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नयी दिल्ली. राशन की दुकानों के जरिये कम टूटे हुए दाने वाले बेहतर गुणवत्ता के चावल आपूर्ति करने के सरकार के फैसले को सभी राज्यों में चरणों में लागू किया जाएगा ताकि बदलाव आसानी से हो सके और इस कदम से सालाना लागत में 2,161 करोड़ रुपये की कमी आएगी। बुधवार को, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने राशन की दुकानों के जरिये 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का फैसला किया। इसके लिए कुल आपूर्ति में टूटे हुए चावल का प्रतिशत कम किया जाएगा। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'एक्स' पर पोस्ट में जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने राशन की दुकानों के जरिये आपूर्ति किए जाने वाले टूटे हुए चावल की सीमा को कम करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड लगाया जाएगा ताकि उनकी ट्रेसिबिलिटी (ट्रैक करने की सुविधा) सुनिश्चित हो सके। इससे परिवहन, भंडारण और रखरखाव की लागत कम होगी। कच्चे चावल के लिए, सीमा को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। उसना चावल के लिए, इसे 16 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को एक बयान में, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि सीसीईए ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (जीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक अहम सुधार को मंजूरी दी है। इस सुधार में चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड लगाना शामिल है ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी हो सके। इससे पीडीएस में पारदर्शिता, जवाबदेही और भंडार प्रबंधन मजबूत होगा और साथ ही रिसाव को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
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नयी दिल्ली. खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशियाई खेल कोई 'एक्सपोजर ट्रिप' नहीं है और पदक उम्मीदों पर ही फोकस रखते हुए इस बार 600 से कम सदस्यीय दल ही भेजा जायेगा । खेलमंत्री ने यहां मीडिया से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि जापान में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में महज भागीदारी के लिये लंबा चौड़ा दल नहीं भेजा जायेगा। मांडविया ने कहा ,'' एशियाई खेल कोई एक्सपोजर ट्रिप नहीं है । यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिये मंच है । इसमें पहले दौर में बाहर होने के लिये किसी को भेजने का कोई फायदा नहीं है। मैं बार बार कहता आया हूं कि अच्छा प्रदर्शन करने वालों के लिये ही भारतीय दल में जगह होगी।' उन्होंने कहा, एक्सपोजर कहीं और से भी हासिल किया जा सकता है, एशियाई खेल उसके लिये नहीं हैं । सिर्फ नौकरी पाने के लिये भागीदारी के मकसद से जाने के इच्छुक लोगों के नाम पर मंजूरी नहीं दी जायेगी।
उन्होंने कहा ,'' इस बार चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती गई है । इक्के दुक्के मामलों को छोड़कर कहीं कोई विवाद नहीं है और ये मामले भी सुलझ जायेंगे । चयन के मानदंडों के आधार पर ही दल चुना गया है । नौकरी पाने के लिये किसी को एशियाई या राष्ट्रमंडल खेल दल में शामिल करना या किसी के परिजन को सहयोगी स्टाफ बनाकर भेजना अब नहीं होगा ।'' मांडविया ने चयन प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए कहा कि महासंघों द्वारा चुने गए खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को आईओए और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आकलन के बाद खेल मंत्रालय से मंजूरी मिलने पर ही उसे आधिकारिक भारतीय दल का हिस्सा माना जायेगा । उन्होंने कहा ,' चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिये पर्यवेक्षक की मौजूदगी में आन कैमरा ट्रायल कराये गए हैं जिसके बाद चुने गए खिलाड़ियों की सूची एनएसएफ आईओ को भेजते हैं ।'' इसमें आगे कहा गया ,'' भारतीय ओलंपिक संघ इन सुझावों को खेल मंत्रालय के पास समीक्षा और स्वीकृति प्रक्रिया के लिये भेजता है । खेल मंत्रालय इसे साइ को आकलन के लिये भेजता है जिसके बाद साइ से मिलने वाली सूची को अंतिम मंजूरी दी जाती है ।'' एशियाई खेलों के लिये टीम चयन को लेकर प्रमुख विवादों में घुड़सवार अनुष अगरवाला का मामला है जिन्होंने टीम से बाहर रखे जाने को अदालत में चुनौती दी है । एक सूत्र ने बताया कि खेल मंत्रालय उन्हें टीम में रखे जाने के पक्ष में है । अगरवाला और सुदीप्ति हजेला ने अपनी याचिका में उन्हें टीम से बाहर रखने के भारतीय घुड़सवारी महासंघ की तदर्थ समिति के फैसले को चुनौती दी है । उनकी याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने खारिज कर दी हालांकि खंडपीठ उस पर सुनवाई कर रही है । सूत्र के अनुसार मंत्रालय अनुष को टीम में रखने के पक्ष में है । सूत्र ने कहा ,' उन्हें बाहर किये जाने के फैसले की समीक्षा की जा रही है और मंत्रालय का मानना है कि उसे मौका मिलना चाहिये ।'' मंत्रालय ने यह भी कहा कि चयन ट्रायल के बाद किसी एनएसएफ द्वारा जारी की गई सूची सरकार द्वारा स्वीकृत भारतीय दल नहीं है । मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कोई भी सूची महासंघ की आंतरिक चयन प्रक्रिया के आधार पर तैयार की गई सुझाव की सूची है जिसके बाद आईओए और साइ आकलन करके मंत्रालय को सुझाव भेजते हैं और मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ ही एशियाई खेलों के लिये भारत के आधिकारिक दल का हिस्सा होंगे ।
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नयी दिल्ली/ हैदराबाद आधारित कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि देश के निजी तौर पर विकसित कक्षीय श्रेणी के पहले रॉकेट 'विक्रम-1' की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच का समय तय किया गया है। प्रक्षेपण की अंतिम तारीख श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में प्रक्षेपण स्थल पर परीक्षण से जुड़े काम पूरे होने और मौसम, सुरक्षा व 'रेंज क्लीयरेंस' पर निर्भर करेगी। स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना ने एक बयान में कहा, ''हम यह समझना चाहते हैं कि प्रक्षेपण से लेकर ऊपर जाने के हर चरण में रॉकेट कैसा प्रदर्शन करता है। इस डेटा को जमीन पर होने वाले परीक्षण के जरिए पूरी तरह से दर्शाया नहीं जा सकता।'' 'आगमन' नाम का यह अभियान प्रणोदन, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और पूरे प्रक्षेपण यान के प्रदर्शन से जुड़ा अहम डेटा इकट्ठा करेगा। विक्रम-1 सात मंजिला लंबा, बहु-चरणीय कक्षीय प्रक्षेपण यान है जो पूर्ण-कार्बन मिश्रित संरचना के साथ बनाया गया है और घरेलू स्तर पर विकसित प्रणोदन प्रणालियों द्वारा संचालित है।
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नयी दिल्ली. जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का बृहस्पतिवार को यहां राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे। यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे। तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े। तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। दोनों प्रधानमंत्री व्यापार, निवेश, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां 'हैदराबाद हाउस' में वार्ता करेंगे। औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। कई केंद्रीय मंत्रियों ने हाथ जोड़कर तकाइची का अभिवादन किया और उन्होंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बाद में हाथ मिलाया और तस्वीरें खिंचवाईं। तकाइची तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को नयी दिल्ली पहुंची थीं।
