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- 0- जुलाई को प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक 12 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों का परीक्षण किया जाएगारायपुर.मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार "सभी के लिए बेहतर स्वास्थ्य" अभियान के अंतर्गत रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में 18 जुलाई 2025 को जिला अस्पताल पंडरी में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जिलेवासियों को थैलेसीमिया, इसकी रोकथाम और उपचार के विषय में जानकारी प्रदान करना है। शिविर में नि:शुल्क एच.एल.ए परीक्षण, विशेष चिकित्सा परामर्श एवं उपचार की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। रोगियों एवं उनके परिवारजनों को देखभाल व उपचार से संबंधित मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।इस शिविर में जिला अस्पताल पंडरी के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ-साथ फोर्टिस मेमोरियल इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम के विशेषज्ञ डॉ. विकास दुआ (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ) और डॉ. परमिंदरपाल सिंह (रक्त विकार विशेषज्ञ एवं ऑन्कोलॉजिस्ट) तथा कॉस फाउंडेशन रायपुर की टीम भी उपस्थित रहेगी। जिले में थैलेसीमिया के लक्षणों वाले सभी मरीज इस नि:शुल्क शिविर का लाभ उठा सकते हैं। पंजीयन हेतु टोल-फ्री नंबर 0771-3519250 पर संपर्क किया जा सकता है।--
- रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सोमवार को रेडक्रॉस सभाकक्ष में ई-ऑफिस प्रणाली का विधिवत शुभारंभ किया। डॉ. सिंह ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप ज़िले के सभी शासकीय कार्यालयों एवं विभागों की कार्यप्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस एक अहम कदम है।उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली से न केवल दस्तावेजों की डिजिटल ट्रैकिंग और प्रसंस्करण आसान होगा, साथ ही इस पहल से शासकीय कार्यों में पारदर्शिता के साथ-साथ समयबद्धता और दक्षता सुनिश्चित होगी, कार्य प्रक्रिया में तेजी आएगी और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।ई-ऑफिस प्रणाली के सुचारू संचालन हेतु जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है, ताकि इस प्रणाली का गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। शासकीय कर्मचारी अपनी एनआईसी लॉगिन आईडी के माध्यम से वेबसाइट्स http:/eoffice-district.gov.in तथा https://access.nic.in के जरिए ई-ऑफिस प्रणाली में कार्य करेंगे।
- रायपुर. कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के पुनः उन्मुखीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में लागू स्नातक पाठ्यक्रमों में नई शिक्षा नीति की एक वर्ष की सफलता और आवश्यक सुधारों पर विचार-विमर्श करना था। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति न केवल नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि युवाओं को उनकी स्थानीय ज्ञान एवं परंपरा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर देगी, जिससे वे भविष्य में देश के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें। उन्होंने कार्यशाला की पूर्ण सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं भी व्यक्त की।प्रथम तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं और बारीकियों को बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति विभिन्न विषयों को एकीकृत कर एक विशाल ज्ञान पूल बनाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। एनईपी 2020 का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम को बदलना नहीं है, बल्कि छात्रों को बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करना है ताकि वे विभिन्न क्षेत्रों के ज्ञान को आपस में जोड़ सकें। जिसमें छात्रों को अपनी रुचि और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विषयों का चयन करने की स्वतंत्रता मिलती है।द्वितीय तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा के संयुक्त संचालक डॉ. जी.ए. घनश्याम ने भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ भारत दर्शन पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 केवल आधुनिक शिक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान को भी छात्रों तक पहुंचाने का एक माध्यम है। डॉ. घनश्याम ने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को भारत के ज्ञान से अवगत कराने वाली है, जिससे वे अपनी जड़ों से जुड़ सकें और देश के गौरवशाली इतिहास तथा चिंतन परंपरा को समझ सकें। भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश छात्रों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करेगा, जिससे वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें।विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सीधे तौर पर बाजार की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। एनईपी का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं है, बल्कि छात्रों को ऐसे व्यावहारिक कौशल और ज्ञान से लैस करना है जो उन्हें स्नातक होते ही रोजगार के योग्य बना सके। श्री शर्मा ने कहा कि यह नीति छात्रों को विभिन्न उद्योगों में आवश्यक क्षमताओं को विकसित करने में मदद करेगी, जिससे वे बदलते बाजार में आसानी से समायोजित हो पाएंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी सक्षम होंगे।विश्वविद्यालय के एनईपी 2020 के संयोजक श्री पंकज नयन पाण्डेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले एक वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एनईपी 2020 के तहत शुरू की गई पाठ्यक्रम संरचना और वैकल्पिक विषयों के चुनाव से छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार अध्ययन करने का अवसर मिला है।कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति संयोजक श्री पंकज नयन पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष श्री शैलेन्द्र खंडेलवाल, डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. आशुतोष मांडवी, डॉ. राजेंद्र मोहंती, उप कुलसचिव श्री सौरभ शर्मा के साथ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, प्राध्यापकगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।विश्वविद्यालय परिसर में बिहान केन्टीन का शुभारंभविश्वविद्यालय परिसर में आज बिहान कैंटीन का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति एवं संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ने किया। कैंटीन का संचालन जिला पंचायत, रायपुर के माध्यम से बिहान स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ.देव सिंह पाटिल एवं कर्मचारी उपस्थित थे.
