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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि भारत में त्योहारी सीजन में खुदरा बिक्री इस साल अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई है, जो जीएसटी दरों को कम करने सहित हालिया आर्थिक नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है। गाजियाबाद में नए सीजीएसटी भवन के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार इस प्रणाली को और भी अधिक कुशल, न्यायसंगत और विकास केंद्रीय बनाएंगे।
मुझे विश्वास है कि निरंतर सुधारों, समर्पण और टीम वर्क के साथ, हम राजस्व, अनुपालन और सेवा वितरण में नई ऊंचाइयों को छुएंगेवित्त मंत्री ने कहा, “मुझे विश्वास है कि निरंतर सुधारों, समर्पण और टीम वर्क के साथ, हम राजस्व, अनुपालन और सेवा वितरण में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।” कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस दीपावली के दौरान खुदरा बिक्री 6.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई – जो पिछले साल के 4.25 लाख करोड़ रुपए से 25 प्रतिशत अधिक है।65,000 करोड़ रुपए सेवाओं पर खर्च किए गए, जिससे यह भारत के व्यापारिक इतिहास में सबसे बड़ा दीपावली कारोबार सीजन बन गयाकुल बिक्री में से लगभग 5.40 लाख करोड़ रुपए वस्तुओं पर और 65,000 करोड़ रुपए सेवाओं पर खर्च किए गए, जिससे यह भारत के व्यापारिक इतिहास में सबसे बड़ा दीपावली कारोबार सीजन बन गया।वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “ये आंकड़े हमें क्या बताते हैं कि हमारी आर्थिक नीतियों – जिसमें हाल ही में जीएसटी दरों को कम करना भी शामिल है – का सार्थक प्रभाव पड़ रहा है।”वित्त मंत्री सीतारमण ने आगे कहा कि अगली पीढ़ी का जीएसटी करदाताओं को अलग महसूस होना चाहिएवित्त मंत्री ने आगे कहा, “अच्छे काम करते रहें, सुधारों की गति बनाए रखें और हमेशा याद रखें कि हमारा अंतिम लक्ष्य ईमानदार करदाताओं का जीवन आसान बनाना है।” वित्त मंत्री सीतारमण ने आगे कहा कि अगली पीढ़ी का जीएसटी करदाताओं को अलग महसूस होना चाहिए। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है, क्योंकि वे देश के करदाता हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘जीएसटी बचत उत्सव’ वास्तव में ‘डबल दीपावली’ थाकेंद्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘जीएसटी बचत उत्सव’ वास्तव में ‘डबल दीपावली’ था।” ई-कॉमर्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें वॉल्यूम में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सकल व्यापारिक मूल्य में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई।( -
नई दिल्ली। भारत भर में सूर्य देव को समर्पित चार दिनों का छठ पूजा का भव्य त्योहार धूमधाम से मनाए जाने की तैयारी चल रही है। 25 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस त्योहार से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों में लगभग 150 मिलियन भक्त शामिल हो रहे हैं।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस वर्ष छठ पूजा से देश में लगभग 38,000 करोड़ रुपए का व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। बीते वर्ष छठ पूजा को लेकर यह आंकड़ा 31,000 करोड़ था, जो कि 7000 करोड़ रुपए की वृद्धि को दिखाता है। जबकि इससे पहले 2023 में यही आंकड़ा 27,000 करोड़ रुपए था, जो कि छठ से जुड़े व्यापार में समय के साथ हो रही बढ़ोतरी को दर्शाता है।कैट की ओर से कहा गया है कि केवल दिल्ली में बिक्री इस वर्ष 6,000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर जाने की उम्मीद है।छठ पूजा का यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, विदर्भ और मध्य प्रदेश में रह रहे लोगों द्वारा मनाया जाता है। इसके अलावा, देश के अलग-अलग राज्यों में रह रहे लाखों पूर्वांचली लोग भी इस पर्व को मनाते हैं।कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि छठ पूजा के त्योहार से जुड़े मुख्य सामान में सूप, दौरा, बांस की टोकरियां, मिट्टी के दीये, गन्ना, केला, नारियल, सेब, नींबू जैसे फल, गेहूं और चावल का आटा, पारंपरिक ठेकुआ जैसी मिठाइयां, खजूर, पूजा का सामान, साड़ियां, पारंपरिक कपड़े, सजावट का सामान, दूध, घी, बर्तन, टेंट और मेहमाननवाजी की सेवाएं शामिल हैं।उन्होंने आगे बताया कि साड़ियां, लहंगा-चुनरी, महिलाओं के लिए सलवार-कुर्ता और कुर्ता-पायजामा, पुरुषों के लिए धोती जैसे पारंपरिक कपड़े अधिक से अधिक मात्रा में खरीदे जा रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों और छोटे उद्योगों को फायदा हो रहा है। इसके अलावा, हाथ से बनी स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री में भी उछाल देखा जा रहा है।खंडेलवाल ने कहा, “छठ पूजा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। यह पर्व सामाजिक सद्भाव और समर्पण का प्रतीक है। यह व्यापार को भी बढ़ावा देता है और सीधे स्थानीय उत्पादकों को फायदा पहुंचाता है, जिससे पीएम मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को मजबूती मिलती है।” -
नयी दिल्ली. मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड की कॉम्पैक्ट एसयूवी जिम्नी 5-डोर ने भारत से कुल एक लाख इकाई का निर्यात का आंकड़ा पार कर लिया है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि जिम्नी 5-डोर का निर्यात भारत में पेश होने के तुरंत बाद 2023 में शुरू हो गया था। इसका जापान, मेक्सिको और ऑस्ट्रेलिया सहित 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है। जापान मे इसे ‘जिम्नी नोमेड' के नाम से निर्यात किया जाता है। जनवरी, 2025 से इस मॉडल ने पेश होने के कुछ ही दिन में 50,000 से अधिक ऑर्डर हासिल कर लिए हैं। कंपनी ने कहा कि उसकी कुल निर्यात मात्रा 2024-25 में 3.32 लाख इकाई रही जबकि 2023-24 में यह 2.83 लाख इकाई थी। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिसाशी ताकेउची ने कहा, ‘‘ जिम्नी की विश्वस्तर पर आधी सदी से अधिक पुरानी विरासत है। जिम्नी 5-डोर का एक लाख निर्यात का आंकड़ा पार करना मारुति सुजुकी के लिए गौरव की बात है।'' उन्होंने आगे कहा कि मारुति सुजुकी द्वारा जिम्नी के साथ 16 अन्य मॉडल का निर्यात किया जाता है। सालाना आधार पर वृद्धि भारत के विश्वस्तरीय मोटर वाहन विनिर्माण के केंद्र के रूप में उभरने को दर्शाती है।
