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- -रायपुर साहित्य उत्सव में सत्यजीत दुबेरायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव में “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” पर हुई बातचीत किसी औपचारिक पैनल जैसी नहीं लगी। मंच पर बैठे अभिनेता सत्यजीत दुबे की बातों में अनुभव था, ठहराव था और सिनेमा को देखने का एक साफ़, ज़मीनी नज़रिया था। श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, यह स्पष्ट हो गया कि यह चर्चा फिल्मों से आगे जाकर कहानियों, संवेदना और समाज की बात करने वाली है। सत्यजीत दुबे के लिए सिनेमा चमक-दमक का खेल नहीं है। उनके शब्दों में, फिल्म की उम्र बजट तय नहीं करता, उसकी सच्चाई तय करती है। जो कहानी दिल तक पहुंचती है, वही समय के साथ चलती है।सत्यजीत ने छत्तीसगढ़ की धरती का ज़िक्र करते हुए कहा कि यहां का लोकजीवन, साहित्य और सामाजिक अनुभव भारतीय सिनेमा के लिए वह आधार हैं, जिन पर टिकाऊ और यादगार फिल्में बन सकती हैं। “कहानियां हमारे चारों ओर हैं,” वे कहते हैं, उन्हें बस देखने और ईमानदारी से कहने की ज़रूरत है। डिजिटल दौर पर उनकी बात किसी ट्रेंड का दोहराव नहीं थी, बल्कि एक संभावना का संकेत थी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को उन्होंने क्षेत्रीय अनुभवों की आवाज़ बताया कि ऐसी आवाज़, जो अब सीमाओं में नहीं बंधी। आज का दर्शक सच्ची, ज़मीन से जुड़ी कहानियां चाहता है। उसे परफेक्ट चेहरे नहीं, असली इंसान देखने हैं, सत्यजीत दुबे ने कहा।बिलासपुर से मुंबई तकछत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे सत्यजीत दुबे की कहानी किसी त्वरित सफलता की नहीं है। स्कूली पढ़ाई के बाद वे अभिनय के सपने के साथ 2007 में मुंबई पहुंचे। थिएटर उनके लिए पहला स्कूल बना, जहां उन्होंने अभिनय ही नहीं, इंसान को समझना सीखा।संघर्ष के वर्षों में विज्ञापनों ने उन्हें टिके रहने का सहारा दिया। पिज्जा हट, किटकैट, रिलायंस बिग टीवी और एचडीएफसी बैंक जैसे ब्रांड्स के साथ काम किया। और फिर, महज़ 20 साल की उम्र में, रोशन अब्बास निर्देशित और शाहरुख खान निर्मित फिल्म ‘ऑलवेज कभी कभी’ से उन्हें फिल्मों में पहला मौका मिला।इसके बाद ‘झांसी की रानी’ में नाना साहेब का किरदार हो या ‘लक लक की बात’, ‘बांके की क्रेज़ी बारात’ और केरी ऑन कुट्टन हर काम में उन्होंने अपनी जगह धीरे-धीरे पुख्ता की। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ‘मुंबई डायरीज 26/11’ में डॉक्टर अहान मिर्जा की भूमिका ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया, जो संवेदनशील भूमिकाओं को भरोसे के साथ निभाता है। ‘बेस्टसेलर’, ‘रणनीति: बालाकोट एंड बियॉन्ड’ और ‘प्यार टेस्टिंग’ जैसी सीरीज में उनकी मौजूदगी इसी निरंतरता की अगली कड़ी है।रायपुर साहित्य उत्सव के मंच से सत्यजीत दुबे ने युवाओं को कोई प्रेरक नारा नहीं दिया। उन्होंने बस इतना कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। थिएटर ने मुझे सिखाया कि अगर आप खुद से ईमानदार नहीं हैं, तो कोई किरदार भी ईमानदार नहीं हो सकता। कार्यक्रम में सुविज्ञा दुबे ने संक्षेप में बच्चों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति पर परिवार की भूमिका को रेखांकित किया, जबकि अन्य वक्ताओं ने सिनेमा और साहित्य के बदलते रिश्तों पर अपने विचार साझा किए।
- -सिनेमाजगत के प्रसिद्ध निर्देशक अनुराग बसु और चाणक्य सीरियल के निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी हुए शामिल-लोग रिस्क लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ा सिनेमा बनाते हैं : निर्देशक श्री अनुराग बसु-सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है : निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदीरायपुर,। रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित परिचर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता अनिरुद्ध नीरव मंडप में पहुंचे, जिसमें हिंदी सिनेमाजगत के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक श्री अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के जाने-माने लेखक-निर्देशक श्री मनोज वर्मा रहे।हिंदी सिनेमाजगत के निर्देशक श्री अनुराग बसु ने परिचर्चा में भाग लेते हुए सिनेमा को एक ऐसा औजार बताया, जो बिगड़े हुए समाज को शेप दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग रिस्क लेकर ऐसे सिनेमा बनाते हैं। अगर हम सिनेमा से सामाजिक सरोकार की अपेक्षा करते हैं, तो बहुत से लेखक-निर्देशक आज भी इस दायित्व को निभाते आ रहे हैं।श्री बसु ने कहा कि 90 के दशक में जितने सिनेमा बनते थे, आज भी उतने ही बनते हैं, बल्कि फिल्मों की संख्या और अधिक है। आज सिनेमा के पास ज्यादा टेक्नोलॉजी है, लेकिन कहानियां भी वही हैं। अब नई कहानियां सामने आ रही हैं, नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। हम यदि किसी लेखक-निर्देशक की बनाई किसी फ़िल्म को अच्छा या बुरा कहते हैं, तो यह हमारा व्यक्तिगत विचार है, क्योंकि उसने पूरी ईमानदारी से फ़िल्म बनाई है और उसके हिसाब से वह फ़िल्म अच्छी बनी है। श्री बसु ने आगे कहा कि हम जब भी फ़िल्मों की बात करते हैं, तो पसंद-नापसंद की बात अपने आप ही सामने आ जाती है। उन्होंने फ़िल्मों को समाज का जरूरी हिस्सा बताया।परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज फ़िल्म के हिट और फ्लॉप होने की बात अधिक होती है। सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। सिनेमा का सामाजिक सरोकार नहीं रहा। सिनेमा आपके प्रश्नों को तभी उठाएगा, जब उससे सिनेमा को बड़ा लाभ होगा। सिनेमा का दौर बदल रहा है।श्री द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में आप चाणक्य नहीं बना सकते। हिंदी सिनेमा में हिंदी का स्तर कहां तक पहुंचा है, यह एक बड़ी चुनौती है। सभी सिनेमा को सरल करने की बात करते हैं, हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग होता है। उन्होंने अपने अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि बायोग्राफी भी उन्हीं पर बन रही हैं, जिनसे बड़े फायदे हों। उन्होंने उपनिषद गंगा सीरियल का उल्लेख करते हुए बताया कि उपनिषद गंगा में बहुत गंभीर काम है, जबकि चाणक्य में उस समय की सच्चाई दिखाई देती है।इस सत्र पर सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलाइट माध्यम नहीं है। जब तक हम फ़िल्म नहीं देखते, तब तक चर्चा नहीं होती। आजकल लोग फ़िल्म देखते नहीं, सिर्फ चर्चा करते हैं। प्रेम में वैज्ञानिकता नहीं ढूंढी जाती। फ़िल्मों की कहानी और पात्रों से लोग भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। यही जुड़ाव फ़िल्मों की कॉमर्शियल और सोशल वैल्यू तय करता है।