- रायपुर, प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में खरीफ 2025 के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कृषि में निवेश बढ़ाने और किसानों की लागत में राहत देने के उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की गई है। राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों के क्षेत्र विस्तार तथा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ चिन्हित फसलों पर आदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया है। योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया हो। विगत खरीफ मौसम में पोर्टल में पंजीकृत ऐसे किसान, जिन्होंने धान की खेती कर सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया है, वे इस योजना के पात्र होंगे।यदि वे इस बार धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें (जैसे—दलहन, तिलहन आदि) लेते हैं, और पोर्टल पर पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि हो जाती है, तो उन्हें ₹11,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता दी जाएगी। वहीं, यदि किसान दलहन, तिलहन, कोदो, कुटकी, रागी अथवा कपास जैसी फसलें लेते हैं, तो ₹10,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि मिलेगी—पंजीयन और गिरदावरी की पुष्टि के आधार पर।उप संचालक कृषि श्री सतीश अवस्थी ने बताया कि जिले में धान के अतिरिक्त वैकल्पिक फसलों जैसे अरहर, उड़द, कोदो आदि के बीजों का भंडारण जिले के सभी विकासखंड स्तरीय कृषि कार्यालयों में कर लिया गया है।योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या विकासखंड स्तरीय कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
- -डीएपी की कमी को पूरा करने एनपीके, एसएसपी और नैनो डीएपी का भरपूर स्टॉक-राज्य में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारीरायपुर / राज्य में रासायनिक उर्वरको कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं नीजि विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 179000 बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है।चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है।कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमशः 25,266 मेट्रिक टन एवं 71,363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी।यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी।कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोमवार को नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर गुलमोहर का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री श्री साय 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' वृक्षारोपण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप सहित मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्य एवं विधानसभा के सभी सदस्यों ने भी गुलमोहर का पौधारोपण किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, विधानसभा सचिव श्री दिनेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोंपज संघ श्री अनिल साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय,मुख्य वन संरक्षक श्री राजू अगासमणि भी उपस्थित थे।
- -नवा रायपुर में वेटलैण्ड एवं जैव विविधता संरक्षण पर उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजनरायपुर, / जैव विविधता एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैण्ड्स) के संरक्षण के उद्देश्य से आज नवा रायपुर स्थित दण्डकारण्य अरण्य भवन में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्री एवं विधायकगण उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना केवल आधारभूत ढांचे के विकास से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैविक विविधता की रक्षा से ही पूर्ण होती है। उन्होंने आह्वान किया कि हर जनप्रतिनिधि व नागरिक जैव विविधता एवं वेटलैण्ड संरक्षण के लिए व्यक्तिगत दायित्व समझें और 'वेटलैण्ड मित्र' बनकर इस अभियान को जनांदोलन में परिवर्तित करें।कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि जैव विविधता और वेटलैण्ड्स का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से जैव विविधता के संरक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करने और “वेटलैण्ड मित्र” बनकर जनजागरण फैलाने का आग्रह किया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी ने व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1992 के अर्थ सम्मिट, जैव विविधता अधिनियम 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता बोर्ड की भूमिका और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की संरचना एवं कार्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है, जहां जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं।आर्द्रभूमि संरक्षण के संदर्भ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वेटलैण्ड्स पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और जिला स्तरीय आर्द्रभूमि संरक्षण समितियों के गठन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर वेटलैण्ड्स की निगरानी एवं संरक्षण को मजबूती मिल रही है।कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि राज्य का गिधवा-परसदा पक्षी अभ्यारण्य अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित रामसर साइट बनने की पात्रता रखता है। इसके अतिरिक्त, बलौदाबाजार जिले के खोखरा ग्राम को छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रगति पर है।कार्यशाला के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से “वेटलैण्ड मित्र” के रूप में जुड़कर जैव विविधता और आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। यह भागीदारी राज्य में पर्यावरणीय चेतना को जनआंदोलन का रूप देने में सहायक होगी।इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ़ वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव श्री राजेश कुमार चंदेले सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।
- -विधानसभा भ्रमण पर आए प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव, मानव सेवा के कार्यों में समाज की भूमिका की दी जानकारीरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक श्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
- -मिशन मोड में सरकार का अभियान, ‘शून्य मलेरिया’ की ओर बढ़ते निर्णायक कदम-मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई है – स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवालरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनस्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ ने मलेरिया के स्थायी उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक अभियान फिर से प्रारंभ किया है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में, विभाग ने मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ एक अनुकरणीय रणनीतिक पहल करते हुए जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 12वें चरण ने न केवल अपने दायरे का विस्तार किया है, बल्कि अपने प्रभाव से यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकार दृढ़ संकल्प और नीति आधारित कार्रवाई के साथ काम करती है, तो नतीजे ज़मीन पर दिखते हैं।25 जून से जारी इस चरण के अंतर्गत राज्य के 10 जिलों में गहन जांच, उपचार और जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अब तक 19,402 घरों का दौरा किया गया है और 98,594 लोगों की रक्त जांच की गई है। इनमें से 1,265 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सबसे अहम बात यह रही कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को मौके पर ही दवा की पहली खुराक उपलब्ध कराई गई, वह भी पूरी सावधानी के साथ—पहले मरीजों को स्थानीय खाद्य पदार्थ खिलाया गया, ताकि दवा का प्रभाव सुरक्षित और प्रभावशाली रहे। प्रत्येक मरीज को उपचार कार्ड दिया गया है, ताकि फॉलोअप के जरिए पूरी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।