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नयी दिल्ली. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधान प्रदाता मोइविंग ने 700 इलेक्ट्रिक छोटे वाणिज्यिक वाहनों के बेड़े को पट्टे पर लेने के लिए टाटा मोटर्स वाणिज्यिक वाहनों के प्रमुख डीलरों के साथ साझेदारी की है। मोइविंग ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने बयान में कहा कि ये वाहन दिल्ली एनसीआर, मुंबई, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलोर और कोलकाता सहित 10 से ज्यादा शहरों में तैनात किए जाएंगे। इनका काम ऑनलाइन खरीदारी, सामान पहुंचाने और रोजमर्रा की चीजों के आपूर्ति में मदद करना होगा। मोइविंग ने कहा कि टाटा मोटर्स के प्रमुख वाणिज्यिक वाहन विक्रेता पास्कोस, जोहर मोटर्स और भंडारी ऑटोमोबाइल्स के साथ साझेदारी के तहत वह 700 इलेक्ट्रिक छोटे वाणिज्यिक वाहनों (ई-एससीवी) को पट्टे पर लेगी। मोइविंग के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विकास मिश्रा ने कहा, ‘‘हमें टाटा मोटर्स के साथ काम करके बहुत अच्छा अनुभव हुआ है और हम इन वाहनों को विभिन्न उपयोग और क्षेत्रों में लगाने के लिए उत्सुक हैं।''
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नयी दिल्ली. वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनी भारतपे ने बृहस्पतिवार को अजीत कुमार को अपना मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) नियुक्त करने की घोषणा की। उनकी नियुक्ति 23 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होगी। कुमार पंकज गोयल का स्थान लेंगे, जिन्होंने इस वर्ष मई में पद छोड़ दिया था।
अजीत कुमार के पास 19 से अधिक वर्षों का अनुभव है और वह हाल ही में पेटीएम में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंजीनियरिंग के पद पर कार्यरत थे। कंपनी ने एक बयान में कहा कि अपनी नई भूमिका में कुमार भारतपे की प्रौद्योगिकी रणनीति और नवाचार एजेंडा का नेतृत्व करेंगे। - नयी दिल्ली, । भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को विश्व बैंक/आईएमएफ की वार्षिक बैठक के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में न्यूयॉर्क स्थित ग्लोबल फाइनेंस से दो प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। देश के सबसे बड़े ऋणदाता बैंक ने दो खिताब (‘वर्ल्ड्स बेस्ट कंज्यूमर बैंक 2025' और ‘बेस्ट बैंक इन इंडिया 2025') जीते। एसबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा कि यह दोहरी मान्यता बैंक की नवाचार, वित्तीय समावेशन और ग्राहक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए वैश्विक बैंकिंग क्षेत्र में उसकी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करती है। एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने कहा कि 52 करोड़ ग्राहकों को सेवा देना और रोजाना 65,000 नए ग्राहकों को जोड़ना प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण में बड़े निवेश की मांग करता है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएमडीसी ने बुधवार को कहा कि उसने तत्काल प्रभाव से लौह अयस्क ढेलों (लम्प) और उसके फाइन्स की कीमतों में क्रमशः 550 रुपये और 500 रुपये प्रति टन की कटौती की है। देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी ने एक नियामकीय सूचना में कहा कि उसने लम्प अयस्क की कीमत 5,550 रुपये प्रति टन और फाइन्स की कीमत 4,750 रुपये प्रति टन तय की है। लम्प अयस्क या उच्च श्रेणी के लौह अयस्कों में 65.5 प्रतिशत लौह तत्व होता है, जबकि फाइन्स निम्न श्रेणी के अयस्क होते हैं जिनमें 64 प्रतिशत या उससे कम लौह तत्व होता है। एक अगस्त को घोषित अंतिम मूल्य संशोधन में, एनएमडीसी ने लम्प की दर 6,100 रुपये प्रति टन और फाइंस की दर 5,250 रुपये प्रति टन तय की थी। 22 अक्टूबर से लागू होने वाली कीमतों में रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (डीएमएफ), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (डीएमईटी) शामिल हैं और उपकर, वन परमिट शुल्क, पारगमन शुल्क, जीएसटी, पर्यावरण उपकर और अन्य कर शामिल नहीं हैं। बाजार अनुसंधान फर्म बिगमिंट ने कहा, ‘‘पिछले दो महीनों से लौह अयस्क की कीमतों की समीक्षा नहीं की गई थी। घरेलू इस्पात बाजार, जो एक उपभोक्ता बाजार है, भारी दबाव में रहा, क्योंकि कीमतों में लगातार गिरावट जारी रही।'' लौह अयस्क, इस्पात निर्माण में उपयोग किए जाने वाले प्रमुख कच्चे माल में से एक है, और इसकी कीमतों में किसी भी उतार-चढ़ाव का इस्पात की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जो एक मिश्र धातु है जिसका व्यापक रूप से निर्माण, बुनियादी ढांचा, वाहन और रेलवे जैसे क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है। इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत हैदराबाद स्थित एनएमडीसी भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान देती है।
- नई दिल्ली। भारत के आईटी सेक्टर में भर्तियों में वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में तेजी देखी गई है और इस दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों में कैंपस भर्तियां 25 प्रतिशत बढ़ी हैं। यह जानकारी बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले इंजीनियरिंग, टेक्निकल और एआई प्रोफाइल की मांग में 27 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। वहीं, कंपनसेशन में 5 प्रतिशत का सुधार हुआ है।कैंपस भर्तियां बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और एनसीआर में केंद्रित हैं, जबकि टियर-2 शहरों में प्लेसमेंट 7% बढ़े हैंटैलेंट और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ कंपनी एडेको ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “अधिकांश कैंपस भर्तियां बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में की जा रही हैं, साथ ही कोयंबटूर, उदयपुर, नागपुर, विशाखापत्तनम और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों में प्लेसमेंट में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”कंपनियां स्थिर प्रबंधकीय भर्तियों और नए कर्मचारियों की उत्पादकतापूर्ण तैनाती पर जोर दे रही हैंरिपोर्ट में कहा गया कि कंपनियां स्थिर, प्रबंधकीय भर्तियों को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नए कर्मचारियों को केवल बेंच पर ही रहने देने के बजाय, उत्पादकता पूर्वक तैनात किया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अब ज्यादातर कंपनियां “हायर-एंड-ट्रेनिंग” मॉडल की जगह “ट्रेन और फिर हायर” मॉडल पर काम कर रही हैं।