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भुवनेश्वर. ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखूंटिया ने मंगलवार को विधानसभा में सूचित किया कि अप्रैल 2022 से 10 मार्च 2026 के बीच राज्य में शिकार और दुर्घटनाओं सहित विभिन्न कारणों से 344 जंगली हाथियों की मृत्यु हुई है। विधायक प्रदीप कुमार डिशारी के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि इस अवधि के दौरान 23 हाथी शिकारियों द्वारा मारे गए और 15 हाथियों की मौत दुर्घटनाओं के कारण हुई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक 53 हाथियों की ढेंकानाल जिले में हुई। उन्होंने बताया कि इसके बाद क्योंझर में 42, मयूरभंज में 39, अंगुल में 39, कटक में 37, संबलपुर में 25 और सुंदरगढ़ में 21 हाथियों की मौत हुई। उन्होंने बताया कि 93 हाथियों की वित्त वर्ष 2022-23, 66 हाथियों की 2023-24 और 105 हाथियों की 2024-25 में मौत हुई। उन्होंने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में 10 मार्च तक ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में 80 हाथियों की मौत हुई है।
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नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन की समीक्षा करने के साथ इसमें बढ़ोतरी की जाए। समिति ने 'एग्रीगेटर्स' द्वारा ई-श्रम पोर्टल पर गिग श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य करने और एग्रीगेटर की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की सिफारिश की है ताकि इन श्रमिकों को बीमा और दुर्घटना कवर जैसी सामाजिक सुरक्षाएं मिल सके/ कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन प्रदान किया जाता है, जिसके लिए कम से कम 10 साल की सेवा अनिवार्य है। श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी स्थायी समिति ने ईपीएस, 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा और वृद्धि की सिफारिश की है, जो वर्तमान में केवल 1,000 रुपये प्रति माह है। भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की गई।
समिति ने कमजोर श्रमिकों की वास्तविक आय की रक्षा के लिए स्वचालित आवधिक संशोधन तंत्र का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट में सर्व शिक्षा अभियान के साथ राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के विलय पर पुनर्विचार करने की सिफारिश की गई है, ताकि बाल श्रम के उन्मूलन और पुनर्वास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सके। -
नयी दिल्ली. तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति में कमी के कारण होटल, व्यवसायों और घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से पाइप के जरिये घरों में आपूर्ति की जाने वाली(पीएनजी) परियोजनाओं के अनुमोदन में तेजी लाने को कहा है। इसका उद्देश्य घरेलू रसोई गैस पर दबाव कम करना और वैकल्पिक व्यवस्था को तेजी से लागू करना है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई है।
स्थिति को देखते हुए सरकार अब इंडक्शन कुकर जैसे वैकल्पिक माध्यमों के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, "स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन हम घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं।" होटल और रेस्तरां जैसी वाणिज्यिक एलपीजी खपत को शुरू में सीमित किया गया था, लेकिन बाद में इसे उनके सामान्य उपयोग का एक-पांचवां हिस्सा बहाल कर दिया गया। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमें विकल्पों पर विचार करना होगा।''
आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर को भराने के लिए अचानक घबराहट के कारण हुई बुकिंग 13 मार्च को 87.7 लाख तक पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद इसमें कमी आई है और सोमवार को यह लगभग 70 लाख बुकिंग पर आ गई। युद्ध से पहले यह संख्या लगभग 55 लाख थी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति में तेजी जारी है।
उन्होंने कहा, ''हमने 13 मार्च को 62.5 लाख सिलेंडर और 14 मार्च को 60 लाख सिलेंडर वितरित किए... इसकी तुलना में संघर्ष से पहले के समय में 50 लाख सिलेंडर वितरित किए जाते थे।" उन्होंने कहा कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के बावजूद अभी भी लोग घबराकर बुकिंग करा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एलपीजी का घरेलू उत्पादन पांच मार्च के स्तर की तुलना में 38 प्रतिशत बढ़ गया है। शर्मा ने बताया कि एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए सरकार वाणिज्यिक और घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं को पीएनजी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। शहरी गैस वितरण कंपनियां प्रोत्साहन और त्वरित कनेक्शन की पेशकश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए शहरों में गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार भी कर रही है। केंद्र सरकार ने 16 मार्च को सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर शहरी गैस परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने का निर्देश दिया है। सरकार ने उनसे बड़ी शहरी गैस पाइपलाइन के लिए लंबित आवेदनों को स्वतः स्वीकृत करने, नई शहरी गैस परियोजनाओं को 24 घंटे के भीतर मंजूरी देने, सड़क मरम्मत शुल्क माफ करने और कार्य समयसारणी में ढील देने को कहा है। उन्होंने कहा, ''हालात अभी भी चिंताजनक हैं, लेकिन किसी भी एलपीजी वितरक के यहां आपूर्ति बंद नहीं हुई है।'' भारत की एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि आयात के लिए एक प्रमुख मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई के बाद बाधित हो गया है। उन्होंने बताया कि ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। वाणिज्यिक एलपीजी भंडारण राज्यों के पास रखा गया है और उन्हें इसका उपयोग प्राथमिकता के अनुसार तय करने को कहा गया है। बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड ने पहले ही वितरण दिशानिर्देश जारी किए हैं। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से यह जानना चाहा कि मृत खाताधारकों के बैंक खातों की जानकारी उनके वैध उत्तराधिकारियों को उपलब्ध कराने में क्या बाधा है, और इस संबंध में स्पष्ट नीति तैयार करने की जरूरत बताई। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पत्रकार सुचेता दलाल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस याचिका में मृत खाताधारकों के निष्क्रिय पड़े हुए जमा की जानकारी उनके उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्था बनाने का निर्देश देने की अपील की गई है। पीठ ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति अपने कई बैंक खातों का विवरण छोड़े बगैर मर जाता है, तो उसके वारिस उनमें जमा राशि के बारे में जानकारी कैसे जुटाएंगे? कानूनी वारिसों को जानकारी देने में क्या समस्या है? सरकार को इस पर नीति बनानी होगी।" याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि ऐसे खातों का विवरण सार्वजनिक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने भी "केंद्रीकृत और तलाश-योग्य डेटाबेस" बनाने की सिफारिश की है, जिससे लोग अपने दिवंगत परिजनों के खातों का पता लगा सकें। