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बिलासपुर/भारतीय भक्ति संगीत जगत के ख्यातिप्राप्त गायक पद्मश्री भारती बंधु ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार कला और कलाकारों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक महोत्सव कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं, जिससे लोक कला एवं परंपराओं को नई ऊर्जा मिल रही है। पद्मश्री भारती बंधु जिला प्रशासन के आमंत्रण पर मल्हार महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने बिलासपुर पहुंचे थे। पद्मश्री भारती बंधु ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कला और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के लिए सार्थक पहल की जा रही है। इन प्रयासों के कारण प्रदेश के कलाकारों में उत्साह का वातावरण बना है और युवा पीढ़ी भी पारंपरिक कला विधाओं और संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रही है। छत्तीसगढ़ भवन में चर्चा के दौरान उन्होंने मल्हार महोत्सव के पुनः भव्य और जीवंत स्वरूप में आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कलाकारों को मंच मिलता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति को भी व्यापक पहचान मिलती है। उन्होंने इस गरिमामयी आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और आमंत्रण के लिए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। भजन गायकी की अपनी विशिष्ट और पारंपरिक शैली पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वे इस विधा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके द्वारा अब तक 10,000 से अधिक युवाओं को भजन गायन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रख्यात भजन गायक भारती बंधु को भारत सरकार द्वारा चौथे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। भारती बंधु ने देश-विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया है। उनकी प्रस्तुतियां न केवल आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती हैं, बल्कि श्रोताओं के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का भी संचार करती हैं। पद्मश्री भारती बंधु ने यह भी बताया कि उन्होंने देशभर की अनेक जेलों में बंदियों के समक्ष भजन प्रस्तुतियां दी हैं, जिनका प्रभाव बंदियों पर बेहद सकारात्मक रहा है। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बंदियों के जीवन में आत्मचिंतन, सुधार और नई दिशा की चेतना उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को सहेजने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है, और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इसके संरक्षण हेतु मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयास सराहनीय है। - रायपुर/ साल 2021 में जब कोमालिका बारी ने अपनी राज्य की साथी दीपिका कुमारी की बराबरी करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनने का गौरव हासिल किया, तब जमशेदपुर की इस खिलाड़ी से काफी सारी उम्मीदें जुड़ गई थीं।हालांकि, जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर सर्किट में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। कोमालिका एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक वह पूरी तरह अपनी जगह पक्की नहीं कर पाई हैं।अब 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में चयन की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, ऐसे में कोमालिका ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक को निखारने के साथ-साथ मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।कोमालिका ने साई मीडिया को कहा कि, “मैं फिलहाल टॉप-16 में हूं और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हूं। एशियाई खेलों के चयन को लेकर मैं गंभीरता से तैयारी कर रही हूं। साथ ही, मैं ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अनुभव हासिल करना चाहती हूं, जबकि अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी बनाए रख रही हूं।”झारखंड की यह प्रतिभाशाली तीरंदाज यहां जारी पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी प्रतियोगिता की प्रमुख आकर्षण हैं। कोमालिका ने आगे कहा कि, “मेरा अंतिम लक्ष्य (2028) ओलंपिक है। इस समय मेरा प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है और मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मानसिक रूप से मजबूत रहने पर है, क्योंकि प्रदर्शन में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।” वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं, “मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उतार- चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर आगे बढ़ा जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि मैच अनुभव हासिल करने के अलावा वह अधिक से अधिक जनजातीय बच्चों को इस खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।कोमालिका ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया। उन्हें उनकी मां, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का पूरा समर्थन मिला। उनकी मां ही उन्हें बिरसानगर में स्थानीय तीरंदाजी कोच के पास लेकर गईं, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। साल 2012 में कोमालिका ने अपने शुरुआती संघर्षों का सामना करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अभ्यास के लिए धनुष खरीद सकें, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बांस से बने अस्थायी धनुष का सहारा लिया।प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद कोमालिका ने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी तथा पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। लेकिन देश की इस प्रतिष्ठित अकादमी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर वहां पहुंचना पड़ता था।वह कहती हैं, “जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरे कई सीनियर खिलाड़ी थे जिन्हें मैं रोल मॉडल मानती थी। हमें उन्हें आमतौर पर सिर्फ प्रतियोगिताओं के दौरान देखने का मौका मिलता था और इससे हमें काफी प्रेरणा मिलती थी।”उन्होंने आगे कहा कि , “यही एक बड़ा कारण है कि मैं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में हिस्सा ले रही हूं। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे खेलते हुए देखें और आगे आकर भाग लेने के लिए प्रेरित हों। अभी भी कई लोग भाग नहीं ले रहे हैं, लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक बहुत अच्छा मंच है, जो प्रेरणा और अवसर दोनों प्रदान करता है।”24 वर्षीय कोमालिका रायपुर में जारी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में व्यक्तिगत रजत पदक जीत चुकी कोमालिका इस मंच के महत्व को भली-भांति समझती हैं और मानती हैं कि ट्राइबल गेम्स जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के विकास को नई गति दे सकते हैं। वे कहती हैं कि, “ट्राइबल गेम्स पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने की क्षमता रखते हैं, खासकर जनजातीय खिलाड़ियों के लिए। खेलो इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम और इन खेलों का आयोजन बेहद प्रभावशाली है। आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहां कई खेल एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, ठीक राष्ट्रीय खेलों की तरह।
