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भदोही . भदोही के गोपीगंज थाना इलाके में एक बक्से में शनिवार शाम एक युवती का आधा जला हुआ शव मिला। पुलिस ने दुष्कर्म के बाद युवती की हत्या किए जाने का अंदेशा जताया है। पुलिस के अनुसार, गोपीगंज थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर लाला नगर टोल प्लाजा के पास पड़े एक बक्से से पेट्रोल से जलने की गंध आने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और बक्सा खोलने पर उसमें एक युवती का आधा जला हुआ शव मिला। भदोही पुलिस अधीक्षक (एसपी) मीनाक्षी कात्यायन ने बताया कि यह शव लगभग 20 साल की युवती का है, जिसने सफ़ेद रंग का सूट पहन रखा था। उन्होंने संभावना जताई कि युवती की हत्या कर उसकी पहचान छिपाने के लिए उसके शरीर एवं चेहरे को पेट्रोल डाल कर जला दिया गया। उन्होंने बताया कि मौके पर श्वान दस्ते समेत फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि शव की पहचान करने का प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेजा जा रहा है। एसपी ने बताया कि शुरुआती जांच में हत्या से पहले लड़की के साथ दुष्कर्म किये जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है।
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नई दिल्ली। उत्तर रेलवे ने 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में जी-20 सम्मेलन के कारण 40 मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियां रद्द कीं है। इसके अलावा 64 रेलगाड़ियों के मार्ग बदले गए हैं। उत्तर रेलवे ने बताया कि सम्मेलन के लिए सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे इसे ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। रेलवे के अनुसार, 8 से 11 सितंबर तक नई दिल्ली आने वाली या नई दिल्ली से चलने वाली रेलगाड़ियों का पडाव गाजियाबाद या हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन होगा।
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नयी दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अपने पहले सौर मिशन आदित्य-1 के सफल प्रक्षेपण की पृष्ठभूमि में, आइए हम दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों के उन प्रमुख मिशन के माध्यम से इसे जानने का प्रयास करें, जो सूर्य के गूढ़ रहस्य को सुलझाने के लिए समर्पित हैं। अमेरिका: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने अगस्त 2018 में पार्कर सोलर प्रोब का प्रक्षेपण किया था। दिसंबर 2021 में, पार्कर ने सूर्य के ऊपरी वायुमंडल ‘कोरोना' से उड़ान भरी और वहां कणों और चुंबकीय क्षेत्रों की जानकारी लेने का प्रयास किया। नासा के अनुसार, यह पहली बार था कि किसी अंतरिक्ष यान ने सूर्य से संबंधित पहलुओं का अध्ययन किया। नासा ने फरवरी 2020 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के साथ हाथ मिलाया और डेटा एकत्र करने के लिए ‘सोलर ऑर्बिटर' का प्रक्षेपण किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सूर्य ने पूरे सौर मंडल में लगातार बदलते अंतरिक्ष वातावरण को कैसे निर्मित और नियंत्रित किया।
नासा की ओर से अन्य सक्रिय सौर मिशन में अगस्त, 1997 में प्रक्षेपित ‘एडवांस्ड कंपोज़िशन एक्सप्लोरर', अक्टूबर, 2006 में प्रक्षेपित सोलर टेरेस्ट्रियल रिलेशन्स ऑर्ब्जवेट्री; फरवरी, 2010 में प्रक्षेपित सोलर डायनेमिक्स वेधशाला; और जून 2013 में प्रक्षेपित इंटरफ़ेस रीजन इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ शामिल हैं। इसके अलावा, दिसंबर, 1995 में नासा, ईएसए और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) ने संयुक्त रूप से सोलर एंड हेलिओस्फेरिक ऑब्ज़र्वेटरी (एसओएचओ) का प्रक्षेपण किया था। जापान: जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए ने 1981 में अपना पहला सौर प्रेक्षण उपग्रह, हिनोटोरी (एस्ट्रो-ए) प्रक्षेपित किया। जेएएक्सए के अनुसार, इसका उद्देश्य कठोर एक्स-रे का इस्तेमाल करके सौर ज्वालाओं का अध्ययन करना था। जेएएक्सए के अन्य सौर अन्वेषण मिशन में 1991 में प्रक्षेपित योहकोह (सोलर-ए), 1995 में प्रक्षेपित एसओएचओ (नासा और ईएसए के साथ); और 1998 में नासा के साथ ट्रांजिएंट रीजन एंड कोरोनल एक्सप्लोरर (ट्रेस) शामिल हैं। वर्ष 2006 में, हिनोड (सोलर-बी) लॉन्च किया गया था, जो परिक्रमा करने वाली सौर वेधशाला योहकोह (सोलर-ए) का उत्तराधिकारी था। जापान ने इसे अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मिलकर प्रक्षेपित किया था। हिनोड का उद्देश्य पृथ्वी पर सूर्य के प्रभाव का अध्ययन करना है। योहकोह का उद्देश्य सौर ज्वालाओं और सौर कोरोना का निरीक्षण करना था। जेएएक्सए की वेबसाइट के अनुसार, यह लगभग पूरे 11 साल के सौर गतिविधि चक्र को ट्रैक करने वाला पहला उपग्रह था। यूरोप: अक्टूबर, 1990 में, ईएसए ने सूर्य के ध्रुवों के ऊपर और नीचे अंतरिक्ष के पर्यावरण का अध्ययन करने के लिए यूलिसिस का प्रक्षेपण किया, जिससे वैज्ञानिकों को सूर्य के आसपास के अंतरिक्ष पर पड़ने वाले परिवर्तनशील प्रभाव के बारे में जानकारी मिली। नासा और जेएएक्सए के सहयोग से प्रक्षेपित विभिन्न सौर मिशन के अलावा, ईएसए ने अक्टूबर, 2001 में प्रोजेक्ट फॉर ऑनबोर्ड ऑटोनोमी (प्रोबा)-2 प्रक्षेपित किया। प्रोबा-2, प्रोबा शृंखला का दूसरा मिशन है, जो लगभग आठ वर्षों के प्रोबा-1 के सफल अनुभव पर आधारित है। यह बात और है कि प्रोबा-1 सौर अन्वेषण मिशन नहीं था। ईएसए के आगामी सौर मिशनों में 2024 के लिए निर्धारित प्रोबा-3 और 2025 के लिए निर्धारित स्माइल शामिल हैं। चीन: एडवांस्ड स्पेस-बेस्ड सोलर ऑब्जर्वेट्री (एएसओ-एस) को नेशनल स्पेस साइंस सेंटर, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (सीएएस) द्वारा अक्टूबर, 2022 में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एएसओ-एस मिशन को सौर चुंबकीय क्षेत्र, सौर ज्वालाएं और कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के बीच संबंधों की जानकारी हासिल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सौर ज्वालाएं और सीएमई विस्फोटक सौर घटनाएं हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि ये सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन से प्रेरित होती हैं।