इस अभियान का सकारात्मक असर सबसे अधिक बस्तर संभाग में देखा जा रहा है। 2015 की तुलना में यहां मलेरिया मामलों में 71 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, सतत और वैज्ञानिक रणनीति का परिणाम है। राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 27.40 से घटकर 7.11 तक आ गया है, जो दर्शाता है कि मलेरिया पर राज्य ने प्रभावी नियंत्रण पाया है।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई बन गई है। उनका मानना है कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है—2027 तक ‘शून्य मलेरिया’ और 2030 तक ‘पूर्ण मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’—उसे केवल दस्तावेज़ी नहीं, बल्कि यथार्थ के रूप में साकार किया जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभाव से बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में गिरावट आयी है। “हर संक्रमित व्यक्ति तक पहुंचना, उसका समय पर इलाज करना और भविष्य में संक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे — यही हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि हमारा फोकस लक्षणरहित मलेरिया मामलों पर है, ताकि बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।इस अभियान की सफलता में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि अब एक जनआंदोलन बन चुका है। जांच और इलाज के साथ-साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव की रोकथाम और साफ-सफाई जैसे व्यवहारिक उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह ठोस और संवेदनशील प्रयास, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है, जो न केवल राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत और टिकाऊ कदम है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक प्रेरक मॉडल भी बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह रणनीति अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में स्थापित होगी।
- -विशेष ट्रेन 15 जुलाई को रायपुर से होगी रवाना — मुख्यमंत्री श्री साय हरी झंडी दिखाकर करेंगे शुभारंभरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रदेशवासियों को श्रीराम लला के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ जन जन के जीवन से जुड़ रही है।इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन दिनांक 15 जुलाई 2025 को रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं इस विशेष दर्शन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करेंगे। रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं को लेकर रवाना होने वाली इस ट्रेन के प्रस्थान अवसर पर मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं दक्षिण पूर्व-मध्य रेलवे रायपुर मंडल के डीआरएम श्री दयानंद, सीनियर डीसीएम श्री अवधेश त्रिवेदी तथा आईआरसीटीसी – साउथ सेंट्रल ज़ोन के ग्रुप महाप्रबंधक श्री पी. राजकुमार भी उपस्थित रहेंगे।उल्लेखनीय है कि प्रदेशवासियों को उनके जीवनकाल में एक बार प्रभु श्रीराम लला के अयोध्या धाम दर्शन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपादित किया गया था।उक्त एमओयू के क्रियान्वयन की श्रृंखला में योजना की विधिवत शुरुआत रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं के साथ 5 मार्च 2024 को हुई थी, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ मंत्रीगणों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में रायपुर रेलवे स्टेशन से पहली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।इसके पश्चात् 11 मार्च को बिलासपुर संभाग के श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन को उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसी क्रम में 19 जून को सरगुजा संभाग की विशेष ट्रेन को सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने विधायकगण एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। 26 जून को दुर्ग एवं बस्तर (संयुक्त) संभाग की पहली विशेष ट्रेन, जिसमें 850 श्रद्धालु शामिल थे, दुर्ग रेलवे स्टेशन से अयोध्या के लिए रवाना हुई। इन सभी अवसरों पर श्रद्धालुओं में अत्यंत उत्साह और आस्था का भाव देखने को मिला। साथ ही मीडिया प्रतिनिधिगण, आम नागरिक, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं आईआरसीटीसी के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि विगत वित्तीय वर्ष में ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत लगभग 22,100 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। योजना के तहत विशेष साप्ताहिक ट्रेनें आगे भी रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों के श्रद्धालुओं को श्रीराम लला के दर्शन हेतु नियमित रूप से अयोध्या धाम ले जाती रहेंगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को भी गौरवपूर्ण स्थान दिला रही है।
- -’लैम्पस समितियों से जारी है खाद-बीज का वितरण’रायपुर। बस्तर संभाग में खरीफ सीजन- 2025 के तहत अब तक एक लाख 14 हजार 929 किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 600 करोड़ 74 लाख रुपए का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित किया जा चुका है। यह ऋण जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, जगदलपुर द्वारा “सहकार से समृद्धि” योजना के अंतर्गत वितरित किया गया है। बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि बस्तर संभाग के किसानों को खरीफ के लिए 950 करोड़ का ऋण वितरित किए जाने का लक्ष्य है।बस्तर संभाग में आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से कृषकों को 58 हजार 159 मैट्रिक टन उर्वरक एवं 33 हजार 62 क्विंटल बीज का वितरण किया गया है। बस्तर जिले में 13,963 मैट्रिक टन, कोंडागांव में 14,679, नारायणपुर में 2,105, कांकेर में 23,884, सुकमा में 1,615 और बीजापुर जिले में 1,913 मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है। जैविक खेती जिला होने के कारण दंतेवाड़ा में उर्वरक प्रदाय नहीं किया गया। इसी प्रकार बीज वितरण के तहत बस्तर जिले में 7,645 क्विंटल, कोंडागांव में 3,674, नारायणपुर में 1,337, कांकेर में 8,397, दंतेवाड़ा में 2,184, सुकमा में 2,372 और बीजापुर जिले में 7,453 क्विंटल बीज कृषकों को उपलब्ध कराए गए हैं।अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण कार्यक्रम के तहत बस्तर जिले के 24,256 किसानों को 162.53 करोड़, कोंडागांव के 23,301 को 122.63 करोड़, नारायणपुर के 4,351 को 25.66 करोड़, कांकेर के 45,921 को 186.93 करोड़, दंतेवाड़ा के 1,943 को 12.79 करोड़, सुकमा के 7,359 को 41.04 करोड़ तथा बीजापुर जिले के 7,798 किसानों को 49.16 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है।डीएपी खाद की कमी को देखते हुए नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण भी किया गया है। सुगंधित धान, कोदो-कुटकी, रागी, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर, मूंगफली, तिल व उद्यानिकी फसलों के लिए अब तक 30 करोड़ 74 लाख रुपए ऋण दिया गया है। ऋण और आदान सामग्री के वितरण की यह प्रक्रिया लगातार जारी है।