- रायपुर/ वन क्षेत्रों और वन्यजीव अभयारण्यों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आवारा कुत्तों द्वारा हिरणों को मार डालने की घटना के बाद यह कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने वन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ा दी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने इस संबंध में सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।उल्लेखनीय है कि यह निर्णय सरगुजा वनमंडल के अंबिकापुर स्थित संजय वाटिका में 20-21 मार्च की रात हुई घटना के बाद लिया गया है, जिसमें आवारा कुत्तों ने बाड़े में घुसकर 15 शाकाहारी वन्यप्राणियों को मार दिया था। इस घटना की जांच के लिए पहले ही उच्च स्तरीय समिति गठित की जा चुकी है।मुख्य निर्देश और उपाय---SOP का कड़ाई से पालनराष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन किया जाएगा। इसके लिए अगले दो सप्ताह में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।पालतू कुत्तों की पहचान (कलर कोडिंग)वन क्षेत्रों के पास स्थित गांवों में पालतू कुत्तों को विशेष रंग के पट्टे (कॉलर) पहनाए जाएंगे, ताकि उनकी पहचान हो सके। यदि कोई पालतू कुत्ता वन क्षेत्र में पाया जाता है, तो उसके मालिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।मानवीय तरीके से नियंत्रणआवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन के लिए “एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया” (AWBI) के दिशा- निर्देशों का पालन किया जाएगा। इस दौरान पशु कल्याण के सभी मानकों का ध्यान रखा जाएगा।जन जागरूकता अभियानवन क्षेत्रों के आसपास के गांवों में पोस्टर, बैनर और ग्राम सभाओं के माध्यम से जन जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसका उद्देश्य वन्यप्राणियों को हमले से और रैबीज जैसी बीमारियों से बचाना है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा है कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए यह कदम बेहद जरूरी है। सभी वनमंडलाधिकारियों को अपने- अपने क्षेत्रों में ग्रामवार योजना बनाकर समयबद्ध तरीके से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
- रायपुर/आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, (टीआरटीआई) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नवा रायपुर, अटल नगर, सेक्टर-24 परिसर में स्थापित ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ एवं जनजातीय संग्रहालय‘‘ के रख-रखाव हेतु आपदा प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान की संचालक श्रीमती हिना अमिनेष नेताम सहित संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण होमगार्ड, सिविल डिफेंस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एसडीआरएफ के सौजन्य से आयोजित किया गया।इस प्रशिक्षण में एसडीआरएफ की दक्ष टीम द्वारा ‘‘आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया’’ विषय पर सारगर्भित तकनीकी और अनुभविक जानकारी श्री पुष्पराज सिंह जी के नेतृत्व में श्री दीपक कौशिक एवं श्री राकेश भोयर, सहायक उपनिरीक्षक के द्वारा प्रदान किया गया। प्रशिक्षण पश्चात् आपदा प्रबंधन के व्यवहारिक एवं प्रायोगिक पक्ष का प्रदर्शन संस्थान के खुले परिसर में किया गया जिसमें विभिन्न प्रकार की आग आदि जैसी आपदा से तत्कालिक बचाव प्रतिक्रिया से समस्त अमलों और संग्रहालय भ्रमण हेतु आये आगंतुको एवं विद्यार्थियों द्वारा भी हैण्ड्स ऑन प्रेक्टिस की गई।संस्थान की संचालक हिना अनिमेष नेताम द्वारा बताया गया कि, यह प्रशिक्षण सभी के लिये लाभदायक रहा है जो कार्यस्थल और पारिवारिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण रहा है। साथ ही आने वाले समय में ऐसे और भी प्रशिक्षण विशेषकर आपातकालीन स्वास्थ विषयों पर भी किये जाने है।
- महासमुंद / जनगणना कार्य का प्रथम चरण जिले में 1 से 30 मई तक किया जाएगा। इस दौरान प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मोबाइल एप के माध्यम से कुल 34 प्रश्नों की जानकारी ली जाएगी। चूंकि जनगणना कार्य डिजिटल रूप में पहली बार होने वाली है, इसलिए प्रगणकों को इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाएगा।इसी परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार डिप्टी कलेक्टर एवं जिला जनगणना अधिकारी श्री मनोज कुमार खांडे की उपस्थिति में प्रगणकों को प्रशिक्षण देने वाले फील्ड ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण जनपद पंचायत बसना में आयोजित किया गया। जिसमें सरायपाली, बसना और पिथौरा के कुल 23 फील्ड ट्रेनर्स प्रशिक्षण प्राप्त किए। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस उद्घाटन अवसर पर एसडीएम बसना श्री हरिशंकर पैकरा ने फील्ड ट्रेनर्स को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें तथा हर शंका का समाधान मास्टर ट्रेनर से पूछकर अवश्य करें।प्रशिक्षण के अंतिम दिवस जिला मास्टर ट्रेनर तोषण गिरि गोस्वामी तथा नसीब खान द्वारा सभी फील्ड ट्रेनर्स को बसना नगर के वार्ड नंबर एक तथा ग्राम खेमड़ा ले जाकर जनगणना कार्य का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें प्रत्येक फील्ड ट्रेनर्स द्वारा दस से पंद्रह घरों में जाकर वांछित प्रश्नों के उत्तर पूछकर मोबाइल एप द्वारा प्रविष्टि किया गया। इसमें आवास, आवास सह अन्य उपयोग, दुकान, कार्यालय, खाली मकान आदि विभिन्न इकाइयों का मकानसूचीकरण किस प्रकार की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी मास्टर ट्रेनर द्वारा मौके पर व्यवहारिक रूप से दिया गया।इस दौरान तहसीलदार श्री कृष्ण कुमार साहू, सीएमओ नगर पंचायत बसना श्री सूरज कुमार सिदार तथा उनके कार्यालयीन स्टाफ भी सहयोग के लिए उपस्थित थे। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले फील्ड ट्रेनर्स द्वारा अब अपने अपने नगरीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नियुक्त प्रगणकों तथा सुपरवाइजरों को अप्रैल महीने में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- -पक्की सड़के, नल जल, विद्युत सुविधा से कमार डेरा में आई नई खुशहाली-साथ ही आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे उनका हक भी मिल रहामहासमुंद / जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय का जीवन कभी अभावों और कठिनाइयों से घिरा हुआ था। ये लोग गांव और शहरों की मुख्य बसाहटों से दूर छोटे-छोटे डेरों में रहते थे। ऐसे में पक्की सड़क, बिजली, स्वच्छ पेयजल, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव की स्थिति में इनका जीवन पूरी तरह जंगल और मजदूरी पर निर्भर था। वनोपज संग्रह, बांस के सामान बनाना और पारंपरिक खेती ही इनके जीविकोपार्जन के साधन थे। मुख्यधारा से दूरी के कारण इनकी बड़ी आबादी शासकीय योजनाओं के लाभ से भी वंचित थी। अधिकांश लोगों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता या आयुष्मान कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं थे। आदिम जाति अनुसंधान केंद्र के आधारभूत सर्वेक्षण 2015-16 के आधार पर महासमुंद जिले में इनका सर्वे कार्य किया गया था जिसके आधार पर वर्तमान में कुल 923 कमार परिवार में कुल जनसंख्या 3309 है, जिनमे पुरुष जनसंख्या 1614 एवं महिला जनसंख्या 1695 है। सर्वे के अनुसार महासमुंद विकासखंड में 41 ग्राम, बागबाहरा विकासखंड में 33 ग्राम एवं पिथौरा विकासखंड में 2 ग्राम कुल 76 ग्राम में कमार परिवार निवासरत है।जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर शुरू हुई प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) योजना पीव्हीटीजी समुदाय के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। जिला प्रशासन द्वारा इस योजना को गंभीरता से लागू करते हुए सबसे पहले कमार जनजाति के हर परिवार तक पहुंचने का प्रयास किया। जिससे जिले के 26 सड़क विहीन बसाहटों में पक्की सड़कों का निर्माण किया गया है। इससे दूर-दराज के डेरों का संपर्क मुख्य गांवों और शहरों से जुड़ने लगा। नल-जल योजना के माध्यम से सभी घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। जिन घरों में कभी अंधेरा रहता था, वहां अब बिजली पहुंच चुकी है, अब बच्चे रात में भी पढ़ाई कर पा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 678 कच्चे घरों की जगह पक्के मकानों का निर्माण हुआ, जिससे इन परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला। बहुद्देशीय केंद्रों की स्थापना से एक ही स्थान पर आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य सेवाएं और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां शुरू हुईं, जिससे महिलाओं और बच्चों को विशेष लाभ मिला। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अब सीधे इन बस्तियों तक पहुंच रही हैं, जिससे इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता।आधारभूत सुविधाओं के साथ लोगों को उनके अधिकारों से भी जोड़ा गया। विशेष शिविरों के माध्यम से शत प्रतिशत पात्र हितग्राहियों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते और जाति प्रमाण पत्र बनवाए गए। किसान सम्मान निधि हेतु 1461 का लक्ष्य था जिसे शत प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। अब हर परिवार को नियमित रूप से राशन मिल रहा है। आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने लगी है और बैंक खाते खुलने से शासकीय योजनाओं की राशि सीधे उनके खातों में पहुंच रही है। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जहां पहले जीवन संघर्ष और अभावों में बीतता था, वहीं अब आत्मविश्वास और आशा की नई रोशनी दिखाई देती है तथा धीरे-धीरे यह समुदाय विकास की मुख्यधारा से जुड़ता जा रहा है।