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- श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), दो सितंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कुछ दिन पहले चंद्रमा पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने के बाद एक बार फिर इतिहास रचने के उद्देश्य से शनिवार को देश के पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल1’ का यहां स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया।इसरो ने बताया कि आदित्य-एल1 यान पीएसएलवी रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया है। भारत का यह मिशन सूर्य से संबंधित रहस्यों से पर्दा हटाने में मदद करेगा।इसरो के अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही 23.40 घंटे की उलटी गिनती समाप्त हुई, 44.4 मीटर लंबा ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) चेन्नई से लगभग 135 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 11.50 बजे निर्धारित समय पर शानदार ढंग से आसमान की तरफ रवाना हुआ।इसरो के अनुसार, ‘आदित्य-एल1’ सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला है। यह अंतरिक्ष यान 125 दिन में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर लंबी यात्रा करने के बाद लैग्रेंजियन बिंदु ‘एल1’ के आसपास एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित होगा, जिसे सूर्य के सबसे करीब माना जाता है। यह वहीं से सूर्य पर होने वाली विभिन्न घटनाओं का अध्ययन करेगा।पिछले महीने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ में सफलता प्राप्त कर भारत ऐसा कीर्तिमान रचने वाला दुनिया का पहला और अब तक का एकमात्र देश बन गया है।आदित्य एल1’ सूर्य के रहस्य जानने के लिए विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक अध्ययन करने के साथ ही विश्लेषण के वास्ते इसकी तस्वीरें भी धरती पर भेजेगा।वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी और सूर्य के बीच पांच ‘लैग्रेंजियन’ बिंदु (या पार्किंग क्षेत्र) हैं, जहां पहुंचने पर कोई वस्तु वहीं रुक जाती है। लैग्रेंज बिंदुओं का नाम इतालवी-फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ-लुई लैग्रेंज के नाम पर पुरस्कार प्राप्त करने वाले उनके अनुसंधान पत्र-‘एस्से सुर ले प्रोब्लेम डेस ट्रोइस कॉर्प्स, 1772’ के लिए रखा गया है।लैग्रेंज बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित होता है, जिससे किसी उपग्रह को इस बिंदु पर रोकने में आसानी होती है। सूर्य मिशन को ‘आदित्य एल-1’ नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि यह पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंजियन बिंदु1 (एल1) क्षेत्र में रहकर अपने अध्ययन कार्य को अंजाम देगा।यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुए अंतरिक्ष यान को वैज्ञानिक शुरू में पृथ्वी की निचली कक्षा में रखेंगे, और बाद में इसे अधिक दीर्घवृत्तकार किया जाएगा।अंतरिक्ष यान को फिर इसमें लगी प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल कर ‘एल1’ बिंदु की ओर भेजा जाएगा, ताकि यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के प्रभाव से बाहर निकल सके और एल1 की ओर बढ़ सके। बाद में, इसे सूर्य के पास एल1 बिंदु के इर्दगिर्द एक बड़ी प्रभामंडल कक्षा में भेजा जाएगा।इसरो ने कहा कि आदित्य-एल1 को प्रक्षेपण से लेकर एल1 बिंदु तक पहुंचने में लगभग चार महीने लगेंगे।सूर्य का अध्ययन करने का कारण बताते हुए इसरो ने कहा कि यह विभिन्न ऊर्जा कणों और चुंबकीय क्षेत्रों के साथ-साथ लगभग सभी तरंगदैर्ध्य में विकिरण उत्सर्जित करता है।पृथ्वी का वातावरण और उसका चुंबकीय क्षेत्र एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है और हानिकारक तरंगदैर्ध्य विकिरण को रोकता है। ऐसे विकिरण का पता लगाने के लिए अंतरिक्ष से सौर अध्ययन किया जाता है।मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में सूर्य के परिमंडल की गर्मी और सौर हवा, सूर्य पर आने वाले भूकंप या ‘कोरोनल मास इजेक्शन’ (सीएमई), पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष मौसम आदि का अध्ययन करना शामिल है।अध्ययन को अंजाम देने के लिए ‘आदित्य-एल1’ उपग्रह अपने साथ सात वैज्ञानिक उपकरण लेकर गया है। इनमें से ‘विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ’ (वीईएलसी) सूर्य के परिमंडल और सीएमई की गतिशीलता का अध्ययन करेगा।वीईएलसी यान का प्राथमिक उपकरण है, जो इच्छित कक्षा तक पहुंचने पर विश्लेषण के लिए प्रति दिन 1,440 तस्वीरें धमती पर स्थित केंद्र को भेजेगा। यह आदित्य-एल1 पर मौजूद ‘सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण’ उपकरण है।‘द सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप’ सूर्य के प्रकाशमंडल और वर्णमंडल की तस्वीरें लेगा तथा सौर विकिरण विविधताओं को मापेगा।आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट’ (एएसपीईएक्स) और ‘प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य’ (पीएपीए) नामक उपकरण सौर पवन और ऊर्जा आयन के साथ-साथ ऊर्जा वितरण का अध्ययन करेंगे।‘सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर’ और ‘हाई एनर्जी एल1 ऑर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर’ (एचईएल1ओएस) विस्तृत एक्स-रे ऊर्जा क्षेत्र में सूर्य से आने वाली एक्स-रे फ्लेयर का अध्ययन करेंगे।‘मैग्नेटोमीटर’ नामक उपकरण ‘एल1’ बिंदु पर अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र को मापने में सक्षम है।आदित्य-एल1’ के उपकरण इसरो के विभिन्न केंद्रों के सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं।