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वी वेंकटरमण ने कहा कि यदि कोई वास्तविक वारिस सामने आता है तो उसे 'जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष' से राशि वापस कर दी जाती है। आरबीआई ने यह कोष 2014 में बनाया था जिसमें बैंकों की निष्क्रिय जमाओं को रखा जाता है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र और आरबीआई को इस मामले में नए हलफनामे दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। याचिका में कहा गया है कि मार्च, 2021 तक 'जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष' में 39,264 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा थी, लिहाजा ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सरल प्रक्रिया की जरूरत और भी बढ़ जाती है। -
नयी दिल्ली. हाल में चयनित सिविल सेवा के सभी उम्मीदवारों से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया पर अपना प्रचार करने और अनुचित पोस्ट डालने से बचें। इस संबंध में उनके लिए एक आधिकारिक परामर्श जारी किया गया है। उन्हें यह भी कहा गया है कि वे वाणिज्यिक और संस्थागत समर्थन से पेशेवर तौर पर दूरी बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी उपलब्धियों का निजी लाभ या प्रचार के लिए इस्तेमाल न किया जाए। परामर्श में कहा गया है कि सरकारी सेवक सार्वजनिक चेहरा होते हैं और उनका आचरण निरंतर सार्वजनिक निगरानी में रहता है। इसमें कहा गया है, "आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आम जनता, जन प्रतिनिधियों, निगम संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों, सरकारी कर्मचारियों, अन्य सभी गणमान्य व्यक्तियों और समाज के संवेदनशील वर्गों के साथ आपका व्यक्तिगत आचरण और आधिकारिक एवं सामाजिक संपर्क विनम्र, सम्मानजनक, गरिमापूर्ण और उचित हो।" सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)-2025 के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों के लिए परामर्श जारी किया गया है। यह परामर्श मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) द्वारा जारी किया गया है, जो नौकरशाहों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है। परीक्षा परिणाम छह मार्च को घोषित किया गया था। इसमें कहा गया, ''सोशल मीडिया जीवन के कई पहलुओं में व्याप्त है, और अकादमी भी संस्थागत स्तर पर प्रभावी प्रशासन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के महत्व को पहचानती है, लेकिन किसी भी प्रकार के सोशल मीडिया का इस्तेमाल जो आत्मप्रचार बढ़ावा देता है, उसे दृढ़ता से हतोत्साहित किया जाता है।" परामर्श में कहा गया कि सोशल मीडिया पर की गई या अग्रसारित टिप्पणियां और पोस्ट भी सेवा पर प्रभाव डालेंगी। इसमें कहा गया, "इसलिए, इस स्तर पर भी, आपको ऐसी पोस्ट करने से बचना चाहिए जो सेवा या उसके सदस्यों के लिए मानहानिकारक हो सकती हैं। ऐसी सामग्री पोस्ट करने में सावधानी और समझदारी दिखाएं जिसे सेवा के अधिकारी/सदस्य के लिए गैर पेशेवर या अनुचित माना जा सकता है।" परामर्श में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे बयान पोस्ट करने से विशेष रूप से बचना चाहिए। इसमें "सोशल मीडिया शिष्टाचार" पर कहा गया है, "जो कुछ भी आप पोस्ट करने जा रहे हैं, उसके संभावित प्रभाव पर विचार करें। बल्कि, किसी भी प्रकार की ऐसी सामग्री पोस्ट करने से बचना ही बेहतर है, क्योंकि इससे व्यक्तिगत/संस्थागत स्तर पर गलतफहमी पैदा हो सकती है।" अकादमी ने कहा, "एक भावी सिविल सेवक के रूप में आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप हर समय एक आदर्श व्यक्ति बनें।" यह भी कहा गया कि उनके पिछले कार्य उनके पूरे करियर में उनके चरित्र और व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होंगे। सीएसई 2025 के परिणाम की घोषणा के दिन जारी सलाह में कहा गया है, "आपको आज से ही अधिकारी के लिए उपयुक्त अनुकरणीय आचरण प्रदर्शित करना शुरू कर देना चाहिए और अपने प्रशिक्षण शुरू होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। आप आगे चलकर शासन और सार्वजनिक सेवा मुहैया कराने वाले संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होंगे।" कुल 958 उम्मीदवार परीक्षा में उत्तीर्ण हुए और उन्हें विभिन्न केंद्रीय सिविल सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया। इसमें 659 पुरुष और 299 महिलाएं शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने मंगलवार को कहा कि जनगणना-2027 दिव्यांगता की सभी 21 मान्यता प्राप्त श्रेणियों का सटीक डेटा एकत्रित करने और दिव्यांगों से जुड़े नीति निर्माण को सक्षम बनाने का 'ऐतिहासिक अवसर' प्रदान करेगी। आठवले ने ''दृश्यमान से परे : दिव्यांगता समावेशन पर सांसदों के लिए मार्गदर्शिका'' के लोकार्पण अवसर पर कहा कि 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के लागू होने के बाद पहली बार इस तरह का डेटा एकत्रित किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेहतर गणना और भिन्न-भिन्न प्रकार के डेटा सरकार को प्रभावी कार्यक्रम बनाने में मदद करेगा और दिव्यांग व्यक्तियों के बेहतर समावेशन को सुनिश्चित करेगा। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने कहा, ''दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 एक महत्वपूर्ण सुधार कानून था, जिसने दिव्यांगता की 21 श्रेणियों को मान्यता दी, जो कल्याण-आधारित दृष्टिकोण से अधिकार-आधारित दृष्टिकोण का प्रमाण है तथा इसके जरिये भारत को भी संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांग अधिकार सम्मेलन के अनुरूप बनाया जा सका।'' नेशनल सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल्स (एनसीपीईडीपी) के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि यह मार्गदर्शिका सांसदों को कानूनी प्रावधानों को व्यावहारिक नीतियों में बदलने और दिव्यांग व्यक्तियों की भविष्य की बाधाओं को दूर करने में मदद के उद्देश्य से तैयार की गई है। उन्होंने कहा, ''यह पुस्तक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को वास्तविक विधायी कार्रवाई में बदलने और भारतीय लोकतंत्र में समावेशन को वास्तविक अनुभव बनाने में मदद करेगी।'' इस कार्यक्रम में समावेशी स्वास्थ्य कवरेज और राजनीतिक भागीदारी पर एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें केंद्रीय दिव्यांगता सलाहकार बोर्ड के सदस्य ईटी मोहम्मद बशीर, लोकसभा सदस्य ई. राजेंद्र, राज्यसभा सदस्य फौज़िया खान, भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान, भाजपा युवा संगठन की उपाध्यक्ष नेहा जोशी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनिश गवांडे शामिल थे।