आईटी भर्ती धारणा अभी भी पुनर्संतुलन के दौर में है, जो सतर्क होते हुए भी लक्ष्य-केंद्रित हैएडेको इंडिया के निदेशक और व्यावसायिक प्रमुख, प्रोफेशनल स्टाफिंग, संकेत चेंगप्पा ने कहा कि आईटी भर्ती धारणा अभी भी पुनर्संतुलन के दौर में है, जो सतर्क होते हुए भी लक्ष्य-केंद्रित है। कंपनियां पैमाने की बजाय स्किल की गहराई को प्राथमिकता दे रही हैं और क्लाउड, डेटा और एआई-आधारित क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और साथ ही वर्कफोर्स की क्षमता को सक्रिय परियोजना पाइपलाइनों के साथ जोड़ रही हैं। हालांकि, कैंपस भर्ती में तेजी आई है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इंजीनियरिंग प्रतिभा बाजार के लिए तैयार हो।”हम आईटी, शैक्षणिक और सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर अनुकूलित अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग समाधान दे रहे हैंचेंगप्पा ने आगे कहा कि इसी समस्या का समाधान करने के लिए, “हम आईटी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी निकायों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि अनुकूलित अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग समाधान प्रदान किया जा सकें।” वर्तमान में आईटी इंडस्ट्री एआई भूमिकाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, क्रॉस-डोमेन इंजीनियरों, एमएलओपीएस इंजीनियरों और डेटा इंजीनियरिंग में 45-50 प्रतिशत मांग-आपूर्ति के अंतर से जूझ रहा है।
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नई दिल्ली। भारत के ऑटो सेक्टर में 2025 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर अवधि) में रिकॉर्ड 4.6 अरब डॉलर की डील हुई हैं और इस दौरान कुल 30 लेनदेन हुए हैं। यह जानकारी बुधवार को एक रिपोर्ट में दी गई। ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, यह उछाल मुख्य रूप से टाटा मोटर्स द्वारा इवेको एसपीए के 3.8 अरब डॉलर के अधिग्रहण से आया था, जो 2025 की तीसरी तिमाही में कुल विलय और अधिग्रहण (एम एंड ए) मूल्य का 95 प्रतिशत था।
रणनीतिक अधिग्रहणकर्ताओं और निजी निवेशकों, दोनों ने भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित कियारिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ऑटो सेक्टर में इस तिमाही में वैश्विक विस्तार, विद्युतीकरण और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्मूल्यांकन की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव देखा गया। रणनीतिक अधिग्रहणकर्ताओं और निजी निवेशकों, दोनों ने भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित किया।रिपोर्ट के अनुसार, तिमाही आधार पर वॉल्यूम में कोई बदलाव नहीं हुआ और सितंबर तिमाही का वॉल्यूम जून तिमाही के लगभग समान रहारिपोर्ट के अनुसार, तिमाही आधार पर वॉल्यूम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह सितंबर तिमाही में जून तिमाही के करीब ही रही हैं। विलय और अधिग्रहण गतिविधियां में क्रॉस बॉर्डर कंसोलिडेशन की संख्या अधिक रही, जबकि प्राइवेट इक्विटी (पीई) का फोकस टेक सेगमेंट जैसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, फ्लीट मोबिलिटी और मोबिलिटी-एस-ए-सर्विस (एमएएएस) पर रहा। 2025 की तीसरी तिमाही में विलय और अधिग्रहण की कुल सात डील हुई हैं, जिनकी वैल्यू 4.1 अरब डॉलर था। इस दौरान वैल्यू में दूसरी तिमाही के मुकाबले 1,234 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। वहीं, कुल डील में क्रॉस बॉर्डर की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत थी और वैल्यू में 99 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी।समीक्षा अवधि के दौरान, प्राइवेट इक्विटी ने 531 मिलियन डॉलर की 23 डील की है, इसमें से 70 प्रतिशत डील 10 मिलियन डॉलर से कम की थींसमीक्षा अवधि के दौरान, प्राइवेट इक्विटी ने 531 मिलियन डॉलर की 23 डील की है। इसमें से 70 प्रतिशत डील 10 मिलियन डॉलर से कम की थीं। इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईएफसी) द्वारा समर्थित इलेक्ट्रिक बस ऑपरेटरों में 137 मिलियन डॉलर के निवेश ने शहरी विद्युतीकरण और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया है। 2025 की तीसरी तिमाही में सार्वजनिक बाजार की गतिविधियां धीमी रहीं, और कोई बड़ा आईपीओ या क्यूआईपी दर्ज नहीं किया गया। हालांकि, निवेशकों का ध्यान 2026 में अपेक्षित टोयोटा आईपीओ पर बना हुआ है, जिससे निवेश प्रवाह को नया रूप मिलने और सेक्टरोल रुचि में नई जान आने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। भारत के आईटी सेक्टर में भर्तियों में वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में तेजी देखी गई है और इस दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों में कैंपस भर्तियां 25 प्रतिशत बढ़ी हैं। यह जानकारी बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले इंजीनियरिंग, टेक्निकल और एआई प्रोफाइल की मांग में 27 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। वहीं, कंपनसेशन में 5 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
टैलेंट और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ कंपनी एडेको ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “अधिकांश कैंपस भर्तियां बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में की जा रही हैं, साथ ही कोयंबटूर, उदयपुर, नागपुर, विशाखापत्तनम और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों में प्लेसमेंट में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनियां स्थिर, प्रबंधनीय भर्तियों को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नए कर्मचारियों को केवल बेंच पर ही रहने देने के बजाय, उत्पादकतापूर्वक तैनात किया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अब ज्यादातर कंपनियां “हायर-एंड-ट्रेनिंग” मॉडल की जगह “ट्रेन और फिर हायर” मॉडल पर काम कर रही हैं।