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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ऑर्गेनिक और केमिकल-फ्री खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत को इस अवसर का लाभ उठाते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादों को निर्यात उन्मुख बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने “कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड और समग्र स्वास्थ्य देखभाल के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। ऐसे में भारत के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती और केमिकल-फ्री उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का एक “हाईवे” बन सकते हैं।उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए प्रमाणन, प्रयोगशालाओं और आवश्यक ढांचे के विकास पर विचार कर रही है, लेकिन इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने से किसानों के लिए जोखिम बढ़ जाता है और आय के विकल्प सीमित हो जाते हैं। इसी कारण सरकार फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दे रही है। खाने के तेल और दालों के लिए राष्ट्रीय मिशन तथा प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन जैसे प्रयास कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।पीएम मोदी ने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है। इसी सोच के साथ सरकार ने पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करीब 10 करोड़ किसानों को चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिली है।उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सुधार के कारण किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है। संस्थागत ऋण की पहुंच 75 प्रतिशत से अधिक किसानों तक हो चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया गया है। इन पहलों के कारण किसानों का जोखिम कम हुआ है और कृषि क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ा है।आज भारत अनाज, दालों और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा हैप्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अनाज, दालों और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है, लेकिन 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश करते हुए कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा भरना आवश्यक है। इस वर्ष के बजट में इसी दिशा में कई नए अवसर प्रदान किए गए हैं, जो उत्पादकता बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने में मदद करेंगे।उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से खुल रहे हैं और दुनिया की मांग में बदलाव आ रहा है। ऐसे में भारत को अपनी कृषि को निर्यात उन्मुख बनाने पर ध्यान देना होगा। देश के विविध जलवायु क्षेत्रों और समृद्ध एग्रो-क्लाइमेटिक जोन का लाभ उठाकर विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट में उच्च मूल्य वाली कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को क्षेत्रीय आधार पर प्रोत्साहित करने की योजना है।उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में बड़ी मात्रा में नारियल का उत्पादन होता है, लेकिन कई स्थानों पर पेड़ पुराने हो चुके हैं और उनकी उत्पादकता कम हो गई है। इसलिए बजट में नारियल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में टेम्पर्ड नट फसलों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव किया गया है। जैसे-जैसे निर्यात उन्मुख उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके लिए सरकार, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि उच्च मूल्य वाली कृषि को सामूहिक प्रयासों से बढ़ावा दिया जाए तो भारत का कृषि क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए गुणवत्ता, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजारों में मजबूत पहचान बन सके।उन्होंने पशुपालन क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तेजी से उभरता स्तंभ बताते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वामित्व योजना जैसी योजनाओं ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2029 तक तीन करोड़ और “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी कृषि क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने और किसानों को नई तकनीकों तथा बाजारों से जोड़ने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। -
नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत की ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बायोगैस सबसे अच्छा विकल्प है।
उन्होंने यह बात पुणे के यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी में आयोजित संपीड़ित बायोगैस सम्मेलन 2026 के उद्घाटन के अवसर पर कही।इस सम्मेलन में भारतीय हरित ऊर्जा संघ के अध्यक्ष प्रमोद चौधरी और सांसद डॉ. टी. कृष्ण प्रसाद भी उपस्थित थे। श्री गडकरी ने कहा कि भारत का वार्षिक ईंधन आयात बिल 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।उन्होंने कहा इस निर्भरता को कम करने के लिए संपीड़ित बायोगैस जैसे स्वदेशी और किफायती ईंधन की आवश्यकता है।श्री गडकरी ने बताया कि कृषि अवशेषों, विशेष रूप से दिल्ली और उत्तर भारत में फसल के अवशेषों को बायोगैस में परिवर्तित करने से पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उद्यमियों से बायोगैस उत्पादन में लागत कम करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। साथ ही, बायोगैस परियोजनाओं और इस क्षेत्र में नवाचार में निवेश करने का आह्वान भी किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना जरूरी है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं और मुझे विश्वास है कि वेबिनार में हुई चर्चा व इससे निकले विचार बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ऑरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा जरूरी है। हमारे यहां अलग-अलग तरह का क्लाइमेट है और हमें इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए। हमारे यहां एग्रो-क्लाइमेटिक जोन बहुत ज्यादा हैं।