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- भृंगराज स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे स्किन और बालों की समस्याओं के साथ-साथ कई अन्य परेशानी से निजात पा सकते हैं। भृंगराज एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। अधिकतर लोग इसका इस्तेमाल तेल के रूप में करते हैं। भृंगराज के इस्तेमाल से बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। इससे बालों की हर एक परेशानी जैसे- बालों का झडऩा, सफेद बाल इत्यादि से छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं भृंगराज के इस्तेमाल से आप अन्य समस्याओं से निजात पा सकते हैं।भृंगराज के औषधीय गुणभृंगराज में कई एंटी-ऑक्सिडेंट्स गुण मौजूद है, जिसमें फ्लैवानॉयड और एल्कलॉइड शामिल हैं। यह एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर के हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालते हैं। इसके इस्तेमाल से लिवर में मौजूद टॉक्सिंस को बाहर निकाला जा सकता है। यह लिवर को सुरक्षित रखने में आपकी मदद करता है। इसके अलावा भृंगराज में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो लिवर के हेपेटाइटिस सी जैसे संक्रमण से बचाव करता है। इसके साथ ही भृंगराज के इस्तेमाल से शरीर में होने वाले सूजन से राहत मिलती है। बालों की कई परेशानियों को दूर करने में भृंगराज फायदेमंद हो सकता है।भृंगराज के फायदे1. स्किन कटने, छिलने पर दिलाए राहतनियमित रूप से भृंगराज के सेवन आप कई परेशानियों से राहत पा सकते हैं। इससे स्किन कटने, छिलने और घाव जैसी परेशानियों से राहत पा सकते हैं। भृंगराज स्किन पर होने वाले विकारों जैसे- छिलने, कटने और घाव से आराम दिलाता है।2. इम्यूनिटी क्षमता बढ़ाने में मददभृंगराज के इस्तेमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसके इस्तेमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने वाली कोशिकाओं का उत्पादन सही तरीके से होता है। यह हमारे शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स को बढ़ाने का कार्य करती है, जो इम्यूनिटी पावर को बूस्ट करता है।3. फैटी लीवर और पीलिया आदि में भी फायदेमंदभृंगराज में एंटी-इंफ्लैमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूदहोता है, जो पीलिया और फैटी लिवर की बीमारी से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है। फैटी लिवर और पीलिया की परेशानी से राहत पाने के लिए आप भृंगराज का सेवन दिन में 2 बार कर सकते हैं। खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ भृंगराज का पाउडर खाएं। बेहतर परिणाम के लिए 1-2 महीने तक लगाकर इसका सेवन किया जा सकता है।4. कफ एवं वात विकार में फायदेमंदभृगराज में मौजूद पोषक तत्व, कफ-वात के विकारों को कम करने में असरदार होता है। इसके सेवन से कफ-वात की परेशानियों से निजात पा सकते है। आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर की कई परेशानियों का जड़ कफ-वात होता है। इसलिए अगर आप कफ-वात के विकार से सुरक्षित हैं, तो कई समस्याओं से खुद का बचाव कर सकते हैं।5. किडनी की परेशानी से दिलाए राहतकिडनी रोगियों के लिए भी भृंगराज काफी फायदेमंद है। किडनी की परेशानी को दूर करने के लिए आयुर्वेद में इसके जड़ का इस्तेमाल किया जाता है। भृंगराज का जड़ शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। इससे शारीरिक कार्यप्रणाली बेहतर होती है।6. स्किन के संक्रमण को करे दूरयह एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसमें एंटी-इंफ्लामेंटरी गुण होता है। इसके इस्तेमाल से स्किन पर होने वाले संक्रमण से बचा जा सकता है।7. कब्ज और अपच की परेशानी होगी दूरभृंगराज में एंटी-इंफ्लमैटरी तत्व होता है, जो लिवर को स्वस्थ रखकर आपकी पेट की कार्य प्रणाली को बेहतर करता है। इसके सेवन से आंत सुचारू रूप से कार्य करता है। यह पेट में होने वाली अपच, कब्ज और पेट की अन्य परेशानियों से राहत दिलाता है। इसके साथ ही भृंगराज के सेवन से आप लिवर में होने वाले सूजन को कम कर सकते है।8. बालों के लिए है असरदारअधिकतर तेल और शैंपू में भृंगराज का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसके इस्तेमाल से बालों का विकास बेहतर तरीके से होता है। झड़ते बालों की समस्याओं से राहत दिलाने में यह असरकारी है। इतना ही नहीं, सफेद बालों की परेशानी से छुटकारा दिलाता है।
- आयुर्वेद में आंवले को पंचरस कहा गया है तो वहीं खजूर की अहमियत भी उससे कम नहीं है। खजूर में 32 फीसदी मिनरल्स होते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि ब्रह्मांड में जितनी भी वस्तुएं हैं वे पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बनी हैं। खजूर में अग्नि और पृथ्वी के गुण होते हैं। खजूर को गर्मी में नहीं खाया जा सकता, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। रोजाना नियमित रूप से खजूर का दूध पीने के कई फायदे होते हैं।खजूर वाला दूध बनाने की विधि-एक कप दूध लें, इसमें दो खजूर मिला लें और फिर इसे अच्छी तरह से उबाल लें। जब दूध पौना कप रह जाए तब पी लें। खजूर वाला दूध रात को ही पिएं। खजूर का दूध हमेशा घर में ही बनाकर पिएं।खजूर के दूध के फायदे1. पेट रखे साफखजूर का दूध पीने से पेट साफ रहता है। खजूर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए पाचन ठीक से होता है। जब पेट में खाने का पाचन ठीक से होगा तो पेट से संबंधित आधे से ज्यादा रोग ऐसे ही ठीक हो जाएंगे।2.हड्डियां रखे मजबूतखजूर वैसे ही हड्डियों के लिए ठीक होता है। साथ में दूध पीने पर इसमें कैल्शियम भी मिल जाता है जिससे शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती और हड्डियां मजबूत रहती हैं। खजूर में प्रोटीन होता है जिससे मांसपेशियां भी ठीक रहती हैं। और खजूर व दूध का मिश्रण हड्डियों को मजबूत करता है। इसके अलावा खजूर के दूध में विटामिन, आयरन, एंटी-ऑक्सीडेंट आदि गुण होते हैं जिनसे हड्डियों को मजबूती मिलती है। इसके नियमित सेवन से गठिया के रोग से छुटकारा मिलता है। साथ ही नींद अच्छी आती है।3.शारीरिक कमजोरियों को करे दूरखजूर में इतने फायदे होते हैं कि इसके नियमित सेवन से शरीर की शारीरिक कमजोरियां भी ठीक होती हैं। इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज की मात्रा अधिक होती है जिससे शरीर को स्टैमिना मिलता है। साथ ही खजूर और दूध का सेवन करने से वीर्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और स्पर्म काउंट बढ़ता है।4.दिल के लिए अच्छा है ये दूधखजूर वाले दूध का सेवन करने से दिल की बीमारियां ठीक होती हैं। दरअसल खजूर वाला दूध पीने से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है, इसलिए यह दिल के लिए फायदेमंद है। रोजाना और नियमित रूप से इसका सेवन करने से दिल की बीमारियां ठीक रहती हैं।5. .याददाश्त बढ़ाएखजूर के दूध का सेवन करने पर दिमाग तेज होता है। कहा जाता है कि रोजाना दो खजूर दूध के साथ लेने पर दिमाग की सूजन कम होती है। साथ ही दिमाग की नसों को आराम मिलता है और याद करने की क्षमता तेजी से बढ़ती है।6.दांतों को रखे मजबूतखजूर वाला दूध रोजाना पीने से दांतों को मजबूती मिलती है। इसमें फास्फोरस होता है जिससे दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा खजूर वाला दूध पीने से चेहरे का ग्लो भी बढ़ता है। इसलिए खजूर के दूध का सेवन की बीमारियों से निजात पाने के लिए किया जा सकता है।7. जिन लोगों को शुगर की दिक्कत है वे खजूर का दूध का सेवन न करें। खजूर का दूध रात में ही पिएं। रात में हमारा शरीर तेजी से काम करता है । खजूर का दूध रात में लेने से नींद भी अच्छी आती है।---
- मानसिक स्वास्थ्य वो होता है, जिसमें हमारा भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल होता है। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य से किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का अहसास होता है, उसे यह भरोसा होता है कि वह जीवन के सामान्य तनाव का सामना कर सकता है और समाज के प्रति अपना योगदान देने में सक्षम होता है। इंदौर स्थित समर्थ साइकोथेरेपी एंड काउंसिलिंग सेंटर के मनोचिकित्सक डॉ. संजीव त्रिपाठी कहते हैं, अगर हम चाहें तो मानसिक स्वास्थ्य को दो भागों में बांट सकते हैं। पहला, न्यूरोटिक समस्या और दूसरा साइकोटिक समस्या। न्यूरोटिक समस्याओं में अवसाद, चिंता या घबराहट और फोबिया आदि आते हैं, जबकि साइकोटिक समस्याओं में सिजोफ्रेनिया, पैरानॉयड डिसऑर्डर आदि आते हैं।सिजोफ्रेनिया क्या है?यह एक ऐसा विकार है, जो व्यक्ति की स्पष्ट रूप से सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने की क्षमता को प्रभावित करता है। इस स्थिति में व्यक्ति कल्पना और वास्तविकता में अंतर नहीं कर पाता। इसके लक्षणों में सोचने या बोलने में असामान्यता, व्यवहार में असामान्यता, रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियों में रूचि खो देना (जैसे- सामाजिक अलगाव, जीवन से संबंधित योजनाएं बनाने में परेशानी) आदि शामिल हैं।पैरानॉयड डिसऑर्डर क्या है?आमतौर पर संदेह करना एक सामान्य मानवीय प्रवृत्ति है, लेकिन जब यह किसी की आदत बन जाए और वह हमेशा संदेह से घिरा रहे, तो यह पैरानॉयड पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। इस समस्या से ग्रसित मरीज भ्रम में रहने लगते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बेवजह शक करना और शक का पक्के विश्वास में बदल जाना, पैरानॉयड पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण हैं।मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याएं, जैसे- अवसाद की वजह से हमें कई प्रकार की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अगर अवसाद लंबे समय तक बना रहे, तो यह हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी बढ़ा देता है। क्या स्ट्रेस (तनाव) जिंदगी के लिए घातक हो सकता है? इस सवाल के जवाब में डॉ. संजीव कहते हैं, स्ट्रेस जानलेवा नहीं होता है, डिप्रेशन (अवसाद) जानलेवा हो सकता है। स्ट्रेस में आम तौर पर सुसाइडल थॉट (आत्महत्या के विचार) देखने को नहीं मिलते हैं। स्ट्रेस में आदमी आत्महत्या नहीं करता है, स्ट्रेस जब आगे बढ़कर डिप्रेशन तक पहुंच जाता है, तब आत्महत्या करने की संभावना बढ़ जाती है।
