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नई दिल्ली। रामनगर और देहरादून के बीच पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए। नई ट्रेन से कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा और लंबे समय से चली आ रही लोगों की मांग पूरी होगी। रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को संचालित होगी। ट्रेन संख्या 15310 सुबह 5:50 बजे रामनगर से रवाना होकर दोपहर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 15309 दोपहर 3:55 बजे देहरादून से चलकर रात 11:30 बजे रामनगर पहुंचेगी। मार्ग में काशीपुर, रोशनपुर, पिपल्सना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर ठहराव होगा।
ट्रेन में एसी सेकेंड क्लास, एसी थर्ड क्लास, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, सेकेंड सिटिंग और जनरल सेकेंड क्लास कोच उपलब्ध होंगे। इससे उत्तराखंड के नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। छात्र, किसान, व्यापारी और अन्य यात्रियों को एक ही दिन में यात्रा कर अपने कार्य पूरे करने में सुविधा मिलेगी।नई रेल सेवा से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, गिरिजा देवी मंदिर और सीतामढ़ी-सीतावनी जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। हरिद्वार और देहरादून के जरिए बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चारधाम यात्रा के लिए भी बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हरिद्वार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी और यात्रियों की आवाजाही अधिक सुगम बनेगी।रेल मंत्री ने बताया कि राज्य में देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लाल कुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर सहित 11 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के विकास में गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही भीड़भाड़ नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान रहेगा।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस उत्तराखंड की रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से काम चल रहा है, जो राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास की जीवनरेखा साबित होगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड को रेलवे के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपए का बजट मिला है और राज्य में 40,000 करोड़ रुपए से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर काम जारी है। -
नई दिल्ली। संचार मंत्रालय के डाक विभाग ने इंडिया पोस्ट के आधिकारिक शुभंकर (मैस्कॉट) डिजाइन करने के लिए ‘इनोवेट इंडिया माईगॉव’ प्लेटफॉर्म पर प्रतियोगिता शुरू की है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से देशभर के नागरिकों को ऐसा शुभंकर तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया है, जो इंडिया पोस्ट के विश्वास, विश्वसनीयता, सेवा, समावेशिता और डिजिटल नवाचार जैसे मूल्यों को दर्शा सके। प्रतियोगिता में कुल 2 लाख रुपए की पुरस्कार राशि रखी गई है। यह प्रतियोगिता सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुली है। प्रतिभागियों को माईगॉव प्लेटफॉर्म के माध्यम से मौलिक शुभंकर डिजाइन, उसका उपयुक्त नाम और एक संक्षिप्त अवधारणा पत्र प्रस्तुत करना होगा। प्रतियोगिता 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक चलेगी।
डाक विभाग ने रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए तीन सर्वश्रेष्ठ शुभंकर डिजाइनों के लिए क्रमशः 75,000 रुपए, 50,000 रुपए और 25,000 रुपए के नकद पुरस्कार घोषित किए हैं। इसके अलावा तीन सर्वश्रेष्ठ शुभंकर नामों के लिए 25,000 रुपए, 15,000 रुपए और 10,000 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। प्रतियोगिता में चयनित शुभंकर को इंडिया पोस्ट का आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। इसे डाक विभाग के प्रचार अभियानों, डाक टिकट संबंधी उत्पादों, जन जागरूकता कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य आधिकारिक संचार माध्यमों में शामिल किया जाएगा। डाक विभाग ने देशभर के छात्रों, डिजाइनरों, कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों से इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की है। विभाग का उद्देश्य इंडिया पोस्ट की भविष्य की दृश्य पहचान को एक नए और रचनात्मक स्वरूप के साथ विकसित करना है। प्रतियोगिता के दिशा-निर्देश, नियम और शर्तों तथा प्रविष्टियां जमा करने से जुड़ी पूरी जानकारी इनोवेट इंडिया माईगॉव प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। -
नई दिल्ली। भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने शनिवार को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंचकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक निर्णायक क्षण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से बात कर विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी नए अवसरों के द्वार खोल रही है, नवाचार को गति दे रही है और यह उपलब्धि देश के अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने तथा निर्भीक होकर नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट ‘मिशन आगमन’ के तहत सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचा। इसके साथ ही भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है।आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित 24 मीटर लंबे कार्बन-कॉम्पोजिट रॉकेट ने उड़ान के सभी निर्धारित चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और अपने पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मिशन को “वास्तव में ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह भारत के युवाओं की नवाचार क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम है। वहीं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक मील का पत्थर करार दिया।मिशन के दौरान पहले चरण के ठोस ईंधन मोटर कलाम-1200 ने रॉकेट को वायुमंडल के सबसे घने हिस्से से बाहर पहुंचाया। इसके बाद कलाम-250 और कलाम-100 चरणों ने भी निर्धारित प्रदर्शन किया। अंत में ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) ने अपने 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन की मदद से रॉकेट को अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। 450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम विक्रम-1 अपने साथ कई पेलोड लेकर गया। इनमें बेंगलुरु स्थित कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा विकसित लैब-ग्रोन डायमंड ‘डायमंड लोटस’ भी शामिल है। मिशन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित “वंदे मातरम्” संदेश वाला पोस्टकार्ड भी भेजा गया। इसके अलावा स्काईरूट की टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी इस मिशन का हिस्सा रहे। -
नई दिल्ली। भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक उड़ान भरते हुए अपनी निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) हासिल कर ली। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारत निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट ने अपने सभी मिशन चरण सफलतापूर्वक पूरे करते हुए पेलोड्स को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित किया।