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गुवाहाटी. असम विधानसभा चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए आयकर विभाग ने यहां चौबीसों घंटे संचालित होने वाला एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। बयान में नागरिकों से आग्रह किया गया कि वे चुनाव के संबंध में नकदी, कीमती धातुओं या अन्य मूल्यवान वस्तुओं की संदिग्ध आवाजाही या वितरण के बारे में किसी भी विश्वसनीय जानकारी के साथ नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। इसमें कहा गया कि सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
असम विधानसभा के 126 सदस्यों के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे और वोटों की गिनती चार मई को होगी।
बयान में कहा गया है कि ''चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने'' में निर्वाचन आयोग की सहायता करने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। -
नयी दिल्ली. भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के बाद मंगलवार तड़के स्वदेश पहुंच गया। युद्ध क्षेत्र में फंसे अन्य 22 भारतीय जहाजों को सुरक्षित लाने के प्रयास जारी हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि एलपीजी टैंकर नंदा देवी, मंगलवार तड़के लगभग 2:30 बजे गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। सोमवार को पहला जहाज, शिवालिक गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पर पहुंचा था।
दोनों जहाज पर लगभग 92,712 टन एलपीजी हैं। यह देश में एक दिन की खाना पकाने की गैस की आवश्यकता के बराबर है। सिन्हा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''दोनों जहाजों ने एलपीजी उतारना शुरू कर दिया है। इस समय, नंदा देवी मुख्य जहाज से अपने छोटे जहाजों में एलपीजी स्थानांतरित कर रहा है।'' उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय जहाजों से जुड़ी कोई भी घटना नहीं हुई है। एलपीजी लाने वाले दोनों जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था। इसके साथ ही युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या चार हो गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 611 नाविकों को ले जा रहे 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर संचालन पर करीबी नजर रख रहा है। फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला संकरा जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद प्रभावी रूप से बंद हो गया है। जब युद्ध शुरू हुआ था, तब जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में 24 और पूर्वी हिस्से में चार जहाज सहित कुल 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे। वर्तमान में, पश्चिमी हिस्से में 22 और पूर्वी हिस्से में दो जहाज बचे हैं। पूर्वी हिस्से में मौजूद जहाजों में से, कच्चे तेल का टैंकर जग लाडकी मंगलवार को लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चे तेल के साथ भारत पहुंचने वाला है। जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुका है और तंजानिया के रास्ते में है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारी क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से छह एलपीजी लाने वाले जहाज हैं, एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क कैरियर हैं। इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और उसमें कोई माल नहीं है और तीन नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में हैं। सिन्हा ने बताया कि पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दो एलपीजी टैंकर के चालक दल के साथ वीडियो कॉल के जरिये बातचीत की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उन्हें धन्यवाद देना और उनके द्वारा दी गई उत्कृष्ट सेवा की सराहना करना था। ''वे सभी अपनी 'यूनिफॉर्म' में थे और स्वस्थ और खुश दिख रहे थे।'' सोनोवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर इस बातचीत का जिक्र भी किया है।
उन्होंने कहा, ''भारतीय तट पर पहुंचने के बाद भारतीय ध्वज वाले एलपीजी पोत शिवालिक और नंदा देवी के बहादुर चालक दल से बातचीत की। फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए उनका आचरण बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में सतर्कता, समन्वय और जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करता है।'' सिन्हा ने कहा कि लगभग 3.18 लाख भारतीय नाविक हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत हैं। -
नयी दिल्ली. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहा होने के बाद पहली सार्वजनिक टिप्पणी में मंगलवार को कहा कि रासुका के तहत उनकी हिरासत को रद्द करना ''सभी के लिए फायदेमंद'' है और केंद्र ने लद्दाख के लोगों के साथ सार्थक संवाद के लिए विश्वास कायम करने की दिशा में पहल की है। वांगचुक ने पत्नी और एचआईएएल की सह-संस्थापक गीतांजलि जे अंगमो के साथ यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लद्दाख में विरोध प्रदर्शन का एकमात्र उद्देश्य रचनात्मक संवाद प्रक्रिया शुरू करना है। उन्होंने कहा, ''हमें अदालत में जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन सिर्फ जीत ही काफी नहीं थी। मैं सभी पक्षों के लिए फायदेमंद स्थिति चाहता हूं।'' वांगचुक ने सरकार की पहल को ''विश्वास कायम करने और सार्थक, रचनात्मक संवाद को सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम'' करार दिया। जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ''उन्होंने रचनात्मक और सार्थक संवाद का प्रस्ताव रखा है। यही हम चाहते थे, और इसके लिए हमें बहुत संघर्ष करना पड़ा, दिल्ली तक पैदल चलना पड़ा, अनशन पर बैठना पड़ा। लद्दाख में सभी आंदोलन संवाद प्रक्रिया शुरू करने के लिए हैं।'
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नयी दिल्ली. संसद की विदेश मामलों की समिति ने कहा है कि ''हाल के घटनाक्रम'' से भारत के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। हालांकि, समिति ने इस बात का स्वागत किया कि केंद्र इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के ''संपर्क में'' है। विदेश मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर विदेश मामलों की समिति की 12वीं रिपोर्ट मंगलवार को संसद में प्रस्तुत की गई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं।
समिति की यह टिप्पणी काफी मायने रखती है क्योंकि यह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या 'टैरिफ' नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों की पृष्ठभूमि में आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ''समिति ने पाया कि चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। जनवरी 2026 तक आवंटित राशि का पूरी तरह से उपयोग हो चुका था।'' विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया कि ''2026-27 के दौरान इस मद के तहत कोई राशि आवंटित नहीं की गई है क्योंकि भारत ने 2024 में हस्ताक्षरित मुख्य अनुबंध के अनुसार बंदरगाह उपकरणों की खरीद के लिए 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर के योगदान की अपनी प्रतिबद्धता पहले ही पूरी कर ली है।'' रिपोर्ट में कहा गया है, ''हाल के घटनाक्रम से चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं।''