एडेको इंडिया के निदेशक और व्यावसायिक प्रमुख, प्रोफेशनल स्टाफिंग, संकेत चेंगप्पा ने कहा कि आईटी भर्ती धारणा अभी भी पुनर्संतुलन के दौर में है, जो सतर्क होते हुए भी लक्ष्य-केंद्रित है। कंपनियां पैमाने की बजाय स्किल की गहराई को प्राथमिकता दे रही हैं और क्लाउड, डेटा और एआई-आधारित क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और साथ ही वर्कफोर्स की क्षमता को सक्रिय परियोजना पाइपलाइनों के साथ जोड़ रही हैं। हालांकि, कैंपस भर्ती में तेजी आई है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इंजीनियरिंग प्रतिभा बाजार के लिए तैयार हो।”चेंगप्पा ने आगे कहा कि इसी समस्या का समाधान करने के लिए, “हम आईटी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी निकायों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि अनुकूलित अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग समाधान प्रदान किए जा सकें।” वर्तमान में आईटी इंडस्ट्री एआई भूमिकाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, क्रॉस-डोमेन इंजीनियरों, एमएलओपीएस इंजीनियरों और डेटा इंजीनियरिंग में 45-50 प्रतिशत मांग-आपूर्ति के अंतर से जूझ रहा है। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जीएसटी 2.0 (GST 2.0) लागू होने के बाद देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में जोरदार उछाल देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि कारों की बिक्री दोगुने से अधिक बढ़कर पांच लाख यूनिट से ऊपर पहुंच गई है।
सीतारमण ने बुधवार को एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि 22 सितंबर को लागू हुए नए जीएसटी दरों के बाद से लेकर दिवाली तक देश में 6.5 से 7 लाख यात्री वाहनों (passenger vehicles) की बिक्री हुई है।उन्होंने लिखा, “जीएसटी 2.0 ने घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग को नई रफ्तार दी है। एक महीने के भीतर कार बिक्री में दोगुने से ज्यादा वृद्धि हुई है।”मंत्री ने बताया कि दिवाली शॉपिंग सीजन में ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी मांग में तेज वृद्धि देखी गई है। प्रीमियम प्रोडक्ट्स और तुरंत डिलीवरी सेवाएं इस वृद्धि के प्रमुख कारण रहे हैं, और इस बार त्योहारी खर्च छोटे शहरों से आगे बढ़कर पूरे देश में फैला।टाटा मोटर्स ने बताया कि उसने नवरात्रि से दीपावली तक 30 दिनों में एक लाख से अधिक कारें डिलीवर कीं, जो पिछले साल की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक बिक्री दर्शाता है। वहीं मारुति सुजुकी इंडिया ने पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में अपनी शीर्ष स्थिति और मजबूत की है।दिवाली 2025 में कुल व्यापार 6.05 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया — जिसमें जीएसटी दरों में कमी और ‘स्वदेशी’ उत्पादों की बढ़ती मांग ने अहम भूमिका निभाई। इस बढ़ी हुई बिक्री से लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, रिटेल और डिलीवरी सेक्टर में लगभग 50 लाख अस्थायी नौकरियां भी पैदा हुईं। कैट (CAIT) के अनुसार, उपभोक्ताओं को स्थिर कीमतों और बेहतर आपूर्ति के कारण संतोषजनक खरीदारी अनुभव मिला, जिससे दिवाली के बाद भी उपभोग की गति बनी रही। -
नई दिल्ली।भारत की कॉर्पोरेट बिक्री में वित्त वर्ष 2024-25 में 7.2 प्रतिशत की तेज वृद्धि देखी गई है। आरबीआई बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। कोरोना में हुई तेज गिरावट के बाद से देश की कॉर्पोरेट बिक्री में लगातार सुधार देखा जा रहा है। 2021-22 के दौरान, इसमें रिकॉर्ड 32.5 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया था।
2024-25 में 7.1 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचा देश का कॉर्पोरेट का मुनाफाबीते पांच वर्षों में देश का कॉर्पोरेट का मुनाफा बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो कि वित्त वर्ष 2020-21 में 2.5 लाख करोड़ रुपए पर था। साथ ही, इस दौरान शुद्ध मुनाफा मार्जिन बढ़कर 2024-25 में 10.3 प्रतिशत हो गया है, जो कि 2020-21 में 7.2 प्रतिशत था।सभी आकार की कंपनियों के ऋण-से-इक्विटी अनुपात में हुआ सुधारआरबीआई के अक्टूबर बुलेटिन के अनुसार, अच्छे मुनाफे के चलते सभी कंपनियों ने अपनी बैलेंसशीट को डीलीवरेज करना जारी रखा है और सभी आकार की कंपनियों के ऋण-से-इक्विटी अनुपात में सुधार हुआ। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए ब्याज कवरेज अनुपात में काफी सुधार हुआ, जो कोविड के बाद की अवधि के दौरान औसतन 7.7 तक पहुंच गया, जो ऋण भुगतान करने की मजबूत क्षमता को दर्शाता है।आरबीआई ने बताया कि भारत के निजी कॉर्पोरेट सेक्टर ने कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों के बीच काफी मजबूती और अनुकूलनशीलता प्रदर्शित की है। 2019-20 के दौरान सुस्त निजी खपत और महामारी के कारण कमजोर घरेलू आर्थिक गतिविधि ने स्थिति को और बिगाड़ दिया था, जिससे बिक्री और मुनाफे में काफी गिरावट देखी गई थी।राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों, दबी हुई मांग और प्रभावी लागत प्रबंधन से कॉर्पोरेट क्षेत्र में जोरदार उछालइसके बाद, राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों, दबी हुई मांग और प्रभावी लागत प्रबंधन के समर्थन से कॉर्पोरेट क्षेत्र में जोरदार उछाल आया।बुलेटिन में कहा गया, “परिचालन लाभ मार्जिन मजबूत बना हुआ है, बड़ी कंपनियां लगातार मध्यम और लघु उद्यमों से बेहतर प्रदर्शन कर रही थीं। चुनौतियों के बावजूद, लागत अनुकूलन रणनीतियों ने व्यवसायों को लाभप्रदता बनाए रखने में मदद की। विनिर्माण क्षेत्र ने स्थिर लाभ मार्जिन बनाए रखा, जबकि गैर-आईटी सेवाओं ने शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद, मजबूती से वापसी की। आईटी क्षेत्र में वृद्धि दर स्थिर रही।” मध्यम और लघु कंपनियों ने अपनी ऋण सेवा क्षमता में वृद्धि की, जिससे समग्र वित्तीय स्थिरता में योगदान मिला -
नई दिल्ली।केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि करीब 6.7 करोड़ नागरिक प्रतिदिन फ्यूल स्टेशन पर ईंधन खरीद रहे हैं, जो कि देश की तेजी से बढ़ती आर्थिक क्षमता को दिखाता है। भारत की मजबूत ग्रोथ को लेकर पुरी ने कहा कि देश 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत थी।