- मौसम बदलते ही सबसे पहले व्यक्ति का गला खराब होने लगता है। उसे कफ, बलगम या गले में खराश जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। ऐसी ही समस्याओं से निजात पाने में अमृतसर की फेमस मिठाई आपकी मदद कर सकती है। जी हां, इस मिठाई का नाम है अमृतसरी 'गुड़ का हलवाÓ। अमृतसरी 'गुड़ का हलवाÓ किचन में मिलने वाले सामान से बड़ी आसानी से घर पर ही बनाया जा सकता है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है यह टेस्टी हलवा।अमृतसरी 'गुड़ का हलवा बनाने के लिए सामग्री -1 कप सूजी1/2 कप पिसा हुआ गुड़1/4 चम्मच सौंफ के बीज5 केसर के लच्छे2 चम्मच काजू2 चम्मच किशमिश1/4 कप दूध2 कप पानी2 1/2 बड़े चम्मच घीविधि -पैन को मीडियम फ्लेम पर रखें। पैन में घी डालकर इसे गरम करें। इसके बाद सौंफ डालकर इसे चटकने दें। अब इसमें सूजी डालें और ब्राउन होने तक भूनें। आंच धीमी रखें वर्ना सूजी जल जाएगी। एक और पैन लेकर इसमें मध्यम आंच पर पानी गरम करें। उबल जाए तो इसमें गुड़ डालें। इसे घुल जाने दें। आंच धीमी करके पानी और गुड़ का गाढ़ा मिक्सचर बन जाने दें।अब गुड़ के घोल को सूजी में डालें।आंच पर 3-3 मिनट तक पकाएं इसके बाद इसमें दूध और केसर डाल दें। अगर आप दूध में पहले से केसर भिगाकर रखेंगे तो हलुवे का बढिय़ा कलर मिलेगा। हलवा गाढ़ा हो जाए तो इसमें मेवा डाल दें और फिर दो मिनट तक पकाएं। बादाम काटकर गार्निश करें।
- शाम को अगर आपको चाय के साथ स्नैक्स का मन करता है या आप दिन के बीच कुछ चटपटी चीजें खाते रहते हैं, तो आपको एक हेल्दी स्नैक्स की जरुरत है। अंकुरित काले चने न सिर्फ आपकी भूख शांत करेंगे बल्कि इससे आपका वजन भी कंट्रोल रहेगा। अंकुरित चने क्लोरोफिल, विटामिन ए, बी, सी, डी और के, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत होते हैं। साथ ही इसे खाने के लिए किसी प्रकार की कोई खास तैयारी नहीं करती पड़ती। रातभर भिगोकर सुबह एक-दो मु_ी खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है।काले चने खाने के फायदे-चने में मौजूद फाइबर की मात्रा पाचन के लिए बहुत जरूरी होती है। रातभर भिगोए हुए चने से पानी अलग कर उसमें नमक, अदरक और जीरा मिक्स कर खाने से कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही जिस पानी में चने को भिगोया गया था, उस पानी को पीने से भी राहत मिलती है। लेकिन कब्ज दूर करने के लिए चने को छिलके सहित ही खाएं।-रोजाना सुबह काला चना खाने से फिट तो रहते ही है साथ ही जल्द एनर्जी देने में भी सहायक होता है। रातभर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकड़े और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। आप चने का सत्तू भी खा सकते हैं। यह बहुत ही फायदेमंद होता है। -गर्मियों में चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पीने से शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही भूख भी शांत होती है।-दूषित पानी और खाने से आजकल किडनी और गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या आम हो गई है। हर दूसरे-तीसरे आदमी के साथ स्टोन की समस्या हो रही है। इसके लिए रातभर भिगोए हुए काले चने में थोड़ी सी शहद की मात्रा मिलाकर खाएं। रोजाना इसके सेवन से स्टोन के होने की संभावना काफी कम हो जाती है और अगर स्टोन है तो आसानी से निकल जाता है। इसके अलावा चने के सत्तू और आटे से मिलकर बनी रोटी भी इस समस्या से राहत दिलाती है।-चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह-सुबह खालीपेट करना चाहिए। चने का सत्तू डायबिटीज से बचाता है। एक से दो मु_ी काले चना का सेवन करने से ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करता है।-शरीर में आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की समस्या को रोजाना चने खाकर दूर किया जा सकता है। चने में शहद मिलाकर खाने से जल्द असर करता है।-आयरन से भरपूर चना एनीमिया की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। चने में 27 फीसदी फॉस्फोरस और 28 फीसदी आयरन होता है जो न केवल नए बल्ड सेल्स को बनाता है, बल्कि हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।-हिचकी की समस्या से ज्यादा परेशान हैं, तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धूम्रपान करने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। साथ ही चना आंतों-इंटेस्टाइन की बीमारियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।
- कचनार एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। जिसका सेवन कई बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। कचनार की छाल से लेकर जड़ों तक का इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, कई लोग कचनार की पत्तियों का साग भी बनाकर खाते हैं। प्राचीनकाल से ही कचनार का सेवन किया जा रहा है। इसके सेवन से सर्दी-खांसी से लेकर कई बीमारियों से राहत पाया जा सकता है।कचनार के सेवन से सेहत को होंगे ये 11 फायदे1. ब्लड को करे साफकचनार के सेवन से खून की सफाई अच्छे से होती है। इसके फूलों या फिर छाले का आप काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। करीब 10-20 मिली काढ़ा को ठंडा करके इसमें 2-3 बूंदे शहद का मिलाकर पिएं। ऐसा करने से शरीर में मौजूद खून की अच्छे से सफाई होगी।2. सर्दी-खांसी से राहतसर्दी-खांसी की परेशानी से राहत पाने के लिए कचनार के फूलों से तैयार काढ़ा का सेवन करें। दिन में दो बार 20 मिली काढ़ा का सेवन करने से सर्दी-खांसी की परेशानी से राहत मिलेगी। कचनार का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से संपर्क करें।3. मुंह के छाले का होगा इलाजअगर आप मुंह के छाले से परेशान हैं, तो कचनार के छाल से बने काढ़े से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले से काफी राहत मिलेगी। काढ़ा तैयार करने के लिए 1 लीटर पानी में करीब 50 ग्राम कचनार की छाल मिलाकर उबालें। अच्छी तरह से पानी उबलने के बाद इससे कुल्ला करें। इससे आपको मुंह के छाले से तुरंत राहत मिलेगा।4. पीरियड्स की परेशानी करे दूरपीरियड़्स की शिकायत होने पर कचनार के फूलों से तैयार काढ़े का सेवन करें। इसके सेवन से अधिक रक्तस्त्राव की समस्या से राहत मिलेगी। अधिक रक्तस्त्राव होने पर दिन में दो बार 20 मिली काढ़ा का सेवन करें।5. गैस की परेशानी होगी दूरगैस की परेशानी या फिर अपच की शिकायत होने पर दिन में दो बार 2 ग्राम आजवाइन के साथ 20 मिली काढ़ा का सेवन करें। इससे गैस की परेशानी से तुरंत राहत पा सकते हैं, लेकिन यह प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की एक बार राय अवश्य ले लें।6. पाचन को करे दुरुस्तपाचन को दुरुस्त करने में भी काफी असरदार साबित हो सकता है। पाचन में गड़बड़ी होने पर 10-20 ग्राम कचनार की जड़ लें। इसका काढ़ा तैयार करें। दिन में दो बार इस काढ़ा का सेवन करने से पाचन संबंधी परेशानी से राहत मिलेगा।7. अर्थराइटिस की परेशानी से राहतकचनार के सेवन से अर्थराइटिस और सोरायसिस में होने वाली परेशानी से राहत पा सकते हैं। अर्थराइटिस में होने वाली सूजन जैसी परेशानी से राहत पा सकते हैं। इसमें चलने, उठने-बैठने में काफी ज्यादा परेशानी होती है। शरीर में किसी तरह की परेशानी होने पर कचनार का सेवन करें। इससे सूजन की परेशानी से राहत पा सकते हैं।8. ल्यूकोरिया से करे बचावमहिलाओं में होने वाली ल्यूकोरिया बीमारी से राहत दिलाने में कचनार काफी फायदेमंद हो सकता है। ल्यूकोरिया की परेशानी होने पर इसके लाल फूलों से तैयार 1-2 ग्राम चूर्ण का सेवन करें। इससे ल्यूकोरिया परेशानी से राहत पा सकते हैं।9. बवासीर से मिलेगी राहतबवासीर की परेशानी होने पर कचनार की जड़ का चूर्ण तैयार करें। सुबह 1 गिलास छाछ के साथ 1 से 2 ग्राम चूर्ण का सेवन करें। इससे पाचन की परेशानी के साथ-साथ बनासीर की परेशानी से राहत पा सकते हैं।10. पीलिया का करे इलाजपीलिया की परेशानी होने पर कचनार के पत्तों का सेवन करें। इसके पत्तों से तैयार पेस्ट का सेवन 1 गिलास दूध के साथ करें। इससे पीलिया की समस्या से राहत पा सकते हैं।11. पेचिश का करे इलाजदस्त या फिर पेचिश की परेशानी होने पर कचनार का सेवन करें। इसका स्वाद कसैला और ठंडा होता है, जो दस्त की परेशानी को कम करता है। यदि दस्त में ब्लड आ रहा है, तो इसके सेवन से आपकी परेशानी दूर हो सकती है।
