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नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन द्विपक्षीय बैठक की और कई समझौतों पर मुहर लगाई। पीएम नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य नई तकनीक का है। नई तकनीक को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक और एआई की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे उसकी पूरी क्षमता तक आगे बढ़ने का मौका दिया जा सकता है। पहले जो परेशानियां और सीमाएं थीं, अब वे नहीं रहीं।
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो नई सोच और नए कार्य करने में सक्षम हैं। इजरायल और भारत दोनों ही नए विचार और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश बहुत पुरानी और महान सभ्यताएं हैं, जिन्हें अपने इतिहास पर गर्व है, लेकिन वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर यह काम और बेहतर तरीके से कर सकते हैं।अपने संबोधन की शुरुआत इजरायली बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के दिल छूने वाले अंदाज को बयां कर की। उन्होंने कहा, “यह एक शानदार दौरा है, एक शानदार विजिट का शानदार अंत। यह छोटी लेकिन बहुत ज्यादा फलदायी और दिल को छूने वाली मुलाकात थी। मुझे लगता है कि कल नेसेट में आपके दिल को छूने वाले बयान के बाद इजरायल में सभी भावुक होंगे। मैं आपको बता सकता हूं कि तब से हमें न केवल अपने दिलों में गहराई से देखने का मौका मिला है, बल्कि हमारे दोनों देशों में मौजूद शानदार दिमागों को देखने का भी मौका मिला है।”इसके साथ ही नेतन्याहू ने अपने मित्र पीएम मोदी के काम को भी काबिल-ए-तारिफ करार दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आपकी सरकार बेहद कुशल है। आप एक मंत्री और एक राजदूत के साथ जो काम कर सकते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। दोनों देशों के बीच जो सोच और दिलों का जुड़ाव यहां देखने को मिला है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार-से-सरकार सहयोग, जिसका लंबे समय से इंतजार था, अब नई गति पकड़ेगा और इससे दोनों देशों को एक-दूसरे से पहुंचने वाले फायदों में इजाफा होगा।इजरायली प्रधानमंत्री के बाद भारत के पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही इजरायल के साथ पारस्परिक लाभ वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा। इजरायल में भी अब भारत का यूपीआई पेमेंट सिस्टम चलेगा, इसे लेकर द्विपक्षीय बैठक में समझौता हुआ है। -
नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजरायल के दौरे पर राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने स्टार्टअप, शिक्षा, नवाचार, और तकनीक संबंधित अन्य मुद्दों पर चर्चा की। वहीं, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हर्जोग के साथ मिलकर प्रेसिडेंसियल गार्डेन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाया। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हर्जोग को भारत आने का न्योता भी दिया।
मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति जी, आपने जिन उम्दा शब्दों के साथ हमारा स्वागत किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मैं देख रहा हूं कि कल से जिस तरह से मेरा और मेरी डेलिगेशन का स्वागत सम्मान हुआ है, वो भारत के प्रति इजरायल के दिलों में जो गहरा लगाव है, उसका प्रतिबिंब है और इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं।”पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपने सही कहा कि भारत और इजरायल का संबंध अनेक क्षेत्रों में बड़ी मजबूती के साथ काम आ सकता है। विज्ञान, इनोवेशन, शैक्षणिक संस्थान, और कुछ चीजों में तो आप लोगों को महारथ हासिल है, जैसे पानी और खेती के संबंध में। भारत इजरायल की बहुत सी अच्छी चीजों को आज भी, खासकर खेती में, लागू करने का प्रयास करता है और उसके अच्छे परिणाम भी निकल रहे हैं।”पीएम मोदी ने इजरायली राष्ट्रपति को भारत आने का न्योता देते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे आपसे पहले भी कई जगहों पर मिलने का मौका मिला है। मैंने आपके विचारों की स्पष्टता सुनी है। भारत के प्रति आपके मान-सम्मान का भाव देखा है, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। भारत के लोग आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। इसलिए मैं विशेष रूप से भारत आने का निमंत्रण देता हूं। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि सिर्फ दिल्ली आकर वापस मत जाना, कुछ समय ज्यादा निकालना ताकि भारत के अन्य कुछ संस्थानों को भी, वहां के लोगों को भी आपका स्वागत करने का मौका मिले।”इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने कहा, “मैं आपके होशियार युवा भारतीय स्टूडेंट्स को इजरायल में पढ़ने के लिए आने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। मैं इजरायली स्टूडेंट्स को भारत में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। इजरायल और भारत के बीच यह कनेक्टिविटी पूरी जियोस्ट्रेटेजिक स्थिति को ग्लोबल साउथ के फायदे के लिए बदल सकती है। हम जानते हैं कि आप कई क्षेत्रों में दुनिया को लीड करते हैं और हम बहुत भावुक और उत्साहित हैं कि आप यहां हमारे साथ हैं।”इससे पहले राष्ट्रपति हर्जोग ने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी के स्वागत की तैयारियां दिखाई गईं। एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए, राष्ट्रपति हर्जोग ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजरायल के लोग खुले हाथों से आपका स्वागत करते हैं। मैं आज येरुशलम में आपकी मेजबानी करने का इंतजार कर रहा हूं!” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा के बाद भारत-इजराइल द्विपक्षीय संबंध रणनीतिक साझेदारी के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इजराइल ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा और वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने जिन्होंने इजराइली संसद नेसेट में संबोधन किया।