- धान उठाव में तेजी लाने के दिए निर्देश, सड़क मरम्मत के भी निर्देशमहासमुंद। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने आज पिथौरा स्थित धान संग्रहण केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने धान के भंडारण, सुरक्षा, परिवहन और उठाव की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए धान का शीघ्रता से उठाव सुनिश्चित किया जाए, जिससे धान की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण रखरखाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि धान भीगने या खराब होने की स्थिति में संभावित नुकसान को रोकना सुनिश्चित करें।मौके पर डीएमओ श्री राठौर ने बताया कि यहां कुल 2 लाख 53 हजार क्विंटल धान का भंडारण किया गया है। जिसमें 50 हजार क्विंटल धान का डी.ओ. (डिलिवरी ऑर्डर) पहले ही कट चुका है, इस पर कलेक्टर ने संबंधित परिवहन एजेंसी और फूड विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस धान का तत्काल उठाव प्रारंभ किया जाए और परिवहन में किसी भी प्रकार की देरी न हो।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संग्रहण केंद्र तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति देखते हुए कहा कि बरसात में कीचड़ और जलभराव से उठाव कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए सड़क की मरम्मत मुरूम या गिट्टी से शीघ्र की जाए। कलेक्टर ने गोदामों की साफ-सफाई, तिरपाल व्यवस्था, नमी नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधों का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केंद्र में कार्यरत सभी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाया जाए और उठाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक दिवस उठाव की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और कार्य में लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पिथौरा श्री ओंकारेश्वर सिंह, खाद्य अधिकारी श्री अजय यादव, डीएमओ श्री राठौर एवं नान के अधिकारी उपस्थित रहे।
- महासमुंद। संचालक पेंशन एवं भविष्य निधि रायपुर द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से अवगत कराया गया कि छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग द्वारा लंबित पेंशन प्रकरणों एवं आपत्तियां वाले पेंशन प्रकरणों की निरंतर समीक्षा की जा रही है।बैठक में निर्णय लिया गया कि कार्यालय से संबंधित पेंशन प्रकरण जिसमे संभागीय संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन रायपुर द्वारा दस्तावेजों की कमियों के कारण (रेगुलर केस/रिवाइज्ड केस) आपत्ति लगाए गए है। उन प्रकरणों में नियमानुसार आपत्ति, दस्तावेजों की कमियों को पूर्ति कर प्रकरण पुनः प्रेषित करें। संभागीय संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन रायपुर द्वारा पेंशन भुगतान आदेश जारी किये जा चुके है किन्तु विभागीय जानकारी के अभाव में पेंशन प्रकरण कोषालय स्तर पर लंबित है उक्त प्रकरणों में जानकारी पूर्ण कर पेंशन प्रकरणों का निराकरण कराने के निर्देश दिए हैं। आगामी दो माहों में सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों के पेंशन प्रकरण यथाशीघ्र तैयार कर शासन के मंशानुरूप संभागीय संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन रायपुर को प्रेषित किए जाने कहा गया है।समय सीमा बैठक में उक्त पेशन प्रकरणां की समीक्षा की जाएगी। इस हेतु समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारी वस्तु स्थिति की जानकारी मंगलवार 15 जुलाई तक जिला कोषालय अधिकारी महासमुंद के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे। विभाग से संबंधित पेंशन प्रकरण / आपत्तिकृत पेंशन प्रकरण आभार पोर्टल पर प्रदर्शित है। आभार पोर्टल का अवलोकन कर नियमानुसार निराकरण की कार्यवाही करेंगें। निराकरण में किसी भी प्रकार की समस्या एवं दिक्कत होने की स्थिति में जिला कोषालय अधिकारी महासमुंद से सम्पर्क कर कर सकते है।
- 5 ग्राम पंचायतों में चयनित तालाबों में होगा झींगा पालन,ग्रामीणों को मिलेगा आजीविका का नया स्रोतरायपुर/ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता से समृद्ध छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर अग्रसर है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए सुकमा के किसान अब मछली पालन के साथ-साथ झींगा पालन को भी अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा के सहयोग से जिले के किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक और लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।कलेक्टर के मार्गदर्शन में समन्वित कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मछली पालन विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह राठौर एवं मत्स्य विभाग के अधिकारी श्री डी.एल. कश्यप के नेतृत्व में सुकमा विकासखंड की पांच ग्राम पंचायतों कृ भेलवापाल, झापरा, गोंगला, मूर्तोंडा एवं गादीरास कृ के तहत आने वाले 40 तालाबों का गहन निरीक्षण किया गया। इन तालाबों को झींगा पालन के लिए उपयुक्त पाया गया है। निकट भविष्य में कृषि विज्ञान केंद्र की मत्स्य इकाई, विशेषज्ञों की निगरानी और जिला मत्स्य विभाग के समन्वय से इन तालाबों में झींगा पालन की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। यह पहल न केवल जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी।झींगा: पोषण और आमदनी का समृद्ध स्रोतझींगा एक सर्वाहारी मीठे जल का जलीय जीव है, जो ब्रीडिंग के समय थोड़े खारे पानी की ओर प्रवास करता है। यह प्राकृतिक रूप से जल में मौजूद सूक्ष्म जीवों, कीटों और जैविक अवशेषों का सेवन करता है। झींगा प्रोटीन और आवश्यक वसा का उत्तम स्रोत है। इसके नियमित सेवन से न केवल मस्तिष्क का तीव्र विकास होता है, बल्कि यह हृदय स्वास्थ्य और कुपोषण निवारण में भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।किसानों को होगा व्यापक लाभझींगा पालन से किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में तीव्र और अधिक आमदनी होने की संभावना है। इसके साथ ही यह स्व रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा, जिससे युवा वर्ग भी खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित होगा। उल्लेखनीय है कि यह योजना सुकमा जिले में ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। जिला प्रशासन, कृषि विज्ञान केंद्र और मत्स्य विभाग के संयुक्त प्रयास से सुकमा अब झींगा पालन के क्षेत्र में राज्य का अग्रणी जिला बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- वार्ड 70 पार्षद कार्यालय के सामने सामुदायिक भवन में ठेका सफाई कामगारों की गिनती करवाई, कम संख्या में उपस्थिति मिलने पर सम्बंधित ठेकेदार को नोटिस देकर जुर्माना करने दिए निर्देशरायपुर / नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देश पर अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय ने नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्री राजेश्वरी पटेल, कार्यपालन अभियंता स्वच्छ भारत मिशन श्री रघुमणि प्रधान, नगर पालिक निगम भिलाई के उप अभियंता श्री भूपेन्द् कुमार दिली, जोन 8 जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री गोपीचंद देवांगन, स्वच्छता निरीक्षक रितेश झा की उपस्थिति में जोन 8 क्षेत्र अंतर्गत माधव राव सप्रे वार्ड अंतर्गत तृतीय लिंग समुदाय हेतुगरिमा गृह, वार्ड 69 अंतर्गत भईया तालाब, यादवपारा, अग्रोहा सोसायटी मुक्कड़ सहित नगर निगम जोन 8 अंतर्गत वार्ड 69 और 70 क्षेत्र के अंतर्गत तालाब, उद्यान, नालियों, मुक्कड़ों की सफाई व्यवस्था का विभिन्न स्थानों पर प्रत्यक्ष निरीक्षण कर स्थल समीक्षा कर जोन के सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए.अपर आयुक्त ने जोन 8 जोन कमिश्नर को निर्देशित किया है कि कार्य में लापरवाही किये जाने पर सम्बंधितों को नोटिस दी जाये और व्यवस्था सुधारने आवश्यक कार्यवाही की जाये.अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय ने जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल, कार्यपालन अभियंता स्वच्छ भारत मिशन श्री रघुमणि प्रधान, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री गोपीचंद देवांगन की उपस्थिति में वार्ड 70 के वार्ड पार्षद कार्यालय के सामने सामुदायिक भवन में ठेका सफाई कामगारों की गिनती करवाई. निर्धारित से कम संख्या में उपस्थिति मिलने पर सम्बंधित सफाई ठेकेदार को नोटिस देकर जुर्माना करने की कार्यवाही करने के निर्देश अपर आयुक्त और जोन 8 जोन कमिश्नर द्वारा दिए गए.