- स्वाद और सेहत से भरपूर अमरूद खाना हमारे लिए काफी फायदेमंद है। अमरूद ही नहीं, बल्कि इसकी पत्तियों में भी कई गुण छिपे होते है। खाली पेट अमरुद की पत्तियों के सेवन से पेट संबंधी परेशानी दूर होती है। इसके साथ ही यह डायबिटी मरीजों के लिए भी काफी फायदेमंद है। अमरुद की पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों को दूर करने में असरकारी हो सकते हैं। डायबिटीज रोगियों को अमरूद की पत्तियों से तैयार काढ़ा पीना चाहिए, ये उनके लिए काफी ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।कैसे तैयार करें अमरूद का काढ़ा?अमरूद का काढ़ा बनाने के लिए एक बर्तन में 2 गिलास पानी लें। इसमें 4 से 5 अमरूद की पत्तियां डालें। अब इसे गैस पर अच्छे से उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तब गैस को बंद कर दें। पानी को ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद पानी को छानकर पिएं। इससे डायबिटीज की परेशानी कंट्रोल में रहेगी।पिंपल्स की परेशानी करे कमअमरूद की पत्तियों के सेवन स्किन की परेशानी दूर हो सकती है। पिंपल्स और स्किन की अन्य परेशानी से राहत पाने के लिए आप अमरूद की पत्तियों का इस्तेमाल करें। इसके लिए अमरुद की पत्तियों को लें। इसे अच्छे से पीसकर स्किन पर लगाएं। कुछ दिनों तक इसको अपने फेस पर लगाने से पिंपल्स की परेशानी दूर होती है। इतना ही नहीं यह आपके ब्लैकहैड्स को भी दूर कर सकता है।हाई ब्लड प्रेशरहाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए भी अमरूद की पत्तियां काफी फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए खाली पेट अमरूद का काढ़ा पिएं। इसके सेवन से हाई ब्लड प्रेशर काफी हद तक कंट्रोल में रहेगा।डायरिया की परेशानी करे दूरडायरिया और दस्त की शिकायत होने पर भी अमरूद की पत्तियां आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। इसके लिए काढ़ा बनाते समय इसमें अदरक या फिर सौंठ का छोटा सा टुकड़ा दालें। इससे लिवर से जुड़ी परेशानी से राहत मिलेगा।शुगर की परेशानी से राहतअमरूद की पत्तियों से बना काढ़ा पीने से शुगर की परेशानी कंट्रोल में रहेगी। दअसल, इसमें अमरूद की पत्तियों में इंसुलिन भरपूर से होता है, जो आपके शरीर में ग्लूकोज को नियंत्रित करता है।मुंह के छालों से दिलाए राहतअमरूद के काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के छाले से निजात मिलेगा। इतना की नहीं यह मसूड़ों में घाव और छाले की परेशानी को दूर करता है। अगर आप काढ़ा नहीं पीना चहते हैं, तो इसकी पत्तियों को चबाएं। इससे आपको काफी राहत मिलेगा।बाल झडऩा रोकेइस काढ़े को सिर में लगाने से बालों के झडऩे की समस्या खत्म होगी।---
- राजमा चावल शायद की किसी की फेवरेट डिश न हो। हर घर में राजमा चावला तो बनता ही है। राजमा हल्के भूरे रंग का होता है। बींस की इस किस्म में कैल्शियम, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फोलिक एसिड आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ऐसे में राजमा को अपनी डाइट में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके सेवन से अनेक समस्याओं से बचा जा सकता है। वहीं इसकी अधिकता से शरीर में कुछ परेशानियों को पैदा कर सकती हंै।प्रोटीन का अच्छा स्रोतराजमा में के अंदर भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जिसके सेवन से शरीर में प्रोटीन का स्तर सामान्य रहता है। राजमा इस काम को शरीर में अतिरिक्त कैलोरी न बढ़ाए करता है। जो लोग मीट का सेवन नहीं करते हैं वे शाकाहारी लोग राजमा के माध्यम से प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते हैं।उच्च रक्तचाप को कम करेराजमा के अंदर उच्च रक्तचाप को कम करने के गुण पाए जाते हैं। इसके अंदर घुलनशील फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद हैं जो रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। पोटैशियम, मैग्निशियम धमनियों और वाहिकाओं को फैलाने का काम करते हैं। वहीं इनके माध्यम से रक्त प्रभाव भी सही होता है। यह सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या को दूर करने में भी उपयोगी है।वजन को कम करेंफाइबर अगर आहार में शामिल किया जाए तो लोगों को लंबे समय तक भूख नहीं लगती। वहीं राजमा के अंदर फाइबर के साथ-साथ कम वसा वाले तत्व भी मौजूद है। ऐसे में ये वजन कम करने में बेहद असरकारी है। चूंकि इसके सेवन से भूख कम लगती है तो लोग अधिक खाने से भी बचते हैं।बढ़ती उम्र को रोकेराजमा के अंदर पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण मुक्त कणों से छुटकारा दिलाने में बेहद मददगार हैं। वहीं यह झुर्रियों को कम करने के साथ-साथ मुहांसों को ठीक करता है। इसके सेवन से नाखून और बालों की सेहत भी अच्छी रहती है। इनके सेवन से कोशिकाओं की उम्र स्थिर हो जाती है और इनके बढऩे की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।पेट को तंदुरुस्त रखेराजमा पाचन तंत्र को तंदुरुस्त बनाए रखने में बेहद असरदार है। दूसरी तरफ यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और कोलन कैंसर के खतरे को कम करने के लिए भी प्रसिद्ध उपचार माना जाता है। ऐसे में पेट दर्द से परेशान लोग सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं।कब्ज में लाभकारीराजमा के अंदर घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं जो मल को बाहर निकालने में मदद करते हैं। वही आंतों के कार्यों को सुचारु रुप से सहायता देने में भी राजमा अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। जिन लोगों को कब्ज की परेशानी रहती है वे अपने आहार में राजमा को शामिल कर सकते हैं। और समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।दिल की रक्षा करे राजमाराजमा के अंदर मैग्निशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। वही यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम भी करता है। दिल से जुड़ी बीमारियां जैसे- दिल का दौरा, धमनियों की जमावट, शरीर को स्ट्रोक आदि से लडऩे में राजमा बेहद मदद करता है। साथ ही दिल को मजबूती देता है।कोलेस्ट्रॉल को कम करेराजमा में जटिल कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की बड़ी मात्रा होने के चलते रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर कम होता है घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रोल को चारों ओर एक रक्षा कवच की तरह फैलने से रोकती है।राजमा के अन्य फायदे-राजमा के अंदर मैग्नीशियम, कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूती देता है। साथ ही ये ओस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं को रोकने में मदद करता है। राजमा में मौजूद मैग्निशियम फेफड़ों में बाहर और अंदर स्मूथ वायु मार्ग को स्वस्थ रखने के साथ अस्थमा को भी रोकता है। बता दें कम मैग्निशियम से शरीर में अस्थमा की बीमारी हो सकती है।-राजमा के अंदर विटामिन बी1 पाया जाता है जो न केवन ऊतकों का विकास करता है बल्कि त्वचा और बालों की सेहत का भी ध्यान रखता है। जिन लोगों को बाल झडऩे की समस्या है वह राजमा का सेवन करके अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं।
- इडली स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। अगर आप हेल्दी ब्रेकफास्ट का विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो इडली का चुनाव करना आपके लिए सबसे बेस्ट है। इडली सांभर साउड इंडिया का मशहूर खाना है। देशभर के कई लोग इडली-सांभर को अपने डाइट में शामिल करते हैं। हेल्दी ब्रेकफास्ट के लिस्ट की बात करें, तो इडली-सांभर का नाम सबसे ऊपर आता है। इडली एक स्मार्ट ब्रेकफास्ट है, जो पेट को भरने के साथ-साथ आपको हेल्दी रखने में असरदार होता है। इडली कई तरीके से तैयार की जाती है, लेकिन चावल और रवा इडली का सेवन सबसे अधिक किया जाता है। सांभर और नारियल चटनी के साथ इसका स्वाद कई गुणा भर जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें कई ऐसे गुणकारी पोषक तत्व होते हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाव करते हैं। वजन को कंट्रोल करने से लेकर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में इडली काफी फायदेमंद है।इसमें एमिनो एसिड पाया जाता है, जो हमारे मस्तिष्क से लेकर शरीर के सभी अंग के फंक्शन के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा इसमें फाइबर की अधिकता होती है, जो वजन को कंट्रोल कर पेट की कई समस्याओं से दूर रखता है। इसके अलावा इडली के कई असरकारी फायदे हैं।इडली आपके लिए कितना फायदेमंद है, इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप किन चीजों से तैयार इडली का सेवन करती हैं। अगर आप चावल और दाल से तैयार इडली का सेवन कर रहे हैं, तो यह ज्यादा फायदेमंद है। क्योंकि इस इडली में दाल होती है, जो आपको प्रोटीन प्रदान करती है। साथ ही इसमें कैलोरी की मात्रा भी कम हो जाती है। इसके अलावा अगर आप सूजी से तैयार इडली का सेवन कर रहे हैं, तो चावल और दाल के मुकाबले इसमें कैलोरी थोड़ी बढ़ जाती है। इसके साथ ही इडली का साइज भी इसकी कैलोरी को प्रभावित करता है।चावल और दाल से तैयार इडली-सांभर प्लेट में न्यूट्रीएंश वैल्यू2 मध्यम आकार की इडली में मौजूद पोषक तत्वटोटल कैलोरी - 120 कैलोरीप्रोटीन- 4.52 ग्रामफैट - 0कार्बोहाइड्रेट- 23.47सोडियम - 5.97 ग्राम2 चम्मच नारियल चटनी में मौजूद पोषक तत्वटोटल कैलोरी - 44.4 कैलोरीफैट - 0प्रोटीन- 0.43 ग्रामकार्बोहाइड्रेट- 1.3 ग्रामसोडियम - 01 छोटी कटोरी सांभर में मौजूद पोषक तत्वटोटल कैलोरी - 50.4 कैलोरीफैट - 0प्रोटीन- 0.78 ग्रामकार्बोहाइड्रेट- 1.6 ग्रामसोडियम - 7.4 ग्रामकोलेस्ट्रोल -सूजी से तैयार इडली-सांभर प्लेट में न्यूट्रीएंश वैल्यू2 मध्यम आकार की इडली में मौजूद पोषक तत्वटोटल कैलोरी - 75.6 कैलोरीप्रोटीन- 2.39 ग्रामकार्बोहाइड्रेट- 14.9डाइट्री फाइबर -0सोडियम - 7.4 ग्रामइडली सांभर खाने के फायदे, पचाने में है आसानइडली में मसाला बिल्कुल भी नहीं होता है। इसके साथ ही इसे तैयार करने के लिए इसमें खामीर भी लाया जाता है। इसी गुणों के कारण इडली को पचाना बहुत ही आसान होता है। इसका सेवन हर एक व्यक्ति कर सकता है। इसके सेवन से दिल से जुड़ी हर बीमारी दूर हो सकती है।