उन्होंने कहा कि बजट में हमने हाई वैल्यू एग्रीकल्चर पर फोकस किया है। केरल और तमिलनाडु के किसानों को अधिक फायदे मिलें, यह सुनिश्चित करने के लिए इस बार नारियल पर खास जोर दिया गया है, जिससे हमारे किसानों को फायदा होगा। बजट में नॉर्थ ईस्ट की फसलों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव शामिल किया गया है।कृषि और किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत संबंधित विभागों के अधिकारी वेबिनार में शामिल हुए। पीएम मोदी ने कहा, “अब बजट के बाद उसके फुल पोटेंशियल का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो, बजट का पाई-पाई पैसा जिसके लिए दिया गया है, उसको जल्द से जल्द परिपूर्ण कैसे करें, आपके सुझाव इस वेबिनार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।”उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। एग्रीकल्चर भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का रणनीतिक स्तंभ भी है। इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है।पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मिले हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा, “एमएसपी में हुए रिफॉर्म से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। संस्थागत ऋण कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के दावे का निपटान किया गया है। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है और उन्हें एक बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है। - नई दिल्ली। अमरीका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की छूट देने की घोषणा की है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस छूट के अंतर्गत भारत को उस रूसी तेल की खरीद की अनुमति दी गई है, जो इस समय समुद्र में फंसा हुआ है।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहले से भेजी गर्इ तेल आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय परिवहन जटिलताओं के कारण नष्ट होने की बजाए अपने गंतव्य तक पहुंच सके। अमरीका के अनुसार इन विशेष तेल खेपों की आवाजाही को संभव बनाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सहारा मिलेगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार के सुचारू संचालन में मदद मिलेगी। यह छूट एक अस्थाई व्यवस्था के रूप में दी गई है। यह केवल उन तेल खेपों पर लागू होगा जो पहले से ही परिवहन में हैं।
- नई दिल्ली। International Monetary Fund ( आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि भारत वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्रांति में एक अहम भूमिका निभा रहा है और यह तकनीक को न केवल अपने नागरिकों बल्कि दुनिया के कई विकासशील देशों के लिए भी अधिक सुलभ बना रहा है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक जॉर्जीवा ने यह बात बैंकॉक में आयोजित Asia in 2050 Conference में कही। उन्होंने कहा कि एआई का तेजी से विकास वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है और इस बदलाव में एशिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।जॉर्जीवा के अनुसार यदि एशियाई देश उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का प्रभावी उपयोग करते हैं तो इससे क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर हर साल लगभग एक प्रतिशत तक बढ़ सकती है।उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा डिजिटल इकोसिस्टम, तेजी से बढ़ता तकनीकी क्षेत्र और युवा कार्यबल एआई तकनीक को वैश्विक स्तर पर अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई के बढ़ते उपयोग से श्रम बाजार में बदलाव आ सकता है।उनके मुताबिक, उच्च कौशल और कम कौशल वाले कामों की मांग बढ़ सकती है, लेकिन मध्यम स्तर की कई नौकरियों पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है।उन्होंने विशेष रूप से शुरुआती स्तर की नौकरियों को लेकर चिंता जताई, क्योंकि इनमें अक्सर नियमित और दोहराए जाने वाले काम होते हैं जिन्हें आसानी से स्वचालित किया जा सकता है।आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकारों को डिजिटल अवसंरचना में निवेश करना होगा, कौशल प्रशिक्षण को मजबूत करना होगा और कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना होगा।उन्होंने कहा कि जो देश समय रहते अपने लोगों में निवेश करेंगे और सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे, वही एआई से होने वाली आर्थिक प्रगति का अधिक लाभ उठा सकेंगे।
- नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते तकनीक आधारित दौर में जीआरएसई को अत्याधुनिक और नवाचार आधारित जहाज एवं प्लेटफॉर्म विकसित करने चाहिए। उन्होंने जीआरएसई से भारत के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स परिसर में कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा, “आज का युग तकनीक का युग है। जीआरएसई को इसी के साथ तालमेल बिठाते हुए ऐसे जहाज और प्लेटफॉर्म तैयार करने चाहिए, जो भारत और दुनिया में जहाज निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रतीक बनें।” उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह सरकार के विकसित भारत-2047 के सपने को साकार करने में जीआरएसई की अहम भूमिका होगी।राष्ट्र-निर्माण और समुद्री अर्थव्यवस्था में जीआरएसई के योगदान की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय शिपयार्ड देश के औद्योगिक और रक्षा इतिहास का जीवंत अध्याय हैं। पिछले डेढ़ सदी से जीआरएसई ने भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल को शक्तिशाली युद्धपोत, फ्रिगेट और अन्य जहाज उपलब्ध कराए हैं, जिन्होंने देश के समुद्री हितों की रक्षा की है।राजनाथ सिंह ने कहा, “जब आपका बनाया हुआ आधुनिक युद्धपोत समुद्र की लहरों पर चलता है, तो वह केवल स्टील और मशीनों का ढांचा नहीं होता। यह हजारों श्रमिकों की मेहनत, इंजीनियरों की नवाचार क्षमता, तकनीशियनों की सटीकता और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है।”