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सोनीपत। हरियाणा में सोनीपत के बेगा गांव में एक बेटे ने कथित रूप से अपनी मां के साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकी दी । गन्नौर थाना प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि बेगा की निवासी जसवंती देवी ने शिकायत की कि उसके बेटे आरोपी सुरेंद्र ने 30 अगस्त की रात को उसके साथ गाली-गलौच की और उसने जब विरोध किया तो आरोपी सुरेंद्र ने उसके साथ मारपीट की। जसवंती देवी का आरोप है कि आरोपी सुरेंद्र ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी है।
थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 सितंबर तक भारत के विभिन्न हिस्सों में आंधी और बिजली गिरने के साथ भारी बारिश की भविष्यवाणी की। मौसम कार्यालय के अनुसार, 2 सितंबर के आस-पास आसपास मध्य भारत में बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने इस सप्ताह नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, तमिलनाडु, केरल, माहे, पुडुचेरी, कराईकल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से 2-3 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है।आईएमडी ने एक बयान में कहा, “अगले 5 दिनों के दौरान नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग भारी वर्षा की संभावना है। ” इस बीच, अगले 5 दिनों के दौरान देश के शेष हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना है। उत्तर भारतीय राज्यों – दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य में बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने यह भी खुलासा किया कि पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा के अलग-अलग इलाकों में 3 सितंबर को बिजली गिरने के साथ आंधी आने की संभावना है।दूसरी तरफ, अगस्त के बाद, सितंबर में मानसून फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, आईएमडी के महानिदेशक, मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि 1901 के बाद से देश में सबसे सूखा अगस्त रहा है। हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून के इस हफ्ते के अंत में फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है। जिससे देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश होगी। आईएमडी महानिदेशक ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ क्षेत्रों और पश्चिम-मध्य भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर, भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से ऊपर अधिकतम तापमान रहने की संभावना है। महापात्र ने कहा कि सुदूर उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है।राज्यवार आईएमडी मौसम भविष्यवाणी-पूर्वोत्तर भारत में हल्की से मध्यम छिटपुट वर्षा होने की संभावना है। इस सप्ताह असम और मेघालय में भारी वर्षा देखी जा सकती है. इसी तरह, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले पांच दिनों में ऐसी मौसम स्थितियों का सामना करने की संभावना है।-पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में 3 सितंबर को इन स्थितियों की उम्मीद हो सकती है, जबकि ओडिशा में 2-4 सितंबर को इनका अनुभव होने की संभावना है.-इसके अलावा, मध्य भारत भी गरज और बिजली के साथ हल्की से भारीवर्षा देखने के लिए तैयार है.-छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से 2-3 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है।-देश के दक्षिणी हिस्से में, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 2 सितंबर तक हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश होने की उम्मीद है।-केरल भी 1 सितंबर तक इसी तरह के मौसम पैटर्न के अनुरूप है।-इसके अलावा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के उत्तरी तटीय क्षेत्रों में 4 सितंबर को अलग-अलग भारी वर्षा होने की संभावना है।
- नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि ‘अमान्य’ (वॉइड) या ‘अमान्य करने योग्य’ (वॉइडेबल) विवाहों से उत्पन्न बच्चे कानूनी की दृष्टि में वैध होते हैं और वे हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत माता-पिता की संपत्तियों पर दावा कर सकते हैं। हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार ‘अमान्य’ विवाह में पुरुष एवं स्त्री को पति और पत्नी का दर्जा नहीं मिलता है। हालांकि, ‘अमान्य करने योग्य विवाह’ में उन्हें पति और पत्नी का दर्जा मिलता है।‘अमान्य’ (वॉइड) विवाह को निरस्त करने के लिए डिक्री (आदेश) की जरूरत नहीं होती है। जिस विवाह को किसी एक पक्ष के अनुरोध पर रद्द किया जा सकता है, उसे ‘अमान्य करने योग्य विवाह’ कहते हैं। शीर्ष अदालत ने 2011 की एक याचिका पर फैसला सुनाया, जो इस कानूनी मुद्दे से संबंधित है कि क्या बिना विवाह के हुए बच्चे हिंदू कानून के तहत अपने माता-पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने के अधिकारी होते हैं या नहीं।प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक फैसले में कहा, ‘‘हमने अब निष्कर्ष तैयार कर लिया है, प्रथम- अमान्य विवाह से पैदा बच्चे को सांविधिक वैधता प्रदान की जाती है और दूसरा- हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 16(2) के संदर्भ में, अमान्य करने योग्य विवाह के निरस्त किये जाने से पहले पैदा हुआ बच्चा वैध होता है।’’न्यायालय ने कहा, ‘‘इसी तरह से बेटियों को समान अधिकार दिये गये हैं।’’ दो न्यायाधीशों की पीठ ने 31 मार्च, 2011 को इस मामले को एक बड़ी पीठ को भेजा था।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शुक्रवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को ‘डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिये जाने की घोषणा की।