ब्लड प्रेशर को करें कंट्रोलइडली में सोडियम की अधिकता होती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार होता है। स्वस्थ शरीर के लिए यह फायदेमंद है। अगर आप ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, तो अपने नाश्ते में इडली को जरूर शामिल करें। इससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहेगा।एमिनो एसिड भी है मौजूदइडली में एमिनो एसिड होता है, जो आपके दिमाग के लिए काफी अच्छा होता है। इसके सेवन से दिमाग शांत रहता है। साथ ही यह आपके शरीर में सभी पोषक तत्वों की पूर्ति करता है।प्रोटीन की है अधिकताशरीर में प्रोटीन की कमी होने पर इडली सांभर आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, इडली चावल और उड़द की दाल से तैयार होता है, जिसमें प्रोटीन अच्छी मात्रा में होती है। इसके सेवन से आपके शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होगी।वजन को कर सकता है कंट्रोलनाश्ते में इडली को शामिल करने से आपका वजन कंट्रोल में रह सकता है। क्योंकि इडली में फाइबर की अधिकता होती है। जो लंबे समय तक आपके पेट को भरा रखती है। ऐसे में इसके सेवन से आपका वजन कंट्रोल में रहता है।इडली को आप एक हेल्दी ब्रेकफास्ट के रूप में शामिल कर सकते हैं। रवा और चावल के अलावा इडली कई तरीकों से तैयार की जाती है। आजकल ओट्स इडली, रागी इडली, पोहा इडली, वेजिटेबल इडली इत्यादि का चलन काफी ज्यादा है। ये सभी इडली आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। आप अपने ब्रेकफास्ट में सभी तरह की इडली को शामिल कर सकते हैं। ये सभी आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं।
- गेंदे के ताजे खूबसूरत पीले, लाल और नारंगी फूल किसी का भी मन मोह सकते हैं। गेंदे के फूल आसानी से उगते हैं, इसलिए हर जगह मिल जाते हैं। यही कारण है घर की सजावट करनी हो या हार बनाने हों, गेंदे के फूलों का इस्तेमाल उत्तर भारत में काफी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गेंदे के खूबसूरत फूलों में कई औषधीय गुण भी होते हैं? जी हां, गेंदे के फूलों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से बहुत सारी समस्याओं को ठीक करने में किया जाता रहा है। त्वचा की कई समस्याओं में गेंदे के फूलों का प्रयोग बहुत फायदेमंद पाया गया है। बाजार में भी आपको बहुत सारे ब्यूटी और स्किन प्रोडक्ट्स मिल जाएंगे, जिन्हें गेंदे के फूल या इसके अर्क से बनाया गया हो।मस्से और डील (गुखरू) हटाने के लिएत्वचा पर होने वाले मस्सों और कॉर्न (गुखरू या डील) को आप गेंदे के फूल की मदद से आसानी से हटा सकते हैं। इसके लिए गेंदे के ताजे फूल की कुछ पंखुडिय़ों को पीसकर इसका पेस्ट तैयार करें और इसे मस्से वाली जगह पर लगाएं। इस फूल के पेस्ट या रस को कॉर्न पर लगाने पर भी जल्द ही आपका कॉर्न निकल जाता है और त्वचा सामान्य हो जाती है। बस यह ध्यान रखें कि आप तुरंत परिणाम की आशा न रखें। मस्से या कॉर्न में इसे कम से कम 2 सप्ताह तक रोजाना लगाते रहें।चेहरे के तेल को हटाने के लिएकई बार ऑयली फेस होने के कारण चेहरा बहुत अधिक चमकता रहता है। गेंदे का फूल बेहतरीन नैचुरल ऑयल रिमूवर है। इसके लिए एक कप गर्म पानी में गेंदे के फूल की कुछ पंखुडिय़ां डालें और 10 मिनट के लिए रख दें। अब इस पानी से अपने फेस को कॉटन बॉल की मदद से साफ करें। ये स्किन के लिए बेस्ट स्किन टोनर है, जो पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है। इस पानी से मुंह धोने से दाग-धब्बे और झुर्रियां आदि भी खत्म हो जाते हैं।घाव साफ करने के लिएघाव को साफ करने के लिए एंटीबायोटिक ऑइन्टमेंट या एल्कोहलयुक्त पदार्थों का इस्तेमाल आमतौर पर किया जाता है, ताकि इंपेक्शन न फैले। मगर आप छोटी-मोटी चोट या घाव को देंगे के फूलों की मदद से भी साफ कर सकते हैं, क्योंकि इसमें एंटीबायोटिक गुण होते हैं। इसके लिए गेंदे की पंखुडिय़ों को पीसकर पेस्ट या रस बना लें और फिर इससे रूई की मदद से घाव को साफ करें। ये रस आपके घाव को जल्दी भरने में भी मदद करेगा और नई स्किन टिशूज जल्दी आएंगी।अपच की समस्याबहुत अधिक तेल-मसालेदार खाना खा लेने से अपच की समस्या हो जाती है। ऐसे में गेंदे का फूल काफी मदद कर सकते हैं। इसके लिए उबले हुए पानी में थोड़ी सी ताजी या सूखी हुई गेंदे के फूल की पंखुडिय़ां डालकर 5 मिनट ढंक दें और फिर चाय की तरह छानकर इसके पी लें। इससे पेट से जुड़ी हर समस्या इस चाय से ठीक हो जाएगी।डैंड्रफ दूर भगाएगा गेंदे का फूलगेंदे के फूल का इस्तेमाल बालों की भी कई समस्याओं में कर सकते हैं। डैंड्रफ होने पर आप ऊपर बताए गए तरीके से गेंदे के पंखुड़ी की चाय बनाएं और शैंपू करने के बाद गेंदे के फूल की ठंडी चाय से अपने बालों को धोएं। इसके बाद बालों को तौलिए से सुखाएं। 2-3 बार के प्रयोग से आपके डैंड्रफ की समस्या दूर हो जाएगी।
- सुबह नाश्ते में पोहा आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है। पोहा को आप एक बेहतरीन ब्रेकफास्ट के रूप में अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है अगर आप पोहे को हेल्दी तरीके से बनाते हैं। अगर आप पोहा में तरह-तरह की सब्जियों को मिक्स करके तैयार करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। आप पोहा में जितनी सब्जियों को मिक्स करेंगे, वह आपके लिए उतना ही ज्यादा फायदेमंद होगा।किस तरह तैयार करें पोहा?आवश्यक सामग्री2 कटोरी पोहा1 सामान्य आकार का आलूआधी कटोरी कटी हुई गोभीआधी कटोरी मटर2 बड़े चम्मच मूंगफली1 चम्मच आनार दाना2 चम्मच सेव के नमकीनहटा धनिया1 नींबू1 चुटकी हल्दी2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई1 सामान्य आकार की बारीक कटी हुई प्याज1 चुटकी राई1 चम्मच सरसो का तेलस्वानुसार नमकपोहा बनाने की विधिसबसे पहले पोहा को भिगो दें। अब एक कढ़ाई में सरसो का तेल डालें। तेल गर्म होने पर इसमें राई डालें। अब इसमें हरी मिर्च और प्याज डालें और इसे भुनें। प्याज जब हल्का का भूरा हो जाए, तो इसमें आलू, गोभी, मटर मिक्स करें। अब इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। इसके बाद सब्जी को अच्छे से भुनें। इसके बाद इसमें हल्दी डालें। फिर भुनने के बाद इसमें पोहा डाल लें। 5 मिनट तक इसे पकाएं और गैस बंद कर दें। अब 1 कढ़ाही में मूंगफली फ्राई करें और इसे पोहे में डालकर मिक्स करें। अब हरा धनिया काटकर इसमें डालकर फिर से मिक्स करें। अब इसे प्लेट में सर्व करें। सजाने के लिए 1 चम्मच अनार दाना, कटी हुई कच्ची प्याज और सेव नमकीन का इस्तेमाल करें। आपका हेल्दी और स्वादिष्ट पोहा तैयार है।पोहा खाने के फायदेगर्भवती महिलाओं के लिए ब्रेकफास्ट में पोहा शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि इसमें आयरन की प्रचुरता होती है, तो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो होने नहीं देती है। इसके साथ ही यह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी फायदेमंद है।ऊर्जावान बनाता है पोहाब्रेकफास्ट में पोहा को शामिल करने से आपके शरीर को भरपूर रूप से कार्बोहाइट्रेड मिलता है। जिससे आपका पूरा दिन एनर्जेटिक रहता है। शरीर को पर्याप्त रूप से कार्बोहाइट्रेड मिलने से शरीर में किसी तरह की थकान महसूस नहीं होती है और आप दिनभर के काम से थकते नहीं है।वजन करे कमपोहा खाने आपके शरीर का मोटापा बढ़ता नहीं है। क्योंकि पोहे में कैलोरी की मात्रा कम होती है। इसमें वे सभी विटामिंस और प्रोटीन होते हैं, जो आपके शरीर के लिए जरूरी है।
- अक्सर लोग फूलगोभी की सब्जी बनाकर उसके डंठलों को फेंक देते हैं जबकि इसके डंठल में ढेर सारे गुण होते हैं और छत्तीसगढ़ में इसकी स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है।फूलगोभी के डंठल में लो-कैलोरी, लो-सोडियम होता है, साथ ही ये कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।- फूलगोभी के डंठल में कैलोरीज की मात्रा कम और विटामिन्स की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। इसके अलावा इसमें फाइबर, पोटेशियम, प्रोटीन, मैगनीशियम आदि भी भरपूर मात्रा में होते हैं। डंठलों में विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, मिनरल आदि भरपूर मात्रा मिलते हैं। यह सभी पोषक तत्व शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।विटामिन ए से भरपूरफूलगोभी के डंठल सब्जी बनाने के बाद फेंकने नहीं चाहिए। यह विटामिन ए से भरपूर होते हैं। इन डंठलों को सब्जी, सलाद या सूप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।डायबिटीज करे कंट्रोलजिन लोगों को शुगर की समस्या होती है, उनके लिए फूलगोभी के डंठल बहुत फायदेमंद होते हैं। ये डंठल शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं।पाचन शक्ति को बढ़ाएगागोभी के डंठल पाचन शक्ति को बढ़ाने का काम करते हैं। इसके लिए आप इन्हें हफ्ते एक दो बार बना सकते हैं।आंखों की रोशनी के लिएडंठल में विटामिन ए होता है जो आंखों की रोशनी को ठीक रखता है। जो लोग इन डंठलों का सेवन नियमित करते हैं उन्हें आंखों की समस्याएं कम होती हैं।टीबी की बीमारी में मददगारकई बीमारियों का रक्षाकवच फूलगोभी के डंठल टीबी की बीमारी को ठीक करने का अच्छा जरिया हैं।हाई बीपी के लिए अच्छा हैविशेषज्ञों के अनुसार फूलगोभी के डंठल हाई बीपी के लिए बहुत फायदेमंद होता है। हाई बीपी को डंठल नियंत्रित करते हैं।वजन घटाने में मददागारफूलगोभी के डंठल में कम कार्बोहाइड्रेट, कम कैलोरी होती हैं जो वजन को कम करने के लिए मददगार होते हैं।हड्डियों की मजबूतीफूलगोभी के डंठल में विटामिन के पाया जाता है जो हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद है। अगर किसी को फ्रैक्चर आ गया है तो इसके सेवन से वह ठीक हो सकता है।सूजन को करे कमफूलगोभी के डंठल का अधिक फायदा लेने के लिए जरूरी है कि इसे बहुत अधिक न पकाएं। इसको आधा ही पकाएं। फूलगोभी में फ्लेवोनोइड पाया जाता है जो शरीर में सूजनन को कम करने काम करता है। इसलिए अगर इसे कम पकाएंगे तो फ्लेवोनोइड की मात्रा कम नहीं होगी।हार्मोन्स के लिए फायदेमंदफूलगोभोगी के डंठल का सेवन करने से असंतुलित हार्मोन्स को संतुलित किया जा सकता है। ऐसे में असंतुलित हार्मोन से जुड़ी बीमारियों से निजात मिल सकती है।
