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- -सिंधी संस्कृति के संरक्षण और युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने पर हुई चर्चारायपुर। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल से शनिवार को रायपुर स्थित उनके शासकीय निवास पर छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी की नवनियुक्त अध्यक्ष श्रीमती सुषमा जेठानी ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान सिंधी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन और समाज के सर्वांगीण विकास में अकादमी की भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि सिंधी समाज ने मेहनत, उद्यमशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों से प्रदेश एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समाज की गौरवशाली परंपराओं, भाषा, साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सिंधी अकादमी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हैस उन्होंने विश्वास जताया कि श्रीमती सुषमा जेठानी के नेतृत्व में अकादमी समाज की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाएगी। विभिन्न रचनात्मक एवं जनहितकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देगी।भेंट के दौरान सिंधी समाज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने, साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा समाज के सर्वांगीण विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्रीमती सुषमा जेठानी को अकादमी के अध्यक्ष पद का दायित्व संभालने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके सफल और प्रभावी कार्यकाल की कामना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में अकादमी नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगी और प्रदेश में सिंधी संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए उल्लेखनीय कार्य करेगी।
- 0- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल में जारी वर्कशॉप में वरिष्ठ शिक्षिका ने नई शिक्षा पद्धति के बारे में दी व्यवहारिक जानकारीरायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में वर्कशॉप लेने की अगली कड़ी में केंद्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त और लायंस क्लब की सदस्य मधु यादव ने शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धति के बारे में व्यवहारिक जानकारी दी। मधु ने सबसे पहले शिक्षकों से यह जानने का प्रयास किया कि उन्होंने शिक्षक बनना क्यों चुना? शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ अपने परिवार और अपने ऊपर भी ध्यान दे सकती हैं? उन्होंने बताया कि एक विद्यार्थी जब पढ़ता हो, तो वह जल्दी भूल जाता है। जब आप उसे समझाते हो, तो उसे काफी कुछ ध्यान रहता है, लेकिन जब आप उसे अपने साथ इंवॉल्व करते हो, तो उसे सब कुछ याद रहता है। इसीलिए विद्यार्थियों को अपने साथ विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से शिक्षण में इंवॉल्व कीजिए।मधु यादव ने एलएसआरडब्ल्यू और वीएआरके, दोनों ही पद्धति को बड़े विस्तार से समझाया। उन्होंने समझाया कि एलएसआरडब्ल्यू स्किल्स के माध्यम से किसी भी भाषा जैसे हिंदी, अंग्रेजी को सीखने और उसमें निपुणता हासिल करने के चार मूलभूत कौशल होते हैं। ये हैं लिसनिंग यानी सुनना, स्पीकिंग यानी भाषण, रीडिंग यानी पठन और राइटिंग यानी लेखन। भाषा को सीखने का क्रम भी यही होता है।वीएआरके पद्धति के बारे में मधु यादव ने जानकारी दी कि यह एक प्रचलित लर्निंग मॉडल यानी अधिगम शैली है। इसमें वी यानी विजुअल (दृश्य) होता है। इस शैली के लोग चित्रों, चार्ट, रेखाचित्रों और वीडियो के माध्यम से सबसे अच्छा सीखते हैं। ए का आशय ओरल अथवा ऑडिटरी (श्रवण) होता है। ऐसे लोग सुनकर, व्याख्यान अटैंड करके और समूह चर्चाओं में भाग लेकर सबसे जल्दी सीखते हैं। आर अर्थात रीड/राइट (पढ़ना व लिखना) है। इसमें उन्हें लिखी हुई सामग्री, किताबों, नोट्स और सूचियों के माध्यम से जानकारी को समझने में आसानी होती है। मधु के मुताबिक के अर्थात काइस्थेटिक (गतिज/अनुभव): इस शैली के लोग व्यावहारिक अनुभव, छूकर और करके सीखने में विश्वास रखते हैं।वरिष्ठ शिक्षिका मधु ने शिक्षकों को समझाया कि सबसे पहले एक रीडिंग कॉर्नर बनाएं। दूसरा बिन्दू क्लास रूम की सेटिंग चेंज करके बच्चों को यू शेप में बैठाएं। इससे हर बच्चे तक वह पहुंच सके। वर्कशॉप में अतिथि वक्ता मधु यादव का स्वागत वरिष्ठ शिक्षिका चित्रा जाउलेकर ने और स्मृति चिन्ह सुदेवी बिस्वास ने दिया। कार्यक्रम का संचालन अपर्णा आठले ने किया।
- 0- महाराष्ट्र मंडल की डायटिशियन आस्था काले ने भोजन को लेकर महिलाओं को दिए महत्वपूर्ण टिप्सरायपुर। आज हम सभी अपनी सेहत को लेकर सावधान तो हैं, लेकिन कहीं न कहीं हमारी डाइट इस प्रयास में रोड़ा बनकर खड़ी हो रही है। चाहकर भी कम इससे जीत नहीं पाते। हमें खाने में रोटी और चावल तो चाहिए ही चाहिए। फिर ऐसे में मोटापा कम करना भी एक बड़ा टास्क हो जाता है। ऐसे में हमें मल्टीग्रेन आटा, ब्राउन राइस, रागी, मिलेट्स जैसे उत्पादों का प्रयोग करना चाहिए, ताकि हमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिल सके। उक्त बातें महाराष्ट्र मंडल में महिलाओं की बैठक में इस आशय के विचार मंडल की आजीवन सभासद, योग- व्यायाम की प्रशिक्षिका व डायटिशियन आस्था काले ने कहीं।आस्था ने कहा कि आमतौर पर लोग जरूरी फाइबर और कैलोरी की जानकारी रखे बिना ही गेहूं की रोटी को सफेद चावल से हेल्दी मानने लगते हैं। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन किया जाए, तो चावल और रोटी भी बैलेंस्ड डाइट में शामिल होता है। मोटापा बढ़ने की वजह खराब भोजन प्रणाली, अनहेल्दी लाइफ स्टाइल होती है। चावल और रोटी की ओवरइटिंग (जरूरत से ज्यादा भोजन करना) मोटापा बढ़ा सकता है। गेंहू की रोटी में चावल के मुकाबले ज्यादा फाइबर होता है। भूख को कम करने में यही फाइबर आपकी मदद करता है।डायटिशियन आस्था काले के अनुसार कई लोग रोटी अत्यधिक घी, मक्खन, तेल या कैलोरी से भरी साइड डिश के साथ खाते हैं, जिससे टोटल कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। इस वजह से ज्यादा मात्रा में रोटी खाने से भी मोटापा बढ़ता है, या फिर अगर आपने रोटी को व्होल व्हीट की जगह रिफाइंड फ्लोर से बनाया हो तो भी। ओवरइटिंग (जरूरत से ज्यादा भोजन करना) में चाहे गेहूं की रोटी हो या फिर सफेद चावल, वो चर्बी बढ़ा सकता है। अक्सर लोग किसी एक फूड को मोटापे के लिए जिम्मेदार ठहरा देते हैं, लेकिन आमतौर पर मोटापा अत्यधिक कैलोरी, लो फिजिकल एक्टिविटी, खराब नींद, तनाव और खाने की अस्वस्थ आदतों की वजह से होता है।आस्था के मुताबिक हमारे जीवन में एक विडंबना यह भी है कि जब कभी किसी स्वास्थ्य परीक्षण में हमारा उच्च रक्तदाब, मधुमेह जैसी बीमारियों का पता चलता है, तब हमारा अपनी जीवनशैली में 'लो फिजिकल एक्टिविटी' की ओर ध्यान जाता है। जबकि हम युवावस्था से ही नियमित रूप से मार्निंग- इवनिंग वॉक, साइकिलिंग, दौड सहित विभिन्न शरीरिक गतिविधियों में भाग लें तो न तो बीमारियां हमें घेरेंगी और न ही शरीर पर मोटापा हावी होगा। यदि हमने अभी तक शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया, तो कम से कम अब हम मार्निंग- इवनिंग वॉक, साइकिलिंग, दौड़ जैसी गतिविधियां शुरू करें। याद रहे लो फिजिकल एक्टिविटी से बचने का कोई शार्टकट नहीं है।