प्रधान ने एनसीईआरटी के 63वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। एनसीईआरटी भारत में स्कूली शिक्षा संबंधी सभी नीतियों पर काम करती है। यह शिक्षा से जुड़े विषय पर मंत्रालय को, विशेषकर स्कूली शिक्षा के संबंध में सलाह देने और नीति-निर्धारण में मदद करती है जिसमें नवाचार, पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक विकास कार्य भी शामिल है।शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज से एनसीईआरटी को औपचारिक रूप से डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलेगा।उन्होंने कहा, ‘‘ एनसीईआरटी को डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता मिल रही है।’’प्रधान ने कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस भी डीम्ड टू यूनिवर्सिटी है।राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के दर्जे को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें एनसीईआरटी पर पूरा भरोसा है।प्रधान ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि बाल भवन का एनसीईआरटी में विलय किया जायेगा।उन्होंने एनसीईआरटी, सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालय से ‘जादुई पिटारा’ गीत को 22 भाषाओं में तैयार करने को कहा।एनसीईआरटी में रिक्तियों के संबंध में उन्होंने कहा कि मंजूर पदों को भरने का कार्य चल रहा है और उन्हें बताया गया है कि दो तिहाई पदों को हाल में भरा गया है। प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति चंद्रयान-3 के समान है और इसे सफल होना ही है।
- नयी दिल्ली । सरकार ने देश भर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के 30 अस्पतालों में कीमोथेरेपी की सुविधा शुरू की है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति से यह जानकारी मिली।केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को नयी दिल्ली में ईएसआईसी मुख्यालय में ईएसआई निगम की 191वीं बैठक के दौरान कीमोथेरेपी सेवा की शुरुआत की।श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस सेवा की शुरुआत होने से बीमाधारक कर्मचारी एवं उन पर आश्रित लोग आसानी से कैंसर के बेहतर उपचार की सुविधा पा सकेंगे।मंत्री ने नियंत्रण कक्ष के साथ ईएसआईसी के डैशबोर्ड (विभिन्न स्त्रोतों से मिले आंकड़ों के अवलोकन का माध्यम) का भी उद्घाटन किया जिससे संसाधनों और ईएसआईसी अस्पतालों में बिस्तर की बेहतर निगरानी सुनिश्चित हो पाएगी। इसके अलावा निर्माणाधीन परियोजनाओं एवं अन्य चीजों के बारे में जानकारी मिलती रहेगी।बैठक के दौरान मंत्री ने 15 नए ईएसआईसी अस्पताल, 78 ईएसआईसी औषधालय स्थापित करने और असम के बेलटोला, तमिलनाडु के चेन्नई स्थित के. के. नगर तथा हरियाणा के फरीदाबाद में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी।
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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ ने आज मुंबई में युद्धपोत 'महेन्द्रगिरि' का जलावतरण किया। समारोह में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री धनखड़ ने कहा कि नवनिर्मित युद्धपोत महेन्द्रगिरि हमारे समुद्री इतिहास में मील का पत्थर है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अत्याधुनिक विशेषताओं और तकनीक से लैस यह युद्धपोत इंजीनियरिंग का चमत्कार है। उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भरता' के प्रति देश की दृढ़ प्रतिबद्धता के अनुरूप युद्धपोत के उपकरणों और प्रणालियों के लिए 75 प्रतिशत ऑर्डर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) सहित स्वदेशी फर्मों को दिए गए हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि युद्धपोत का जलावतरण यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी सामुद्रिक शक्ति में निवेश करना जारी रखेगा। इस युद्धपोत का नाम उड़ीसा राज्य में स्थित पूर्वी घाट की एक पर्वत चोटी के नाम पर रखा गया है। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। - रांची. झारखंड की राजधानी के बाहरी इलाके में अपने संबंधियों के सूअरों द्वारा फसल को कथित तौर पर नष्ट किए जाने से गुस्साए कई लोगों ने बृहस्पतिवार को दो महिलाओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। रांची देहात के पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमान ने बताया कि यह घटना शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर ओरमांझी थाना क्षेत्र के झांझी टोला गांव में हुई। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले एक परिवार के सूअरों ने उनके रिश्तेदारों के खेत में फसल को कथित तौर पर नष्ट कर दिया था। इस मुद्दे को लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद हो गया। लाठी और कृषि उपकरणों से लैस कई लोगों ने बृहस्पतिवार पूर्वाह्न लगभग 11 बजे दूसरे परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया। भीड़ ने दो महिलाओं सहित परिवार के तीन सदस्यों को पीट-पीटकर मार डाला।'' उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान जनेश्वर बेदिया (42), सरिता देवी (39) और संजू देवी (25) के रूप में हुई। जमान ने बताया कि मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और गांव में पुलिस तैनात की गई है। उन्होंने कहा कि 14 लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें से 11 नामजद हैं। उन्होंने कहा कि 11 नामजद लोगों में से छह को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