रक्षा मंत्री ने जीआरएसई के कर्मचारियों को केवल नौकरीपेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के महान अभियान का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, कौशल और प्रतिबद्धता से जीआरएसई ने असंभव को संभव बनाया है। उन्होंने कर्मचारियों से इसी उत्साह और समर्पण के साथ काम करते रहने की अपील करते हुए कहा, “नई चुनौतियां आएंगी, नई तकनीकें आएंगी और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, लेकिन इसी मेहनत और समर्पण से जीआरएसई भारत और दुनिया में जहाज निर्माण उत्कृष्टता का चमकता सितारा बनेगा।”कार्यक्रम में जीआरएसई के कर्मचारियों और उनके परिवारों ने रक्षा मंत्री के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। राजनाथ सिंह ने इसे ‘बहुत शानदार’ बताते हुए कहा कि यह भारत की विविधता, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक थी। इस अवसर पर जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त), रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और शिपयार्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।--
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नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए विकसित डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने जनगणना के आधिकारिक शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का भी औपचारिक अनावरण किया।
सरकार की ओर से 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही भारत की जनगणना-2027 की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। दो चरणों में होने वाली यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना अभियान मानी जा रही है। इस बार पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी और नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा।स्व-गणना के लिए एक सुरक्षित वेब-आधारित पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पहले अपनी जानकारी 16 भाषाओं में ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करने पर दर्ज जानकारी की पुष्टि की जा सकेगी।इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए, जिन्हें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। इनमें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (एनएलबीसी) वेब एप्लिकेशन, एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन, स्व-गणना पोर्टल और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म जनगणना कार्यों की योजना, डेटा संग्रह और निगरानी को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएंगे।जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” को मित्रवत और सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों पात्र वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का संदेश भी देते हैं। इनके माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी समाज के विभिन्न वर्गों तक सरल तरीके से पहुंचाई जाएगी।जनगणना-2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच गृह-सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए चलाया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में देशभर में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज किए जाएंगे।पूरे अभियान में देशभर के लगभग 30 लाख प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे, जो सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे। सरकार का उद्देश्य तकनीक के उपयोग से इस विशाल जनगणना को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाना है। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 मार्च 2026 को सुबह 11:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “कृषि और ग्रामीण रूपांतरण” विषय पर बजट-उपरांत वेबिनार को संबोधित करेंगे। इस वेबिनार का उद्देश्य बजट में घोषित पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करना है।
इस विषय के अंतर्गत आठ अलग-अलग वेबिनार सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें चार प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है—कृषि, पशुपालन और डेयरी, मत्स्य पालन तथा ग्रामीण आजीविका। इन सत्रों में इन क्षेत्रों के विकास और बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा होगी।बजट-उपरांत वेबिनार में उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और चिलगोज़ा जैसी फसलों की संभावनाओं के विकास पर विचार किया जाएगा।वेबिनार में ‘भारत विस्तार’ के माध्यम से उपलब्ध अवसरों पर भी चर्चा होगी, जो कृषि क्षेत्र के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है। इसके जरिए कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और बेहतर प्रबंधन को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जाएगा।सत्रों में पशुपालन मूल्य श्रृंखला में निजी क्षेत्र के निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने, मत्स्य पालन के लिए जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास तथा तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।इसके साथ ही एसएचई-मार्ट्स के माध्यम से ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को मजबूती मिल सके। -
नई दिल्ली। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने गुरुवार (5 मार्च 2026) को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-फिनलैंड संबंधों और विभिन्न वैश्विक व द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति स्टब का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस वर्ष के ‘रायसीना डायलॉग’ में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति भारत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि समकालीन वैश्विक स्थिति पर उनके विचार कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी होंगे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत फिनलैंड को एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हैं।दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि हाल के वर्षों में भारत-फिनलैंड संबंध नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, शिक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों के कारण और मजबूत हुए हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि हाल ही में घोषित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देगा।राष्ट्रपति ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी से लेकर 6जी तक अत्याधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। उन्होंने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में फिनिश कंपनियों की भूमिका की सराहना की और कहा कि कई भारतीय कंपनियां भी फिनलैंड में सक्रिय हैं। इसके साथ ही हजारों भारतीय, विशेषकर आईटी पेशेवर, वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।राष्ट्रपति मुर्मु ने सतत विकास और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार, हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।उन्होंने राष्ट्रपति स्टब को ‘लाइफ मिशन’ के बारे में भी जानकारी दी, जो लोगों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि फिनलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के हरित ऊर्जा नवाचार मिलकर यह दिखा सकते हैं कि समृद्धि और स्थिरता साथ-साथ संभव है। -
नई दिल्ली। भारत और फिनलैंड के बीच पर्यावरण सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित पर्यावरण सहयोग से जुड़े समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत और फिनलैंड ने वर्ष 2020 में किए गए समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया है। इससे ज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के माध्यम से प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, वन तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।नवीनीकृत समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करेगा। इसके तहत वायु और जल प्रदूषण की रोकथाम तथा नियंत्रण, दूषित मिट्टी के पुनः उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन, खतरनाक अपशिष्ट के निपटान, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।समझौते में प्राकृतिक संसाधनों और वनों के उपयोग में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, जलवायु परिवर्तन के शमन और अनुकूलन, पर्यावरण एवं वन निगरानी, डेटा प्रबंधन तथा समुद्री और तटीय संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग पर भी सहयोग को शामिल किया गया है।दोनों देशों ने केंद्रित संवाद और संयुक्त पहलों के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों पर भी चर्चा की। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने देशभर के 26 युवा चिकित्सा पेशेवरों को ऑन्कोलॉजी, बाल रोग, एंडोक्रिनोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और आपातकालीन चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम आयोजित करने वाले मीडिया संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि करियर के शुरुआती दौर में इस तरह का सम्मान मिलना युवा डॉक्टरों के लिए बड़ी पहचान और प्रोत्साहन होता है। उन्होंने कहा कि करियर के बाद के चरण में मिलने वाले पुरस्कारों की तुलना में शुरुआती दौर में मिली मान्यता कहीं अधिक प्रेरणादायक होती है।उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए युवा डॉक्टरों को उनके करियर के प्रारंभिक चरण में ही पहचान देना महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें उत्कृष्टता हासिल करने और तेजी से बदलते चिकित्सा क्षेत्र में अपने ज्ञान को लगातार अद्यतन रखने की प्रेरणा मिलती है।डॉ. सिंह ने कहा कि नई तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं। हालांकि तकनीक ने निदान और उपचार में काफी सुधार किया है, लेकिन डॉक्टर की भूमिका अभी भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनुभव और नैदानिक अंतर्ज्ञान रोगी की देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं।उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले चिकित्सा शिक्षा कुछ विशेष रोगों तक सीमित थी, लेकिन आज चिकित्सा क्षेत्र अनेक विशेषज्ञताओं और नई उपचार पद्धतियों के कारण बहुत व्यापक हो गया है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता कई पारंपरिक शैक्षणिक कार्यों को भी संभालने लगी है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि तकनीकी प्रगति, नए रोगों और बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं के कारण चिकित्सा क्षेत्र पहले से अधिक जटिल हो गया है। ऐसे में हर युवा चिकित्सक को उभरती तकनीकों और विकल्पों के बीच चिकित्सा विशेषज्ञता के किसी एक विशेष क्षेत्र पर लगातार ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करना चाहिए।उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद के दौर में संक्रामक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए नई चुनौतियां बनकर उभरी हैं। ऐसे में चिकित्सा पेशेवरों के लिए विशेष ज्ञान और निरंतर सीखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।जितेंद्र सिंह ने सम्मानित किए गए युवा डॉक्टरों पर भरोसा जताते हुए कहा कि इनमें से कई भविष्य में अपने करियर में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेंगे और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान भी प्राप्त करेंगे। -
नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने गुरुवार को पटना में आगामी द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है।
