड़ना शुरू किया।स्कूल के एक खेल आयोजन के दौरान उन्हें दौड़ने का शौक लगा और तब से यह उनके जीवन का सहारा बन गया। जब सूरज 10वीं कक्षा में थे, उनकी मां घर में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गईं और अब चल-फिर नहीं पातीं। पिछले साल उनकी एक बड़ी बहन का निधन हो गया और उनके तीन छोटे भाई उनसे मार्गदर्शन और सहारे की उम्मीद रखते हैं। स्कूल पूरा करने के बाद सूरज पढ़ाई और खेल को आगे बढ़ाने के लिए नासिक चले गए, लेकिन शहर में रहना और परिवार का सहारा बनना उनके लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं स्थानीय प्रतियोगिताओं और क्रॉस-कंट्री दौड़ों में भाग लेकर हर महीने करीब 3000 से 5000 रुपये कमा लेता हूं। उसी में से कुछ पैसे बचाकर मैं अपने पिता को भेजता हूं और अपनी पढ़ाई, ट्रेनिंग और बाकी जरूरतें पूरी करता हूं।”इस साल जून में 19 साल के होने वाले सूरज ने 18 साल की उम्र के बाद पुलिस विभाग में नौकरी पाने की भी कोशिश की। उन्होंने ज्यादातर शारीरिक परीक्षण पास कर लिए, लेकिन शॉट पुट में निर्धारित दूरी पूरी नहीं कर पाने के कारण चयन से चूक गए। हालांकि नौकरी पाना अभी भी उनकी प्राथमिकता है, लेकिन सूरज को भरोसा है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में उनके प्रदर्शन से उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार खेलो इंडिया गेम्स के पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार भी देती है।
- रायपुर। बस्तर जिले धरमपुरा जगदलपुर स्थित क्रीड़ा परिसर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत मंगलवार को एथलेटिक्स की स्पर्धाओं ने दर्शकों में भारी उत्साह भर दिया। जनजातीय युवाओं के कौशल और शारीरिक दक्षता को समर्पित इस आयोजन के दूसरे दिन प्रातः कालीन विभिन्न स्पर्धाओं में रोमांच का माहौल रहा। पुरुष वर्ग की बाधा दौड़ में असम के खिलाड़ी त्रैलोक्य मसरोंग ने अपनी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 15.85 सेकंड में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। स्पर्धा में तेलंगाना के सपावत दत्तू ने 16.65 सेकंड के साथ रजत और त्रिपुरा के हरि मोहन त्रिपुरा ने 16.82 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया।इसके अलावा पुरुषों की 100 और 400 मीटर दौड़ में काँटे की टक्कर देखने को मिली। 400 मीटर दौड़ में गुजरात के एथलीट संतोषभाई उत्तमभाई गनवित ने 49.332 सेकंड में दौड़ पूरी कर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि ओडिशा के नोबल कुमार किसान महज 49.335 सेकंड के मामूली अंतर से पिछड़कर दूसरे स्थान पर रहे, तीसरे स्थान पर कर्नाटक राज्य के रामू रहे। 100 मीटर दौड़ में झारखंड के शिव कुमार सोरेन 10.58 मीटर में स्वर्ण, छत्तीसगढ़ राज्य के तिलक बर्सेल 10.87 के साथ दूसरे (रजत) और ओड़िसा के अतीश किंडो ने 10.91 के साथ तीसरा स्थान हासिल किया ।इसी तरह पुरुषों की लंबी कूद में लक्षद्वीप के अब्दुल फतह एनएम ने 7.03 मीटर की शानदार छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, तो वहीं ओडिशा के भीमा सरदार और जीवन मुक्ति बिलुंग ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।मैदानी स्पर्धाओं में शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी रहा, जहाँ पुरुष वर्ग की तवा फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में गुजरात के मकवाना दानिश दिलीपभाई ने 44.83 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता। छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण तब आया जब स्थानीय खिलाड़ी सिद्धार्थ नागेश ने 35.56 के स्कोर के साथ रजत पदक जीतकर घरेलू दर्शकों का उत्साह बढ़ा दिया। तीसरे स्थान पर ओड़िसा के चंद्रय मुर्मू रहे ।महिला वर्ग में भी देश की बेटियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। 100 मीटर दौड़ में झारखंड की पृथ्वी ओरव ने 12.73 सेकंड और नागालैंड की रुदुओलहौनुओं बेहो ने 16.81 सेकंड का समय निकालकरदूसरे स्थान हासिल किए, जबकि झारखंड की पुतुल बास्की ने कांस्य पदक जीता।
- -उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाईरायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