स्काईरूट एयरोस्पेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि ‘विक्रम-1’ (टेस्ट फ्लाइट-1) ने अपना अंतिम बर्न सफलतापूर्वक पूरा करते हुए सभी पेलोड्स को निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। कंपनी ने इसे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। लॉन्च के बाद ‘विक्रम-1’ ने लॉन्च टॉवर से सुरक्षित दूरी बनाई। इसके बाद पहला सॉलिड-फ्यूल चरण ‘कलाम-1200’ सफलतापूर्वक अलग हुआ और रॉकेट को वायुमंडल के घने हिस्से से बाहर ले गया। इसके बाद पेलोड फेयरिंग अलग हुई, जिससे उपग्रह पहली बार अंतरिक्ष के खुले वातावरण में पहुंचे। दूसरे चरण ‘कलाम-250’ ने अपना बर्न पूरा कर अलगाव किया, जबकि तीसरे चरण ‘कलाम-100’ ने रॉकेट को अंतिम वेग प्रदान किया। इसके बाद लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल ने पेलोड्स को 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित किया।विक्रम-1 को 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60 डिग्री झुकाव वाली 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल चरण और एक 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से लैस ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है। पूरी तरह कार्बन कम्पोजिट संरचना वाला यह रॉकेट भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।अपने पहले मिशन में ‘विक्रम-1’ ने कई ग्राहक पेलोड्स को कक्षा में स्थापित किया। इनमें स्काईरूट का ‘स्कोप’ सैटेलाइट, डीक्यूब्ड का टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड, ग्रह स्पेस का ‘सोलर्स एस-3’ सैटेलाइट और कॉस्मोसर्व स्पेस का ‘इमब्रेस’ रोबोटिक आर्म शामिल हैं। ‘इमब्रेस’ को अंतरिक्ष में मौजूद मलबे (स्पेस डेब्रिस) को पकड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।मिशन के साथ ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक फूलों के आकार की कलाकृति भी अंतरिक्ष में भेजी गई। इसके अलावा 18 कैरेट सोने से बना एक माइक्रो-रॉकेट भी पेलोड का हिस्सा रहा, जिस पर नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रमन, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई और पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं अंकित हैं।‘विक्रम-1’ की सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। यह उपलब्धि निजी कंपनियों की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के साथ-साथ भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा देने वाली साबित होगी। -
नई दिल्ली। भारत टेक्स 2026 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से अपनी भागीदारी का समापन किया। चार दिवसीय आयोजन में मंत्रालय के पवेलियन ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी लखपति दीदियों की उद्यमशीलता, शिल्प कौशल और बाजार क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। इस दौरान देश-विदेश के खरीदारों, उद्योग प्रतिनिधियों और आगंतुकों के साथ संवाद के जरिए ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार और नए बाजारों तक पहुंच का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन पर वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव जयश्री और संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने मंत्रालय के पवेलियन का दौरा किया। डीएवाई-एनआरएलएम की निदेशक डॉ. मोलिश्री ने उनका स्वागत किया। अधिकारियों ने लखपति दीदियों से बातचीत कर उनके उद्यमों की जानकारी ली और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के दौरान मंत्रालय के स्टॉल पर भारत और विदेश से आए खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आगंतुकों ने रुचि दिखाई। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने, उद्योग विशेषज्ञों से विचार साझा करने और नए बाजारों की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला।पवेलियन में भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा को प्रदर्शित करते हुए पट्टाचित्र, पेन कलमकारी, फुलकारी कढ़ाई, एरी रेशम, पश्मीना सहित विभिन्न क्षेत्रों के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इन कृतियों ने ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता, कौशल और उद्यमशीलता क्षमता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ रहा। डीएवाई-एनआरएलएम के तहत संचालित इस पहल में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों को एक मंच पर प्रदर्शित किया गया। गुणवत्ता, डिज़ाइन, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने वाली यह पहल महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को संस्थागत और प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रही है, साथ ही पारंपरिक शिल्पों की मौलिकता भी संरक्षित कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डीएवाई-एनआरएलएम के तहत देशभर में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, कौशल विकास, उद्यम विस्तार और बाजार संपर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। तीन करोड़ लखपति दीदियों का आंकड़ा पार करने के बाद सरकार अब छह करोड़ लखपति दीदियां तैयार करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।मंत्रालय ने कहा कि भारत टेक्स 2026 में भागीदारी से ग्रामीण महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मिले हैं। इसके साथ ही भारत की समृद्ध वस्त्र और हस्तशिल्प विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने तथा महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। -
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी की पुस्तक ‘आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पिछले एक सदी में सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को मजबूत किया है तथा निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ पर प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन समारोह में शामिल होना उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान की बात है। उन्होंने संघ पर लिखी एक तमिल कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें संगठन की तुलना पवित्र गंगा से की गई है, जो दूसरों के कल्याण के लिए निरंतर बहती है और सेवा भावना का प्रतीक है।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तक का शीर्षक संघ की मूल भावना को दर्शाता है। उनके अनुसार, सेवा समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक है, एकता भारत की विविधताओं को जोड़ने वाली शक्ति है और त्याग यह संदेश देता है कि स्थायी संस्थाएं समर्पण और निरंतर प्रयासों से ही बनती हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस अपनी दैनिक शाखाओं के माध्यम से चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास का कार्य करता है। उन्होंने पुस्तक का उल्लेख करते हुए शाखा को “आत्मा की कार्यशाला” बताया, जहां युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्रीय चरित्र में ढाला जाता है।उन्होंने कहा कि आरएसएस ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, विविध परंपराओं, भाषाओं और आध्यात्मिक विचारों के प्रति गौरव की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष लाखों स्वयंसेवकों के समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है। उपराष्ट्रपति ने पुस्तक के “एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री: मोदी युग” अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवक से प्रधान सेवक तक की यात्रा में ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘सेवा’ को शासन के केंद्र में रखा है। उन्होंने कहा कि यह आरएसएस की निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की विचारधारा का प्रतिबिंब है।सीपी राधाकृष्णन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अपने शुरुआती सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए कहा कि दोनों ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा एक छोटी धारा से विशाल नदी बनती है, उसी तरह आरएसएस भी छोटे संगठन से दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में शामिल हो गया।कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, आरएसएस क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, सह-लेखक श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। -
नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) के तहत अब तक 47.59 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं। योजना के अंतर्गत 16,759 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है, जबकि 46,782 से अधिक विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा देशभर में 24,133 ग्राम विकास योजनाएं तैयार की गई हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 750 विद्यार्थियों के आवास की व्यवस्था हेतु दो बालिका छात्रावासों सहित तीन छात्रावास परियोजनाओं के निर्माण के लिए 22.50 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीएम-अजय के तहत आदर्श ग्राम योजना में 47,316 गांवों को शामिल किया गया है, जिससे 47,59,399 नागरिक लाभान्वित हुए हैं। योजना के तहत अब तक 46,782 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं और 24,133 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं। अधिकारी के अनुसार, 16,759 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है। यह अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचना, मूलभूत सेवाओं और जीवन स्तर में हुए उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है।अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 750 विद्यार्थियों के आवास की व्यवस्था हेतु दो बालिका छात्रावासों सहित तीन छात्रावास परियोजनाओं के निर्माण के लिए 22.50 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मंजूर की है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि पीएम-अजय लक्षित हस्तक्षेपों और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाने, सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना सामुदायिक भागीदारी और विभिन्न एजेंसियों के तालमेल से जमीनी स्तर पर संस्थाओं को मजबूत कर रही है।पीएम-अजय के तहत आदर्श ग्राम योजना, सहायता-अनुदान और छात्रावास तीन प्रमुख घटक हैं। आदर्श ग्राम योजना अनुसूचित जाति बहुल गांवों के समग्र विकास पर केंद्रित है। सहायता-अनुदान के माध्यम से आजीविका, कौशल विकास और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है, जबकि छात्रावास घटक विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण और मरम्मत के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।मंत्रालय ने पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन को पूरी तरह ऑनलाइन बनाया है। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए ग्राम विकास योजनाओं की तैयारी, परियोजनाओं का मूल्यांकन, निधि की निगरानी, लाभार्थियों की मॉनिटरिंग और जियो-टैग रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो रही है।मंत्रालय ने बताया कि पीएम-अजय के तहत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। अवसंरचना, शिक्षा, आजीविका और डिजिटल शासन में निरंतर निवेश के माध्यम से यह योजना अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाने और उन्हें देश की विकास यात्रा में समान भागीदारी दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। - -पर्याप्त वर्षा मिलते ही रोपाई पूरी करें, अधिक देरी होने पर कम अवधि वाली धान किस्में एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाहनई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून में विलंब तथा छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में वर्षा की अनिश्चितता के मद्देनजर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर ने प्रदेश के धान किसानों के लिए विशेष वैज्ञानिक कृषि परामर्श जारी किया है। संस्थान ने खरीफ मौसम में फसल की सफल स्थापना सुनिश्चित करने तथा संभावित उत्पादन हानि को न्यूनतम रखने के लिए किसानों से मौसम की स्थिति के अनुरूप समयबद्ध वैज्ञानिक एवं आकस्मिक कृषि प्रबंधन उपाय अपनाने का आग्रह किया है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर के प्रक्षेत्र में धान की 'देवभोग' किस्म की पौध रोपाई के लिए तैयारसंस्थान के अनुसार, पर्याप्त वर्षा होने पर किसान 20 से 25 दिन पुराने स्वस्थ पौधों की अनुशंसित दूरी पर शीघ्र रोपाई पूरी करें। यदि रोपाई में अधिक विलंब हो, तो कम से मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों का चयन किया जाए। जिन क्षेत्रों में रोपाई संभव न हो, वहां अंकुरित बीजों का उपयोग करते हुए ड्रम सीडर अथवा छिड़काव विधि से धान की सीधी बुवाई की जा सकती है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने कहा कि बदलती जलवायु और अनिश्चित वर्षा की परिस्थितियों में समय पर वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा आकस्मिक कृषि योजना अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विज्ञान केंद्रों तथा कृषि विशेषज्ञों के नियमित संपर्क में रहकर वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की।संस्थान ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए फास्फोरस एवं पोटाश की अनुशंसित मात्रा आधार खाद के रूप में देने तथा नत्रजन उर्वरक का प्रयोग फसल की आवश्यकता के अनुसार विभाजित मात्रा में करने की सलाह दी है। साथ ही भारी वर्षा की संभावना से ठीक पहले यूरिया का प्रयोग नहीं करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पोषक तत्वों के बहाव से होने वाली हानि को रोका जा सके।किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण, खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने तथा जलभराव की स्थिति में प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही तना छेदक, पत्ती लपेटक जैसे प्रमुख कीटों तथा ब्लास्ट एवं जीवाणुजनित पत्ती झुलसा जैसे रोगों की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक अनुशंसाओं पर आधारित पौध संरक्षण उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि विलंबित मानसून की स्थिति में फसल की प्रारंभिक अवस्था सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। किसानों को खेत संबंधी कार्यों में अनावश्यक विलंब से बचते हुए संतुलित पोषण, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।संस्थान ने यह भी सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक वर्षा का अभाव बना रहने से धान की खेती प्रभावित होने की आशंका है, वहां स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मक्का, अरहर, उड़द, मूंग, तिल तथा मोटे अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार किया जा सकता है। संस्थान ने किसानों से मौसम आधारित कृषि परामर्श और वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन कर खरीफ फसलों को सुरक्षित एवं उत्पादक बनाने की अपील की है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की ओर से जारी सीट संबंधी अद्यतन विवरण के अनुसार, नए मेडिकल कॉलेजों के खुलने और मौजूदा कॉलेजों में सीट बढ़ने से वर्ष 2026-27 के शिक्षण सत्र के लिए देश में एमबीबीएस की 1,36,939 सीट उपलब्ध होंगी। एनएमसी के 'मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड' (एमएआरबी) ने बुधवार को एमबीबीएस की उपलब्ध सीट का आधिकारिक विवरण जारी किया, लेकिन इसमें राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को शामिल नहीं किया गया है। पिछली बार मंजूर की गई 1,27,028 सीट की तुलना में इस बार एमबीबीएस की सीट संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
विनियामक संस्था ने कहा कि एनएमसी द्वारा नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी देने समेत मौजूदा कॉलेजों की सालाना सीट संख्या में बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने से बढ़ी सीटों को संशोधित सीट संबंधी विवरण में शामिल किया गया है। हालांकि, एनएमसी ने चेतावनी दी है कि जारी की गई सीट संख्या अस्थायी है।नोटिस में कहा गया है, ''अपील कमेटी या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित किसी भी अपील के नतीजे के आधार पर सीट संबंधी विवरण में बदलाव हो सकता है। किसी भी बदलाव की स्थिति में, अद्यतन सीट संबंधी विवरण को वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।'' कमीशन ने केंद्र और राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल उतनी ही सीट पर ही दाखिला लें जितने की मंजूरी प्राप्त है। एनएमसी ने कहा कि मंजूर की गई संख्या से अधिक सीट पर दाखिला लेने पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के तहत सख़्त कार्रवाई की जाएगी। विनियामक संस्था ने कहा, ''मेडिकल कॉलेज मंजूरी प्राप्त सालाना सीट संख्या से अधिक सीट पर छात्रों को प्रवेश नहीं देंगे। तय सीमा से अधिक दाखिले को एनएमसी अधिनियम, 2019 के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और उचित नियामकीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।'' सभी मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों और काउंसलिंग प्राधिकरणों को भेजे गए एक पत्र में, एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने दोहराया कि वर्ष 2026-27 में शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रवेश देने में मंजूर सीट सीमा का सख्ती से पालन किया जाए। विनियामक संस्था ने नए कॉलेज खोलने या सीट संख्या बढ़ाने की मंजूरी प्राप्त करने वाले निजी मेडिकल कॉलेजों को सात दिनों के भीतर तय इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश दिया है। -
नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भले ही युद्ध के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए सशस्त्र बलों में आधुनिक हथियार और अन्य उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में भी बंदरगाह, सड़क और सुरंग जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे अपरिहार्य भूमिका निभाते रहेंगे। सिंह ने यहां सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही युद्धकला की बदलती प्रकृति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, फिर भी बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़कें और सुरंगें भविष्य में अपरिहार्य भूमिका निभाती रहेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यद्यपि युद्ध का परिणाम बहुत हद तक सैन्य शक्ति, सटीक क्षमताओं और आधुनिक प्रौद्योगिकियों द्वारा निर्धारित होता है, फिर भी बुनियादी ढांचा सैन्य अभियानों को सक्षम बनाने के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। 'सीमा सड़क संगठन' (बीआरओ) द्वारा आयोजित 'रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन' में अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यद्यपि युद्ध का नतीजा मुख्य रूप से सैन्य ताकत, सटीक हमले की क्षमता और आधुनिक तकनीकों से तय होता है, लेकिन सैन्य अभियानों को संभव बनाने के लिए बुनियादी ढांचा बहुत जरूरी है। सिंह ने कहा, ''कभी-कभी युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है, जो हमारे सैनिकों को अग्रिम मोर्चे तक ले जाती है। इसलिए, जो व्यक्ति वह सड़क बनाता है, वह भी राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण रक्षक होता है, जितना कि सीमा पर तैनात सैनिक।'' उन्होंने मजबूत बुनियादी ढांचा बनाने के लिए खास तकनीकों को अपनाने और विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को लगातार मज़बूत करने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुसार 2047 तक भारत को 'विकसित भारत' बनाने के सरकार के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए बीआरओ की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध में भी सीमावर्ती बुनियादी ढांचा अपरिहार्य रूप से अहम बना रहेगा। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी सभ्यता के विकास का एक जरूरी हिस्सा है और सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाला कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नवाचार, अनुसंधान और काम को बेहतरीन ढंग से पूरा करना 'भविष्योन्मुखी रणनीतिक अवसंरचना' के लिए जरूरी है। सिंह ने कहा, ''भले ही युद्ध के बदलते स्वरूप से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और अन्य उपकरण शामिल किए जा रहे हों, फिर भी भविष्य में बंदरगाह, हवाई पट्टियां, सड़कें और सुरंगें अहम भूमिका निभाती रहेंगी।'' बुधवार को शुरू हुए दो दिन के इस सम्मेलन में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई, जैसे-नई प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषी इंजीनियरिंग समाधान, उत्पादकता बढ़ाने के लिए नियोजन, परियोजना निगरानी और काम पूरा करने में डिजिटल बदलाव, टिकाऊ निर्माण के तरीके और भारत के सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक अवसंरचना के विकास को तेज गति प्रदान करने के लिए अपनाए जाने वाले सबसे अच्छे तरीके। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, अवसंरचना विशेषज्ञ, बीआरओ के अधिकारी, उद्योग जगत की हस्तियां और प्रौद्योगिकी साझेदार एक साथ आए, ताकि रणनीतिक अवसंरचना के विकास के भविष्य पर मिलकर चर्चा कर सकें। सिंह ने बताया कि पिछले साढ़े छह दशकों में, बीआरओ ने खुद को सिर्फ सड़क बनाने वाली एजेंसी की बजाय रणनीतिक अवसंरचना तैयार करने वाले दुनिया के सबसे सम्मानित संगठनों में से एक के रूप में पहचान बनाई है। उन्होंने अटल सुरंग, उमलिंग ला दर्रा और सेला सुरंग जैसी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये बीआरओ की क्षमता और कड़ी मेहनत के 'जीवंत प्रमाण' हैं। उन्होंने कहा कि इसके समर्पित कर्मचारियों ने बार-बार साबित किया है कि देश सेवा की भावना के साथ, सबसे मुश्किल हालात में भी किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है। बीआरओ को नई प्रौद्योगिकी अपनाने में सबसे आगे रहने वाला संगठन बताते हुए, सिंह ने सुरंग बनाने की प्रौद्योगिकी का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रौद्योगिकी ने शहरों में मेट्रो बनाने से लेकर पहाड़ी इलाकों में राजमार्ग बनाने तक, हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों में बीआरओ जिस तेजी से सड़कें और राजमार्ग बनाता है, वह 'अभूतपूर्व' है। उन्होंने इसे इंसानी संकल्प और आधुनिक प्रौद्योगिकी की मिली-जुली ताकत का नतीजा बताया। इस मौके पर बीआरओ के निदेशक जनरल लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक क्षमता का पैमाना 'अब सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि हम क्या बनाते हैं; बल्कि यह इस बात से तय होता है कि हम कितनी समझदारी से योजना बनाते हैं, कितनी तेजी से काम पूरा करते हैं, कितनी अच्छी तरह निगरानी करते हैं और अवसंरचना संपत्तियों का रखरखाव कितना टिकाऊ तरीके से करते हैं।'' रक्षा मंत्री ने बीआरओ की अलग-अलग परियोजना के लिए पुरस्कार भी प्रदान किए। मंत्रालय ने बताया कि उन्होंने परियोजना प्रबंधन और भर्ती के लिए दो डिजिटल मंच की भी शुरुआत की, जो बीआरओ के डिजिटल बदलाव और संगठन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और अहम कदम है। सिंह ने बीआरओ के तीन खास प्रकाशन, 'पथ प्रदर्शक', 'ऊंची सड़कें' और 'पथ विकास' जारी किए, जिनमें संगठन की उपलब्धियों, इंजीनियरिंग नवाचार, बेहतरीन तौर-तरीकों और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण का जिक्र किया गया है।
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कोलकाता/तामलुक. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के स्कूलों की मध्याह्न भोजन योजना में अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) को शामिल करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन के पास बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का पर्याप्त अनुभव है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस्कॉन एक अगस्त से कोलकाता के स्कूलों में मध्याह्न भोजन का वितरण शुरू करेगा। इसके बाद इस कार्यक्रम का विस्तार नादिया जिले और फिर धीरे-धीरे पूरे राज्य में किया जाएगा। सरकार के इस फैसले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस्कॉन देश के कई शहरों में इसी तरह की योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर चुका है और अब उसके अनुभव का लाभ पश्चिम बंगाल को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ''स्कूल मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों को उचित पोषण देना भी है। पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है। हमारे स्कूलों में मध्याह्न भोजन पर निर्भर रहने वाले अधिकतर छात्र मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, इसलिए कुपोषण से निपटने के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक है।'' पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर निशाना साधते हुए शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में मध्याह्न भोजन योजना में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में राज्य की मध्याह्न भोजन योजना में जिस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। बच्चों के भोजन में अनियमितता किसी पाप से कम नहीं है। आने वाले दिनों में इस्कॉन मध्याह्न भोजन की जिम्मेदारी निभाएगा और सुनिश्चित करेगा कि हमारे बच्चों को बेहतर गुणवत्ता वाला पौष्टिक आहार मिले। यही हमारा कर्तव्य है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में कल्याणकारी कार्यक्रमों में और आध्यात्मिक एवं धर्मार्थ संगठनों को शामिल करने का इरादा रखती है।
