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- रायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव अमेरिका का अपना आठ दिवसीय अध्ययन प्रवास पूर्ण कर 20 सितम्बर को रायपुर लौटेंगे। वे अमेरिका से आज नई दिल्ली पहुंच गए हैं। श्री साव 20 सितम्बर को सवेरे सात बजे नई दिल्ली से नियमित विमान से रायपुर के लिए रवाना होंगे। वे सवेरे 08:55 बजे रायपुर पहुंचेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री साव एशियन डेवलपमेंट बैंक के आमंत्रण पर लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के साथ 9 सितम्बर को अमेरिका के लिए रवाना हुए थे।उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने अमेरिका में अपने आठ दिवसीय अध्ययन यात्रा के दौरान न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और सेन फ्रांसिस्को में सड़क एवं भवन निर्माण परियोजनाओं का भ्रमण किया। उन्होंने निर्माण विशेषज्ञों के साथ बैठक कर बड़ी निर्माण परियोजनाओं (Construction Projects) की प्लानिंग, डिजाइनिंग, निर्माण सामग्रियों, निर्माण तकनीकों तथा चरणबद्ध ढंग से उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी ली। उन्होंने विशेषज्ञों से कार्यस्थलों पर निर्माण कार्मिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर चर्चा की।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अमेरिका में निर्माण स्थलों के भ्रमण के दौरान वहां कार्यरत आर्किटेक्ट्स और इंजीनियरों से चर्चा कर प्रयुक्त सामग्री, धातु एवं मशीनरी की जानकारी ली। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उन्नत सड़क परियोजनाओं और भवन निर्माण में आधुनिक तकनीकों व मशीनरी के उपयोग के संबंध में भी निर्माण विशेषज्ञों से चर्चा की। श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च गुणवत्ता की टिकाऊ सड़कों और भवनों के निर्माण के लिए अमेरिका में प्रचलित नई तकनीकों और उपायों का विस्तृत अध्ययन कर लोक निर्माण विभाग में लागू करने पर विचार किया जाएगा। श्री साव अपने अध्ययन भ्रमण के दौरान न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और सेन फ्रांसिस्को में भारतीय समुदायों और छत्तीसगढ़ मूल के लोगों से भी मिले।
- -मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए तत्काल 20 हजार रुपए सहायता राशि स्वीकृत कर सौंपा चेकरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनदर्शन में लोगों की समस्याओं का त्वरित निदान हो रहा है। मुख्यमंत्री आज रायपुर स्थित अपने निवास पर आयोजित जनदर्शन में प्रदेशभर से आए लोगों से मिल रहे हैं और बारी-बारी से उनकी समस्याएं एवं जरूरतें सुन निराकरण के लिए अधिकारियों को तत्काल निर्देशित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता की आस लेकर जनदर्शन पहुंची रायपुर के कोटा में रहने वाली श्रीमती किरण मिश्रा के लिए 20 हजार रुपए तत्काल मंजूर किए। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने चंद मिनटों में ही उसे 20 हजार रुपए का चेक भी सौंप दिया।मुख्यमंत्री के जनदर्शन में श्रीमती किरण मिश्रा अपने पति और दो छोटे बच्चों के साथ पहुंची थी। वह लंबे समय से स्त्री रोग संबंधी परेशानियों से जूझ रही है। हालांकि वह लगातार इलाज करा रही है, परंतु तकलीफ पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई है। किरण के पति इलेक्ट्रिशियन का काम कर घर का खर्चा चलाते हैं। खराब आर्थिक स्थिति के चलते वह इलाज के लिए आर्थिक सहायता हेतु आज मुख्यमंत्री से मिलने आई थी। संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उसकी परेशानी को देखते हुए तत्काल 20 हजार रुपए मंजूर कर कुछ ही मिनटों में चेक भी सौंप दिया।
- -अस्पताल बनाने के लिए की जमीन दान देने की पेशकश-स्वास्थ्य मंत्री ने कलेक्टर को आवश्यक कार्यवाही के लिए दिए निर्देशरायपुर ।रायपुर के अश्विनी नगर में रहने वाले 91 वर्षीय श्री गौरीशंकर अग्रवाल लंबे समय से वकालत के पेशे में संलग्न हैं। बौद्धिक क्षमता के धनी श्री अग्रवाल छत्तीसगढ़ में ग्राम सभा के उपर किताब भी लिख चुके हैं। आज के समय में जब हर इंसान संपत्ति बनाने और बचाने की कोशिश में लगा हुआ है, श्री अग्रवाल ने इन सबसे उपर उठकर अपनी संपत्ति को राष्ट्रहित में दान करने की पेशकश की है।श्री अग्रवाल ने आज स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात की और अपनी मंशा के अनुरूप बलौदाबाजार जिले में स्थित अपनी 38 डिस्मिल की संपत्ति को जनहित में स्वास्थ्य कार्यों के इस्तेमाल के लिए अस्पताल बनाने के उद्देश्य से दान करने की इच्छा जताई। स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने श्री अग्रवाल के इस फैसले की तारीफ करते हुए पुष्प गुच्छ देकर उनका सम्मान किया। स्वास्थ्य मंत्री ने श्री अग्रवाल की मंशा के अनुरूप आगे की कार्यवाही के लिए बलौदाबाजार कलेक्टर को निर्देश दिया है ताकि विधि सम्मत आगे की कार्यवाही की जा सके।
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रायपुर। दक्षिण कोरिया में 25-30 अगस्त तक आयोजित एशियन कप बीच वुडबॉल चैम्पियनशिप में हिस्सा लेकर लौटीं महासमुंद की चैन कुमारी निषाद (35) और रायपुर की रंजीता खलको (30) ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मुलाक़ात की और अपनी उपलब्धि साझा की। दोनों खिलाड़ियों ने उक्त प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें प्रोत्साहित किया और मंच पर बुलाकर दोनों खिलाड़ियों के साथ फोटो भी खिंचाई।