- किशमिश यानी सूखे हुए अंगूर स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। अगर आप भी रोज नट्स और किशमिश खाते हैं, तो अच्छी बात है। मगर क्या आपको पता है कि अगर आप किशमिश को रात में भिगोकर खाते हैं, तो यह ज्यादा फायदेमंद हो जाता है। अगर आप रोजाना सिर्फ 10 किशमिश के दानों को रात में भिगोकर सुबह खाएं, तो इससे कई तरह के रोगों और बीमारियों से बचाव होगा। भीगी हुई किशमिश में आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम और फाइबर भरपूर होता है। इसमें मौजूद शुगर प्राकृतिक होती है इसलिए सामान्यत: इसका कोई नुकसान नहीं होता है मगर डायबीटीज के मरीजों को किशमिश नहीं खानी चाहिए।रात में भीगी हुई किशमिश खाने और इसका पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स के कारण इम्यूनिटी बेहतर होती है जिससे बाहरी वायरस और बैक्टीरिया से हमारा शरीर लडऩे में सक्षम होता है और ये बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।किशमिश यानी मुनक्का पाचन तंत्र में बेहद फायदेमंद है। मिनरल्स की मात्रा काफी होती है। यह हड्डियों के लिए काफी अच्छा होता है। दिनभर में 10-12 किशमिश ली जा सकती हैं। एक बात हमेशा ध्यान रखें कि भीगी हुई किशमिश में कैलरी की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि इसे ज्यादा मात्रा में न लें। इसे नियमित अपने आहार में शामिल करने से डाइजेशन में आराम मिलता है। असल में यह फाइबर से भरपूर होता है।कब्ज दूर करती है किशमिशकिशमिश खाने से कब्ज में बहुत फायदा मिलता है। इसे पानी में भिगाकर खाने से कब्ज दूर होती है। अगर आपको कब्ज, एसिडिटी और थकान की समस्या है, तो यह काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से जल्द आपको फायदा नजर आएगा।खून की कमी दूर करने के लिएकिशमिश में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है जिससे खून की कमी नहीं होती। आप में अगर खून की कमी है तो आप 7-10 किशमिश का सेवन रोजाना कर सकते हैं।ब्लड प्रेशर की समस्यायदि आपके घर में किसी को उच्च रक्तचाप की समस्या है तो रात को आधे गिलास पानी में 8-10 किशमिश भिगो दें। सुबह उठकर बिना कुछ खाएं किशमिश के पानी को पी लें। आप चाहें तो भीगी हुई किशमिश को खा भी सकते हैं। इससे कुछ दिन में उच्च रक्तचाप की समस्या में आराम मिलेगा।लिवर को सेहतमंद रखता हैप्रतिदिन किशमिश के पानी का सेवन करना आपके लिवर को सेहतमंद बनाए रखने और उसे सुचारू रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करने का काम भी करता है। साथ ही आपके मेटाबॉलिज्म के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक है।वजन बढ़ाने में मददगारअगर आप अंडरवेट हैं और अपने वजन को बढ़ाना चाहते हैं, तो किशमिश आपकी मदद कर सकती है। किशमिश फ्रुक्टोज से भरपूर होती है, जो शरीर का वजन बढ़ाने में मदद कर सकती है।
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घुटनों या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो खाने में लाल मिर्च का इस्तेमाल बढ़ाना आपके लिए खासा फायदेमंद साबित हो सकता है। ब्रिटेन स्थित द आर्थराइटिस फाउंडेशन ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर यह सलाह दी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक लाल मिर्च में कैप्सेसिनॉयड नाम का प्राकृतिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह जोड़ों में सूजन की शिकायत को दूर कर नसों में खून के प्रवाह को सुचारु बनाता है। इससे गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस में होने वाली तकलीफ में काफी राहत मिलती है।
शोधकर्ताओं की मानें तो कैप्सेसिनॉयड पाचन तंत्र दुरुस्त रखने में भी कारगर है। इसके नियमित सेवन से मोटापे से भी निजात मिलती है। अध्ययन में जोड़ों का दर्द भगाने के लिए हल्दी का सेवन बढ़ाने की भी सलाह दी गई है। दरअसल, इसमें मौजूद कक्र्युमिन हड्डियों को मजबूत बनाकर दर्द के एहसास में कमी लाता है। -
लोग सर्दियों में अपनी सेहत का ख्याल रखते हैं लेकिन जाती हुई सर्दियों को अनदेखा करते हुए लापरवाही करने लगते हैं, जिससे खांसी-जुकाम जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कभी-कभी तो खांसी इतनी बढ़ जाती है कि इसे ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं। आज हम आपको काली मिर्च के ऐसे नुस्खे बता रहे हैं जो जाती हुई सर्दियों में न सिर्फ आपकी खांसी-जुकाम को ठीक कर देगी बल्कि इससे इस्तेमाल से कई फायदे हैं। काली मिर्च में पैपरीन नामक तत्व पाया जाता है। यह तत्व औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक, क्रोमियम, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
काली मिर्च के कारगर उपाय ------
-आप सर्दी-जुकाम से परेशान हैं तो काली मिर्च को गर्म दूध में मिला कर लें।
-बार-बार जुकाम होता है, तो 15 दिन तक एक-एक काली मिर्च बढ़ाते हुए उसका सेवन करें। उसके बाद 15 दिन तक एक-एक घटाते हुए लें। इससे बार-बार होने वाली जुकाम की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
-कफ बनता है तो एक चम्मच शहद में 2-3 बारीक कुटी काली मिर्च के साथ एक चुटकी हल्दी मिला कर उसका सेवन करें।
-अगर आप लगातार खांसी से परेशान हैं, तो काली मिर्च के 4-5 दानों के साथ किशमिश के 15 दाने चबाने से आराम मिलेगा।
-अगर गला बैठ गया है और गले से खरखराहट भरी आवाज निकल रही है तो काली मिर्च को घी व मिश्री के साथ मिला कर खाएं। गला ठीक हो जाएगा।
-फेफड़े और सांस नलियों में संक्रमण है तो काली मिर्च और पुदीने की चाय का सेवन कर सकते हैं।
-खांसी से परेशान हैं तो काली मिर्च के पाउडर को गुड़ में मिला कर उसकी गोलियां बना कर सेवन करें। जल्दी आराम मिलेगा।
-पेट में गैस की समस्या है तो एक कप पानी में आधा नीबू का रस, आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर व आधा चम्मच काला नमक मिला कर पिएं।
-उल्टी-दस्त होने पर काली मिर्च का सेवन फायदेमंद है। इसके लिए काली मिर्च, हींग व कपूर को पांच-पांच ग्राम लेकर मिला लें। उसके बाद राई के बराबर छोटी----छोटी गोलियां बना लें। इन गोलियों का हर 3 घंटे बाद सेवन करें।
-पेट में कीड़ों की समस्या है, तो काली मिर्च को किशमिश के साथ 2-3 बार चबा कर खा जाएं। एक गिलास छाछ में थोड़ी-सा काली मिर्च का पाउडर मिला कर पीने से भी पेट के कीड़े मर जाते हैं।
-बदहजमी होने पर कटे हुए नीबू का आधा टुकड़ा लें, बीज निकाल लें। इसमें काला नमक व काली मिर्च भर कर गर्म करके चूसें।
-काली मिर्च उनके लिए भी बहुत उपयोगी है, जिनकी आंखें कमजोर हैं। काली मिर्च को पीस कर उसके पाउडर को देशी घी के साथ मिला कर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
-दांतों में होने वाले रोग पायरिया से परेशान हैं और दांत कमजोर हैं तो काली मिर्च को नमक के साथ मिला कर दांतों पर लगाएं।
-याददाश्त कमजोर है तो काली मिर्च को शहद में मिला कर खाएं। - चीकू का सेवन शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है. चीकू में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद साबित होते हैं. इसका सेवन करने से अग्नाशय मजबूत होने के साथ शरीर की इम्युनिटी भी मजबूत होती है. चीकू का नियमित सेवन करने से मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत रहती हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के चपेट में आने का खतरा कम हो जाता है.कैंसर से बचाने में मददगारचीकू कैंसर से बचाने में मददगार होता है. चीकू में विटामिन ए और बी, आयरन, कैल्शियम, फाइबर, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. इसका नियमित सेवन शरीर में कैंसर की कोशिकाएं पनपने से रोकता है.चीकू आंखों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें विटामिन ए होने से आंखों की रोशनी बढ़ने के साथ इससे जुड़ी बीमारियों से बचाव रहता है. इसलिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए चीकू खाने की सलाह दी जाती है.चीकू एक टेस्टी और गुणों से भरपूर फल है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोजाना एक चीकू खाने से सेहत के साथ खूबसूरती भी बरकरार रहती है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.इस भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग तनाव में रहते हैं. ऐसे में चीकू का सेवन करने से मन को शांति मिलती है. इसका सेवन करने से अच्छी नींद भीआती है.अगर आपको जुकाम की शिकायत है तो चीकू का सेवन करें. सर्दियों में मौसम में चीकू सर्दी-खांसी जैसी तमाम परेशानियों से राहत दिला सकता है. इसका सेवन करने से कफ और बलगम नाक के रास्ते बाहर निकल जाता है. जिससे सांस लेने में राहत मिलती है.चीकू का सेवन कर आप वजन घटा सकते हैं. इसके साथ ही ये कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है और साथ ही इसमें विरेचक का भी गुण पाया जाता है. यही वो गुण हैं, जिनके कारण चीकू कब्ज को दूर भगाता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है.