‘मोदी स्टोरी’ के अनुसार भारत-इजराइल साझेदारी की शुरुआत 2006 में हुई, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उस समय उनका ध्यान किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और पानी की दक्षता को मजबूत करने पर था। उन्होंने इजराइल के एडवांस्ड सिंचाई सिस्टम, ग्रीनहाउस खेती, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, डेयरी डेवलपमेंट और हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर का अध्ययन किया। इसके बाद ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ विजन गुजरात की जल नीति में शामिल हुआ। एक दशक बाद 2017 में नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर इजराइल गए। इस दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। कृषि के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन, डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ा। भारत फोर्ज के प्रबंध निदेशक बाबा कल्याणी के अनुसार, इस दौर में उन्होंने पहली बार डिजिटल, आईओटी और एआई को व्यवसाय, मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर में कैसे लागू किया जा सकता है, यह सीखा। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मजबूत व्यक्तिगत संबंध ने भारतीय और इजराइली कंपनियों के बीच भरोसा और सहयोग को तेज किया। ‘मोदी स्टोरी’ के अनुसार, 2006 में कृषि इनोवेशन से शुरू हुई सहभागिता अब टेक्नोलॉजी, भरोसे और साझा विजन के आधार पर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सहभागिता और संवाद ने भारत-इजराइल संबंधों में निरंतरता और गहराई लाई है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और इजरायल जल्द ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को फाइनल करेंगे और टेक और इनोवेशन सेक्टर में सहयोग को गहरा करने के लिए एक “क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप” की स्थापना की घोषणा की।
दरअसल, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ देश के दो दिन के सरकारी दौरे के हिस्से के तौर पर जॉइंट स्टेटमेंट के दौरान बोलते हुए, PM मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने बाइलेटरल सहयोग को एक नई दिशा और तेज रफ्तार देने पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “आज की मीटिंग में, हमने अपने सहयोग को एक नई दिशा और तेज रफ्तार देने पर चर्चा की। हमारा इकोनॉमिक सहयोग ग्रोथ, इनोवेशन और साझा खुशहाली का इंजन है। आपसी इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए, हमने पिछले साल एक बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट किया था। हम जल्द ही एक आपसी फायदे वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भी फाइनल करेंगे।”टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सहयोग पर बढ़ते फोकस पर जोर देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी दोनों देशों के बीच भविष्य की पार्टनरशिप का कोर बनेगी। उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी हमारी भविष्य की पार्टनरशिप का कोर है। आज, हमने एक ‘क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप’ बनाने का फैसला किया है। इससे AI, क्वांटम और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे एरिया में सहयोग को नई रफ़्तार मिलेगी।” भारत-इजराइल FTA के लिए बातचीत का पहला राउंड सोमवार को नई दिल्ली में शुरू हुआ और आज तक चलेगा।इससे पहले केंद्रीय कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने मंगलवार को FTA बातचीत के पहले राउंड के लिए भारत में इजरायल के एक डेलीगेशन से मुलाकात की। नवंबर 2025 में पीयूष गोयल के दौरे के दौरान, भारत और इजरायल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर साइन किए गए थे।PM मोदी ने इजराइल में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के इस्तेमाल पर हुए एग्रीमेंट का भी स्वागत किया, इसे डिजिटल सहयोग को आगे बढ़ाने में एक अहम कदम बताया, और कहा कि दोनों देश अपने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल हेल्थ इनोवेशन का इस्तेमाल करने के लिए कमिटेड हैं, ताकि वे अपने अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिस के ज़रिए अपने नागरिकों की ज़िंदगी को बेहतर बना सकें। उन्होंने कहा, “डिजिटल हेल्थ के फील्ड में भी, हम अपने अनुभव शेयर करके लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कमिटेड हैं।”डिफेंस सेक्टर में, पीएम ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच दशकों पुराना, भरोसेमंद सहयोग है, जो और बढ़ने वाला है।उन्होंने कहा, “डिफेंस के फील्ड में, हमारे बीच दशकों पुराना, भरोसेमंद सहयोग रहा है। पिछले साल साइन किए गए MOUs इसमें नए डायमेंशन जोड़ेंगे। हम सब मिलकर जॉइंट डेवलपमेंट, जॉइंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की ओर बढ़ेंगे।”उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्ष सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और स्पेस में सहयोग को आगे बढ़ाएंगे, जिससे भारत-इजराइल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के बढ़ते दायरे पर ज़ोर दिया गया। PM मोदी अभी अपने इज़राइली काउंटरपार्ट, बेंजामिन नेतन्याहू के इनविटेशन पर इजरायल के दो दिन के स्टेट विजिट पर हैं। - कानपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर के भौतिकी विभाग और एसपीएएसई तथा राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र (एनसीआरए) के वैज्ञानिकों ने पल्सर (ऐसे तारे जो आवधिक रेडियो फ्लैश उत्सर्जित करते हैं) की दूरी का अनुमान लगाने के लिए एक नयी विधि विकसित की है। ये निष्कर्ष 'मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी' नामक पत्रिका में प्रकाशित "पल्सर ऑब्जर्वेबल्स और एक नवीन दूरी अनुमान विधि का उपयोग करके गम नेबुला की आकृति विज्ञान की जांच" शीर्षक वाले एक हालिया शोध पत्र में प्रकाशित किए गए हैं। खगोल विज्ञान में तारों की सटीक दूरी मापना अब भी एक बड़ी चुनौती है। वैज्ञानिक आकाश में किसी वस्तु की स्थिति तो सटीकता से निर्धारित कर लेते हैं, लेकिन उसकी दूरी का आकलन करना जटिल बना रहता है। त्रिकोणमितीय पैरालैक्स जैसी प्रत्यक्ष तकनीक केवल अपेक्षाकृत निकटवर्ती तारों पर ही प्रभावी होती है, जबकि न्यूट्रल हाइड्रोजन अवशोषण आधारित अन्य विधियों में काफी अनिश्चितता बनी रहती है। यह नयी विधि पल्सर संकेतों द्वारा अंतरतारकीय माध्यम से यात्रा करते समय अनुभव किए जाने वाले दो स्वतंत्र रेडियो तरंग प्रभावों को मिलाकर इन सीमाओं का समाधान करती है : फैलाव माप (डीएम) और प्रकीर्णन प्रसार। यह शोध डॉ. आशीष कुमार (वर्तमान में एनसीआरए-पुणे), प्रो. अविनाश ए. देशपांडे (पूर्व संकाय, आरआरआई बेंगलुरु) और प्रो. पंकज जैन (आईआईटी-कानपुर) द्वारा किया गया।