- रायपुर । भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति में आज लोक भवन, में एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी के बीच ‘लैब ऑन व्हील्स’ एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिए मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत जशपुर जिले के दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई है।इस परियोजना के तहत एक अत्याधुनिक मोबाइल लैब एम्बुलेंस जशपुर जिले के लिए उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 1 करोड़ 16 लाख 82 हजार रुपये है। इस मोबाइल प्रयोगशाला के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को विभिन्न जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे समय पर निदान और उपचार सुनिश्चित हो सकेगा।मेमोरेंडम आफ एग्रीमेंट एनएमडीसी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी और रेड क्रॉस जशपुर शाखा के बीच किया गया। इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना और जरूरतमंद लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।राज्यपाल रमेन डेका ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘लैब ऑन व्हील्स’ जैसी सुविधाएं विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से जरूरतमंद लोगों को समय पर जांच और उपचार उपलब्ध होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस अवसर पर संबंधित अधिकारियों एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में रेडियो संगवारी की टीम ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान टीम ने रेडियो संगवारी की परिकल्पना, उद्देश्यों तथा आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।टीम के संस्थापक श्री राहुल शर्मा ने बताया कि रेडियो संगवारी टीम द्वारा प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।राज्यपाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे प्रयास इसे संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने रेडियो संगवारी टीम को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान किया। इस अवसर पर रेडियो संगवारी टीम के डॉ. हेमंत सिरमौर, सुश्री श्रीया सिरमौर, श्री शिवनंदन सरोज, तिलका साहू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ के इतिहास में 31 मार्च 2026 का दिन एक अहम मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है. वर्षों से हिंसा, डर और बंदूक के साये में जी रहे दण्डकारण्य क्षेत्र ने अब शांति और भरोसे की ओर कदम बढ़ाया है. नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता तब सामने आई, जब 25 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में वापसी की. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे न केवल आत्मसमर्पण, बल्कि “विश्वास की जीत” बताया है.25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसीदण्डकारण्य क्षेत्र में चल रहे “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं. ये सभी माओवादी लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और अलग‑अलग हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं. आत्मसमर्पण के साथ ही इन कैडरों ने बंदूक छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताया है.सीएम विष्णुदेव साय ने बताया ऐतिहासिक दिनमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और डर की विचारधारा का आज अंत होता दिख रहा है. यह लोकतंत्र, जन‑विश्वास और सरकार की नीति की जीत है. मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए नई शुरुआत बताया.1.47 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडरमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादी कैडरों पर कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बढ़ रहा है.93 हथियार और 14 करोड़ से ज्यादा की बरामदगीसुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के चलते माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. इस कार्रवाई के दौरान 93 घातक हथियारों के साथ कुल ₹14.06 करोड़ की बरामदगी हुई है. यह बरामदगी साफ तौर पर दिखाती है कि नक्सली तंत्र अब कमजोर पड़ चुका है.दण्डकारण्य में लौट रहा शांति का भरोसामुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह घटना केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और शांति की वापसी है. दण्डकारण्य क्षेत्र अब धीरे‑धीरे सामान्य जीवन, स्थिरता और विकास की ओर बढ़ रहा है. यहां के लोग हिंसा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की चाह रख रहे हैं.इतिहास में याद रखा जाएगा 31 मार्च 2026मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तारीख के रूप में याद रखा जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आए. यह वह दिन है, जब प्रदेश ने हिंसा के अंधेरे से निकलकर एक नए और शांतिपूर्ण युग की ओर कदम बढ़ाया.