- -वरिष्ठ पत्रकारों और साहित्यकारों ने साझा मूल्यों पर किया विमर्शरायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे एवं समापन दिवस पर ‘पत्रकारिता और साहित्य’ विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह सत्र लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित दूसरे सत्र के रूप में सम्पन्न हुआ। यह चर्चा दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री बबन प्रसाद मिश्र की स्मृति को समर्पित रही। पैनल में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सुश्री स्मिता मिश्र, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, श्री अवधेश कुमार और श्री गिरीश पंकज शामिल रहे, जबकि सत्र का संचालन श्री विभाष झा ने किया।चर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश पंकज ने कहा कि चाहे पत्रकारिता हो या साहित्य, लेखन का मूल आधार सदैव जनहित और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।‘हरिभूमि’ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि तथ्यों को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है, वहीं तथ्यों और परिस्थितियों पर चिंतन साहित्य को व्यापक और गहन दृष्टि प्रदान करता है। उन्होंने पत्रकार और साहित्यकार के बीच मूलभूत अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकार प्रायः संस्थागत मर्यादाओं, मूल्यों और संपादकीय प्राथमिकताओं के दायरे में कार्य करते हैं, जबकि साहित्यकार को विषय के विविध आयामों को स्वतंत्रता के साथ अभिव्यक्त करने का अधिक अवसर मिलता है।वरिष्ठ पत्रकार सुश्री स्मिता मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य के बीच अंतर मुख्यतः शैली, भाषा और दृष्टिकोण का है। पत्रकारिता जहाँ तथ्यप्रधान होती है, वहीं साहित्य भावनाओं और संवेदनाओं की ओर अधिक झुकाव रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भाषा में संवेदनशीलता, रिपोर्टिंग में सहानुभूति और व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की क्षमता दोनों ही क्षेत्रों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि दोनों ही जनमानस को प्रभावित करने की सामर्थ्य रखते हैं।पत्रकार और साहित्यकार दोनों रूपों में अपने अनुभव साझा करते हुए श्री अवधेश कुमार ने पत्रकारिता और साहित्य को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। उन्होंने कहा कि उनके पत्रकारिता के अनुभव अक्सर उनके साहित्यिक लेखन की प्रेरणा बनते हैं तथा अनेक मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरें उन्हें उन विषयों के गहरे सामाजिक और मानवीय पक्षों को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं।सत्र के दौरान संचालक श्री विभाष झा ने छत्तीसगढ़ के प्रख्यात पत्रकारों, जिनमें श्री मुक्तिबोध और श्री माधवराव सप्रे प्रमुख हैं, के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक चेतना के विस्तार के लिए साहित्य को माध्यम बनाया। पैनल में समकालीन पत्रकारिता में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।इस अवसर पर सुश्री स्मृति दुबे के कविता संग्रह ‘करुण प्रकाश’ तथा श्री लोकनाथ साहू ललकार के कविता संग्रह ‘यह बांसुरी की नहीं बेला है’ का विमोचन भी अतिथियों के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
- -“हमारी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण, संवर्धन और उत्सव मनाना अत्यंत आवश्यक,” — कैनात काज़ी-“भारतीय यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत और संस्मरण युवा पीढ़ी को प्रेरित और शिक्षित करते हैं,” — शिखा वर्शनीरायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे और समापन दिवस पर लाल जगदलपुरी मंडप में प्रथम सत्र के रूप में “ट्रैवल ब्लॉग: पर्यटन के प्रेरक” विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र में प्रसिद्ध यात्रा पत्रकार, ब्लॉगर एवं एकल यात्री सुश्री कैनात काज़ी तथा “देसी चश्मे से लंदन डायरी” की लेखिका सुश्री शिखा वर्शनी ने अपने अनुभव साझा किए। सत्र का संचालन श्री राहुल चौधरी ने किया।अपने वक्तव्य में सुश्री कैनात काज़ी ने कहा कि हिंदी साहित्य ने उनकी यात्रा-यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साहित्य से प्रेरित होकर उन्होंने यात्रा आरंभ की और भारत के विभिन्न हिस्सों में किए गए अपने भ्रमण अनुभवों ने उन्हें ब्लॉग लेखन और अनुभवों के दस्तावेजीकरण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वे मूलतः सीखने और खोज की भावना से यात्रा करती हैं, जबकि ब्लॉगिंग, डायरी लेखन और लोकप्रियता इस यात्रा के स्वाभाविक उपफल मात्र हैं।सचेत यात्रा पर बल देते हुए उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि वे यात्रा को केवल देखने तक सीमित न रखें, बल्कि उसमें पूर्ण रूप से डूबें। उन्होंने कहा कि ट्रैवल ब्लॉगिंग पर्यटन स्थलों, संस्कृतियों और घटनाओं के प्रत्यक्ष अनुभवों को संजोने का एक सशक्त माध्यम है।अपने यात्रा-सफर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में सुश्री शिखा वर्शनी ने कहा कि जिज्ञासा ही उनकी यात्राओं और लेखन की मूल प्रेरणा रही है। उन्होंने साझा किया कि सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के दौरान उनका परिचय हिंदी साहित्य से हुआ, जिसने उन्हें अपने अनुभवों को अभिव्यक्त करने के लिए आवश्यक शब्द-सम्पदा और संवेदनशीलता प्रदान की। उन्होंने बताया कि यद्यपि वे भारत में केवल 14–15 वर्ष ही रहीं, लेकिन अपने पिता के साथ देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओं ने उन्हें भारतीय संस्कृति के विविध रंगों से परिचित कराया।उन्होंने कहा, “दुनिया भर की यात्रा के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि हम अपने ही देश की पर्यटन संभावनाओं को अक्सर कम आँकते हैं। भारत का ऐतिहासिक वैभव और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत हमारी परंपराओं, रीति-रिवाजों, स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों में प्रतिबिंबित होती है। भारतीय होने के नाते हमें न केवल इस धरोहर पर गर्व करना चाहिए, बल्कि इसे स्वयं अनुभव करने के लिए भी गंभीर प्रयास करने चाहिए।”सत्र का संचालन करते हुए श्री राहुल चौधरी ने अपने यात्रा अनुभव साझा किए और यात्रा लेखन में सूक्ष्म अवलोकन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक-संस्कृति और हरित परिदृश्य के कारण प्रत्येक यात्री की ‘मस्ट-विज़िट’ सूची में अवश्य शामिल होना चाहिए।युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए पैनलिस्टों ने कहा कि पठन-पाठन की घटती प्रवृत्ति के कारण युवाओं की शब्द-सम्पदा सीमित होती जा रही है। उन्होंने युवाओं से साहित्य के साथ गहन जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही लेखकों से भी आग्रह किया कि वे अपनी भाषा और लेखन शैली को अधिक सहज, सरल और युवा-अनुकूल बनाएं।
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- जिला स्तरीय मुख्य समारोह मोहला के मिनी स्टेडियम में होगा आयोजित
मोहला । जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित मुख्य समारोह में लोकसभा सांसद, राजनांदगांव श्री संतोष पांडेय 26 जनवरी को सुबह 9 बजे ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे। मुख्य अतिथि द्वारा परेड का निरीक्षण एवं संदेश वाचन किया जाएगा। समारोह में मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन, हर्ष फायर एवं परेड का मार्च पास्ट, शहीद परिवारों का सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभागीय झांकियों का प्रस्तुतिकरण एवं पुरस्कार वितरण किया जाएगा। - - पीएम आवास, मनरेगा और एनआरएलएम में तेजी लाने के निर्देश- स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के निर्देश, टेलीमेडिसिन सेवा के विस्तार के लिए बनाए कार्ययोजना- उर्वरक आपूर्ति में लापरवाही पर सख्त, उर्वरक आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित करने के दिए निर्देश- उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने ली जिला स्तरीय समीक्षा बैठकमोहला । छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक में विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक सुनिश्चित करने तथा प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।