- 0- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में किशोर वैभव निर्देशित 70 मिनट के यह नाटक शाम सात बजे होगा शुरूरायपुर। नाट्य संस्था ‘रंगभूमि’ के सहयोग से युवा निर्देशक किशोर वैभव द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक ‘कथा’ का मंचन रविवार, 14 जून को महाराष्ट्र मंडल में संत ज्ञानेश्वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर किया जाएगा। 70 मिनट का यह नाटक शाम सात बजे शुरू होगा।आचार्य रंजन मोड़क ने बताया कि किशोर वैभव का यह नाटक सांस्कृतिक टीम ‘रंगभूमि’ के सहयोग से मंचित किया जाएगा। ‘कथा’ कथासरित्सागर पर आधारित है। कथासरित्सागर संस्कृत कथा साहित्य का उत्कृष्ट और शिरोमणि ग्रंथ है। कश्मीरी पंडित सोमदेव भट्ट की यह अमर कृति 11वीं शताब्दी में रची गई। यह कहानियों का एक विशाल सागर है, जो भारतीय इतिहास की गौरवशाली धरोहर है। इसमें 124 तरंगों में 21,388 पद द्वारा मिथक, इतिहास, यथार्थ, सच्चाई और इंद्रजाल का ऐसा अनूठा संगम किया गया है, जो दूसरी जगह दुर्लभ है।आचार्य मोड़क ने बताया कि इस नाटक में सूत्रधार हेमंत यादव होंगे। वहीं निलेश पटेल, अक्षदा मातुरकर, सुमन आरोही, आदित्य दास, आस्था जांगड़े, विजय शर्मा सहित अन्य कई कलाकार मंच पर नजर आएंगे। वहीं विन्यास संयोजन की भूमिका लोकेश साहू, स्वप्निल हुद्दार व संत फरिकार ने निभाई है। रंगसाधकों की सहयोग राशि से कथा का मंचन किया जाएगा।
- बालोद. मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित छाया चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करने हेतु बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है। उल्लेखनीय है कि देश में मोदी सरकार के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा नगर पालिका परिषद कार्यालय बालोद के परिसर में स्थित पुराना टाउन हाॅल में 12 से 14 जून तक 03 दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी के अंतर्गत छायाचित्र एवं एलईडी स्क्रीन के माध्यम से देश में मोदी सरकार के 12 वर्षों के सफलतम कार्यकाल के दौरान सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए जा रहे लखपति दीदी योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, किसान सम्मान निधि योजना, डिजिटल इंडिया, विकसित भारत संकल्प आदि की सजीव प्रस्तुतिकरण किया जा रहा है। इस दौरान आगन्तुकों को जनसंपर्क विभाग की मासिक पत्रिका ’जनमन’ का भी वितरण किया जा रहा है।
- 0- कम लागत में अच्छा उत्पादन से किसान संतुष्टरायपुर. कृषि में नई तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। जिले के अभनपुर विकासखंड के ग्राम जवईबांधा के किसान श्री मुकेश कुमार साहू ने नैनो डीएपी के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में सुधार और खेती की लागत को कम करने का अनुभव साझा किया है।करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर खेती करने वाले कृषक मुकेश ने बताया कि उन्होंने पिछले खरीफ सीजन में धान की फसल पर नैनो डीएपी का छिड़काव किया था। इसके बाद फसल का उत्पादन बेहतर हुई और धान की गुणवत्ता में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन की तैयारियों के दौरान सहकारी समिति से उन्हें समय पर बीज और उर्वरक प्राप्त हो गए, जिससे खेती के कार्य बिना किसी बाधा के पूरे किए जा सके।कृषक श्री मुकेश साहू ने कहा कि आधुनिक नैनो उर्वरक खेती को अधिक किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी नैनो डीएपी का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इसके परिणाम स्वयं देखकर उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।
- 0- आर्थिक संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का तय किया सफरबिलासपुर. जिले के जनपद पंचायत कोटा के ग्राम पंचायत लिटिया (बेडापाठ) की निवासी श्रीमती प्रेम वर्षा की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायक उदाहरण है। एक समय था जब उनका परिवार सीमित आय और आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवनयापन कर रहा था। परिवार की आय मुख्यतः कृषि और मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति करना भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के बारे में जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन में बदलाव की नई राह दिखाई।वर्ष 2024 में वे अन्य महिलाओं के साथ मिलकर दीप महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और समूह की सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने महुआ लड्डू निर्माण गतिविधि को आजीविका का माध्यम बनाया। प्रारंभ में पूंजी की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन समूह से प्राप्त सीआईएफ के 60 हजार रूपए की राशि की सहायता से उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से उन्होंने अपने कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया तथा बाद में ऋण प्राप्त कर व्यवसाय का विस्तार भी किया। समूह से जुड़ने के बाद उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 1 लाख 20 हजार रूपये हो गई है। बिहान योजना से आज दीदी प्रेम वर्षा लखपति दीदी बन गई है। महुआ लड्डू निर्माण गतिविधि शुरू करने के बाद उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज वे नियमित रूप से महुआ लड्डू का उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि वे समय पर ऋण की किश्तें भी चुका रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय का संचालन कर रही हैं।श्रीमती प्रेम वर्षा की सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किसी भी महिला के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। आज वे अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उनकी उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और समूह की शक्ति के बल पर आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है। उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि अवसर मिलने पर वे न केवल अपने परिवार की स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी एक नई पहचान स्थापित कर सकती हैं।