- -इलाज के लिए नियमित रूप से जाना पड़ता है अहमदाबाद, मुख्यमंत्री ने कहा - लक्ष्य के स्वास्थ्य का हम रखेंगे ध्यान-एस्ट्रोफी ऑफ ब्लैडर से पीड़ित है 8 साल का बच्चा लक्ष्य-बच्चे के इलाज के लिए चिंतित पिता की जनदर्शन में दूर हुई चिंतारायपुर / मुख्यमंत्री जनदर्शन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को रायपुर के गुढ़ियारी के रमण मंदिर वार्ड से आए श्री रोशन साहू ने बेटे के इलाज के संबंध में आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा 8 साल का लक्ष्य एस्ट्रॉफी ऑफ़ ब्लैडर बीमारी से पीड़ित हैl इसके इलाज के लिए वह हर जगह गए। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन उन्होंने इलाज की पूरी कोशिश की।जब इस बात की जानकारी मिली कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में ऑस्ट्रेलिया फाउंडेशन द्वारा इस बीमारी का मुफ्त इलाज होता है तो वे वहां भी गए लेकिन वहां बताया गया कि अहमदाबाद इसके लिए नियमित रूप से जाना पड़ेगा। रोशन ने बताया कि खराब आर्थिक स्थिति की वजह से अहमदाबाद जाने में काफी खर्च होता है। ऐसे में प्रदेश मुख्यमंत्री को आवेदन देने आए हैं।उनकी समस्या सुनकर मुख्यमंत्री ने उन्हें तुरंत ईलाज के लिए 25 हज़ार रुपये का चेक प्रदान किया। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में निर्देशित किया कि बच्चे की बीमारी के इलाज की उचित व्यवस्था की जाये तथा इलाज में आ रही दिक्कतों को दूर करें। मुख्यमंत्री ने पिता को ढाढ़स बांधा । लक्ष्य के पिता ने मुख्यमंत्री के सहृदयता को देख उनका जनदर्शन में बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चे का लंबे समय से इलाज करते हुए परेशान हो गये थे और हिम्मत भी हार चुके थे अब मुख्यमंत्री से मिलने के बाद नई उम्मीद जगी है।जिस प्रदेश का ऐसा संवेदनशील मुखिया हो वहाँ के आमजनों की दिक़्क़ते ऐसे ही जल्द से जल्द दूर होंगी ।
- रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव के रायपुर स्थित निवास स्थान में आज आमजनता से भेंट - मुलाकात कार्यक्रम जनदर्शन के दौरान जशपुर से आई दृष्टिबाधित कुमारी रूपवर्षा ने पढ़ने में आ रही दिक्कत के लिए ऑर्बिट रीडर यन्त्र के लिए मुख्यमंत्री से गुहार की। मुख्यमंत्री ने सहायता का दिया आश्वासन।
- रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनदर्शन में दूर-दराज से प्रदेश के सभी जिलों से आने वाले लोगों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जनदर्शन में आए लोगों की सुविधा को लेकर मुख्यमंत्री ने स्वयं निर्देश दिए हैं। जिसके बाद आज जनदर्शन में पहुंचे लोगों के लिए सुविधाएं और बेहतर हुई हैं, मुख्यमंत्री निवास में प्रवेश आसानी से , बिना परेशानी के हो रहा है। लोगों के लिए चाय-पानी एवं स्वल्पाहार का प्रबंध भी किया गया है। जनदर्शन में आए दिव्यांगजनों की सुविधा के मद्देनजर उनके लिए बैट्री चालित ऑटो भी उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात कर आगंतुकों की स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है।
- -घर से हीरापुर आईटीआई जाने के लिए 11 किलोमीटर का सफर करते हैं राजूरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के हाथों बीजापुर के रहने वाले राजूराम वाचम को जनदर्शन में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिली। वे कंप्यूटर ट्रेड में आईटीआई कर रहे हैं। पोलियो के कारण चलने उन्हें दिक्कत होती है। मुख्यमंत्री से मिल कर उनकी यह तकलीफ अब काफी हद तक आसान हो गई है। इससे राजू राम काफी खुश है। अब उनके लिए हीरापुर आईटीआई का 11 किलोमीटर का सफर आसान हो जाएगा। दरअसल राजूराम बीजापुर के रहने वाले हैं। जन्म के तीन वर्ष बाद ही उन्हें पोलियो हो गया था। बीजापुर से बारहवीं तक की पढ़ाई करने के बाद आईटीआई करने रायपुर आए हैं। रायपुर में राजूराम सुंदरनगर में रहते हैं, जहां से हीरापुर आईटीआई की दूरी 11 किलोमीटर है। राजूराम ने पिछले जनदर्शन में मोटराइज्ड ट्रायसायकल के लिए मुख्यमंत्री को आवेदन दिया था। मुख्यमंत्री ने राजूराम को मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान करने की तत्काल स्वीकृति दे दी थी। जिसके तहत आज राजूराम को मोटराइज्ड ट्रायसायकिल प्रदान की गई।
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रायपुर। दुर्ग जिले के ग्राम खम्हरिया निवासी श्री नीलकंठ बिसाल कोआज जनदर्शन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर तत्काल श्रवण यंत्र प्रदाय किया गया। श्रवण यंत्र मिलने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को राम-राम कहकर धन्यवाद ज्ञापित किया।
- -जनदर्शन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दिव्यांग को दिए वॉकररायपुर / मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन में दुर्घटना में पैर खोने वाले विवेक को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वॉकर भेंट किया। वॉकर पाकर विवेक खुश हैं कि अब उन्हे चलने-फिरने सुविधा होगी। उनके चेहरे पर खुशी देखते ही बनती है।दरअसल रायपुर के भनपुरी स्थित बुनियाद नगर निवासी श्री विवेक शर्मा ने एक दुर्घटना में एक पैर खो दिया। चलने-फिरने में असमर्थ विवेक को इस वजह से काम भी नहीं मिल पा रहा था। इससे उन्हें अपने परिवार के पालन-पोषण में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। आज वे जनदर्शन में मुख्यमंत्री निवास पहुंचे और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांग रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल विवेक को वॉकर उपलब्ध कराया और जब विवेक मुख्यमंत्री निवास से बाहर निकले तो वॉकर के सहारे चलकर निकले। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया और कहा कि मुझे वॉकर के सहारे चलने में अब दिक्कतें नहीं होगी।
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रायपुर । बीते 10-12 दिनों से प्रभावी बरसात न होने की वजह से खेतों में खड़ी धान की फसल को एकबार फिर सिंचाई पानी की आवश्यकता है । गंगरेल बांध से छोड़े जा रहे पानी से महानदी मुख्य नहर व मांढर शाखा नहर के कमांड एरिया में आने वाले खेतों को तो सिंचाई पानी मिल रहा है पर भाटापारा शाखा नहर के खेतों को नहीं । प्रभावित ग्रामों के किसानों द्वारा ध्यानाकर्षण कराये जाने पर किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने महानदी जलाशय परियोजना के मुख्य अभियंता कुबेर सिंह गुरुवर को व्हाट्स ऐप के माध्यम से ज्ञापन भेज सिंचाई पानी देने में आ रही दिक्कत को प्राथमिकता के आधार पर दूर करवा इस शाखा नहर में अविलंब पानी छुड़वाने का आग्रह किया है।