नितिन नबीन के नामांकन के दौरान केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व विजय कुमार सिन्हा उपस्थित रहे। वहीं, बिहार में एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी इस अवसर पर मौजूद थे।भाजपा अध्यक्ष ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अपनी राजनीतिक यात्रा को याद किया। उन्होंने लिखा कि राज्यसभा के लिए नामांकन प्रस्तुत करते हुए मन स्वाभाविक रूप से उस लंबी यात्रा को याद कर रहा है, जिसे उन्होंने जनता के साथ मिलकर तय किया है। उन्होंने कहा कि पटना पश्चिम (बांकीपुर) की जनता ने उन्हें हाथ पकड़कर चलना सिखाया और पिछले दो दशकों से अधिक समय से मिले विश्वास और स्नेह के बल पर उन्हें बिहार सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला।नितिन नबीन ने अपने पोस्ट में कहा कि चाहे श्रीरामनवमी की भव्य शोभायात्रा की तैयारियां हों, आस्था के पर्वों की व्यवस्थाएं हों या बांकीपुर के विकास से जुड़े संकल्प—हर कदम पर उन्होंने स्वयं को जनता के विश्वास का प्रतिनिधि मानकर काम किया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के लिए नामांकन करते समय भी उनके मन में वही जिम्मेदारी और सेवा का संकल्प है।अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि बांकीपुर की जनता के साथ उनका आत्मीय संबंध आगे भी इसी विश्वास और समर्पण के साथ बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी मिलकर ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को आगे बढ़ाते रहेंगे और जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।नामांकन दाखिल करने से पहले नितिन नबीन ने पटना जंक्शन स्थित श्री महावीर मंदिर में दर्शन-पूजन कर भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने पटना के बांसघाट स्थित काली मंदिर बांसघाट और गोलघर स्थित मां अखंडवासिनी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को गति देने के क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 6 मार्च 2026 को ओडिशा दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे पारादीप में इफको द्वारा स्थापित सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र (एसएपी-3) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और सहकारिता, डेयरी विकास तथा गृह मंत्रालय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ करेंगे।
पारादीप में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह इफको के पारादीप संयंत्र में स्थापित सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट (एसएपी-3) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह संयंत्र उर्वरक उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद अमित शाह भुवनेश्वर के आईडीसीओ प्रदर्शनी मैदान, यूनिट-3 में आयोजित कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे। इनमें राज्य सहकारिता नीति का विमोचन, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के स्कूल की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन, बदाम्बा शुगर उद्योग के पुनर्जीवन के लिए समझौता ज्ञापन तथा पीएसीएस और लैम्प्स द्वारा संचालित 1567 कॉमन सर्विस सेंटरों का समर्पण शामिल है। कार्यक्रम में 141 पीएसीएस के लिए आवश्यकता आधारित अवसंरचना का वर्चुअल उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही आरसीएस कार्यालय पोर्टल की शुरुआत, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड के डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर पोर्टल का डिजिटल शुभारंभ तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड द्वारा विकसित ‘कूप मार्क’ और ‘साविद्या’ एआई-सक्षम बहुभाषी डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया जाएगा।डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में ओएमफेड से जुड़ी पहलों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही दो दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री कामधेनु योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को अनुदान जारी किया जाएगा और प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र के उन्नयन के लिए एनडीडीबी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।इस अवसर पर विभिन्न विभागों की परियोजनाओं पर वीडियो प्रस्तुति भी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान 1159.03 करोड़ रुपए की लागत वाली 69 परियोजनाओं का उद्घाटन तथा 2116.06 करोड़ रुपए की लागत वाली 130 परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे आर्थिक सुधारों का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। देश में नए बिजनेस की संख्या में 27% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो उद्यमिता और निवेश के लिए बेहतर बनते माहौल का संकेत देती है।
सरकार द्वारा गुरुवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2025-26) के पहले 10 महीनों में, यानी 3 फरवरी 2026 तक, भारत में 1.98 लाख नए बिजनेस पंजीकृत हुए हैं। तुलना करें तो वित्त वर्ष 2020-21 में यह संख्या 1.55 लाख थी, जिससे स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ वर्षों में उद्यमिता गतिविधियों में तेजी आई है।आधिकारिक बयान में कहा गया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने डिजिटल ट्रेड सुविधा, कर निश्चितता, अनुपालन और मुकदमेबाजी में कमी, विश्वास आधारित सीमा शुल्क प्रणाली और निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था के जरिए व्यापार में आसानी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।सरकार के अनुसार स्टार्ट-अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी योजना और डिजिटल क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल जैसे संस्थागत सुधार एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और निवेशक-अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं। इन प्रयासों को जन विश्वास अधिनियम, इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) और मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) जैसे नियामक सुधारों का भी समर्थन मिल रहा है।फरवरी 2026 तक भारत में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से मान्यता प्राप्त 2.16 लाख से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं। इस संख्या के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक के रूप में उभर कर सामने आया है।2016 से शुरू किए गए स्टार्टअप सुधारों का उद्देश्य व्यापार करने में आसानी बढ़ाना, पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाना और अनुपालन का बोझ कम करना है। इन पहलों ने तकनीकी नवाचार, ग्रामीण उद्यमिता, अकादमिक अनुसंधान और क्षेत्रीय समावेशन को भी बढ़ावा दिया है।