- औरंगाबाद/पटना. बिहार के औरंगाबाद जिले में बृहस्पतिवार को एक तालाब में डूबने से पांच बच्चों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सलैया थाना अंतर्गत सोनारचक गांव में यह घटना तब हुई जब बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे सभी पांच बच्चे राखी बंधवाने के बाद तालाब में नहाने गए थे। मृतकों की पहचान शुभम (11), नीरज कुमार (12), धीरज (10), प्रिंस (12) और अमित (12) के रूप में हुई है। सभी पीड़ित सोनारचक गांव के रहने वाले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर दुख जताते हुए सभी मृतकों के निकटतम परिजनों को चार-चार लाख रूपये की अनुग्रह राशि अविलम्ब उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। औरंगाबाद के अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) विजयंत ने कहा, ‘‘ग्रामीणों के अनुसार, अपनी बहनों से राखी बंधवाने के बाद, सभी पांच बच्चे तालाब में स्नान करने गए थे। ग्रामीणों के एक समूह ने तालाब के किनारे से कुछ शोर सुना। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने बच्चों को तालाब से बाहर निकाला लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।'' आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस के मौके पर काफी देर से पहुंचने का आरोप लगाते हुए गांव की मुख्य सड़क को जाम कर दिया। बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें तितर-बितर कर दिया।
- धौलपुर (राजस्थान). मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सराय छोला थाना इलाके में अदालत में पेशी के बाद धौलपुर वापस लाया जा रहा एक आरोपी हथकड़ी सहित ट्रेन से कूदकर फरार हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने फरार होते समय सिपाही को भी धक्का मारकर ट्रेन से नीचे गिरा दिया और भाग निकला। मध्य प्रदेश की मुरैना एवं धौलपुर जिला पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक ओ पी मीणा ने बताया कि वाहन चोरी के एक मामले में धौलपुर जिला कारागृह से अजीत उर्फ बनिया गुर्जर को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की अदालत में बृहस्पतिवार को पेशी पर ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि पेशी के बाद में अमृतसर-विलासपुर छत्तीसगढ एक्सप्रेस ट्रेन से पुलिसकर्मियों की टीम अजीत उर्फ बनिया को वापस धौलपुर लेकर लौट रही थी। शाम को करीब चार बजे रास्ते में मुरैना जिले के हेतमपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की गति थोडी धीमी हुई तभी बदमाश अजीत उर्फ बनिया ने पुलिसकर्मियों को उल्टी आने की बात कही, तो टीम के सदस्य सिपाही हरदेव सिंह उसे हथकड़ी सहित लेकर ट्रेन के कोच में ही वाशबेसिन पर ले गया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान आरोपी ने चलती ट्रेन से सिपाही हरदेव सिंह और हथकड़ी के साथ ही छलांग लगा दी। इसके बाद में पुलिसकर्मी ने ट्रेन को रुकवाया तथा फरार बदमाश का पीछा किया, लेकिन उसके बारे में कोई सुराग नहीं लग सका। अपर पुलिस अधीक्षक ओपी मीणा ने बताया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस की कई टीम फरार बदमाश की तलाश कर रही है।
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नई दिल्ली। सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक राष्ट्र- एक चुनाव की संभावना का पता लगाने के लिए एक समिति गठित की है। जयपुर में मीडिया से बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस बारे में विचलित होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसे लागू करने से पहले विभिन्न स्तरों पर चर्चा की जाएगी। श्री जोशी ने कहा कि वर्ष 1967 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हुआ करते थे।
श्री जोशी शनिवार से शुरू हो रही परिवर्तन यात्रा के प्रबंधों पर चर्चा के लिए जयपुर में हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने आज श्री रामनाथ कोविंद से उनके निवास पर मुलाकात की। -
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय में राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार से चार बार के सांसद प्रभुनाथ सिंह को 1995 के दोहरे हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय में इस घटना के पीड़ित लोगों को 10 लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय में 18 अगस्त को प्रभुनाथ सिंह को दोहरे हत्याकांड मामले में दोषी ठहराया था। वे एक अन्य हत्या के मामले में हजारीबाग जेल में हैं। प्रभुनाथ सिंह पर 1995 में मशरख में मतदान केन्द्र पर दो लोगों की हत्या का आरोप है।
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नई दिल्ली। भारत के सौर मिशन आदित्य एल-1 के प्रक्षेपण की गिनती शुरू हो गई है। पीएसएलवी-सी-57 का कल दोपहर में आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपण किया जाएगा। उपग्रह को सूर्य और पृथ्वी के बीच लैग्रेंज प्वाइंट एल-1 के आसपास हैलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। यह स्थान धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है। उपग्रह लैग्रेंज प्वाइंट तक पहुंचने में लगभग चार महीने का समय ल्रगेगा। एल-1 प्वाइंट के पास हैलो ऑर्बिट का फायदा यह है कि यहां से यह उपग्रह बिना किसी बाधा के सूर्य की गतिविधियों का अवलोकन कर सकता है। आदित्य एल-1 मिशन सूर्य के वातावरण और पर्यावरण और उससे संबंधित सभी गतिविधियों का अपनी तरह का पहला अध्ययन करेगा। इस पर सात पेलोड लगे हैं।