ज्ञातव्य हो कि गंगरेल बांध से निकले महानदी मुख्य नहर के 101 किलोमीटर से भाटापारा शाखा नहर निकला है जिससे हजारों एकड़ खेतों को सिंचाई पानी मिलता है । बीते दिनों हुये व्यापक वर्षा के पूर्व इस शाखा नहर से सिंचाई पानी मिल रहा था पर बरसात बंद होने के बाद अब जब पानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है गंगरेल का पानी इस शाखा नहर में नहीं जा रहा जबकि अभी सामयिक सिंचाई पानी की आवश्यकता है । ज्ञापन में बीते दिनों हुये व्यापक वर्षा के चलते इस शाखा नहर के कहीं पर क्षतिग्रस्त होने की वजह से पानी न दिये जाने की जानकारी मिलने की बात कहते हुये प्राथमिकता के आधार पर त्वरित मरम्मत करवा पानी छुड़वाने का आग्रह किया गया है । इसमें किसी प्रकार दिक्कत होने पर क्षतिग्रस्त हिस्से के पहले पड़ने वाले क्रास रेग्युलर तक फिलहाल पानी देने व मरम्मत बाद आगे पानी दिलवाने की मांग की है ।
- बलौदाबाजार/कमिश्नर रायपुर श्री महादेव कावरे ने अपने एक दिवसीय प्रवास के दाैरान संयुक्त जिला कार्यालय मे संचालित संपर्क केंद्र 92018- 99925 की खूब प्रशंसा की। श्री कावरे ने सबसे पहले कक्ष का अवलोकन कर संपर्क केंद्र 92018-99925 के कार्य प्रणाली को बारीकी से जाना। कलेक्टर दीपक सोनी ने संपर्क केंद्र के बारे में ब्रीफ करते हुए बताया की संपर्क केन्द्र के माध्यम से फोन एवं वाट्सएप के जरिए विभिन्न विभागों से संबंधित अभी तक 126 आवेदन प्राप्त हुए है। जिसमें से 89 आवेदनों को त्वरित निराकरण किया गया है। साथ ही बचे हुए 37 आवेदनों को समय-सीमा में दर्ज कर निराकरण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गांवों की समस्याओं को जानने एवं राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करने हेतु विषय विशेषज्ञों द्वारा 58 गांवों के जनप्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जा चुका है। जिसमें गांव वाले भी अलग से समस्याओं के बारे में जानकारी दर्ज कराएं है। संपर्क केन्द्र के माध्यम से हमने भाटापारा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम बोरसी(ध) के दो भाईयों के बीच आपसी सुलह कर धान बोनस की राशि का बटवारा,कसडोल विकासखण्ड के ग्राम मोहतरा क निवासी बलराम कर्ष कर्नाटक के जिला कोलर में ईंट भट्ठा में 8 लोगों की बंधक बनाने की सूचना दी गई। जिस पर संपर्क केन्द्र के माध्यम से तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सकुशल घर वापसी कराई गई है। इसके साथ ही अन्य मिले सफलता एवं निदान के बारे में जानकारी प्रदान की गई है।श्री कावरे ने संपर्क केंद्र के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते हुए नवाचारी पहल के जरिए आमजनों के समस्या समाधान हेतु सार्थक सकारात्मक परिणाम मूलक कदम बताया। उन्होंने कहा आमजनों की समस्याओं का त्वरित निदान हो इसके प्रशासन को हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए। यही मुख्यमंत्री जी के सुशासन की अवधारणा भी है। संपर्क केंद्र बेहद ही प्रभावी है। हमारे संभाग के अन्य जिलों में भी इस मॉडल को अपनाने का प्रयास करेंगे। जिससे अधिक से अधिक लोगो को इसका लाभ मिल सके।गौरतलब है कि नवाचारी पहल के तहत जिले में आम जनता के समस्याओं,मांगो के निराकरण, योजनाओं की जानकारी सहित सुझाव प्रदान करने के उद्देश्य से संपर्क 92018-99925 की स्थापना संयुक्त जिला कार्यालय में की गई है। इसके माध्यम से अब जिलेवासियों को घर बैठे ही अपनी मागों समस्याओं एवं सुझावों के निराकरण सहित योजनाओं संबधित जानकारी की सुविधा उपलब्ध होगी। जिसमें जिले का कोई भी व्यक्ति 92018- 99925 फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। न केवल इसमें शिकायत बल्कि रूटिन में विभिन्न विभागों द्वारा विभागीय योजनाओं की जानकारी मुहैया करायी जायेगी। इसके लिए बकायदा रूटिन में अधिकारी कर्मचारियों की विभागवार ड्यूटी भी लगायी गई है। जो भी शिकायतें दर्ज करायी जाती उनका लगातार मॉनिटरिंग करते हुए उन्हे अलग से समय सीमा में दर्ज की जाती। इस अवसर पर संयुक्त आयुक्त श्रीमती सरिता तिवारी,जिला पंचायत सीईओ दिव्या अग्रवाल,अपर कलेक्टर दीप्ति गौते, एसडीएम अमित गुप्ता लेखाधिकारी पूजा रानी सोरी,अधीक्षक एम.एम.टाण्डेय,सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- दिव्यांग ने वाद्ययंत्र खरीदने मांगी सहायता, मुख्यमंत्री ने तत्काल दिए 15 हजार रूपए के चेकरायपुर । मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दिव्यांग कलाकार की मांग चंद मिनटों में पूरी कर दी। दिव्यांग ने वाद्ययंत्र खरीदने के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष सहायता राशि की मांग की। उन्होंने तत्काल 15 हजार रूपए का चेक प्रदान किया। इससे दिव्यांग के चेहरे पर मुस्कान आ गई और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। राजधानी रायपुर के राजा तालाब निवासी विवेक कुमार 8 वर्ष की उम्र से ढोलक बजा रहे है और वे ढोलक में पारंगत हासिल कर चुके है। बचपन से ही वे गायन वादन में विशेष रूचि भी रखते है। आर्थिक रूप से कमजोर विवेक ने अपने सपने को पूरा करने के लिए वाद्ययंत्र खरीदना चाहते थे। आज वे जनदर्शन में मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुलाकात करने के लिए पहुंचे। विवेक ने वाद्य यंत्र खरीदने के लिए मुख्यमंत्री श्री साय से सहयोग की मांग की। मुख्यमंत्री ने दिव्यांग कलाकार विवेक का हौसला बढ़ाने के लिए 15 हजार रूपए का चेक सौंपा और शुभकामनाएं दी। इससे राशि से विवेक वाद्ययंत्र खरीदकर अपनी प्रतिभा को निखार पाएंगे।