जिला पंचायत विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने योजनाओं के पालन प्रतिवेदन की जानकारी ली। इस अवसर पर सीईओ, जिला पंचायत द्वारा मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत, प्रगतिरत एवं लंबित कार्यों की जानकारी दी गई। उप मुख्यमंत्री ने जिले में लंबित प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रकरणों पर जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों को हितग्राहियों को प्रेरित कर आवास निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर उनके उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में उपलब्ध स्थानीय वनोपज की जानकारी लेते हुए उनके खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा, जिससे स्थानीय संसाधनों का वैल्यू एडिशन कर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें। उन्होंने सीएलएफ मुख्यालय में महतारी सदन की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजने, बैठकों को अधिक उपयोगी बनाने तथा भावी रोजगारमुखी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।सीईओ जिला पंचायत ने जानकारी दी कि स्थानीय स्तर पर राजमिस्त्रियों की कमी को दूर करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही आवास प्रगति सभा के माध्यम से पीएम आवास हितग्राहियों को निर्माण कार्य में प्रगति लाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्व-सहायता समूहों, मछली पालन समूहों एवं “मोर गांव मोर पानी” अभियान की भी जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री ने पंचायतों में पंजी संधारण की स्थिति की समीक्षा करते हुए स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।गृह विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में नक्सल मूवमेंट, नक्सली संगठन, घुसपैठियों एवं जुआ-सट्टा पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई। इस संबंध में उन्होंने पृथक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ट्रैफिक एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु स्कूलों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जिले में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली और जिला अस्पताल को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवा के विस्तार हेतु दूरस्थ ग्राम पंचायतों का चयन कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान ब्लड सैंपल संग्रहण, आयुष्मान कार्ड से उपचार, रेडक्रॉस गतिविधियां, सीएचसी ओपीडी, दिव्यांग प्रमाण पत्र, टीबी मुक्त ग्राम पंचायत, डायलिसिस सेवा सहित अन्य स्वास्थ्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई।कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान रबी फसलों हेतु उर्वरक की उपलब्धता नहीं होने पर उप मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र सोसाइटियों में उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मत्स्य विभाग को व्यक्तिगत स्तर पर हेचरी निर्माण के लिए हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार एवं आयमूलक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।पीएचई विभाग को जल जीवन मिशन अंतर्गत कार्यों के दौरान क्षतिग्रस्त स्थानों की मरम्मत कर पंचायतों को हैंडओवर करने के निर्देश दिए गए। वहीं सिंचाई विभाग से सिंचाई क्षेत्र विस्तार हेतु स्वीकृत लघु एवं मध्यम बांधों की प्रगति की जानकारी ली गई। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा जनहित में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भोजेश शाह मांडवी, जिला पंचायत सदस्य श्री नरसिंह भंडारी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक श्री यशपाल सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती भारती चंद्राकर, अपर कलेक्टर श्री जीआर मरकाम, अपर कलेक्टर श्री मिथलेश डोंडे सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।- परंपराओं का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारीप्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत आता है, ऐसे में परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रत्येक गांव के ठाकुर, मांझी, गायता, पटेल एवं कोटवार की सूची तैयार करने, पारंपरिक देव स्थलों का चिन्हांकन एवं दस्तावेजीकरण करने तथा बीट प्रणाली की समीक्षा कर व्यापक प्रचार-प्रसार एवं चस्पा करने के निर्देश दिए।- अविवादित बटवारा एवं नामांतरण प्रकरणों में कमी लाने प्रदान करें प्रशिक्षणवन विभाग की समीक्षा में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाख उत्पादन प्रशिक्षण के साथ-साथ मछली पालन गतिविधियों पर कार्य किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने जानकारी दी कि “हमर स्वस्थ लईका” कार्यक्रम अंतर्गत संवर्धित टेक-होम राशन प्रदान किया जा रहा है, जिससे बच्चों के सुपोषण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब मध्यम कुपोषित बच्चों के लिए भी विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वही किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्व विभाग ने बताया कि दस्तावेजों की सुलभ उपलब्धता हेतु अभिलेखागार का निर्माण किया गया है। साथ ही स्कूली एवं आंगनबाड़ी बच्चों के जाति प्रमाण पत्र निर्माण हेतु विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने अविवादित बटवारा एवं नामांतरण प्रकरणों में कमी लाने के लिए सचिवों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
- - कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने लिया व्यवस्थाओं का जायजामोहला । जिला मुख्यालय के मिनी स्टेडियम में शनिवार को गणतंत्र दिवस समारोह का फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। अपर कलेक्टर श्री मिथलेश डोंडे ने मुख्य अतिथि की भूमिका का निर्वाह कर ध्वजारोहण किया व परेड की सलामी ली। इसके पश्चात परेड निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का रिहर्सल भी किया। इस मौके पर कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति,पुलिस अधीक्षक श्री यशपाल सिंह, सीईओ श्रीमती भारती चन्द्राकर, अपर कलेक्टर श्री जीआर मरकाम, एसडीएम मोहला डॉ.हेमेन्द्र भुआर्य, डिप्टी कलेक्टर श्री डीआर ध्रुव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पिताम्बर पटेल, समेत जिलास्तरीय अधिकारी, बल एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें।गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के पश्चात सलामी, राष्ट्रगान व मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के संदेश का वाचन होगा। जिसके बाद मुख्य अतिथि परेड का निरीक्षण करेंगे। समारोह में आईटीबीपी, जिला पुलिस बल, एनसीसी और स्काउट गाइड के छात्र-छात्राओं की टुकड़ियों द्वारा मार्च पास्ट किया जाएगा। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जाएगा। तत्पश्चात स्कूली बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच व बैठक व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात, बिजली आपूर्ति, पेयजल आदि के बारे में जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को उनको सौंपे गए दायित्वों के अनुसार सारी तैयारियां समय से पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया।