पिछले कुछ वर्षों में भारत न केवल निवेश के लिए बल्कि कारोबार शुरू करने के लिए भी दुनिया के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। सरकार की सुधार-आधारित विकास रणनीति उद्यमिता को मजबूत करने, वित्त तक पहुंच बढ़ाने, नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण करने और व्यापार सुविधा को बढ़ाने पर केंद्रित है।सरकार का कहना है कि इन सुधारों से कारोबार करने में आसानी बढ़ने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन भी मजबूत हुआ है। इसके साथ ही नवाचार को बढ़ावा मिला है, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास में तेजी आई है और भारत एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार व निवेश केंद्र के रूप में उभर रहा है। - --अमित शाह रहे मौजूद, साथ दिखे सम्राट चौधरीनई दिल्ली। नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़कर अब दिल्ली की राह पर निकल रहे हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा परिसर में गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन किया। इस दौरान होम मिनिस्टर अमित शाह, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे। नीतीश कुमार के साथ ही भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। शिवेश राम और उपेंद्र कुशवाहा ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह लगातार नीतीश कुमार के साथ मौजूद रहे। उन्होंने नीतीश कुमार की सराहना भी की है और कहा कि बिहार के लोग उनके कार्यकाल को हमेशा याद करेंगे।नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की खबरों कर मुहर लगाते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास तथा समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है। संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं।"
- नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही उनके मन में इच्छा थी कि वह बिहार के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बने। इसी क्रम में वह राज्यसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। गुरुवार को वे राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं, जिसके बाद राज्य में भाजपा का सीएम बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम की लिस्ट जारी कर दी है। भाजपा ने राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले समेत चार नेताओं को उम्मीदवार घोषित किया है।
भारतीय जनता पार्टी कि लिस्ट में विनोद तावड़े और रामदास अठावले के अलावा माया चिंतामण ईवनाते और रामराव कुडकुते के नाम भी शामिल हैं। इससे पहले भाजपा ने मंगलवार को राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के लिए अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित नौ उम्मीदवारों की सूची जारी की। पार्टी ने बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार, असम से तेरश गोवाला और जोगेन मोहन, छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा, हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार और पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा के नामों की घोषणा की।18 फरवरी को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 10 राज्यों से रिक्त होने वाली 37 सीटों को भरने के लिए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया था।आयोग के अनुसार, मतदान 16 मार्च को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगा और मतगणना उसी दिन शाम 5:00 बजे होगी। 10 राज्यों से निर्वाचित राज्य परिषद के 37 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होने वाला है।आगामी रिक्तियों को देखते हुए, आयोग ने चुनावी प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत समय सारणी तैयार की है। चुनाव की अधिसूचना 26 फरवरी को जारी की गई। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च को की जाएगी।उम्मीदवारों के पास 9 मार्च तक अपना नामांकन वापस लेने का विकल्प होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतपत्रों पर वरीयताएं अंकित करने के लिए केवल पूर्व-निर्धारित विशिष्टताओं वाले एकीकृत बैंगनी रंग के पेन ही मान्य होंगे, जो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे।आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस उद्देश्य के लिए किसी अन्य लेखन उपकरण की अनुमति नहीं होगी। चुनावों का संचालन पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा। जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, वे महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। -
नयी दिल्ली. दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमसीटी) ने 2021 में एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 54 वर्षीय सैन्यकर्मी के परिवार को 69.61 लाख रुपये का मुआवजा दिये जाने का आदेश दिया है। पीठासीन अधिकारी अंजनि महाजन दिवंगत सैन्यकर्मी बाल किशन की पत्नी और चार बच्चों द्वारा दायर की गयी दावा याचिका की सुनवाई कर रही थीं। बाल किशन 29 अक्टूबर 2021 की दोपहर को अपनी मोटरसाइकिल से अंधोप पलवल से सिहोल पलवल जा रहे थे। चंदहट के किदवारी के पास पहुंचते ही एक ट्रक ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे उन्हें (सैन्यकर्मी को) गंभीर चोटें आईं। उन्हें पलवल के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हादसे के दौरान ट्रक को उसका चालक लापरवाही से चला रहा था। न्यायाधिकरण ने 20 फरवरी को जारी अपने आदेश में कहा, ''याचिकाकर्ताओं ने प्रबल संभावनाओं के आधार पर यह साबित कर दिया है कि इस दुर्घटना के लिए जो वाहन जिम्मेदार है उसे लापरवाही और तेज गति से चलाया जा रहा था, फलस्वरूप यह हादसा हुआ।'' अदालत ने यांत्रिक निरीक्षण रिपोर्ट पर गौर किया जिसमें पाया गया कि दुर्घटना में शामिल वाहन के आगे के बाएं टायर पर खून के धब्बे थे। अदालत ने वाहन के चालक और मालिक से अपेक्षा की कि यदि ये खून के धब्बे दुर्घटना के कारण नहीं थे, तो वे इसके पीछे की परिस्थितियों का स्पष्टीकरण दें। हालांकि, चालक और मालिक दोनों ही अपने बचाव में कोई सबूत पेश करने में विफल रहे। इसके अलावा, वाहन चालक दुर्घटना की परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण देने से पीछे हट गया और गवाह के रूप में पेश होने से बचता रहा। अंततः, इससे न्यायाधिकरण ने उसके और वाहन मालिक के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला। न्यायाधिकरण ने मृतक के परिवार को विभिन्न मदों के तहत 69.61 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। सभी पांच दावेदार मृत व्यक्ति पर आश्रित पाए गए।