- -नगर निगम जोन 8 कमिश्नर के नेतृत्व में कुल 28 बकायादारों पर अभियान चलाकर बकाया राजस्व वसूली हेतु कार्यवाहीरायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार और नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल के नेतृत्व और नगर निगम जोन 8 सहायक राजस्व अधिकारी श्री महादेव रक्सेल के मार्गदर्शन और राजस्व निरीक्षक श्री राजेश मिश्रा, सहायक राजस्व निरीक्षक सर्वश्री नंदकुमार वैष्णव, राकेश दुबे, नरेन्द्र ठाकुर, खगेंद्र सोनी, राम कुमार औसर की उपस्थिति में नगर पालिक निगम जोन 8 की राजस्व विभाग की टीम द्वारा नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 8 अंतर्गत वीर सावरकर नगर वार्ड कमांक 1, पण्डित जवाहर लाल नेहरू वार्ड क्रमांक 2, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड क्रमांक 19 और शहीद भगत सिंह वार्ड क्रमांक 21 क्षेत्र अंतर्गत कूल 28 बडे बकायादारों द्वारा विगत कई वर्षों से बकाया राशि नगर पालिक निगम रायपुर द्वारा डिमांड बिल डिमांड नोटिस एवं अंतिम नोटिस जारी करने के उपरांत भी नगर निगम जोन 8 राजस्व विभाग को बकाया राशि अदा नहीं करने पर अभियान चलाया. इन बड़े बकायादारों में संबंधित 14 बड़े बकायादारो के 8 व्यवसायिक परिसरो को तत्काल ताला लगाकर सीलबंद करने की कडी कार्यवाही की गयी.वहीं इन बकायादारों में एक बड़े बकायादार संत रविदास वार्ड क्रमांक 70 के 39487 रूपये के बड़े बकायादार राजदेव प्रसाद यादव /ईश्वर प्रसाद ने सीलबंदी कार्यवाही के दौरान बकाया का पार्ट पेमेंट तत्काल कर दिया और शेष बकाया दिनांक 31 मार्च 2026 तक देने का आश्वासन दिया. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड क्रमांक 19 के क्षेत्र के 26901 रूपये के एक अन्य बड़े बकायादार गोदावरी बाई साहू ने सीलबंदी के दौरान कल तक बकाया राशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया. तीन अन्य बड़े बकायादारों डॉ एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड के 57614 रूपये के बकायादार हितेन्द्र साहू और इसी वार्ड के 38410 रूपये के बकायादार रमेश्वरी साहू और शहीद भगत सिंह वार्ड क्षेत्र के 46917 रूपये के बकायादार गगरीन कुट्टी और अमर कुट्टी ने आज आरटीजीएस के माध्यम से अपना बकाया भुगतान करने का आश्वासन दिया.रायपुर नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल एवं सहायक राजस्व अधिकारी श्री महादेव रक्सेल ने बताया कि आज रायपुर नगर पालिक निगम जोन 8 राजस्व विभाग द्वारा जोन क्षेत्र अंतर्गत वीर सावरकर नगर वार्ड कमांक 1 अंतर्गत 529434 रू. के बकायेदार प्रितम सिंग जीत सिंग, 58129 रू. के बकायेदार जगमीत सिंह, 78339 रू. के बकायेदार पवन कुमार सरावगी, 357717 रू. के बकायेदार मुन्नी चक्रधारी वगैरह, 452317 रू. के बकायेदार हरवंश सिंग, महेन्द्र सिंग, सुरजीत कौर वगैरह, 183697 रू. के बकायेदार राहुल धारीवाल, रू. 141022 रू. के बकायेदार आदिल खान, 117410 रू. के बकायादार सुरेन्दर सिंग, गुरविंदर सिंग, 142308 रू. के बकायेदार संजय कुमार सुमन जयराम कुमार साव / रामधनी साव के संबंधित व्यवसायिक परिसर में तत्काल ताला लगाकर सीलबंदी की कार्यवाही बकाया राशि रायपुर नगर पालिक निगम जोन 8 राजस्व विभाग को अदा नहीं करने पर की गई, वहीं वार्ड 1 क्षेत्र के 85516 रू. के बकायादार लीलावती देवी सिंग ने सीलबंदी कार्यवाही के दौरान तत्काल सम्पूर्ण बकाया राशि का भुगतान स्थल पर कर दिया. वहीं नगर निगम जोन 8 क्षेत्र अंतर्गत पण्डित जवाहर लाल नेहरू वार्ड क्रमांक 2 क्षेत्र अंतर्गत 123606 रू. के बकायादार निखिल ट्रेडर्स, 836874 रू. के बकायादार संतोषी देवी द्वारा बकाया राशि अदा नहीं करने पर तत्काल उनके सम्बंधित व्यवसायिक परिसर को सीलबंद कर दिया गया, वहीं वार्ड 2 क्षेत्र के 101275 रू. के बकायेदार आनंद सिंग ठाकुर द्वारा सीलबंदी कार्यवाही के दौरान सम्पूर्ण बकाया राशि का भुगतान तत्काल कर दिया गया.इसी प्रकार डॉ एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड क्रमांक 19 के क्षेत्र के 25174 रू. के बकायेदार खूबचंद साहू, 13141 रू. के बकायेदार भुवनेश्वर सोनी और कविता बेगानी द्वारा सीलबंदी कार्यवाही के दौरान सम्पूर्ण बकाया राशि का स्थल पर तत्काल भुगतान कर दिया गया. वार्ड 19 क्षेत्र के 54117 रू. के बकायेदार गोपाल खरे,119389 रू के बकायेदार नीलिमा चौधरी द्वारा बकाया राशि अदा नहीं किये जाने पर बकायेदारों के सम्बंधित व्यवसायिक परिसरों में तत्काल ताला लगाकर सीलबंदी की कार्यवाही स्थल पर की गयी.नगर निगम जोन 8 राजस्व विभाग की टीम द्वारा शहीद भगत सिंह वार्ड क्रमांक 21 के क्षेत्र के 284708 रू. के बकायेदार अमरजीत सिंह के सम्बंधित व्यवसायिक परिसर को बकाया राशि अदा नहीं किये जाने पर तत्काल ताला लगाकर सीलबंद कर दिया गया, वहीं वार्ड 21 क्षेत्र के 49801 रू के बकायेदार गुरुबचन सिंह भामरा, 62592 रू. के बकायेदार बाला देवी चौधरी, 48641 रू. के बकायेदार नक्षत्तर कौर, 32076 रू. के बकायेदार दिलीप दामले और 606561 रू. के बकायेदार मेसर्स गगन रेजेंसी अमन गिल द्वारा सीलबंदी कार्यवाही के दौरान स्थल पर अपना सम्पूर्ण बकाया नगर निगम जोन 8 राजस्व विभाग को स्थल पर तत्काल भुगतान कर दिया गया. रायपुर नगर पालिक निगम जोन 8 राजस्व विभाग की टीम द्वारा जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल के नेतृत्व और जोन सहायक राजस्व अधिकारी श्री महादेव रक्सेल के मार्गदर्शन में की गयी।
- महासमुंद / जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम बम्बुरडीह की कृषक श्रीमती अमृत बाई बंजारे, श्री शुद्धुराम बंजारे ने सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। अमृत बंजारे बताती है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता 5वीं कक्षा तक है। पूर्व में वे अपनी कुल 2.87 हेक्टेयर भूमि में परंपरागत रूप से धान की खेती किया करती थीं, जिसमें उत्पादन अपेक्षाकृत कम एवं लागत अधिक होने के कारण उन्हें पर्याप्त लाभ प्राप्त नहीं हो पाता था।वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी 1.45 हेक्टेयर सिंचित भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन (किस्म VNR 212) की उन्नत खेती प्रारंभ की। इस दौरान उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली, मल्चिंग पेपर एवं अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक पद्धति से खेती की। इन तकनीकों के उपयोग से जहां जल की बचत हुई, वहीं फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में भी वृद्धि हुई।श्रीमती बंजारे बताती है कि अब तक लगभग 80 टन बैंगन का उत्पादन कर चुके है, जिससे उन्हें लगभग 9 लाख 60 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। यह आय उनकी पूर्व की पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुदृढ़ता आई है। उल्लेखनीय है कि उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन उत्पादन हेतु 30,000 रुपये तथा राज्य पोषित योजना अंतर्गत समेकित उद्यानिकी विकास के लिए 54,485 रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया। इस सहयोग ने उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया और जोखिम को कम करने में मदद की।
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- कलेक्टर ने ग्राम पंचायत सांकरा का किया आकस्मिक निरीक्षण
- पिछले 6 माह में 1500 से अधिक राजस्व प्रकरणों का किया गया निराकरण
- ग्राम पंचायत स्तर पर ही 15 दिनों के भीतर निराकृत किए जाने का लक्ष्य
राजनांदगांव । जिले में राजस्व सेवाओं को और अधिक सुलभ, पारदर्शी व त्वरित बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए ग्राम पंचायतों में राजस्व संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने ग्राम पंचायत सांकरा का आकस्मिक आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में राजस्व प्रकरणों के संबंधित आवेदन लिए जा रहे है। जिससे अविवादित नामांतरण, अविवादित खाता विभाजन जैसे राजस्व प्रकरणों को ग्राम पंचायत स्तर पर ही 15 दिनों के भीतर निराकृत किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिससे लोगों को तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। इससे नागरिकों के समय एवं श्रम की बचत हो रही है। इसके साथ ही नागरिकों को सहूलियत भी मिल रही है। उन्होंने ग्राम पंचायतों में राजस्व प्रकरणों के निराकरण के संबंध में गांवों में मुनादी कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। कलेक्टर ने वहां उपस्थित किसानों से बातचीत कर उनके राजस्व संबंधी आवेदन के निराकरण की जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि पहले छोटे-छोटे कार्यों के लिए कई बार तहसील कार्यालय जाना पड़ता था, परंतु अब वही काम ग्राम पंचायत में ही निराकरण होने से काफी राहत मिली है। किसानों ने बताया कि यह बहुत अच्छी पहल है। ग्राम पंचायत में राजस्व संबंधित समस्याओं का निराकरण होने से बड़ी राहत मिलती है। किसान श्री डुलेश कुमार बंजारे ने बताया कि उन्होंने फौती नामांतरण के लिए कुछ दिन पूर्व ग्राम पंचायत में आवेदन किया था और शीघ्र उनका फौती नामांतरण हो गया। इस व्यवस्था से उनका समय, राशि और श्रम की बचत हुई है और बहुत ही पारदर्शी एवं आसानी से फौती नामांतरण हो गया है। इससे वे बहुत खुश है।