- 0- प्रधानमंत्री आवास योजना को बेहतर बनाने के लिए R-SETI दे रहा है राजमिस्त्री का प्रशिक्षण।बालोद. ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत बनने वाले मकानों को अधिक मजबूत, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से जनपद पंचायत गुण्डरदेही के युवाओं को R-SETI (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) द्वारा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत गुण्डरदेही विकासखण्ड की ग्राम पंचायत गुरेदा के 30 उत्साही ग्रामीण युवाओं को राजमिस्त्री और भवन निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को मकान निर्माण की बारीकियों और आधुनिक तकनीकी जानकारियों से लैस करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को केवल सैद्धांतिक ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जा रहा है, जिसमें शामिल हैं:नींव तैयार करना और दीवार निर्माण की सही तकनीक। छत निर्माण (Slab Casting) के सुरक्षित और सही तरीके। सीमेंट, रेत और अन्य निर्माण सामग्रियों का सही अनुपात में उचित उपयोग, जिससे फिजूलखर्ची रुके। प्लॉस्टर, फ्लोरिंग और फिनिशिंग के काम में निपुणता लाना ताकि मकान आकर्षक और मजबूत बनें।इस अनूठी पहल से दोहरा लाभ देखने को मिलेगा। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले गरीब परिवारों के आशियाने पहले से कहीं अधिक गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ बनेंगे, वहीं दूसरी तरफ गांव के ही 30 युवाओं को हुनरमंद बनाकर उनके लिए गांव में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।गौरतलब है कि R-SETI संस्थान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और विभिन्न बैंकों के सहयोग से संचालित होते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं में कौशल विकास कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
- बिलासपुर. जिले की महिला उद्यमियों को डिजिटल तकनीक, बाजार विकास एवं व्यवसाय विस्तार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से महतारी सदन बरतोरी (बिल्हा) में महिला उद्यमियों हेतु डिजिटल लिटरेसी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत सीएसआईडीसी एवं एएफसी इंडिया लिमिटेड के सहयोग से किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूह की सदस्यों एवं महिला संचालित एमएसएमई को बाजार विकास सहायता योजनाओं, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग तथा राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ गीता प्रजापति (पीआरपी) द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महिला उद्यमिता आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि बाजार विकास सहायता जैसी योजनाएं महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करती हैं। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा महिला उद्यमियों को विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के मेलों एवं प्रदर्शनियों में भागीदारी की प्रक्रिया, उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं लेबलिंग, गुणवत्ता प्रमाणन एवं मानकीकरण, बीटूबी और बीटूसी मार्केट लिंकज, ई-कॉमर्स एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री विस्तार तथा सरकारी सहायता एवं अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया शामिल रही। विशेषज्ञों ने सफल महिला उद्यमियों के प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किए तथा प्रतिभागियों को प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में अपने उत्पादों को स्थापित करने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। साथ ही प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान कर उन्हें आगे की कार्ययोजना तैयार करने संबंधी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।कार्यक्रम में जिलेभर से लगभग 30 महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूह प्रतिनिधियों एवं महिला संचालित एमएसएमई ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता जताई। इस अवसर पर एम.डी. नौशाद आज़मी एवं दीपक तिवारी (एएफसी इंडिया लिमिटेड) सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों, अधिकारियों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।
- बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत के आवासीय परिसर में एनटीपीसी लिमिटेड की नैगम सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के अंतर्गत आयोजित बालिका सशक्तिकरण अभियान (GEM)-2026 का 13 जून 2026 को भावपूर्ण समापन हुआ। इस चार सप्ताह के पूर्ण आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवसर पर परिसर का वातावरण भावनाओं से भरा रहा। अपनी बेटियों को लेने पहुंचे अभिभावकों के चेहरों पर गर्व और खुशी झलक रही थी, वहीं पिछले एक महीने से साथ रह रही बालिकाएं अपने साथियों और प्रशिक्षकों से विदा लेते समय भावुक नजर आईं।समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री संजय अग्रवाल, आईएएस, कलेक्टर, बिलासपुर उपस्थित रहे। उनका स्वागत विशिष्ट अतिथि श्री स्वपन कुमार मंडल, परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी सीपत ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, नाटक, समूह गीत एवं अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रशिक्षण अवधि के दौरान अर्जित अपने अनुभव, आत्मविश्वास और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। साथ ही प्रदर्शनी के माध्यम से सीखी गई विभिन्न कलाओं को भी साझा किया।अपने संबोधन में श्री संजय अग्रवाल ने बालिका सशक्तिकरण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन किसी भी बालिका के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपनी बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें हर अवसर उपलब्ध कराने का आह्वान किया और कहा कि आज की बालिकाएं कल के सशक्त समाज की आधारशिला हैं और उनमें असीम संभावनाएं निहित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और बड़े सपने देखने का साहस विकसित करते हैं।श्री स्वपन कुमार मंडल ने बालिकाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पिछले 28 दिनों में सभी प्रतिभागियों ने सीखने, अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का उत्कृष्ट परिचय दिया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक एनटीपीसी सीपत में 525 बालिकाएं इस पहल से लाभान्वित हो चुकी हैं और GEM-2026 के साथ यह संख्या और 121 बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद प्रत्येक वर्ष 10 मेधावी बालिकाओं को बाल भारती पब्लिक स्कूल, एनटीपीसी सीपत में कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है।श्रीमती शिखा मंडल, अध्यक्षा, संगवारी महिला समिति ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक बालिका में अपनी पहचान बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की अपार क्षमता है। उन्होंने बालिकाओं से आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों का पीछा करने तथा प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त सीख को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगवारी महिला समिति की सदस्याओं ने पूरे कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को परिवार के सदस्य की तरह स्नेह और मार्गदर्शन देने का प्रयास किया है।