- -पूना मारगेम से बदली जिंदगीरायपुर । बस्तर अंचल में शांति और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 5 माओवादियों ने मंगलवार को समाज की मुख्यधारा में वापसी कर ली। इनमें 4 महिला माओवादी शामिल हैं। सभी पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था।पुलिस लाइन कारली में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान इन कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का संकल्प लिया। यह पहल जिले में संचालित पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत की गई, जो अब नक्सल प्रभावित युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन के एसीएम सोमे कड़ती सहित पार्टी सदस्य लखमा ओयाम, सरिता पोडियाम, जोगी कलमू और मोटी ओयाम शामिल हैं। ये सभी भैरमगढ़ और गंगालूर एरिया कमेटियों से जुड़े हुए थे।आत्मसमर्पण के बाद कैडरों से मिली अहम सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। इनमें 8 एसएलआर रायफल, 3 इंसास रायफल, 1 कार्बाइन, 1 .303 रायफल और 5 बीजीएल लॉन्चर सहित कुल 40 घातक हथियार शामिल हैं। इसे नक्सल विरोधी अभियानों में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता को गंभीर आघात पहुंचा है।पूना मारगेम से बदल रही तस्वीरदंतेवाड़ा जिले में वर्ष 2024 से अब तक 607 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि पुनर्वास नीति और भरोसेमंद माहौल के चलते नक्सल प्रभावित युवा अब हिंसा छोड़कर विकास की राह अपना रहे हैं। वहीं संयुक्त नक्सल उन्मूलन अभियानों में अब तक 92 माओवादियों की गिरफ्तारी और 54 माओवादियों के मुठभेड़ में न्यूट्रलाइज किए जाने की कार्रवाई भी की गई है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से लगातार दबाव बनाया जा रहा है।बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि पूना मारगेम पहल का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले युवाओं को पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। यह अभियान न केवल आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति, विकास और विश्वास का वातावरण भी मजबूत कर रहा है। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें समाज में पुनर्स्थापित करने का भरोसा दिलाया।
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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026
रायपुर/ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत आज सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में पिछले चार दिनों से जारी कुश्ती स्पर्धा का शानदार समापन आज हुआ। प्रथम ऐतिहासिक संस्करण में कर्नाटक की बेटी मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुश्ती के 76 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय है।
पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल
मनीषा का खेल जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद, उनकी माँ ने हार नहीं मानी और अकेले दिन-रात मेहनत करके मनीषा के सपनों को पंख दिए। पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीत चुकीं मनीषा के करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है।
स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार का मिला साथ
अपनी सफलता को साझा करते हुए मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, हॉस्टल के कोच और साथी खिलाड़ियों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरा बड़ा भाई मेरा मार्गदर्शक रहा है, वहीं छोटा भाई, जो खुद एक राज्य स्तरीय एथलीट है, वह मेरी सबसे बड़ी हिम्मत है।
ट्राइबल गेम्स- एक नई पहचान का मंच
मनीषा ने केंद्र सरकार और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच से जनजातीय समुदाय के बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला है। उन्होंने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा मैच के दौरान सुरक्षा, भोजन और यातायात की व्यवस्था बेहतरीन थी। छत्तीसगढ़ के लोगों का व्यवहार और यहाँ का माहौल खिलाड़ियों के लिए अत्यंत सुखद है।
लक्ष्य-अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना
स्वर्ण पदक की चमक के साथ मनीषा की निगाहें अब भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। छत्तीसगढ़ की धरती पर मिली इस सफलता से उत्साहित मनीषा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में जुटी हैं। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है। -