24,500 किलोमीटर लंबा गैस पाइपलाइनकेंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 5.5 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है, जो इसकी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के पैमाने को दर्शाता है।” केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत का गैस पाइपलाइन नेटवर्क फिलहाल जो 24,500 किलोमीटर लंबा है और व्यापक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, इसका विस्तार 2030 तक 33,000 किलोमीटर तक किया जा रहा है।देश में अब लगभग 8,300 सीएनजी स्टेशनउन्होंने यह भी बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत 10.60 करोड़ से ज्यादा घरों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 1.55 करोड़ घरों को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) से जोड़ा गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “देश में अब लगभग 8,300 सीएनजी स्टेशन हैं जो रोजाना लाखों वाहनों की जरूरतें पूरी करते हैं।”स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर भारत के प्रयासों पर जोर देते हुए, पुरी ने कहा कि 114 सीबीजी प्लांट चालू हैं, और ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का एनर्जी सेक्टर 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर देश की प्रगति को गति दे रहा है।इससे पहले, उन्होंने कहा था कि सरकार ने देश के 99 प्रतिशत अपतटीय क्षेत्र को तेल एवं गैस खोज के लिए खोल दिया है और कच्चे तेल के आयात बास्केट को पहले के 27 देशों से बढ़ाकर 40 से अधिक देशों तक कर दिया है। -
नई दिल्ली।नवरात्रि से लेकर दीपावली तक चलने वाले फेस्टिव सीजन में गुड्स की बिक्री रिकॉर्ड 5.40 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान करीब 65,000 करोड़ रुपए की सर्विसेज भी ग्राहकों की ओर से खरीदी गई हैं। यह जानकारी इंडस्ट्री द्वारा जारी आंकड़ों में दी गई। देश के फेस्टिव सीजन के इतिहास में यह बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
कैट के अनुसार, इस साल की फेस्टिव सेल पिछले वर्ष की 4.25 लाख करोड़ रुपये की बिक्री से 25% अधिक रहीअखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) की रिसर्च विंग, कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी के अनुसार, यह पिछले साल नवरात्रि से दीपावली की अवधि में हुई 4.25 लाख करोड़ रुपए की फेस्टिव सेल्स की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।सर्वेक्षण में बताया गया कि इसमें रिटेल की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत रही हैसर्वेक्षण में बताया गया कि इसमें रिटेल की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत रही है। ऑफलाइन मार्केट में भी मांग अच्छी रही है। कन्फेक्शनरी, होम डेकोर, जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसी प्रमुख उपभोक्ता और खुदरा श्रेणियों में जीएसटी दरों में कमी से मूल्य प्रतिस्पर्धा में काफी सुधार हुआ, जिससे खरीदारी में इजाफा हुआ है।सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 72 प्रतिशत व्यापारियों ने बताया कि उनकी बिक्री में वृद्धि सीधे तौर पर जीएसटी में कमी के कारण हुईसर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 72 प्रतिशत व्यापारियों ने बताया कि उनकी बिक्री में वृद्धि सीधे तौर पर जीएसटी में कमी के कारण हुई। आंकड़ों से मुताबिक, दीपावली के व्यापार में उछाल से लॉजिस्टिक्स, परिवहन, खुदरा सहायता, पैकेजिंग और डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में लगभग 50 लाख लोगों के लिए अस्थायी रोजगार पैदा होने का अनुमान है।बढ़ी हुई ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्रय शक्ति ने कुल बिक्री में लगभग 28 प्रतिशत का योगदान दिया, यह दिखाता है कि देश में मांग व्यापक स्तर पर बनी हुई हैबढ़ी हुई ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्रय शक्ति ने कुल बिक्री में लगभग 28 प्रतिशत का योगदान दिया, यह दिखाता है कि देश में मांग व्यापक स्तर पर बनी हुई है। कैट ने कहा, “2025 की दीपावली भारत की खुदरा और व्यापारिक अर्थव्यवस्था में एक नया मानदंड स्थापित करेगी, जो परंपरा, तकनीक और भारतीय उद्यम में विश्वास के सम्मिश्रण का प्रतीक है।” उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष की दीपावली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एक प्रमुख मील का पत्थर है। -
नई दिल्ली। दीपावली के त्योहारी सीजन और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार आज सोमवार को लगातार चौथे सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिनभर के कारोबार के अंत में सेंसेक्स 441.18 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की तेजी के साथ 84,363.37 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 133.30 अंक या 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,843.15 के स्तर पर पहुंच गया।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 84,656.56 का और निफ्टी ने 25,926.20 का उच्चतम स्तर छुआ। बाजार में सबसे ज्यादा तेजी पीएसयू बैंक शेयरों में देखी गई। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2.87 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसके अलावा निफ्टी इंफ्रा में 1.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1.42 प्रतिशत की मजबूती रही। वहीं, निफ्टी ऑटो 0.16 प्रतिशत, फाइनेंशियल सर्विसेज 0.12 प्रतिशत, एफएमसीजी 0.03 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुए।सेंसेक्स पैक में बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, एसबीआई, टीसीएस, टाइटन, भारती एयरटेल, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी प्रमुख लाभ वाले शेयर रहे। वहीं, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, इटरनल और पावरग्रिड जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 442.25 अंक या 0.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59,344.50 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 83.75 अंक या 0.46 प्रतिशत बढ़कर 18,206.15 पर पहुंचा।मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रमुख कंपनियों के उम्मीद से बेहतर दूसरी तिमाही के नतीजों और त्योहारों की खरीदारी के चलते निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। साथ ही अमेरिका-चीन के बीच व्यापार संबंधों में नरमी और यूरोपीय बाजारों में रक्षा शेयरों की अगुवाई में आई तेजी ने भी भारतीय बाजार को मजबूती दी। उन्होंने बताया कि विदेशी निवेशकों (FII) के बेहतर निवेश प्रवाह ने बाजार की धारणा को और मजबूत किया है। लगातार तीन महीनों की बिकवाली के बाद अक्टूबर में एफआईआई फिर से शुद्ध खरीदार बने हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और मिड-साइज वित्तीय कंपनियों के शेयरों में तेजी की मुख्य वजह संभावित अधिग्रहण और दूसरी तिमाही में बेहतर मार्जिन और परिसंपत्ति गुणवत्ता रही। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते दो ट्रेडिंग सेशन के लिए बंद रहेंगे। इस दौरान नियमित ट्रेडिंग नहीं होगी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की आधिकारिक वेबसाइटों पर यह जानकारी दी गई गई।जानकारी के अनुसार, शेयर बाजार 21 अक्टूबर और 22 अक्टूबर को ट्रेडिंग के लिए बंद रहेंगे। दिवाली लक्ष्मी पूजन और बलिप्रतिपदा की छुट्टी के चलते इन दोनों बाजार में ट्रेड नहीं होगा। इससे पहले 2 अक्टूबर को दशहरा और गांधी जयंती के अवसर पर बाजार में लेनदेन नहीं हो सका था।
