- Home
- देश
-
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि पेंशनभोगियों की शिकायतों की वास्तविक समय पर निगरानी को आसान बनाने वाली एक ऑनलाइन प्रणाली के परिणामस्वरूप औसतन करीब 21 दिनों में निवारण के साथ जवाबदेही में सुधार हुआ है। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि केंद्रीय पेंशन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली ने एक ऑनलाइन मंच प्रदान कर केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के लिए शिकायत निवारण की पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर निवारण में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के तहत मंत्रालयों और विभागों द्वारा वास्तविक समय पर निगरानी, समयबद्ध निवारण और निरंतर निरीक्षण संभव होती है, जिसके परिणामस्वरूप निवारण में कम देरी होती है और इसमें औसतन करीब 21 दिन का समय लगता है। सिंह ने डिजिटल पेंशन सुधारों का विवरण देते हुए कहा कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र को पेंशन वितरण अधिकारियों के डेटाबेस में अपडेट किया जाता है, जिससे पेंशन की निर्बाध निरंतरता सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा, 'जीवन प्रमाण' से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने और पेंशन संवितरण प्राधिकरण से रिकॉर्ड अपडेट करने पर पेंशनभोगियों के मोबाइल फोन पर एसएमएस संदेश स्वचालित रूप से प्राप्त होते हैं, जिससे बेहतर पारदर्शिता और पेंशनभोगियों को समय पर लाभ सुनिश्चित होता है।
-
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में तेजी लाने के लिए बृहस्पतिवार को 23,731 करोड़ रुपये की एक राष्ट्रीय एकीकृत योजना को मंजूरी दी। यह योजना आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को मजबूत करने के लिए कृषि एवं शहरी कचरे के उपयोग पर आधारित है। सरकार ने एक बयान में कहा कि 'गोबरधन' (जैविक संसाधनों से धन सृजन) योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 के बीच लागू की जाएगी। इसका लक्ष्य सुनिश्चित खरीद, विनियमित मूल्य, पूंजी सब्सिडी, पाइपलाइन अवसंरचना और वित्त तक आसान पहुंच के जरिये घरेलू सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। कुल 23,731 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के तहत कृषि अवशेष, गोबर, चीनी उद्योग का कचरा (गन्ने की खोई), शहरी जैविक कचरा एवं अन्य बायोमास का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी। इस गैस को वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी में मिलाया जा सकेगा। यह योजना मौजूदा पहल, जैसे 'सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन' (सतत) कार्यक्रम पर आधारित है, जिसके तहत 200 से अधिक सीबीजी संयंत्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। नए ढांचे के तहत शहरी गैस वितरण कंपनियां सीएनजी और घरों को आपूर्ति होने वाली पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) में सीबीजी की अनिवार्य मिलावट के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सीबीजी खरीदेंगी। वित्त वर्ष 2026-27 में तीन प्रतिशत, 2027-28 में चार प्रतिशत और 2028-29 से पांच प्रतिशत मिलावट का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को किफायती बनाए रखने के उद्देश्य से सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का विनियमित मूल्य भी तय किया है। गोबरधन योजना के तहत पात्र नई परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन पर अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता मिलेगी, जबकि पुरानी विस्तार परियोजनाओं को भी समर्थन दिया जाएगा। इसके साथ, सीबीजी संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइन और शहरी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए अवसंरचना वित्तपोषण, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण गारंटी व्यवस्था और जैविक कच्चे माल के एकत्रीकरण, प्रौद्योगिकी अपनाने और जिला-स्तरीय परियोजनाओं के विकास के लिए एक विशेष कोष का प्रावधान किया गया है। बयान के मुताबिक, इस कार्यक्रम से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय के नए अवसर पैदा होंगे, कचरा प्रबंधन में सुधार होगा, जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। भारत अपनी ऊर्जा बदलाव रणनीति के तहत प्राकृतिक गैस के उपयोग का विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही कम्प्रेस्ड बायोगैस जैसे नवीकरणीय गैसीय ईंधन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयातित एलएनजी पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है।
-
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि असली नेतृत्व का मतलब भाषण देना, चुनाव जीतना या लोगों को उपदेश देना नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करना और सफलता एवं प्रसिद्धि को साझा करना है। एक सच्चे नेता के गुणों का वर्णन करते हुए, भागवत ने एक श्लोक का उल्लेख किया और कहा कि एक नेता के पास ज्ञान होना चाहिए, उसे दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए, सफलता, प्रसिद्धि और भौतिक लाभ सभी के साथ साझा करने चाहिए तथा संघर्ष की स्थिति में एक योद्धा की तरह व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा आयुवर्ग के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए ये टिप्पणियां कीं। भागवत ने कहा, ''असल नेता वे होते हैं जो पीछे से नेतृत्व करते हैं। अंदर से बदलाव लाते हैं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व को लोगों के सामने खड़े होने, भाषण देने या चुनाव जीतने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भागवत ने कहा, ''मैं खुद को नेता नहीं मानता। मैं खुद को एक कार्यकर्ता मानता हूं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का मकसद लोगों को 'प्रकाश' की ओर ले जाना है। भागवत ने कहा, नेतृत्व का मकसद नेता तैयार करना है। इसका मकसद खुद नेता बने रहना नहीं है। मेरे नेतृत्व से नेता बनने चाहिए।
-
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंक व्यक्तिगत, वाहन या आवास ऋण नहीं लौटाने वालों से कर्ज की वसूली के लिए उनके मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप को बंद या निष्क्रिय नहीं कर सकते हैं। हालांकि, यदि संबंधित उपकरण की खरीद के लिए उसी बैंक ने कर्ज दिया है, तो यह कदम उठाया जा सकता है। आरबीआई ने कहा कि जिन मामलों में उपकरण की कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने की अनुमति है, उनमें भी बैंक को शुरुआत से ही उपकरण बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। केंद्रीय बैंक ने कर्ज वसूली और 'रिकवरी' एजेंसियों की नियुक्ति से जुड़े आचरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उधारकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये उत्पीड़न और अभद्र भाषा के इस्तेमाल जैसी शिकायतें की थीं। उसके बाद यह कदम उठाया गया है। आरबीआई के परिपत्र के अनुसार, ये नियम एक जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे।