- आपने दालचीनी का नाम जरूर सुना होगा। आमतौर पर लोग दालचीनी का प्रयोग केवल मसालों के रूप में ही करते हैं, क्योंकि लोगों को दालचीनी के फायदे के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। आयुर्वेद में दालचीनी को एक बहुत ही फायदेमंद औषधि के रूप में बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार, दालचीनी के इस्तेमाल से कई रोगों का इलाज किया जा सकता है।दालचीनी के फायदे- दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र संबंधी विकार, दांत, व सिर दर्द, चर्म रोग, मासिक धर्म की परेशानियां ठीक की जा सकती हैं।-हिचकी आना बहुत ही साधारण सी बात है, लेकिन कई ऐसे भी लोग होते हैं, जिन्हें हमेशा हिचकी आने की शिकायत रहती है। ऐसे लोग दालचीनी का उपयोग कर सकते हैं। दालचीनी के 10-20 मिली काढ़ा को पिएं। इससे आराम मिलता है।-500 मिग्रा शुंठी चूर्ण, 500 मिग्रा इलायची, तथा 500 मिग्रा दालचीनी को पीस लें। भोजन के पहले सुबह-शाम लेने से भूख बढ़ती है।-दालचीनी का प्रयोग उल्टी रोकने के लिए भी किया जाता है। दालचीनी, और लौंग का काढ़ा बना लें। 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से उल्टी पर रोक लगती है।- अनेक लोग बराबर शिकायत करते हैं कि उनकी आंखें फड़कती रहती हैं। दालचीनी का तेल आंखों के ऊपर (पलक पर) लगाएं। इससे आंखों का फड़कना बन्द हो जाता है, और आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।-दांत दर्द होने पर दालचीनी के तेल को रूई से दांतों में लगाएं। इससे आराम मिलेगा। दालचीनी के 5-6 पत्तों को पीसकर मंजन करें। इससे दांत साफ, और चमकीले हो जाते हैं।-अगर आप सिर दर्द से परेशान रहते हैं, तो दालचीनी का सेवन करें। दालचीनी के 8-10 पत्तों को पीसकर लेप बना लें। दालचीनी के लेप को मस्तक पर लगाने से ठंड, या गर्मी से होने वाली सिर दर्द से आराम मिलता है। आराम मिलने पर लेप को धोकर साफ कर लें।-दालचीनी के तेल से सिर पर मालिश करें। इससे सर्दी की वजह से होने वाले सिरदर्द से आराम मिलती है।- आप तंत्रिका-तंत्र संबंधी परेशानियों के लिए दालचीनी के तेल को सिर पर लगाएं। इससे फायदा होता है।-दालचीनी को पानी में घिस कर, गर्म कर लें, और लेप के रूप में लगाएं। इससे जुकाम में फायदा होता है।-खांसी के इलाज के लिए दालचीनी का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। खांसी से परेशान रहने वाले लोग आधा चम्मच दालचीनी के चूर्ण को, 2 चम्मच मधु के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे खांसी से आराम मिलता है।-एक चौथाई चम्मच दालचीनी के चूर्ण में 1 चम्मच मधु को मिला लें। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से खांसी, और दस्त में फायदा होता है।-पेट से संबंधित कई तरह के रोगों में दालचीनी बहुत ही फायदेमंद होती है। 5 ग्राम दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला लें। इसे दिन में 3 बार सेवन करें। पेट के फूलने की बीमारी ठीक होती है।- 5 ग्राम दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला लें। इसे दिन में 3 बार सेवन करें। इससे दस्त में फायदा होता है।( नोट- ये प्रयोग किसी चिकित्सक की सलाह पर ही करें)
- भारत में सदियों से गुड़ और चना साथ में खाने की परंपरा चली आ रही है। कभी भगवान के भोग के रूप में , तो कभी छोटी -छोटी भूख के लिए गुड़ और चने का सेवन हम करते आए हैं। यदि गुड़ चना एक साथ चबा-चबाकर नहीं खा पाते हैं, तो चना को पीस लें और उसमें गुड़ मिलाकर रोटी के साथ खाएं...अलग स्वाद मिलेगा। आज हम जानेंगे गुड़, चना खाने के फायदे...गुड़़-चना खाने के फायदे1. आयरन का अच्छा स्रोतगुड़ में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। जो महिलाओं में खून की कमी को पूरा करता है। काला चना अगर रात में भिगोकर सुबह खाते हैं तो प्रचुर मात्रा में आयरन मिलता है। इसके बाद आपको आयरन की गोलियां खाने की जरूरत नहीं पड़ती। गुड़ और चना दोनों साथ भी खाए जा सकते हैं। एक मुट्ठी फुटा चना रोज खाएं।2. मोटापा कम करता हैचने में फैट को कम करने वाले मॉलिक्यूल्स होते हैं। जिनसे वजन कम होता है। इसके अलावा चने में आयरन, विटामिन-बी जैसे पोषक तत्व होते हैं। जो महिलाओं की सेहत के लिए फायदेमंद हैं।3. यूटीआई इंफेक्शन से छुटकारामहिलाओं में अक्सर यूटीआई इंफेक्शन की शिकायत होती रहती है। गुड़ और चना खाने से इस शिकायत से बचा सकता है। चने में संक्रमण और गंदा पानी सोखने की क्षमता होती है। जिससे महिलाओं में संक्रमण ठीक होता है।4. पाचन में मददगारघर में रहने के कारण महिलाएं की फिजिकल एक्टिविट बहुत कम हो जाती है। जिससे उनके शरीर का वजन तो बढ़ता ही है साथ ही पाचन भी बिगड़ता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए भुने हुए चने में प्याज, लहसुन और हल्का नमक डालकर खाने से पाचन ठीक रहता है। गुड़ भी इसके बाद खाया जा सकता है। इसके अलावा फुटा चना खाने से हड्डियां भी मजबूत होती हैं।5. मेंस्ट्रूअल हेल्थ को बेहतर बनाएगुड़ चना महिलाओं की माहवारी में सहायक होता है। माहवारी का साइकल ठीक रखता है। ऑस्ट्रोजन को ठीक रखता है। मासिक धर्म के दौरान बहुत से हार्मोन रक्त के साथ बह जाते हैं, ऐसे में गुड़ चना उन्हें बनाने में सहायक होता है।6. लिवर को रखें हेल्दीलिवर के मरीज को 15 दिन तक भूने फुटे चने खाने की सलाह दी जाती है, इससे उनकी रिकवरी जल्दी होती है।7. आंखों की रोशनीरात को चने भिगोकर सुबह खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।8. बच्चों के लिए सहायकछोटे बच्चों की लंबाई कुपोषण के कारण बढ़ नहीं पाती। पेट में कीड़े हो जाते हैं, जिससे कोई भी भोजन उनको फायदा नहीं पहुंचाता, लेकिन चने खाने से पाचन ठीक होता है। गुड़ सपोर्ट में होता है।9. दिल की बीमारियों से राहतगुड़-चना खाने से दिल की बीमारियों से राहत मिलती है। गुड़ चने में पोटेशियम पाया जाता है जो हार्ट अटैक के खतरे को रोकता है।10. छिलके वाला चना खाएंअक्सर लोग चने का छिलका निकाल देते हैं, लेकिन छिलका उतारने से चने के पोषक तत्व आधे हो जाते हैं। चने के छिलके में क्लोरोफिल होता है, जो सेहत को बेहतर रखता है। इसलिए आज से अपनी डाइट में गुड़, चना जरूर रखें।
- हमारे घरों में पाया जाने वाला औषधीय गुणों से भरपूर मसाला है लौंग। खाने की खूशबू और स्वाद बढ़ाने के लिए भारतीय व्यंजनों में बड़ी मात्रा में लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। एंटीऑक्सिडेंटऔर एंटीबैक्टीरियल खूबियों से भरपूर लौंग, हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करती है। साथ ही लिवर को हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है और पेट के अल्सर को भी कम करने में सहायक है।आज जानिये छोटी सी यह लौंग क्या-क्या कमाल दिखाती है....फाइबर और मैंगनीज से भरपूर लौंगछोटी सी दिखने वाली इस लौंग की तासीर गर्म होती है और इसलिए लौंग खाने से शरीर में गर्मी आती है। खासकर दांत के दर्द के लिए तो लौंग को रामबाण की तरह माना जाता है। 1 चम्मच यानी करीब 2 ग्राम लौंग में 1 ग्राम फाइबर , 1 ग्राम काब्र्स, 6 कैलोरी, रोजाना की जरूरत का 55 प्रतिशत मैंगनीज और 2 प्रतिशत विटामिन के होता है। हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही ब्रेन फंक्शन को बेहतर बनाने के लिए भी मैंगनीज को जरूरी खनिज के रूप में जाना जाता है।लौंग के अन्य फायदे...1. कैंसर से सुरक्षा- कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि लौंग में ऐसे कई कंपाउंड्स पाए जाते हैं जो कैंसर से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। एक स्टडी में यह बात साबित हुई कि लौंग ट्यूमर के ग्रोथ को रोककर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की प्रक्रिया को बढ़ाता है। लौंग में पाया जाने वाला यूजेनॉल एंटीकैंसर प्रॉपर्टी है। हालांकि बहुत अधिक मात्रा में लौंग का सेवन नुकसानदेह भी हो सकता है।2. पेट के अल्सर में कमी- कई रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि लौंग में पाया जाने वाला कंपाउंड्स पेट के अल्सर के इलाज में मदद करता है। पेट के अल्सर को पेप्टिक अल्सर भी कहते हैं और लौंग में पाया जाने वाला तेल गैस्ट्रिक म्यूकस को बढ़ाता है जिससे अल्सर के इलाज में मदद मिलती है।3. ब्लड शुगर कंट्रोल- रिसर्च की मानें तो लौंग में पाया जाने वाला कंपाउंड ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने में फायदेमंद है। लौंग का अर्क डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर को बढऩे से रोकने में मदद करता है। संतुलित भोजन के साथ ही लौंग का सेवन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में फायदेमंद हो सकता है।4. लिवर के लिए- लौंग में पाया जाने वाला यूजेनॉल लिवर के लिए भी काफी फायदेमंद है और फैटी लिवर की बीमारी होने से रोकता है। साथ ही लौंग में एंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं जो लिवर के लिए लाभदायक हैं।5. पुरुषों के लिए फायदेमंद- एक्सपट्र्स की मानें तो लौंग का सेवन पुरुषों में कई तरह की सेक्शुअल दिक्कतों को दूर करता है और स्पर्म काउंट बढ़ाने में भी मदद करता है।---