वहीं, नवंबर में भी बाजार एक दिन के लिए बंद रहेगा। 5 नवंबर को प्रकाश गुरुपर्व श्री गुरु नानक देव के अवसर पर बाजारों की छुट्टी रहेगी। जबकि 25 दिसंबर को क्रिसमस (Christmas) के चलते बाजार बंद रहेंगे।बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने दिवाली के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाली ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ के समय की घोषणा कर दी है। यह एक विशेष एक घंटे का ट्रेडिंग सेशन होता है। इसे हर साल दिवाली पर परंपरागत रूप से आयोजित किया जाता है। मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजारों में नए हिंदू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।स्टॉक एक्सचेंज ने 21 अक्टूबर को ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ के नाम से एक घंटे का खास ट्रेडिंग सेशन रखा है। यह सेशन दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे तक चलेगा। पिछले साल मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन शाम 6 बजे से 7 बजे तक आयोजित किया गया था। नए ट्रेडिंग सेशन के साथ ही नए संवत (विक्रम संवत 2082) शुरू हो जाएगा। यह हिंदू कैलेंडर का नया साल है जो दिवाली के दिन शुरू होता है। ऐसा माना जाता है कि ‘मुहूर्त’ यानी शुभ समय में ट्रेडिंग करने से निवेशकों को समृद्धि और आर्थिक बढ़त मिलती है। -
नई दिल्ली। आईफोन की दीवानगी अब स्मार्टफोन की सेकंड हैंड मार्केट में भी मचाई धूम मचा रही है। काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल (Apple) के आईफोन (iPhone) के नेतृत्व में भारत ने जनवरी-जून 2025 में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। इस दौरान भारत में रिफर्बिश्ड या प्री-ओन्ड स्मार्टफोन की बिक्री में सालाना 5 फीसदी की बढ़त हुई। यह वैश्विक स्तर पर दूसरी सबसे तेज वृद्धि रही। पहले स्थान पर अफ्रीका रहा, जहां 6 फीसदी की वृद्धि हुई। वहां भी आई फोन की मांग प्रमुख कारण रही।यह ट्रेंड इस ओर इशारा करता है कि स्मार्टफोन बाजार में चल रही प्रीमियम सेगमेंट की ओर शिफ्ट अब रिफर्बिश्ड डिवाइस तक भी फैल रही है। इसमें उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरूकता, मजबूत सप्लाई चेन और हाई-एंड मॉडल्स की मांग की अहम भूमिका है।
भारत में रिफर्बिश्ड आईफोन की बिक्री में सालाना 19 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई। आईफोन 13 और आईफोन 14 जैसे प्रीमियम मॉडल्स के लिए उपभोक्ताओं में खासा उत्साह देखा गया। आईफोन 13 ने सितंबर 2021 में भारत में एंट्री की थी और आईफोन 14 एक साल बाद आया। दोनों मॉडल अब सेकंड हैंड मार्केट में काफी लोकप्रिय हैं। खासतौर पर ऐसे खरीदारों के बीच, जो ब्रांड वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं। ये लोग नए मिड-रेंज फोन की बजाय प्रीमियम रिफर्बिश्ड आईफोन लेना पसंद कर रहे हैं।हालांकि, सैमसंग (Samsung) ने वॉल्यूम के लिहाज से सेकंड हैंड बाजार में अपनी लीड बरकरार रखी। भले ही उसकी बिक्री में सालाना 1 प्रतिशत की गिरावट आई हो। गैलेक्सी एस22 (Galaxy S22) और एस23 की निरंतर मांग से कुल वॉल्यूम स्थिर रहा। भारत में गैलेक्सी एस 21 और एस 22 सबसे अधिक बिकने वाले रिफर्बिश्ड मॉडल्स में शामिल रहे, जो अब भी 3-4 साल बाद भी लोकप्रिय हैं।काउंटरपॉइंट ने रिफर्बिश्ड फोन की बिक्री में इस बढ़त का श्रेय ऑर्गनाइज़्ड रिटेलर्स द्वारा बायबैक प्रोग्राम्स को मजबूत करने को दिया है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों पर सक्रिय हैं। ये रिटेलर्स खासकर फ्लैगशिप और प्रीमियम रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन को एक भरोसेमंद, वैल्यू-फॉर-मनी और किफायती विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ताओं की रुचि अब नए और हाल ही में लॉन्च हुए प्रीमियम रिफर्बिश्ड मॉडल्स की ओर बढ़ रही है। इसमें एक्सचेंज प्रोग्राम्स, एक्सटेंडेड वारंटी और बेहतर फीचर्स की भूमिका अहम है। -
नयी दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारतीय निर्यातकों ने 24 देशों को किए गए निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। इन 24 देशों में कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, टोगो, मिस्र, वियतनाम, इराक, मैक्सिको, रूस, केन्या, नाइजीरिया, कनाडा, पोलैंड, श्रीलंका, ओमान, थाईलैंड, बांग्लादेश, ब्राजील, बेल्जियम, इटली और तंजानिया शामिल हैं। दूसरी ओर अमेरिका को निर्यात में गिरावट देखने को मिली, जो मुख्य रूप से सितंबर में वाशिंगटन द्वारा लगाए गए उच्च शुल्कों के कारण हुई। एक अधिकारी ने कहा, ''इन 24 देशों में वित्त 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) के दौरान कुल 129.3 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्शाता है। यह भारत के कुल निर्यात का 59 प्रतिशत है।'' इस वर्ष अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 3.02 प्रतिशत बढ़कर 220.12 अरब डॉलर हो गया, तथा आयात 4.53 प्रतिशत बढ़कर 375.11 अरब डॉलर हो गया, जिससे व्यापार घाटा 154.99 अरब डॉलर रह गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों के दौरान 16 देशों को भारत के निर्यात में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इन देशों का देश के निर्यात में लगभग 27 प्रतिशत (60.3 अरब डॉलर) योगदान है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि जीएसटी सुधारों के कारण इस साल 20 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक्स बिक्री होने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि सभी खुदरा श्रृंखलाओं के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले नवरात्रि की तुलना में 20-25 प्रतिशत अधिक बिक्री हुई और 85 इंच के टीवी जैसी कई ऐसी श्रेणियां हैं जिनका स्टॉक पूरी तरह से बिक गया। वैष्णव ने कहा, ''इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की बढ़ती मांग का सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर पड़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अब दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है। इस साल खपत में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की पूरी संभावना है, जिसका अर्थ है कि पिछले वर्ष की तुलना में 20 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री होने की प्रबल संभावना है।'' वह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जीएसटी सुधारों से होने वाली बचत पर बोल रहे थे। ये सुधार 22 सितंबर, 2025 से लागू हुए थे।