कलेक्टर ने बताया कि इस अभिनव पहल से ग्राम पंचायतों में पीछले 6 माह में 1500 से ज्यादा राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। इसके लिए आवेदन प्राप्त होने के 15 दिवस के भीतर निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभिनव पहल से ग्राम पंचायतों में राजस्व संबंधित समस्याओं का निराकरण अब ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बनकर उभर रही है।
ग्राम सांकरा के किसान श्री डुलेश कुमार बंजारे ने बताया कि उन्होंने फौती नामांतरण के लिए कुछ दिवस पूर्व ही आवेदन ग्राम पंचायत में किया था। जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही उनका फौती नामांतरण कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले कई बार तहसील जाना पड़ता था, अब एक ही जगह सब काम हो जाता है। जिससे उनका समय, श्रम की बचत के साथ पूरी पारदर्शी तरीके से निराकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि फौती नामांतरण होने से समर्थन मूल्य में फसल विक्रय करने, प्रधानमंत्री सम्मान निधि, केसीसी जैसी योजनाओं का लाभ अब आसानी से मिल पाएगा। ग्राम सांकरा के अन्य किसान श्री देव सिंह निषाद ने भी ग्राम पंचायत में आवेदन करने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा में उनका फौती नामांतरण किया गया है। जिससे वे अपनी खुशी जाहीर की। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, जनपद पंचायत सीईओ श्री मनीष साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। -
- अनियमितता की शिकायत पर राज्य हेल्पलाइन नंबर 18002333663 या जिला हेल्पलाइन नंबर 07747299613 पर कर सकते हैं संपर्क
मोहला । पश्चिम मध्य एशिया में युद्ध की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों एवं एलपीजी गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने पेट्रोल पंप संचालकों एवं एलपीजी गैस वितरकों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित दरों पर ही पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने सख्त हिदायत दी कि किसी भी परिस्थिति में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी गैस सिलेंडरों का अनावश्यक भंडारण न किया जाए। साथ ही घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग या अन्य किसी प्रकार का दुरुपयोग पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कालाबाजारी, जमाखोरी या किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी।
खाद्य विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्रों में 25 दिन एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल में दूसरा गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसकी स्पष्ट जानकारी सभी गैस एजेंसियों में सूचना पटल पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जिले में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता बनी हुई है। कलेक्टर ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी समस्या की स्थिति में अधिकृत स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
यदि किसी उपभोक्ता को पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर की आपूर्ति में समस्या, अधिक मूल्य वसूली या किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत हो, तो वे राज्य हेल्पलाइन नंबर 18002333663 या जिला हेल्पलाइन नंबर 07747299613 पर संपर्क कर सकते हैं। - जशपुरनगर । वन क्षेत्र में अवैध बोरवेल खनन की प्राप्त सूचना पर वन विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई की गई। अवैध बोर खनन में लगे 2 वाहनों को जप्त किया गया। ग्रामीणों द्वारा दूरभाष के माध्यम से सूचना देने पर वनमण्डलाधिकारी जशपुर श्री शशि कुमार के निर्देशन में वन परिक्षेत्र सन्ना अंतर्गत परिक्षेत्र सहायक तोरा, परिक्षेत्र सहायक सन्ना, बी. एफ.ओ. कामारिमा, चलनी, धनगुरी एवं बगीचा परिक्षेत्र के वन अमले द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्यवाही की गई। वन अमले द्वारा कक्ष क्रमांक पी 303 में पंचों एवं गवाहों की उपस्थिति में स्थल निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि बोरवेल खनन का कार्य वन भूमि के अंदर अवैध रूप से किया जा रहा था, जिससे वन क्षेत्र एवं जैव विविधता को गंभीर क्षति पहुंचने की संभावना थी। मौके पर कार्य को तत्काल रुकवाया गया तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई। पूछताछ में वाहन चालक श्री सल्लू राम ग्राम मनोहरपुर एवं श्री गोधन कोमा ग्राम नर्राटोला जिला बालौद द्वारा बताया गया कि यह कार्य श्री राजेश यादव ग्राम दातुनपानी के निर्देश पर किया जा रहा था। साथ ही यह भी बताया गया कि संबंधित वाहनों के मालिक श्री रमेश जायसवाल निवासी बिलाईगढ़ जिला बलौदाबाजार हैं। वन विभाग द्वारा उक्त अवैध गतिविधि को गंभीरता से लेते हुए ट्रक क्रमांक CG22 एएफ 7660 एवं CG22 एएफ 7659 को जब्त किया गया। इस संबंध में वन अपराध के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। जब्त वाहनों को वन आवासीय परिसर सन्ना में सुरक्षित रखा गया है।वन विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन, बोरवेल खनन या अन्य गतिविधियां पूर्णतः प्रतिबंधित हैं तथा इस प्रकार के कृत्यों में संलिप्त पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग जशपुर द्वारा आम जनता से अपील किया गया है कि वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को प्रदान करें।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर के केंद्र बस्तर में सोमवार से खेलों का एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है। 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' के प्रथम संस्करण के तहत रायपुर में हुए भव्य उद्घाटन के बाद अब खेल प्रेमियों की नजरें जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर पर टिकी हैं, जहाँ 30 मार्च से एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं शुरू होने जा रही हैं। इस आयोजन का शुभंकर 'मोर वीर' जनजातीय युवाओं के अदम्य साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुरू हुआ यह महाकुंभ अब अपने सबसे प्रतीक्षित चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 443 प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे।बस्तर में आयोजित होने वाली एथलेटिक्स स्पर्धाओं में कुल 17 विधाएं शामिल हैं, जिनमें 100 मीटर की फर्राटा दौड़ से लेकर 10,000 मीटर की लंबी दूरी की रेस, हर्डल्स, रिले रेस, और ऊँची व लंबी कूद जैसी श्रेणियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पहले ही दिन डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और 110 मीटर हर्डल्स जैसे फाइनल मुकाबले देखने को मिलेंगे। शाम होते-होते 400 मीटर और रिले रेस के रोमांच के बीच विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान किए जाएंगे। इस पूरे आयोजन के दौरान एथलेटिक्स में कुल 102 पदकों के लिए खिलाड़ी पसीना बहाएंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 33 स्थानीय खिलाड़ी भी राज्य का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।प्रशासनिक स्तर पर इस आयोजन को 'खेलो इंडिया' के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में खिलाड़ियों के आवास के लिए शहर के 13 प्रमुख होटलों को चिन्हित किया गया है, जबकि उनके आवागमन के लिए एसी वाहनों की सुविधा सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा और अग्निशमन की पुख्ता व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटन विभाग द्वारा आगंतुक खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स को बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे खेल के साथ-साथ यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संस्कृति से भी रूबरू हो सकें। भारतीय खेल प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह स्पर्धा न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी, बल्कि बस्तर की वैश्विक छवि को एक खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगी।