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सहजन यानि मुनगा बेशक आपकी टॉप सब्जियों की लिस्ट में जगह नहीं बना पाए लेकिन गुणों के मामले में सहजन किसी से कम नहीं है. सहजन यानी ड्रमस्टिक का इस्तेमाल सांबर में सबसे ज्यादा किया जाता है. 2008 में इसे 'प्लांट ऑफ दी ईयरÓ भी कहा गया था। कुछ जगहों पर इसे मुगना, , सुजना या सेंजन भी कहते हैं। आपको किसी न किसी रूप में सहजन का सेवन जरूर करना चाहिए. आइए, जानते हैं सहजन के फायदे-
हमारे शरीर के लिए अच्छी है बल्कि इसका पेड़ पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा होता है।
ये हमारे शरीर के पोषण की कई जरुरतों को पूरा करता है और कई बीमारियों के इलाज में भी कारगर है।
इसके एक नहीं अनेक फायदे हैं जैसे ये कैंसर, डायबिटीज, एनीमिया, गठिया, एलर्जी, अस्थमा, पेट दर्द या पेट की दूसरी परेशानियां, कब्ज, सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, पथरी, थाइरॉयड, किसी अन्य तरह का इंफेक्शन या शरीर के किसी हिस्से में आई सूजन को दूर करने में ये बहुत कारगर है।
इसके साथ ही अगर आप बढ़ते वजन से परेशान है, तो अपने आहार में ड्रमस्टिक्स को शामिल करें, मोटापे की परेशानी दूर होगी।
इसमें केले से कई गुना ज्यादा पोटेशियम, गाजर से कई गुना ज्यादा विटामिन ए, दूध से ज्यादा कैल्शियम और दही से दोगुना प्रोटीन होता है।
विटामिन ए, बी, सी और बी-कॉम्प्लेक्स के साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट, प्रोटीन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
दांतों के कीड़े, पथरी की समस्या, ब्लड प्रेशर, मुंहासे, मोटापा आदि समस्याओं के समाधान के लिए सहजन का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। -
अब तक आपने अदरक या फिर दूसरी तरह की चाय का सेवन किया होगा, लेकिन आज हम आपको लहसुन की चाय के अद्भुत फायदों के बारे में बता रहे हैं। लहसुन की चाय के बारे में सुनकर आपको भले ही अजीब सा लगे, लेकिन यह सच है कि यह चाय काफी फायदेमंद है। दरअसल, लहसुन में जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं। यह चाय एक शक्तिशाली एंटीबायोटिक ड्रिंक है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम में सुधार करता है। इस चाय को औषधीय काढ़ा भी कहा जा सकता है।
लहसुन की चाय के फायदेलहसुन की चाय डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होती है। इससे शरीर में ब्लड शुगर लेवल कम होता है। साथ ही मेटाबॉलिज्म की स्थिति में मदद करती है।वजन घटाएलहसुन की चाय से आप अपना वजन कम कर सकते हैं। ये चाय आपके शरीर के ज्यादातर हिस्सों में वसा को घोलने का काम करती है। इसमें चयापचय बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं, जो वजन घटाने का काम करते हैं।दिल की सेहत सुधारेलहसुन की चाय दिल की सेहत में भी सुधार कर सकती है। इसका सेवन करने से रक्त परिसंचरण में सुधार होता है, ये खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करती है। जिससे दिल के रोगों से बचा जा सकता है।श्वसन संबंधी बीमारियों में लाभप्रदलहसुन की चाय श्वसन संबंधी बीमारियों से बचा सकती है। इसका सेवन सर्दियों में बुखार खांसी को ठीक करने के लिए भी कर सकते हैं।सूजन कम करेलहसुन की चाय शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाली सूजन भी कम करने का काम करती है।कैसे बनाएं लहसुन की चायअब हम आपको लहसुन की चाय बनाने का तरीका बता रहे हैं। एक बर्तन में एक कप पानी उबालें.।थोड़ी देर बाद लहसुन को कूटकर डाल दें। इसके साथ ही एक चम्मच काली मिर्च डाल दें और फिर पांच मिनट तक चाय को उबलने दें.। पांच मिनट बाद गैस बंद कर दें और चाय को किसी बर्तन में छान लें। इसे गर्मागर्म सेवन करें। आप चाहें तो लहसुन की चाय में थोड़ा अदरक और दालचीनी भी मिला सकते हैं। जिससे कि स्वास्थ्य लाभ में सुधार हो सके और चाय स्वाद भी बढ़ सके। - यष्टिमधु या मुलहठी (लैटिन में Glycyrrhiza glabra) एक प्रसिद्ध और सर्व-सुलभ जड़ी है। स्वाद में मीठी होने के कारण इसे यष्टिमधु कहा जाता है । हिंदी में इसे - मुलहठी , संस्कृत में यष्टीमधु, बंगाली में यष्टिमधु, गुजराती में जेठोमधु, अंग्रेजी में लाहकोरिस रुट, पंजाबी में मुलहठी, अरबी में असलुस्सूस, तेलगु में यष्टिमधुकम, मराठी में जेष्टिमध, फारसी में बिखेमहक।मुलहठी खांसी, जुकाम, उल्टी व पित्त को बंद करती हैं। मुलहठी की अम्लता (लवण) में कभी व क्षतिग्रस्त व्रणों(जख्मों) में सुधार लाता हैं। अम्लोत्तेजक पदार्थ को खाने पर होने वाली पेट की जलन, और दर्द को ठीक करता हैं। पेप्टिक अल्सर तथा इससे होने वाली खून की उल्टी में मुलहठी अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं। मुलहठी का कड़वी औषधियों का स्वाद बदलने के लिये काम में लिया जाता हैं। मुलहठी अंखों के लाभदायक, वीर्यवर्धक, बालों, आवाज सुरीला बनाने वाली, सूजन में लाभकारी हैं। मुलहठी विष, खून की बीमारियों, प्यास और क्षय (टी.बी.) को समाप्त करती हैं।सामान्यतया मुलहठी ऊंचाई वाले स्थानों पर ही होती है । भारत में जम्मू-कश्मीर, देहरादून, सहारनपुर तक इसे लगाने में सफलता मिली है । वैसे बाजार में अरब, तुर्किस्तान, अफगानिस्तान से आई मुलहठी ही सामान्यतया पाई जाती है । पर ऊंचे स्थानों पर इसकी सफलता ने वनस्पति विज्ञानियों का ध्यान इसे हिमालय की तराई वाले खुश्क स्थानों पर पैदा करने की ओर आकर्षित किया है । बोटानिकल सर्वे ऑफ इण्डिया इस दिशा में मसूरी, देहरादून फ्लोरा में इसे खोजने और उत्पन्न करने की ओर गतिशील है । इसी कारण अब यह विदेशी औषधि नहीं रही ।मुलहठी में मिलावट बहुत पाई जाती है । मुख्य मिलावट वेल्थ ऑफ इण्डिया के वैज्ञानिकों के अनुसार मचूरियन मुलहठी की होती है। एक अन्य जड़ जो काफी मात्रा में इस सूखी औषधि के साथ मिलाई जाती है, व्यापारियों की भाषा में एवस प्रिकेटोरियम (रत्ती, घुमची या गुंजा के मूल व पत्र) कहलाती है ।असली मुलहठी अन्दर से पीली, रेशेदार और हल्की गंध वाली होती है । ताजा मुलहठी में 50 प्रतिशत जल होता है जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत रह जाता है । इसका प्रधान घटक जिसके कारण यह मीठे स्वाद की होती है, ग्लिसराइजिन होता है जो ग्लिसराइजिक एसिड के रूप में विद्यमान होता है । यह साधारण शक्कर से भी 50 गुना अधिक मीठा होता है । यह संघटक पौधे के उन भागों में नहीं होता जो जमीन के ऊपर होते हैं । विभिन्न प्रजातियों में 2 से 14 प्रतिशत तक की मात्रा इसकी होती है । ग्लिसराइजिन के अतिरिक्त इसमें आएसो लिक्विरिटन (एक प्रकार का ग्लाइकोसाइड स्टेराइड इस्ट्रोजन) (गर्भाशयोत्तेजक हारमोन), ग्लूकोज (लगभग 3.5 प्रतिशत), सुक्रोज (लगभग 3 से 7 प्रतिशत), रेसिन (2 से 4 प्रतिशत), स्टार्च (लगभग 40 प्रतिशत), उडऩशील तेल (0.03 से 0.35 प्रतिशत) आदि रसायन घटक भी होते हैं ।मुलहठी का पीला रंग ग्लाइकोसाइड-आइसोलिक्विरिटन के कारण है । यह 2.2 प्रतिशत की मात्रा में होता है एवं मुख में विद्यमान लार ग्रंथियों को उत्तेजित कर भोज्य पदार्थों के पाचन में सहायक सिद्ध होता है। मुलहठी का उत्पत्ति स्थान अफगान प्रदेश होने के कारण सामान्यतया वहीं की भाषा में इसे रब्बुस्सू नाम से पुकारते हैं ।---
- कभी कभी हम कुछ न कुछ ऐसा खा लेते हैं जिससे हमारा पेट खराब हो जाता है। वहीं, कभी-कभी कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें खाने के बाद हमें एहसास होता है कि ये चीजें सेहत के साथ स्किन के लिए भी ठीक नहीं है। खासतौर पर किसी फेस्टिवल या पार्टी में हम कुछ ज्यादा खा लेते हैं ऐसे में बॉडी डिटॉक्स करके हम काफी हद तक समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। जानिए डिटॉक्सीफिकेशन के कुछ नेचुरल तरीके-डिटॉक्सिफिकेशन क्या है और क्यों है जरूरीगंदगी सिर्फ हमारे आसपास ही मौजूद नहीं होती है, बल्कि यह हमारे शरीर में भी होती है। इसके कारण ही कई प्रकार की बीमारियां जैसे- तनाव, अनिद्रा, कोल्ड एंड फ्लू, अपच, वजन बढऩा आदि होने लगती हैं। समय रहते इनका उपचार न किया जाए, तो ये सामान्य बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए इन सामान्य लक्षणों को जानकर इनका उपचार करना जरूरी है। शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त करवाना, पोषण देना और आराम पहुंचाना डिटॉक्सिफिकेशन कहलाता है।डिटॉक्सिफिकेशन के दौरान शरीर से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं और शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे किडनी, त्वचा, फेंफड़े, आंत आदि स्वस्थ रहते हैं। शरीर को डिटॉक्स करने के लिए आपको कुछ खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन करना बहुत जरूरी होता है। डिटॉक्स, शरीर और दिमाग को स्वस्थ और तरोताजा रखने की प्रक्रिया है। इससे मानसिक तनाव और दूसरे विकार दूर भागते हैं और नई ऊर्जा का संचार होता है। इन कारणों से सप्ताह में एक बार जरूर बॉडी को डिटॉक्स करना चाहिए।नींद पूरी करें7 से 8 घंटे की नींद आपकी सेहत के लिए बेहद जरुरी है। दिवाली के दौरान हम सो नहीं पाते, ऐसे में सेहत पर इसका असर पड़ता है। नींद बॉडी डिटॉक्सीफिकेशन के लिए बेहद जरुरी है।वर्कआउट करेंएक्सरसाइज का मतलब जिम जाना और भारी वजन उठाना या कार्डियो करना नहीं है। आप स्पीड वाकिंग, साइकिल चलाने या घर पर दस मिनट की बॉडीवेट एक्सरसाइज की तरह कुछ हल्के-फुल्के वर्कआउड कर सकते हैं।फल खाएंविटामिन और मिनरल जहां कोशिकाओं के निर्माण के लिए बहुत जरुरी है। साथ ही फलों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं, इसलिए मिठाईयों के बाद जमकर फल खाने चाहिए।भरपूर मात्रा में पानी पिएंपानी आपके शरीर से सभी अतिरिक्त फैट और शुगर को बाहर निकालने में मदद करता है और आपके पेट पर्याप्त रूप से साफ करता है। आपको दिन भर में 2 लीटर पानी पीना चाहिए।हरी सब्जियां खाएंहरी सब्जियां शरीर के लिए बहुत जरुरी है। आप हरी सब्जियों को पकाने की बजाय उबालकर खा सकते हैं, इससे शुगर और फैट कम हो जाएगा।