इस अवसर पर श्री सुरोजीत सिन्हा, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण), श्री अशोक सरकार, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं ईंधन प्रबंधन), श्री विकास खरे, महाप्रबंधक (इंजीनियरिंग), श्री जयप्रकाश सत्यकाम, प्रमुख (मानव संसाधन), संगवारी महिला समिति की वरिष्ठ सदस्याएं, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारीगण, यूनियन व असोशिएसन के सदस्य, सरपंच, मीडिया प्रतिनिधि, अभिभावक तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।विदित हो कि यह अभियान 15 मई 2026 से प्रारंभ हुआ था। इस दौरान बालिकाओं की दिनचर्या योगाभ्यास से शुरू होती थी, जिसके बाद शैक्षणिक सत्र, अंग्रेजी, गणित, कंप्यूटर शिक्षा, संवाद कौशल, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, खेलकूद, संगीत, नृत्य, कला एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाती थीं। बालिकाओं को अनुशासन, समय प्रबंधन, स्वच्छता, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना जैसे जीवनोपयोगी मूल्यों से भी परिचित कराया गया।प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को कक्षा शिक्षण के साथ-साथ अनेक व्यवहारिक गतिविधियों में शामिल किया गया। महिला कार्यकारी अधिकारियों के साथ संवाद सत्र, करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम, प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से मुलाकात तथा विभिन्न विषयों पर विशेष कार्यशालाओं के माध्यम से उन्हें भविष्य के अवसरों की जानकारी दी गई। परियोजना प्रमुख सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बालिकाओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।इस एक माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कई प्रेरणादायी व्यक्तित्वों ने भी बालिकाओं से संवाद किया। जहां आईपीएस श्रीमती अंशिका जैन स्वयं पहुंचकर बालिकाओं को अपने अनुभव साझा करते हुए प्रेरित किया, वहीं भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन एवं अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर बालिकाओं का उत्साहवर्धन किया। इसके अलावा शिक्षाविदों, उद्यमियों, बैंक अधिकारियों, पर्वतारोही निशा यादव, मीडिया क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों तथा अन्य अतिथियों ने भी बालिकाओं को विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी प्रदान की।ज्ञानवर्धन गतिविधियों के अंतर्गत अंतरिक्ष विज्ञान पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बालिकाओं को ग्रहों, उपग्रहों तथा भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (फायर) द्वारा अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आग लगने के कारणों, बचाव के उपायों तथा अग्निशमन उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। इसके अतिरिक्त कठपुतली कला कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता, पोषण, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा गुड टच एवं बैड टच जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल और रोचक तरीके से समझाया गया।बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए चित्रकला, क्ले आर्ट, रचनात्मक गतिविधियां, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यशालाएं, मैजिक शो, खेलकूद प्रतियोगिताएं तथा समूह गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। सफारी पार्क भ्रमण, फिल्म प्रदर्शन एवं टीम बिल्डिंग गतिविधियों ने बालिकाओं को सीखने के साथ-साथ आनंद का अवसर भी प्रदान किया। इन गतिविधियों के माध्यम से उनमें रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, सहयोग की भावना और आत्मविश्वास का विकास हुआ।कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक सप्ताह अभिभावक मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे अभिभावकों को अपनी बेटियों की प्रगति देखने और उनके अनुभव जानने का अवसर मिला। साथ ही बालिकाओं के जन्मदिन भी सभी प्रतिभागियों और अभिभावकों के साथ मनाए गए, जिससे पूरे माह परिसर में एक पारिवारिक वातावरण बना रहा।उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा वर्ष 2018 में प्रारंभ किया गया बालिका सशक्तिकरण अभियान आज देशभर में 13,000 से अधिक बालिकाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। एनटीपीसी सीपत में वर्ष 2019 से संचालित यह पहल शिक्षा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जीवन कौशल के माध्यम से बालिकाओं को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है तथा भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
- 0- रक्तदान दिवस विशेष: महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष काले अब तक 68 बार, वरिष्ठ सभासद अरविंद जोशी कर चुके हैं 180 बार रक्तदान0- दोनों दानदाता रक्तदान अभियान में लगभग प्रतिदिन ही जुटे रहते हैं, साथ ही लोगों को ब्लड डोनेट करने के लिए करते हैं प्रेरितरायपुर। दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान करना जरूरी है। ऑपरेशन की स्थिति में लगभग सभी मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ती है। हमारे खानपान के कारण हमारा ह्यूमोग्लोबिन लेवल 12.5 प्रतिशत से कम हो जाता है। इसलिए हमें ब्लड की जरुरत पड़ती है और ऐसी जरूरतों पर लोग सामाजिक संगठनों और स्वयं सेवकों को फोन कर डोनर पूछते हैं। मैं कहता हूं कि आपके मोबाइल में भी ब्लड डोनर हैं, पहले आप उन्हें फोन लगाएं। नहीं मिलने पर सामाजिक संगठनों की ओर मदद की उम्मीद लगाएं। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और चार दशकों से 68 बार रक्तदान कर चुके अजय मधुकर काले ने विश्व रक्तदान की पूर्व संध्या पर उक्ताशय के विचार व्यक्त किए।काले कहते हैं कि उन्होंने पिछले 41 सालों में 68 मरीजों को रक्तदान कर उनके जीवन की रक्षा में अपना सहयोग दिया। दूसरे रक्त समूह के खून के लिए भी कई बार उस समय तक उच्च स्तरीय प्रयास किया जब तक उक्त मरीजों के लिए समुचित खून की व्यवस्था नहीं हो गई। काले ने कहा कि उन्होंने पहली बार सन् 1985 में रक्तदान किया। उस समय से ही वे समाजसेवा के प्रति समर्पित हो गए थे। मंडल अध्यक्ष काले के मुताबिक तक उन्होंने आज तक कम से कम 300 लोगों को प्रेरित करके रक्तदान के लिए तैयार किया है। हर व्यक्ति के मोबाइल में रक्तदाताओं की सूची होनी चाहिए। ये सूची आपके आप उस समय आसानी से उपलब्ध और सक्रिय रहेगी, जब आप स्वयं भी दूसरों की जान बचाने के लिए स्वस्फूर्त खून देने के लिए आगे आएंगे। रक्तदान के अलावा वे स्वयं देहदान कर चुके हैं और इसके लिए भी वे यथासंभव दानदाताओं को तैयार करते रहते हैं।महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद अरविंद जोशी ने बताया कि उन्होंने अब तक 180 बार रक्तदान किया। पहली बार 1989-90 में किया था। जब वे एक फार्मा कंपनी काम करते थे, उस समय कांच की बोतल में ब्लड कलेक्ट किया जाता था। उस काल से वे रक्तदान कर रहे हैं। फिर प्लास्टिक के बैग का दौर आया। तब लोगों को इसके लिए जागरूक करने एक कैंप चलाया गया। उस कैंप में लोगों को विश्वास दिलाने के लिए पहली बार रक्तदान किया गया। फिर 38 सालों से यह सिलसिला जारी है।बताते चलें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है, लेकिन उसकी उपलब्ध सिर्फ 75 लाख यूनिट है। 25 लाख यूनिट ब्लड की कमी से हर साल हजारों लोग की जान चली जाती है। ब्लड डोनेशन करके न सिर्फ आप दूसरों की जान बचा सकते हैं, बल्कि अपनी सेहत को भी सुधार सकते हैं।