केंद्रीय बैंक ने कहा, ''कोई भी बैंक ऐसी प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं करेगा, जो ऋण वसूली के साधन के रूप में उधारकर्ता के मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसी मोबाइल उपकरण की किसी भी कार्यक्षमता को सीमित या निष्क्रिय करे। अपवाद केवल उन मामलों में होगा, जहां संबंधित उपकरण की खरीद के लिए बैंक ने ही ऋण उपलब्ध कराया हो।'' केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यदि मोबाइल उपकरण की खरीद बैंक से कर्ज लेकर की गई है, तो बैंक उसकी कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने का विकल्प अपना सकता है। हालांकि, ऐसे मामलों में भी बैंक को उपकरण को तुरंत बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी। आरबीआई ने यह भी कहा कि बैंक आवश्यक सुविधाओं को किसी भी स्थिति में बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे। इनमें 'इनकमिंग कॉल', एसएमएस और आपातकालीन एसओएस सुविधा शामिल हैं। इससे पहले, मई में आरबीआई ने बैंक और एनबीएफसी समेत उसके दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण वसूली और रिकवरी एजेंसियों की नियुक्ति से संबंधित आचरण' पर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिस पर विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त हुए थे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सुझावों में यह सुनिश्चित करने की बात कही गई थी कि बैंक और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) केवल सुरक्षित, मानकों के अनुरूप और परीक्षण की गई 'डिवाइस-लॉकिंग' तकनीक का ही उपयोग करें तथा बिना लाइसेंस या गैर-भरोसेमंद सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को रोका जाए। इन सुझावों को स्वीकार करते हुए आरबीआई ने कहा कि तकनीक आधारित वसूली प्रणाली लागू करने वाली वित्तीय संस्थाएं और उससे जुड़ी तीसरे पक्ष की सेवा प्रदाता कंपनी को संबंधित डिवाइस के मूल उपकरण विनिर्माता या 'ऑपरेटिंग सिस्टम' मंच से इस तकनीक का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। आरबीआई ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि किसी भी उधारकर्ता या गारंटर की जानकारी केवल उतनी ही सीमा तक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ साझा की जाए, जितनी ऋण वसूली से जुड़े दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक हो। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बृहस्पतिवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन किया और दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल विशेष रणनीतिक साझेदारी में हो रही लगातार प्रगति की समीक्षा की तथा दोनों देशों के पारस्परिक लाभ के लिए विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और प्रगाढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बाद में, मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का फोन आया। हमने भारत-इजराइल विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की, जो लगातार और सुदृढ़ हो रही है।'' उन्होंने कहा, ''हमने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की।''
पीएमओ के बयान के अनुसार, ''प्रधानमंत्री नेतन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में हाल में हुए घटनाक्रमों पर बातचीत की। दोनों नेता संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए।'' पश्चिम एशिया में संघर्ष बिना किसी स्थायी समाधान के पांच महीने से अधिक समय से जारी है।
ईरान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य पर एक समझौते का मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में है, जबकि लेबनान में इजराइल के दो सैनिक मारे गए हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक पोत परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुए संघर्ष से पहले, दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इस जलमार्ग से होकर गुजरता था। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को गोबरधन योजना को मंजूरी दिए जाने और असम में गुवाहाटी-तेजपुर के बीच चार लेन वाले राजमार्ग के निर्माण को स्वीकृति देने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से निर्बाध संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी तथा निवेश और नवोन्मेष के लिए मजबूत एवं भरोसेमंद माहौल तैयार होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय गोबरधन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य कृषि और शहरी अपशिष्ट का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में तेजी लाना, आयातित जीवाश्म ईंधन (कच्चा तेल, गैस) पर निर्भरता कम करना और देश में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देना है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के हमारे सामूहिक सपने को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रिमंडल ने गोबरधन योजना को मंजूरी दी है, जिससे कम्प्रेस्ड बायोगैस को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इसका लक्ष्य देश में सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। यह योजना निवेश और नवोन्मेष के लिए मजबूत और भरोसेमंद परिवेश तैयार करेगी।'' उन्होंने कहा कि इस योजना से किसानों, सहकारी समितियों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), महिला उद्यमियों और ग्रामीण उद्यमों को लाभ मिलेगा। साथ ही यह ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर 135.87 किलोमीटर लंबे चार लेन के 'नियंत्रित प्रवेश' वाले गुवाहाटी-तेजपुर गलियारे को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''असम में संपर्क व्यवस्था और विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर चार लेन वाले नियंत्रित प्रवेश गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इस परियोजना से यात्रा का समय कम होगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और विभिन्न स्थानों पर प्रमुख बाइपास बनने से यातायात जाम की समस्या कम होगी।'' उन्होंने कहा कि इस परियोजना में तेजपुर में आपातकालीन विमान उतरने की सुविधा के साथ पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा। यह कॉरिडोर असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच निर्बाध संपर्क को और मजबूत करेगा।
-
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि एलजीबीटीक्यूआईए समुदाय समाज का एक अहम हिस्सा है, लेकिन अभी शादी की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे ''अनचाहे दुष्प्रभाव'' हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि समलैंगिक जोड़ों के लिए एक अलग कानूनी ढांचा हो सकता है।
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान समलैंगिक विवाह पर आरएसएस के विचारों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भागवत ने कहा, ''कानून समाज को तय नहीं करता, समाज कानूनों को तय करता है, और समाज को पहले बदलाव के लिए तैयार होना चाहिए।'' भागवत 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स' (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। भागवत ने कहा कि संघ का हमेशा से यह मानना रहा है कि एलजीबीटीक्यूआईए लोग ''उस समाज का हिस्सा हैं जिससे हम जुड़े हैं, और हमारे समाज में उन्हें साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।'' भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में, शादी परिवार बनाने के लिए बनाई गई एक संस्था है, जो समाज की बुनियादी इकाई के तौर पर काम करती है और आने वाली पीढ़ियों का पालन-पोषण करती है। उन्होंने कहा, ''हमारी पारंपरिक विवाह व्यवस्था सिर्फ दो लोगों के साथ रहने की सुविधा नहीं है। यह एक ऐसी संस्था है जिसके जरिये परिवार बनता है, और परिवार समाज की वह इकाई है, जहां अगली पीढ़ी को तैयार किया जाता है।'' संघ प्रमुख ने कहा, ''हमें पहले समाज को तैयार करना होगा, क्योंकि कानून समाज को तय नहीं करता, समाज कानूनों को तय करता है। इस चरण में, अगर हम मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव करते हैं, तो इसके अनचाहे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।'' भागवत ने सुझाव दिया कि समलैंगिक जोड़ों के लिए एक अलग कानूनी ढांचे पर विचार किया जा सकता है। एलजीबीटीक्यूआईए, एक संक्षिप्त शब्द है, जो विभिन्न लैंगिक पहचान और यौन रुझानों वाले लोगों के समूह को दर्शाता है। -