- नयी दिल्ली. सामाजिक कार्यकर्ता हरदीप सिंह गिल और कर्म सिंह कर्मा ने 23 फरवरी को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान से यह जानकारी सामने आयी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, गिल जिला और राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और सामुदायिक विकास पहलों में योगदान देते रहे हैं। उन्होंने नशे पर रोकथाम, सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक गतिविधियों और युवा सशक्तीकरण समेत विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चलाए गए अभियानों में भाग लिया है। वह स्वच्छता अभियानों और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में भी शामिल रहे हैं। कर्मा अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हैं और सफाई कर्मचारियों एवं वंचित समुदायों के कल्याण से संबंधित पहलों से जुड़े रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उन्होंने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, गरिमा, पेशेवर सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा की वकालत की है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, आजीविका सहायता और नीतिगत प्रतिनिधित्व से संबंधित मुद्दों को उठाया है। मंत्रालय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों सदस्य देश भर में सफाई कर्मचारियों के कल्याण, गरिमा और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के प्रयासों को मजबूत करने में योगदान देंगे। एनसीएसके का गठन 12 अगस्त, 1994 को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी अधिनियम, 1993 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया गया था। शुरू में इसका गठन तीन साल की अवधि यानी 31 मार्च, 1997 तक के लिए किया गया था। इस अधिनियम की धारा एक की उपधारा (4) के अनुसार, आयोग को उस तिथि के बाद अस्तित्व में नहीं रहना था। हालांकि, बाद में 1997 और 2001 में पारित संशोधन अधिनियमों के माध्यम से अधिनियम की वैधता को मार्च 2002 तक और फरवरी 2004 तक बढ़ा दिया गया था। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी अधिनियम, 1993 के 29 फरवरी, 2004 को समाप्त हो जाने के बाद से आयोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक गैर-वैधानिक निकाय के रूप में कार्य कर रहा है।
- भोपाल. दक्षिणी कमान के सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भोपाल दौरे के दौरान सुदर्शन चक्र कोर की परिचालन और प्रशासनिक तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। एक प्रवक्ता ने बताया कि सैन्य कमांडर ने मिशन तत्परता, नई पीढ़ी के प्रशिक्षण उपक्रम, ड्रोन एवं एल्गोरिद्मिक युद्ध क्षमताओं, विकसित हो रहे संगठनात्मक ढांचे, एआई-सक्षम बल संरचना और आधारभूत संरचना आधुनिकीकरण का मूल्यांकन किया। प्रवक्ता के अनुसार उन्हें भारतीय सेना के 'नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी वर्ष' के अनुरूप तीव्र प्रौद्योगिकी समावेशन की रूपरेखा से भी अवगत कराया गया, जो डिजिटल रूप से सशक्त और डेटा-केंद्रित युद्धक बल के निर्माण की दिशा में प्रगति को रेखांकित करता है। प्रवक्ता के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने 'सुदर्शन चक्र एडवांस्ड ड्रोन वॉरफेयर स्कूल' का भी दौरा किया, जो भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने वाला एक प्रमुख संस्थान है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों के समेकन के महत्व पर जोर दिया और सभी रैंक को गतिशील सुरक्षा परिवेश में सजग एवं मिशन-उन्मुख बने रहने के लिए प्रेरित किया। दौरे के दौरान उन्होंने भोपाल स्थित दक्षिणी कमान के 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन नोड' का निरीक्षण किया, जहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 50 कार्मिकों के लिए हवाईअड्डा सुरक्षा और आकस्मिक प्रतिक्रिया पर केंद्रित दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण 'कैप्सूल' संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय को सुदृढ़ करना है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने पूर्व सैनिकों से संवाद किया और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशिष्ट उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं को 'वेटरन अचीवर्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया। एक संवाद सत्र में उन्होंने कल्याण, पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर निरंतर संस्थागत समर्थन का आश्वासन दिया। '3 ईएमई सेंटर' के दौरे के दौरान उन्होंने अग्निवीरों से बातचीत की और उनकी मानसिक दृढ़ता तथा शारीरिक सुदृढ़ता की सराहना करते हुए भविष्य के लिए तैयार सैनिकों के निर्माण में केंद्र की भूमिका की प्रशंसा की।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' से संबंधित एक अध्याय को लेकर उच्चतम न्यायालय की नाराजगी के बाद बुधवार को "अनुचित सामग्री" के लिए माफी मांगी और कहा कि संबंधित पुस्तक को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से फिर से लिखा जाएगा। स्कूल शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार एनसीईआरटी ने अपनी वेबसाइट से पुस्तक हटाने के कुछ घंटों बाद ही पाठ्यपुस्तक का वितरण भी रोक दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "यह देखा गया कि संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई है।" एनसीईआरटी ने कहा कि वह ''न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है''। उसने इस त्रुटि को पूरी तरह अनजाने में हुई गलती बताया।अधिकारी ने कहा, ''एनसीईआरटी यह पुनः दोहराता है कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक साक्षरता, संस्थाओं का सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी पर समझ को मजबूत करना है। किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकारक्षेत्र पर प्रश्न उठाने या उसे कमतर करने का (परिषद का) कोई इरादा नहीं है।'' एनसीईआरटी ने कहा, ''अपनी सतत समीक्षा प्रक्रिया के तहत एनसीईआरटी रचनात्मक सुझावों का स्वागत करता है। इसलिए आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारी से परामर्श के बाद उक्त सामग्री को दोबारा लिखा जाएगा और इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत पर कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।'' प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के बारे में की गई "आपत्तिजनक" टिप्पणियों का स्वत: संज्ञान लिया। यह कदम वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की ओर से मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष उल्लेख किए जाने के बाद उठाया गया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार में मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बुधवार को कहा कि पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे कीमती सामानों और आभूषणों की सूची बनाने का काम मार्च के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने रत्न भंडार की सूची तैयार करने के इस कार्य के लिए 14 पृष्ठों की मानक संचालन प्रक्रिया को पहले ही मंजूरी दे दी है। रत्न भंडार की आखिरी सूची 46 साल पहले 1978 में तैयार की गई थी।