बुलेट ट्रेन परियोजना: सूरत में पहले गिट्टी रहित ट्रैक का निर्माण शुरू
मुंबई. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत सूरत में गिट्टी रहित ट्रैक का निर्माण शुरू कर दिया गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने बृहस्पतिवार को विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। विज्ञप्ति के अनुसार, एनएचएसआरसीएल जे-स्लैब गिट्टी रहित ट्रैक नाम की इस प्रणाली का भारत में पहली बार उपयोग किया जा रहा है। अभी तक यह प्रणाली जापान की हाई-स्पीड रेल प्रणाली शिंकानसेन में उपयोग में लाई जाती रही है। भारत में पारंपरिक रेल ट्रैक बड़ी-बड़ी गिट्टियों में स्लीपर से जुड़े होते है और गिट्टी की जगह कंक्रीट की चादर बिछाकर उसे गिट्टी रहित ट्रैक बना दिया जाता है। विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रैक प्रणाली के लिए सूरत में कंक्रीट के बेस का निर्माण शुरू कर दिया गया है और इसमें पहले से तैयार एक ट्रैक स्लैब शामिल है। इन स्लैब के ऊपर फास्टनिंग डिवाइस (एक हार्डवेयर उपकरण जो दो या उससे चीजों को एक साथ जोड़ता है) और रेल लगाए गए हैं। एक बार इस परियोजना के पूरी तरह से चालू होने के बाद अहमदाबाद और मुंबई के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी। यह 508 किमी की दूरी को तीन घंटे से कम समय में तय करेगी। इस प्रणाली में एक पहले से तैयार ट्रैक स्लैब होता है जिस पर फास्टनिंग डिवाइस और रेल फिट किए जाते हैं। यह स्लैब कंक्रीट के बेस पर टिका होता है, जिसकी मोटाई लगभग 300 मिमी होती है और अप और डाउन लाइनों के लिए साइट पर बनाया जाता है। कंक्रीट के बेस की चौड़ाई 2420 मिमी है। विज्ञप्ति में कहा, ‘‘आरसी एंकर का उपयोग ट्रैक स्लैब पर लंबवत और अन्य बाधाओं को नियन्त्रित करने के लिए किया जाता है।'' विज्ञप्ति के अनुसार, आरसी एंकर में ‘रेफेरेंस पिन' लगाया जाता है, जिसका उपयोग 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन संचालन के लिए उपयुक्त वांछित संरेखण (क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर) प्राप्त करने के लिए किया जाता है। गुजरात राज्य के लिए ट्रैक कार्यों की निविदा प्रदान की जा चुकी है तथा ट्रैक कार्यों के लिए सामग्री की खरीद अगले चरण में है। ट्रैक स्लैब का निर्माण विशेष कारखानों में किया जाएगा और ऐसे दो कारखाने पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।



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