- -डिजिटल हुआ जशपुर: घर बैठे क्यूआर कोड से भरें टैक्सरायपुर / छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर पालिका क्षेत्र में अब टैक्स भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को एचडीएफसी बैंक की ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया, जिसके तहत नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान कर सकेंगे।इस नई व्यवस्था के तहत एचडीएफसी बैंक ने नगर पालिका जशपुर के लिए विशेष क्यूआर कोड तैयार किया है। प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड जनरेट किया गया है, जिसे घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के बाद उन्हें तुरंत डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जो राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और कुशल बनाती है। इस प्रणाली के तहत वर्तमान में लगभग 4600 हाउसहोल्ड को शामिल किया गया है, जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां शामिल हैं।इस पहल से जहां नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान प्रणाली से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, श्री कृष्णा राय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी श्री योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर श्री सराफत अली और शाखा प्रबंधक श्री दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
- -मुख्यमंत्री श्री साय ने किया सम्मानित, किट देकर बढ़ाया हौसलारायपुर / सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें।इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच श्री संतोष शंकर सोनी और श्रीमती पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।
- -मिजोरम के वेटलिफ्टर्स ने दो स्वर्ण के साथ अभियान समाप्त किया-जम्मू-कश्मीर ने कुश्ती में एक स्वर्ण और एक रजत के साथ खाता खोला-कर्नाटक 15 स्वर्ण के साथ शीर्ष पर कायम, ओडिशा दूसरे और अरुणाचल प्रदेश तीसरे स्थान पररायपुर /खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पांचवें दिन रविवार को अंबिकापुर में शुरू हुई कुश्ती प्रतियोगिता में झारखंड और हिमाचल प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं मिजोरम के वेटलिफ्टर्स ने भी दो स्वर्ण जीतकर प्रतियोगिता का समापन किया।झारखंड ने अपने स्वर्ण पदकों का खाता पूनम उरांव के जरिए खोला, जिन्होंने महिला 50 किग्रा फाइनल में तेलंगाना की गीता के को 6-3 से हराया। इसके बाद अंजित कुमार मुंडा ने पुरुष 67 किग्रा ग्रीको रोमन फाइनल में गुजरात के मुकेश वासवा को टेक्निकल सुपीरियरिटी से हराकर स्वर्ण जीता।हिमाचल प्रदेश को उनके दोनों स्वर्ण नविश कुमार (97 किग्रा ग्रीको रोमन) और प्रियंका चौधरी (महिला 62 किग्रा) से मिले। वहीं मिजोरम ने जोसांगजुआली (महिला +86 किग्रा) और डेविड जोह्मिंगमाविया (पुरुष +110 किग्रा) के स्वर्ण के साथ कुल चार स्वर्ण हासिल कर लिए, जिससे वे पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गए।कुल पदक तालिका में कर्नाटक 15 स्वर्ण, 6 रजत और 4 कांस्य के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। ओडिशा 9 स्वर्ण, 4 रजत और 10 कांस्य के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि अरुणाचल प्रदेश 5 स्वर्ण के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। मेजबान छत्तीसगढ़, जिसे वेटलिफ्टिंग में रिशिका कश्यप (रजत) और लकी बाबू मरकाम (कांस्य) से दो पदक मिले, नौवें स्थान पर खिसक गया।अरुणाचल प्रदेश के साम्बो लापुंग ने पुरुष 100 किग्रा वर्ग में 299 किग्रा कुल वजन उठाकर स्वर्ण जीतते हुए अपनी टीम को तीसरे स्थान पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। मिजोरम के डेविड लाल जाव्मडिका (270 किग्रा) ने रजत और छत्तीसगढ़ के लकी बाबू (261 किग्रा) ने कांस्य जीता।महाराष्ट्र ने भी पदक तालिका में बढ़त बनाई। साक्षी बुर्कुले ने महिला 86 किग्रा वर्ग में 150 किग्रा कुल वजन उठाकर स्वर्ण जीता, जो रजत विजेता रिशिका कश्यप से 29 किग्रा अधिक था। इसके अलावा विनोद सालकर ने पुरुष 125 किग्रा फ्रीस्टाइल नॉर्डिक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर महाराष्ट्र की झोली में एक और सफलता डाली।जम्मू-कश्मीर ने भी कुश्ती में एक स्वर्ण और एक रजत के साथ अपना खाता खोला। मुनीर हुसैन ने पुरुष 74 किग्रा फ्रीस्टाइल में महाराष्ट्र के विक्रम पवार को 11-1 से हराकर स्वर्ण जीता, जबकि शमा हून को 97 किग्रा ग्रीको रोमन फाइनल में हिमाचल प्रदेश के नविश कुमार से हारकर रजत से संतोष करना पड़ा।परिणामभारोत्तोलनमहिला वर्ग:86 किग्रा:स्वर्ण – साक्षी बुरकुले (महाराष्ट्र) 150 किग्रारजत – ऋषिका कश्यप (छत्तीसगढ़) 121 किग्राकांस्य – बिटुपुना देवरी (असम) 118 किग्रा+86 किग्रा:स्वर्ण – जोसांगजुआली (मिजोरम) 140 किग्रारजत – पिंकी बोरो (असम) 125 किग्राकांस्य – गुंजन उइके (मध्य प्रदेश) 86 किग्रापुरुष वर्ग:110 किग्रा:स्वर्ण – साम्बो लापुंग (अरुणाचल प्रदेश) 299 किग्रारजत – डेविड लाल जावमडिका (मिजोरम) 270 किग्राकांस्य – लकी बाबू मरकाम (छत्तीसगढ़) 261 किग्रा+110 किग्रा:स्वर्ण – डेविड जोह्मिंगमाविया (मिजोरम) 290 किग्रारजत – गुगुलोथु राजा शेखर (आंध्र प्रदेश) 255 किग्राकांस्य – मनाश प्रतिम सोनवाल (असम) 223 किग्राकुश्तीमहिला वर्ग:50 किग्रा:स्वर्ण – पूनम ओरांव (झारखंड)रजत – गीता (तेलंगाना)कांस्य – चंचला कुमारी (झारखंड), रुपतलिन तिमुंगपी (असम)62 किग्रा:स्वर्ण – प्रियंका चौधरी (हिमाचल प्रदेश)रजत – देवी दैमरी (असम)कांस्य – चांदनी (मध्य प्रदेश), अनीशा बसुमातारी (असम)पुरुष वर्ग:74 किग्रा फ्रीस्टाइल:स्वर्ण – मुनीर हुसैन (जम्मू-कश्मीर)रजत – विक्रम पवार (महाराष्ट्र)कांस्य – अंकुश कुमार (हिमाचल प्रदेश), अमृत दुरगन्नावर (कर्नाटक)125 किग्रा फ्रीस्टाइल:स्वर्ण – विनोद सालकर (महाराष्ट्र)रजत – अमित मीणा (राजस्थान)कांस्य – हरपाल सिंह (हिमाचल प्रदेश)67 किग्रा ग्रीको-रोमन:स्वर्ण – अंजित कुमार मुंडा (झारखंड)रजत – वासवा मुकेश भाई (गुजरात)कांस्य – आकाशकारदोंग (असम), अक्षय कुमार (हिमाचल प्रदेश)97 किग्रा ग्रीको-रोमन:स्वर्ण – नविश कुमार (हिमाचल प्रदेश)रजत – शामा हून (जम्मू-कश्मीर)कांस्य – साहिल चौधरी (हिमाचल प्रदेश)
- -छत्तीसगढ़ सहित झारखंड, अरुणाचलप्रदेश, गुजरात पहुंचे सेमीफाइनल में-5वें दिन फुटबॉल में असम और तमिलनाडु ने दिन किया अपने नाम, पर सेमीफाइनल से चुकेरायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत आयोजित बालिका वर्ग फुटबॉल प्रतियोगिता के पांचवें दिन रोमांच और प्रतिस्पर्धा का उच्च स्तर देखने को मिला। विभिन्न राज्यों की टीमों ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में स्थान सुनिश्चित करने के लिए जोरदार संघर्ष किया।स्वामी विवेकानंद स्टेडियम, कोटा रायपुर में खेले गए मुकाबले में असम की टीम ने शानदार तालमेल और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए सिक्किम को 3-0 से पराजित किया। मैच के दौरान असम की खिलाड़ियों ने शुरू से ही दबाव बनाए रखा और विपक्षी टीम को कोई अवसर नहीं दिया।इसी प्रकार पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में खेले गए एक अन्य मुकाबले में तमिलनाडु की टीम ने आंध्रप्रदेश को 3-0 से हराकर बेहतरीन प्रदर्शन किया। तमिलनाडु के खिलाड़ियों ने सधे हुए पासिंग, मजबूत डिफेंस और प्रभावी आक्रमण के दम पर मैच को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा।प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ और झारखंड की टीमों का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। छत्तीसगढ़ ने ग्रुप ‘ए’ में अपने सभी मैच जीतकर अपराजेय रहते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया, वहीं झारखंड ने ग्रुप ‘बी’ में शानदार खेल दिखाते हुए सभी मुकाबलों में विजय हासिल कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। अन्य टीमों में अरुणाचल प्रदेश और गुजरात ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंतिम चार में अपनी जगह बनाई। इस प्रकार अब सेमीफाइनल मुकाबलों की रूपरेखा स्पष्ट हो चुकी है, जिसमें छत्तीसगढ़ का अगला मुकाबला अरुणाचल प्रदेश से तथा झारखंड का सामना गुजरात से होगा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस आयोजन में जनजातीय अंचलों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्राप्त हो रहा है।रविवार की छुट्टी के चलते आज मैदान पर बड़ी संख्या में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और खेल प्रेमियों ने शिरकत की और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के मैस्कॉट मोरवीर के साथ युवा एवं बच्चे मनोरंजक खेल खेलते एवं सेल्फी लेते नजर आए। जहां सभी ने आकर्षक खेलों और क्विज का आनंद लिया। इस बार का मैस्कॉट मोरवीर छत्तीसगढ़ी शब्दों 'मोर' (हमारा) और 'वीर' (बहादुरी) से बना है, और यह भारत के जनजातीय समुदायों के गर्व, भावना और पहचान का प्रतीक है।