जापान की प्रधानमंत्री ने दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने आगमन की तस्वीरें साझा की थीं। मोदी ने उनकी पोस्ट साझा करते हुए लिखा, ''प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है।'' उन्होंने कहा, ''आपकी पहली भारत यात्रा पर आपकी मेजबानी करके हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं कल आपके साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा को लेकर उत्सुक हूं, जिससे भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी और मजबूत होगी। हम अपने संयुक्त प्रयासों के जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उसके बाहर शांति, स्थिरता एवं समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।'' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा था कि यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ''महत्वपूर्ण कदम'' है। विदेश मंत्रालय ने कहा था, ''शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा करने और उन्हें मजबूत बनाने के साथ-साथ साझा हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा।'' - नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और साधु-संतों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जम्मू की पुरानी मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से बड़ी संख्या में साधु-संतों का जत्था गुरुवार को पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। यात्रा पर निकलने से पहले संतों और श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के जयकारे लगाए और सुखद व सुरक्षित यात्रा की कामना की।यात्रा पर रवाना हो रहे एक संत ने समाचार एजेंसी से कहा कि अब तक का सफर बेहद सुखद रहा है। उन्होंने बताया कि साथी संतों और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा करने का अनुभव बेहद खास है।उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब मुझे बाबा अमरनाथ के दर्शन का अवसर मिल रहा है। संतों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और हर साल इसी समर्पण के साथ सेवा की जाती है।”पहली बार अमरनाथ यात्रा पर निकले एक श्रद्धालु ने भी यात्रा को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “यह मेरी पहली अमरनाथ यात्रा है। श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन और सेना के जवानों की ओर से जो सहयोग और सहायता मिल रही है, वह बेहद सराहनीय है।”एक अन्य संत ने बताया कि वह पिछले 32 वर्षों से लगातार अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी सरकार ने यात्रियों के लिए बहुत अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। खास तौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए की गई सुविधाएं काफी बेहतर हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है।मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के तट पर स्थित जबलपुर से आए एक संत ने बताया कि यह उनकी तीसरी अमरनाथ यात्रा है।उन्होंने कहा, “मैं बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लेने आया हूं। यात्रा के लिए सरकार ने शानदार तैयारियां की हैं और सभी व्यवस्थाएं बेहद अच्छी हैं।”इस मौके पर एक अन्य संत ने अमरनाथ यात्रा को आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा, “हम सभी बेहद उत्साहित हैं। यह हमारी ‘कैलाश यात्रा’ का पहला चरण है। अंतिम चरण जम्मू के हरमुख कैलाश में पूरा होगा, जब वहां की यात्रा शुरू होगी। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।”उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने हर स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं की हैं, जिससे सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सहज तरीके से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आगे बढ़ सकें।अमरनाथ यात्रा को लेकर पूरे जम्मू क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और साधु-संतों में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर गहरा उत्साह और आस्था साफ दिखाई दे रही है।
- नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताए जाने के बाद Meta ने कहा है कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, सेलिब्रिटी और Meta के सत्यापित (Verified) अकाउंट्स के नाम सुरक्षित (Reserved) रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल वास्तविक और अधिकृत व्यक्ति या संस्था ही इस्तेमाल कर सके।सरकार ने इससे पहले Meta को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर यूजरनेम फीचर पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा था।साथ ही निर्देश दिया था कि सरकार के साथ परामर्श पूरा होने तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।WhatsApp के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने लोगों को अपना पसंदीदा यूजरनेम सुरक्षित (Reserve) करने का विकल्प देने की घोषणा की है, लेकिन यह सुविधा अभी लाइव नहीं हुई है और इसे इस वर्ष धीरे-धीरे उपलब्ध कराया जाएगा।प्रवक्ता के अनुसार, प्रतिरूपण (Impersonation) रोकने के लिए सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, सेलिब्रिटी और Meta के वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़े नाम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं। इनके जैसे मिलते-जुलते (Lookalike) नामों को भी आरक्षित किया गया है, ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके।फोन नंबर रहेगा जरूरीWhatsApp ने स्पष्ट किया कि यूजरनेम फीचर आने के बाद भी प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के लिए फोन नंबर अनिवार्य रहेगा।कंपनी का कहना है कि यूजरनेम फीचर में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय जोड़े गए हैं।इन सुरक्षा उपायों का होगा इस्तेमालWhatsApp के मुताबिक:-किसी यूजर को संदेश भेजने के लिए उसका सटीक यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।-नए अकाउंट कितने लोगों को संदेश भेज सकते हैं, इसकी सीमा तय होगी।-किसी का यूजरनेम या सुरक्षा कुंजी (Username Key) बार-बार अनुमान लगाने की कोशिशों को रोका जाएगा।-संदिग्ध गतिविधियों और प्रतिरूपण के पैटर्न की पहचान कर ऐसे अकाउंट्स पर कार्रवाई की जाएगी।-पहली बार संदेश मिलने पर मिलेगी अतिरिक्त जानकारी-कंपनी ने बताया कि जब यह सुविधा शुरू होगी और कोई व्यक्ति पहली बार यूजरनेम के जरिए संदेश भेजेगा, तब प्राप्तकर्ता को यह जानकारी दिखाई जाएगी कि:-अकाउंट नया है या पुराना,-वह व्यक्ति आपकी संपर्क सूची में है या नहीं,-क्या आप दोनों किसी साझा ग्रुप में हैं,-और वह किस देश से संदेश भेज रहा है।-इससे उपयोगकर्ता तय कर सकेंगे कि उन्हें जवाब देना है या नहीं।-सरकार को प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े की चिंतासूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि यदि किसी नए फीचर के कारण ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान या भ्रामक गतिविधियों की आशंका बढ़ती है, तो संबंधित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की भी जवाबदेही तय होगी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि यूजरनेम सुविधा से मोबाइल नंबर साझा किए बिना बातचीत करना आसान होगा, लेकिन यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हुए तो इसका दुरुपयोग कर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगा भी जा सकता है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की प्राप्ति संभव है’ के भाव को व्यक्त करते हुए ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया है। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। जीवन में वही व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, जो धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहता है।” उन्होंने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ साझा किया, “नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति रोहित शुश्रुम। पापो नृषद्वरो जन इन्द्र इच्चरतः सखा चरैवेति।” ‘संस्कृत सुभाषितम्’ का अर्थ है कि जो मनुष्य निरंतर प्रयत्नशील रहता है, वह समृद्धि प्राप्त करता है, किंतु जो निष्क्रिय होकर बैठा रहता है, वह प्रगति से वंचित रह जाता है। निरंतर प्रयत्न करने वाले का भाग्य भी साथ देता है, इसलिए निरंतर कर्म करते रहो और आगे बढ़ते रहो।इससे पहले, पीएम मोदी ने ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के 11 साल पूरे होने पर ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया, “विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवन्नरः। सोऽध्वनः परमाप्नोति तद्विश्नोः परमं पदम्॥” सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस व्यक्ति की विवेकशील बुद्धि एक सतर्क, वैज्ञानिक सारथी के रूप में कार्य करती है और जिसका मन अनुशासित एवं नियंत्रित होता है, वह जीवन के पथ की जटिलताओं से परे जाकर अंतिम लक्ष्य तक पहुंचता है।पीएम मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया के 11 सालों की सफलता ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स पोस्ट’ में कहा, “डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों की सफलता से भारतवर्ष को एक नई पहचान मिली है। इससे नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाकर देश को नई ऊंचाई पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति दिखती है।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी हर दिन एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर करते हैं, जो हमारी संस्कृति, समाज और देश से जुड़े अलग-अलग विषयों पर आधारित होते हैं।
- नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को जम्मू से श्री अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। इसके साथ ही, इस सालाना यात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई। अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के जत्थे को रवाना करने से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पूजा अर्चना की। इस अवसर पर सांसद जुगल किशोर शर्मा, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा और भाजपा विधायक अरविंद गुप्ता मौजूद रहे। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “हर-हर महादेव। बाबा बर्फानी के पवित्र धाम की यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।” उन्होंने आगे लिखा, “श्री अमरनाथ जी की यात्रा एक आध्यात्मिक जागृति है। इस पवित्र रास्ते पर उठाया गया हर कदम बाबा अमरनाथ के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रमाण है। सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, मंगलमय और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण हो, ऐसी कामना है। भगवान शिव हम सभी पर कृपा बनाए रखें।”भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा, “इस बार यात्रा में पहले से अधिक तीर्थयात्रियों की संख्या नजर आती है। यहां व्यवस्थाओं की भी कोई कमी नहीं है। प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं की हैं। खासकर नगर निगम, पर्यटन विभाग, पुलिस और कई अन्य सरकारी एजेंसियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम किया है कि श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं।”उन्होंने कहा कि देशभर से श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही, भाजपा सांसद ने कहा, “मैं सभी से अपील करना चाहता हूं कि वे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आएं और उनका आशीर्वाद लें।”विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि तीर्थयात्रियों में अमरनाथ यात्रा को लेकर जोश और उत्साह है। आज पहला जत्था रवाना हुआ है। 28 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा के लिए हम बाबा बर्फानी से कामना करते हैं कि देश के अनेक प्रांतों से आए हुए श्रद्धालुओं की यात्रा को सुखद और सफल बनाएं। सुनील शर्मा ने कहा कि अमरनाथ यात्रा बहुत ही अनोखी यात्रा है। पूरे विश्व में इस तरह की यात्रा कहीं और नहीं है। इस धरती पर यह एक पवित्र स्थान है, जहां बाबा बर्फानी साक्षात दर्शन देते हैं। भाजपा विधायक अरविंद गुप्ता ने कहा, “यह मेरे लिए गौरव का पल है कि मुझे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ अमरनाथ यात्रा को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला। इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में एक अलग उत्साह था। इस यात्रा को लेकर पूरा जम्मू शहर भी सजा हुआ है।”
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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस ‘तरकश’ और आईएनएस ‘इक्षक’ ने 29 जून, 2026 को सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया की अपनी सफल यात्रा पूरी की। इस दौरान दोनों युद्धपोतों ने सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस और स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित विभिन्न पेशेवर, औपचारिक और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत समुद्री सहयोग और रक्षा साझेदारी का प्रतीक रही। यात्रा के दौरान आईएनएस ‘तरकश’ के मार्चिंग दल और नौसेना बैंड ने 28 जून को आयोजित सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस परेड में हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारतीय नौसेना की इस सहभागिता ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और मजबूत समुद्री संबंधों को और मजबूती प्रदान की।
आईएनएस ‘इक्षक’ पर 300 से अधिक आगंतुकों ने भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें जहाज की अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण क्षमताओं की जानकारी दी गई। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में हाइड्रोग्राफिक सहयोग के लिए भारतीय नौसेना के योगदान को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। आईएनएस ‘इक्षक’ के दल ने सेशेल्स में भारतीय उच्चायोग के सहयोग से इंग्लिश रिवर होम में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। इस दौरान वहां रहने वाले लोगों को प्राथमिक उपचार किट और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इस पहल ने स्थानीय समुदायों के कल्याण के प्रति भारत और सेशेल्स की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।भारतीय नौसेना ने कहा कि आईएनएस ‘तरकश’ और आईएनएस ‘इक्षक’ की यह यात्रा भारत सरकार के ‘महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी एवं समग्र प्रगति) दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों के साथ समुद्री सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस तैनाती से आपसी तालमेल, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ भारत और सेशेल्स के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध एवं रक्षा साझेदारी को भी नई मजबूती मिली है। -