बस्तर में विश्वास की जीत : दण्डकारण्य में 25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी
रायपुर/छत्तीसगढ़ में आज 31 मार्च 2026 का दिन वामपंथी उग्रवाद के अंत के ऐतिहासिक और निर्णायक दिन के रूप में दर्ज हो रहा है। दण्डकारण्य क्षेत्र में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना नक्सल आतंक के समापन की दिशा में एक स्पष्ट और ठोस उपलब्धि के रूप में सामने आई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जब वर्षों से चली आ रही हिंसा और भय की विचारधारा ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास, लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 माओवादी कैडरों पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार की पुनर्वास नीति पर मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप माओवादी तंत्र निर्णायक रूप से कमजोर हुआ है। इसी क्रम में 93 घातक हथियारों के साथ ₹14.06 करोड़ की बड़ी बरामदगी भी हुई है, जो नक्सली नेटवर्क की कमजोर होती स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी है। दण्डकारण्य क्षेत्र आज शांति, स्थिरता और सामान्य जीवन की ओर लौटने के इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रहा है।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 का यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तिथि के रूप में याद किया जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आया और प्रदेश ने एक नए युग की दहलीज पर कदम रखा है। -
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति लेकर आए। -
रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।
उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। -
धरसींवा में आधुनिक तहसील कार्यालय का लोकार्पण
66.20 लाख की लागत से बना सर्वसुविधायुक्त भवन, राजस्व सेवाओं में आएगी तेजी और पारदर्शिता
रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर जिले के धरसींवा में नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण किया। यह पहल प्रशासनिक सेवाओं को आमजन के और अधिक निकट, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन का मूल उद्देश्य यही है कि नागरिकों को उनकी जरूरत की सेवाएं समय पर, सरल और पारदर्शी तरीके से मिलें। धरसींवा का यह नया तहसील कार्यालय इसी संकल्प को साकार करता है। उन्होंने कहा कि इस भवन के शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में अब अधिक सुविधा और तेजी मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर नागरिक को बिना किसी अनावश्यक परेशानी के बेहतर प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध हो।
नवनिर्मित तहसील कार्यालय में नायब नाजिर कक्ष, रिकॉर्ड रूम, माल जमार, नकल शाखा, कानूनगो कक्ष, भुइयां एवं भू-अभिलेख शाखा जैसी आवश्यक इकाइयों के साथ-साथ लोक सेवा केंद्र और आधार केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पेयजल सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक तहसील कार्यालय का निर्माण 66.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जो क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा और सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। -
बिलासपुर/मल्हार महोत्सव 2026 के दूसरे अंतिम दिन नितिन दुबे सुपरस्टार नाइट में छत्तीसगढ़ के मेलोडी किंग और सीजी रत्न नितिन दुबे ने अपनी अद्भुत लाइव प्रस्तुति से पूरे स्टेज को मंत्रमुग्ध कर दिया l मल्हार के ऐतिहासिक मेला मैदान में हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष दर्शक रात 12 बजे तक नितिन दुबे को सुनने के लिए इन्तेज़ार करते रहे। जैसे ही नितिन दुबे ने माइक संभाले, पूरा माहौल जसगीत और छत्तीसगढ़ी धुनों से गूंज उठा। उनके सुपरहिट गीत — रायगढ़ वाले राजा, गोंदा तोला रे, चंदा रे, नील परी एवं अन्य लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी नगमों पर दर्शक पूरी तरह मंत्रमुग्ध होकर थिरकने लगे।