- -असम की पिंकी बोरो को रजत और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके को कांस्य-रोमांचक मुकाबलों में खिलाड़ियों ने दिखाया दमरायपुर / खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत महिला 86$ किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस स्पर्धा में मिजोरम की ज़ोसांगज़ुआली ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ज़ोसांगज़ुआली ने स्नैच में 70 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 83 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 140 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि ने मिजोरम को गौरवान्वित किया। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय खेल परिसर में किया जा रहा है।असम की पिंकी बोरो ने शानदार प्रयास करते हुए कुल 125 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक पर कब्जा जमाया। उन्होंने स्नैच में 55 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 70 किलोग्राम का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने भी दमदार खेल दिखाते हुए कुल 86 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 39 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 47 किलोग्राम वजन उठाया। प्रतियोगिता में त्रिपुरा की ट्विस्मु जमातिया चौथे स्थान पर रहीं, जिन्होंने कुल 77 किलोग्राम वजन उठाया।प्रतियोगिता की खास बात यह रही की सभी खिलाड़ियों ने युवा आयु में बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। मुकाबला काफी प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जहां हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। आयोजन स्थल पर दर्शकों का उत्साह खिलाड़ियों के प्रदर्शन को और ऊर्जा दे रहा था।
- -छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने रजत, असम की बिटुपुना देओरी को कांस्यरायपुर, / खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत 86 किलोग्राम भारोत्तोलन प्रतियोगिता महिला वर्ग में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। इस स्पर्धा में महाराष्ट्र की साक्षी बंडू बुरकुले ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक कब्जा किया। यह प्रतिस्पर्धा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की खेल मैदान में आयोजित की जा रही है।साक्षी बुरकुले ने स्नैच में 68 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 82 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 150 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल की, उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में सबसे मजबूत रहा।छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल की। उन्होंने कुल 121 किलोग्राम (स्नैच 55 किलोग्राम, क्लीन एंड जर्क 71 किलोग्राम) वजन उठाया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने 118 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता में असम की लिंडा 114 किलोग्राम के साथ चौथे स्थान पर रहीं, जबकि त्रिपुरा की सुमी मोग (77 किलोग्राम) और आंध्र प्रदेश की जेसी रानी (61 किलोग्राम) क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर रहीं।इस स्पर्धा में खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर प्रतिभागी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया। दर्शकों ने प्रत्येक खिलाड़ियों की हौंसला अफजाई करते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर इस पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।:
- -मालसावमटलुआंगा ने चोट की चिंता को पीछे छोड़कर जीता केआईटीजी स्वर्ण-इसाक ने 2018 में अपने पिता और 2024 में अपनी मां को खो दिया-उनके चाचा और बचपन के कोच ने व्यक्तिगत मुश्किलों के बावजूद खेल जारी रखने के लिए प्रेरित किया--केआईटीजी से पहले पीठ की चोट से जूझने के बावजूद क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन कर जीता स्वर्ण पदकरायपुर। मिजोरम के युवा वेटलिफ्टर इसाक मालसावमटलुआंगा 16 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही अपने माता-पिता दोनों को खोने के बाद लगभग खेल छोड़ने की कगार पर पहुंच गए थे। इस दोहरी त्रासदी ने इस मिजो किशोर को अंदर तक तोड़ दिया था, लेकिन उनके बचपन के कोच और चाचा-चाची के सहारे ने उनके खेल करियर को संभाल लिया। 18 वर्षीय इसाक ने कड़ा संघर्ष करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपने परिवार को गर्व महसूस कराया।पीठ की तकलीफ से जूझते हुए भी इसाक ने क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन किया। स्नैच में दूसरे स्थान पर रहने के बाद उन्होंने कुल 235 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जीत के तुरंत बाद उनके चाचा ने उन्हें गले लगा लिया, जो इस युवा खिलाड़ी के जीवन में एक मार्गदर्शक की तरह रहे हैं।इसाक के पिता हेमिंग मालसावमटलुआंगा की 2018 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, उसी साल उन्होंने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी। परिवार के इकलौते बेटे होने के कारण उनके सामने यह सवाल खड़ा हो गया था कि वह खेल जारी रखें या परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए कमाई पर ध्यान दें।इसाक ने साई मीडिया से बातचीत में बताया,” उस समय मेरे बचपन के कोच सोमा ने मुझे बहुत प्रेरित किया और वेटलिफ्टिंग जारी रखने के लिए कहा।”हालांकि, 2024 में हिमाचल प्रदेश में आयोजित यूथ नेशनल चैंपियनशिप में 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने के बाद जब उनका प्रदर्शन बेहतर होने लगा, तभी एक और निजी झटका लगा। उनकी मां को कैंसर का पता चला, जिससे परिवार पर भावनात्मक और आर्थिक दबाव बढ़ गया।इस कठिन समय में उनके चाचा और चाची ने उनका सहारा बना। आइजोल के रामह्लुन वेंगथर इलाके में एक छोटे से रेस्तरां में काम करने वाला यह दंपति इसाक को अपने साथ ले आया और उसकी पढ़ाई और वेटलिफ्टिंग दोनों को बिना रुकावट जारी रखने में मदद की। लेकिन उसी साल उनकी मां का निधन हो गया, जिसने इस युवा खिलाड़ी को पूरी तरह तोड़ दिया। कुछ समय के लिए वह खेल, जो कभी उसे उम्मीद देता था, उसके लिए बेमानी लगने लगा और अकेलापन व दुख उस पर हावी हो गयाl उन्होंने कहा, “अपने माता-पिता दोनों को खोना मुझे अंदर से पूरी तरह तोड़ गया था। मैंने लगभग तय कर लिया था कि वेटलिफ्टिंग छोड़ दूंगा, लेकिन मेरे चाचा और कोच ने एक बार फिर मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।”2024 से इसाक इम्फाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) में प्रशिक्षण ले रहे हैं और साथ ही आइजोल से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के जरिए कक्षा 12 की पढ़ाई भी कर रहे हैं।धीरे-धीरे उनके प्रयास रंग लाने लगे। 2025 में मोदीनगर में आयोजित जूनियर प्रतियोगिता में उन्होंने एक और रजत पदक जीता और बाद में उसी वर्ष राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से पहले उनकी तैयारियों में भी चुनौतियां कम नहीं थीं। अभ्यास के दौरान उन्हें पीठ में चोट लग गई थी, जिसके चलते उनके कोच ने उन्हें टूर्नामेंट से दूर रहने की सलाह दी थी। लेकिन इसाक ने हार नहीं मानी और रायपुर में मंच पर उतरकर अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।वह कहते हैं, “मेरे पिता के निधन के बाद से मेरे चाचा हमेशा प्रतियोगिताओं में मेरे साथ जाते हैं। वह यहां भी मेरे साथ थे। जैसे ही मैंने पदक जीता, उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया। उस पल मुझे एहसास हुआ कि वह कितने खुश थे।” इसके बाद वह जश्न मनाने के लिए एक बार फिर अपने परिवार के पास लौट गए।