- रायपुर/ छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 373.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 567.4 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 181.7 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार सरगुजा में 280.5 मि.मी., सूरजपुर में 463.4 मि.मी., जशपुर में 486.6 मि.मी., कोरिया में 402.8 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 369.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर जिले में 351.9 मि.मी., बलौदाबाजार में 353.1 मि.मी., गरियाबंद में 321.2 मि.मी., महासमुंद में 335.2 मि.मी. और धमतरी में 323.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर में 387.3 मि.मी., मुंगेली में 388.0 मि.मी., रायगढ़ मंे 520.6 सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 365.0 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 491.4 मि.मी., सक्ती में 430.6 मि.मी., कोरबा में 469.9 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 385.1 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। दुर्ग जिले में 306.2 मि.मी., कबीरधाम में 265.4 मि.मी., राजनांदगांव में 300.0 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 484.9 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 247.0 मि.मी., बालोद में 380.4 मि.मी. और बस्तर जिले में 442.3 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। कोंडागांव में 263.3 मि.मी., कांकेर में 366.9 मि.मी., नारायणपुर में 315.7 मि.मी., दंतेवाड़ा में 400.1 मि.मी., सुकमा में 232.0 मि.मी. और बीजापुर में 451.1 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।
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केन्द्रीय मंत्री ने जनजातीय संग्रहालय का किया अवलोकन
रायपुर/ छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली पर आधारित जनजातीय संग्रहालय का केन्द्रीय जनजातीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने अवलोकन किया और नवा रायपुर में बनाए गए इस संग्रहालय में आदिवासी जीवन शैली के प्रस्तुतीकरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृति विरासत विश्व पटल पर स्थापित होगी। इससे जनजातीय युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति आत्मगौरव का भाव जगेगा। इस अवसर पर आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग मंत्री श्री राम विचार नेताम भी उपस्थित थे।
केन्द्रीय जनजातीय राज्यमंत्री श्री दुर्गादास ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के हित में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पीएम जनमन एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातियों के संर्वागीण विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्री मोदी के 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना में यह प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने संग्रहालय के निकट ही बनाए जा रहे शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय के निर्माण की समीक्षा की। इस संग्रहालय के लिए केन्द्र सरकार ने 45 करोड़ रूपए की राशि मंजूर की है। इस संग्रहालय को आगामी 30 सितम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रमुख सचिव श्री बोरा ने इस दौरान संग्रहालय में प्रयुक्त डिजीटल एवं एआई तकनीक के संबंध में जानकारी दी। बैठक में टीआरटीआई के संचालक श्री जगदीश कुमार सोनकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
संग्रहालय में 14 गैलरियों में जनजातीय जीवनशैली के विभिन्न अवसरों का है झलकियां
जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय संस्कृति, जीवनशैली और परंपरा को प्रदर्शित करने के लिए 14 गैलरियों का निर्माण किया गया है। संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में जनजातीयों के परंपरागत वाद्ययंत्रों, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, उनमें कृषि की परंपरागत तकनीकें एवं उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन किया गया है। इसी प्रकार लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई, कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणांे व परंपरागत तकनीकों को दर्शाया गया है। संग्रहालय में सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में गोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला, जनजातियों में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि प्रदर्शित किए गए हैं। -
सूचना आयोग के नोटिस का जवाब जनसूचना 30 दिवस के भीतर प्रेषित करें
रायपुर/ सूचना आयोग के आयुक्त ने कहा कि आयोग की सुनवाई में तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारी के द्वारा प्रतिनिधि के रूप में प्राधिकार पत्र मान्य किया जाएगा और उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब को तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारी का जवाब माना जाएगा। प्राधिकार पत्र के अभाव में प्रतिनिधि की उपस्थिति मान्य नहीं की जाएगी। राज्य सूचना आयोग ने सभी तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आयोग से पत्राचार करते समय प्रकरण क्रमांक, वर्ष और सुनवाई की तिथि के साथ-साथ अपना नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल का स्पष्ट उल्लेख करना सुनिश्चित करें।
छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग ने सभी लोकप्राधिकारियों (कार्यालय प्रमुखों) को निर्देशित किया है कि अपने अधीनस्थ तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों को निर्देशित करें कि राज्य सूचना आयोग के द्वारा द्वितीय अपील की सुनवाई के लिए प्रेषित नोटिस का जवाब प्रथम सूचना पत्र प्राप्ति के पश्चात 30 दिवस के भीतर कंडिकावार मय दस्तावेज के साथ जवाब प्रस्तुत कर पंजीकृत डाक से प्रेषित करना सुनिश्चित करें। जवाब प्रस्तुत करते समय तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारी का नाम पदनाम का स्पष्ट उल्लेख करें। उन्होंने यह भी कहा है कि तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों का नाम पदनाम, कार्यावधि तथा वर्तमान पदस्थापना स्थल की जानकारी आयोग को देना सुनिश्चित करें।
छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग ने निर्देशित किया है कि तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों सुनवाई में प्रकरण से संबंधित समस्त अभिलेख एवं नस्ती के साथ उपस्थित रहें, यदि अपरिहार्य कारण से तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारी आयोग के द्वितीय अपील की नियत तिथि को सुनवाई में उपस्थित में असमर्थ होने की स्थिति में अपने ऐसे प्रतिनिधि को सुनवाई के लिए भेजा जाए, जिनको प्रकरण के संबंध में संपूर्ण जानकारी हो एवं संपूर्ण दस्तावेज और जानकारी के साथ आयोग के समक्ष सुनवाई के अवसर पर आयोग को जवाब प्रस्तुत कर सके। राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों के द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत द्वितीय अपील की सुनवाई के लिए प्रेषित नोटिस का जवाब तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों से प्राप्त नहीं होने के कारण प्रकरण की सुनवाई में अनावश्यक विलंब होता है। आयोग के समक्ष सुनवाई के पूर्व तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/वर्तमान जनसूचना अधिकारियों से पंजीकृत डाक से नियमानुसार प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं होने पर एवं उक्त निर्देश का पालन नहीं होने की स्थिति में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) एवं धारा 20 (2) के तहत और शासन के द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार अर्थदण्ड एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है। -
पुनः बहाल हुई विद्युत आपूर्ति, ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री के प्रति आभार
रायपुर/ मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल पर ग्राम केनाडांड़ में विद्युत आपूर्ति पुनः प्रारंभ हो गई है। ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण बिजली संकट से जूझ रहे ग्रामीणों को इससे बड़ी राहत मिली है। विद्युत आपूर्ति पुनः बहाल होने पर ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
उल्लेखनीय है कि विकासखंड कांसाबेल के ग्राम केनाडांड़ के ग्रामीणों ने कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि ट्रांसफार्मर खराब होने की वजह से बिजली की आपूर्ति बाधित है। उनका गांव हाथी विचरण क्षेत्र में भी आता है। इस वजह से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कैंप कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की, जिसके तहत विद्युत विभाग द्वारा ग्राम केनाडांड़ में ट्रांसफार्मर बदल दिया गया। इससे बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से बहाल हो गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा बगिया में स्थापित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में जनसमस्याओं का तत्परता के साथ समाधान किया जाता है। विशेषकर बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं से संबंधित समस्याओं पर प्राथमिकता से कार्रवाई की जा रही है। -
आदिम जाति विकास मंत्री ने साकरा में पीएम जनमन के तहत बने आवासों का किया निरीक्षण
कमार जनजाति के बीच पहुंचकर मुलभूत जरूरतों की ली जानकारी
रायपुर/ आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति मंत्री श्री रामविचार नेताम आज जिला धमतरी, विकासखंड सिहावा के ग्राम साकरा पहुंचे। ग्रामीणों ने इस मौके पर मंत्री श्री नेताम का पारंपरिक एवं आत्मीय स्वागत किया। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ‘मोदी की गारंटी’ के अंतर्गत संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार की ये योजनाएं धरातल पर उतरकर प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुँचे और उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो यह हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
मंत्री श्री नेताम ने इस दौरान प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत कमार जनजाति समुदाय के लिए बनाए जा रहे आवासों का निरीक्षण किया। मंत्री श्री नेताम ने कमार जनजाति के बीच पहुंचकर राशन, बिजली, पानी सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर चर्चा की।
इस मौके पर धमतरी जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री अरुण सार्वा एवं सिहावा क्षेत्र की पूर्व विधायक श्रीमती पिंकी ध्रुव उपस्थित थी। -
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर में शुरू हुआ प्रोजेक्ट 'छाँव', शासकीय परिवारों के समग्र कल्याण की दिशा में प्रशासन की नई पहल
कलेक्टर डॉक्टर गौरव सिंह एवं उनके परिजनों ने भी स्वयं स्वास्थ्य परीक्षण करवाया
कोटवार बिरबल सिंह धीवर ने प्रोजेक्ट "छाँव" के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभार
एक हजार से अधिक अधिकारी एवं उनके परिवार ने कराया जांच
रायपुर/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रोजेक्ट "छाँव" की शुरुआत सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में की गई। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रायपुर संभागायुक्त श्री महादेव कावरे थे, कार्यक्रम की अध्यक्षता कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके पश्चात मुख्य अतिथि श्री कावरे ने सभी डॉक्टरों को पुष्प भेंट कर उनका स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के मार्गदर्शन में लगातार स्वास्थ्य के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। साथ ही शासकीय अधिकारी कर्मचारियों सहित आम जन के कल्याण के लिए कार्य किया जा रहा है | प्रोजेक्ट "छाँव" जिला प्रशासन की एक सराहनीय पहल है, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रोजेक्ट "छाँव" शासकीय कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रारंभ किया गया है। विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सदैव जनसेवा में व्यस्त रहते हैं, इसलिए वे स्वयं और अपने परिवार के स्वास्थ्य की जाँच नहीं करवा पाते। मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार सभी का स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी कड़ी में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत आज राजस्व विभाग से की गई।
इस स्वास्थ्य शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, श्रम कार्ड जैसी आवश्यक सेवाएँ भी उपलब्ध कराई गईं। कलेक्टर डॉ सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हम एक स्वस्थ और सशक्त समुदाय का निर्माण करना चाहते हैं। प्रोजेक्ट छांव में कलेक्टर से लेकर कोटवार तक सभी अपने परिवारजन सहित शामिल हुए | इस दौरान कलेक्टर डॉ गौरव सिंह की धर्मपत्नी एवं माताजी ने मैमोग्राफी सहित अन्य स्वास्थ्य जांच करवाई |
इस अवसर पर डॉ. गौरव सिंह ने सभी हेल्थ काउंटरों, बालको मेडिकल सेंटर की मोबाइल कैंसर डिटेक्शन वैन एवं एमजीएम आई हॉस्पिटल की मोबाइल आई क्लिनिक का निरीक्षण भी किया। यह प्रोजेक्ट "छाँव" शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के समग्र कल्याण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और एक स्वस्थ, सशक्त समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। शिविर के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा पाँच कोटवारों को मौके पर ही श्रमिक कार्ड बनवाकर प्रदान किए गए। कोटवार संघ द्वारा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