समिति का मानना है कि चाबहार, भारत के लिए एक ''महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व का बंदरगाह'' है, क्योंकि यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करता है। यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा से जुड़ने के लिए भी एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। समिति ने कहा कि वह इस बात का स्वागत करती है कि ''भारत सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में है। रिपोर्ट के अनुसार, समिति चाहती है कि मंत्रालय इस संबंध में सभी योजनाओं और प्रगति की जानकारी समिति को देते रहे। सरकार ने पांच फरवरी को संसद को बताया था कि वह चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ नीतियों में हाल में हुए बदलावों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के ''संपर्क में'' है। - नयी दिल्ली. सरकार ने एक संसदीय समिति को बताया है कि जीसीएमएमएफ (जो अमूल ब्रांड के तहत डेयरी उत्पाद बेचता है) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के दूध संग्रह केन्द्रों को एक सहकारी ढांचे के तहत लाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों को उचित मुनाफ़ा मिले। सोमवार को, कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर बनी एक स्थायी समिति ने लोकसभा में सहकारिता मंत्रालय के लिए अनुदान मांगों (2026-27) पर एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया, ''समिति ने यह मुद्दा उठाया कि दूध खरीद से होने वाला मुनाफ़ा किसानों तक नहीं पहुंच रहा है, बल्कि बड़े सहकारी संगठन इसे हड़प रहे हैं और सभी क्षेत्रों से आने वाला पैसा उन राज्यों की ओर मोड़ा जा रहा है जहां ऐसे बड़े सहकारी संगठनों के मुख्यालय हैं।'' इस मुद्दे पर संसदीय समिति को दिए गए अपने लिखित जवाब में, मंत्रालय ने बताया कि ''यह सुनिश्चित करने के लिए कि मुनाफ़ा उन किसानों तक पहुंचे जिनसे दूध खरीदा जा रहा है,'' उसने गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के दूध संग्रह केन्द्रों (एमसीसी) और दूध पूलिंग केंद्रों (एमपीपी) को सहकारी ढांचे के तहत लाने की पहल की है। इस पहल के तहत, लगभग 45,000 एमसीसी या एमपीपी को बहुउद्देशीय ग्राम सहकारी समितियों (एम-वीसीएस) के रूप में पंजीकृत करने और सरदार पटेल सहकारी डेयरी महासंघ लिमिटेड (एसपीसीडीई) तथा राष्ट्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संगठन लिमिटेड (एनसीएमपीओएल) के सदस्यों के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव है। ये दोनों ही बहु-राज्यीय सहकारी समितियां हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ''समिति को विश्वास है कि ऐसे उपायों से गांव के स्तर पर किसानों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी, और समिति इस उपाय के परिणामों के बारे में राज्यवार जानकारी प्राप्त करना चाहेगी।'' समिति ने सहकारिता क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण बनाने की भी वकालत की। समिति ने कहा कि केंद्र सरकार को, राज्य सरकारों के परामर्श से, सहकारी चुनावी शासन को मज़बूत करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना चाहिए।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को भुगतान एग्रीगेटर कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर नियमों का पालन नहीं करने को लेकर 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। आरबीआई ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने एक एस्क्रो खाते से कुछ ऐसी निकासी की जिसकी नियमों के तहत अनुमति नहीं थी। कैशफ्री पर यह जुर्माना नौ मार्च के आदेश के तहत लगाया गया है। यह कार्रवाई अप्रैल, 2024 से जून, 2025 के बीच कंपनी के संचालन के संबंध में की गई वैधानिक जांच के बाद की गई। आरबीआई ने कहा कि उसने पहले कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और आरोप सही पाए जाने के बाद यह अर्थदंड लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई वैधानिक और नियामकीय अनुपालन में कमियों के आधार पर की गई है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर टिप्पणी करना नहीं है।
- जम्मू. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को तकनीकी रूप से मजबूत और मानवीय संवेदनाओं से युक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत चुनौतियों से जूझ रही दुनिया का मार्गदर्शन करने में अपना स्थान फिर से हासिल करे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बौद्धिक और नैतिक चेतना को भी समृद्ध करें। सिन्हा यहां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में महाराजा रणबीर सिंह की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "मानव कल्याण से प्रेरित भारत विश्व शांति और साझा समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। समय आ गया है कि भारत चुनौतियों से जूझ रही इस दुनिया का मार्गदर्शन करते हुए अपना स्थान पुनः प्राप्त करे।" इस अवसर पर उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालय के जम्मू परिसर का नाम बदलकर श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, "हमें अपने युवाओं को एक सशक्त भारत के निर्माण के लिए तैयार करना होगा, जो देशों को अटूट एकता में जोड़ सके और उनमें विश्व शांति तथा मानव कल्याण की भावना को प्रज्वलित करे।" उन्होंने क्षेत्र में गुरुकुल, संस्कृत पाठशालाओं और वेद पाठशालाओं की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता देने का भी आश्वासन दिया।