स्टेज पर उनकी आवाज की मिठास और परफॉर्मेंस की ऊर्जा देखकर लोग अंतिम तक और एक बार की मांग करते रहे। नितिन दुबे की इस शानदार प्रस्तुति को देखकर सभी कह रहे हैं ये तो असली सुपरस्टार नाइट थी l यह मल्हार महोत्सव 2026 का सबसे यादगार और मंत्रमुग्ध करने वाला पल बन गया। इस अवसर पर मल्हार महोत्सव के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसदश्री तोखन साहू ने श्री दुबे को शानदार प्रस्तुति देने के लिए बधाई दी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया l नितिन दुबे ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को आधुनिक टच के साथ खूबसूरती से पेश किया। उनकी मीठी आवाज ने हर किसी के दिल को छू लिया। पूरा कार्यक्रम यू ट्यूब पर नितिन दुबे सुपर स्टार नाइट एवं मल्हार महोत्सव 2026 चैनल पर लाइव प्रसारित हुआ -
भिलाई/नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत पूर्व अपोलो वर्तमान हाई टेक अस्पताल का पार्ट पेमेंट राशि 612751 रु का चेक प्राप्त कर जमा कराया गया।
सूर्या मॉल से सम्पत्ति कर राशि 44,05,315 रु का चेक प्राप्त कर जमा कराया गया। -
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग और संचालक, कोष एवं लेखा के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में बिलासपुर जिले में ई कोष पोर्टल के अंतर्गत ओटीसी ई चालान प्रणाली कल 01 अप्रैल 2026 से लागू की जा रही है।
वरिष्ठ कोषालय अधिकारी, बिलासपुर बसंत गुलेरी ने जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग द्वारा राजस्व प्राप्तियों की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं पूर्णतः डिजिटल बनाने के उद्देश्य से भौतिक चालान प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। अब सभी प्रकार के चालान ई कोष के ई चालान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जनरेट किए जाएंगे। इसके अंतर्गत जमाकर्ता ऑनलाइन चालान तैयार कर संबंधित बैंक में जाकर राशि जमा कर सकेंगे, जिससे चालान की जानकारी स्वतः ऑनलाइन कोषालय प्रणाली में उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक चालान पर रेफरेंस नंबर (TRN) जनरेट होगा, जिससे चालान की ट्रैकिंग एवं सत्यापन सरल हो जाएगा। चालान जनरेट होने के पश्चात 7 दिवस के भीतर राशि जमा करना अनिवार्य होगा, अन्यथा चालान स्वतः निरस्त हो जाएगा। एक चालान में अधिकतम 5 हेड तक राशि दर्शाई जा सकती है। जमाकर्ताओं को ई चालान पोर्टल पर पंजीयन कर आवश्यक विवरण जैसे हेड ऑफ अकाउंट, राशि आदि भरकर ओटीसी विकल्प का चयन करना होगा एवं चालान जनरेट करना होगा। चालान का प्रिंट लेकर संबंधित बैंक शाखा में राशि जमा की जा सकेगी। इस संबंध में जिला कोषालय कार्यालय एवं बैंकों में विस्तृत प्रक्रिया से संबंधित बैनर/सूचनाएं प्रदर्शित की गई हैं, जिससे आम नागरिकों एवं जमाकर्ताओं को प्रक्रिया की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके। साथ ही, यदि किसी भी प्रकार की समस्या या तकनीकी कठिनाई आती है, तो संबंधित व्यक्ति जिला कोषालय कार्यालय, बिलासपुर से कार्यालयीन समय में संपर्क कर सकते हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी, मैन्युअल त्रुटियों में कमी आएगी तथा कोषालय को रियल-टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा। जिला प्रशासन द्वारा सभी विभागों, डीडीओ तथा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस नई डिजिटल व्यवस्था का अधिकतम उपयोग करें एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें। -
*13.4 किमी सड़क का होगा उन्नयन, 60 मीटर लंबा पुल भी बनेगा*
*उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद प्रशासकीय स्वीकृति का पत्र जारी*बिलासपुर/ राज्य शासन ने रायगढ़ जिले में दनौट कया-कमतरा मार्ग के उन्नयन के लिए 18 करोड़ 71 लाख 96 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 13.4 किमी सड़क के उन्नयन के साथ ही 60 मीटर लंबा पुल भी बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। -
रायपुर। गर्मी बढ़ने के साथ - साथ ग्रामीण इलाकों में निस्तारी पानी का संकट गहराने लगा है । तालाब सूख चले हैं और भूगर्भीय जल स्त्रोत गिरने से ट्यूबवेलों /