- -छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी लहराया परचम, रिशिका कश्यप ने रजत और लकी बाबू मरकाम ने जीता कांस्यरायपुर / इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता समापन के साथ ही चैम्पियनशिप टीम के परिणाम भी घोषित किए गए, जिसमें पुरुष वर्ग में अरुणाचल प्रदेश ने ओवरऑल चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। वहीं मिजोरम फर्स्ट रनरअप और असम सेकंड रनरअप रहा। महिला वर्ग में असम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैम्पियन का खिताब अपने नाम किया, जबकि ओडिशा फर्स्ट रनरअप और छत्तीसगढ़ सेकंड रनरअप रहा।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं का आज शानदार समापन हो गया। पूरे आयोजन के दौरान देशभर से आए खिलाड़ियों ने ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित किया। समापन समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप और रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।प्रतियोगिता के प्रमुख मुकाबलों की बात करें तो पुरुष 110 किलोग्राम भार वर्ग में अरुणाचल प्रदेश के साम्बो लापुंग ने 299 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मिजोरम के डेविड लालजाव्मडिका ने 270 किलोग्राम के साथ रजत और छत्तीसगढ़ के लकी बाबू मरकाम ने 261 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। लकी बाबू का यह प्रदर्शन घरेलू दर्शकों के लिए गर्व का क्षण रहा।वहीं पुरुष 110+ किलोग्राम वर्ग में मिजोरम के डेविड जोह्मिंगमाविया ने 290 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। आंध्र प्रदेश के गुगुलोथु राजा शेखर (255 किग्रा) को रजत और असम के मनाश प्रतिम सोनवाल (223 किग्रा) वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। 86 किलोग्राम वर्ग में महाराष्ट्र की साक्षी बंडु बुरकुले ने 150 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता और अपने मेडल का श्रेय अपने कोच को दिया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। एक अन्य महिला वर्ग के 86 किग्रा से अधिक के वर्ग में मिजोरम की जोसांगजुआली ने 140 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम की पिंकी बोरो और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किया।छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी इस प्रतियोगिता में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। लकी बाबू मरकाम ने अपने प्रदर्शन के बाद कहा कि ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन छत्तीसगढ़ में होना प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। इससे उन्हें बड़े मंच को देखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।पूरे आयोजन के दौरान तकनीकी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और प्रतियोगिताएं पारदर्शी तरीके से संपन्न हुईं। दर्शकों का उत्साह भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में ऊर्जा भरता रहा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की वेटलिफ्टिंग स्पर्धाओं ने यह साबित कर दिया कि देश के जनजातीय अंचलों में अपार खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मंच और अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सक्षम हैं।
- -छत्तीसगढ़ ने शानदार आक्रामक खेल का किया प्रदर्शनरायपुर । खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पांचवें दिन महिला हॉकी मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। मिजोरम, मध्यप्रदेश, झारखंड और ओडिशा की टीमों ने उत्कृष्ट खेल का परिचय देते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश किया। दिन के मुकाबलों में गुजरात ने तमिलनाडु को 10-1 से पराजित किया, जबकि ओडिशा ने झारखंड को रोमांचक मुकाबले में 5-4 से हराया। मिजोरम ने मध्यप्रदेश को 6-0 से शिकस्त दी और छत्तीसगढ़ ने बिहार को 9-0 से हराते हुए शानदार जीत दर्ज की। बेहतर प्रदर्शन के बावजूद गुजरात और छत्तीसगढ़ की टीमें सेमीफाइनल में स्थान नहीं बना सकीं। सेमीफाइनल में झारखंड का मुकाबला मिजोरम से तथा मध्यप्रदेश का सामना ओडिशा से होगा।पुरुष हॉकी में भी मुकाबले बेहद एकतरफा और आक्रामक रहे। ओडिशा ने असम को 12-1 से हराया, मध्यप्रदेश ने गोवा को 11-2 से परास्त किया, झारखंड ने कर्नाटक को 3-1 से मात दी तथा छत्तीसगढ़ ने आंध्रप्रदेश को 7-0 से हराते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस प्रकार पुरुष वर्ग में ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्यप्रदेश ने अंतिम चार में जगह बनाई है।छत्तीसगढ़ की पुरुष टीम ने आंध्रप्रदेश के खिलाफ अपने मुकाबले में बेहद आक्रामक खेल दिखाया। मैच के पहले ही मिनट में गोल दागते हुए टीम ने विपक्ष पर दबाव बना दिया और पहले क्वार्टर में 3-0 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। पूरे मैच में टीम का तालमेल, गति और रणनीति प्रभावशाली रही, जिससे 7-0 से एकतरफा जीत सुनिश्चित हुई।हॉकी प्रतियोगिता में अब मुकाबला और भी रोमांचक होने जा रहा है। सेमीफाइनल में पहुंची टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी। खिलाड़ियों का उत्साह और प्रदर्शन खेल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सेमीफाइनल में छत्तीसगढ़ का मुकाबला ओडिशा से तथा झारखंड का सामना मध्यप्रदेश से होगा।
- -9 पदक जीतकर बने फर्स्ट रनर-अपरायपुर । छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 प्रतियोगिता में भाग लेने आए असम राज्य के तैराक खिलाडि़यों ने आज यहां लोक भवन में राज्यपाल श्री रमेन डेका से सौजन्य मुलाकात की। खिलाडि़यों ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 9 पदक जीतकर फर्स्ट रनर-अप का स्थान हासिल किया है।राज्यपाल श्री डेका ने खिलाडि़यों की इस उपलब्धि पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खेलों में अनुशासन, समर्पण और टीम भावना से ही ऐसी सफलता हासिल होती है। राज्यपाल ने खिलाडि़यों को भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।इस अवसर पर खिलाडि़यों के साथ असम स्विमिंग एसोसिएशन के संयुक्त सचिव श्री दिव्य ज्योति शर्मा, तकनीकी अधिकारी श्री जान मनी बोरा तथा कोच भी उपस्थित रहे।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय करेंगे वर्चुअल शुभारंभरायपुर। उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के लिए 30 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा (अम्बिकापुर) से देश के प्रमुख महानगरों दिल्ली एवं कोलकाता के लिए नियमित विमान सेवा शुरू होगी। इस पहल से क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने के साथ ही विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 30 मार्च को प्रातः 10 बजे रायपुर से वर्चुअल माध्यम से विमान सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर अंबिकापुर के पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें सांसद, विधायकगण एवं जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं आम नागरिकों उपस्थित रहेंगे।नई हवाई सेवा के अंतर्गत एलायंस एयर द्वारा 72-सीटर एटीआर विमान संचालित किया जाएगा। अंबिकापुर से दिल्ली के लिए फ्लाइट हफ्ते में दो दिन सोमवार और बुधवार को चलेगी। सोमवार को फ्लाइट सुबह 7.50 बजे दिल्ली से उड़ान भरकर 10.25 बजे बिलासपुर पहुंचेगी, वहां से 10.50 बजे रवाना होकर 11.35 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद यही फ्लाइट दोपहर 12.05 बजे अंबिकापुर से उड़ान भरकर 2.35 बजे दिल्ली पहुंचेगी। बुधवार को सुबह 7.50 बजे दिल्ली से सीधी फ्लाइट उड़कर 10.25 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी, फिर 10.50 बजे अंबिकापुर से निकलकर 11.35 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और वहां से 12.00 बजे उड़कर 2.40 बजे दिल्ली पहुंचेगी।अंबिकापुर से कोलकाता के लिए भी हफ्ते में दो दिन फ्लाइट चलेगी। शनिवार को सुबह 7.05 बजे कोलकाता से फ्लाइट उड़ान भरकर 8.55 बजे बिलासपुर पहुंचेगी, फिर 9.20 बजे वहां से रवाना होकर 10.00 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद 10.25 बजे अंबिकापुर से उड़कर 12.15 बजे कोलकाता पहुंच जाएगी। वहीं गुरुवार को सुबह 7.05 बजे कोलकाता से सीधी फ्लाइट उड़कर 8.50 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी, फिर 9.15 बजे अंबिकापुर से निकलकर 9.55 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और वहां से 10.20 बजे उड़कर 12.05 बजे कोलकाता पहुंचेगी।