- *जनदर्शन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दिव्यांग को दिए वाकर*रायपुर । मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन में दुर्घटना में पैर खोने वाले विवेक को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने वाॅकर भेंट किया। वाॅकर पाकर विवेक अब चलने-फिरने लगे हैं और उनके चेहरे पर मुस्कान भी लौट आई है। विवेक ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया और कहा कि मुख्यमंत्री ने वाॅकर प्रदाय किया हैं, इससे अब मुझे चलने में और अपना काम करने में परेशानी नहीं होगी।रायपुर के भनपुरी स्थित बुनियाद नगर निवासी श्री विवेक शर्मा एक दुर्घटना में एक पैर खो दिए। चलने-फिरने में असमर्थ विवेक को इस वजह से काम भी नहीं मिल पा रहा था। इससे उन्हें अपने परिवार के पालन-पोषण में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। आज वे जनदर्शन में मुख्यमंत्री निवास पहुंचे और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांग रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल विवेक को वाॅकर उपलब्ध कराया और जब विवेक मुख्यमंत्री निवास से बाहर निकले तो वाॅकर के सहारे चलकर निकले। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया और कहा कि मुझे वाॅकर के सहारे चलने में अब दिक्कतें नहीं होगी।
- -टी सहदेवभिलाई नगर। तालपुरी बी ब्लॉक में दस दिनों तक गणेशोत्सव मनाने के बाद ग्यारहवें दिन गणपति बप्पा धमाल बैंड की गूंज के बीच विदा हो गए। क्लब हाउस से भक्तों की भीड़ के बीच निकला विसर्जन जुलूस कॉलोनी के मुख्य मार्ग से गुजरते हुए मरोदा डैम पहुंचा, जहां भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जित की गई। मुख्य प्रतिमा के साथ घरों में विराजी गईं छोटी मूर्तियों का भी विसर्जन किया गया। गणेशोत्सव में संगीत संध्या, बॉलीवुड और छत्तीसगढ़ी गानों की धुन पर नृत्य, क्लासिकल डान्स, गायन तथा मनोरंजक खेल गतिविधियों सहित कई रंगारंग कार्यक्रम हुए, जिसमें सबसे ज़्यादा ध्यान सोलो बैंड एक्सपर्ट आशीष साहू और नृत्य कलामंदिर की नृत्यांगनाओं के परफॉरमेंस ने खींचा।उत्सव के अंतिम दिन निकले विसर्जन जुलूस में तालपुरी की महिलाओं का जोश अपने चरम पर था। पुरुष भी थिरक रहे थे, लेकिन महिलाएं पूरे उत्साह में नजर आईं। गाजे-बाजे के साथ शाम छह बजे निकले इस जुलूस को मरोदा डैम तक पहुचने में दो घंटे से ज्यादा का वक्त लगा। डैम के तट पर विसर्जन से पहले एक बार फिर भगवान गजानन की सनातन विधि-विधान से पूजा की गई। विसर्जन के दौरान इस बात का खास ख्याल रखा गया कि प्रतिमा खंडित न हो। तालपुरीवासी तब तक डटे रहे, जब तक प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न न हो गई। जब मूर्ति का विसर्जन हो रहा था, तब डबडबाई आंखों से लोगों ने गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के गगनभेदी नारे लगाए।पूरे दस दिनों तक पंडित अरुण शुक्ला के नेतृत्व में सुबह-शाम विघ्नहर्ता की पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग श्रद्धाभाव से शामिल हुए। गणेशोत्सव के अंतिम दो दिन चंद्रहास भक्तमाली ने अपनी मंडली के साथ छत्तीसगढ़ी में हरिकीर्तन किया, जिसमें भगवान विनायक के धड़ में हाथी के शीर्ष के प्रत्यारोपण और घटोत्कच विवाह की कथा का सुरुचिपूर्ण ढंग से वाचन किया। हर दिन भोग का वितरण भी किया गया, जिसे पंक्तिबद्ध होकर लोगों ने ग्रहण किया। रंगारंग कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले और प्रतियोगिताओं के विजेता पुरस्कृत भी किए गए।

- रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मिलकर अपनी तकलीफ़ों के दूर होने की आशा और उम्मीदों का दामन थामे मुख्यमंत्री निवास में प्रदेश भर से बुजुर्ग, महिलाएँ, युवा ,दिव्यांग, सब पहुँच रहे हैं/
- रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनदर्शन में मुख्यमंत्री से मिलने आए लोगों ने जनसंपर्क विभाग की मासिक पत्रिका जनमन और रोजगार नियोजन की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनदर्शन में मुख्यमंत्री से मिलने आए लोगों ने जनसंपर्क विभाग की मासिक पत्रिका जनमन और रोजगार नियोजन की सराहना की। जनमन एवं रोजगार नियोजन को लेकर विशेषकर युवाओं में रुचि और उत्साह देखने को मिला
- -एनपीएस खाता शुरु करनेवाले हितग्राहियों को स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या -प्राण प्रमाणपत्र का वितरण-बच्चों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई योजना- भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक राकेशकुमार सिन्हारायपुर। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में एनपीएस वात्सल्य योजना का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करना है। इसके साथ ही देश के 75 स्थानों पर भी एनपीएस वात्सल्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अन्य स्थानों के लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।इसी कड़ी में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा नाबार्ड के सहयोग से छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, सुरजपुर और दुर्ग जिला के पाटन में एनपीएस वात्सल्य योजना शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में एनपीएस का खाता शुरु करनेवाले बच्चों और हितग्राहियों को ‘स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या –प्राण’ प्रमाणपत्र का वितरण किया गया।रायपुर में भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक राकेशकुमार सिन्हा, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अंचल प्रमुख बी. आर. रामा कृष्णा नायक, भारतीय स्टेट बैंक तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सहायक महाप्रबंधक मनोज कुमार सिंह तथा अन्य वरिष्ठ बैंक अधिकारियों की उपस्थिती में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। भाटागाव के ब्रह्मविद्या ग्लोबल स्कुल के निदेशक श्री प्रत्युष पदरहा और प्रशासनिक अधिकारी डा. गरिमा अग्रवाल विशेष अतिथी के तौर पर उपस्थित थे।