- 0- उत्तर विधानसभा विधायक पुरंदर मिश्रा और महापौर मीनल चौबे ने नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी जोन 4 अध्यक्ष मुरली शर्मा, जल विभाग अध्यक्ष संतोष सीमा साहू रहे अतिथि0- कलेक्टोरेट परिसर में नवीन आकांक्षीय शौचालय 28 लाख 20 हजार रूपये में शीघ्र बनाया जायेगा0- देवी अहिल्या बाई होल्कर मूर्ति स्थल पर शेड निर्माण, यादवपारा भवन के पास पेवर ब्लाक लगाने का कार्य किया जायेगारायपुर. रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पालिक निगम रायपुर के जोन 4 अंतर्गत पण्डित रविशंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 के अंतर्गत वार्ड में 48 लाख 10 हजार रूपये की लागत से नव स्वीकृत विकास कार्यों को वहाँ पहुंचकर रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा और नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने नगर निगम नेता प्रतिपक्ष एवं पण्डित रविशंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 के पार्षद श्री आकाश तिवारी सहित नगर निगम जोन 4 जोन अध्यक्ष श्री मुरली शर्मा, जल कार्य विभाग अध्यक्ष श्री संतोष सीमा साहू और नगर निगम जोन 4 जोन कमिश्नर डॉ दिव्या चंद्रवंशी, कार्यपालन अभियंता श्री शेखर सिंह, सहायक अभियंता श्री दीपक देवांगन सहित वार्ड के रहवासी गणमान्यजनों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं, महिलाओं, नवयुवकों, आमजनों की उपस्थिति में श्रीफल फोड़कर और कुदाल चलाकर भूमिपूजन करते हुए उन्हें कार्यारम्भ करवाकर नागरिकों को अनुपम सौगात दी.रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रायपुर नगर निगम जोन 4 अंतर्गत पण्डित रविशंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 के अंतर्गत कलेक्टोरेट परिसर में 28 लाख 20 हजार रूपये की लागत से नागरिकों को शीघ्र सुविधा देने नवीन आकांक्षीय शौचालय का निर्माण और विकास कार्य करवाया जायेगा.इसी प्रकार वार्ड 34 में राजातालाब क्षेत्र में स्थित देवी अहिल्या बाई होल्कर के मूर्ति स्थल पर 5 लाख रूपये की लागत से शेड निर्माण कार्य शीघ्र करवाया जायेगा.यादवपारा भवन के पास 9 लाख 90 हजार रूपये की स्वीकृत लागत से पेवर ब्लाक लगाने का कार्य करवाया जायेगा. वहीं वार्ड 34 के क्षेत्र में 5 लाख रूपये की स्वीकृत लागत से गाँधी चौक राजातालाब में सार्वजनिक सामुदायिक भवन में अतिरिक्त निर्माण का नया विकास कार्य शीघ्रकरवाया जायेगा.रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा और महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने जोन 4 के सम्बंधित अधिकारियों को तत्काल स्वीकृति अनुसार नये विकास कार्य पण्डित रविशंकर शुक्ल वार्ड में प्रारम्भकरवाने और समयसीमा में सत्तत मॉनिटरिंग करते हुए तय समयसीमा के भीतर उच्च स्तरीय गुणवत्ता सहित पूर्ण करवाने के निर्देश जनहित में दिए हैँ.
- 0- इससे पौधों को स्वतः विकसित होने पर्यावरण हितैषी वातावरण मिलने लगारायपुर. प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर जिला प्रशासन की पर्यावरण हितकारी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन की अभिनव योजना के अंतर्गत रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिह के मार्गनिर्देशन में विगत दिनों हाल ही में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा पर्यावरण संरक्षण कार्य को लेकर व्यक्त की गई गहन चिता के तत्काल पश्चात रायपुर जिला क्षेत्र अतर्गत रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में आयुक्त श्री संबित मिश्रा के मार्गनिर्देशन में सभी 10 जोन कमिश्नर सतत मॉनिटरिंग कर प्रतिदिन नियमित अपने- अपने जोन क्षेत्र के सभी वार्डो में ऐसे सभी पौधों को चिन्हित कर रहे हैं जो चारों ओर से ट्री गार्ड एवं कांक्रीट के घेरों में घिरे हुए होने के कारण प्राकृतिक रूप से विकसित नहीं हो पा रहे हैं ।ऐसे समस्त पौधों को चिन्हित करके प्राकृतिक रूप से स्वतः विकसित होने एवं स्वयं मिट्टी, पानी प्राप्त करने पर्यावरण हितैषी वातावरण देने इन सभी पौधों को चारों ओर से घेरकर लगाये गये ट्री गार्ड और कांक्रीट के घेरों को हटाने का कार्य रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र अंतर्गत सभी 10 जोनों में निरन्तरता के साथ तेज गति से समाजहित में पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से प्रगति पर है। विभिन्न जोनो के क्षेत्रों में भिन्न स्थानों में इन सभी चिन्हित पौधों को समाज हित में पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से चारों ओर घेरा करके लगाए गए ट्री गार्ड और कांकीट के घेरों को समस्त जोन कमिश्नरों ने वहां पहुंचकर हटवाये जाने का कार्य तेजी के साथ प्रारम्भ करवा दिया है एवं पौधो को स्वतः विकसित होने पानी प्राप्त कर सकने आवश्यक पर्यावरण हितेषी वातावरण कायम करवाने कार्य प्राथमिकता के साथ करवा रहे हैं।नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने उक्त कार्य को पहली प्राथमिकता में रखकर करवाने सभी जोन कमिश्नरो समाजहित में पर्यावरण संरक्षण कार्य हेतु स्पष्ट निर्देशित किया है।रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह ने राजधानी रायपुर शहर क्षेत्र के समस्त रहवासी नागरिको से रायपुर जिला प्रशासन की ओर से पुनः एक बार विनम्र अपील की है कि वे ऐसे सभी पौधों को आवश्यक पानी खाद आदि देकर विकसित करने में सहभागी बनकर अपनी सक्रिय सहभागिता को दर्ज करवाने का कष्ट करें। ऐसा करने वाले सभी पर्यावरण प्रेमी नगरवासियों को पर्यावरण मित्र के रूप में रायपुर जिला प्रशासन के तत्त्ववधान में पर्यावरण हितैषी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत समाज में उनके द्वारा पर्यावरण हितकारी योगदान देने हेतु सम्मानित किया जायेगा। सभी 10 जोन कमिश्नरों द्वारा करवाये जा रहे उक्त पर्यावरण हितकारी कार्यों की रायपुर नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा स्वत प्रतिदिन नियमित मॉनिटरिंग और कार्य समीक्षा रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर की जा रही है।
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राजनांदगांव । ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार एवं बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) में ए-हेल्प मॉड्यूल अंतर्गत 15 दिवसीय पशु सखी प्रशिक्षण का मूल्यांकन पश्चात समापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव ने सभी प्रशिक्षणार्थी दीदीयों को पशुपालन का महत्व उनका संरक्षण एवं आजीविका का महत्व बताया और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को श्री रविन्द्र वैष्णव ने भी संबोधित किया।