ग्राम पिरदा के कोटवार श्री बिरबल सिंह धीवर ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन द्वारा हमारे लिए इस शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने बीपी, शुगर सहित अन्य स्वास्थ्य जाँचें कराईं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार प्रकट किया।
इस शिविर में विशेष रूप से मैमोग्राफी, सोनोग्राफी, टीबी जांच, बोन डेंसिटी चेक, ईसीजी, इको, ब्लड टेस्ट किया गया | इस अवसर पर रामकृष्ण, श्री नारायणा, मेडीशाइन, बालाजी, ममता, बालको, लोटस, ग्लोबल, जिला अस्पताल के प्रोफेशनल डॉक्टर एवं स्टाफ ने प्रोजेक्ट छांव में अपनी सेवाएं दी।
महिलाओं के लिए मैमोग्राफी जांच :- मैमोग्राफी (Mammography) एक विशेष प्रकार की एक्स-रे जांच है जो महिलाओं की स्तनों (ब्रेस्ट्स) की जांच के लिए की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य स्तन कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करना होता है, जब लक्षण अभी दिखाई नहीं देते हैं।
सोनोग्राफी (Sonography) एक गैर-विकिरण आधारित जांच है जिसमें ध्वनि तरंगों का उपयोग कर शरीर के अंदरूनी अंगों की छवि बनाई जाती है। जिससे बीमारी का पता लगाया जा सके।
इको हार्ट की सोनोग्राफी है।
इसमें हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स का उपयोग कर दिल की धड़कन, वाल्व्स, चेम्बर्स और ब्लड फ्लो को देखा जाता है।
ECG मशीन आपके शरीर पर लगाए गए इलेक्ट्रोड्स के माध्यम से दिल की धड़कनों को रिकॉर्ड करती है। इससे पता चलता है कि आपका दिल कितनी नियमितता से और कितनी तेज़ी से धड़क रहा है, और क्या उसमें कोई रुकावट या गड़बड़ी है।
शिविर में ECG, सोनोग्राफी, ECO, ब्लड सैंपल, साथ ही RFT, LFT, Vitamin D3, B12, HbA1, Sugar Random सहित अन्य जांच किया गया |
ओपीडी में शिशु रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, कैंसर रोग, मेडिसिन, किडनी रोग, न्यूरोलॉजी, मेंटल हेल्थ, गैस्ट्रोलॉजी, स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, जनरल एंड लेमोस्कोपी सर्जरी परामर्श, BMD टेस्ट, अस्ति रोग, सहित अन्य विभाग के परामर्श किया गया |
जानिए क्या है प्रोजेक्ट "छाँव"
शासकीय अधिकारी-कर्मचारी अपने व्यस्त कार्यालयीन जीवन के कारण वे और उनके परिवार स्वास्थ्य जांच और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना समय लेने वाला और असुविधाजनक होता है। "प्रोजेक्ट छाँव" का उद्देश्य शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य सेवाओं और शासकीय योजनाओं की सुलभ और समेकित सुविधा प्रदान करना है। "प्रोजेक्ट छाँव" के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह एक विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के लिए विशेष दिवस निर्धारित किया जाएगा। इन शिविरों में बीपी, शुगर, वजन, ऊँचाई जैसी प्रारंभिक स्वास्थ्य जाँच, सोनोग्राफी, मैमोग्राफी, टीबी जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही जनरल फिजीशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श की सुविधा भी दी जाएगी। स्वास्थ्य जागरूकता के अंतर्गत पोषण, जीवनशैली और रोग-निरोधक उपायों से संबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड, श्रम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं का पंजीयन और आवेदन की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी। शिविर में जरूरतमंदों को आवश्यक सामान्य दवाएँ भी निःशुल्क वितरित की जाएंगी, जिससे यह पहल एक समग्र, सुलभ और उपयोगी सेवा मंच के रूप में कार्य करेगी। आज राजस्व विभाग के 1000 अधिकारी-कर्मचारी एवं परिवारजनों ने अपना स्वास्थ्य जांच कराया एवं अन्य सुविधाओं का लाभ लिया |
इस अवसर पर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह, निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन डीसीएम रेलवे श्री अवधेश कुमार त्रिवेदी, सीएमएचओ डॉ मिथिलेश चौधरी और बालको हॉस्पिटल से डॉ. भावना सिरोही सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। -
प्रोजेक्ट 'दधीचि' शुरू: अंगदान के लिए शासकीय कर्मचारियों को किया जा रहा प्रेरित
रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन रायपुर द्वारा प्रोजेक्ट 'दधीचि' का शुभारंभ किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अंगदान के लिए प्रेरित करना है। इस प्रेरक पहल की शुरुआत कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह द्वारा की गई।
आज प्रोजेक्ट 'छाँव' के अंतर्गत सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित शिविर के दौरान पाँच लोगों ने अंगदान का संकल्प लेकर प्रोजेक्ट 'दधीचि' की औपचारिक शुरुआत की। विशेष उल्लेखनीय है कि श्री चुन्नीलाल शर्मा ने इस अवसर पर पूर्ण देहदान का संकल्प लेकर समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस अवसर पर अपील की कि अधिक से अधिक लोग आगे आकर अंग या देहदान करें, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक महान सेवा है, बल्कि यह हमारे परिवार, बच्चों और समाज के अन्य लोगों को भी मानव सेवा की ओर प्रेरित करेगी। -
बलौदाबाजार/ कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देशानुसार क़ृषि विभाग द्वारा विकासखण्ड बलौदाबाजार के ग्राम सुनसुनिया में एक्सीटेंशन रिफार्म आत्मा अतर्गत कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में किसानो क़ो क़ृषि विभाग कि विभिन्न योजनाओं क़ी जानकारी प्रदान क़ी गई। इसके साथ ही डीएमएफ अंतर्गत 20 कृषकों क़ो बैटरी स्पेयर व 30 कृषको क़ो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण योजना अंतर्गत अरहर बीज़ मिनीकिट का वितरण किया गया।
वर्तमान खरीफ सीजन में डीएपी के स्थान पर एसएसपी अथवा एनपीके उर्वरक के उपयोग हेतु कृषको क़ो सलाह दी गई। साथ ही विभिन्न फसलों में उर्वरकों के संतुलित उपयोग के माध्यम से खेती हेतु प्रोत्साहित किया गया।उर्वरक के उपयोग में कमी हेतु नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी छिड़काव हेतु विस्तृत जानकारी दी गई। फसल बीमा योजना अंतर्गत खेती में जोखिम से बचाव हेतु कृषको क़ो फसलों के बीमा के लिए प्रोत्साहित किया गया।कृषको क़ो कुल बीमा का मात्र 2 प्रतिशत देय होगा, शेष राशि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा वाहन किया जाएगा। फसल बीमा के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई 2025 है। उद्यानिकी विभाग द्वारा सब्जी एवं पुष्प उत्पादन क़ी तकनीकी जानकारी दी गई वहीं पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं में मौसमी बिमारी एवं उसके उपचार क़ी विस्तृत जानकारी दी गई।इस अवसर पर जनपद सदस्य शांता देवी यादव,अमित बारले,सरपंच रोशनी मांझी,उप सरपंच शरद कुमार केवट, वरिष्ठ क़ृषि विकास अधिकारी लोकनाथ दीवान,ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी संतोष साहु सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। -