बेंगलुरु में भारतीय अंतरिक्ष भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिक प्रोफेसर बी. रवीन्द्र ने कहा कि सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने के लिए मिशन भेजने वाला भारत दुनिया का तीसरा देश होगा। आकाशवाणी से विशेष बातचीत में प्रोफेसर रवीन्द्र ने कहा कि आदित्य एल-1 पर लगे सात पेलोड से प्राप्त आंकड़ों से कई नये तथ्य सामने आयेंगे। - सासाराम-पटना. बिहार के रोहतास जिले में बुधवार तड़के एक एसयूवी सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर ट्रक से टकरा गयी। हादसे में एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। दुर्घटना रोहतास जिले के शिवसागर थाना से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 02 पर स्कॉर्पियो के ट्रक से टकराने के कारण हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की दुर्घटना में सात लोगों की मौत पर शोक जताते हुए इसे बेहद दुखद बताया।उनहोंने दुख की इस घड़ी में मृतकों के परिजनों को तकलीफ सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना ईश्वर से की। उन्होंने गंभीर रूप घायल लोगों के समुचित इलाज का निर्देश देते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। शिवसागर थाना के अध्यक्ष राकेश गोसाई ने बताया, ‘‘शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त दोनों वाहनों को कब्जे में ले लिया है।'' उन्होंने बताया कि यह दुर्घटना सुबह करीब चार बजे हुई। एसयूवी में चालक के अलावा 11 लोग सवार थे। कैमूर जिले के रहने वाले एक ही परिवार के सदस्य झारखंड के रजरप्पा मंदिर से लौट रहे थे। पुलिस ने आशंका जतायी है कि तेज गति के कारण चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया जिससे यह दुर्घटना हुई है। गोसाई ने बताया कि मृतकों की पहचान राजमती देवी (55), उनकी बेटी सोनी कुमारी (35), उनके दामाद अरविंद शर्मा (40), उनके पोते आदित्य कुमार (8) और रिया कुमारी (9) तथा अरविंद की दो भतीजियों तारा कुमारी (22) और चांदनी कुमारी (15) के रूप में की गई है। उन्होंने बताया कि इस हादसे में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए एक नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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बेंगलुरु. इसरो ने बृहस्पतिवार को चंद्रयान-3 मिशन की प्रगति की जानकारी देने के लिए ‘मां-बच्चे' के मनमोहक संदर्भ और चंद्रमा के लिए आम भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'चंदामामा' शब्द का इस्तेमाल किया। अंतरिक्ष एजेंसी ने यह उल्लेख ऐसे समय किया जब चंद्रयान-3 के रोवर ‘प्रज्ञान' द्वारा चांद की सतह पर लगातार एक के बाद एक खोज की जा रही हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के रोवर 'प्रज्ञान' पर लगे एक अन्य उपकरण ने भी एक अलग तकनीक का उपयोग करके चंद्र क्षेत्र में गंधक (सल्फर) की मौजूदगी की पुष्टि की है। इसरो ने सुरक्षित रास्ते की तलाश में घूमते रोवर का एक वीडियो भी जारी किया। इस घूर्णन प्रक्रिया का वीडियो लैंडर इमेजर कैमरे ने बनाया। इसके द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर आज लोगों की निगाहें टिकी रहीं।
इसरो ने लिखा, ‘‘सुरक्षित रास्ते की तलाश में रोवर घूमा। इसकी घूर्णन प्रक्रिया का वीडियो लैंडर इमेजर कैमरे ने बनाया। आज ऐसा महसूस होता है मानो एक नन्हा शिशु, चंदामामा के आँगन में अठखेलियाँ कर रहा है, जबकि माँ स्नेहपूर्वक उसे निहार रही है। है ना?'' राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ‘अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप' (एपीएक्सएस) नामक उपकरण ने चंद्रमा पर गंधक के साथ-साथ अन्य छोटे तत्वों का भी पता लगाया है। पोस्ट में कहा गया, ‘‘चंद्रयान-3 की यह खोज वैज्ञानिकों को क्षेत्र में गंधक (एस) के स्रोत के लिए नए स्पष्टीकरण विकसित करने के लिए विवश करती है: आंतरिक?, ज्वालामुखीय?, उल्कापिंड?,......?'' अंतरिक्ष एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें 18 सेमी लंबे एपीएक्सएस को घुमाते हुए एक स्वचालित तंत्र दिखता है, जो डिटेक्टर हेड को चंद्र सतह के करीब पांच सेंटीमीटर की दूरी पर संरेखित करता है। छब्बीस किलोग्रम वजनी, छह पहियों वाला, सौर ऊर्जा से संचालित ‘प्रज्ञान' रोवर अपने वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करके यह पता लगाने का काम कर रहा है कि दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानें किस चीज से बनी हैं। इसरो ने एक बयान में कहा कि एपीएक्सएस उपकरण चंद्रमा जैसे कम वायुमंडल वाले ग्रहीय पिंडों की सतह पर मिट्टी और चट्टानों की मौलिक संरचना के वास्तविक विश्लेषण के लिए सबसे उपयुक्त है। इसमें रेडियोधर्मी स्रोत होते हैं जो सतह के नमूने पर अल्फा कण और एक्स-रे उत्सर्जित करते हैं। नमूने में मौजूद परमाणु बदले में मौजूद तत्वों के अनुरूप विशिष्ट एक्स-रे रेखाएं उत्सर्जित करते हैं। इन विशिष्ट एक्स-रे की ऊर्जा और तीव्रता को मापकर, अनुसंधानकर्ता मौजूद तत्वों और उनकी प्रचुरता का पता लगा सकते हैं। एपीएक्सएस के अवलोकनों ने एल्युमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम और लौह जैसे प्रमुख अपेक्षित तत्वों के अलावा, गंधक समेत दिलचस्प छोटे तत्वों की मौजूदगी की खोज की है। रोवर पर लगा ‘लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप' (एलआईबीएस) उपकरण पहले ही गंधक की मौजूदगी की पुष्टि कर चुका है। इन अवलोकनों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण प्रगति पर है। -
कोलकाता. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि दो सितंबर को इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए जाने वाले भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद सूर्य के अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में नयी जानकारी मिल सकेगी। आने वाले दशकों और सदियों में पृथ्वी पर संभावित जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए यह आंकड़े महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। सौर भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर दीपांकर बनर्जी ने कहा कि आदित्य एल-1 पहले लैग्रेंजियन बिंदु तक जाएगा जो पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है और फिर वह उस डेटा को प्रसारित करेगा जिसका अधिकांश भाग पहली बार अंतरिक्ष में किसी मंच से वैज्ञानिक समुदाय के पास आएगा। इस अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना (सूर्य की सबसे बाहरी परतों) के दूरस्थ अवलोकन और एल1 (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु) पर सौर वायु के यथास्थिति अवलोकन के लिए तैयार किया गया है। एल1 पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है। लैग्रेंज बिंदु ऐसे संतुलन बिंदु को कहा जाता है जहां सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वीय बल बराबर होते हैं। आदित्य एल1 को सूर्य-पृथ्वी की व्यवस्था के लैग्रेंज बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। यहां से सूर्य को बिना किसी व्यवधान या ग्रहण के लगातार देखने का लाभ मिलेगा। बनर्जी, उस टीम का हिस्सा हैं जिसने 10 साल से अधिक समय पहले मिशन की योजना पर काम किया था।