उल्लेखनीय है कि आरसेटी में ए-हेल्प मॉड्यूल अंतर्गत 15 दिवसीय पशु सखी प्रशिक्षण में शासन द्वारा संचालित पशुपालन की योजनाओं के बारे में बताया गया और प्रशिक्षण के महत्व के संबंध में जानकारी दी गई। प्रशिक्षार्थी पशु सखी दीदीयों को बकरी, गाय, मुर्गी के जीवनकाल व उनकी प्रजनन क्षमता, देखभाल, एआई टेक्निक, चारा प्रबंधन, उनमें होने वाले रोग व उनका रोकथाम, टीकाकरण सहित अन्य विषयों के संबंध में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में पशुपालन की बारीकियां, चारागाह व शाहीवाल नस्ल के गाय को टीकाकरण, एआई टेक्निक की जानकारी प्रायोगिक रूप से दी गई। इसमें होने वाले टैगिंग एवं इनके लाभ के बारे में भी बताया गया। विकासखंड छुरिया के कुमरदा कलस्टर से कुल 30 दीदियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब भविष्य में प्रमाणित पशु सखी के रूप में पशुपालक किसानों के बीच पशुसखी का कार्य करेंगी। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी के साथ व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना तथा उन्हें पशुपालन एवं ग्रामीण आजीविका से संबंधित गतिविधियों के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम में राष्ट्रीय आजीविका मिशन जिला प्रबंधक श्री पिनाकी, निदेशक श्री अमित मिश्रा, मास्टर ट्रेनर पशुपालन विभाग डॉ. अजय शर्मा सहित अधिकारी, कर्मचारी, प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे। -
राजनांदगांव । कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के निर्देशानुसार जिले में अवैध शराब विक्रेताओं के विरूद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जिला स्तरीय उडऩदस्ता राजनांदगांव एवं आबकारी वृत्त चिचोला द्वारा संयुक्त कार्रवाई करते हुए ककोड़ी से बंजारी मार्ग में दो पहिया वाहन हीरो युगा वाहन क्रमांक सीजी 08 एबी 9020 से ग्राम कोलिहा लमटी थाना गेंदाटोला निवासी मुकेश्वर साहू द्वारा 30 नग देशी दारू संत्री नंबर 01 महाराष्ट्र निर्मित कुल 5.400 बल्क लीटर जप्त किया गया। जिसका बाजार मूल्य 40 हजार रूपए है। आबकारी अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपी पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई। कार्रवाई में आबकारी उप निरीक्षक वृत्त चिचोला श्री राजकुमार कुर्रे के साथ जिला स्तरीय उडऩदस्ता राजनांदगांव से आबकारी उप निरीक्षक दिलीप कुमार प्रजापति, आबकारी उप निरीक्षक वृत्त राजनांदगांव (ग्रामीण) तुलेश्वरी देवांगन, प्रशिक्षु आबकारी उप निरीक्षक मिथिलेश कुमारी नेताम, सुश्री रुचि साहू, श्री गोपाल सिंह मरकाम शामिल थे।
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राजनांदगांव । शासकीय पॉलीटेक्निक राजनांदगांव में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश की प्रथम चरण की प्रक्रिया (काउसिंलिंग) 15 जून 2026 तक पूर्ण की जाएगी। प्रवेश के लिए इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक वेबसाईट www.cgdte.admission.nic.in के माध्यम से ऑनलाईन पंजीयन करा सकते है। इस संबंध में अन्य जानकारी मोबाईल नंबर 7898468036, 7204430787, संस्था के कार्यालय एवं वेबसाईट www.gprjn.in से प्राप्त की जा सकती है।
शासकीय पॉलीटेक्निक राजनांदगांव में मार्डन ऑफिस मैनेजमेंट (एमओएम), कस्ट्यूम डिजाइन एण्ड ड्रेस मेकिंग (सीडीडीएम), इलेक्ट्रनिक्स एण्ड टेलीकम्यूनिकेशन (ईटीएण्डटी), कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एण्ड इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी सहित अन्य रोजगारोन्मुखी 2 वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। काउंसलिंग में संस्था एवं पाठ्यक्रम के आबंटन के पश्चात अभ्यर्थी को प्रवेश हेतु संबंधित संस्था में जाकर अपने मूल दस्तावेजों का परीक्षण एवं सत्यापन कराना होगा। -
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार राजस्व एवं खनिज विभाग द्वारा जिले में खनिज का अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में राजस्व विभाग द्वारा डोंगरगढ़ में रेत का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर हाईवा क्रमांक सीजी 08 बीसी 9633 पर कार्रवाई करते हुए जप्त कर थाना डोंगरगढ़ को सुपुर्द किया गया। प्रकरण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण की रोकथाम के लिए लगातार गस्त व निगरानी की जा रही है।
- राजनांदगांव । डोंगरगढ़ को देश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत प्रस्तावित 8 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ फोरलेन मार्ग निर्माण परियोजना की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस परियोजना को वर्ष 2024-25 के प्रथम अनुपूरक बजट में शामिल किया गया था तथा राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा 18 मार्च 2025 को 55 करोड़ 45 लाख 57 हजार रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी।
कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रस्तावित फोरलेन मार्ग की कुल लंबाई 8 किलोमीटर होगी। जिसमें से 4.475 किलोमीटर भाग शासकीय भूमि पर तथा 3.525 किलोमीटर भाग निजी भूमि पर निर्मित किया जाएगा। परियोजना के लिए कुल 6.386 हेक्टेयर (लगभग 15.78 एकड़) निजी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव है।
इस परियोजना से ग्राम गाजमर्रा, राजकट्टा, कुर्रूभाठ एवं छीरपानी के 46 किसान प्रभावित होंगे। प्रभावित किसानों को मुआवजा प्रदान करने के लिए लगभग 6 करोड़ 33 लाख 22 हजार 720 रूपए का अवार्ड प्रस्ताव कलेक्टर राजनांदगांव के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अंतर्गत चारों ग्रामों में सार्वजनिक सूचना जारी की जा चुकी है तथा किसानों की सहमति प्राप्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई प्रचलन में है। परियोजना क्षेत्र में अवैध एवं अनधिकृत भूमि क्रय-विक्रय की संभावनाओं को रोकने तथा मूल भू-स्वामियों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा आवश्यक प्रतिबंधात्मक कदम भी उठाए गए हैं।
यह परिक्रमा पथ डोंगरगढ़ के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को बेहतर संपर्क प्रदान करेगा। मार्ग से प्रज्ञागिरि बौद्ध विहार, मां बम्लेश्वरी मंदिर, जटा शंकर पहाड़ी, चंद्रगिरि जैन मंदिर, प्रतिभा स्थल, सतनाम तीर्थ स्थल तथा खाटूश्याम मंदिर तक पहुंच अधिक सुगम और सुरक्षित होगी।
लोक निर्माण विभाग के अनुसार निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात लगभग 18 माह के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रस्तावित फोरलेन मार्ग की चौड़ाई औसतन 25 मीटर होगी। परियोजना के पूर्ण होने से श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं व्यवस्थित आवागमन की सुविधा मिलेगी, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय व्यापार एवं अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी तथा डोंगरगढ़ क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास को बल मिलेगा।
मुख्य तथ्य एक नजर में -
कुल परियोजना लागत - 55.45 करोड़ रूपए
प्रशासनिक स्वीकृति - 18 मार्च 2025
कुल मार्ग लंबाई - 8.00 किमी
शासकीय भूमि पर मार्ग - 4.475 किमी
निजी भूमि पर मार्ग - 3.525 किमी
अधिग्रहित की जाने वाली निजी भूमि - 6.386 हेक्टेयर (लगभग 15.78 एकड़)