इस योजना के बारे में बताते हुए भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक राकेशकुमार सिन्हा ने कहा की, एनपीएस वात्सल्य माता-पिता को पेंशन खाते में निवेश करके अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत करने के साथ दीर्घकालिक धन सुनिश्चित करने की अनुमति देगा । एनपीएस वात्सल्य लचीला योगदान और निवेश का विकल्प प्रदान करता है, जिससे माता-पिता बच्चे के नाम पर सालाना 1,000 रुपये का निवेश कर सकते हैं, जिससे यह सभी आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों के लिए सुलभ हो जाता है । उन्होंने बताया की, यह नई पहल बच्चों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई है, जो भारत की पेंशन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है । यह योजना पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के तहत चलाई जाएगी । एनपीएस वात्सल्य की शुरुआत भारत सरकार की सभी के लिए दीर्घकालिक वित्तीय योजना और सुरक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है । यह भारत की भावी पीढ़ियों को अधिक वित्तीय रूप से सुरक्षित और स्वतंत्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- बलरामपुर । बलरामपुर जिले में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के एक जवान द्वारा अपनी सर्विस राइफल से गोलीबारी किए जाने के कारण दो जवानों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि जिले के सामरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत भूताही गांव में स्थित सीएएफ के 11वीं बटालियन के शिविर में आज सुबह आरोपी जवान अजय सिदार ने अपनी सर्विस इंसास राइफल से गोलीबारी कर दी। इस घटना में जवान रूपेश पटेल और संदीप पांडेय की मौत हो गई तथा जवान अंबुज शुक्ला और राहुल बघेल घायल हो गए। उन्होंने बताया कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में झारखंड की सीमा से लगे क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों को देखते हुए भुताही गांव में सीएएफ का शिविर बनाया गया है। भुताही शिविर में सीएएफ की 11 वीं बटालियन तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 11.30 बजे सीएएफ के आरोपी जवान अजय सिदार ने सर्विस इंसास राइफल से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में चार जवानों को गोली लगी। गोली लगने से जवान रूपेश पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। जब तीन घायल जवानों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा था तब संदीप पांडेय ने रास्ते में दम तोड़ दिया। सरगुजा क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक अंकित गर्ग ने बताया कि घटना के बाद गोलीबारी करने वाले आरोपी जवान सिदार को पकड़ लिया गया है तथा उससे पूछताछ की जा रही है। गर्ग ने बताया कि घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत खतरे से बाहर है।
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- कालोनी में अपरिचित रहने वाले लोगों के बीच पारिवारिक वातावरण बना गणेश स्थापना से- प्रश्नों के माध्यम से अपनी परंपरा और संस्कृति को जानने का मिल रहा अवसररायपुर। राजधानी में ऐसे तो बड़े-बड़े गणेश पंडाल बनाए गए हैं और विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, परन्तु डीडीनगर सेक्टर 04 के गणपति गजानन समिति के गणेश स्थापना का ढंग वास्तव में न केवल अनुकरणीय है बल्कि लोगों को अपनी परंपराओं में लौटने का सकारात्मक संदेश दे रहा है। गणपति गजानन समिति ने पहली बार गणेश की स्थापना की और कालोनी में जहां पड़ोसी एक-दूसरे का नाम नहीं जानते थे, वहां ऐसा वातावरण तैयार किया, जिससे उनके बीच आत्मिक संबंध स्थापित हो गए हैं और लोकमान्य तिलक ने जिन उद्देश्य को लेकर इस पर्व की शुरूआत की थी, उसे चरितार्थ करते हुए दिखाई दे रही है।आमतौर पर गणेश स्थापना करने वाली समिति चंदा की रसीद बुक छपाई से कार्य का आरंभ करती है, परन्तु गणपति गजानन समिति ने इस पवित्र और आध्यात्मिक कार्य के लिए किसी से पैसे मांगने चंदा नहीं मांगने का निर्णय लिया। सर्वप्रथम प्रतापचंद अल्पना दास, लक्ष्मण ललिता भंडारकर, रत्ना पटेल ने अपने घरों में उपलब्ध बांस बल्ली, तिरपाल, स्टेज बनाकर कार्य आरंभ किया और आसपास के लोगों को वाट्सएप के माध्यम से ग्रुप बनाकर गणपति स्थापना की नियमित जानकारी पोस्ट करना आरंभ किया। गणपति की स्थापना में लोग एक-दूसरे को जाने-पहचाने इसके लिए 11 दिन 11 परिवार को बारी-बारी से आरती के लिए आमंत्रित किया गया। उनके पति-पत्नी,बच्चों के नाम की सूची तैयार की गई और उन्हें गणेश जी की सेवा की एक दिन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसका यह लाभ हुआ कि पूरा परिवार एक दिन गणेश जी की पूजा की तैयार में लगा रहा, बच्चों ने हार बनाई तो घर में ही प्रसाद भी बनाया गया। धीरे-धीरे 11 परिवार से और अधिक परिवार जुड़ने लगे। गणेश को छप्पन भोग लगाकर प्रकृति प्रदत्त आहार का महत्व बच्चों को समझाया गया और फास्ट फुड का उपयोग कम करने की बात कही। महाआरती में 1001 दिये जलाकर सबसे लिये सद्भावना और सुख की कामना की गई।बुद्धिप्रिय प्रश्न के माध्यम से संस्कृति की जानकारीगणपति गजानन समिति ने प्रतिदिन बुद्धिप्रिय प्रश्न प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें रोज सुबह वाट्सएप पर संस्कृति एवं परंपरा से संबंधित प्रश्न भेजे जाते थे, जिसमें बच्चों के साथ बड़े उनका उत्तर वाट्सएप पर देते थे, इससे वे दिनभर रचनात्मक शोध में व्यस्त रहे। इसमें गणेश जी से संबंधित प्रश्नों के साथ ही देश के गणेश मंदिरों के सवाल होते थे। इसके अलावा प्रश्नों में अपने कुलदेवता का नाम, उसमें क्या भोग लगता है। उनके दादा-परदादा का क्या नाम था, जैसे सवाल पूछे जाते थे, जिनके जवाब बच्चे माता-पिता व अन्य संबंधियों से पूछकर देते थे।