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भारतीय वैज्ञानिकों ने 100 वर्षों पुराने सूर्य के हस्तनिर्मित रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सूर्य की चुंबकीय गतिविधियों (Solar Magnetic Activity) को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस अध्ययन में 1916 से 2007 तक के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता लगाने में मदद मिली कि सूर्य पर मौजूद चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीले क्षेत्र (Plages) समय के साथ कैसे बदलते रहे।
यह अध्ययन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES) के शोधकर्ता दिव्य कीर्ति मिश्रा के नेतृत्व में किया गया। इस शोध में भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) और अमेरिका के साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया।शोधकर्ताओं ने कोडाइकनाल सोलर ऑब्जर्वेटरी (KoSO) में संरक्षित 1904 से 2022 तक के सूर्य के दैनिक हस्तनिर्मित चित्रों (Suncharts) का उपयोग किया। इन चित्रों में सूर्य पर दिखाई देने वाले सनस्पॉट, प्लेज, फिलामेंट और प्रोमिनेंस जैसी गतिविधियों को सावधानीपूर्वक दर्ज किया गया था।हालांकि, हाथ से बने इन रिकॉर्डों में अलग-अलग ड्राइंग शैली, कागज की गुणवत्ता और स्कैनिंग की समस्याओं के कारण उनका विश्लेषण करना आसान नहीं था। इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने U-Net आधारित सुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग किया।AI मॉडल ने दो चरणों में काम किया:सबसे पहले प्रत्येक चित्र में सूर्य की डिस्क का केंद्र, आकार और झुकाव (Tilt) स्वतः पहचानकर सभी विशेषताओं की सही स्थिति निर्धारित की।इसके बाद 1916 से 2007 तक फैले 9 सौर चक्रों के दौरान सूर्य पर मौजूद प्लेज (Plages) यानी चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीले क्षेत्रों की पहचान और ट्रैकिंग की गई।‘बटरफ्लाई डायग्राम’ से समझे गए सौर चक्रAI की मदद से तैयार किए गए आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने ‘बटरफ्लाई डायग्राम’ तैयार किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समय के साथ सूर्य की चुंबकीय गतिविधियां किस प्रकार अलग-अलग अक्षांशों पर स्थानांतरित होती हैं।अध्ययन में यह भी पाया गया कि हस्तनिर्मित चित्रों से प्राप्त प्लेज डेटा, KoSO के Ca II K फुल-डिस्क ऑब्जर्वेशन से प्राप्त आंकड़ों से काफी मेल खाता है। इससे यह साबित हुआ कि पुराने रिकॉर्ड आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की दीर्घकालिक चुंबकीय गतिविधियों का सटीक रिकॉर्ड भविष्य में स्पेस वेदर (अंतरिक्ष मौसम) को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।सौर गतिविधियां उपग्रहों, जीपीएस, संचार प्रणाली और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में 100 वर्षों के लगातार उपलब्ध आंकड़े भविष्य की अंतरिक्ष मौसम संबंधी भविष्यवाणियों को अधिक सटीक बनाने में सहायक होंगे।शोधकर्ताओं के अनुसार यह अध्ययन दर्शाता है कि मशीन लर्निंग की सहायता से दशकों पुराने और असंगत ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी विश्वसनीय वैज्ञानिक डेटा में बदला जा सकता है। इससे सूर्य के ऊर्जा उत्सर्जन, चुंबकीय प्रभाव और विभिन्न सौर चक्रों की तुलना करने में नई संभावनाएं खुलेंगी। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित हुआ है। - -अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और वैज्ञानिक नेतृत्व को मान्यता देने के लिए छह पुरस्कारनई दिल्ली। भारत के जीवन विज्ञान इकोसिस्टम में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और जन स्वास्थ्य पर उत्कृष्ट प्रभाव को मान्यता देने के लिए भारत लाइफ साइंसेज अवार्ड (बीएलएसए) 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। 7 करोड़ रुपये के अनुदान से समर्थित यह पुरस्कार स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान को बढ़ावा देने वाले उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और इकोसिस्टम के नेताओं को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया गया है। इस पहल का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) और लिली के सहयोग से किया गया है। इसे जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक-बीआईआरएसी) तथा इन्वेस्ट इंडिया का समर्थन प्राप्त है।इस पुरस्कार में पांच श्रेणियों में छह सम्मान शामिल हैं, जिनमें व्यक्तिगत उत्कृष्टता, सहयोगात्मक नवाचार, संस्थागत उत्कृष्टता, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान स्टार्टअप और वैज्ञानिक इकोसिस्टम विकास शामिल हैं। चार श्रेणियों में अनुदान सहायता उपलब्ध है, जबकि दो श्रेणियां नवाचार और इकोसिस्टम निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती हैं। आवेदनों का मूल्यांकन एक स्वतंत्र निर्णायक मंडल द्वारा पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।आवेदन 1 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक खुले हैं और इसके लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है। शोधकर्ता, वैज्ञानिक, सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालय और निजी क्षेत्र के नवप्रवर्तक इसमें भाग ले सकते हैं। पात्रता संबंधी विवरण और ऑनलाइन आवेदन के लिए www.bharatlifesciencesawards.com. पर जाएं।
- नई दिल्ली। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, एवीएसएम, एसएम ने बुधवार को भारतीय सेना के उप थल सेनाध्यक्ष (वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ) का पदभार ग्रहण किया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन जून 1988 में महार रेजिमेंट में शामिल हुए थे। लगभग चार दशक के विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में कमान और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं।लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने स्ट्राइक कोर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स तथा उत्तरी कमान में एक पिवट कोर की कमान भी संभाली। उनके सैन्य करियर में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा तथा नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव शामिल है। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के एक सेक्टर की कमान भी संभाली।लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने उत्तरी कमान में एक कोर की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने दक्षिणी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया, जहां क्षमता विकास, बल पुनर्गठन और समग्र परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेना कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने विभिन्न सैन्य इकाइयों और मुख्यालयों में अनेक महत्वपूर्ण स्टाफ और परिचालन नियुक्तियों पर कार्य किया है। इस दौरान उन्हें पारंपरिक सैन्य अभियानों, आतंकवाद विरोधी अभियानों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों, संयुक्त राष्ट्र मिशनों और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य तैयारियों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने आर्मी वॉर कॉलेज के उच्च कमान पाठ्यक्रम और केन्या के राष्ट्रीय रक्षा पाठ्यक्रम में भी भाग लिया है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और सेना पदक (एसएम) से सम्मानित किया जा चुका है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने दिल्ली सरकार के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन अलग-अलग प्रयासों से नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ समाज की व्यापक भागीदारी भी आवश्यक है। बैठक के दौरान जे.