बनर्जी ने कहा, पृथ्वी पर हमारा अस्तित्व या जीवन मूलतः सूर्य की उपस्थिति के कारण है जो हमारा निकटतम तारा है। सारी ऊर्जा सूर्य से आती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि क्या यह उतनी ही ऊर्जा उत्सर्जित करेगा (जैसा कि यह अभी करता है) या इसमें परिवर्तन होने वाला है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यदि कल सूर्य उतनी ही मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित नहीं करेगा तो इसका हमारी जलवायु पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा।'' नैनीताल में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के निदेशक बनर्जी ने कहा कि यदि लैग्रेंजियन बिंदु से सूर्य की लंबी अवधि तक निगरानी की जा सकती है, तो यह सूर्य के इतिहास का मॉडल तैयार करने की उम्मीद जगाएगा। वैज्ञानिक ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि हर 11 साल में सूर्य की चुंबकीय गतिविधि में बदलाव होता है, जिसे सौर चक्र के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि सौर वायुमंडल में चुंबकीय क्षेत्र में भी कभी-कभी व्यापक परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा का भारी विस्फोट होता है, जिसे सौर तूफान कहा जाता है। दीपांकर बनर्जी ने कहा कि बाहरी सौर वातावरण (कोरोना) मजबूत चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा संरचित है, जो गर्म प्लाज्मा को सीमित करता है। निश्चित समय पर यह अंतरग्रहीय माध्यम में गैस और चुंबकीय क्षेत्र के बुलबुले छोड़ता है, जिसे ‘कोरोनल मास इजेक्शन' कहते हैं। वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘जब वे अंतरग्रहीय माध्यम में यात्रा करते हैं, तो वे सभी दिशाओं में जा सकते हैं। कोरोनल मास इजेक्शन के प्रभाव से उपग्रह सीधे प्रभावित होते हैं। सौर आंधी के कारण चंद्रमा समेत अन्य ग्रह प्रभावित होते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘अंतरिक्ष में हमारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष मौसम के पूर्वानुमान की आवश्यकता है। आदित्य-एल1 के डेटा की मदद से मौसम के पूर्वानुमान में सुधार किया जा सकता है।'' भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का अंतरिक्ष यान पृथ्वी की जलवायु के छिपे इतिहास का पता लगाAditya-L1ने में भी मदद कर सकता है क्योंकि सौर गतिविधियों का ग्रह के वायुमंडल पर प्रभाव पड़ता है। बनर्जी ने कहा, ‘‘पृथ्वी पर कई हिमयुग रहे हैं। लोग अभी भी पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं कि ये हिमयुग कैसे बने और क्या सूर्य इनके लिए जिम्मेदार था।'' -
मुंबई. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत सूरत में गिट्टी रहित ट्रैक का निर्माण शुरू कर दिया गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने बृहस्पतिवार को विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। विज्ञप्ति के अनुसार, एनएचएसआरसीएल जे-स्लैब गिट्टी रहित ट्रैक नाम की इस प्रणाली का भारत में पहली बार उपयोग किया जा रहा है। अभी तक यह प्रणाली जापान की हाई-स्पीड रेल प्रणाली शिंकानसेन में उपयोग में लाई जाती रही है। भारत में पारंपरिक रेल ट्रैक बड़ी-बड़ी गिट्टियों में स्लीपर से जुड़े होते है और गिट्टी की जगह कंक्रीट की चादर बिछाकर उसे गिट्टी रहित ट्रैक बना दिया जाता है। विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रैक प्रणाली के लिए सूरत में कंक्रीट के बेस का निर्माण शुरू कर दिया गया है और इसमें पहले से तैयार एक ट्रैक स्लैब शामिल है। इन स्लैब के ऊपर फास्टनिंग डिवाइस (एक हार्डवेयर उपकरण जो दो या उससे चीजों को एक साथ जोड़ता है) और रेल लगाए गए हैं। एक बार इस परियोजना के पूरी तरह से चालू होने के बाद अहमदाबाद और मुंबई के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी। यह 508 किमी की दूरी को तीन घंटे से कम समय में तय करेगी। इस प्रणाली में एक पहले से तैयार ट्रैक स्लैब होता है जिस पर फास्टनिंग डिवाइस और रेल फिट किए जाते हैं। यह स्लैब कंक्रीट के बेस पर टिका होता है, जिसकी मोटाई लगभग 300 मिमी होती है और अप और डाउन लाइनों के लिए साइट पर बनाया जाता है। कंक्रीट के बेस की चौड़ाई 2420 मिमी है। विज्ञप्ति में कहा, ‘‘आरसी एंकर का उपयोग ट्रैक स्लैब पर लंबवत और अन्य बाधाओं को नियन्त्रित करने के लिए किया जाता है।'' विज्ञप्ति के अनुसार, आरसी एंकर में ‘रेफेरेंस पिन' लगाया जाता है, जिसका उपयोग 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन संचालन के लिए उपयुक्त वांछित संरेखण (क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर) प्राप्त करने के लिए किया जाता है। गुजरात राज्य के लिए ट्रैक कार्यों की निविदा प्रदान की जा चुकी है तथा ट्रैक कार्यों के लिए सामग्री की खरीद अगले चरण में है। ट्रैक स्लैब का निर्माण विशेष कारखानों में किया जाएगा और ऐसे दो कारखाने पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