हेडपंपो ने पेयजल की भी समस्या खड़ी करना शुरू कर दिया है । इसके परिपेक्ष्य में महानदी मुख्य नहर पर चल रहे रेलवे क्रासिंग निर्माण कार्य को रूकवा गंगरेल का पट खोल प्राथमिकता के आधार पर तालाबों को भरने पानी देने की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय व मुख्य सचिव विकासशील को मेल से ज्ञापन भेज की गयी है । साथ ही क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल को भी ज्ञापन की प्रति भेज संसदीय क्षेत्र के ग्रामों में निस्तारी पानी की समस्या के मद्देनजर इस संबंध में अविलंब आवश्यक पहल का आग्रह किया गया है ।रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र शर्मा ने प्रेषित ज्ञापन में जानकारी दी है कि बैशाख व जेठ मास में भीषण गर्मी पड़ती है और बैशाख माह शुरू होने में महज 02 दिन बाकी है । गहराते निस्तारी पानी व भूगर्भीय जल स्त्रोत के नीचे चले जाने की वजह से बढ़ रहे पेयजल की संकट के मद्देनजर अविलंब गंगरेल का पट खुलवा तालाबों को भरवाने का आग्रह किया गया है ताकि निस्तारी पानी की समस्या दूर होने के साथ - साथ भूगर्भीय जल स्त्रोत बढ़ने से पेयजल की समस्या भी कमतर हो सके । ज्ञापन में महानदी मुख्य नहर पर चल रहे रेलवे क्रासिंग निर्माण कार्य को फिलहाल रूकवा प्राथमिकता के आधार पर निस्तारी पानी दिलवाने का आग्रह किया गया है । बंगोली सिंचाई उपसंभाग के अधीन आने वाले सिंचाई पंचायतों के अध्यक्ष रहे थानसिंह साहू , गोविंद चंद्राकर , चिंताराम वर्मा , प्रहलाद चंद्राकर , मनमोहन गुप्ता , भारतेन्दु साहू , धनीराम साहू , हिरेश चंद्राकर , तुलाराम चन्द्राकार आदि ने भी तालाबों को भरने अविलंब गंगरेल से पानी देने की मांग की है । - -कुश्ती शुरू करने के कुछ समय बाद ही पूनम का कंधा उतर गया था और फिर उन्हें एक साल तक मैट से दूर रहना पड़ा-गेम्स शुरू होने से ठीक पहले उनके कंधे में फिर से परेशानी होने लगी थी, लेकिन इस बार उन्होंने दर्द को मात देकर गोल्ड मेडल जीतारायपुर / कुश्ती जैसे खेल में जहां फिटनेस और ताकत सबसे बड़ी जरूरत होती है, वहां चोटिल कंधे के साथ मैट पर उतरना अपने आप में बड़ा जोखिम है। लेकिन झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने इस जोखिम को चुनौती में बदला और दर्द के बावजूद मुकाबले दर मुकाबले जीत हासिल करते हुए पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।फाइनल में भी पूनम बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के साथ दर्द साफ नजर आ रहा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अंत तक लड़ते हुए मुकाबला अपने पक्ष में किया। पूनम ने महिलाओं की 50 किग्रा वर्ग के फाइनल में तेलंगाना की के. गीता को हराकर स्वर्ण पदक जीता।अपने करियर का पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूनम ने साई मीडिया से कहा, “हार कैसे मान लेती सर? जब नौ साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मान लेती। मेरी यह चोट बहुत पुरानी है। छह साल पहले मेरा कंधा उतर गया था। बीच में ठीक हुआ, लेकिन फिर ट्रेनिंग के दौरान दोबारा चोट लग गई। इसके बावजूद मैंने वापसी की और अब मैंने यहां पर गोल्ड जीता है।" उन्होंने कहा,''अपने करियर की शुरुआत से ही मैं चोटों से जूझ रही हूँ, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। गोल्ड मेडल जीतना किसी सपने के सच होने जैसा लगता है। नौ साल तक गोल्ड न जीत पाने के दर्द के मुकाबले यह चोट कुछ भी नहीं है।'झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली पूनम के लिए यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी है। साल 2017 में जब उन्होंने कुश्ती की शुरुआत की थी, उसी दौरान एक गंभीर चोट ने उन्हें करीब एक साल तक मैट से दूर कर दिया। वापसी के बाद उन्होंने 2018 और 2019 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) में कांस्य पदक जीते, लेकिन इसके बाद पदक जीतने का इंतजार लंबा चला।पूनम बताती हैं कि इस प्रतियोगिता में उतरने से पहले भी वह पूरी तरह फिट नहीं थीं। उन्होंने कहा, '' घर वाले मना कर रहे थे, लेकिन कोच और सपोर्ट स्टाफ को मुझ पर भरोसा था। उनके सपोर्ट से ही मैं खेल पाई और गोल्ड जीत सकी। छह साल बाद कोई पदक जीतना मेरे लिए बहुत खास है और इसके पीछे मेरी दृढ़ इच्छाशक्ति है।'' वह पिछले करीब एक दशक से रांची के हॉस्टल में रहकर अभ्यास कर रहीं हैं।ऑरन समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पूनम के लिए यह स्वर्ण पदक खास मायने रखता है। वह कहती हैं, '' इसके मुझे काफी लंबा इंतजार करना पड़ा है। करियर की शुरुआत से ही मैं चोट से जूझ रही हूं, लेकिन कभी हार नहीं मानी। इसके बाद कोई स्वर्ण पदक जीतना, मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है।'' कुश्ती के साथ-साथ पढ़ाई में भी संतुलन बनाए रखते हुए, पूनम अभी रांची यूनिवर्सिटी से बीए (पॉलिटिकल साइंस) की पढ़ाई भी कर रही है। अब वह जूनियर नेशनल्स के लिए झारखंड टीम में जगह बनाने पर ध्यान दे रही हैं।पूनम ने कहा,” मेरा अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए क्वालीफाई करना है और मैं इस स्वर्णिम सफलता को आगे भी जारी रखना चाहती हूं।”