पी. नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अभियान की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की और कहा कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही टीबी उन्मूलन का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में आयोजित प्रगति (PRAGATI) बैठक में दिए गए मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका से जागरूकता अभियान और मरीजों तक पहुंच को और मजबूत किया जा सकेगा।समीक्षा बैठक में बताया गया कि दिल्ली में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अब तक 28.83 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसके अलावा 21.67 लाख चेस्ट एक्स-रे और 3.65 लाख मॉलिक्यूलर टेस्ट किए गए हैं। अभियान के दौरान 1.75 लाख टीबी मरीजों को अधिसूचित (नोटिफाई) किया गया है। बैठक में अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके तहत निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) और वार्ड समितियों से अभियान की जिम्मेदारी अपने स्तर पर लेने और सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। -
नई दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची बुधवार शाम तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। उनके आगमन पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद साने ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत-जापान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौरे के दौरान साने ताकाइची की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साने ताकाइची का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी आधिकारिक यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में उनका स्वागत किया।भारत रवाना होने से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में साने ताकाइची ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। जापान की प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। निवेश, व्यापार, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक, रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी से मजबूत एवं टिकाऊ आर्थिक साझेदारी विकसित होगी। -
नई दिल्ली। अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने 1 जुलाई, 2026 को दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी) के रूप में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर दक्षिणी वायु कमान मुख्यालय में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। 16 दिसंबर 1989 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, हायर एयर कमांड और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से अध्ययन किया है। वे पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर हैं और अपाचे, मिग-21, जगुआर, मिग-29, एसयू-30 तथा राफेल सहित विभिन्न लड़ाकू विमानों पर 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव रखते हैं।
लगभग चार दशकों के सैन्य करियर में एयर मार्शल मान ने एक फाइटर स्क्वाड्रन और एक प्रमुख फाइटर एयरबेस की कमान संभाली है। उन्होंने एयर डिफेंस कमांडर और एक कमांड में प्रशासनिक प्रभारी वरिष्ठ अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वायु मुख्यालय में उन्होंने सहायक वायु स्टाफ प्रमुख (ऑपरेशंस-ऑफेंसिव) और महानिदेशक (वेपन सिस्टम्स) की जिम्मेदारी भी निभाई।अपनी नई नियुक्ति से पहले एयर मार्शल जसवीर सिंह मान पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने एयर मार्शल मनीष खन्ना का स्थान लिया है, जो 30 जून, 2026 को लगभग चार दशकों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। एयर मार्शल मनीष खन्ना को उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की सेशेल्स गणराज्य की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सेशेल्स के मत्स्य पालन, कृषि एवं नीली अर्थव्यवस्था मंत्रालय के कृषि विभाग के बीच कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को नई गति देना है। समझौता ज्ञापन के तहत दोनों देश संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के आदान-प्रदान, उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के साझा उपयोग तथा सर्वोत्तम कृषि प्रणालियों को अपनाने के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा।
समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 से 2031 तक की पंचवर्षीय कार्ययोजना पर भी हस्ताक्षर किए। इस कार्ययोजना में जलवायु-अनुकूल कृषि, बागवानी, फसलोत्तर प्रबंधन, पशुधन विकास तथा टिकाऊ खाद्य और पोषण सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।इस सहयोग का उद्देश्य संस्थागत संबंधों को मजबूत करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना, तकनीकी क्षमता का विकास करना तथा जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी उभरती चुनौतियों का प्रभावी समाधान तैयार करना है। साथ ही सतत कृषि विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा। आईसीएआर विश्वभर के साझेदार संस्थानों के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापनों के माध्यम से भारत की वैश्विक कृषि साझेदारी का लगातार विस्तार कर रहा है। सेशेल्स के साथ यह नया समझौता ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की भागीदारी को और मजबूत करेगा तथा सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (दिल्ली-जयपुर खंड) के मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) आधारित टोलिंग प्रणाली शुरू कर दी है। इससे पहले 19 जून 2026 को एनएचएआई ने दौलतपुरा टोल प्लाजा पर राजस्थान की पहली एमएलएफएफ टोलिंग प्रणाली लागू की थी। एनएचएआई ने बताया कि मनोहरपुरा के बाद दिल्ली-जयपुर खंड पर यातायात को और सुगम बनाने के लिए शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी जल्द एमएलएफएफ प्रणाली शुरू की जाएगी। इस पहल से डिजिटल राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना को और मजबूती मिलेगी। एमएलएफएफ प्रणाली में बैरियर-रहित टोलिंग व्यवस्था अपनाई गई है। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) तकनीक को फास्टैग (FASTag) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली के साथ जोड़ा गया है। इससे न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ वाहनों से स्वत: टोल शुल्क वसूला जाएगा और टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।