- -रायपुर साहित्य उत्सव में उमड़ा जनसैलाब-बड़ी संख्या में लोगों ने कराया पंजीयनरायपुर, / नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय ‘रायपुर साहित्य उत्सव-2026’ में साहित्यप्रेमियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। उत्सव के तीसरे दिन भी परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। विभिन्न आयु-वर्ग के नागरिकों, छात्रों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने उत्सव में पहुँचकर सक्रिय रूप से सहभागिता की।साहित्य उत्सव में आयोजित विविध सत्रों, गोष्ठियों और परिचर्चाओं को सुनने के लिए सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। पंजीयन काउंटरों में लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं। अब तक उत्सव में अत्यधिक संख्या में नागरिकों ने पंजीयन कराया है, जो साहित्यिक गतिविधियों के प्रति लोगों की गहरी रुचि को दर्शाता है।गौरतलब है कि पुरखौती मुक्तांगन प्रांगण पर आयोजित साहित्य उत्सव में विभिन्न विषयों पर आधारित सत्रों में साहित्य, संस्कृति, कला, मीडिया, समाज और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रख्यात वक्ताओं, लेखकों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से उत्सव को और भी समृद्ध बनाया।रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को नई दिशा देने का प्रयास है। उत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सहभागी पहुंचे, जिससे यह आयोजन प्रदेश में साहित्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और जनता के जुड़ाव का प्रतीक बन गया है।
- -भारतीय दृष्टि से पाठ्यवस्तु और पत्रकारिता के भारतीयकरण की आवश्यकता पर विशेषज्ञों ने दिया जोररायपुर, /रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को “नवयुग में भारत बोध” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम मावली प्रसाद श्रीवास्तव को समर्पित रहा। परिचर्चा के सूत्रधार श्री प्रभात मिश्रा थे। कार्यक्रम में डॉ. संजीव शर्मा एवं डॉ. संजय द्विवेदी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।डॉ. संजीव शर्मा ने शिक्षा में भारत बोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि को समुचित स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल आत्मकल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी हुई है। हमारी दृष्टि सभी को अपने जैसा बनाने की नहीं, बल्कि विविधता में एकता की है।उन्होंने कहा कि शिक्षा की भूमिका सामान्य से कहीं अधिक व्यापक है और उसका उद्देश्य व्यक्ति को जाति-पाति तथा संकीर्ण बंधनों से मुक्त कर मानवीय मूल्यों से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ईश्वर की अनुभूति मानव, जीव-जंतु और प्रकृति सभी में की जाती है। हमारी सांस्कृतिक शब्दावली को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा स्तर पर भारत बोध से जुड़ी पाठ्यवस्तु में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगलों के आक्रमण भौतिक थे, जबकि अंग्रेजों ने मानसिक आक्रमण कर भारतीयों में हीनभावना उत्पन्न की, जिससे बाहर निकलना आज की आवश्यकता है।उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यवस्तु और मानसिकता—दोनों में परिवर्तन जरूरी है, किंतु यह परिवर्तन भारतीय परिप्रेक्ष्य में होना चाहिए, न कि पश्चिमी पद्धति के अनुकरण से। उन्होंने उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थानों को केवल मान्यता और प्रतिष्ठा की संरचना से बाहर निकलकर विश्वस्तरीय शिक्षा के साथ उसका भारतीयकरण भी करना होगा। पंचतंत्र जैसी कथाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान और विज्ञान दोनों समाहित हैं। आज का भारतीय युवा देश की विशिष्ट परंपरा और ज्ञान को विश्व स्तर तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी अपने विचार दूसरों पर थोपे नहीं, बल्कि अपने श्रेष्ठ विचार विश्व के सामने प्रस्तुत किए, जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने किया था।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पर्वत और नदियों तक को देवत्व के रूप में देखा जाता है। रामराज्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजतंत्र होते हुए भी वहां अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाती थी, जो लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है।डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता को भी भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। पश्चिमी मानकों पर आधारित पत्रकारिता भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने वैचारिक साम्राज्यवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि भारत बोध का विस्तार सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों से होना चाहिए।उन्होंने कहा कि “भारत को जानो, भारत को मानो” ही भारत बोध का मूल सूत्र है। भारतीयता ही सही अर्थों में राष्ट्रभाव की अभिव्यक्ति है। भारत की नीतियां उसकी अपनी भूमि और परंपरा पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आत्मविश्वास के अभाव को भारत बोध के मार्ग में बाधा बताते हुए कहा कि समाज में इसे स्थायी रूप देने के लिए शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही भारत बोध का सशक्त प्रसार संभव है और यही प्रक्रिया भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने का आधार बनेगी।
- -सुरेंद्र दुबे मंडप में चित्रकला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्ररायपुर / पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव में जितने रंग साहित्य के बिखरे हैं उतने ही रंग तस्वीरों के भी हैं। सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ की भव्य विविधता को दिखाती सुंदर चित्रों की प्रदर्शनी मन मोह लेती है। मंडप की पहली ही तस्वीर जो अपना ध्यान खींचती है वो है छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर। छत्तीसगढ़ महतारी के एक हाथ में पंडवानी का तंबूरा है और दूसरे हाथ में हंसिया है। एक हाथ में धान की बाली है और एक हाथ से वो आशीर्वाद दे रही हैं।छत्तीसगढ़ महतारी की इस तस्वीर को देखकर मन मुग्ध हो जाता है। यह तस्वीर रायपुर की कलाकार श्रीमती सोनल शर्मा ने तैयार की है। इसके बाद अवध कंवर का चित्र हमारी आंखों के सामने आ जाता है जिसमें बस्तर का बाजार जीवंत हो जाता है। ऐसा लगता है कि लाला जगदलपुरी और विनोद कुमार शुक्ल की कविता पेंटिंग का स्वरूप ले चुकी हैं। जांजगीर की कलाकार दिव्या चंद्रा ने राजिम कुंभ का चित्र बनाया है। राजिम कुंभ अपनी पूरी दिव्यता में इस चित्र में प्रगट होता है जब यह चित्र देखते हैं तो तीर्थ की उष्मा महसूस होने लगती है।रामगढ़ की पहाड़ियों को जिन्होंने नहीं देखा, वो बिल्कुल सजीव रूप में यहां इसके चित्र में बनाती है और चित्र में ऐसा जादू है कि महसूस करेंगे कि इसी जगह पर कालिदास ने पहली बार मेघ को देखा होगा और उनकी अमर कृति मेघदूतं का पहला प्लाट यहीं तैयार हुआ होगा।कार्यशाला के संयोजक भोजराज धनगर ने बताया कि नवा रायपुर, अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य चित्रकला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजीवन को दर्शाती विविध चित्रकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो दर्शकों को छत्तीसगढ़ की आत्मा से जोड़ती हैं।चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ सुरेंद्र दुबे मंडप में पेंटिंग कार्यशाला एवं कार्टून कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को अनुभवी कलाकारों से प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कार्यशालाओं में रंगों की तकनीक, रेखांकन, भाव-प्रस्तुति तथा सामाजिक विषयों पर कार्टून निर्माण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।साहित्य उत्सव में चित्रकला के प्रति रुचि रखने वाले साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम दर्शकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कला और साहित्य के इस संगम ने उत्सव को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया है, जहां शब्दों के साथ-साथ रंगों के माध्यम से भी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति हो रही है।