मुंबई/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध तरीका है, लेकिन इसका मकसद विभाजन पैदा करने के बजाय आम सहमति बनाना होना चाहिए। भागवत ने मुंबई में 'इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स' (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में में 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ''विरोध प्रदर्शन भी बातचीत का एक तरीका है। लोकतंत्र में, विरोध प्रदर्शन आम सहमति बनाने का एक जरिया है। अलग-अलग विचार एक साथ आते हैं और चर्चा के बाद आम सहमति बनती । उन्होंने कहा, ''अगर विभिन्न कारणों से बातचीत के जरिए चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो लोग आंदोलन की ओर जा सकते हैं। लेकिन इन सबका मकसद आम सहमति बनाना है, न कि विभाजन पैदा करना। जेन-जी की शिकायतें जायज़ हैं और मुझे उनकी ईमानदारी पर भरोसा है।'' भागवत के इस संवाद को आरएसएस की ओर से 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' तक पहुंचने की सबसे अहम कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह कोशिश 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के उस विरोध-प्रदर्शन के बाद हो रही है, जो नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हुआ था तथा उसके फलस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था। भागवत ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली को लेकर जताई जा रही चिंताएं जायज हैं। उन्होंने कहा कि संवाद हमेशा पहला कदम होना चाहिए।
भागवत ने कहा, ''बातचीत होनी चाहिए। अगर बातचीत से काम न बने तो आगे क्या किया जाए, इस पर बाद में विचार किया जा सकता है।'' सरसंघचालक ने कहा कि जेन-जी अपनापन और सम्मान के साथ-साथ 'तार्किक जवाब' भी चाहता है, जबकि पिछली पीढ़ियां बिना सवाल किए बड़ों की बात मान लेती थीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना इसके नुकसानदेह असर का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को आत्म-अनुशासन विकसित करना चाहिए और ऑनलाइन किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। भागवत ने कहा कि जब तक लोगों का नज़रिया नहीं बदलेगा, तब तक सिर्फ़ नियम-कानून काम नहीं आएंगे।
उन्होंने कहा, ''नियम और अनुशासन जरूरी हैं, लेकिन वे तभी सफल होते हैं जब सोच बदलती है। कई कानून बनाए गए हैं। असल में जो बात मायने रखती है वह है लोगों की सोच में बदलाव।'' प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी देते हुए सरसंघचालक ने कहा कि लोगों को बिना जांच-पड़ताल के सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, ''आज प्रौद्योगिकी हमारे चेहरे और आवाज का इस्तेमाल करके नकली वीडियो बना सकती है। यह पता होने पर लोगों को कभी भी सोशल मीडिया पर किसी भी चीज़ पर तब तक विश्वास नहीं करना चाहिए जब तक कि वे विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि न कर लें।'' भागवत ने यह भी कहा कि 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स' की अपने 'फॉलोवर्स' के प्रति ज़िम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा, ''अगर मैं सोशल मीडिया पर कोई मशहूर हस्ती हूं और 10 लाख लोग मुझे फ़ॉलो करते हैं, तो यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं यह पक्का करूं कि मुझे फ़ॉलो करने की वजह से वे किसी मुसीबत में न पड़ें। इतनी समझदारी जरूरी है।'' उन्होंने स्व-नियमन का आह्वान करते हुए कहा कि पुरानी पीढ़ी को युवाओं की मदद करनी चाहिए ताकि वे सोशल मीडिया का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करने की समझ विकसित कर सकें। भागवत ने कहा, ''सोशल मीडिया के इस्तेमाल में हमें खुद से अनुशासन बनाए रखने की ज़रूरत है। एक बार जब यह अनुशासन आ जाएगा, तो नियम प्रभावी ढंग से काम करेंगे।'' इस सवाल पर कि क्या भारत को बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा देनी चाहिए, जैसा कि कुछ अन्य देशों ने किया है, भागवत ने कहा कि पाबंदी इसका समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, ''अगर आप किसी चीज़ पर पाबंदी लगाते हैं, तो वह बस ब्लैक मार्केट में चली जाती है तथा और भी ज़्यादा फैल जाती है। पूरे समाज को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। तभी सरकार की कोशिशें सफल होंगी।'' भागवत ने यह भी कहा कि वह शिक्षा पर खर्च को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के छह प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, ''शिक्षा कोई वाणिज्यिक कारोबार नहीं है। इसे इस तरह से व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि यह सभी को सुलभ हो।'' सरसंघचालक ने कहा कि शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने में समाज को भी योगदान देना चाहिए। भागवत ने कहा कि रोज़गार का मतलब सिर्फ़ नौकरी ही नहीं, बल्कि उद्यमिता भी है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2025 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जापान समेत 23 देशों की यात्राओं पर 180 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। विदेश मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर देशवार और वर्षवार आंकड़े साझा किए गए। इसके अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब 74.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें छह से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा भी शामिल है। आप के संजय सिंह और माकपा के वी. शिवदासन ने विदेश मंत्रालय से 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का देशवार विवरण और इन यात्राओं पर हुए खर्च का वर्षवार एवं यात्रा-वार ब्योरा मांगा था। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने अपने जवाब में प्रधानमंत्री द्वारा 2021 से की गई विदेश यात्राओं और प्रत्येक यात्रा पर हुए कुल खर्च का वर्षवार तथा यात्रा-वार विवरण दिया। इसके अनुसार, प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा (2011) पर 10,74,27,363 रुपये, रूस यात्रा (2013) पर 9,95,76,890 रुपये, फ्रांस यात्रा (2011) पर 8,33,49,463 रुपये और जर्मनी यात्रा (2013) पर 6,02,23,484 रुपये खर्च हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े महंगाई या मुद्रा विनिमय दर में बदलाव को समायोजित किए बिना वास्तविक खर्च को दर्शाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री की विभिन्न देशों की यात्राओं पर करीब 187 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें से फ्रांस यात्रा पर 25,59,82,902 रुपये, अमेरिका यात्रा पर 16,54,84,302 रुपये, सऊदी अरब यात्रा पर 15,54,03,792.47 रुपये, ब्राजील यात्रा पर 17,72,22,144 रुपये, चीन यात्रा पर 10,59,90,561 रुपये और ब्रिटेन यात्रा पर 9,91,55,061.39 रुपये खर्च हुए। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 2025 में मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, नामीबिया, मालदीव, जापान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, ओमान और इथियोपिया की भी यात्रा की। सरकार ने जुलाई 2025 में राज्यसभा में एक अन्य लिखित जवाब में बताया था कि 2021 से 2024 तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च करीब 295 करोड़ रुपये रहा। आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री की वर्ष 2024 में रूस, यूक्रेन, अमेरिका और ब्राजील समेत 16 देशों की यात्राओं पर करीब 109 करोड़ रुपये, वर्ष 2023 में करीब 93 करोड़ रुपये, वर्ष 2022 में 55.82 करोड़ रुपये और वर्ष 2021 में करीब 36 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश, अमेरिका, इटली और ब्रिटेन की यात्रा की थी। इन यात्राओं पर क्रमश: 1,00,71,288 रुपये, 19,63,27,806 रुपये, 6,90,49,376 रुपये और 8,57,41,408 रुपये खर्च हुए थे। विदेश मंत्रालय से इन यात्राओं के दौरान हुए द्विपक्षीय समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू), घोषित निवेश प्रतिबद्धताओं तथा इनके परिणामस्वरूप भारत में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का देशवार विवरण भी मांगा गया था। मार्गेरिटा ने कहा, ''प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय विदेश यात्राएं अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी को बढ़ावा देने का स्थापित माध्यम हैं। इन यात्राओं के दौरान हुए समझौते और सहमतियां प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा सहयोग और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने में मदद करती हैं।'' उन्होंने 35 पृष्ठों के जवाब में इन यात्राओं के दौरान हुए एमओयू का देशवार विवरण साझा करते हुए बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। सरकार द्वारा साझा सूची के अनुसार, जुलाई 2021 से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान कुल 316 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी में हाल में शामिल हुए आम आदमी पार्टी के कुछ पूर्व नेताओं समेत 37 पार्टी सांसदों के साथ सुबह के नाश्ते पर बैठक की और इस बात पर जोर दिया कि संसद में बिना किसी अवरोध के सुचारू तरीके से कामकाज होना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि मोदी ने सार्वजनिक जीवन के अपने अनुभव साझा किये और इस बारे में मार्गदर्शन किया कि सांसदों को संसद को कितनी गंभीरता से लेना चाहिए। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने सांसदों से यह भी कहा कि वे रोजाना कम से कम एक या दो घंटे संसद के पुस्तकालय में बिताएं। इसके अलावा, उन्होंने सांसदों को युवाओं से जुड़ने और अपने संसदीय क्षेत्रों में युवाओं व खेल गतिविधियों पर ध्यान देते हुए सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) को सक्रिय रूप से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया। बैठक में नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और विनोद तावडे के साथ ही पूर्व आप नेता स्वाति मालीवाल, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक और विक्रमजीत सिंह साहनी भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी पिछले कई वर्षों से संसद सत्र के दौरान नाश्ते पर सांसदों से मिलते रहे हैं। ऐसी बैठकों में सांसदों को प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और दोनों सदनों में तब से राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई समेत विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।
-
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बुधवार को तीखा हमला करते हुए उन्हें ''अपरिपक्व'' और ''अंशकालिक'' नेता प्रतिपक्ष बताया तथा आरोप लगाया कि वह संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं क्योंकि वह नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की तुलना पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से होने से डरते हैं। सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस नेता पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ ''निराधार'' टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया। गांधी ने मंगलवार को पूर्व सांसद वाइको की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा था कि देश के छात्र ''गहरी पीड़ा'' में हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माफी नहीं चाहिए बल्कि वे चाहते हैं कि सरकार की कार्रवाई के लिए मोदी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्र इसलिए सड़कों पर हैं क्योंकि आरएसएस देश के इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहा है। गांधी ने कहा था कि भारत अपने इतिहास को किसी के द्वारा रौंदे जाने को स्वीकार नहीं करेगा। गांधी ने कहा था कि प्रत्येक राज्य को अपनी संस्कृति और भाषा के साथ समान व्यवहार पाने का अधिकार है, लेकिन आरएसएस चाहता है कि केवल उसी के दृष्टिकोण वाला इतिहास स्वीकार किया जाए। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राहुल गांधी ''अपरिपक्व'', ''अंशकालिक'' और ''गैर-जिम्मेदार'' नेता प्रतिपक्ष हैं तथा संसद की कार्यवाही इसलिए बाधित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि मोदी सरकार के कामकाज से तुलना होने पर कांग्रेस की पोल खुल जाएगी। भाटिया ने दावा किया, ''राहुल गांधी डरे हुए हैं। उन्हें पता है कि जब प्रभावशाली मोदी सरकार और 2004 से 2014 तक की रीढ़विहीन कांग्रेस नीत सरकार की तुलना होगी तो कांग्रेस बेनकाब हो जाएगी। इसलिए संसद में व्यवधान डाला जा रहा है।'' भाजपा और आरएसएस पर राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ''मोदी-भय'' और ''आरएसएस-भय'' से ग्रस्त हैं तथा बिना किसी प्रमाण के संघ की विचारधारा को बार-बार ''जहरीली'' बताते हैं। उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी मोदी-भय और आरएसएस-भय से ग्रस्त हैं। जिस विचारधारा ने पूरी निष्ठा से देश की सेवा की है, उसे 'जहरीली' कहना आसान है, लेकिन बिना किसी सबूत के इसे सिद्ध करना संभव नहीं है।'' छात्रों और परीक्षा सुधारों पर राहुल गांधी की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि विपक्ष शासित राज्यों में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर कांग्रेस नेता चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा, ''झारखंड में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। कर्नाटक में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। केरल में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। यह दोहरा मापदंड और यह पाखंड क्यों?'' संसद में गतिरोध से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सदन में चर्चा के दौरान सरकार के तर्कों का जवाब नहीं दे पाते, इसलिए सदन से ''भाग जाते'' हैं। उन्होंने कहा, ''जब संसद का सत्र चल रहा हो तो क्या नेता प्रतिपक्ष को पूरी तैयारी के साथ सदन में नहीं आना चाहिए? राहुल गांधी संसद से भी