एनएचएआई के अनुसार, इस प्रणाली से वाहनों की प्रतीक्षा अवधि लगभग समाप्त हो जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और टोल प्लाजा पर वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाएं और कारोबार में सुगमता बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य के अनुरूप है। एमएलएफएफ प्रणाली के तहत वाहन चालकों को अपने फास्टैग खाते में पर्याप्त शेष राशि बनाए रखना आवश्यक होगा। यदि फास्टैग में बैलेंस कम है, फास्टैग अमान्य है या खराब है, तो संबंधित वाहन मालिक को ई-नोटिस जारी किया जाएगा। ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क जमा करना होगा। निर्धारित समय के बाद भुगतान नहीं करने पर सामान्य टोल दर का दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। वाहन मालिक ई-नोटिस का भुगतान एनएचएआई के पोर्टल और ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के माध्यम से कर सकेंगे। एनएचएआई का कहना है कि एमएलएफएफ प्रणाली से टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ेगी, टोल प्लाजा के संचालन की लागत कम होगी और देशभर में टोलिंग व्यवस्था अधिक कुशल बनेगी। -
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण और परिचालन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर मंडल के दुर्ग-तारोकी खंड के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपए की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना से ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनेगा।
परियोजना के तहत 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से बदला जाएगा। जिन स्टेशनों को इस परियोजना में शामिल किया गया है, उनमें मारौडा (एमएक्सए), रिसमा (आरएसए), गुंडार्देही (जीडीजेड), लाटाबोर (एलबीओ), बलोद (बीएक्सए), कुसुमकासा (केवाईएस), दल्ली राजहरा (डीआरजेड), गुडम (जीयूडीएम), भानुप्रतापुर (बीपीटीपी), केवटी (केईटीआई), अंतागढ़ (एएजीएच), तारोकी (टीडीओके) और रायपुर स्टोर डिपो (आरएसडी) शामिल हैं।इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है, जो रूट सेटिंग और सिग्नलिंग कार्यों को स्वचालित बनाती है। इससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी, सिग्नलिंग में आने वाली तकनीकी खराबियों की संभावना कम होगी और किसी भी व्यवधान की स्थिति में सेवाओं को जल्दी बहाल किया जा सकेगा।इस परियोजना से ट्रेन परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ने के साथ समयपालन में भी सुधार होगा। साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री और माल यातायात के बेहतर संचालन के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार होगा। भारतीय रेल ने कहा कि यह मंजूरी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में उन्नत तकनीक के माध्यम से सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल परिचालन सुनिश्चित करना है -
जयपुर. राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक बस के ट्रक से टकरा जाने के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई और 24 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह हादसा कोलवा थाना क्षेत्र में धनावड़ा के पास हुआ।
दौसा के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि हादसे में पांच लोग जिंदा जल गए, जबकि दो की मौत सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हुई। एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सिर पर गंभीर चोट लगने से जान गंवाने वाले दो लोगों में से एक की पहचान धर्मेंद्र के रूप में हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक शंकर लाल ने बताया कि अन्य मृतकों की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि हादसे में घायल हुए 24 लोगों की हालत स्थिर है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ''उत्तराखंड के ऋषिकेश से इंदौर जा रही हंस ट्रेवल्स की बस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर आगे चल रहे एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद बस और ट्रक दोनों में आग लग गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने बताया कि घायलों को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचीं तथा राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। बाद में आग पर काबू पा लिया गया। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने के लिए 6,969.67 करोड़ रुपये की लागत वाली छह-लेन की सुरंग परियोजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एनएच-148एई के लिए 8.1 किलोमीटर लंबी इस सड़क सुरंग का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत किया जाएगा और इसे पांच वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच तेज संपर्क उपलब्ध कराएगी तथा यूईआर-2/द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज से जोड़ेगी। इससे गुरुग्राम, द्वारका, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डा और पश्चिम दिल्ली से दक्षिण दिल्ली की ओर आने-जाने वाला यातायात सुगम होगा। सुरंग का 1.98 किलोमीटर लंबा हिस्सा सदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से होकर गुजरेगा।
बयान में कहा गया कि भूमिगत सुरंग (ट्विन-ट्यूब) के निर्माण से सतह पर न्यूनतम व्यवधान होगा और रिज क्षेत्र का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) एम्स और महिपालपुर के बीच एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का भी प्रस्ताव कर रहा है। यह कॉरिडोर सुरंग को बारापुला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली का संपर्क पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा से बेहतर होगा। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से बनने वाली यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के चौराहे से पहले समाप्त होगी। इस चौराहे पर यातायात का दबाव कम करने के लिए नेल्सन मंडेला मार्ग के साथ 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, मौजूदा फ्लाईओवर के समानांतर छतरपुर से महिपालपुर की ओर एक अतिरिक्त फ्लाईओवर भी प्रस्तावित है। छतरपुर की ओर दाहिने मुड़ने वाले वाहनों की सुविधा के लिए एक एलिवेटेड यू-टर्न बनाने का भी प्रस्ताव है। मुख्य मार्ग की लंबाई 6.3 किलोमीटर होगी। प्रस्तावित फ्लाईओवर और महिपालपुर-छतरपुर मार्ग पर एलिवेटेड यू-टर्न को शामिल करने पर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। बयान के अनुसार, अनुमान है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रत्येक लेन-किलोमीटर के निर्माण से औसतन 264 मानव-दिवस प्रतिदिन प्रत्यक्ष रोजगार और 55 मानव-दिवस प्रतिदिन अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होता है। इस आधार पर, इस परियोजना से लगभग 7.54 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 9.80 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होने का अनुमान है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को चिकित्सक दिवस और 'चार्टर्ड अकाउंटेंट' (सीए) दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि असंख्य लोग चिकित्सकों और सीए के अथक प्रयासों के लिए उनके आभारी हैं और उन पर भरोसा करते हैं। प्रधानमंत्री ने भूकंप प्रभावित वेनेजुएला में 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत अथक कार्य कर रहे भारत के सभी चिकित्सकों और चिकित्सा पेशेवरों की भी सराहना करते हुए कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जरूरतमंद लोगों की सेवा करने के उनके प्रयास इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि समाज के सामने जब भी कोई चुनौती आती है तो चिकित्सा पेशेवर कैसे आगे आकर उससे निपटने में मदद करते हैं। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर 'पोस्ट' किए गए अलग-अलग संदेशों में कहा कि सरकार 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में काम कर रही है और देश के चिकित्सक बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने, चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान को आगे बढ़ाने, नवोन्मेष को अपनाने तथा सभी को सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में सीए के प्रयास ऐसा वातावरण बनाने में मदद करते हैं जिसमें उद्यम फल-फूल सकें और सभी के लिए अवसरों का विस्तार हो। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक 'पोस्ट' में कहा, ''हमारे समर्पित चिकित्सकों को चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं। उनकी कड़ी मेहनत, करुणा और प्रतिबद्धता भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ है। वे अक्सर अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अथक कार्य करते हैं जिसके कारण असंख्य लोग उनके आभारी हैं और उन पर भरोसा करते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है जबकि स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। मोदी ने कहा, ''यह अभूतपूर्व वृद्धि चिकित्सक बनने के इच्छुक लोगों के लिए अधिक अवसर पैदा कर रही है, एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा कार्यबल तैयार कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा देश के हर कोने तक पहुंचे।'' मोदी ने पूरे सीए समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे भारत की आर्थिक यात्रा में लंबे समय से विश्वसनीय भागीदार रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और पेशेवर उत्कृष्टता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से 'चार्टर्ड अकाउंटेंट' देश की वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करते हैं, व्यवसायों को सहयोग देते हैं, उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं और निवेशकों में विश्वास पैदा करते हैं। मोदी ने कहा, ''उनकी विशेषज्ञता आर्थिक वृद्धि और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती है।''
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नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे साइबर सुरक्षा को बढ़ावा दें। इसके लिए वे छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को 2.5 घंटे के 'साइबर हाइजीन सर्टिफिकेशन कोर्स' में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें और जागरूकता बढ़ाने वाली मासिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए 'साइबर क्लब' बनाएं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ''यह पहल गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा 'साइबर हाइजीन' (सुरक्षित डिजिटल आदतों) को प्रोत्साहित करना है।'' उन्होंने कहा, ''यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि बच्चों द्वारा डिजिटल मंचों का बढ़ता उपयोग उन्हें ऑनलाइन जोखिमों-जैसे ग्रूमिंग (बहला-फुसलाकर शोषण), साइबर बुलिंग (ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न), ऑनलाइन उत्पीड़न और वित्तीय साइबर धोखाधड़ी- के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।'' बोर्ड ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे हर महीने के पहले बुधवार को 'साइबर जागरूकता दिवस' के तौर पर मनायें और इस दौरान वे क्विज, भाषण, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिताएं, शपथ लेने के कार्यक्रम, वाद-विवाद और जागरूकता सत्र जैसी गतिविधियां आयोजित करें। इसमें कहा गया कि स्कूल साइबर जागरूकता को सालाना कार्यक्रमों, अभिभावक-शिक्षक बैठकों और खास अभियानों में भी शामिल कर सकते हैं। अधिकारियों ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे छात्रों के बीच साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक शपथ बांटें और उनसे उस पर अपने माता-पिता के हस्ताक्षर करवाएं। यह प्रतिज्ञा सुरक्षित ऑनलाइन तौर-तरीकों, सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल और बुनियादी साइबर सुरक्षा आदतों पर केंद्रित है। आई4सी के निदेशक निशांत कुमार ने कहा, ''जागरूकता बचाव का हमारा सबसे मजबूत जरिया है। स्कूलों के जरिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचकर हम साइबर सुरक्षा का ऐसा माहौल बना रहे हैं जो परिवारों और समुदायों को उभरते हुए ऑनलाइन खतरों से बचाने में मदद कर सकता है।''
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा आर्थिक सहयोग एवं निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फ्रांस की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को रवाना हुईं। इस दौरान वह उच्च स्तरीय बैठकों, आर्थिक संवाद और निवेशकों के साथ चर्चाओं में भाग लेंगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण आइक्स-एन-प्रोवेंस में होने वाला भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (ईएफडी) होगा। सीतारमण, फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त एवं औद्योगिक एवं ऊर्जा मंत्री रोलेंड लेस्क्यूर के साथ इसकी सह-अध्यक्षता करेंगी। ईएफडी के तहत दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान वित्त मंत्री कुछ चुनिंदा वैश्विक सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारियों) के साथ बैठकें करेंगी। प्रमुख व्यापारिक नेताओं के साथ गोलमेज बैठक में भाग लेंगी, जिसमें भारत की मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद, मौजूदा संरचनात्मक सुधार, बढ़ते निवेश अवसर और दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। वित्त मंत्री यूरोप के प्रमुख वार्षिक वैश्विक आर्थिक एवं सार्वजनिक नीति मंचों में से एक 'ले रेन्कोंत्रे इकॉनमिक्स डी आइक्स-एन-प्रोवेंस' में ''नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें'' विषय पर चर्चा में भी भाग लेंगी। अपने कार्यक्रम के तहत वह इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का भी दौरा करेंगी, जो दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक है। इसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश शामिल हैं और सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा वह कैम्पस साइबर का दौरा करेंगी, जो फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नवाचार, अनुसंधान एवं कौशल विकास केंद्र है। यहां साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवोन्मेषण बढ़ाने पर चर्चा होगी। वित्त मंत्री सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे द'जूर (पीएसीए) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनो म्यूजेलिएर से भी मुलाकात करेंगी। उनसे से वह निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। यात्रा के अंतिम दिन वित्त मंत्री फ्रांस में भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगी।