- - विज्ञानसम्मत बाल साहित्य का लेखन अनिवार्य : डॉ. गोपाल दवे- साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं : बलदाऊ राम साहूरायपुर / रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता का सत्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार को समर्पित रहा। जिसमें साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. गोपाल दवे, बाल साहित्यकार श्री बलदाऊ राम साहू बतौर वक्ता परिचर्चा में शामिल हुए, जिसके सूत्रधार श्री एस के बिसेन रहे। इस अवसर पर देवभोग के कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा लिखित बाल कविता संग्रह आंखों का तारा, श्री ओमप्रकाश जैन की पुस्तक जीवन चक्र और श्री संतोष कुमार मिरी की पुस्तक जीवन बोध का विमोचन किया गया।परिचर्चा में अपने संबोधन में डॉ. गोपाल दवे ने कहा कि बाल साहित्य का पाठक एकमात्र ऐसा पाठक है जो स्वयं क्रेता नहीं होता, न ही निर्णायक होता है। एक समय था जब बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बच्चे अपने पालकों से बाल साहित्य खरीदने की जिद करते थे। डॉ. दवे ने कहा कि हमें बच्चों को सरल साहित्य सिखाना होगा। अंग्रेजी के नाम पर हम कितने सारे उपक्रम कर रहे हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि बच्चों को बाल साहित्य लेकर दें साथ ही एक हिंदी शब्दकोश भी दें ताकि जब कोई शब्द समझ न आए वह शब्दकोश में ढूंढ सके।उन्होंने आज के समय में विज्ञानसम्मत बाल साहित्य के लेखन को अनिवार्य बताया।श्री बलदाऊ राम साहू ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को गढ़ता है, उन्हें विचार देता है। बाल साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। बाल साहित्य को यदि हम पाठ्यपुस्तक से निकाल दें तो कुछ नहीं बचता। बाल साहित्य बच्चों को प्रेरित करता है। बच्चों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने की परंपरा कम हो रही है, बाल पत्रिकाएं बंद होती जा रही हैं।श्री साहू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं कर पाते। लोग बाल साहित्य को मनोरंजन का साधन नहीं, सद्विचारों का विचारों का संग्रह है। बच्चों को संवेदनशील मनुष्य बनाने में बाल साहित्य का बड़ा महत्व है। श्री साहू ने बाल साहित्य को जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के लिए भाषा संस्कार की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।परिचर्चा के सूत्रधार श्री एस के बिसेन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि धीरे-धीरे पुस्तकों से पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियां गायब हो रही हैं। उन्होंने नैतिक शिक्षा के पाठ में बाल साहित्य को बहुत जरूरी बताया और कहा कि बाल साहित्य संस्कार और व्यवहार का मूल आधार है।
- -गुरु–शिष्य परंपरा और दुर्लभ वाद्यों के संरक्षण पर विशेषज्ञों ने रखे विचाररायपुर, /रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को द्वितीय सत्र के दौरान “नाट्यशास्त्र और कला परंपरा” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।यह सत्र महान कला संरक्षक राजा चक्रधर सिंह को समर्पित रहा। कार्यक्रम के सूत्रधार राजेश गानोदवाले रहे। परिचर्चा में इंदिरा कला विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति डॉ. लवली शर्मा तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र से संबद्ध डॉ. सच्चिदानंद जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने नाट्यशास्त्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नाट्यशास्त्र अपने आप में एक संपूर्ण शास्त्र है और जहां भी सृजनात्मकता है, वहां नाट्यशास्त्र की उपस्थिति दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि तानपुरा निर्माण की परंपरा पर आधारित एक वृत्तचित्र का निर्माण किया गया है, जिससे पारंपरिक वाद्य निर्माण की प्रक्रिया को प्रलेखित किया जा सके।उन्होंने कहा कि यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में नाट्यशास्त्र तथा भगवद्गीता की पांडुलिपियों को सम्मिलित किया जाना भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक मान्यता का प्रमाण है।डॉ. जोशी ने गुरु–शिष्य परंपरा पर बल देते हुए कहा कि यह परंपरा केवल आधारभूत संरचना का विषय नहीं, बल्कि भाव और संस्कार का विषय है। उन्होंने बताया कि दीक्षा प्रणाली के अंतर्गत गुरु–शिष्य परंपरा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. जोशी ने कहा कि वाद्य यंत्र बनाने वाले कारीगर प्रायः गांवों में रहते हैं और वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि इंदिरा कला विश्वविद्यालय द्वारा दुर्लभ वाद्य यंत्रों के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर स्थित बावड़ी का जीर्णोद्धार कर उसका संरक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में वाद्य यंत्रों की देखरेख और अनुरक्षण से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि परंपरागत वाद्य संस्कृति को तकनीकी दृष्टि से भी संरक्षित किया जा सके। वाद्य यंत्र निर्माण से जुड़े शिल्पकारों को सम्मानित करने की परंपरा भी निभाई जा रही है।उन्होंने इंदिरा कला विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में स्थापित करने तथा गुरु–शिष्य परंपरा को सशक्त रूप से लागू करने के अपने संकल्प को भी व्यक्त किया।परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि नाट्यशास्त्र और भारतीय कला परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन हेतु शैक्षणिक संस्थानों तथा समाज की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।
- - एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन, रकबा सुधार एवं धान बिक्री से संबंधित समस्याओं की ली जानकारी- धान के उठाव में प्रगति लाने के दिए निर्देश- चेक पोस्ट पर कोचियों एवं बिचौलियों के धान के अवैध परिवहन को रोकने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई रखें जारी- धान के रख-रखाव एवं सुरक्षा के लिए होनी चाहिए समुचित व्यवस्थाराजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने शनिवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में धान खरीदी के दृष्टिगत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों, पटवारियों, समिति प्रबंधक एवं डाटा एण्ट्री ऑपरेटरों की बैठक ली। कलेक्टर ने कहा कि धान खरीदी के बचे हुए शेष दिनों में सभी अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रियता एवं तत्परता से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होना चाहिए। उन्होंने एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन, रकबा सुधार एवं धान बिक्री से संबंधित समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने धान के उठाव में प्रगति लाने के निर्देश दिए। धान की एण्ट्री, भौतिक सत्यापन तथा निरीक्षण का कार्य लगातार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि मिलर्स द्वारा धान के उठाव की सतर्क एप के माध्यम से निगरानी की जा रही है। इसके लिए निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप धान का उठाव कार्य करने के लिए कहा। कलेक्टर ने कहा कि धान खरीदी के शेष दिनों में अंतर्राज्यीय सीमाओं के चेक पोस्ट पर कोचियों एवं बिचौलियों के धान के अवैध परिवहन को रोकने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई जारी रखें।