प्रभावित ग्राम - गाजमर्रा, राजकट्टा, कुर्रूभाठ एवं छीरपानी
प्रभावित किसान - 46
प्रस्तावित मुआवजा राशि - 6.33 करोड़ रूपए
मार्ग चौड़ाई - औसतन 25 मीटर
निर्माण पूर्णता लक्ष्य - निविदा प्रक्रिया के बाद लगभग 18 माह - -अबूझमाड़ एफपीओ की बैठक में कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने का निर्णयरायपुर। छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिला नारायणपुर के अंतर्गत ग्राम गुरिया में 'अबूझमाड़ प्रोडक्शन समृद्धि महिला प्रोड्यूसर कंपनी' (एफपीओ) की समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में नारायणपुर की ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए क्षेत्र में कृषि एवं आजीविका गतिविधियों को नए आयाम देने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान/एनआरएलएम), नीति आयोग तथा पीपीआईए फेलो की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। इस दौरान एफपीओ की वर्तमान गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों पर गहन मंथन किया गया। संगठन निदेशक के नेतृत्व में महिलाओं ने कृषि विज्ञान केंद्र नारायणपुर के तकनीकी सहयोग से क्षेत्र में जल्द ही कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र आसानी से किराए पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे खेती की लागत में कमी आएगी। आगामी दिनों में एफपीओ के माध्यम से फसल उत्पादन वृद्धि, वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन और *मिलेट (श्रीअन्न) प्रोसेसिंग जैसे उन्नत कार्यों को भी धरातल पर उतारा जाएगा।* एनआरएलएम (बिहान) की टीम ने महिला एफपीओ को वनोपज एवं कृषि उत्पादों के संग्रहण, विपणन (मार्केटिंग) और नए किसानों को संगठन से जोड़ने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया हैl अधिक से अधिक किसानों की क्षमता विकास के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इससे क्षेत्र के किसानों को न केवल आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें सीधे बाजार से जोड़कर उपज का सही मूल्य भी दिलाया जाएगा।बैठक में जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ के वनमंत्री श्री केदार कश्यप के विशेष प्रयासों से भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), हैदराबाद के सहयोग से इस महिला एफपीओ को हाल ही में ट्रैक्टर, ट्रॉली, कल्टीवेटर और हैरो समेत कई महत्वपूर्ण कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इन आधुनिक संसाधनों के आने से क्षेत्र में सामूहिक व्यावसायिक गतिविधियों, परिवहन व्यवस्था और कृषि कार्यों को एक नई गति मिलेगी, जो सीधे तौर पर महिलाओं की आय में वृद्धि करने और संगठन को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
- -ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और वैज्ञानिक खेती ने बढ़ाई आय-स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहीं ग्रामीण महिलाएंरायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। राज्य शासन की विभिन्न आजीविका उन्मुख पहलों और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रही हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी बलरामपुर जिले के राधाकृष्णनगर की श्रीमती लतिका सिदार की है, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी पहचान एक सफल कृषक और लखपति दीदी के रूप में स्थापित की है।राधाकृष्ण स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद श्रीमती लतिका के जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से उन्हें सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके ज्ञान और कौशल का विस्तार हुआ। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्होंने आधुनिक खेती, उद्यमिता विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।प्रशिक्षण के दौरान श्रीमती लतिका ने ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और बागवानी आधारित खेती की उन्नत विधियों को सीखा और उन्हें अपनी एक एकड़ कृषि भूमि पर लागू किया। स्व-सहायता समूह से प्राप्त ऋण की सहायता से उन्होंने खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम स्थापित किया तथा मल्चिंग तकनीक का उपयोग शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप मिर्च, बरबट्टी सहित अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ा, सिंचाई जल की बचत हुई और खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई।आधुनिक कृषि तकनीकों के सफल उपयोग से श्रीमती लतिका की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पहले की तुलना में उनकी आय दोगुनी हो गई और कृषि तथा अन्य आजीविका गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंच गई। आज वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए भी निवेश कर रही हैं।श्रीमती लतिका का कहना है कि स्व-सहायता समूह ने उन्हें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका सपना अपनी खेती को पूरी तरह जैविक स्वरूप देना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सके। श्रीमती लतिका सिदार की सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं। आज छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन और लघु उद्यमों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। लतिका की यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और सामुदायिक विकास के समन्वय का एक प्रेरक उदाहरण है।
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-80 से अधिक प्रजातियों की पहचान, वैद्यों और छात्रों ने ली भागीदारी
रायपुर ।बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था।कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है। - -नारायणपुर के 39 पहुंचविहीन केंद्रों में 3 महीने का खाद्यान्न एडवांस स्टोर-कलेक्टर का बड़ा फैसला: जिला अधिकारियों को सौंपी मॉनिटरिंग की कमान, दुर्गम गांवों में खुद पहुंच रहे अफसररायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मानसून के दौरान सुदूर और दुर्गम इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट जाता है। भारी बारिश और उफनते नदी-नालों के बीच दूरस्थ ग्रामीणों को राशन की किल्लत न हो, इसके लिए नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और मुस्तैद कदम उठाया है। जिले की सभी 39 पहुंचविहीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों (Ration Shops) में आगामी तीन महीनों जुलाई से सितंबर के लिए राशन का शत-प्रतिशत अग्रिम भंडारण पूरा कर लिया है। इस व्यवस्था से बारिश के दिनों में परिवहन बाधित होने पर भी अंदरूनी और पहुंचविहीन गांवों के हितग्राहियों को एकमुश्त 'बरसाती कोटा' मिल सकेगा।कलेक्टर ने इस पूरी मुहिम को केवल कागजों तक सीमित न रखकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने भंडारित खाद्यान्न के भौतिक सत्यापन और नियमित मॉनिटरिंग के लिए दुकानवार जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। ये अधिकारी खुद घने जंगलों और दुर्गम रास्तों को पार कर इन राशन दुकानों तक पहुंच रहे हैं।