- गांधीनगर. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को यहां आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत रक्षा और सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। सिंह ने कहा कि भारत आज अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है, जिससे रक्षा समाधानों की परिकल्पना और विकास के तरीके में बदलाव आ रहा है। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में रक्षा अताशे के लिए आयोजित दो-दिवसीय गोलमेज सम्मेलन को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत मानता है कि प्रौद्योगिकी प्रगति अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती। 'वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी परिदृश्य में आत्मनिर्भर भारत: नवाचार, निर्यात और संयुक्त प्रौद्योगिकी साझेदारी को गति देना' विषय पर आयोजित दो-दिवसीय सम्मेलन में अफ्रीका, एशिया, प्रशांत और कैरेबियन सहित 24 देशों के राजनयिक और रक्षा प्रतिनिधि शामिल हुए। सिंह ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ''पिछले एक दशक में, भारत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से प्रेरित होकर, हमारा दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर जुड़े रहते हुए आत्मनिर्भरता का निर्माण करना है।''उन्होंने कहा, ''भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवरहित प्रणालियों से लेकर अंतरिक्ष और उन्नत डिजिटल क्षमताओं तक, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है, जिससे रक्षा समाधानों की परिकल्पना और विकास के तरीके में बदलाव आ रहा है।'' रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी प्रगति अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती और साइबर जगत से लेकर हाइब्रिड खतरों तक, युद्ध के बदलते स्वरूप से गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि साझेदारी, सह-विकास, ज्ञान साझाकरण, प्रशिक्षण और सहयोगात्मक क्षमता निर्माण के माध्यम से ही स्थायी सुरक्षा का निर्माण होता है। सिंह ने कहा, ''विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा संबंधी गतिविधियों का भारत का बढ़ता नेटवर्क इसी विश्वास को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा कि भारत एक सुरक्षित, खुले और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए साझेदारों के साथ संवाद, संयुक्त अभ्यास और औद्योगिक सहयोग कर रहा है। सिंह ने कहा, ''यह मंच उन रणनीतिक विशेषज्ञों और भरोसेमंद साझेदारों को एक साथ लाता है जो रक्षा सहयोग के माध्यम से शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। उनकी उपस्थिति विश्वास और मित्रता की भावना को दर्शाती है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के जुड़ाव का मूल आधार है।'' रक्षामंत्री ने कहा कि यह गोलमेज सम्मेलन रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में संवाद, नवाचार और साझेदारी के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव और सामने आर रही सुरक्षा चुनौतियों के इस युग में सहयोग न केवल वांछनीय, बल्कि आवश्यक हो गया है। सिंह ने रक्षा अताशे की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये सैन्य, सरकार और रक्षा उद्योग के बीच एक सेतु का काम करते हैं और वैश्विक सुरक्षा सहयोग की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, भारत दुनिया का 'विश्व मित्र', एक भरोसेमंद दोस्त और भागीदार बनने की आकांक्षा रखता है।''
- नयी दिल्ली. दिल्ली सरकार तीन धार्मिक स्थलों जम्मू-कश्मीर के कटरा (वैष्णो देवी), राजस्थान के खाटू श्याम और उत्तर प्रदेश के अयोध्या के लिए अंतरराज्यीय राजकीय बस सेवाएं शुरू करने की योजना बना रही है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) जल्द ही अंतरराज्यीय परिचालन के लिए 17 मार्गों पर 50 वातानुकूलित बसों के बेड़े को शामिल करेगा और अंतरराज्यीय संपर्क बढ़ाएगा। सिंह ने कहा, ''सरकार अंतरराज्यीय संपर्क को मजबूत करने और नागरिकों के लिए आरामदायक और किफायती यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, हम महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के लिए बस सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं ताकि दिल्ली से श्रद्धालु देश भर के धार्मिक स्थलों तक आसानी से यात्रा कर सकें।''अधिकारियों के अनुसार, ये बसें राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ द्वारा निर्धारित मानक दरों के आधार पर संचालित होंगी। यहां जारी एक बयान के मुताबिक, ''नानकसर दिल्ली-गाजियाबाद बस टर्मिनल, दिल्ली-रेवाड़ी, दिल्ली-करनाल, दिल्ली-रोहतक, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-जेवर सहित कई अतिरिक्त अंतरराज्यीय मार्गों पर भी बस सेवा का विस्तार करने की योजना है। इससे दैनिक यात्रियों और क्षेत्रीय यात्रियों को सहूलियत होने की उम्मीद है।'' सिंह ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में रहने वाले पूर्वांचल के लोगों को सहूलियत देने के लिए दिल्ली और बिहार के बीच अंतरराज्यीय बस सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ''इन सेवाओं को शुरू करने और दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।'' अंतरराज्यीय परिवहन सेवाओं के विस्तार के तहत डीटीसी पहले ही दिल्ली-बड़ौत (उत्तर प्रदेश), दिल्ली-सोनीपत (हरियाणा), दिल्ली-धारूहेड़ा (हरियाणा) और दिल्ली-पानीपत (हरियाणा) सहित प्रमुख मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर रहा है।
- पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने द्विवार्षिक चुनाव में बिहार की पांचों सीटों पर जीत हासिल करते हुए क्लीन स्वीप किया। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार और राज्य विधानसभा के सदस्य नितिन नवीन के अलावा जिन अन्य उम्मीदवारों ने राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की उनमें केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर जद(यू), भाजपा के शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। रामनाथ ठाकुर राज्यसभा में लगातार तीसरी बार निर्वाचित हुए हैं, जबकि भाजपा के शिवेश कुमार के राज्यसभा पहुंचने से राज्य से संसद में पार्टी को दलित चेहरा मिलेगा। उपेंद्र कुशवाहा लगातार दूसरी बार संसद के उच्च सदन के लिए चुने गए हैं।जद(यू) के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा परिसर में 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, "पांचों उम्मीदवार जीत गए हैं। इनमें से चार उम्मीदवार पहली वरीयता के मतों के आधार पर निर्वाचित हुए, जबकि एक उम्मीदवार दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर विजयी घोषित किया गया।" हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पांचों में से किस उम्मीदवार को दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर जीत मिली। जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार ने नामांकन पत्र दाखिल कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की विधानसभा और विधान परिषद तथा लोकसभा के सदस्य रहने के बाद राज्यसभा का सदस्य बनने की उनकी इच्छा रही है। उनके इस अचानक फैसले से संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से मुख्यमंत्री पद पर आसीन कुमार के पद छोड़ने के बाद नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। लगातार पांचवीं बार बैंकिपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल करने वाले नितिन नवीन को अब राज्यसभा जाने के बाद इस सीट को छोड़ना होगा। परिणाम घोषित होने के बाद वह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत पार्टी के अन्य नेताओं के साथ विधानसभा पहुंचे।