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कहा कि सभी नोडल अधिकारी धान उपार्जन केन्द्रों में निरंतर निरीक्षण जारी रखें। उन्होंने धान की सुरक्षा के लिए कैप कव्हर, पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज व्यवस्था के संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान उपार्जन केन्द्रों में संग्रहित धान के रख-रखाव एवं सुरक्षा के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने एग्री स्टेक पोर्टल में रकबा सुधार एवं किसानों का नवीन पंजीयन, रकबा संशोधन के संबंध में जानकारी ली। बैठक में अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर, जिला खाद्य अधिकारी श्री रविन्द्र सोनी, डिप्टी कलेक्टर श्री अनिकेत साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर ।राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर लोकभवन सचिवालय में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उप सचिव सुश्री निधि साहू, संवैधानिक प्रकोष्ठ के उप सचिव डॉ. रूपेन्द्र कवि सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मताधिकार की शपथ ली।। सभी ने शपथ ली कि ‘‘हम भारत के नागरिक लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए यह शपथ लेते हैं कि हम अपने देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा को बनाए रखेंगे तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए निर्भीक होकर धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, भाषा अथवा अन्य किसी भी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना सभी निर्वाचनों में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।’’
- - मताधिकार का करें विवेकपूर्ण उपयोग : कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जितेन्द्र यादव- युवा मतदाता अपने मतदान के अधिकार का करें सर्वाधिक प्रयोग- राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर जिला स्तरीय समारोह संपन्न- नवीन मतदाताओं को बैच लगा कर किया गया सम्मानित- उत्कृष्ट कार्य करने वाले बीएलओ को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया गया सम्मानितराजनांदगांव । राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विजय कुमार होता आज जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री जितेन्द्र यादव विशेष रूप से उपस्थित थे।जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विजय कुमार होता ने कार्यक्रम को संबोधित करने हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना दिवस को गणतंत्र दिवस के ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संविधान अनुच्छेद 326 भारत के नागरिकों को मतदान का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक अधिकार के साथ एक संवैधानिक कर्तव्य भी है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में कहा है कि मतदान का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण निष्पक्ष निर्वाचन है। भारत के युवाओं को 18 वर्ष पूर्ण होने पर मतदान का अधिकार मिल जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को मताधिकार का प्रयोग कराना एवं युवाओं को मतदान की प्रक्रिया से जोडऩा है। जिससे मतदाता सशक्त राष्ट्र का नागरिक बनें और देश के विकास में भागीदारी तय कर सके। जो नागरिक मताधिकार का प्रयोग करता है, वह सक्रिय मतदाता है। जो नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं, वह निष्क्रिय मतदाता होते हैं। इससे निष्क्रिय मतदाता की हानि नहीं होती, यह एक संस्थागत हानि होती है। निष्क्रिय मतदाता को सक्रिय मतदाता में बदलने का प्रयास करना चाहिए। जब हम जनप्रतिनिधि को चुनते हंै तो हम अपनी आवाज को अभिव्यक्त करते हंै। जनप्रतिनिधि हमारी समस्याओं को फोरम तक पहुंचाते हैं और समस्याओं का निराकरण कराने का प्रयास करते है, इसलिए मतदान का अधिकार बहुत आवश्यक है और उसका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर निर्वाचन कराने का कार्य कलेक्टर ने लिए चुनौतीपूर्ण होता है। निर्वाचन लोकतंत्र का उत्सव है और युवा मतदाता अपने मतदान के अधिकार का सर्वाधिक प्रयोग करें।कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री जितेन्द्र यादव ने सभी को लोकतंत्र के पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि सदियों से मतदान हमारे जीवन का हिस्सा रहा होगा। ऐतिहासिक तौर पर भी हमारे देश में जनपदों में लोकतंत्र का स्वरूप रहा है। मतदान का अधिकार एक ऐसी शक्ति है, जिसके माध्यम से नागरिक जनप्रतिनिधि एवं सरकार को चुनते हंै। ब्रिटिश शासनकाल में जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार नहीं था। ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के कारण नागरिक मताधिकार एवं अन्य अधिकारों से वंचित रहे। देश की आजादी के बाद भारतीयों को मदाधिकार की शक्ति प्राप्त हुई। लोकतंत्र में बहुत सी चुनौतियों के बावजूद निर्वाचन कराने में सफलता प्राप्त हुई तथा मत देने के अधिकार के माध्यम से जनमानस के उत्थान के लिए इसका उपयोग किया गया। भारतीयों ने इस दृष्टिकोण से विश्व को एक नई दिशा दिखाई। 61वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से मतदान करने की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को मतदान का अधिकार मिल सके। उन्होंने कहा कि हमें मताधिकार की महत्वपूर्ण शक्ति प्राप्त है, लेकिन हमें इस बात को समझने की आवश्यकता है कि हम इस मतदान करने के अधिकार का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करें। जाति, धर्म, लिंग की संकीर्ण मानसिकता से परे होकर देश एवं समाज को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तियों को वोट दे। विवेकपूर्ण तरीके से मताधिकार का प्रयोग करते हुए जनमानस की सुविधाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए आगे बढऩे वाले व्यक्तियों को मतदान करें। आने वाले समय में युवा भी मतदान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। न सिर्फ वोट दें बल्कि वोट लेने के लिए भी आगे आएं। उन्होंने मतदाताओं से आव्हान करते हुए कहा कि मताधिकार का विवेकपूर्ण उपयोग करें।इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजनांदगांव श्री विजय कुमार होता ने कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं मतदाताओं को मतदाता जागरूकता की शपथ दिलाई। साथ ही नवीन मतदाताओं को बैच लगा कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बीएलओ को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ मतदाताओं एवं दिव्यांग मतदाताओं को श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री प्रकाश टंडन, जिला परियोजना अधिकारी साक्षरता श्रीमती रश्मि सिंह सहित अन्य अधिकारी, बीएलओ सहित वरिष्ठ दिव्यांग, युवा व अन्य मतदाता उपस्थित थे।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी मुख्यालय डंगनिया परिसर के खेल मैदान में 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्टीब्यूशन एवं जनरेशन कम्पनी के अध्यक्ष डॉ. श्री रोहित यादव (आईएएस.) प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण कर मार्चपास्ट परेड की सलामी लेंगे। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जायेगा। समारोह में पावर कम्पनीज के प्रबंध निदेशकगण श्री राजेश कुमार शुक्ला, श्री एस.के.कटियार, श्री भीमसिंह कंवर एवं निदेशक श्री आर.ए.पाठक विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) श्री ए.एम.परियल ने विद्युत कंपनियों के समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों से कार्यक्रम में प्रातः 7.15 बजे उपस्थिति का अनुरोध किया है।