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नयी दिल्ली. ग्रैमी पुरस्कार विजेता बांसुरी वादक राकेश चौरसिया एवं 'राकेश एंड फ्रेंड्स' के नाम से प्रसिद्घ उनका 'ग्रुप' 'सांग्स ऑफ द स्टोन' नामक संगीत श्रृंखला के तहत आठ मार्च को कुतुब मीनार में एक संगीतमय प्रस्तुति देंगे। विरासत, संगीत और समकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुति को एक साथ लाते हुए 'इंकपॉट इंडिया' की यह गहन सांस्कृतिक श्रृंखला यूनेस्को विश्व धरोहर स्मारक को ध्वनि और कहानी के एक जीवंत मंच में बदलने का प्रयास करेगी। 'इंकपॉट इंडिया' की संस्थापक सिमर मल्होत्रा ने एक बयान में कहा, ''भारत के पास संस्कृति, परंपरा और विरासत का असाधारण खजाना है, लेकिन फिर भी हमारे वैश्विक जीवन में इसका बड़ा हिस्सा चुपचाप नजरअंदाज हो जाता है। सुंदरता के इतने करीब रहते हुए, हम कभी-कभी उसे देखना बंद कर देते हैं; परिचित हो जाने से आश्चर्य का भाव कम हो जाता है।'' उन्होंने कहा, '''सांग्स ऑफ द स्टोन' मेरी इस इच्छा से प्रेरित है कि इन स्थानों और सांस्कृतिक प्रथाओं को भावनात्मक रूप से फिर से प्रासंगिक बनाया जाए और खास कर युवा दर्शकों को इसमें शामिल किया जाए।'' चौरसिया अपने गुरु एवं चाचा पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की विरासत को आगे बढ़ाते हुए बांसुरी को नए वैश्विक और समकालीन ध्वनि परिदृश्यों में ले जा रहे हैं। चौरसिया के साथ ड्रम पर गिनो बैंक्स, तबला पर सत्यजीत तलवलकर, बेस गिटार पर शेल्डन डी'सिल्वा, गिटार पर संजय दास और गायन और कीबोर्ड पर संगीत हल्दीपूर होंगे।
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नयी दिल्ली. भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के फिटनेस एंबेसडर और साइकिल चालक कांती दत्त सरकार के प्रमुख 'फिट इंडिया' अभियान को बढ़ावा देने के लिए सात मार्च से साइकिल पर हैदराबाद से मुंबई तक 750 किलोमीटर की यात्रा करेंगे। दत्त 'अल्ट्रा एंड्योरेंस' साइकिलिस्ट हैं और उन्होंने अपने पिता के निधन के बाद मानसिक रूप से फिट रहने के लिए यह खेल अपनाया। उनकी यह यात्रा 14 मार्च को समाप्त होगी। दत्त ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा, ''फिटनेस पर ध्यान देने से मैं केवल शारीरिक रूप से ही फिट नहीं बना, बल्कि इसने मुझे भावनात्मक रूप से फिट बनने में भी मदद की। इसने मुझे खुद को फिर से समझने में मदद की। मैं चाहता हूं कि लोग यही समझें कि यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।'' उन्होंने कहा, ''हैदराबाद से मुंबई तक का यह मेरा पहला दौरा है। मैं चाहता हूं कि यह किसी खास बात का प्रतीक बने। यह यात्रा उन सभी लोगों के लिए है जिन्होंने कभी असहाय या डरा हुआ महसूस किया हो। आप खुद को फिर से समझ सकते हैं। मैंने ऐसा किया।''
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देवरिया. उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में नसबंदी कराने के दो साल बाद एक महिला गर्भवती हो गई। महिला ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि तरकुलवा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच मार्च 2024 को अपनी नसबंदी करायी थी लेकिन उसके डेढ़ साल के बाद वह पुनः गर्भवती हो गयी है। उन्होंने बताया कि इसके बाद महिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास गई और शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ए. के. शाही ने इस सिलसिले में बताया कि नसबंदी ऑपरेशन के बाद एक से दो प्रतिशत ऐसी शिकायतें मिल जाती हैं। उन्होंने कहा कि अगर पीड़ित महिला की ओर से समय से जानकारी दी जाती है तो उसे मुआवजे के लिए पत्राचार किया जाता है। शाही ने कहा कि विभाग से जो संभव होगा महिला को वह मुआवजा दिलाया जाएगा।
- नयी दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यूट्यूब चैनल ने तीन करोड़ 'सब्सक्राइबर्स' का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे इस सोशल मीडिया मंच पर सबसे अधिक फॉलोअर्स वाले विश्व नेता के रूप में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है। दूसरे सबसे अधिक फॉलोअर्स वाले ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो के फॉलोअर्स की संख्या मोदी की तुलना में लगभग एक-चौथाई ही है। प्रधानमंत्री मोदी के पास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में सात गुना से अधिक सब्सक्राइबर हैं, जो वैश्विक स्तर पर उनकी डिजिटल पहुंच और सहभागिता के व्यापक दायरे को रेखांकित करता है। भारत में भी अन्य नेताओं की तुलना में मोदी के पास काफी अधिक संख्या में सब्सक्राइबर हैं।प्रधानमंत्री के पास कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक और आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तुलना में चार गुना से अधिक सब्सक्राइबर हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री का यूट्यूब चैनल तीन करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ सबसे अधिक सब्सक्राइब किए जाने वाला चैनल है। पिछले महीने, मोदी ने इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया और इस मंच पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले विश्व नेता बन गए। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़े थे और पिछले एक दशक में उनका यह सोशल मीडिया खाता वैश्विक नेताओं के बीच सबसे अधिक सक्रिय डिजिटल मंच में से एक बन गया है।