नवीन ने संवाददाताओं से कहा, "हमारी जीत राजग की एकजुटता का परिणाम है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभारी हूं जिन्होंने मुझे अपने गृह राज्य का संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया।" इन पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण एक दशक से अधिक समय बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान कराना पड़ा। वर्ष 2014 के बाद से बिहार में सभी राज्यसभा सदस्य निर्विरोध चुने जाते रहे हैं। दूसरी बार राज्यसभा पहुंचने की उम्मीद कर रहे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी के कारण पराजित हो गए। उन्हें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, हालांकि ये दोनों दल महागठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। सिंह को जीत के लिए कम से कम 41 विधायकों के मतों की आवश्यकता थी, लेकिन मतदान के दिन कम से कम चार विधायक-कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक अनुपस्थित रहे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि हमारे तीन विधायकों को 13 मार्च से भाजपा के इशारे पर नजरबंद रखा गया था। हम अनुपस्थित विधायकों से स्पष्टीकरण मांगेंगे और पार्टी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।" बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के कुल छह विधायक हैं। इनमें से मनोज विश्वास, सुरेंद्र प्रसाद और मनोहर प्रसाद मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे।कांग्रेस ने यह भी घोषणा की कि वह मंगलवार को अपने ऐतिहासिक सदाकत आश्रम स्थित कार्यालय के बाहर 'वोट चोर, विधायक चोर' की नीति के विरोध में प्रदर्शन करेगी। राजद के एकमात्र अनुपस्थित विधायक फैसल रहमान ने एक निजी समाचार चैनल से कहा, "मैं अचानक बीमार पड़ गया था और इलाज के लिए दिल्ली में हूं। मैंने अपनी स्थिति के बारे में कल ही नेता प्रतिपक्ष और हमारी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को जानकारी दे दी थी।" तेजस्वी यादव मतगणना पूरी होने के समय के आसपास देर शाम विधानसभा पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यदि हमारे कुछ विधायकों ने विश्वासघात नहीं किया होता तो हमारा उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव जीत जाता। अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इस पर बाद में फैसला किया जाएगा। यह भाजपा द्वारा धनबल और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है, जिसने कई राज्यों में इस तरह के हथकंडे अपनाए हैं।" उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया, "यह परिणाम तेजस्वी यादव के लिए करारा तमाचा है, जिन्होंने अपने विधायकों को मनाने के बजाय उन्हें एक होटल में कैद कर रखा।"--
- लखनऊ. रक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय द्वारा आयोजित 'नेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रेटजिक स्टडी' कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय सशस्त्र बलों, विभिन्न देशों की सेनाओं तथा भारत सरकार की सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद किया। राज्य सरकार द्वारा यहां जारी एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 'ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी' उत्तर प्रदेश के परिवर्तन के दो प्रमुख आधार बने हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारे का तेजी से विकास हो रहा है और लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित है, जो एक एंकर यूनिट के रूप में अनेक छोटे उद्यमों को अवसर प्रदान करेगी।बयान के अनुसार संवाद के दौरान अधिकारियों ने यह प्रश्न किया कि भारत में अनेक अच्छी नीतियां बनती हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन अक्सर नहीं हो पाता। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की नियमित निगरानी, क्षेत्र का निरीक्षण और जवाबदेही तय करने से ही परिणाम प्राप्त होते हैं। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नयी दिल्ली के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता ने किया।
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय और विदेशी एयरलाइंस ने हजारों उड़ानें रद्द कर दी हैं। यह जानकारी सोमवार को केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू ने लोकसभा में दी। संसद के चल रहे बजट सत्र के छठे दिन बोलते हुए मंत्री ने बताया कि भारतीय एयरलाइंस ने 4,335 से ज्यादा उड़ानें रद्द की हैं, जबकि विदेशी एयरलाइंस ने करीब 1,187 उड़ानें रद्द की हैं।
मंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार और एयरलाइंस की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जब किसी संघर्ष प्रभावित क्षेत्र का एयरस्पेस बंद हो जाता है, तो वहां उड़ानें संचालित करना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा, “भारतीय एयरलाइंस ने 4,335 उड़ानें और विदेशी एयरलाइंस ने 1,187 तक उड़ानें रद्द की हैं। हमें सबसे पहले सुरक्षा का ध्यान रखना होता है। अगर किसी क्षेत्र का एयरस्पेस बंद है तो वहां उड़ानें चलाने का कोई सवाल ही नहीं है।”हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति से उड़ानों पर असर पड़ा है, फिर भी इस दौरान काफी संख्या में यात्रियों ने यात्रा की है। मंत्री के अनुसार, तनाव के दौरान भी लगभग 2,19,780 यात्रियों ने हवाई सफर किया। राममोहन नायडू ने बताया कि भारत का विमानन नियामक ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए)’ और नागर विमानन मंत्रालय प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके।उन्होंने कहा कि जब उन क्षेत्रों का एयरस्पेस फिर से खुल जाएगा, तभी उड़ान सेवाएं सामान्य रूप से शुरू हो पाएंगी, क्योंकि अभी कई इलाकों में प्रतिबंध लागू हैं। इस बीच पिछले सप्ताह नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया था कि भारत में इस समय प्रमुख घरेलू एयरलाइंस में 11,000 से अधिक पायलट काम कर रहे हैं, जिनमें करीब 1,900 महिला पायलट भी शामिल हैं।उन्होंने 12 मार्च को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया था कि भारतीय एयरलाइंस में कुल 11,394 पायलट कार्यरत हैं, जिनमें 1,871 महिला पायलट हैं। -