- रायपुर। किसानों का धान अभी उपार्जन केन्द्रों में पहुंचना बाकी है पर भौतिक सत्यापन के नाम पर टोकन जारी करना बंद कर दिया गया है । खरीदी हेतु महज 4 दिन बाकी हैं लेकिन भौतिक सत्यापन के बाद भी किसानों को टोकन जारी नहीं किया जा रहा है वहीं कई किसानों का डाटा अभी तक कैरी फॉरवर्ड नहीं किया गया है जिसके चलते वे धान बेचने की बोहनी भी नहीं कर पाये हैं । इसका एक ज्वलंत उदाहरण टेकारी सोसायटी है जहां के 27 किसानों को टोकन जारी नहीं हुआ तो वे महज अपना एक हजार क्विंटल धान नहीं बेच पायेंगे ।जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक रायपुर के अधीनस्थ मंदिर हसौद शाखा के अंतर्गत आता है टेकारी सोसायटी । 3 ग्राम टेकारी , कुंडा व खम्हरिया के लिये गठित इस सोसायटी का धान उपार्जन केन्द्र भी टेकारी ही है । अभी तक टोकन न मिलने से सांसत् में पड़े किसानों ने आज रविवार को किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा से मुलाकात कर अपनी पीड़ा व्यक्त की । उनके हवाले से श्री शर्मा ने बतलाया कि 17 किसान ऐसे हैं जिनके धान का शासन के निर्देशानुसार भौतिक सत्यापन किया जा चुका है व उनमें से 10 को दूसरा व 7 को तीसरा टोकन की आवश्यकता है व इन्हें सब मिला महज करीबन 7 सौ क्विंटल धान बेचना है पर अभी तक टोकन जारी नहीं किया गया है। ऐसे किसानों में 13 टेकारी के , 02 - 02 कुंडा व खम्हरिया के हैं । इसी तरह कैरी फॉरवर्ड की प्रक्रिया पूरी न हो पाने की वजह के चलते टोकन न मिलने से धान बिक्री की बोहनी भी न कर पाने वाले लगभग 10 किसानों ने जिनमे से 08 टेकारी के व 02 कुंडा के हैं ने जानकारी दी कि उन सब का मिला कुल रकबा लगभग 15 एकड़ है और सभी मिला पात्रतानुसार लगभग 3 सौ क्विंटल धान ही सोसायटी में बेच पायेंगे । इस संबंध में सोसायटी प्रबंधन से चर्चा करने पर बीते 23 जनवरी को ही उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिये जाने की जानकारी मिलते की बात कहते हुये उन्होंने कहा है कि शासन - प्रशासन की चूक की वजह से किसी भी पात्र किसान का धान सोसायटियों में बिकने से नहीं रुकना चाहिये । उन्होंने क्षेत्र के अन्य सोसायटियों की भी स्थिति से अवगत हो शासन- प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की बात कही है ।
- -सुरेंद्र दुबे मंडप में चित्रकला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, सेल्फी का बनी हाटस्पाट-छत्तीसगढ़ महतारी अपनी अद्भुत छवि में निखर रही, यहीं तस्वीर ले रहे लोगरायपुर। पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव में जितने रंग साहित्य के बिखरे हैं उतने ही रंग तस्वीरों के हैं। सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ की भव्य विविधता को दिखाती सुंदर चित्रों की प्रदर्शनी मन मोह लेती है। मंडप की पहली ही तस्वीर जो अपना ध्यान खींचती है वो है छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर। छत्तीसगढ़ महतारी के एक हाथ में पंडवानी का तंबूरा है और दूसरे हाथ में हंसिया है। एक हाथ में धान की बाली है और एक हाथ से वो आशीर्वाद दे रही हैं। छत्तीसगढ़ महतारी की इस तस्वीर को देखकर मन मुग्ध हो जाता है। यह तस्वीर रायपुर की कलाकार सोनल शर्मा ने तैयार की है। इसके बाद अवध कंवर का चित्र हमारी आंखों के सामने आ जाता है जिसमें बस्तर का बाजार जीवंत हो जाता है। ऐसा लगता है कि लाला जगदलपुरी और विनोद कुमार शुक्ल की कविता पेंटिंग का स्वरूप ले चुकी हैं। जांजगीर की कलाकार दिव्या चंद्रा ने राजिम कुंभ का चित्र बनाया है। राजिम कुंभ अपनी पूरी दिव्यता में इस चित्र में प्रगट होता है जब यह चित्र देखते हैं तो तीर्थ की उष्मा महसूस होने लगती है।रामगढ़ की पहाड़ियों को जिन्होंने नहीं देखा, वो बिल्कुल सजीव रूप में यहां इसके चित्र में बनाती है और चित्र में ऐसा जादू है कि महसूस करेंगे कि इसी जगह पर कालिदास ने पहली बार मेघ को देखा होगा और उनकी अमर कृति मेघदूतं का पहला प्लाट यहीं तैयार हुआ होगा।कार्यशाला के संयोजक भोजराज धनगर ने बताया कि नवा रायपुर, अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य चित्रकला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजीवन को दर्शाती विविध चित्रकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो दर्शकों को छत्तीसगढ़ की आत्मा से जोड़ती हैं।चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ सुरेंद्र दुबे मंडप में पेंटिंग कार्यशाला एवं कार्टून कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को अनुभवी कलाकारों से प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कार्यशालाओं में रंगों की तकनीक, रेखांकन, भाव-प्रस्तुति तथा सामाजिक विषयों पर कार्टून निर्माण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।साहित्य उत्सव में चित्रकला के प्रति रुचि रखने वाले साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम दर्शकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कला और साहित्य के इस संगम ने उत्सव को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया है, जहां शब्दों के साथ-साथ रंगों के माध्यम से भी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति हो रही है।
- रायपुर। भाजपा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री श्री शिवप्रकाश अपने एक दिवसीय प्रवास पर रायपुर पहुंचे। इस दौरान विमानतल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, यशवंत जैन, डॉ. नवीन मार्कंडेय, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, प्रदेश मंत्री अमित साहू सहित भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
- मिनट टू मिनट कार्यक्रम जारी, गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियां पूर्णबिलासपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय संभागीय मुख्यालय बिलासपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में तिरंगा झंडा फहराएंगे। वे राज्य की जनता के नाम संदेश वाचन के साथ ही परेड की सलामी लेंगे। गणतंत्र दिवस समारोह आयोजन की तमाम तैयारियां जिला प्रशासन द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं।समारोह स्थल पर आयोजित कार्यक्रम के लिए जारी मिनट टू मिनट कार्यक्रम के अनुसार मुख्य समारोह में प्रातः 8.59 बजे मुख्य अतिथि श्री विष्णु देव साय का आगमन होगा। प्रातः 9 बजे ध्वजारोहण, राष्ट्रगान होगा। प्रातः 9.03 बजे मुख्यमंत्री द्वारा परेड का निरीक्षण किया जाएगा। प्रातः 9.06 बजे हर्ष फायर एवं प्रातः 9.13 बजे परेड द्वारा मार्च पास्ट किया जाएगा। प्रातः 9.18 बजे मुख्यमंत्री द्वारा राज्य की जनता के नाम संदेश का वाचन होगा। प्रातः 9.39 बजे परेड निष्क्रमण की कार्यवाही एवं इसके पश्चात प्रातः 9.48 बजे स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। प्रातः 10.20 बजे शासकीय विभागों की झांकी निकाली जाएगाी। इसके पश्चात प्रातः 10.57 बजे जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा तथा 11.15 बजे कार्यक्रम का समापन होगा। गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी पूरी हो चुकी है। समारोह में विभागों द्वारा आकर्षक झांकी का प्रदर्शन किया जाएगा। स्कूली बच्चों द्वारा संास्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सम्मानित करेंगे।
- रायपुर/रायपुर साहित्य महोत्सव के अंतर्गत आज पुरखौती मुक्तांगन, रायपुर स्थित लाला जगदलपुरी मंडप में “आज की हिंदी कहानियाँ” विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह सत्र महोत्सव के दूसरे दिन मंडप में आयोजित दूसरा सत्र था। इस पैनल चर्चा में प्रख्यात साहित्यकार श्री परदेशी राम वर्मा, वरिष्ठ लेखिका सुश्री जयश्री राय, प्रसिद्ध लेखक श्री सतीश जायसवाल तथा साहित्य विदुषी डॉ. अंशु जोशी ने सहभागिता की।चर्चा के दौरान वक्ताओं ने समकालीन हिंदी कहानी के स्वरूप, विषयगत परिवर्तन, शिल्पगत प्रयोगों तथा समाज के बदलते यथार्थ को अभिव्यक्त करने में साहित्य की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। पैनलिस्टों ने आज की हिंदी कहानी में उभरती सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और नए कथ्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर उपस्थित साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों एवं पाठकों के साथ संवाद भी हुआ, जिससे कार्यक्रम और अधिक सार्थक एवं विचारोत्तेजक बन सका।रायपुर साहित्य महोत्सव साहित्य, संस्कृति और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने का एक सशक्त मंच प्रदान कर रहा है, जहाँ विभिन्न विधाओं और भाषाओं के रचनाकारों का समागम हो रहा है।