- नयी दिल्ली। ईरान-इजराइल संघर्ष के मद्देनजर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने मंगलवार को पश्चिम एशिया क्षेत्र में पांच मार्च को होने वाली 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, ''पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों - बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूदा स्थिति के कारण बोर्ड ने पांच मार्च को 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाएं स्थगित करने का निर्णय लिया है।'' भारद्वाज ने बताया कि नयी तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी और आगे की परीक्षाओं के लिए स्थिति की समीक्षा पांच मार्च को की जाएगी। बोर्ड ने इस क्षेत्र में दो मार्च को होने वाली परीक्षा रविवार को स्थगित कर दी थी।
- नयी दिल्ली.। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को उद्योग जगत से मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए निवेश बढ़ाने, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और अनुसंधान को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर आयोजित दूसरे वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया अब भरोसेमंद और मजबूत विनिर्माण भागीदारों की तलाश में है और भारत के पास वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका निर्णायक रूप से बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा, "सभी हितधारकों को आत्मविश्वास के साथ निवेश करना चाहिए, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना चाहिए और अनुसंधान में निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना चाहिए। शोध में खर्च कम करने के दिन अब खत्म हो चुके हैं। आगे बढ़ने के अवसर मिलें तो हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए- गुणवत्ता, गुणवत्ता, गुणवत्ता।" मोदी ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, जिससे निर्यात और उत्पादन के लिए व्यापक अवसर खुले हैं। उन्होंने कहा, ''ऐसी स्थिति में हमें गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहिए। भारतीय उत्पादों को वैश्विक मानकों पर खरा उतरना होगा।... इसके लिए दूसरे देशों की जरूरतों, उपभोक्ताओं की पसंद और बाजार की अपेक्षाओं का गहन अध्ययन जरूरी है।'' उन्होंने कहा, "हमारी दिशा स्पष्ट है- अधिक निर्माण करो, अधिक उत्पादन करो, अधिक जुड़ाव बनाओ और अब जरूरत अधिक निर्यात करने की है।" इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि केवल दिशा तय करने से परिणाम नहीं मिलते, बल्कि उद्योग, वित्तीय संस्थान और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास से ही जमीनी बदलाव संभव है। मोदी ने विनिर्माण और उत्पादन बढ़ाने, लागत संरचना को प्रतिस्पर्धी बनाने, निवेश प्रवाह तेज करने और विकास को देश के हर हिस्से तक पहुंचाने पर प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था के कारण भारत दुनिया के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर उभरा है और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेज आर्थिक विकास आधारशिला बन चुका है। प्रधानमंत्री ने विकसित भारत का लक्ष्य सामूहिक स्वामित्व के जरिये हासिल कर पाना संभव बताते हुए कहा कि बजट ने एक रूपरेखा मुहैया कराई है और अब उद्योग जगत को सामूहिक प्रयास से गति पैदा करनी होगी। उन्होंने विनिर्माण, लॉजिस्टिक, एमएसएमई, छोटे एवं कुटीर उद्योगों और शहरों को अर्थव्यवस्था के स्तंभ बताते हुए कहा कि मजबूत विनिर्माण निर्यात बढ़ाता है, प्रतिस्पर्धी एमएसएमई नवाचार को बढ़ावा देते हैं और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा से लागत घटती है। एमएसएमई उद्यमों के वर्गीकरण में सुधार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब उद्यम विस्तार से सरकारी लाभ खोने का डर नहीं है और ऋण पहुंच, प्रौद्योगिकी उन्नयन एवं क्षमता निर्माण के लिए प्रयास किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन पहल का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब एमएसएमई प्रतिस्पर्धा में सक्रिय भागीदारी करेंगे। बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक क्षेत्र को वृद्धि रणनीति का प्रमुख आधार बताते हुए मोदी ने कहा कि इस वर्ष के बजट में रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में समर्पित दुर्लभ पृथ्वी खनिज गलियारा, कंटेनर विनिर्माण और 'बायोफार्मा शक्ति मिशन' जैसे कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत उन्नत जैव-औषधि शोध और विनिर्माण में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार अब केवल लागत पर नहीं, बल्कि टिकाऊपर पर भी केंद्रित हैं। कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण मिशन जैसे प्रयासों से स्वच्छ प्रौद्योगिकी में अग्रिम निवेश करने वाले उद्योगों को भविष्य में उभरते बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
- नयी दिल्ली.। विद्युत मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी के नए प्रमुख की तलाश के लिए एक 'खोज-सह-चयन समिति' गठित करने का निर्णय लिया है। यह फैसला लोक उपक्रम चयन बोर्ड (पीईएसबी) द्वारा इस पद के लिए किसी उपयुक्त उम्मीदवार का चयन न कर पाने के बाद लिया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अधीन पीईएसबी ने एनटीपीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पद के लिए एक दर्जन उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया था। वर्तमान प्रमुख गुरदीप सिंह का कार्यकाल 31 जुलाई, 2025 को समाप्त होना था, लेकिन उत्तराधिकारी न मिलने के कारण उनकी सेवा को एक अगस्त, 2026 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। विद्युत मंत्रालय द्वारा 28 फरवरी को जारी एक नोटिस के अनुसार, एनटीपीसी लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद पर नियुक्ति अब चयन समिति के माध्यम से की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार 28 मार्च, 2026 तक इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। आमतौर पर खोज-सह-चयन समिति का मार्ग तब अपनाया जाता है जब पीईएसबी किसी उपयुक्त उम्मीदवार की पहचान करने में विफल रहता है। पीईएसबी 2021 के कम से कम चार अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों - ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के लिए सही उम्मीदवार का चयन करने में विफल रहा था।

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