हरिचंदन ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब की अध्यक्षता वाली श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) और एसजेटीए पूरी सूची तैयार करने की प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। ओडिशा के कानून मंत्री हरिचंदन ने कहा, ''रत्न भंडार में रखे सामान की सूची तैयार करने की प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। यह प्रक्रिया शुरू करने का अंतिम निर्णय एसजेटीएमसी द्वारा लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देवी-देवताओं की दैनिक नीति और दर्शन में कोई बाधा न आए।'' पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर के अंदर रत्न भंडार (खजाना) के दो कक्ष हैं - 'बाहरी रत्न भंडार' (बाहरी कक्ष) और 'भीतरी रत्न भंडार' (आंतरिक कक्ष)। इस रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ की बहुमूल्य वस्तुएं और आभूषण सदियों से संरक्षित रखे गए हैं। उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी को राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर रत्न भंडार की सूची तैयार करने और उसके सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह रत्न भंडार की गुम हुई चाबियों के संबंध में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को ओडिशा विधानसभा के मौजूदा सत्र में पेश करे। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने रत्न भंडार की सूची तैयार करने के कार्य के लिए बजट में पांच करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
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चेन्नई. भारतीय नौसेना तटीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की दिशा में 27 फरवरी को चेन्नई बंदरगाह पर 'डॉल्फिन हंटर' पोत आईएनएस अंजदीप को तैनात करने जा रही है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह पोत 'एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट' परियोजना के तहत बनाए जा रहे आठ पोतों में से तीसरा है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित अंजदीप एक अत्याधुनिक युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में परिचालन की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसे क्षेत्र देश की समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी शुक्रवार को यहां आईएनएस अंजदीप के कमीशनिंग समारोह में भाग लेंगे। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 'अंजदीप' का नाम कर्नाटक के कारवार तट (अरब सागर) के निकट स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों की निगरानी तथा रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) भूमिका के अलावा यह पोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है। -
मुंबई. दिल का दौरा पड़ने के बाद फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली को अस्पताल में भर्ती कराये जाने की खबरों के बीच उनके परिवार ने बुधवार को बताया कि भंसाली बिल्कुल ठीक हैं। परिवार ने भंसाली को दिल का दौरे पड़ने की पुष्टि नहीं की और न ही इसका जिक्र किया, हालांकि बताया कि वह नियमित जांच के लिए अस्पताल गए थे। परिवार ने कहा, ''संजय लीला भंसाली बिल्कुल ठीक हैं। उन्होंने नियमित चिकित्सा जांच कराई है और चिंता की कोई बात नहीं है। हम आप सभी के स्नेह के लिए दिल से आभारी हैं। आपके निरंतर समर्थन और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।'' मीडिया में आई खबरों में दावा किया गया था कि भंसाली को मंगलवार को उनके 63वें जन्मदिन पर दिल का दौरा पड़ा और उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल ले जाया गया।
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शेगांव (महाराष्ट्र). राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है। महाराष्ट्र के बुलढाणा में शेगांव में आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 के उद्घाटन के बाद मुर्मू ने यह भी कहा कि स्वस्थ नागरिक देश को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुर्मू ने कहा, ''हम सभी को औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार करना होगा।''
राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया भर में लोग तनावमुक्त और स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम, उचित आहार और संतुलित जीवनशैली जैसे रोग निवारक उपाय महत्वपूर्ण हैं। मुर्मू ने कहा, ''जंगल खत्म हो गए हैं, आग लगने से जंगल नष्ट हो गए हैं।'' उन्होंने कहा कि इससे औषधीय पौधे भी नष्ट हो गए हैं। उन्होंने कहा, ''न सिर्फ सरकार बल्कि हम सभी को औषधीय पौधों का पुन: पैदावार शुरू करने के बारे में विचार करना चाहिए।'' राष्ट्रीय आरोग्य मेला चार दिवसीय आयोजन है जो आयुष प्रणालियों के माध्यम से सुलभ, निवारक और समुदाय आधारित स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है। उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव उपस्थित थे। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने आने वाली फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' पर बुधवार को प्रतिबंध लगाने या उसके नाम में बदलाव करने के अनुरोध वाली याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह नाम यादव समुदाय को किसी भी तरह से अपमानजनक तरीके से चित्रित नहीं करता है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने संगठन 'विश्व यादव परिषद' के प्रमुख द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री का अध्ययन किया और पाया कि मुख्य शिकायत यह थी कि फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय को गलत तरीके से दर्शाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ''इसलिए, यह दलील दी जा रही है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह समझने में असमर्थ हैं कि फिल्म का शीर्षक किस प्रकार समुदाय को अपमानजनक रूप में चित्रित कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई विशेषण या शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को