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लखनऊ/गाजियाबाद. गाजियाबाद नगर निगम ने दिल्ली को शहर से जोड़ने वाली 11 किलोमीटर लंबी 'एलिवेटेड रोड' (उपरिगामी सड़क) का नाम 'राम सेतु' रखा है। इस मार्ग को अलग सांस्कृतिक पहचान देने के लिए इसके दिल्ली वाले सिरे पर एक भव्य प्रवेश द्वार भी बनाया जा रहा है, जिस पर भगवान राम के धनुष-बाण जैसी आकृति लगाई जाएगी। गाजियाबाद नगर निगम ने कहा कि राज नगर एक्सटेंशन से दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर तक फैली 'एलिवेटेड रोड' को अब 'राम सेतु' के नाम से जाना जाएगा और इसी नयी पहचान के हिसाब से भव्य प्रवेश द्वार भी तैयार किया जा रहा है। नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि प्रवेश द्वार के ऊपर भगवान राम का प्रतीक एक विशाल धनुष-बाण लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम के अधिकारी इस ढांचे के आसपास सजावटी लाइट समेत सुंदरता बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं, ताकि यह दिन और रात दोनों समय एक खास स्थल के रूप में दिखे। गाजियाबाद में महापौर सुनीता दयाल ने संवाददाताओं को बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ाना है, बल्कि गाजियाबाद को एक अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी देना है। उन्होंने कहा, "राम सेतु गेट लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसका निर्माण पूरा होने के बाद यह शहर के मुख्य आकर्षणों में से एक बन जाएगा और दिल्ली से गाजियाबाद आने वाले लोगों के लिए एक भव्य स्वागत स्थल का काम करेगा।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगभग 1,147 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 11 किलोमीटर लंबी इस उपरिगामी सड़क का उद्घाटन 30 मार्च 2018 को किया था, जिससे गाजियाबाद और दिल्ली के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम की कार्यकारी समिति ने फरवरी 2024 में इस 'एलिवेटेड रोड' का नाम बदलकर 'राम सेतु' रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।
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नई दिल्ली। भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल (Hydrogen Fuel Cell) ट्रेन के शुभारंभ से पहले संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोल्हेम ने इसकी सराहना करते हुए कहा, “शानदार है, भारत!”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को हरियाणा के जिंद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन जिंद और सोनीपत के बीच चलेगी और 10 डिब्बों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन संचालित यात्री ट्रेनों में से एक मानी जा रही है।सोल्हेम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह परियोजना आधुनिक हाइड्रोजन तकनीक, ईंधन भंडारण, रीफ्यूलिंग और परिचालन ढांचे को एक साथ जोड़ती है तथा भारत में स्वच्छ रेल परिवहन की संभावनाओं को प्रदर्शित करेगी।भारतीय रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन और वातावरण की ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, इसलिए इसे लगभग शून्य उत्सर्जन (Near Zero Emission) वाला परिवहन माध्यम माना जाता है।ट्रेन में दो हाइड्रोजन पावर कार और आठ ट्रेलर कोच हैं। प्रत्येक पावर कार 1,200 किलोवाट (करीब 1,600 हॉर्सपावर) बिजली पैदा करती है। ट्रेन की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के सफर की क्षमता है।इस परियोजना के लिए भारतीय रेलवे ने जिंद में देश का पहला एकीकृत रेलवे हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित किया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक से हाइड्रोजन तैयार की जाती है, उसे संपीड़ित (कंप्रेस) कर संग्रहित किया जाता है और विशेष रीफ्यूलिंग स्टेशन के जरिए ट्रेन में भरा जाता है। यह सुविधा लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन के भंडारण की क्षमता रखती है।रेल मंत्रालय के मुताबिक, हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण ट्रेन और रीफ्यूलिंग स्टेशन पर हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर, आग, धुआं और तापमान सेंसर, स्वचालित शटडाउन सिस्टम और वेंटिलेशन जैसी कई सुरक्षा व्यवस्थाएं की गई हैं। इस परियोजना को स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के बाद पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के मानकों के अनुरूप मंजूरी मिली है। रेल मंत्रालय ने कहा कि ब्रॉड गेज नेटवर्क के 99 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण के बाद हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय रेलवे के हरित परिवर्तन की अगली बड़ी पहल है। यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को भी समर्थन देती है। भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेनों को अन्य रेल मार्गों, विशेषकर विरासत (हेरिटेज) रेल मार्गों पर भी चलाने की योजना है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज शुक्रवार को भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसके तकनीकी फीचर्स और महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शुक्रवार को जींद से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। रेल मंत्री ने कहा, “यह देश के लिए, खासकर इंजीनियरों के लिए गर्व की बात है कि इतनी जटिल तकनीक भारत में विकसित की गई है। पूरी प्रोपल्शन सिस्टम और टेक्नोलॉजी देसी है और इसके IP राइट्स भारत के पास हैं। साथ ही कहा कि रेलवे फिलहाल इसे आगे विकसित करने पर कार्य कर रहा है।”
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताए प्रमुख पॉइंट्स:– स्वदेशी तकनीक: हाइड्रोजन प्रोडक्शन से लेकर मोटर तक पूरा सिस्टम भारत में डेवलप किया गया है।– कैसे काम करती है ट्रेन: जीरो-एमिशन ट्रेन के पीछे के टेक्निकल मैकेनिज्म के बारे में उन्होंने बताया कि यह सिस्टम पानी को पावर में बदलता है।– पास में एक इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट लगाया गया है। हाइड्रोजन पानी से बनता है और फिर इस फ्यूल सेल के ज़रिए वापस बिजली में बदला जाता है। इस बिजली का इस्तेमाल फिर मोटर चलाने के लिए किया जाता है। अंत में सिर्फ पानी की भाप निकलती है।– सुरक्षा: TUV SUD जैसी विश्वसनीय एजेंसी द्वारा गहन सुरक्षा जांच की गई। हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, हीट डिटेक्टर समेत एडवांस्ड सेंसर लगाए गए हैं। अगर हाइड्रोजन का स्तर 0.25% से ज्यादा होता है तो सेफ्टी सिस्टम एक्टिवेट हो जाते हैं। यह एक बहुत ही सुरक्षित गाड़ी है, जिसे अच्छी तरह से टेस्ट किया गया है, और लगातार टेस्टिंग और टेस्ट रन किए जाते हैं।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ट्रेन न सिर्फ रेलवे के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भविष्य में हाइड्रोजन तकनीक को कई देशों में निर्यात करने की संभावना भी खोलती है।ट्रेन की मुख्य विशेषताएं:– 10 कोच वाली ट्रेन (2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार + 8 ट्रेलर कोच)– 1200 kW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम– अधिकतम गति: 110 किमी/घंटा– यात्री क्षमता: लगभग 2600– जीरो एमिशन – केवल पानी की भाप निकलती है– जींद में समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांटरेल मंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को RDSO के डिजाइन अप्रूवल के अनुसार विकसित किया गया है और यह नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन तथा नेट-जीरो लक्ष्य को मजबूती देगा। इसे पूरी तरह से भारत में डिज़ाइन और डेवलप किया गया यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत के विज़न को दर्शाता है।हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजीहाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन से बिजली बनाती है। प्राइमरी एनर्जी सोर्स एक प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल (PEMFC) है। यह एक फ्यूल सेल है जो प्रोटॉन-कंडक्टिंग परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) पॉलीमर मेम्ब्रेन पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली बनाता है। इस प्रोसेस से बायप्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है।हाइड्रोजन एक हाई-एनर्जी फ्यूल है, डीजल की तुलना में 120 MJ/Kg (मेगाजूल प्रति किलोग्राम), जो 43 MJ/Kg है। इसका मेंटेनेंस कम होता है और कार्बन फुटप्रिंट मैनेज किया जा सकता है। यह हाइड्रोजन को रेल ट्रांसपोर्ट के लिए अभी उपलब्ध सबसे साफ प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी बनाता है। इसे सपोर्ट करने के लिए, इंडियन रेलवे ने डेडिकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ एक नए ट्रेन सेट की शुरुआत से कहीं अधिक है। यह भविष्य में हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ऑपरेशन के लिए ज़रूरी सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी बनाता है। इंडियन रेलवे के लगातार मॉडर्नाइजेशन के साथ यह पहल इसे बड़े पैमाने पर अपनाने की नींव रखती है।ट्रेन का नाम: नमो ग्रीन रेलयह लॉन्च भारत को उन चुनिंदा देशों (यूरोप, चीन, अमेरिका) के एलीट ग्रुप में शामिल कर रहा है जो हाइड्रोजन ट्रेन चला रहे हैं। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक साबित होगा। -