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नयी दिल्ली. कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में क्रमशः शून्य से 0.07 प्रतिशत नीचे और 0.31 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़ा अगस्त में क्रमशः 1.07 प्रतिशत और 1.26 प्रतिशत था। श्रम मंत्रालय ने शनिवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। इसके मुताबिक सितंबर 2025 में कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) 0.11 अंक घटकर 136.23 हो गया। इस दौरान ग्रामीण श्रमिकों का सूचकांक (सीपीआई-आरएल) 0.18 अंक घटकर 136.42 पर था। अगस्त 2025 में सीपीआई-एएल 136.34 अंक और सीपीआई-आरएल 136.60 अंक थे।
सितंबर 2025 में कृषि मजदूरों (एएल) के लिए खाद्य सूचकांक में 0.47 अंक और ग्रामीण मजदूरों (आरएल) के लिए 0.58 अंक की कमी आई। मंत्रालय ने कहा, ''सितंबर 2025 में खाद्य मुद्रास्फीति कृषि मजदूरों के लिए शून्य से 2.35 प्रतिशत नीचे और ग्रामीण मजदूरों के लिए शून्य से 1.81 प्रतिशत नीचे रही। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 484.53 अंक या 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,952.19 पर और निफ्टी 124.55 अंक या 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,709.85 पर था।
बाजार की तेजी का नेतृत्व एफएमसीजी शेयरों ने कियासत्र के दौरान सेंसेक्स ने 84,099.53 और निफ्टी ने 25,781.50 का स्तर छुआ, जो कि 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर था। बाजार की तेजी का नेतृत्व एफएमसीजी शेयरों ने किया। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.37 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। निफ्टी ऑटो (0.66 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.57 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.37 प्रतिशत) और निफ्टी इन्फ्रा (0.36 प्रतिशत) की बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी आईटी (1.63 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (0.65 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (0.85 प्रतिशत) और निफ्टी एनर्जी (0.21 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुआ।इन्फोसिस, एचसीएल टेक, इटरनल (जोमैटो), टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, पावर ग्रिड और एलएंडटी टॉप लूजर्स थेसेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, एमएंडएम, भारती एयरटेल, आईटीसी, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बीईएल टॉप गेनर्स थे। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, इटरनल (जोमैटो), टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, पावर ग्रिड और एलएंडटी टॉप लूजर्स थे।लार्ज कैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट देखी गईलार्ज कैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 338.90 अंक या 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58,902.25 और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 9.45 अंक या 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,122.40 पर था।मार्केट एक्सपर्ट्स ने कहा कि बाजार ने अपनी तेजी को जारी रखा है और 52-सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया हैमार्केट एक्सपर्ट्स ने कहा कि बाजार ने अपनी तेजी को जारी रखा है और 52-सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण उपभोग केंद्रित शेयरों में बढ़त बने रहना है। बैंकों की आगामी आय और परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव कम होने के संकेतों ने समग्र उद्योग जगत में आशावाद को बढ़ावा दिया है। इसके विपरीत, अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली में विवेकाधीन खर्च और बढ़ती परिसंपत्ति गुणवत्ता जोखिमों को लेकर चिंताओं के कारण आईटी सूचकांक दबाव में है।बढ़ते व्यापार युद्ध और धीमे आर्थिक आंकड़ों जैसे वैश्विक आर्थिक व्यवधानों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया हैउन्होंने आगे कहा कि बढ़ते व्यापार युद्ध और धीमे आर्थिक आंकड़ों जैसे वैश्विक आर्थिक व्यवधानों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे वे निवेश में सोने को वरीयता दे रहे हैं, जिसके कारण यह एक नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई थीभारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई थी। सुबह करीब 9.46 बजे, सेंसेक्स 100.42 अंक या 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,568.08 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 19.95 अंक या 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,605.25 पर कारोबार कर रहा था। -
नई दिल्ली। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने शुक्रवार को श्वेत वस्तुओं (एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट) के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के चौथे दौर के लिए आवेदन की तिथि 10 नवंबर, 2025 तक बढ़ा दी। राउंड 4 के लिए आवेदन विंडो मूलतः 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर तक खुली थी।