भागते हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह और अमित शाह तथ्यों के साथ बोलते हैं तो राहुल गांधी के पास कोई जवाब नहीं होता।'' भाटिया ने विदेशों से भगोड़ों को वापस लाने के मामले में मोदी सरकार के रिकॉर्ड का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि इससे राजग और पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा, ''2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया। यानी औसतन हर वर्ष 40 भगोड़ों को वापस लाया गया। इसकी तुलना संप्रग सरकार से करें, जिसके कार्यकाल में औसतन केवल चार भगोड़ों को हर वर्ष वापस लाया गया।'' आर्थिक अपराध करने वालों का ज़िक्र करते हुए भाटिया ने कहा कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और दावा किया कि सरकार की कोशिशों से जनता के हजारों करोड़ रुपये वापस पाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, ''वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपी लोगों में (जिनमें विजय माल्या जैसे लोग शामिल हैं जिनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है) से जुड़े नौ मामले हैं, जबकि 45 अन्य लोग अलग-अलग तरह के अपराधों के आरोपी हैं।'' उन्होंने कहा, ''जो भगोड़े वापस लाए गए हैं, उनकी वजह से लगभग 19,000 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। यह रकम इसके असली मालिकों को वापस मिल गई है।'' अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के सात वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाटिया ने पांच अगस्त को ''ऐतिहासिक दिन'' बताया और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिया। उन्होंने कहा, ''अनुच्छेद 370 की शुरुआत 'अस्थायी' शब्द से हुई थी, लेकिन इसे हटाने की इच्छाशक्ति किसी में नहीं थी। पांच अगस्त, 2019 को, जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया, तो संविधान की असली भावना का सम्मान किया गया। अमित शाह जी ने सरदार पटेल जैसी इच्छाशक्ति दिखाई जिससे ऐसा किया जाना सुनिश्चित हुआ।
-
नयी दिल्ली. यमन के तट के निकट मंगलवार को भारतीय ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ। विदेश मंत्रलय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर 13 भारतीय नागरिक सवार थे और सभी को बचा लिया गया। भारत ने इस हमले की निंदा की और कहा कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया जाना बंद होना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''हम भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज 'एमएसवी फैज नूर ओलिया' पर हुए हमले की निंदा करते हैं, जो चार अगस्त को यमन के तट के पास लाल सागर में डूब गया।'' मंत्रालय ने कहा, ''सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है। रियाद स्थित हमारा दूतावास स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है।'' विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को बचाने में सहयोग के लिए यमन के अधिकारियों का धन्यवाद किया।
मंत्रालय ने कहा, इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।'' मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से स्वतंत्र एवं निर्बाध आवागमन तथा व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। -
रांची. झारखंड के गिरिडीह, दुमका और लातेहार में मंगलवार को आकाशीय बिजली गिरने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मरने वाले 14 लोगों में से नौ गिरिडीह, तीन दुमका और दो लातेहार से थे।
खोरीमहुआ के उप-संभागीय पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) अमरेंद्र कुमार ने बताया, "गिरिडीह जिले में मेरे उप-संभाग के तहत आने वाले तीन थानों के इलाकों में बिजली गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।" उन्होंने बताया कि इनमें से पांच लोगों की मौत और तीन लोगों के घायल होने की घटना केवल देवरी थाना क्षेत्र में हुई। अधिकारी ने बताया कि ये लोग खेलने के बाद एक स्थान पर बैठे हुए थे कि तभी यह हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि हादसे में मारे गये चार लोगों की उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच थी।
अधिकारी ने बताया कि गावां और नौडीहा थाना क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गिरिडीह जिले के बगोदर पुलिस थाना क्षेत्र में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दुमका जिले के रामगढ़ ब्लॉक में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई और एक बच्चे समेत चार अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि लातेहार में अलग-अलग पुलिस थाना क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। - नयी दिल्ली । देश में ई-20 पेट्रोल की बिक्री के खिलाफ 2.30 लाख से अधिक ज्ञापनों को सौंपने के लिए प्रधानमंत्री आवास की ओर मंगलवार को करीब 100 लोगों के साथ मार्च कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने फिरोजशाह मार्ग पर रोक लिया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद केजरीवाल, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, जैस्मीन शाह और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ फिरोजशाह मार्ग पर ही धरने पर बैठ गए। आप ने देश भर के लोगों से एकत्र ज्ञापनों को सौंपने के लिए लगभग 100 लोगों के साथ मार्च शुरू किया था। ये ज्ञापन सरकार की ई-20 पेट्रोल को बढ़ावा देने वाली नीति के खिलाफ थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एथनॉल-मिश्रित ईंधन का वाहन मालिकों पर बुरा असर पड़ रहा है। केजरीवाल ने मार्च से पहले समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी देश भर के लोगों द्वारा हस्ताक्षरित 2.30 लाख से अधिक ज्ञापन लेकर जा रही है और उन्होंने सरकार से करोड़ों वाहन मालिकों की चिंताओं पर संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा, ''हम देश भर के लोगों द्वारा हस्ताक्षरित 2.30 लाख से अधिक ज्ञापन के साथ प्रधानमंत्री आवास जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार उन करोड़ों वाहन मालिकों की चिंताओं को सुने जो ई20 पेट्रोल के कारण समस्याओं का सामना कर रहे हैं।'' पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को पांच फिरोज शाह मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया, ''किसी को भी 5, फिरोज शाह मार्ग से आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों समेत बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।'' यह विरोध प्रदर्शन आप द्वारा एथनॉल जनसभा आयोजित करने और ई20 ईंधन के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू करने के कुछ दिनों बाद हो रहा है। केजरीवाल ने इससे पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा के लिए उनसे मिलने का समय मांगा था।
-
नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के विस्तृत ब्योरे की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