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना को एक और अत्याधुनिक एमएच-60आर सीहॉक नौसैनिक हेलीकॉप्टर मिला है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने इसे दोनों देशों की रक्षा साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। वहीं, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इसे द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए अच्छी खबर करार दिया।
भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एक और एमएच-60आर सीहॉक नौसैनिक हेलीकॉप्टर भारतीय तट पर पहुंच गया है। दूतावास के अनुसार, पिछले सप्ताह यह हेलीकॉप्टर कोच्चि में भारतीय नौसेना को सौंपा गया था और इस सप्ताह दो अन्य हेलीकॉप्टर भी पहुंचने वाले हैं। दूतावास ने कहा कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर कहा कि यह अमेरिका-भारत की बढ़ती रक्षा साझेदारी के लिए बेहद अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि उन्नत सैन्य क्षमताएं समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं और स्वतंत्र तथा खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रही हैं। भारत ने अपनी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अमेरिका से 24 एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर खरीदने का समझौता किया है। इन हेलीकॉप्टरों की चरणबद्ध तरीके से आपूर्ति की जा रही है। भारतीय नौसेना इन्हें मुख्य रूप से युद्धपोतों पर तैनात करेगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बियों की निगरानी और समुद्री सीमाओं की रक्षा की क्षमता और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक परिदृश्य के बीच एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की तैनाती भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को नई मजबूती देगी। साथ ही, यह डिलीवरी भारत और अमेरिका के बीच लगातार गहराते रणनीतिक तथा रक्षा संबंधों का भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।एमएच-60आर सीहॉक दुनिया के सबसे आधुनिक मल्टी-रोल नौसैनिक हेलीकॉप्टरों में शामिल है। इसे पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतही युद्ध, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान और विशेष नौसैनिक अभियानों के लिए विकसित किया गया है। यह हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक रडार, सोनार, इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिससे भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूरा हरियाणा अब विकास की नई पटरी पर चल पड़ा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जींद की जनता को ‘राम-राम’ करते हुए संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा, “मेरे लिए जींद आना पुरानी यादों का झरोखा खोलने जैसा है। जींद के घी और घेवर तो नहीं बदले, लेकिन जींद के तेवर बदल गए हैं। आज जींद भाजपा-एनडीए के सुशासन मॉडल की तस्वीर बन रहा है।”
पीएम मोदी के संबोधन के प्रमुख अंश:– “आज जींद का हरियाणा का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। आज यहां से देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली है।”– “भविष्य में जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र आएगा, तो जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम आएगा।”– स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने जींद और हरियाणा के लोगों की सराहना की और कहा कि अगर लोग तय कर लें तो जींद कभी गंदा नहीं हो सकता।उद्घाटन और शिलान्यास की मुख्य परियोजनाएं– दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (157.92 किमी)– अंबाला-काला अंब 4-लेन राजमार्ग (33.81 किमी)– जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग (40.60 किमी)– हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड हाईवे (24.27 किमी) – शिलान्यास– कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक– भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा सरकारी मेडिकल कॉलेज– नारनौल में महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज और राव तुला राम अस्पताल– कुरुक्षेत्र में सिख म्यूजियम – शिलान्यास– प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चाबियांइससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया था। डबल इंजन सरकार के मिशन को नई ऊर्जा देते हुए पीएम मोदी का यह दौरा हरियाणा के विकास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला साबित होगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को जींद में कहा कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह टेक्नोलॉजी अभी दुनिया में सिर्फ 3-4 देशों के पास है और भारत ने इसमें भी सबसे आगे रहकर अपनी स्वदेशी क्षमता का परिचय दिया है।
ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हाइड्रोजन ट्रेनें हाल ही में दुनिया के सामने आई हैं। ये सिर्फ सात-आठ साल पहले शुरू हुई थीं। अभी केवल तीन या चार देशों के पास हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की क्षमता है। लेकिन भारत की हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमताओं को सुनकर हर भारतीय को गर्व होगा।”पीएम मोदी ने दी ये जानकारी– जींद-सोनीपत रूट पर चलने वाली यह ट्रेन 3,200 हॉर्सपावर के प्रोपल्शन सिस्टम से चलती है।– यह न सिर्फ दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है, बल्कि भारत की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन भी है।– 21वीं सदी हाइड्रोजन-पावर्ड रेल ट्रांसपोर्ट की सदी होगी।प्रधानमंत्री ने रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन का जिक्र करते हुए कहा कि 1925 से 2014 तक 90 वर्षों में केवल 30% रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड हो पाया था, जबकि पिछले 12 वर्षों में यह बढ़कर लगभग 99% हो गया है। हरियाणा में तो 100% इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है।अन्य प्रमुख बातेंपीएम मोदी ने हरियाणा को 14,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का तोहफा दिया, जिनमें दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, जींद-गोहाना हाईवे, अंबाला-काला अंब फोर-लेन सड़क और मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। उन्होंने हालिया विदेश यात्राओं (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत इन देशों के साथ खेल और स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में सहयोग बढ़ाएगा, जिससे हरियाणा के खिलाड़ियों को विशेष लाभ मिलेगा। इसी के साथ पीएम मोदी ने हरियाणा के खिलाड़ियों को जमकर तैयारी करने को भी कहा ताकि आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।पीएम मोदी का यह दौरा हरियाणा के लिए विकास, आधुनिकता और ग्रीन टेक्नोलॉजी का प्रतीक बन गया है। हाइड्रोजन ट्रेन का लॉन्च भारत को ग्लोबल क्लीन मोबिलिटी मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के रूट पर चलेगी। इस ऐतिहासिक मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे। हरी झंडी दिखाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्टेशन पर उपस्थित लोगों और स्कूली छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया।