*'कोताही बर्दाश्त नहीं, शासन के निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई'*
*उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की**सड़क और पुल मरम्मत के कार्यों पर जताई नाराजगी**चालू वित्तीय वर्ष के प्रस्तावित कार्यों के शीघ्र डीपीआर भेजने के दिए निर्देश, लोक निर्माण विभाग इस साल करेगा आठ हजार करोड़ रुपए से अधिक के काम*बिलासपुर/. उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने आज लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ बरसात में सड़कों और पुल-पुलियों की स्थिति तथा उनकी मरम्मत के लिए किए जा रहे कार्यों समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने परफॉर्मेंस गारंटी के तहत सड़कों की मरम्मत की भी जानकारी ली। बैठक में वर्षा ऋतु में अतिवृष्टि से मार्गों को अवरुद्ध होने से बचाने तथा अप्रिय घटनाओं को रोकने निगरानी एवं आवश्यक उपायों की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री साव के साथ लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, संयुक्त सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव और सभी मुख्य अभियंता भी निर्माण भवन से बैठक में शामिल हुए। सभी संभागों और जिलों से अधीक्षण अभियंता तथा कार्यपालन अभियंता बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में सभी मैदानी अधिकारियों को शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आदेश की अवहेलना करने वालों पर कोई कोताही नहीं बरती जाएगी, नियमानुसार उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। श्री साव ने राज्य में सड़कों और पुल-पुलियों के संधारण एवं मरम्मत के कार्यों पर नाराजगी जताते हुए सभी सड़कों व पुल-पुलियों को आगामी दिसम्बर माह तक गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों व पुल-पुलियों की नियमित निगरानी करते हुए यथाजरूरत इनकी तत्काल मरम्मत करने को कहा। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ मरम्मत पर जोर दिया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में अधिकारियों को चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रस्तावित कार्यों के शीघ्र डीपीआर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त कार्यों को अविलंब प्रारंभ करने के निर्देश देते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग इस साल आठ हजार करोड़ रुपए से अधिक के काम करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा पर किसी भी हालत में समझौता न करें। सभी काम निर्धारित मानकों के अनुरूप करना सुनिश्चित करें। निविदा की शर्तों के अनुसार ठेकेदारों से निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण काम करवाएं। एक-एक कार्यों पर नजर रखें और प्रगति की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने नई सड़कों के निर्माण के लिए भू-अर्जन के कार्यों में भी तेजी लाने को कहा।श्री साव ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को प्रशासनिक व तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास और निर्माण के कार्यों के लिए राशि की कोई कमी नहीं है। आप जितना बजट मांगेंगे, शासन उतनी राशि देगी। उन्होंने एक माह के भीतर राज्य के सभी पुलों का निरीक्षण कर मरम्मत और रखरखाव के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। श्री साव ने मैदानी अधिकारियों को अपने जिला प्रशासन के सहयोग से पुलों के आसपास अवैध खनिज उत्खनन (Mining) पर रोक के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बैठक में बरसात के बाद शुरू होने वाले कार्यों के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने आबंटित राशि का शत-प्रतिशत उपयोग करते हुए कहां पर किस प्रकार की मरम्मत करना है, इसे सावधानीपूर्वक तय करने को कहा। उन्होंने ज्यादा पुरानी सड़कों को रिनुअल प्लान (Renewal Plan) में लेने का सुझाव दिया। डॉ. सिंह ने सड़कों के निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा के मानकों को भी गंभीरता से अमल में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में सड़क सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए 60 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। उन्होंने इन कार्यों के लिए आगामी 15 अगस्त तक मंजूरी लेने के निर्देश दिए। -
*171 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य*
बलौदाबाजार / वन विभाग द्वारा इस वर्ष कैम्पा योजना के अंतर्गत किए जा रहे वृक्षारोपण अभियान में पारिस्थितिकी की बहाली और जैव विविधता पुनर्स्थापना के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। इस वर्ष 2025 में कैम्पा योजना के अंतर्गत कुल 9 स्थलों का चयन किया गया है जिनमें कुल 171.49 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 1,16,081 पौधों का रोपण किया जा रहा है।*वैज्ञानिक पद्धति का समावेश*- वृक्षारोपण स्थल चयन के समय हर स्थल का मिट्टी परीक्षण और बेसलाइन सर्वे किया जाएगा जिसमें वर्तमान में उस क्षेत्र की जानकारी प्राप्त होगी और वृक्षारोपण के बाद मृदा ,मिट्टी के नमी , जलवायु और जीव जंतुओं के वापसी में आने वाले बदलाव क़ी जानकारी मिलेगी। साथ ही इन अपेक्षित परिणामों से दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ सुनिश्चित होगा । इस योजना में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी जा रही है जिससे यह न केवल जैव विविधता में वृद्धि करेगा बल्कि वन्यजीव जैसे कीट -पतंगे, पक्षियों को भी एक उपयुक्त आवास उपलब्ध कराने में मदद करेगा ।*जन-समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास*- बलौदाबाजार वनमण्डल अधिकारी गणवीर धम्मशील नें बताया कि दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय सुधार की दिशा में यह एक ठोस प्रयास है। इससे स्थानीय वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास तैयार होंगे। ग्रामीणों को हरियाली का लाभ मिलेगा और जलमृदा-संरक्षण के परिणाम सामने आएंगे।साथ ही इस पहल में जन-समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने से पर्यावरण और वन्यजीव के संरक्षण के प्रति सामाजिक चेतना को बढ़ाने में मदद मिलेगी।























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