निर्धारित शेड्यूल के तहत यात्रियों को आने-जाने दोनों दिशाओं में सुविधा उपलब्ध होगी तथा बिलासपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी सुदृढ़ होगी। कोलकाता के लिए भी विमान सेवा प्रारंभ होने से पूर्वी भारत के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र से सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।अम्बिकापुर सरगुजा संभाग का मुख्यालय होने के साथ उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वाणिज्यिक केंद्र है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा एवं खनिज भंडार से समृद्ध है। साथ ही मैनपाट, तातापानी एवं विविध जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों के कारण यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं।हवाई सेवा के प्रारंभ होने से सरगुजा संभाग सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एवं पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता से जुड़ जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। पर्यटन क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से देश-विदेश के पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा, जिससे होटल, परिवहन एवं अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी लाभ होगा, जिससे गंभीर मरीजों को महानगरों में शीघ्र उपचार उपलब्ध हो सकेगा।गौरतलब है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया, जिससे अब एटीआर जैसे बड़े विमान यहां संचालित हो सकते हैं। माँ महामाया एयरपोर्ट दरिमा, अम्बिकापुर लगभग 365 एकड़ में फैला हुआ है, एयरपोर्ट के सिविल एवं विद्युतीकरण कार्य हेतु राशि रू. 48.25 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, जिससे इस एयरपोर्ट में सभी कार्य डीजीसीए मानक अनुरूप कराया गया है। मां महामाया एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों के अनुरूप कराया गया। हवाई अड्डे में लगभग 100 वाहन की पार्किंग की व्यवस्था के साथ टर्मिनल भवन तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया।
- -युवा शक्ति को आगे बढ़ाना ही विकसित छत्तीसगढ़ की असली दिशा है : मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज बिलासपुर स्थित राजा रघुराज सिंह स्टेडियम में स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जी की स्मृति में आयोजित टी-20 ड्यूस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय लेकर उनका हौसला बढ़ाया और जिले के खेल प्रेमियों को बधाई दी। प्रतियोगिता में देश के 8 राज्यों की टीमों ने भाग लिया, जिसमें कई खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी तथा आईपीएल जैसे बड़े मंचों पर अपना हुनर दिखा चुके हैं। समापन मैच में छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ और खड़गपुर के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जी की स्मृति में आयोजित यह प्रतियोगिता अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जी से उनका विशेष आत्मीय संबंध रहा है। उन्होंने जीवन भर अद्भुत धैर्य और संघर्ष का परिचय दिया। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और समाज सेवा के कार्यों में अपना जीवन समर्पित कर दिया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे राज्यसभा सांसद के रूप में भी लंबे समय तक सक्रिय रहे। आज उनकी स्मृति में आयोजित इस टी-20 प्रतियोगिता में देश के 8 राज्यों से खिलाड़ी भाग ले रहे हैं और 9 दिनों तक चले इस आयोजन ने बिलासपुर के खेल प्रेमियों को एक नया उत्साह दिया है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के लोग क्रिकेट के प्रति विशेष लगाव रखते हैं और बड़ी संख्या में मैदान में उपस्थित होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश में खेलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना के तहत प्रदेश में खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अभी हमारा प्रदेश खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी भी कर रहा है। बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों में लाखों खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, जो प्रदेश की खेल प्रतिभा को नई दिशा दे रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने देश के दूसरे और दुनिया के चौथे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कराया और इसका नाम शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर रखा। राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ओलम्पिक खेलों में भी हमारे बेटे और बेटियां भाग लें, इसके लिए हमारी सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक पर 2 करोड़ रुपये और कांस्य पदक पर 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही प्रदेश में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि बिलासपुर की पावन धरा पर अटल परिसर का लोकार्पण करते हुए आज हम स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जी को भावपूर्ण स्मरण कर रहे हैं। स्व. लखीराम अग्रवाल के योगदान को शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। हम सभी उनके योगदान को गहरे सम्मान के साथ याद करते हैं। आज उनकी स्मृति में आयोजित यह क्रिकेट प्रतियोगिता हमें उनके संघर्षमय जीवन की याद दिलाती है। क्रिकेट की तरह ही उन्होंने जीवन के हर क्षेत्र में अंतिम क्षण तक संघर्ष किया और कभी हार नहीं मानी। वे हम सभी के लिए प्रेरणा पुंज हैं और उनके विचार सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगे।बिलासपुर विधायक श्री अमर अग्रवाल ने आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद श्री तोखन साहू सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों का भी आभार जताया।कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री रजनीश सिंह, पूर्व सांसद श्री लखन लाल साहू, कमिश्नर श्री सुनील जैन, आईजी श्री राम गोपाल गर्ग, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसएसपी श्री रजनेश सिंह, क्रिकेट खिलाड़ी श्री राजेश चौहान उपस्थित थे।
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- छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि लोकतंत्र में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चतुर्थ स्तंभ माना गया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन और साधना है। समाज का दर्पण कहलाने वाली पत्रकारिता ने सदैव जनता और सत्ता के बीच संपर्क-सेतु की भूमिका निभाई है और लोगों को जागरूक किया है। इसलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।राज्यपाल श्री डेका आज भिलाई सेक्टर 4 स्थित एस.एन.जी. ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि की आंसदी से सम्बोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया। राज्यपाल श्री डेका ने इस अवसर पर महिला पत्रकारों को उनकी उत्कृष्ट लेखनी के लिए सम्मानित किया, जिसमें अनुभूति भाखरे, कोमल धनेसर, साक्षी सोनी शामिल है। इसी प्रकार समाज सेवी महिलाओं साधना चतुर्वेदी, अंजना श्रीवास्तव, लता बौद्ध, दीप्ति सिंग, सुनीता जैन को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।राज्यपाल श्री डेका ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए अवगत कराया कि आज पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया के विस्फोट ने सूचना के प्रवाह को लोकतांत्रिक तो बनाया है, लेकिन साथ ही विश्वास का गंभीर संकट भी खड़ा किया है। फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर व्यक्ति ‘पत्रकार‘ बन चुका है और सत्यापन से पहले ही समाचार वायरल हो जाते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ‘फेक न्यूज‘ और ‘डीपफेक‘ ने सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली कर दी है। इन सबके बीच आज भी प्रिंट मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता को कायम रखा है। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पत्रकारिता को अपने मूल आदर्शों की ओर लौटना होगा।एक स्वस्थ पत्रकारिता ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने इस चौथे स्तंभ को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और जनोन्मुखी बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष श्री ईश्वर दुबे, सचिव श्री सतीश बौद्ध एवं अन्य पदाधिकारी और श्री राजाराम त्रिपाठी, प्रो. संजय त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश पंकज सहित बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के पत्रकार उपस्थित थे।












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