स्कूली बच्चों ने किया ‘ग्रीन ट्रेन’ का पहला सफरट्रेन के पहले सफर पर स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लिए बेहद उत्साहित नजर आए। बच्चों ने ग्रीन ट्रांसपोर्ट का यह अनुभव बेहद यादगार बताया।विकास परियोजनाओं का तोहफाहाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी जींद के एकलव्य स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और कुछ को राष्ट्र को समर्पित किया।मुख्य परियोजनाएं:– दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (पैकेज 1-5): 157.92 किमी लंबा, 4-लेन एक्सप्रेसवे (9,680 करोड़ रुपये)– दिल्ली-कटरा यात्रा समय: 14 घंटे से घटकर 6 घंटे– दिल्ली-अमृतसर यात्रा समय: 8 घंटे से घटकर 4 घंटे– अंबाला-काला अंब राजमार्ग: 33.81 किमी, 4-लेन (NH-7 और NH-344)– जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग: 40.60 किमी (NH-352A)– हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड राजमार्ग की आधारशिलाइस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रधानमंत्री का साफा पहनाकर और उपहार भेंट कर स्वागत किया।देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का आज का यह लॉन्च स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। -
हैदराबाद. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी को प्रसिद्ध लेखक और जादूगर बी. वी. पट्टाभिराम की स्मृति में 'एमेस्को बुक्स' द्वारा शुरू किया गया पहला 'चेंज मेकर- 2026' पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। प्रतिष्ठित प्रकाशन हाउस 'एमेस्को बुक्स' ने बृहस्पतिवार को एक विज्ञप्ति में बताया कि केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा, अभिनेता चिरंजीवी और जया पट्टाभिराम सतीश रेड्डी को इस पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। विज्ञप्ति के अनुसार, 'एमेस्को' ने इस पुरस्कार की शुरुआत समाज के उन पथ-प्रदर्शकों को सम्मानित करने के लिए की है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। विज्ञप्ति में कहा गया कि पट्टाभिराम (1950-2025) ने अपने जीवन के बाद के वर्षों में पुस्तकों, व्याख्यानों और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों को पेशेवर और शिक्षाविद के रूप में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। विज्ञप्ति के अनुसार, सतीश रेड्डी ने रक्षा क्षेत्र में अपनी अनूठी और नयी पहलों के माध्यम से रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के अध्यक्ष के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
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राष्ट्रपति मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ पर लिखा लेख
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी श्रद्धा जताई और बताया कि कैसे उन्हें अहम मौकों पर भगवान से मार्गदर्शन मिला, जिसमें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए उनकी उम्मीदवारी की घोषणा भी शामिल है। अपने लिखे एक लेख को 'एक्स' पर साझा करते हुए मुर्मू ने कहा कि वह बचपन से ही महाप्रभु जगन्नाथ की भक्त रही हैं। राष्ट्रपति ने लिखा, ''बचपन से मैं जगनाथ जी की भक्त हूं। वे सर्वदा मेरे परम आराध्य हैं। मेरे जीवन के उत्थान और पतन के वे नियंता हैं। मेरे दुख-सुख के कर्ता-धर्ता हैं। जीवन में मैंने बहुत कष्ट भी सहे हैं। उन सब दुख से उबारा है मुझे महाबाहु ने। मैं उनकी बेटी जो हूं!'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति पद के लिए मुझे उम्मीदवार बनाने की घोषणा होते ही मैंने महाप्रभु का स्मरण किया। इतनी ऊंचाई पर मुझे ले जा रहे हो प्रभु, पग-पग पर मुझे सहारा देना, सदा मेरे पास रहना - यह मेरी प्रार्थना थी। उन्होंने मेरी प्रार्थना सुनी, सुन भी रहे हैं।'' मुर्मू ने कहा, ''राष्ट्रपति पद की उमीदवार के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान रथयात्रा का महापर्व आया। परंतु पुरी जाना संभव नहीं था। रथयात्रा के दिन बड़े भोर में दिल्ली के हौजखास में बने जगन्नाथ मंदिर जाकर मैंने महाप्रभु के दर्शन किए। मन आनंद से भर गया। उनका आशीष मुझ पर बरस गया। बड़े आत्मविश्वास से मैंने अपना नामांकन-पत्र दाखिल किया।'' 'इस विशाल पथ पर' शीर्षक वाला लेख रथ यात्रा के अवसर पर साझा किया गया।
मुर्मू ने 25 जुलाई, 2022 को देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली, जिससे वह देश की पहली आदिवासी राष्ट्राध्यक्ष बन गईं। मुर्मू ने याद किया, ''अत्यंत उत्साह से चुनाव प्रचार में भाग लिया। 25 जुलाई, 2022 को संसद के केंद्रीय कक्ष में शपथ लेने जाते समय मैं जगन्नाथ जी से प्रार्थना करते-करते जा रही थी। उनके आशीवाद से मेरा शपथ-पाठ खूब अच्छी तरह संपन्न हुआ। राष्ट्रपति के रूप में मेरे प्रथम भाषण के समय मानो वे मेरे साथ ही थे।'' उन्होंने कहा कि जल्द ही 10 नवंबर 2022 को पुरी जाने का कार्य्रकम तय हो गया।
राष्ट्रपति ने कहा, ''श्रीमंदिर के सिंहद्वार के पास पहुंचते ही मैं स्थिर नहीं रह पाई। तब तक मैं खुद को भूल चुकी थी। पावन-पथ की धूल में साष्टांग लेटकर मैंने महाप्रभु को प्रणाम किया। उसके बाद मंदिर में प्रवेश। गर्भगृह में पहुंचकर चतुर्धा मूर्तियों का दर्शन करते ही मैं आनंद से अभिभूत हो गई। महाप्रभु जगत के नाथ हैं, अनाथों के नाथ हैं। जगत के लोगों का दुःख दूर करने के लिए वे सदा तत्पर रहते हैं।'' इससे पहले दिन में 'एक्स' पर एक अलग पोस्ट में, मुर्मू ने रथ यात्रा के मौके पर लोगों को बधाई दी और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी)-2026 के परिणाम घोषित किए, जिसमें पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने शीर्ष स्थान हासिल किया जबकि कुल 11.21 लाख अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। सफल अथ्यर्थियों में 58 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं।
एनटीए के अनुसार, जहां गुप्ता और बंसल ने 720 में से 715-715 अंक हासिल किए, वहीं 19 अभ्यर्थियों ने 700 अंक और 138 अभ्यर्थियों ने 690 अंक प्राप्त किए। इसके अलावा कुल 1,492 अभ्यर्थियों ने 650 या उससे अधिक अंक अर्जित किए, जबकि 10,160 अभ्यर्थियों ने 600 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नौ मई को आयोजित यह परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा रद्द कर दी गई थी। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है। परीक्षा का दोबारा आयोजन 21 जून को किया गया था।
पिछले वर्ष परीक्षा के परिणाम 25 जून को घोषित किए गए थे। दोबारा परीक्षा के कारण प्रवेश प्रक्रिया के कार्यक्रम में देरी की आशंकाओं को दूर करते हुए एनटीए ने स्पष्ट किया कि परिणाम समय पर घोषित किए गए हैं, ताकि अभ्यर्थियों के लिए चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश और काउंसिलिंग का कार्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार जारी रह सके। एनटीए ने कहा, ''प्रक्रिया में बदलाव करके परिणाम समय पर घोषित किए गए। इसके तहत विभिन्न चरणों को एक के बाद एक पूरा करने के बजाय समानांतर रूप से संचालित किया गया। साथ ही, ओएमआर शीट से संबंधित आपत्तियों की प्रक्रिया को उत्तर कुंजी जारी करने की प्रक्रिया से अलग रखा गया। प्रत्येक चरण को पूरी तरह पूरा किया गया और अभ्यर्थियों के देखने के लिए उपलब्ध कराया गया।" एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए कुल 1,08,000 सीट उपलब्ध हैं। इनमें से लगभग 56,000 सीट सरकारी कॉलेजों में हैं और करीब 52,000 सीट निजी कॉलेजों में हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में सेमीकंडक्टर परिवेश को मजबूत बनाने, मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र के तौर पर स्थिति मजबूत करने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली दो बड़े विनिर्माण कार्यक्रमों को मंजूरी दी। सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, मोबाइल फोन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने और स्थानीय मूल्य सृजन को मजूबूत करने के मकसद से 62,500 करोड़ रुपये की 'मोबाइल फोन विनिर्माण' योजना को भी मंजूरी दी गई है। सेमीकंडक्टर कार्यक्रम 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के पहले चरण पर आधारित है। यह छह मुख्य क्षेत्रों... चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, अत्याधुनिक पैकेजिंग और परीक्षण, शोध और विकास तथा प्रतिभा विकास पर ध्यान देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''इस कार्यक्रम के अंत तक हम स्वदेशी चिप के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।'' सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और योजना अवधि के दौरान दो लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन होगा। वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये की 'मोबाइल फोन विनिर्माण योजना' को भी मंजूरी दी है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी पांच वर्षों के लिए विनिर्माताओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) दिए जाएंगे। पात्र मोबाइल फोन की बिक्री पर प्रोत्साहन 2.25 प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक होंगे। साथ ही मुख्य कलपुर्जे की घरेलू खरीद और उत्पाद डिजाइन और शोध में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि मोबाइल फोन योजना से योजना अवधि के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपये का कुल उत्पादन होगा, निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी। भारत मोबाइल फोन विनिर्माण के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अब देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन यहीं बनते हैं। 