- बचपन में इमली के बीजों से पचीसा सबने खेला होगा। यहीं नहीं घी में भूनकर और इसमें नमक डालकर सुपारी की तरह इसके मजे भी लिए होंगे। अब घरों में बिना बीज की इमली आ रही है, तो इसके बीजों का यह उपयोग खत्म सा हो गया है। दरअसल इमली ही नहीं बल्कि इसके बीज भी हैं शरीर के लिए फायदेमंद हैं। आइये आज हम जानें इमली के बीजों के फायदे....इमली का बीज दिखने में बहुत छोटा होता है, लेकिन सेहत को उतने ही बड़े फायदे देता है। इमली के बीज से आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है। इमली में मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, पोटेशियम, मैंगनीज, आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं।इमली के बीज के फायदे1.पुरुषों को होने वाली परेशानियों का है रामबाण इलाजइमली का बीज पुरुषों को होने वाली परेशानी शीघ्रपतन में सहायक है। इमली यौन दुर्बलताओं को दूर करने में बहुत मददगार है। इस समस्या को दूर करने के लिए इमली के बीजों का चूर्ण बनाया जा सकता है। इसके लिए 250 ग्राम इमली के बीजों को पानी में चार दिन के लिए भिगोना है। चार दिन बाद इमली के छिलके उतार दें फिर छाया में सुखाएं, जब यह बीज सूख जाएं तब जितनी मात्रा में इमली के बीज लिए हैं उतनी मात्रा में ही मिश्री मिलाएं फिर इमली और मिश्री पीस लें। इसके बाद इस मिश्रण में गाय का घी मिला लें। इस चूर्ण की चौथाई चम्मच सुबह-शाम दो बार दूध के साथ खाएं। लगभग डेढ़ महीने इसका सेवन करें।2. दांतों की सफेदी के लिएइमली के बीजों को भूनकर उनका छिलका उतार लें और बीजों को पीस लें। इसका पाउडर बनाकर एक कंटेनर में बंद कर लें। पाउडर को रोज सुबह-शाम दांतों पर रगड़ें, ऐसा करने से पीले दांत सफेद हो जाएंगे। जो लोग तंबाकू का सेवन करते हैं और दांत पीले पड़ जाते हैं, उन लोगों को भी इस पाउडर का इस्तेमाल करना चाहिए, उनके दांत साफ हो जाएंगे।3. भोजन में प्रोटीन की गुणवत्ता को बेहतर करनाकई जगहों पर इमली के बीज को आटे में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। यह बीज आटे में मिलकर प्रोटीन की गुणवत्ता को बेहतर करते हैं। दूसरा इमली के बीजों में कैल्शियम ज्यादा होता है जो हड्डियों के लिए मददगार है।4. बीज की चटनीइमली के बीज का स्वाद कसैला होता है। इसलिए इसके बीज को तवे पर भूनकर, स्वाद अनुसार नमक, मिर्च मिला लें और आपकी चटनी तैयार हो गई। कई दुकानों में अब ये चटनी बिकने लगी है।5. जैली, जैम बनाने मेंइमली के बीजों का प्रयोग जैली, जैम बनाने में भी किया जाता है।6. डायबीटिज के मरीजों के लिए गुणकारीइमली के बीज में एंटीडायबेटोजेनिक गुण होते हैं जो खून में मौजूद शुगर के स्तर को कम करते हैं। डायबिटीज की समस्या तब होती है जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इमली के बीज उस मात्रा को कम करते हैं। इसमें भी इमली के बीज का पाउडर बनाकर दिन में दो बार पानी के साथ खाएं। लगभग तीन महीने तक खाएं।7. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायकइमली के बीज में पॉलीसैकराइड व जायलोग्लूकन घटक होते हैं। ये गुण शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इमली में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर में होने वाली टूट-फूट को भी ठीक करते हैं।8. गठिया में सहायकइमली के बीज में एंटी-अर्थराइटिस और एंटीइन्फ्लेमेटर गुण पाए जाते हैं जो गठिया के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। डॉक्टर के मुताबिक बीज का पाउडर सुबह-शाम एक चम्मच खाएं।9. बालों को मजबूत बनाए इमलीबालों को मजबूत करने और झडऩे से रोकने के लिए इमली का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको इमली को दस मिनट के लिए पानी में भिगोना होगा फिर इस इमली के पानी से सिर की मसाज करें। अब गर्म पानी में तौलिया भिगोकर उसका पानी निचोड़कर इस तौलिए को सिर पर आधे घंटे के लिए लपेट लें। इससे सिर को गर्माहट मिलती रहेगी। आधे घंटे के बाद शैंपू से बालों को धो लें। यह काम आपको हफ्ते में दो बार करना है। ऐसा करने से बाल मजबूत होंगे और झडेंगे नहीं।10. बवासीर के रोगियों के लिएइमली बवासीर के मरीजों के लिए बहुत मददगार है। इसके लिए आपको एक से डेढ़ चम्मच इमली के फूल का रस, एक गिलास दही, एक चम्मच अदरक, एक चम्मच धनिया पाउडर और एक चम्मच अनार को अच्छे से मिला लें। इसे मिलाने के बाद एक काढ़ा बन जाएगा। इस काढ़े का सेवन रोजाना दोपहर के खाने के बाद करें।
- डिल यानि सोआ के बीज, बीजों का तेल, पत्ते और जड़ों का इस्तेमाल सदियों से औषधी के रूप में होता आ रहा है। धनिये की पत्तों की तरह दिखने वाले देसी सुपरफूड सोआ के पत्ते डायबिटीज और गठिया मरीजों के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं है। आज हम इसके फायदों के बारे में जानते हैं....सोआ के पत्तों के जबरदस्त फायदे-इंसुलिन रहेगा कंट्रोलडायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कई प्राकृतिक तरीके हैं , लेकिन सोआ के पत्ते किफायती के साथ काफी फायदेमंद इलाज है। इससे ना सिर्फ शरीर में इंसुलिन का स्तर समान्य रहता है बल्कि यह ब्लड शुगर लेवल को भी काबू रखता है।कैंसर-रोधी गुणों से भरपूरइसमें मौजूद एंटी-कैंसर, एंटी-बैक्टीरियल गुण शरीर में कैंसर सेल्स कोशिकाओं को बढऩे नहीं देते। इससे आप कई तरह के कैंसर से बचे रहते हैं।शरीर को करेगा डिटॉक्सइसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर से विषैले टॉक्सिन्स और फ्री रैडिकल्स को निकालने में मदद करते हैं। इससे दिल के रोगों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।पाचन क्रिया को रखे दुरुस्तनियमित इसकी पत्तियों का सेवन करने से पाचन तंत्र भी सही तरीके से काम करता है। इससे आप कब्ज, एसिडिटी, दस्त से बचे रहते हैं।गठिया दर्द का अचूक इलाजइसके पत्तों का पेस्ट, अलसी और अरंडी के बीज मिलाकर 1 गिलास दूध के साथ लें। इससे गठिया, आर्थराइटिस, जोड़ों में दर्द और सूजन से छुटकारा मिलेगा।गर्भवती महिलाओं के लिएगर्भवती और स्तनपान करवाने वाली औरतों के लिए इसका इसका सेवन फायदेमंद होता है। यह दूध की मात्रा बढ़ाने के साथ ओव्यूलेशन को रोकने में भी मददगार है।उच्च रक्तचाप को करे कमडिल और मेथी के बीजों को बराबर मात्रा में पीसकर रख लें। रोजाना दिन में 2 बार 1 गिलास पानी के साथ इसके 2 चम्मच लें। इससे हाई ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल होगा और हड्डियों व मांसपेशियों में भी मजबूती आएगी।सोआ के नुकसानजहां हर चीज के कुछ फायदे होते हैं वहीं उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। उसी तरह सोआ के पत्तों का अधिक मात्रा में सेवन शरीर में पित्त की समस्या बढ़ा सकता है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। इससे सीने व शरीर में जलन, गैस्ट्राइटिस की समस्या हो सकती है। इसलिए जब भी इसका सेवन करें, चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लें।स्वाद में थोड़े तीखे व कड़वे होने के कारण हरी सब्जियों के साथ इसका सेवन ज्यादा सही रहता है।1. सोआ के पत्तों का इस्तेमाल आप करी या सब्जी बनाने के लिए कर सकते हैं। राई, जीरा, प्याज, लहसुन-अदरक, हरी मिर्च के साथ इसका तड़का लगाएं।2. सोआ के पत्तों को धोकर इसका जूस बना लें। इसमें नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक मिलाकर सुबह-शाम पीएं।3. इसकी पत्तियों को आटे के साथ गूंदकर परांठा बनाकर खाएं।4. इसके अलावा आप सोआ के पत्तों को सूप, अचार, सलाद के रूप में अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।






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