- नयी दिल्ली । अमृत काल के बीच ‘संसद का विशेष सत्र' 18 से 22 सितंबर को बुलाया गया है जिसमें पांच बैठकें होंगी। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘ संसद का विशेष सत्र (17वीं लोकसभा का 13वां सत्र और राज्यसभा का 261वां सत्र) 18 से 22 सितंबर को बुलाया गया है ।'' संसद के इस विशेष सत्र के एजेंडे के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है । हालांकि यह सत्र 9 और 10 सितंबर को राष्ट्रीय राजधनी में जी20 शिखर बैठक के कुछ दिनों बाद आयोजित होने जा रहा है। जोशी ने कहा कि संसद के इस विशेष सत्र में पांच बैठकें होंगी। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि अमृत काल के बीच आयोजित होने वाले इस विशेष सत्र के दौरान संसद में सार्थक चर्चा को लेकर आशान्वित हैं। file photo
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नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में, पहली जुलाई से शुरू हुई 62 दिन की वार्षिक अमरनाथ यात्रा, आज रक्षा बंधन पर समाप्त हो रही है। श्रद्धालुओं ने गांदरबल जिले के सोनमर्ग क्षेत्र में सबसे छोटे बालटाल मार्ग और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम मार्ग से बाबा अमरनाथ मंदिर के दर्शन किए। इस बीच, आज श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर भगवान शिव के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री, विशेषकर कश्मीरी पंडित, अनंतनाग जिले के बिजबेहरा इलाके में थाजवारी गांव में प्राचीन छोटा अमरनाथ मंदिर में सुबह से ही जुट रहे हैं।
- नई दिल्ली। एपीएक्सएस के अवलोकनों ने एल्युमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम और लौह जैसे प्रमुख अपेक्षित तत्वों के अलावा, गंधक समेत दिलचस्प छोटे तत्वों की मौजूदगी की खोज की है। रोवर पर लगा ‘लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप’ (एलआईबीएस) उपकरण पहले ही गंधक की मौजूदगी की पुष्टि कर चुका है। इन अवलोकनों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण प्रगति पर है।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के रोवर प्रज्ञान पर लगे एक अन्य उपकरण ने भी एक अलग तकनीक का उपयोग करके चंद्र क्षेत्र में गंधक (सल्फर) की मौजूदगी की पुष्टि की है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ‘अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप’ (एपीएक्सएस) नामक उपकरण ने चंद्रमा पर गंधक के साथ-साथ अन्य छोटे तत्वों का भी पता लगाया है। पोस्ट में कहा गया, ‘‘चंद्रयान-3 की यह खोज वैज्ञानिकों को क्षेत्र में गंधक (एस) के स्रोत के लिए नए स्पष्टीकरण विकसित करने के लिए विवश करती है: आंतरिक?,ज्वालामुखीय?, उल्कापिंड?,......?’’ इसरो ने सुरक्षित रास्ते की तलाश में घूमते रोवर का एक वीडियो भी जारी किया। इस घूर्णन प्रक्रिया का वीडियो लैंडर इमेजर कैमरे ने बनाया।’’ इसने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘ऐसा महसूस होता है मानो एक बच्चा चंदामामा के आँगन में अठखेलियाँ कर रहा है, जबकि माँ स्नेहपूर्वक देख रही है।’’ इसरो ने चुटकी लेते हुए पूछा, ‘‘है ना? अंतरिक्ष एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें 18 सेमी लंबे एपीएक्सएस को घुमाते हुए एक स्वचालित तंत्र दिखता है, जो डिटेक्टर हेड को चंद्र सतह के करीब पांच सेंटीमीटर की दूरी पर संरेखित करता है। छब्बीस किलोग्रम वजनी, छह पहियों वाला, सौर ऊर्जा से संचालित ‘प्रज्ञान’ रोवर अपने वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करके यह पता लगाने का काम कर रहा है कि दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानें किस चीज से बनी हैं।इसरो ने एक बयान में कहा कि एपीएक्सएस उपकरण चंद्रमा जैसे कम वायुमंडल वाले ग्रहीय पिंडों की सतह पर मिट्टी और चट्टानों की मौलिक संरचना के वास्तविक विश्लेषण के लिए सबसे उपयुक्त हैं। इसमें रेडियोधर्मी स्रोत होते हैं जो सतह के नमूने पर अल्फा कण और एक्स-रे उत्सर्जित करते हैं। नमूने में मौजूद परमाणु बदले में मौजूद तत्वों के अनुरूप विशिष्ट करते हैं। इन विशिष्ट एक्स-रे की ऊर्जा और तीव्रता को मापकर, अनुसंधानकर्ता मौजूद तत्वों और उनकी प्रचुरता का पता लगा सकते हैं।एपीएक्सएस के अवलोकनों ने एल्युमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम और लौह जैसे प्रमुख अपेक्षित तत्वों के अलावा, गंधक समेत दिलचस्प छोटे तत्वों की मौजूदगी की खोज की है। रोवर पर लगा ‘लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप’ (एलआईबीएस) उपकरण पहले ही गंधक की मौजूदगी की पुष्टि कर चुका है। इन अवलोकनों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण प्रगति पर है।
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नई दिल्ली। लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का निलंबन निरस्त कर दिया है। उन्हें सदन में जानबूझकर और लगातार दुर्व्यवहार के कारण निलंबित कर दिया गया था।लोकसभा सचिवालय ने एक बयान में कहा कि श्री चौधरी का निलंबन, जो इस महीने की 10 तारीख को विशेषाधिकार समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक प्रभावी था, निरस्त कर दिया गया है।
- नयी दिल्ली। भारतीय नौसेना ने बुधवार को कहा कि ‘प्रोजेक्ट 17ए' के तहत निर्मित अंतिम पोत ‘महेंद्रगिरि' का एक सितंबर को मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में जलावतरण किया जायेगा। नौसेना ने कहा कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की पत्नी सुदेश धनखड़ द्वारा इसका जलावतरण किया जायेगा।महेंद्रगिरि पोत का नाम ओडिशा स्थित पूर्वी घाट की एक पर्वत शिखर के नाम पर रखा गया है। यह 17ए फ्रिगेट का सातवां पोत है। यह युद्धपोत ‘प्रोजेक्ट 17 क्लास फ्रिगेट्स' के बाद के हैं, जिनमें बेहतर ‘स्टील्थ फीचर्स, उन्नत हथियार और सेंसर हैं। नौसेना ने कहा, “महेंद्रगिरि तकनीकी रूप से उन्नत जंगी पोत है और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के भविष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी समृद्ध नौसैनिक विरासत को अपनाने संबंधी भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।






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