गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के नारों के बीच तालपुरी से विदा हुए विनायक
-टी सहदेव
भिलाई नगर। तालपुरी बी ब्लॉक में दस दिनों तक गणेशोत्सव मनाने के बाद ग्यारहवें दिन गणपति बप्पा धमाल बैंड की गूंज के बीच विदा हो गए। क्लब हाउस से भक्तों की भीड़ के बीच निकला विसर्जन जुलूस कॉलोनी के मुख्य मार्ग से गुजरते हुए मरोदा डैम पहुंचा, जहां भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जित की गई। मुख्य प्रतिमा के साथ घरों में विराजी गईं छोटी मूर्तियों का भी विसर्जन किया गया। गणेशोत्सव में संगीत संध्या, बॉलीवुड और छत्तीसगढ़ी गानों की धुन पर नृत्य, क्लासिकल डान्स, गायन तथा मनोरंजक खेल गतिविधियों सहित कई रंगारंग कार्यक्रम हुए, जिसमें सबसे ज़्यादा ध्यान सोलो बैंड एक्सपर्ट आशीष साहू और नृत्य कलामंदिर की नृत्यांगनाओं के परफॉरमेंस ने खींचा।
उत्सव के अंतिम दिन निकले विसर्जन जुलूस में तालपुरी की महिलाओं का जोश अपने चरम पर था। पुरुष भी थिरक रहे थे, लेकिन महिलाएं पूरे उत्साह में नजर आईं। गाजे-बाजे के साथ शाम छह बजे निकले इस जुलूस को मरोदा डैम तक पहुचने में दो घंटे से ज्यादा का वक्त लगा। डैम के तट पर विसर्जन से पहले एक बार फिर भगवान गजानन की सनातन विधि-विधान से पूजा की गई। विसर्जन के दौरान इस बात का खास ख्याल रखा गया कि प्रतिमा खंडित न हो। तालपुरीवासी तब तक डटे रहे, जब तक प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न न हो गई। जब मूर्ति का विसर्जन हो रहा था, तब डबडबाई आंखों से लोगों ने गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के गगनभेदी नारे लगाए।
पूरे दस दिनों तक पंडित अरुण शुक्ला के नेतृत्व में सुबह-शाम विघ्नहर्ता की पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग श्रद्धाभाव से शामिल हुए। गणेशोत्सव के अंतिम दो दिन चंद्रहास भक्तमाली ने अपनी मंडली के साथ छत्तीसगढ़ी में हरिकीर्तन किया, जिसमें भगवान विनायक के धड़ में हाथी के शीर्ष के प्रत्यारोपण और घटोत्कच विवाह की कथा का सुरुचिपूर्ण ढंग से वाचन किया। हर दिन भोग का वितरण भी किया गया, जिसे पंक्तिबद्ध होकर लोगों ने ग्रहण किया। रंगारंग कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले और प्रतियोगिताओं के विजेता पुरस्कृत भी किए गए।






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