नई दिल्ली। भारत सरकार के जलमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय झंडे वाले 22 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में मौजूद हैं जिन पर 611 नाविक सवार हैं और पिछले 24 घंटे में किसी भी तरह के हादसे की खबर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी भी यूएई से 14 मार्च को रवाना हो चुका है। प्रेस ब्रीफिंग में ये जानकारी दी गई।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया, “शिवालिक एलपीजी कैरियर, जो फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर आ चुका है। ” उन्होंने बताया कि जहाज के पहुंचने से पहले ही बंदरगाह पर सभी जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया, प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग और बाकी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं, ताकि इस जहाज से माल उतारने में कोई विलंब न हो।राजेश कुमार सिन्हा ने विश्वास दिलाया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा,” पिछले 24 घंटों में किसी तरह की घटना की सूचना नहीं मिली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर जहाज और उसके क्रू मेंबर के साथ संपर्क बना हुआ है। फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं।”सिन्हा ने बताया कि यूएई से चली शिप 17 मार्च तक क्रूड लेकर भारत पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा, “भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी’ ने 14 मार्च को यूएई से रवाना होकर करीब 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर यात्रा शुरू की है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह जहाज कल मुंद्रा बंदरगाह पहुंच जाएगा।”ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संघर्ष में फंसे नागरिकों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमारे करीब 90 नागरिक ईरान से जमीन के रास्ते अजरबैजान पहुंचे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने मदद की। दूतावास ने उन्हें वीजा दिलाने और जरूरी इमिग्रेशन औपचारिकताएं पूरी कराने में सहयोग किया।”उन्होंने कहा, “जिन 550 लोगों के ईरान से आर्मेनिया पहुंचने की बात हमने पहले बताई थी, उनमें 284 लोग ऐसे हैं जो ईरान तीर्थ यात्रा पर गए थे। ये लोग फिलहाल इन दोनों देशों में मौजूद हैं। इनमें से कुछ भारत लौट चुके हैं और बाकी लोग अगले कुछ दिनों में लौट आएंगे।” जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास सभी कठिन हालात के बावजूद पूरी तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा,” पिछले कुछ दिनों में दूतावास ने तेहरान के बाहर मौजूद भारतीय छात्रों को भी ज्यादा सुरक्षित शहरों में पहुंचाने में मदद की है।” -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय जहाज शिवालिक एलपीजी कैरियर गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका है। यह कतर से गैस लेकर भारत पहुंचा है। यह जहाज सोमवार शाम 5 बजे गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा, जिसकी जानकारी पहले ही शिपिंग मंत्रालय ने प्रेस से साझा कर दी थी।
शिवालिक करीब 45 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर पहुंचा है, जो लगभग 32 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर बताई जा रही है। यह जहाज 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर रवाना हुआ था। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच यह भारत पहुंचने वाला पहला एलपीजी जहाज है।सोमवार को भारत सरकार के मंत्रालयों की प्रेस ब्रीफिंग में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया, “शिवालिक एलपीजी कैरियर, जो फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचा।” इसके साथ ही सिन्हा ने विश्वास दिलाया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 24 घंटों में किसी तरह की घटना की सूचना नहीं मिली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर जहाज और उसके क्रू मेंबर के साथ संपर्क बना हुआ है। फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं।” सिन्हा ने बताया कि यूएई से चली शिप 17 मार्च तक क्रूड लेकर भारत पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा, “भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी’ ने 14 मार्च को यूएई से रवाना होकर करीब 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर यात्रा शुरू की है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह जहाज कल मुंद्रा बंदरगाह पहुंच जाएगा।” - नयी दिल्ली. पांच राज्यों की सत्ता की दौड़ में भाजपा के लिए चुनौती बड़ी है, लेकिन असली कसौटी पश्चिम बंगाल में है जहां पार्टी ममता बनर्जी की मजबूत तृणमूल मशीनरी से भिड़ने के लिए तैयार है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2021 के चुनावों में भाजपा ने प्रमुख विपक्षी दल के रूप में अपनी पकड़ मजबूत की और 294 सदस्यीय विधानसभा में उसकी सीट की संख्या 2016 में मात्र तीन से बढ़कर 77 हो गई। चुनावी रणनीति में नए बदलाव के साथ, भाजपा इस बार ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ फैली जनविरोधी लहर का लाभ उठाकर तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में आश्वस्त है। पार्टी राज्य में भ्रष्टाचार और घुसपैठ के मुद्दों को उठाकर जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की भी कोशिश कर रही है। तृणमूल पश्चिम बंगाल में लगातार 15 वर्षों से सत्ता में है।हालांकि, भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में किसी स्थानीय करिश्माई नेता की कमी है। जहां भाजपा लड़ाई जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है, वहीं ममता बनर्जी राज्य में एक मजबूत और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक चेहरा बनी हुई हैं। असम में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में अपनी शासन व्यवस्था और संगठनात्मक शक्ति का भरोसा लेकर लगातार तीसरी जीत हासिल करने को आश्वस्त है। लेकिन कांग्रेस नीत विपक्ष सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय शिकायतों का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा को अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों के प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। साथ ही छह समुदायों के लंबे समय से लंबित अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की मांग जैसे मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। दक्षिण में भाजपा केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल में पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी, लेकिन हाल के नगर निकाय चुनावों में मिली सफलता से इस बार कुछ बढ़त की उम्मीद है। राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नीत यूडीएफ और माकपा नीत एलडीएफ के बीच रहेगा।
- नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने केंद्रीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों को पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान काले धन, मादक पदार्थों और अन्य अवैध प्रलोभनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने और "सक्रिय" उपाय करने का निर्देश दिया है। निर्वाचन आयोग ने रविवार को यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्यों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। संवाददाता सम्मेलन के तुरंत बाद, निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आयकर विभाग के लिए), प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय आसूचना इकाई, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो और राजस्व आसूचना निदेशालय सहित अन्य विभागों को अलग-अलग सूचनाएं जारी कीं। इसने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जैसी बलों को पत्र भेजकर उनसे सतर्कता बढ़ाने और विशेष टीमें तैनात करने को भी कहा ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से, अवैध नकदी और अन्य प्रलोभनों के इस्तेमाल के बिना आयोजित किए जा सकें। आयोग ने सीबीडीटी से इन चुनावी राज्यों में आयकर जांच ईकाई को निर्देश देने को कहा कि वे हवाई अड्डों, प्रमुख रेलवे स्टेशन, होटल, फार्म हाउस, हवाला एजेंट और दलालों पर नजर रखने के लिये टीम तैनात करें ताकि "बेहिसाब" नकदी की जांच की जा सके। इसने आयकर विभाग से इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हवाई अड्डों पर अपनी हवाई खुफिया इकाइयों (एआईयू) का उपयोग करके निजी जेट या वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से नकदी की आवाजाही की जांच करने को कहा। निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया, "यदि आयकर विभाग को 10 लाख रुपये से अधिक की कोई भी नकदी प्राप्त होती है, तो वे आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएंगे...।" आयोग ने वित्तीय आसूचना इकाई को संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) साझा करने और नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवारों द्वारा की गई घोषणाओं के संबंध में उनकी संपत्ति के बारे में जानकारी भेजने का निर्देश दिया। इसने एनसीबी और डीआरआई को मादक पदार्थों और नकली मुद्रा पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया, जिनका इस्तेमाल इन चुनावों के दौरान प्रलोभन के रूप में किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने ईडी को "धन शोधन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने" का निर्देश दिया।
- भवानीपटना (ओडिशा). कालाहांडी जिले में रविवार को एक संभागीय समिति सदस्य सहित ग्यारह माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि कालाहांडी जिला मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया और अपने हथियार ओडिशा के डीजीपी वाई बी खुरानिया, एडीजी (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए। संभागीय समिति सदस्य (डीसीएम) नकुल सहित 11 माओवादी प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के बीजीएन (बंसधारा, घुमसर, नागावली) संभाग से संबंधित हैं। महाराष्ट्र के मूल निवासी नकुल पर ओडिशा राज्य समिति के डीसीएम के रूप में 22 लाख रुपये का इनाम था, वहीं अन्य 10 माओवादी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। माओवादी समूह के 11 सदस्यों में एक डीसीएम, पांच क्षेत्रीय समिति सदस्य (एसीएम) और पांच पार्टी सदस्य (पीएम) शामिल थे। इन सभी पर कुल मिलाकर 63 लाख रुपये से अधिक का इनाम था। सभा को संबोधित करते हुए डीजीपी खुरानिया ने कहा कि माओवादियों का आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में वामपंथी उग्रवादी विचारधारा के लगातार कमजोर होते प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के निरंतर अभियान के कारण इस क्षेत्र में माओवादियों का आधार कमजोर हुआ है। डीजीपी ने कहा, "आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाएंगे, जिनमें वित्तीय सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं, ताकि वे सम्मान के साथ समाज में फिर से जुड़ सकें।"
- पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में रविवार को एक कार के गहरी खाई में गिरने से वाहन में सवार तीन लोगों की मौत हो गयी और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि हादसा जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर बंगापानी के पास तड़के उस समय हुआ, जब मुनस्यारी जाते समय कार अनियंत्रित होकर 20 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे मुनस्यारी थानाध्यक्ष अनिल आर्य ने बताया कि हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ा। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान अंकित पांडेय (28), आयुष पंत (29) और लक्ष्मण सिंह नेगी (35) के रूप में हुई है। आर्य के अनुसार, कार में सवार एक अन्य व्यक्ति देवेंद्र भट्ट दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) का कनेक्शन रखने वाले वाले परिवारों के लिए सब्सिडी वाला एलपीजी कनेक्शन रखने या लेने पर रोक लगा दी है। इस बीच, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में संकट के चलते क्षेत्र के नियामक ने शहर गैस वितरण कंपनियों से अपने पीएनजी ढांचे का विस्तार तेजी से करने को कहा है, जिससे रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव कम किया जा सके। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 14 मार्च को जारी एक अधिसूचना में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति एवं वितरण नियमन) आदेश-2000 में बदलाव किया है। इसके तहत अब पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए अपने घरेलू एलपीजी कनेक्शन को 'सरेंडर' करना जरूरी हो गया है। संशोधित आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां और वितरक उन उपभोक्ताओं को भरा गैस सिलेंडर नहीं देंगे, जिनके पास पहले से एलपीजी कनेक्शन हैं। आदेश में कहा गया, ''कोई भी व्यक्ति जिसके पास पीएनजी कनेक्शन है और जिसके पास घरेलू एलपीजी कनेक्शन भी है, वह घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं रखेगा, या किसी भी सरकारी पेट्रोलियम कंपनी से या उनके वितरक के जरिये भरा हुआ एलपीजी सिलेंडर नहीं लेगा। ऐसे लोगों को तुरंत अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन 'सरेंडर' करना होगा।'' सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां संशोधित आदेश के तहत पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं को खाली एलपीजी सिलेंडर के बदले भरा हुआ सिलेंडर नहीं देंगी। इस कदम का मकसद उन घरों के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देना है जिनके पास पाइप के जरिये गैस की आपूर्ति की सुविधा नहीं है। भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी की जरूरत को आयात से पूरा करता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई से पहले भारत का आधे से ज़्यादा कच्चे तेल का आयात, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85-90 एलपीजी आयात सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था। इस युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से कच्चा तेल मंगाकर आपूर्ति में व्यवधान को कुछ हद तक ठीक किया है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति कम कर दी गई है और होटल और रेस्तरांओं को भी एलपीजी की उपलब्धता कम हो गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने शहर गैस वितरण कंपनियों से घरों को घरेलू पीएनजी कनेक्शन देने के काम में तेजी लाने और उन इलाकों में उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने को कहा है जहां पाइपलाइन का ढांचा पहले ही बिछाया जा चुका है।






















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