भीड़ वाला भंडारा नहीं, बैठ कर कराया भोजइस समिति ने आम भंडारे की तरह लाइन लगाकर और खड़े होकर प्रसाद वितरण जैसी व्यवस्था के बजाय भारतीय परंपरा के अनुरूप गणेश जी के साथ स्नेह भोज का आयोजन किया, जिसके लिए सब्जी, चावल, पुड़ी इत्यादि सभी परिवार के महिला-पुरुषों में मिलकर एकसाथ बनवाया और उसे आरती के बाद सबको जमीन पर बैठाकर पत्तल से वितरित किया। आयोजकों ने पंडाल में गणेश जी को भोग के साथ सबकी मंगलकामना के लिए इस प्रसाद को ग्रहण करने की भावना रखी। इससे प्रभावित होकर लोगों ने स्वैच्छिक रूप से सहयोग राशि देना प्रारंभ कर दिया, संभावित खर्च के अनुसार अधिक राशि मिल गई तो समिति ने लोगों को चंदा देने से मना भी किया। समिति के सदस्यों का कहना है कि यदि हमें किसी भी कार्य करने का प्रयोजन पता है तो उसके लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता नहीं पड़ती। लोगों में आपसी सामंजस्य, सौहार्द्रता और पारिवारिक वातावरण मिलजुलकर रहने से बनाती है, इसके लिए पैसा नहीं लगता, हमने वही कार्य किया। उनका कहना है कि आज सब काम श्रमिक और ठेके पर कराया जाता है जिससे बच्चों में ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ सामाजिक कार्य करने का संस्कार नहीं बन पाता। जब बच्चे अपने माता पिता को सार्वजनिक कार्य में खुद मेहनत करते हुए देखकर तो उनसे इसे संस्कार को रूप में ग्रहण करते हैं।अपने आसपास रहने वाले श्रेष्ठ व्यक्ति से लेते थे प्रेरणासमिति बुद्धिप्रिय प्रश्न प्रतियोगिता की पुरस्कार वितरण के लिए प्रतिदिन एक अतिथि को आमंत्रित करती थी, ये अतिथि आपने आसपास रहने वाले श्रेष्ठ व्यक्ति होते हैं। वे अपने विषय से संबंधित होते थे। जैसे छत्तीसगढ़ के गणेश मंदिर और ढोलकल की गणेश प्रतिमा को लेकर जिस दिन प्रश्न पुछा गया, उस दिन उस पुरातत्वविद् को आमंत्रित किया गया था, जिसमें ढोलकल की टूटी प्रतिमा को फिर से जोड़कर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। कुल देवता और अपने पूर्वजों को लेकर जिस दिन प्रश्न पूछा गया, उस दिन पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एसके पांडेय का उद्बोधन रखा गया। संस्कृति से संबंधित प्रश्न वाले दिन समाजसेवी और सीएसईबी के पूर्व एमडी श्री पीएल विधानी ने बच्चों को सबके साथ मिलजुलकर रहने की प्रेरणा दी।अलग प्रकृति के होने के बाद भी एकजुट होने का संदेशपरिवार पर आधारित प्रश्न वाले दिन डगनिया के पांच बेटे बहुओं वाले संयुक्त परिवार के मुखिया भीषम लाल ताम्रकार को आमंत्रित किया गया, उन्होंने शिव परिवार का उदाहरण देकर बताया कि नंदी, शेर, सांप, मोर और चूहा शेर ये सभी शिव परिवार के वाहन हैं, लेकिन इनकी कभी एक-दूसरे से नहीं जमती। इनका स्वभाव एक दूसरे के दुश्मन की तरह रहता है, परन्तु शिव परिवार में सभी एकसाथ तालमेल के साथ रहते हैं, हमें भी अपने परिवार के साथ ऐसा रहना चाहिए। इसमें चार्टेड अकाउंटेंट विकास शर्मा, साहित्यकार डॉ सुधीर शर्मा और माना वृद्धाश्रम के अध्यक्ष राजेंद्र निगम को भी आमंत्रित किया गया, जिन्होंने बच्चों को अच्छे भविष्य के लिए शिक्षा के महत्व को बताया। - -मुख्यमंत्री मेधावी छात्र-छात्रा शिक्षा प्रोत्साहन योजना से पंकज के जीवन में आया बदलाव-राज्य स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने होनहार युवा पंकज साहू को किया सम्मानितरायपुर / एक छोटे से गांव से निकल कर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना और वहां से आईआईटी धनबाद का सफ़र और फिर टाटा स्टील जैसे बड़ी कंपनी में मैनेजर का प्रतिष्ठापूर्ण पद प्राप्त करना किसी भी श्रमिक परिवार के बच्चे के लिए एक सपने जैसा है। इस सपने को हकीकत में बदलने का काम एक श्रमिक परिवार के होनहार बच्चे ने कर दिखाया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में श्रमिक परिवार के इस होनहार युवा श्री पंकज साहू को इस शानदार कामयाबी के लिए सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। वर्तमान में पंकज साहू ओडिशा के जैपुर जिले के कलियापानी स्थित टाटा स्टील कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। पंकज साहू इस सम्मान के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का हृदय से आभार मानते हैं।पंकज साहू की कहानी संघर्ष, मेहनत, इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग का एक जीता जागता उदाहरण है। धमतरी जिले के छोटे से गाँव दर्री के निवासी पंकज एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पंकज साहू बताते हैं कि उनके पिता श्री जयलाल साहू धमतरी के एक निजी दुकान में श्रमिक के रूप में कार्यरत थे और उनकी माता श्रीमती ज्ञानबती साहू रेज़ा मज़दूर के रूप में काम करती थी। वे छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग में निर्माणी श्रमिक के तौर पर पंजीकृत है। पंकज की प्रारंभिक पढ़ाई गाँव में ही हुई थी।पंकज बताते है कि उन्हें बचपन से ही मैथ्स, साइंस जैसे विषयों में विशेष रूचि थी, उनके पिता भी मैथ्स ग्रेजुएट है। आर्थिक परिस्थिति के चलते उन्हें श्रमिक के रूप में कार्य करना पड़ रहा था। पंकज साहू ने स्कूल के दिनों में ही तय कर लिया था कि इंजीनियर बनकर परिवार की परिस्थिति को बदलेंगे। लेकिन जब इंजीनियरिंग करने की बारी आई, तो परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियाँ खड़ी हो गईं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च वहन करना उनके परिवार के लिए नामुमकिन था।पंकज साहू और उनके परिवार के लिए छह हज़ार की सीमित आय में शिक्षा की ऊँचाइयों को छूना आसान नहीं था। पंकज साहू भावुक होकर कहते हैं कि उन्होंने अपने स्कूल शिक्षा के दौरान ही स्वयं सेवी संस्था के साथ जुड़कर काम करना शुरू कर दिया था। गर्मियों की छुट्टियों में आस पड़ोस के बच्चों को प्राइवेट ट्यूशन दिया करते थे। उससे मिली मेहताना से अपने पढ़ाई का खर्चा उठाते थे। उन्होंने बताया कि 12वीं पास होने के बाद पैसे की कमी होने के कारण वे पीईटी का फार्म तक नहीं भर पाये थे।ऐसे में उन्हें बीएससी में एडमिशन लेना पड़ा। लेकिन पंकज साहू की इंजीनियरिंग करने की चाहत तब भी क़ायम रही। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के साथ धमतरी में निजी दुकानों में काम करना शुरू किया, साथ ही प्राइवेट कोचिंग और एनजीओ के साथ काम जारी रखा। इस तरह उन्होंने पैसे जोड़कर पीईटी परीक्षा में पास होकर शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जगदलपुर में माईनिंग डिपार्टमेंट में बीई में दाखिला लिया। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही एनजीओ में वॉलंटियर के रूप में कार्य करते रहे जिससे वे अपने कॉलेज और हॉस्टल का व्यय वहन कर सका।