नीतीश कुमार ने एक्स पर साझा की जानकारीनीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में उनसे शिष्टाचार भेंट की।पीएमओ ने भी दी मुलाकात की जानकारीप्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी एक्स पर पोस्ट के जरिए मुलाकात की पुष्टि की। पीएमओ ने कहा, “राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने 4 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।”अप्रैल में राज्यसभा सदस्य के रूप में ली थी शपथयह मुलाकात बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के समाप्त होने के कुछ दिनों बाद हुई है। उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई थी। - भुवनेश्वर। पुरी की वार्षिक रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले तीनों रथों के पहियों को राष्ट्रपति भवन में लगाया जाएगा। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि उन्होंने भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनके समक्ष यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हो गईं कि तीनों रथों के पहिये राष्ट्रपति भवन में लगाए जाएं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।'' अधिकारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के 'नंदीघोष', भगवान बलभद्र के 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा के 'दर्पदलन' रथों के पहियों को नयी दिल्ली भेजा जाएगा और ओडिशा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वार्षिक रथयात्रा के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले तीनों रथों को हर साल उत्सव के बाद खोल दिया जाता है। जहां लकड़ी का एक हिस्सा जगन्नाथ मंदिर की रसोई में इस्तेमाल होता है, वहीं रथों के महत्वपूर्ण हिस्सों की श्रद्धालुओं के बीच नीलामी की जाती है। उन्होंने बताया कि उत्सव के लिए नए रथों के निर्माण के वास्ते हर साल नयी लकड़ी का उपयोग किया जाता है। यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा की विरासत को राष्ट्रपति भवन परिसर में जगह मिलने जा रही है।अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले 29 अक्टूबर 2024 को प्रतिष्ठित कोणार्क पहियों की बलुआ पत्थर से बनी चार प्रतिकृतियों को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र और अमृत उद्यान में स्थापित किया गया था, ताकि आगंतुकों के सामने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा सके।
- मुंबई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं बिहार तथा त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डी.वाई. पाटिल का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 92 वर्ष के थे।राज्य में कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना करा चुके वरिष्ठ नेता के परिवार में उनके बेटे सतेज पाटिल, संजय पाटिल और अजिंक्य पाटिल हैं। सतेज पाटिल, पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता हैं।कोल्हापुर निवासी पाटिल शिक्षा क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित करने से पहले 1967 से 1978 तक विधायक रहे। उन्होंने 'डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय' की स्थापना की जो चिकित्सा, इंजीनियरिंग और कई अन्य विषयों में पाठ्यक्रम संचालित करता है। पद्म श्री से सम्मानित पाटिल ने त्रिपुरा और बिहार के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दी थीं तथा उनके पास पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी था।
- नयी दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों की मंगलवार को हुई साप्ताहिक बैठक में इस बारे में प्रस्तुतिकरण दिया गया कि भारत अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में किस तरह उपलब्धियां अर्जित कर रहा है तथा देश में रोजगार पैदा करने के रास्ते बढ़े हैं जिससे युवाओं के लिए करोड़ों अवसर सृजित हो रहे हैं। बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और राजग के घटक दलों के नेता शामिल हुए।भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन मंगलवार को यहां संसद भवन परिसर में हुई 'मंगल मिलन' बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के बगल में बैठे दिखे। यह बैठक बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा की हार के एक दिन बाद हुई, जहां उसके उम्मीदवार को चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने उपचुनाव में हरा दिया है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में उपचुनाव इसलिए ज़रूरी हो गया था क्योंकि नवीन ने पार्टी अध्यक्ष बनने और राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद सीट छोड़ दी थी। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने खेलों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया और कहा कि मोदी सरकार ने 2014 में एक खेल नीति अपनाई थी, जिसके परिणामस्वरूप भारत को अब ओलंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेल जैसी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में स्वर्ण समेत कई अवॉर्ड मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार देने के तरीकों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया गया और बताया गया कि युवाओं के लिए रोजगार के मौके दिन-ब-दिन बढ़े हैं। तिवारी ने कहा, ''हमें मंगल मिलन में बताया गया कि 2004 से 2014 के बीच, जब संप्रग सत्ता में था, सिर्फ 2.89 करोड़ युवाओं को नौकरी मिली, जबकि 2014 से 2026 के बीच कुल 17.1 करोड़ युवाओं को रोजगार मिला।'' उन्होंने कहा कि राजग संसदीय दल की बैठक में सरकार की अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी प्रस्तुतिकरण दिया गया। भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने बैठक के बारे में कहा, ''मंगल मिलन में मंगल ही होता है।'' राजग के सहयोगी दल जदयू, जद(एस), राकांपा, शिवसेना और एनसीपीआई के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि वह पहली बार राजग संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ''मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं। एनसीपीआई में सभी एकजुट हैं। यह एक अच्छा अनुभव है।'' बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा अन्य मंत्री और नेता भी शामिल हुए।
-
नई दिल्ली । केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग, जूडो और पैरा-एथलेटिक्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान गोल्ड मेडल विजेताओं को 30 लाख रुपए, सिल्वर मेडल विजेताओं को 20 लाख रुपए और ब्रॉन्ज मेडल विजेताओं को 10 लाख रुपए की पुरस्कार राशि के चेक सौंपे गए।
खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने उनसे प्रतिस्पर्धी करियर के बाद भी भारतीय खेलों में योगदान जारी रखने और अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का अनुभव देश में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सम्मान समारोह में भारतीय बॉक्सिंग दल के सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने ग्लासगो में कुल 10 मेडल जीतकर बॉक्सिंग मेडल टैली में शीर्ष स्थान हासिल किया। भारतीय मुक्केबाजों ने सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल अपने नाम किए।भारत के सात गोल्ड मेडल विजेताओं में प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घांघस (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पांघाल (80 किग्रा) शामिल रहे। जादुमनी सिंह (55 किग्रा), ओलंपिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (90+ किग्रा) ने सिल्वर मेडल जीते।केंद्रीय खेल मंत्री ने भारतीय जूडो दल को भी सम्मानित किया। भारत ने ग्लासगो में 12 जूडो इवेंट्स में हिस्सा लेते हुए चार मेडल जीते, जिनमें दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडोका बनीं। वहीं हर्ष ने गोल्ड मेडल जीतकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बनने का गौरव हासिल किया।पैरा-एथलेटिक्स दल को भी समारोह में सम्मानित किया गया। ग्लासगो में भारतीय पैरा-एथलीटों के शानदार प्रदर्शन को देश के पैरा-स्पोर्ट्स के लिए महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा गया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पैरा-स्पोर्ट्स क्षमता को मजबूती से सामने रखा। खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान डॉ. मांडविया ने उन्हें अपने खेल करियर से आगे की सोचने और भारतीय खेलों की अगली पीढ़ी के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 36,000 करोड़ रुपए के निवेश वाली विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना का उल्लेख करते हुए खिलाड़ियों से सक्रिय करियर के बाद स्पोर्ट्स एकेडमी शुरू करने और युवा प्रतिभाओं को निखारने पर विचार करने का आग्रह किया। डॉ. मांडविया ने कहा कि खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने सक्रिय करियर के बाद स्पोर्ट्स एकेडमी चलाने और अपने अनुभव के जरिए युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना के जरिए आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों में लगातार निवेश सुनिश्चित किया जाएगा।एशियन गेम्स 2026 को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने खिलाड़ियों से कॉमनवेल्थ गेम्स में हासिल किए गए प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले खिलाड़ी अगली बार गोल्ड हासिल करने का प्रयास करें, जबकि गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के स्तर को बनाए रखते हुए उसे और बेहतर करें।डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों से उनके कोच के योगदान को कभी नहीं भूलने की अपील की। उन्होंने कहा कि सफलता के पीछे कोच का मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, गुरु का मार्गदर्शन खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ जीवन में भी आगे बढ़ने में मदद करता है। मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को ‘खेलो इंडिया’, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और ‘एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन’ (ACTC) कार्यक्रम के जरिए सरकार से सहायता मिली। इसके अलावा साई एनसीओई में नेशनल कैंप, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर, उपकरण और प्रशिक्षण सहायता भी उपलब्ध कराई गई। - नयी दिल्ली। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत देशभर में 50.06 लाख से अधिक घरों में छतों पर (रूफटॉप) सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। मंत्रालय ने बयान में कहा कि योजना की शुरुआत के दो वर्ष से कुछ अधिक समय में यह उपलब्धि हासिल की गई है, जबकि इससे पहले 10 साल में 7.94 लाख रूफटॉप सौर संयंत्र ही स्थापित किए गए थे। मंत्रालय ने कहा कि 75,021 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के तहत रूफटॉप सौर क्षमता के विस्तार में तेजी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले नौ महीनों में इन संयंत्रों की स्थापना की गति 3.2 गुना बढ़ी है और दैनिक स्थापना अक्टूबर, 2025 के 5,038 से बढ़कर जुलाई, 2026 में करीब 16,328 हो गई है। जुलाई, 2026 में 5.06 लाख घरों में छतों पर सौर संयंत्र लगाए गए, जो अब तक का सर्वाधिक मासिक आंकड़ा है। मंत्रालय ने कहा कि योजना के लाभार्थियों को अब तक 28,024 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी की जा चुकी है। इसका परिणाम यह हुआ है कि करीब 19 लाख परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 12 लाख से अधिक परिवारों ने खपत से अधिक पैदा हुई बिजली को बेचकर कुल 421 करोड़ रुपये अर्जित किए, जो प्रति परिवार औसतन करीब 3,500 रुपये की वार्षिक आय के बराबर है। मंत्रालय के अनुसार, रियायती दर पर ऋण की सुविधा 21.87 लाख आवेदकों को स्वीकृत की गई है, जिनमें से 17.5 लाख स्थापना ऋण के माध्यम से पूरी की जा चुकी हैं। इस योजना के तहत अब तक 14.8 गीगावाट की रूफटॉप सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसके अलावा 34,219 पंजीकृत विक्रेताओं का नेटवर्क विकसित हुआ है, जिनमें से 29,469 सक्रिय हैं, और 2.32 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। सरकारी इमारतों की छतों पर सौर संयंत्र लगाने की पहल के तहत केंद्र और राज्यों द्वारा चिह्नित 1.06 लाख भवनों में संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में डिजिटल मंच, बिजली वितरण कंपनियों का एकीकरण और त्वरित सब्सिडी भुगतान जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
- रांची। झारखंड सरकार ने मंगलवार को देवघर जिले में मशहूर बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर के हवाई दर्शन और श्रद्धालुओं को देवघर से दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम तक ले जाने के लिए एक विशेष हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह सेवा राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग के तहत झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट (जेएफआई) की ओर से संचालित जा रही है। देवघर के उपायुक्त (डीसी) सौरभ कुमार भुवानिया ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए झारखंड सरकार और नागरिक उड्डयन विभाग ने हाथगढ़ मैदान में इस सेवा की शुरुआत की। श्राणणी मेले का उद्घाटन 29 जुलाई को हुआ था।उपायुक्त ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "अब श्रद्धालु यात्रा के बेहद सुविधाजनक और सुरक्षित माध्यम से बाबाधाम के शानदार नजारे का आनंद ले सकेंगे।" श्रावण के महीने में हर साल भगवान शिव के लाखों श्रद्धालु देवघर आते हैं और बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। वे दुमका जिले में बाबा बासुकीनाथ धाम के भी दर्शन करते हैं। जेएफआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कैप्टन एसपी सिन्हा ने बताया कि इस सेवा के लिए पांच सीट वाला हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराया गया है। देवघर में नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारी नाग नारायण प्रसाद ने कहा, "इस सेवा का मकसद श्रावण के पवित्र महीने में देवघर आने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधाएं देना है। सरकार ने श्रावण के दौरान श्रद्धालुओं के लिए टेंट हाउस समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।"
- नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित किए जाने वाले 'एट होम' समारोह में मेहमानों का स्वागत हाथ से बुना हुआ पारंपरिक महेश्वरी अंगवस्त्र पहनाकर किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस बार के 'निमंत्रण पैकेज' से जुड़ी सभी चीजें छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सुंदर व पारंपरिक कला से प्रेरित हैं। राष्ट्रपति की उप प्रेस सचिव नविका गुप्ता ने बताया कि 15 अगस्त को आयोजित स्वागत समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों का यह विशेष अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया जाएगा। यह अंगवस्त्र मध्य प्रदेश के महेश्वर में महेश्वरी बुनाई की पारंपरिक तकनीक से हाथ से बनाया गया है। इसे रेशम और सूती धागों से बुना गया है। इसमें छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पारंपरिक बुनाई और वस्त्र कला के अलग-अलग खास डिजाइनों का इस्तेमाल किया गया है। निमंत्रण पत्र में दिए गए विवरण में कहा गया है कि अंगवस्त्र के डिजाइन में महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी के किनार बॉर्डर, गोवा की कुन्बी साड़ी की रुद्राक्ष बॉर्डर, मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई का कांगरा डिज़ाइन और छत्तीसगढ़ की पनिका परंपरा का चिंता चौक डिज़ाइन शामिल किया गया है। इस तरह चार अलग-अलग बुनाई परंपराओं को एक ही कपड़े में एक साथ प्रस्तुत किया गया है।निमंत्रण में लिखा है, "15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब राष्ट्रपति भवन आपका स्वागत करेगा, तब हम आपको भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक विविधता तथा प्रकृति के संरक्षण की हमारी सदियों पुरानी परंपराओं का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।" राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस के निमंत्रण में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पर्यावरण संरक्षण और हरियाली से जुड़ी अनूठी पहलों को भी प्रदर्शित किया गया है। इन राज्यों की जीवंत सजीव कला परंपराओं के माध्यम से, यह निमंत्रण समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच की गहरी परस्पर निर्भरता की एक झलक प्रस्तुत करता है। बाहरी आवरण (कवर) का डिजाइन तटीय कोंकण क्षेत्र की 'कावी कला' से प्रेरित है। पते की पर्ची के साथ लगी हुई लोहे की घंटी को छत्तीसगढ़ के बस्तर के कुशल जनजातीय लोहारों द्वारा रीसाइकिल किए गए कबाड़ लोहे का उपयोग करके हाथ से बनाया गया है। कपड़े का यह लिफाफा 'बाग प्रिंट' का है, जिसकी पहचान हाथ से तराशे गए लकड़ी के ठप्पों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग है। यह शिल्प मध्य प्रदेश के धार जिले के 'बाग' कस्बे से आया है और वहीं से इसका नाम पड़ा है। यह निमंत्रण पैकेज वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी), अहमदाबाद द्वारा तैयार किया गया है।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत आठ अगस्त को महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में पारधी समुदाय के बच्चों के लिए एक परमार्थ ट्रस्ट के संचालित विद्यालय में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बने खेल परिसर और सभागार का उद्घाटन करेंगे। इंदौर के श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. आयुषी देशमुख ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि यह संस्था बुलढाणा जिले के खामगांव में पिछले 11 वर्षों से 'सूर्योदय पारधी समाज आदिवासी आश्रम विद्यालय' नाम के संस्थान का संचालन कर रही है। उन्होंने कहा, "संघ प्रमुख भागवत ने वर्ष 2018 में इस विद्यालय के खेल परिसर और सभागार के निर्माण की नींव रखी थी। वह आठ अगस्त को इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे जिसके निर्माण में करीब दो करोड़ रुपये की लागत आई है।'' देशमुख ने बताया कि उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके और राज्य के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि खामगांव में संचालित विद्यालय में पारधी और अन्य वंचित समुदायों के करीब 4,000 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और खेलों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।
-
नई दिल्ली। डोलैट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। हालांकि जलाशयों में पानी का भंडार बढ़ने के साथ-साथ, निकट भविष्य में मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अल नीनो का जोखिम अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह बारिश के दायरे में सुधार हुआ है, लेकिन बारिश के वितरण में श्रेणियों के हिसाब से बदलाव देखने को मिला। कम बारिश वाले इलाकों का हिस्सा एक सप्ताह पहले के 40 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया, जबकि बहुत कम बारिश वाले इलाकों की संख्या शून्य रही। वहीं, अधिक बारिश वाले इलाकों का हिस्सा पिछले सप्ताह के महज 1 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया। हालांकि, सामान्य बारिश वाले इलाकों का हिस्सा 57 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत रह गया। डोलैट कैपिटल के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से अधिक बारिश वाले इलाकों की वजह से हुआ, न कि कम बारिश वाले क्षेत्रों के सामान्य स्थिति में आने से। इससे स्पष्ट होता है कि देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई, न कि बारिश के वितरण में व्यापक सुधार हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है, “आगे देखें तो, आईएमडी का निकट-अवधि का अनुमान मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश का संकेत देता है, हालांकि मजबूत होते अल-नीनो और लगभग न्यूट्रल आईओडी के कारण अगस्त में भी मौसमी जोखिम बना हुआ है।”
इस बीच सप्ताह के दौरान खरीफ की बुवाई में और प्रगति हुई। 31 जुलाई तक कुल बुवाई का रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 920.7 लाख हेक्टेयर था। पिछले साल की तुलना में बुवाई के अंतर में कमी आई, हालांकि फसल-वार रुझान मिले-जुले रहे। तिलहन के मामले में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। सीजन के अधिकांश समय पीछे रहने के बाद अब यह पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़त की स्थिति में आ गया है। बुवाई 172.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 171.1 लाख हेक्टेयर थी।इस तरह, पिछले सप्ताह 3.4 लाख हेक्टेयर की कमी से स्थिति बदलकर 1.2 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त में बदल गई।मोटे अनाज ने भी अपने अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है। हालांकि, हाल के हफ्तों में तेजी के संकेत मिलने के बावजूद धान की बुआई पिछले साल की रफ्तार से थोड़ी और पिछड़ गई। दालों की बुआई में मामूली सुधार हुआ, जबकि गन्ने के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ। ( -
मुंबई. राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ दिन बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत छह अगस्त को मुंबई में 'जेन अल्फा' और 'जेन जेड' छात्रों से संवाद करेंगे। भागवत, नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (एनएमएसीसी) में 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (आईआईयूएमएन) की वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम संगठन की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देशभर के 100 से अधिक शहरों से 15 से 19 साल की आयु के 2,000 से अधिक छात्र शामिल होंगे। 'जेन अल्फा' 2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चे हैं, जबकि 'जेन जेड' से अभिप्राय 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी से है। संघ प्रमुख के संबोधन से आईआईयूएमएन के वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस की शुरुआत होगी, जिसमें छात्र स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन समारोह 'दुनिया को जोड़ने में युवाओं की भूमिका: भारतीय तरीका' विषय पर आधारित होगा।
















.jpg)
.jpg)


.jpg)
.jpg)

.jpg)




.jpg)