- किंडल और ऑडियो बुक्स के दौर में भी रचनात्मकता की भूख ही सर्वाधिक महत्वपूर्णइंटरनेट ने साहित्य को दिया नया लोकतांत्रिक मंच, डिजिटल मंचों पर बढ़ रही पाठकों–लेखकों की सक्रियतारायपुर/ रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन आज लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा ‘डिजिटल युग के लेखक और पाठक’ में बदलते समय के साथ साहित्य, लेखन और पाठकीय संस्कृति में आ रहे बदलावों पर गंभीर और सकारात्मक विमर्श हुआ। सूत्रधार पत्रकार श्री अनिल द्विवेदी के संचालन में हुई इस परिचर्चा ने यह स्पष्ट किया कि डिजिटल माध्यम ने साहित्य के स्वरूप को बदला जरूर है, लेकिन उसकी आत्मा और रचनात्मकता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।लेखक, कवि और शिक्षक श्री सर्वेश तिवारी ने परिचर्चा में कहा कि किताबों का छपना आज भी जरूरी है, क्योंकि पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम वह अनुभव नहीं दे सकता जो मुद्रित किताब देती है। उन्होंने माना कि युवा और बच्चे ऑनलाइन काफी पढ़ रहे हैं। लेखक की सफलता का पैमाना पुरस्कार नहीं, बल्कि पाठकों की संख्या होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने अधिक पाठक, उतनी ही रचना की सार्थकता और पहुंच मानी जानी चाहिए।लेखक श्री नवीन चौधरी ने डिजिटल मीडिया की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि इंटरनेट ने साहित्य के लिए नए रास्ते खोले हैं। युवा पीढ़ी ने डिजिटल माध्यमों के जरिए श्री विनोद कुमार शुक्ल जैसे वरिष्ठ रचनाकारों को पढ़ा, जिससे उनकी पुस्तकों की रॉयल्टी लाखों तक पहुंची। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण पुराने लेखक फिर से सरकुलेशन में आ रहे हैं और पाठकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पढ़ने और पढ़ाने में रुचि जगाने में इंटरनेट की भूमिका बेहद अहम हो गई है।प्रसार भारती की सलाहकार श्रीमती स्मिता मिश्रा ने कहा कि डिजिटल माध्यम, किंडल और ऑडियो बुक्स जैसे विकल्पों ने किताबों को पढ़ना आसान, सस्ता और सुविधाजनक बना दिया है। अब किताबें सिर्फ पढ़ी ही नहीं जा रहीं, बल्कि सुनी भी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लेखन कभी बंद नहीं हुआ है, समय के साथ सिर्फ उसका फॉर्मेट बदलता रहा है। लेखक चाहे किसी भी टूल का उपयोग करे, लेकिन उसकी रचनात्मकता की भूख कम नहीं होनी चाहिए।वरिष्ठ पत्रकार श्री संजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि इंटरनेट के आने के बाद साहित्य का सही मायनों में लोकतांत्रीकरण हुआ है। अब रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाने के लिए अनेक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स उपलब्ध हैं। डिजिटलीकरण से साहित्य का पूरा परिदृश्य बदला है और बड़ी संख्या में युवा डिजिटल माध्यमों पर लिख और पढ़ रहे हैं, जो भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।परिचर्चा का निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए सूत्रधार श्री अनिल द्विवेदी ने कहा कि डिजिटल युग देखने–दिखाने, सुनने–सुनाने, पढ़ने और पढ़ाने का नया दौर लेकर आया है। यह युग सभी को मंच प्रदान कर रहा है और साहित्य को नए पाठक व नए लेखक दे रहा है।
- रायपुर/ आज रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “मन की बात” कार्यक्रम के माध्यम से उनके ओजस्वी एवं प्रेरणादायक उद्बोधन का श्रवण किया। उनके उद्बोधन में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प झलकता है। इस अवसर पर माननीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा जी, माननीय कैबिनेट मंत्रीगण श्री केदार कश्यप जी, श्री रामविचार नेताम जी, गुरु खुशवंत साहेब जी, माननीय सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल जी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।
- - अर्पण दिव्यांग पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव में बच्चों की प्रतिभा ने रचा प्रेरणा का उत्सवरायपुर। अर्पण कल्याण समिति द्वारा संचालित अर्पण दिव्यांग पब्लिक स्कूल, बजाज कॉलोनी सेक्टर-1 न्यू राजेन्द्र नगर में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम प्रेरणा और संवेदनाओं से भरा रहा। मूक-बधिर बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि सीमाएं प्रतिभा को रोक नहीं सकतीं।संगीत की लय पर थिरके मूक-बधिर बच्चेश्रवण शक्ति न होने के बावजूद बच्चों ने संगीत की धुन को महसूस कर जिस तालमेल के साथ नृत्य प्रस्तुत किया, उसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बच्चों की भाव-भंगिमाएं और आत्मविश्वास उनकी कड़ी मेहनत और प्रशिक्षण का प्रमाण थीं।मुख्य अतिथि ने बताया ईश्वर की सच्ची पूजाकार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के महासचिव प्रकाश गोलछा ने कहा कि ऐसे विशेष बच्चों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। उन्होंने संस्था को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।दिव्यांग बच्चों में होती है अद्भुत शक्ति : डीईओजिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चों में असाधारण क्षमताएं होती हैं, जरूरत केवल उन्हें पहचानने और तराशने की है। उन्होंने कहा कि समाज की सोच में बदलाव आना सकारात्मक संकेत है।बच्चों के बीच आकर मिली असीम शांतिविशेष अतिथि सुधीर सुल्तानिया ने कहा कि इन बच्चों के बीच आकर उन्हें असीम शांति का अनुभव हुआ। वहीं सराफा एसोसिएशन के सचिव निलेश शेठ ने बच्चों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखने का भरोसा दिलाया।शिक्षा के साथ हुनर पर विशेष जोरसंस्था के अध्यक्ष प्रकाश शर्मा ने बताया कि स्कूल में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर, चित्रकला, मूर्तिकला, नृत्य और खेलकूद का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।जनसहयोग से हो रहा सफल संचालनपूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि बीते पांच वर्षों से लोगों के सहयोग से स्कूल का सफल संचालन किया जा रहा है और यहां बच्चों की प्रतिभा को निखारने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थितिकार्यक्रम में प्रेस क्लब रायपुर के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संस्था के सचिव प्रकाश बारमेड़ा, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा, दिनेश शुक्ला, गिरीश शुक्ला एवं प्राचार्य कमलेश शुक्ला भी मौजूद थे।संचालन ने बांधे सभी कोकार्यक्रम का संचालन स्कूल की समन्वयक सीमा छाबड़ा ने प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया।
- रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर के महापौर श्रीमती मीनल चौबे गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर दिनांक 26 जनवरी 2026 सोमवार को प्रातः 8:00 बजे नगर पालिक निगम रायपुर के मुख्यालय भवन महात्मा गाँधी सदन के प्रांगण में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहरायेगी।
















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