इंजीनियरिंग के बाद भी पंकज की राह आसान नहीं थी। उन्होंने एम टेक करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने गेट की परीक्षा पास की, लेकिन मुश्किलें थमी नहीं थी, एम टेक की पढ़ाई का खर्च सालाना लगभग एक लाख रुपये था, जो उनके परिवार के लिए एक भारी बोझ था। इतनी सीमित आय में उच्च शिक्षा ग्रहण करना मुश्किल था, लेकिन पंकज के जीवन में श्रम विभाग द्वारा संचालित मेधावी छात्र-छात्रा शिक्षा प्रोत्साहन योजना मील का पत्थर साबित हुई। उन्हें गांव के कुछ जागरूक जनप्रतिनिधियों से योजना के बारे में पता चला, जिसने उनके सपनों को नई उड़ान मिली। योजना के तहत पंकज की एमटेक की शिक्षा का पूरा खर्च छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वहन किया गया। इस योजना का लाभ लेते हुए उन्होंने आईआईटी धनबाद से एमटेक की डिग्री प्राप्त की और अपनी कड़ी मेहनत और लगन के कारण गोल्ड मेडल हासिल किया।धनबाद में अपनी एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पंकज को वेदांता रिसोर्स में प्लेसमेंट मिला, और जल्द ही उन्हें टाटा स्टील कंपनी में मैनेजर के पद पर नियुक्ति मिली। आज पंकज सालाना 18 लाख रुपये के पैकेज पर कार्यरत हैं और उनका जीवन पूरी तरह से बदल चुका है।पंकज ने भावुक होते हुए कहते हैं कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री मेधावी छात्र-छात्रा शिक्षा प्रोत्साहन योजना और उनके माता-पिता का सहारा न मिलता, तो शायद उनके लिए इतनी बड़ी कंपनी में मैनेजर की पोस्ट तक पहुँचना एक सपना ही रह जाता। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार का आभार व्यक्त किया, जिसके चलते उनके जैसे कई गरीब बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। पंकज की कहानी उन लाखों बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। यह कहानी बताती है कि सरकारी योजनाएँ यदि सही ढंग से लागू हों और जरूरतमंदों तक पहुँचें, तो वे किसी के भी जीवन में चमत्कारी बदलाव ला सकती हैं।
- -18 माह के शब्बीर की गंभीर बीमारी का हुआ इलाज-क्लेफ्ट पैलेट की समस्या का हुआ सफल ऑपरेशन, आकाश के चेहरे पे लौटी मुस्कानरायपुर / शासन द्वारा दी जाने वाली की मूलभूत सुविधाओं में से एक स्वास्थ्य सुविधा है और केंद्र सरकार बचपन में ही बीमारियों का पता लगाकर उसे समूल समाप्त करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित कर रही है, जिसके अंतर्गत जटिल से जटिल बीमारियों का निःशुल्क इलाज किया जाता है। एक ओर जहां निजी अस्पतालों में उपचार के लिए लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं, वहीं सीमित आय वाला व्यक्ति अपने बच्चों का जीवन बचाने में नाकामयाब हो जाते हैं। इन्हीं तकलीफों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों की टीम “चिरायु“ योजना अंतर्गत स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करती है किसी प्रकार की असाधारण व्याधि परिलक्षित होने पर चिरायु और आयुष्मान योजना के तहत आगे उच्च स्तरीय उपचार के लिए रेफर किया जाता है।कांकेर जिला के विकासखंड चारामा के वार्ड क्र. 7 निवासी श्री मोईनुद्दीन खान के पुत्र शब्बीर खान आयु 18 माह का स्वास्थ्य परीक्षण चिरायु दल द्वारा किया गया। इसके पहले, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक के द्वारा चिरायु दल को सूचित किया गया था स उसके उपरांत चिरायु दल द्वारा उसके घर जाकर शारीरिक परीक्षण किया गया, जिसमें बालक के सिर में डर्माेइड सिस्ट होना पाया गया। आगे के इलाज की कार्रवाई करते हुए चिरायु दल द्वारा रायपुर के एक निजी अस्पताल में बच्चे की जाँच कराई गई, जिसका निःशुल्क ऑपरेशन अगस्त माह में डीकेएस हॉस्पिटल रायपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। परिणामस्वरूप वर्तमान में बालक पूर्ण रूप से स्वस्थ है एवं बालक के परिजन भी चिरायु योजना एवं आयुष्मान योजना के तहत हुए इलाज से संतुष्ट और प्रसन्न हैं। इसके बाद चिरायु टीम द्वारा ऑपरेशन के पश्चात बच्चे का नियमित फॉलोअप लिया जा रहा है। बच्चा वर्तमान में सामान्य बच्चों की तरह अपने व्यवहार में वापस लौट आया है बालक के माता-पिता और परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और शासन को धन्यवाद दिया है।इसी तरह मुंगेली जिला के नगर पंचायत सरंगाव के आकाश साहू को जन्म से ही क्लेफ्ट पैलेट की समस्या थी। इस समस्या का निजात पाने के लिए उसके परिजन कई स्वास्थ्य केन्द्रों का चक्कर लगा चुके थे। लेकिन अत्यधिक खर्च के कारण उनके लिए उपचार कराना संभव नहीं था। इसी बीच चिरायु टीम पथरिया द्वारा शासकीय प्राथमिक शाला हकीमनगर में 11 वर्षीय आकाश साहू का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और क्लेफ्ट पैलेट की समस्या के उपचार के लिए बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां 11 जुलाई 2024 को स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के तहत् निःशुल्क सर्जरी कराई गई।सर्जरी होने के बाद अब आकाश साहू पूरी तरह से स्वस्थ्य है और उनके चेहरे की मुस्कान लौट आयी है। बच्चे का निःशुल्क सफल ईलाज होने पर पिता देवकुमार साहू ने इस योजना की सराहना की तथा खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और शासन का आभार किया है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप राज्य के स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) का संचालन किया जा रहा है। योजना अंतर्गत कटे-फटे होंठ, जन्मजात मोतियाबिंद, टेढ़े-मेढ़े हाथ पैर, श्रवण बाधा सहित विभिन्न प्रकार की बीमारी तथा विकृति पर निःशुल्क उपचार होता है। किसी केस में टीम के सहयोग से बच्चों का उच्च स्थान में रेफर कर ईलाज भी होता है, इसके लिए किसी प्रकार का कोई धन खर्च नहीं करना पड़ता।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय के अंतर्गत सहायक मार्शल पदों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 6 अक्टूबर 2024 को किया जाएगा। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा इस परीक्षा का संचालन किया जाएगा। यह परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12.45 बजे तक होगी।