इसी कड़ी में एक जमीनी उदाहरण तब देखने को मिला जब उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं ने ओरछा विकासखंड के धुर अंदरूनी और पहुंचविहीन ग्राम झारावाही स्थित राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां तीन महीने के लिए भंडारित किए गए अनाज के बोरों का भौतिक सत्यापन किया और वितरण रजिस्टर व सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।जिला खाद्य अधिकारी ने बताया कि जिले की सभी 39 चिन्हित पहुंचविहीन उचित मूल्य दुकानों में 100 प्रतिशत खाद्यान्न का अग्रिम भंडारण सुरक्षित रूप से कर लिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घोर वर्षाकाल में भी अंतिम छोर पर बैठे हर पात्र हितग्राही को समय पर उसका अधिकार (अनाज) मिले और उन्हें किसी भी प्रकार की मानसिक या शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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रायपुर ।जांजगीर-चांपा जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नवागढ़ में पदस्थ संविदा व्यायाम शिक्षक श्री नलसाय दिवाकर की सेवा समाप्त कर दी गई है। यह कार्रवाई समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया में प्रसारित वायरल ऑडियो से जुड़े प्रकरण की जांच एवं स्पष्टीकरण के उपरांत की गई है।जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वायरल ऑडियो के संबंध में श्री दिवाकर को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर उनका स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया था। मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जांजगीर द्वारा की गई। जांच प्रतिवेदन एवं प्रस्तुत स्पष्टीकरण का परीक्षण करने पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर श्री दिवाकर का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-03 के विपरीत पाया गया। इसके फलस्वरूप छत्तीसगढ़ संविदा नियुक्ति नियम, 2012 के नियम 09(7) के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।जिला शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासकीय सेवकों के लिए निर्धारित आचरण नियमों के उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - -जल संरक्षण से मिली सालभर सिंचाई की सुविधा, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा परिवाररायपुर। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम खपरीडीह की श्रीमती अम्बिका कंवर ने मनरेगा के माध्यम से निर्मित डबरी का उपयोग कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिखी है। जल संरक्षण की इस संरचना ने न केवल उनकी खेती को नई दिशा दी है, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का मजबूत आधार भी तैयार किया है।कुछ वर्ष पहले तक उनका परिवार वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर था। सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण खेती सीमित दायरे में ही सिमट जाती थी और उत्पादन भी अपेक्षित नहीं मिल पाता था। किसानों की ऐसी ही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024-25 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत उनके खेत में लगभग 2.39 लाख रुपये की लागत से डबरी का निर्माण कराया गया।डबरी निर्माण से खेत में वर्षा जल का संचयन संभव हुआ और सिंचाई के लिए नियमित जल उपलब्ध होने लगा। इस कार्य से 836 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिला। जल उपलब्धता बढ़ने के बाद अम्बिका कंवर ने पारंपरिक फसलों के साथ सब्जी उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में वे टमाटर, बैंगन, भिंडी, पत्तागोभी, लौकी, मिर्च, बरबट्टी, करेला और खीरा जैसी विविध सब्जियों की खेती कर रही हैं। विशेष रूप से लौकी और ढोंड़का की फसल से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।श्रीमती अम्बिका कंवर बताती हैं कि डबरी निर्माण उनके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ है। अब वे वर्षभर खेती कर पा रही हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में वे डबरी में मत्स्य पालन शुरू कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की योजना भी बना रही हैं।ग्राम खपरीडीह की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि मनरेगा के तहत निर्मित जल संरक्षण संरचनाएं केवल खेती को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर और आजीविका को भी सशक्त बना रही हैं। अम्बिका कंवर की डबरी आज सतत कृषि, जल संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।
- -एक दिन में निर्मित हुए 2000 जल संरक्षण मॉडल, ग्रामीणों ने श्रमदान से रचा नया उदाहरण-वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और जल सुरक्षा की दिशा में राज्य शासन की अभिनव पहलरायपुर। राज्य शासन द्वारा जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने और आगामी मानसून में अधिकाधिक वर्षा जल संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित “मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखी जा रही है।इसी क्रम में बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई, जहां ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और पंचायत स्तरीय अमले के सामूहिक प्रयास से एक ही दिन में 2000 नग 5 प्रतिशत मॉडल जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया। यह पहल जल संरक्षण के प्रति समाज की बढ़ती जागरूकता और सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।अभियान में ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, आवास मित्र, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान कर सक्रिय भूमिका निभाई। सामूहिक प्रयासों से निर्मित इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव होगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार आने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीणों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा का लाभ मिलेगा।राज्य शासन के मार्गदर्शन में अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों का क्लस्टर बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की सतत समीक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे अभियान के उद्देश्यों की प्रभावी पूर्ति हो सके।“मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सामुदायिक जिम्मेदारी और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम बन रहा है। राज्य शासन और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह अभियान प्रदेश में जल संरक्षण की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आगामी मानसून को देखते हुए प्रदेशभर में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, वर्षा जल संचयन और भूजल संवर्धन संबंधी गतिविधियों को गति दी जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।



