गलत तरीके से दर्शाता हो।'' पीठ ने इन आशंकाओं को ''पूरी तरह निराधार'' करार दिया और 'घूसखोर पंडत' से संबंधित ऐसे ही मामले में अपने पूर्व के आदेश की व्याख्या की जिसमें न्यायालय ने निर्माता को उस फिल्म का शीर्षक बदलने का निर्देश दिया था। आदेश में कहा गया है, '''घूसखोर' शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है। इसलिए यह शीर्षक समुदाय को नकारात्मक अर्थ में दर्शा रहा था। वर्तमान मामले में यादव समुदाय के साथ ऐसा कोई नकारात्मक अर्थ नहीं जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 19(2) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध) के तहत कोई भी उचित प्रतिबंध लागू नहीं होता है। यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत या नकारात्मक रूप में चित्रित नहीं करता है। इसलिए रिट याचिका खारिज की जाती है।'' याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि फिल्म का शीर्षक समुदाय के प्रति एक आपत्तिजनक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देता है। याचिका में महिला मुख्य किरदार के चित्रण पर चिंता व्यक्त की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वे अंतर-सामुदायिक विवाहों का विरोध नहीं करते लेकिन फिल्म में एक महिला का चित्रण अस्वीकार्य है। वकील ने कहा, ''एक महिला को इस तरह प्रचारित नहीं किया जा सकता।'' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करती है। हालांकि, न्यायाधीश इस बात से सहमत नहीं हुए और फिल्म को काल्पनिक रचना करार दिया।
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नई दिल्ली। योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करने के लिए प्रधानमंत्री योग पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को विश्वभर में व्यापक पहचान मिली है और इसे समग्र स्वास्थ्य पद्धति के रूप में अपनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री योग पुरस्कार–2026 का उद्देश्य उन व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करना है जिन्होंने योग के प्रचार-प्रसार और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। यह पुरस्कार उत्कृष्टता, नवाचार और नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए योग के प्रभाव को व्यापक बनाने का प्रयास है।आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग के विकास में योगदान देने वालों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल www.awards.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं। प्रत्येक विजेता को ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और 25 लाख रुपए की नकद राशि प्रदान की जाएगी।पुरस्कार दो प्रमुख श्रेणियों में दिए जाएंगे—व्यक्तिगत श्रेणी (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय) और संस्थागत श्रेणी (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय)। प्रत्येक श्रेणी में दो पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।व्यक्तिगत श्रेणी के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। आवेदकों के पास योग का गहन ज्ञान और कम से कम 10 वर्षों का उत्कृष्ट तथा बेदाग अनुभव होना अनिवार्य है। पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थानों को दिया जाएगा जिन्होंने योग के प्रचार में उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो। आवेदन प्रक्रिया 21 फरवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 21 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। आवश्यकता पड़ने पर अंतिम तिथि 15 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। पात्र व्यक्तियों और संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (www.awards.gov.in) के माध्यम से आवेदन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। ( -
नई दिल्ली। दो दिवसीय यात्रा पर इजराइल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजराइल की संसद को संबोधित किया। संसद में उनकी मौजूदगी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नौ साल पहले उन्हें पहली बार इजराइल आने का सौभाग्य मिला था और आज फिर यहां आकर वे बेहद प्रसन्न हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर को हुए हमास हमले का उल्लेख किया और मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हम आपका दर्द समझते हैं, हम आपके दुख में शामिल हैं। भारत पूरी मजबूती से इजराइल के साथ खड़ा है।” नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी वजह से आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द सहा है और 26/11 मुंबई हमले में मारे गए बेगुनाह लोगों, जिनमें इजरायली नागरिक भी शामिल थे, को देश आज भी याद करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहूदी समुदाय भारत में बिना किसी जुल्म या भेदभाव के डर के रहता है। वे अपने धर्म को बनाए रखते हुए समाज में पूरी तरह से सहभागी हैं और यह भारत के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दुनिया भर में मिलकर और निरंतर कार्रवाई की जरूरत है, क्योंकि कहीं भी होने वाला आतंक हर जगह शांति के लिए खतरा है। उन्होंने इजराइल की जनता को भरोसा दिलाया कि शांति के प्रयासों में भारत सदैव साथ खड़ा रहेगा। नरेंद्र मोदी ने कहा कि इजराइल का उनका पहला दौरा 2006 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुआ था। बाद में 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया। तब से कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने का संकल्प लिया गया है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इजराइल को अक्सर स्टार्टअप नेशन कहा जाता है और भारत भी युवाओं के नवाचार व रचनात्मकता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2018 में उन्होंने और बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत में आई-क्रिएट टेक बिजनेस इनक्यूबेटर का उद्घाटन किया था, जिसने अब तक 900 स्टार्टअप को समर्थन दिया है।नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इजराइल व्यापार बढ़ाने, निवेश प्रवाह मजबूत करने और संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हाल ही में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि से व्यापार को भरोसा और स्थिरता मिलेगी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ व्यापार समझौते भी किए हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में इजराइल में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इजराइली सांसदों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया और संसद में “मोदी, मोदी” के नारे गूंजे। नेतन्याहू ने मंच से प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें अपना मित्र ही नहीं, बल्कि भाई बताया।