सहायक मार्शल पद हेतु छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय के वेबसाईट पर पहले ही ऑनलाइन आवेदन जमा किया गया था, जिसमें विभागीय शारीरिक नाप-जोख एवं दक्षता परीक्षण उपरांत पात्र अभ्यर्थियों को अब व्यापम की वेबसाइट पर जाकर पंजीयन करना होगा। पंजीयन प्रक्रिया 9 सितंबर 2024 से शुरू हुई और 22 सितंबर 2024 तक चलेगी। इसके साथ ही, अभ्यर्थियों को अपने परीक्षा जिले का चयन करना अनिवार्य होगा।नियंत्रक छत्तीसगढ़ व्यावसायिक शिक्षा मंडल द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार व्यापम पंजीयन नंबर व परीक्षा जिला के चयन के आधार पर ही लिखित परीक्षा हेतु अभ्यर्थी को 30 सितंबर 2024 को प्रवेश पत्र जारी किया जायेगा, जिस अभ्यर्थी द्वारा छत्तीसगढ़ व्यापम के वेबसाइट में पंजीयन नहीं किया जायेगा। उन्हें संचालक, छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय के निर्देशानुसार लिखित परीक्षा से वंचित माना जायेगा व जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी अभ्यर्थी के स्वयं की होगी तथा इस सम्बंध में कोई पत्राचार स्वीकार नहीं किया जाएगा। अभ्यर्थी द्वारा पूर्व में जमा किये गये ऑनलाइन आवेदन पत्र में किसी भी तरह का सुधार या संशोधन किये जाने की अनुमति नहीं होगी।
- रायपुर /छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितकारी योजनाएं न सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान कर रही हैं, बल्कि राज्य की महिलाओं के सपनों को नई उड़ान भी दे रही हैं। ऐसी ही एक योजना है महतारी वंदन योजना, जिसने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम टुंडरी की निवासी श्रीमती दुजेमती सोनवानी के जीवन में अद्वितीय बदलाव ला दिया है।श्रीमती दुजेमती, एक घरेलू महिला है, जो पहले कभी भी हवाई यात्रा करने के बारे में नहीं सोच पाई थीं, अब इस योजना की मदद से अपने इस सपने को साकार कर चुकी हैं। महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से मिलती है। श्रीमती दुजेमती ने धीरे-धीरे इस राशि को एकत्रित किया और अपनी पहली हवाई यात्रा की योजना बनाई।श्रीमती दुजेमती ने रायपुर से जगदलपुर की हवाई यात्रा की और जगदलपुर के प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण किया। यह यात्रा उनके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव था, जिसे उन्होंने वर्षों से सपनों में संजोया हुआ था। श्रीमती दुजेमती ने बताया कि बचपन से ही वह हवाई जहाज में सफर करने का सपना देखती थीं, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण यह कभी संभव नहीं हो पाया था।महतारी वंदन योजना ने न केवल उनके इस सपने को पूरा किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का एक नया अहसास भी दिया। उन्होंने खुशी-खुशी बताया कि इस योजना से उन्हें हर महीने आर्थिक सहायता मिलती है, जिसका उपयोग वे कभी त्योहारों की खरीदारी में करती हैं, तो कभी अपनी यात्रा की इच्छाओं को पूरा करने में।श्रीमती दुजेमती ने छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उनके जैसे कई महिलाओं के जीवन में उम्मीद की नई किरण जलाई है। आज वे गर्व महसूस करती हैं कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ पाकर वे अपने सपनों को पूरा कर पा रही हैं। यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।श्रीमती दुजेमती सोनवानी की यह कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। महतारी वंदन योजना ने दिखा दिया कि सही योजना और प्रयासों से कोई भी सपना पूरा हो सकता है।गौरतलब है कि प्रदेश में महिलाओ के आर्थिक स्वावलंबन तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर मे सतत सुधार तथा परिवार मे उनकी निर्णायक भूमिका सुदृढ़ करने हेतु, समाज मे महिलाओं के प्रति भेदभाव, असमानता एवं जागरूकता की कमी को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर मे सुधार करने तथा आर्थिक स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “महतारी वंदन योजना” लागू किए जाने का निर्णय लिया गया। जिसके अंतर्गत राज्य की विवाहित, विधवा परित्यक्ता और तलाकशुदा जिनकी उम्र 21 वर्ष से अधिक हो ऐसी महिलाओ को प्रतिमाह 1000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को महतारी वंदन योजना की शुरूआत की गई थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बटन दबाकर प्रथम किश्त की राशि जारी की थी।योजना के तहत पहले चरण में करीब 70 लाख से अधिक महिलाओं को लाभार्थी के तौर पर चुना गया है जिनके बैंक खाते में योजना की सात किश्ते ट्रांसफर कर दी गई हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मार्च से सितंबर तक 07 माह की सहायता राशि4578 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान महिलाओं ने खाते में किया जा चुका है।
- -मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को घायलों का समुचित इलाज करने के निर्देश दिएरायपुर। जशपुर जिले के प्रसिद्ध शिव धाम कैलाश गुफा से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरे एक पिकअप वाहन से पलट जाने से कई लोग घायल हो गए हैं। इस वाहन में 25 से 30 श्रद्धालु सवार थे। मामला बगीचा थाने के सोनगेरसा का है।मिली जानकारी के अनुसार पिकअप वाहन लौटते समय खाई में गिर कर पलट गई। आसपास के ग्रामीणों ने हर संभव प्रयास करते हुए घायलों को इलाज के लिए तत्परता दिखाते हुए अपने स्वयं के वाहन से बगीचा अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को अंबिकापुर के जिला अस्पताल में दाखिल किया गया है।घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चिकित्सकों को घायलों का समुचित इलाज करने के निर्देश दिए हैं। बगीचा क्षेत्र में हुए इस हादसे की सूचना मिलते ही सीएम कैंप कार्यालय बगिया ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को इलाज की समुचित व्यवस्था कराने के निर्देश दिए ।

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