2025 में मोबाइल फोन भारत का सबसे अधिक निर्यात होने वाला उत्पाद बन गया। इसने डीजल और तराशे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया। सेमीकॉन 2.0 का मकसद सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा, वाणिज्यिक और रणनीतिक चिप डिजाइन और विभिन्न क्षेत्रों में जरूरी महत्वपूर्ण कलपुर्जे बनाने की क्षमता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टर मशीनरी, सामग्री, रसायन और गैस बनाने वाली कंपनियों को मदद देगा और साथ ही भारत में और फैब्रिकेशन संयंत्र लाने की कोशिश करेगा। मंत्रिमंडल बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस पहल से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। उम्मीद है कि देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई 2028 में काम करना शुरू कर देगी। इस कार्यक्रम का मकसद असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग और आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट क्षमताओं को बढ़ाना और साथ ही अत्याधुनिक चिप प्रौद्योगिकी पर शोध को आगे बढ़ाना भी है। भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर देने से 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। सरकार ने कहा कि 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में काफी वृद्धि हुई है। उत्पादन सात गुना और निर्यात 11 गुना बढ़ गया है। इसमें 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत मोबाइल फोन विनिर्माण का बड़ा योगदान है। सेमीकंडक्टर और मोबाइल विनिर्माण के ये कार्यक्रम भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद प्रमुख प्रौद्योगिकी में घरेलू क्षमताएं बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती के साथ एकीकृत होना है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) श्रम-प्रधान उद्योगों में छिपी संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है, जिससे देश के 99 प्रतिशत निर्यात को बगैर-शुल्क (जीरो-ड्यूटी) बाजार पहुंच मिलेगी। शाह ने कहा कि बुधवार से लागू होने वाला यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना वाले 'विकसित भारत' की कुंजी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह समझौता श्रम-प्रधान उद्योगों में मौजूद कई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है। इससे भारतीय निर्यात का 99 प्रतिशत हिस्सा शुल्क-मुक्त हो जायेगा, जिनमें कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र शामिल हैं।'' उन्होंने कहा कि यह समझौता केंद्र सरकार की जन-हितैषी कूटनीति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ब्रिटेन में भारतीय पेशेवरों को भी महत्वपूर्ण छूट प्रदान करेगा। बुधवार से लागू हुए वृहद आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के उनके समकक्ष केअर स्टॉर्मर ने हस्ताक्षर किये थे।
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नयी दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों ने चार महीने के एक शिशु के फेफड़े बचाने के लिए उसकी बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह शिशु जन्मजात विकृति से पीड़ित था, जिससे उसके दोनों फेफड़े प्रभावित थे। अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को यह जानकारी दी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ऑपरेशन के महज दो दिन बाद शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, फेफड़े के एक हिस्से को निकालने वाली 'सेगमेंट-लेवल लंग रिसेक्शन या सेगमेंटेक्टॉमी सर्जरी' इतनी कम उम्र के मरीज पर की गई अपनी तरह की सबसे दुर्लभ सर्जरी में से एक है। यह देश के अग्रणी संस्थान में उपलब्ध उन्नत बाल चिकित्सा सर्जिकल सुविधाओं को भी दर्शाती है। डॉक्टरों के अनुसार, शिशु के दाएं फेफड़े में यह सर्जरी की गई, जबकि बाएं फेफड़े की सर्जरी कुछ महीने बाद निर्धारित की जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि जन्म से पहले ही शिशु में जन्मजात पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (सीपीएएम) की पहचान कर ली गई थी। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान फेफड़े का कुछ हिस्सा असामान्य रूप से विकसित हो जाता है और उसमें गांठ जैसी संरचनाएं बन जाती हैं, जो फेफड़े के सामान्य ऊतकों की तरह काम नहीं कर पातीं। डॉक्टरों ने बताया कि यह मामला विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इस विकृति ने एक फेफड़े के बजाय दोनों फेफड़ों को प्रभावित किया था, जबकि आमतौर पर यह स्थिति केवल एक ही फेफड़े में देखी जाती है। उन्होंने बताया कि पूरे फेफड़े के एक हिस्से को निकालने से भविष्य में फेफड़ों की क्षमता में काफी कमी आ सकती थी, इसलिए डॉक्टरों की टीम ने फेफड़े को बचाने वाली तकनीक अपनाई और दाएं फेफड़े के केवल प्रभावित हिस्सों को ही हटाया। प्रत्येक फेफड़ा छोटे-छोटे कार्यात्मक हिस्सों में बंटा होता है, जिन्हें सेगमेंट कहा जाता है। इनमें से हर हिस्से की अपनी अलग वायु नली और रक्त आपूर्ति होती है। डॉक्टरों ने बताया कि जहां फेफड़े के एक बड़े हिस्से को निकालने की सर्जरी अपेक्षाकृत आसान होती है, वहीं सेगमेंटेक्टॉमी में गहराई में स्थित रक्त वाहिकाओं और वायु नलियों को बेहद सावधानी से अलग करना पड़ता है, ताकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखा जा सके। यह सर्जरी बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशेष जैन के नेतृत्व में की गई। ऑपरेशन बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरा हुआ और शिशु को दो दिन बाद स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि फेफड़ों की जन्मजात विकृति से पीड़ित चुनिंदा शिशुओं में समूचे हिस्से को हटाने के बजाय केवल प्रभावित भाग को निकालना संभव है। उन्होंने कहा कि इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद मिलती है और मरीज के लिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले इस उर्वरक के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर नए निवेश ढांचे के तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, ''पिछले एक दशक में छह नए संयंत्र स्थापित होने से यूरिया आयात पर भारत की निर्भरता कम हुई है। आठ से नौ नए संयंत्रों की स्थापना से देश अपनी पूरी आवश्यकता की पूर्ति घरेलू स्तर पर कर सकेगा और इस उर्वरक के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।'' उन्होंने कहा कि यूरिया की मांग हर साल लगभग पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। भारत में यूरिया का उत्पादन लगभग तीन करोड़ टन है जबकि मांग चार करोड़ टन है। एक करोड़ टन की कमी आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। आज मंजूर की गई नीति का उद्देश्य अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। वैष्णव ने कहा कि इस नीति के तीन प्रमुख स्तंभ -सब्सिडी की गणना के लिए स्थिर एवं परिवर्तनीय लागत को अलग करना, यूरिया संयंत्र संचालित करने वाली कंपनियों के लिए 12-16 प्रतिशत के बीच सुनिश्चित प्रतिफल और विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करना है। उन्होंने कहा कि नई नीति, नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012 का विस्तार है।









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