इजराइल की संसद नेसेट (Knesset) में प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। सांसदों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया, जबकि स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में उनका स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा, “नरेंद्र, मेरे प्रिय मित्र, आपके यहां आने से मैं बेहद भावुक हूं। इजराइल के महान मित्र और भारत-इजराइल साझेदारी के बड़े समर्थक के रूप में आपका स्वागत है।” उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी को मित्र से बढ़कर भाई मानते हैं और एयरपोर्ट पर ‘मोदी हग’ की याद भी साझा की। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की पिछली यात्रा को याद करते हुए कहा कि दोनों नेता मेडिटेरेनियन तट पर साथ चले थे। उन्होंने कहा कि भले ही वे पानी पर नहीं चले, लेकिन तब से दोनों देशों ने “चमत्कार” किए हैं—व्यापार दोगुना, सहयोग तिगुना और आपसी समझ चार गुना बढ़ी है।अमीर ओहाना ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नेसेट को संबोधित करना एक ऐतिहासिक अवसर है और यह उनके लिए गर्व की बात है कि वे प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कर रहे हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजरायल की संसद में अपने संबोधन कहा कि भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द झेला है और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजराइल के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं भारत के लोगों की ओर से 7 अक्टूबर को हुए हमास के बर्बर आतंकी हमले में जान गंवाने वालों और प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना लेकर आया हूं। हम आपका दर्द समझते हैं, आपके दुख में शामिल हैं। भारत इस कठिन समय में और आगे भी पूरे विश्वास के साथ आपके साथ खड़ा है।” उन्होंने यह बातें इजराइल की संसद नेसेट (Knesset) में अपने संबोधन के दौरान कहीं। किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला संबोधन था। उनके भाषण के दौरान सांसदों ने कई बार तालियां बजाकर सराहना की।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल समाधान का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा, “उम्मीद को बनाए रखना जरूरी है। यह पहल क्षेत्र के सभी लोगों के लिए, फिलिस्तीन मुद्दे सहित, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का रास्ता प्रशस्त कर सकती है। भारत ने इस पहल का स्पष्ट समर्थन किया है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि वे फिर से इजराइल आकर बेहद प्रसन्न हैं और उन्हें इस भूमि से विशेष लगाव रहा है। उन्होंने कहा कि वे 1.4 अरब भारतीयों की शुभकामनाएं, मित्रता, सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था, उसी दिन भारत ने औपचारिक रूप से इजराइल को मान्यता दी थी।प्रधानमंत्री मोदी ने होलोकॉस्ट को मानव इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात के नवानगर के महाराजा, जिन्हें जाम साहब के नाम से भी जाना जाता है, ने कठिन समय में पोलैंड के बच्चों को शरण दी थी, जिनमें यहूदी बच्चे भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में यहूदी समुदाय बिना किसी उत्पीड़न या भेदभाव के डर के साथ रहता आया है और समाज में पूरी भागीदारी करता है। उन्होंने इसे भारत के लिए गर्व की बात बताया। इससे पहले संसद में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। सदन “मोदी, मोदी” के नारों से गूंज उठा। स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में उनका स्वागत करते हुए यरुशलम में उनके आगमन को ऐतिहासिक बताया। -
नई दिल्ली।। इजराइल की संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान से नवाजे जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। यह नेसेट का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इजराइल की संसद नेसेट (Knesset) ने भारत-इजराइल रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान की सराहना करते हुए यह सम्मान प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान के लिए नेसेट और इजराइल की जनता का आभार व्यक्त किया। संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय संसद ने इजराइल के लिए एक पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप बनाया है। उन्होंने इजराइली सांसदों को भारत आने का निमंत्रण देते हुए दोनों देशों के सांसदों के बीच अधिक संवाद की उम्मीद जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और जल्द ही शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बना सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार बढ़ाने, निवेश प्रवाह मजबूत करने और संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल प्राचीन सभ्यताएं हैं और दोनों की दार्शनिक परंपराओं में समानताएं दिखती हैं। उन्होंने कहा कि इजराइल में ‘टिक्कुन ओलम’ दुनिया को बेहतर बनाने की बात करता है, जबकि भारत में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का संदेश देता है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर रॉब जेटेन को मंगलवार को बधाई देते हुए कहा कि वह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और गति देने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के आकांक्षी हैं। नीदरलैंड के सबसे युवा प्रधानमंत्री जेटेन ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया।
मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, "नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर रॉब जेटेन को बधाई। भारत और नीदरलैंड विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक संबंध साझा करते हैं। मैं दोनों देशों तथा लोगों के बीच बढ़ते संबंधों को और गति देने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का आकांक्षी हूं।" अड़तीस वर्षीय जेटेन तीन दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनकी मध्यमार्गी पार्टी डी66, मध्य-दक्षिणपंथी 'क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स' और मध्य-दक्षिणपंथी 'पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी' शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. सिविल सेवा परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि तीन दिन बढ़ाकर 27 फरवरी कर दी गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यूपीएससी ने यह फैसला आवेदन जमा करने के लिए पेश पोर्टल पर उम्मीदवारों द्वारा कुछ समय के लिए अनुभव की गई तकनीकी गड़बड़ियों की खबरों के बीच आया है, जिन्हें बाद में ठीक कर लिया गया था। आयोग ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा, ''सिविल सेवा परीक्षा-2026 और भारतीय वन सेवा परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अब तीन दिन बढ़ा दी गई है, यानी 27 फरवरी 2026 शाम छह बजे तक आवेदन जमा किये जा सकेंगे।'' यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि मंगलवार को एक संक्षिप्त तकनीकी समस्या के कारण कुछ उम्मीदवारों को आवेदन करने में कठिनाई हुई थी, जिसका अब समाधान कर लिया गया है। यूपीएससी द्वारा सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन प्रतिवर्ष तीन चरणों प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में किया जाता है। इस परीक्षा के जरिये भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) आदि के अधिकारियों का चयन किया जाता है। इस साल सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को आयोजित की जाएगी।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नये प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर 'सेवा तीर्थ' में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित होगा और यह स्थान शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि हर भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह संकल्प भी लिया गया कि 'सेवा तीर्थ' से संचालित शासन का हर प्रयास देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने की भावना से जुड़ा रहेगा। 'सेवा संकल्प प्रस्ताव' के अनुसार, नये भवन में लिया गया प्रत्येक निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवा-भाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा होगा। प्रस्ताव के अनुसार, ''केंद्रीय मंत्रिमंडल यह संकल्प दोहराता है कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित होगा। यह स्थान शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र होगा।'' इसमें कहा गया है, ''हम यह दोहराते हैं कि अपनी दृष्टि के मुताबिक उस तरह के शासन को और मजबूती देंगे, जो पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक की संवेदनाओं के प्रति सजग हो।'' केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी और इस दौरान प्रस्ताव को पढ़ते हुए कहा कि 'सेवा तीर्थ' की कार्य-संस्कृति में यही भावना निहित होगी, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा। प्रस्ताव के अनुसार, यह बैठक एवं यह भवन नये भारत के नवनिर्माण की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
इसमें कहा गया है, ''इस शुरुआत के साथ, हम उस भविष्य का स्वागत कर रहे हैं, जिसके निर्माण में सदियों का श्रम लगा है। आजादी के बाद, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में इतने दशकों तक सरकारों ने विरासत को संभाला और भविष्य के सपने देखे।'' इसमें कहा गया है, ''हमने एक ऐसे भारत का सपना देखा, जिसकी सोच स्वदेशी हो, स्वरूप आधुनिक हो, और सामर्थ्य अनंत हो। आज यह सेवा तीर्थ उसी संकल्पना का वह मूर्त रूप है, जो लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत के गौरव को बढ़ाएगा।'' वैष्णव ने कहा कि मंत्रिमंडल ने इस अवसर पर इस स्थान के इतिहास को भी स्मरण किया, जो ब्रिटिश शासन काल के अस्थायी बैरकों के स्थान पर बना है। उन्होंने कहा कि गुलामी के कालखंड से पहले भारत की पहचान एक ऐसे राष्ट्र के रूप में होती थी, जो एक ओर अपनी भौतिक भव्यता के लिए जाना जाता था और दूसरी ओर अपने मानवीय मूल्यों के लिए। मंत्री ने कहा कि 'सेवातीर्थ' की संकल्पना इन दोनों आदर्शों से मिलकर बनी है।
वैष्णव ने कहा, ''हमारे लिए संवैधानिक मूल्य उस नैतिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है, जो शासन को नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ती है। 'सेवा तीर्थ' की कार्य-संस्कृति में यही भावना निहित होगी, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा।'' उन्होंने कहा कि 'सेवा तीर्थ' शासन की उस अवसंरचना की आवश्यकता का उत्तर है, जो जड़ता की जगह गतिशीलता, उदासीनता की जगह निष्ठा और संदेह की जगह समाधान को बढ़ावा देता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में लिये गए निर्णयों ने शासन के उद्देश्य को नयी स्पष्टता दी है तथा करोड़ों नागरिकों के जीवन में आये बदलाव ने शासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत किया है। इसमें कहा गया है कि बीते एक दशक में 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालकर देश ने असंभव समझे जाने वाले काम को संभव करके दिखाया है तथा ऐसे अनेक कीर्तिमानों के पीछे सरकार की दूरगामी सोच, व्यापक दृष्टि और अथक परिश्रम रहा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि मंत्रिमंडल यह दृढ़ संकल्प लेता है कि 'सेवा तीर्थ' की नयी ऊर्जा और 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की तीव्र गति से, ''हम निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का स्थान सुनिश्चित करने का संकल्प पूरा करेंगे।'' प्रस्ताव के अनुसार, ''आज, केंद्रीय मंत्रिमंडल स्वयं को 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति पुनः समर्पित करता है। यह एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय यात्रा है, जिसमें आज लिये गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का स्वरूप तय करेंगे। 'सेवा तीर्थ' में हो रही यह पहली बैठक हमें यह स्मरण कराती है कि विकास का लक्ष्य जितना बड़ा है, उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी उतनी ही अधिक होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि यह परिसर केवल एक आधुनिक कार्यस्थल नहीं है, बल्कि शासन की नयी कार्य-संस्कृति का भी प्रतीक है। -
चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक मार्च को तमिलनाडु यात्रा के दौरान मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम स्थित सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री मदुरै के मंडेला नगर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की एक रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली चेन्नई के पास मदुरंथकम में पिछले महीने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करने के बाद उनकी दूसरी रैली होगी। मदुरै में वह तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर जाएंगे, जहां पत्थर के स्तंभ पर कार्तिगाई दीपम जलाने को लेकर विवाद सामने आया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता के अनुसार प्रधानमंत्री मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार से इजराइल का दो दिवसीय दौरा करेंगे, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़ते संबंध सहित पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच, द्विपक्षीय रक्षा और व्यापार सहयोग को प्रगाढ़ करना है। मोदी के कार्यक्रमों में इजराइल की संसद को संबोधित करना, इजराइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्यापक वार्ता और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''यह दौरा दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ और लंबे समय से जारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाएगा तथा साझा चुनौतियों की समीक्षा करने के साथ-साथ दोनों लोकतंत्रों के बीच एक मजबूत साझेदारी के लिए अपने साझा दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों को पुनर्गठित करने का अवसर प्रदान करेगा।'' यह जानकारी मिली है कि बृहस्पतिवार को दोनों प्रधानमंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान समग्र रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना चर्चा का प्रमुख विषय होगा। नेतन्याहू बुधवार रात मोदी के लिए निजी रात्रिभोज का आयोजन करेंगे।
यह नौ वर्षों में मोदी की इजराइल की दूसरी यात्रा होगी। जुलाई 2017 में मोदी की इजराइल की पहली यात्रा के दौरान भारत-इजराइल संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गए थे। नेतन्याहू ने जनवरी 2018 में भारत की यात्रा की थी। भारत और इजराइल विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, कृषि, जल और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्र में मजबूत सहयोग के साथ एक सुदृढ़ रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''दोनों नेता भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा करेंगे और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार एवं अर्थव्यवस्था तथा दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान सहित सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों पर चर्चा करेंगे।'' अपनी वार्ता में, दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा गाजा सहित पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। पिछले साल जून में इजराइल-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद, नेतन्याहू और मोदी ने दो बार फोन पर बात की।
नौ अक्टूबर को मोदी ने नेतन्याहू को फोन किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के तहत हुई प्रगति पर उन्हें बधाई दी। पिछले कुछ वर्षों में भारत-इजराइल संबंधों में रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और नवाचार सहित कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आया है। रक्षा सहयोग दोनों पक्षों की साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें इजराइल भारत को कई सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियां मुहैया करा रहा है। पिछले साल नवंबर में, भारत के रक्षा सचिव की इजराइल यात्रा के दौरान, रक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे। भारत स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ''सुदर्शन चक्र'' विकसित करने पर विचार कर रहा है। इस बीच, नयी दिल्ली इजराइल की 'आयरन डोम' नामक वायु रक्षा प्रणाली के कुछ तत्वों को शामिल करने की संभावना तलाश रही है, जो मिसाइलों और तोप के गोलों को रोककर नष्ट कर सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंध भी लगातार प्रगति कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत चना, सरसों और मसूर की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों से 31 मार्च से पहले प्रमुख कृषि योजनाओं के तहत उपलब्ध केंद्रीय धनराशि का पूर्ण और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया। चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और कृषि उन्नति योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा, "वित्त वर्ष अब खत्म होने के करीब है। ऐसे में यह जरूरी है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उपलब्ध कराई गई धनराशि का समय पर, सही तरीके से और किसानों के सर्वोत्तम हित में उपयोग हो।" रबी 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत महाराष्ट्र में 7.61 लाख टन, मध्य प्रदेश में 5.8 लाख टन, राजस्थान में 5.53 लाख टन और गुजरात में 4.13 लाख टन चने की खरीद को मंजूरी दी गई है। सरसों की खरीद के लिए राजस्थान को 13.78 लाख टन, मध्य प्रदेश को 6.01 लाख टन और गुजरात को 1.33 लाख टन की स्वीकृति दी गई है। मूल्य समर्थन योजना को उस समय लागू किया जाता है जब अधिसूचित दालों, तिलहनों और खोपरा की बाजार कीमतें प्रमुख कटाई सत्र के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चली जाती हैं। इस बैठक में चौहान ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत अरहर, उड़द और मसूर की खरीद 2030-31 तक पूर्व-पंजीकृत किसानों से केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से किए जाने की भी घोषणा की। बैठक में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, हरियाणा, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि मणिपुरी फिल्म "बूंग" को प्रतिष्ठित बाफ्टा पुरस्कार मिलना, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्य के लिए अपार खुशी का क्षण है। फरहान अख्तार के एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित एक अलग अंदाज वाली मणिपुरी पृष्ठभूमि की हास्य-ड्रामा फिल्म 'बूंग' ने रविवार को लंदन में सर्वश्रेष्ठ बाल और पारिवारिक फिल्म की श्रेणी में प्रतिष्ठित बाफ्टा पुरस्कार जीता। प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, "इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई। यह वास्तव में अपार खुशी का क्षण है, खासकर मणिपुर के लिए। यह हमारे देश की रचनात्मक प्रतिभा को भी उजागर करता है।" गुगुन किपगेन और बाला हिजाम अभिनीत इस फिल्म ने 'लिलो एंड स्टिच', 'आर्को' और 'जूट्रोपोलिस 2' जैसी फिल्मों को पीछे छोड़कर यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया।



