- बिलासपुर. एकीकृत बाल विकास परियोजना सरकण्डा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 43 के आंगनबाड़ी केंद्र देवरीखुर्द 04 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की पदपूर्ति पदोन्नति प्रक्रिया के तहत की जानी है। पदपूर्ति हेतु अंनतिम मूल्यांकन पत्र जारी किया गया है। दावा आपत्ति 4 अप्रैल तक सप्रमाण कार्यालय एकीकृत बाल विकास परियोजना सरकण्डा में प्रस्तुत किये जा सकते है।
- बिलासपुर. टीबी मुक्त भारत अभियान 100 दिवसीय अंतर्गत जीवनदीप समिति के तहत एक्स-रे टेक्नीशियन की भर्ती की जानी है। इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थियों से 7 दिवस के भीतर आवेदन मंगाए गए हैं। आवेदन सभी आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेजों की छायाप्रति के साथ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजकिशोर नगर में जमा किए जा सकते हैं।
- 0- सड़क सुरक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजितबिलासपुर. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर द्वारा सड़क सुरक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, ब्लैक-स्पॉट्स की पहचान, उनके उपचार एवं रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।तकनीकी सत्र के दौरान रोड सेफ्टी विशेषज्ञ श्री विवेक सिंह ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ब्लैक-स्पॉट्स की पहचान और उनके समाधान से जुड़ी विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से ब्लैक-स्पॉट्स विश्लेषण और समयबद्ध सुधार कार्य सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।कार्यशाला में एनएचएआई के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी श्री प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए रोड साइनेज, स्पीड मैनेजमेंट, उचित लेन मार्किंग और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। एनएचएआई हाईवे सुरक्षा को बेहतर बनाने, दुर्घटनाओं में कमी लाने और ब्लैक-स्पॉट्स सुधार कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता श्री जे.पी. तिग्गा, कार्यपालन अभियंता श्री रविंद्र खांबरा और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के कार्यपालन अभियंता श्री रामवीर यादव सहित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की विभिन्न परियोजना इकाइयों के परियोजना निदेशक श्री मुकेश कुमार (बिलासपुर) एवं श्री डी.डी. पार्लावार (कोरबा) भी मौजूद थे।
- 0- रेलवे परिसर में दिल्ली से आई खेप को लेकर फैली खबरों पर प्रशासन ने दिया स्पष्टीकरणबिलासपुर. जिले के शासकीय कुक्कुट फार्म कोनी में 24 मार्च को बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और एहतियात के तौर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मुर्गी एवं उससे संबंधित सामग्री की लगातार जांच की जा रही है। यह कार्रवाई विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा की जा रही है।इसी बीच कुछ स्थानीय मीडिया में प्रकाशित खबर “रेलवे परिसर में दिल्ली से आई मुर्गी चूजों की खेप” को लेकर पशु चिकित्सा विभाग ने तथ्य स्पष्ट किए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित विभाग द्वारा रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त की गई। रेलवे मंडल वाणिज्य प्रबंधक के 30 मार्च 2026 के पत्र के अनुसार, दिल्ली से गाड़ी क्रमांक 12442 राजधानी एक्सप्रेस के माध्यम से कुल 17 डिब्बों में चूजे बिलासपुर लाए गए थे, जिन्हें यहां से श्री आकाश नायक द्वारा प्राप्त कर जिला रायगढ़ भेजा गया। प्रशासन द्वारा संबंधित व्यक्ति से फोन पर चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि चूजों को सुरक्षित रूप से रायगढ़ ले जाया गया तथा उनमें किसी भी प्रकार के संक्रामक रोग के लक्षण नहीं पाए गए। प्रशासन ने रेलवे अधिकारियों से चर्चा कर भविष्य में इस प्रकार की खेपों की पूर्व सूचना संबंधित विभाग को देने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि सतर्कता और निगरानी बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सके। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।









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