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नई दिल्ली। ‘डिजिटल इंडिया’ के 11 साल पूरे होने पर आज बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये पहल विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में इसने गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देशवासियों के जीवन को आसान बनाया है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘डिजिटल इंडिया’ को लेकर कई पोस्ट किए। उन्होंने एक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आज ‘डिजिटल इंडिया’ पहल को शुरू हुए 11 साल पूरे हो रहे हैं। इस पहल ने गवर्नेंस को नए सिरे से परिभाषित किया है, नागरिकों को सशक्त बनाया है और सर्वांगीण विकास को गति दी है। इसने जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। आसान डिजिटल पेमेंट और लाभार्थियों तक पारदर्शिता के साथ सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) से लेकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार तक, टेक्नोलॉजी ‘ईज ऑफ लिविंग’ को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।”पीएम मोदी ने इस पोस्ट में आगे कहा, “डिजिटल इंडिया ने नवाचार की लहर को भारत के हर हिस्से, खासकर गांवों और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक पहुंचाया है। देश के हर कोने से युवा उद्यमी, स्टार्टअप और इनोवेटर हमारे ग्रह के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों के समाधान तैयार कर रहे हैं। इस पहल ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, व्यापार और सार्वजनिक सेवा वितरण को मजबूत किया है, जिससे गवर्नेंस अधिक पारदर्शी, कुशल और सुलभ हो गई है।”उन्होंने कहा, “डिजिटल क्षेत्र में हमारी प्रगति ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती हुई तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे विकास और अवसरों के नए रास्ते भी खुलेंगे। हमारा ध्यान एक ऐसे भविष्य के निर्माण पर रहेगा जहां तकनीक मानवता की सेवा करे, हर नागरिक को सशक्त बनाए और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे।”एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “डिजिटल इंडिया के 11 सालों की सफलता से भारतवर्ष को दुनियाभर में एक नई पहचान मिली है। इससे इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को अपनाकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति का पता चलता है।”उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर करते हुए लिखा, “विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवान्नरः। सोऽध्वनः पारमाप्नोति तद्विष्णोः परमं पदम्।” इसका अर्थ है, “वह मनुष्य जिसकी विवेकपूर्ण बुद्धि वैज्ञानिक सारथि के समान जागरूक हो और जिसका मन संयमित हो, वह जीवन-पथ की जटिलताओं को पार कर परम लक्ष्य तक पहुंच जाता है।”पीएम मोदी ने एक और पोस्ट किया, “डिजिटल इंडिया विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव है। बीते 11 वर्षों में इसने गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देशवासियों के जीवन को आसान बनाया है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से लेकर डिजिटल ट्रांजैक्शन तक इस अभियान की अभूतपूर्व सफलता ने दुनियाभर का ध्यान भारत की ओर खींचा है। -
नई दिल्ली। ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम 2025’ एक जुलाई से पूरे ग्रामीण भारत में लागू हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि यह अधिनियम, जो हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-युक्त रोजगार की गारंटी देता है, ग्रामीण भारत को सशक्त बनाएगा। जानकारी के मुताबिक देशभर में इस नए ढांचे को लागू करने के लिए चालू वित्त वर्ष में 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
VB-G RAM G अधिनियम, बीस साल पुराने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005’ की जगह लेगा। इस नए अधिनियम का उद्देश्य एक वित्तीय वर्ष में कानूनी रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करना है। रोजगार की इस बढ़ी हुई गारंटी का मकसद ग्रामीण विकास की गति को तेज करना, आय की बेहतर सुरक्षा प्रदान करना और ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाना है। यह अधिनियम समय पर, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से वेतन भुगतान पर ज़ोर देता है। नए अधिनियम में तय समय के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। ‘विकसित भारत-GRAM G अधिनियम’ एक व्यापक कानूनी ढांचा है जिसे ग्रामीण रोजगार सृजन को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किया गया है।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025’ (VB-G RAM G) के लागू होने को एक “ऐतिहासिक दिन” बताया। आज से पूरे देश में इस नए ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की जगह ले ली है।केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि यह नया ढांचा पहले के रोजगार गारंटी कार्यक्रम की तुलना में एक बड़ा सुधार है।नई योजना के तहत रोजगार गारंटी के विस्तार और इसकी शुरुआत के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है। कल MGNREGA का समापन हुआ। आज से MGNREGA से बेहतर एक योजना लागू हो गई है, जिसमें 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान है: VB-G RAM G।”रोजगार की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगीइसे लागू करने के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक दिन के लिए भी काम से वंचित नहीं रहना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर नए ढांचे में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंत्री ने कहा कि पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, कार्यान्वयन प्रणालियां पूरी तरह से तैयार हैं और चल रहे काम बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि 125 दिनों के वेतन-युक्त रोजगार की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगी, टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियां बनाएगी और ‘विकसित भारत’ के विज़न को गति देगी।सभी राज्यों ने इसके लिए बजट का प्रावधानग्राम पंचायतों के माध्यम से वित्तीय आवंटन और विकेंद्रीकृत योजना पर जोर देते हुए उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सभी राज्यों ने इसके लिए बजट का प्रावधान किया है और केंद्र सरकार ने इस साल VB-G RAM G के लिए ₹95,600 करोड़ से ज़्यादा की राशि आवंटित की है। ग्राम पंचायतें प्रभावी योजनाएं बनाएंगी; गांव के भाई-बहन मिलकर तय करेंगे कि उनके गांव में कौन से काम किए जाने हैं। विकसित भारत का रास्ता बनाने के लिए विकसित गांव बनाए जाएंगे।”नया अधिनियम लागू होने के साथ ही MGNREGA रद्दग्रामीण विकास मंत्रालय ने पहले जारी एक अधिसूचना में नए कानून के देशव्यापी कार्यान्वयन की पुष्टि की थी। इसके लागू होने के साथ ही MGNREGA को रद्द कर दिया गया है। सरकार ने इसे ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप “एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और उत्पादकता-उन्मुख ग्रामीण बदलाव” की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव बताया है। केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए ₹95,600 करोड़ से ज्यादा आवंटित किए हैं।रिलीज में कहा गया है, “VB-G RAM G एक्ट के लागू होने के साथ ही, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को उसी तारीख से रद्द कर दिया गया है। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव है और ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और उत्पादकता-उन्मुख ग्रामीण बदलाव के एक नए युग की शुरुआत करता है।” ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटीअधिनियम’ 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। यह अधिनियम 100 दिन की रोजगार गारंटी की जगह 125 दिन की गारंटी देता है। हालांकि, विपक्ष ने इस कानून की आलोचना की है क्योंकि इसमें योजना से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया है और केंद्र व राज्यों के बीच फंड के 60:40 के हिस्से में बदलाव किया गया है।

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