अब इस योजना के तहत उद्योग जगत की मजबूत प्रतिक्रिया और बढ़ती निवेश की चाहत को देखते हुए इसे बढ़ा दिया गया है।वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, “यह पीएलआई-डब्ल्यूजी योजना के तहत भारत में एसी और एलईडी लाइट के प्रमुख घटकों के घरेलू विनिर्माण से उत्पन्न बढ़ते आत्मविश्वास और गति को दर्शाता है।”अप्रैल 2021 में 6,238 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ शुरू की गई श्वेत वस्तुओं के लिए पीएलआई योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, घटक स्थानीयकरण को बढ़ावा देना और एयर कंडीशनर और एलईडी प्रकाश व्यवस्था क्षेत्रों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है। योजना के पहले दौर में पहले ही पर्याप्त निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुई हैं, जिससे संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विनिर्माण क्षमता में वृद्धि और रोजगार सृजन में योगदान मिला है।इस निवेश से संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में एसी और एलईडी लाइटों के घटकों का विनिर्माण होगा, जिसमें वे घटक भी शामिल होंगे, जिनका वर्तमान में भारत में पर्याप्त मात्रा में विनिर्माण नहीं होता है। इस बीच, पीएलआई योजना ने 2020 से 1.76 लाख करोड़ रुपए के प्रतिबद्ध निवेश आकर्षित किए हैं और 12 लाख से अधिक नौकरियां पैदा की हैं।इस योजना के तहत 14 रणनीतिक क्षेत्रों में 806 आवेदनों को मंजूरी दी गई है, जिसका मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप विनिर्माण को बढ़ावा देना है। यह योजना कंपनियों को एक निर्धारित आधार रेखा से आगे बिक्री बढ़ाने पर पुरस्कार प्रदान करती है। शुरुआत में, मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, सक्रिय दवा सामग्री और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया था, और बाद में ऑटोमोबाइल, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, सौर मॉड्यूल, अर्धचालक और अन्य क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया।पीएलआई योजना के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण वित्त वर्ष 2020-21 में 2.13 लाख करोड़ रुपए से 146 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 5.25 लाख करोड़ रुपए हो गया। ऑटो और ऑटो-कंपोनेंट पीएलआई ने 67,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2025 तक सभी क्षेत्रों में पीएलआई प्रतिभागियों ने संयुक्त बिक्री 16.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की सूचना दी। हालांकि एमएसएमई को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है, लेकिन पीएलआई योजनाओं में उनका प्रत्यक्ष समावेश सीमित है, उन्होंने कहा कि इन अंतरालों को संबोधित करना इस योजना के लिए महत्वपूर्ण होगा ताकि यह अपनी पूर्ण परिवर्तनकारी क्षमता तक पहुंच सके।रिपोर्ट में कहा गया है कि वियतनाम या चीन जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा के कारण कई परियोजनाएं क्रियान्वयन के मामले में पिछड़ गई हैं, जिसके लिए नीति डिजाइन और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे में निरंतर नवाचार की आवश्यकता है। जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा क्षेत्र पीएलआई योजना से मिले प्रोत्साहन के कारण बढ़ रहे हैं, वहीं कुछ क्षेत्रों, जैसे कपड़ा और श्वेत वस्तुओं को आगे बढ़ने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। -
नई दिल्ली। पिछले धनतेरस के बाद से सोने ने रुपए के संदर्भ में लगभग 63 प्रतिशत और डॉलर के संदर्भ में 53 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। शुक्रवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक पीली धातु के 1.5 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना है।
वेंचुरा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ईटीएफ प्रवाह और केंद्रीय बैंक की खरीदारी से मिले नरम रुख वाले संकेतों के कारण सोने में तेजी आई है। मार्च 2025 से सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो 3,000 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर लगभग 4,254 डॉलर हो गई हैं।भारत में धनतेरस 2024 को सोने की कीमतें 78,840 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर वर्तमान में 128,200 रुपए हो गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “धनतेरस 2025 से अगली तेजी की शुरुआत करते हुए, 5000 डॉलर प्रति औंस या 1,50,000 रुपए प्रति दस ग्राम के अनछुए स्तर 2026 में पहुंच सकता है।”वेंचुरा के कमोडिटीज एवं सीआरएम प्रमुख एनएस. रामास्वामी ने अमेरिकी श्रम बाजार में बढ़ते नकारात्मक जोखिमों पर प्रकाश डाला, जिसके कारण दरों में कटौती जरूरी हो गई है। रामास्वामी ने कहा, “आर्थिक आंकड़ों (रोजगार और मुद्रास्फीति) में देरी के कारण ध्यान फेड अध्यक्ष पॉवेल पर है, जिन्होंने संकेत दिया था कि बढ़ते श्रम बाजार जोखिम एक और दर कटौती को उचित ठहराते हैं।”उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को अपने ऋण भुगतान की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और उसका राष्ट्रीय ऋण बढ़कर 37 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव बढ़ गया है क्योंकि चीन ने रेयर अर्थ मेटल और मैग्नेट पर कड़े निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की है, जो इन महत्वपूर्ण संसाधनों के दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर हैं।इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीनी आयात पर मौजूदा 30 प्रतिशत के अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे सोने की मांग में तेजी आई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अनुकूल परिस्थितियों के चलते सोने में लगातार आठ साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी निवेशकों के विश्वास और एफओएमओ की प्रबल भावना को बढ़ावा दे रही है, क्योंकि हर गिरावट का सामना आक्रामक खरीदारी से हो रहा है। -
मुंबई. व्यापारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिवाली और शादी के मौसम से पहले सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर हैं, लेकिन इससे उपभोक्ता मांग में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि, कई लोग आभूषणों की बजाय ‘‘ठोस सर्राफा'' को तरजीह दे रहे हैं। एमसीएक्स में दिन में सोने की कीमत 1,28,395 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।
मुंबई के प्रसिद्ध झावेरी बाजार में उम्मेदलाल तिलोकचंद झावेरी ज्वेलर्स के मालिक वृषांक जैन ने कहा, ‘‘सोने की कीमतें हर दिन बढ़ रही हैं और लोग इस पर नज़र रख रहे हैं और निवेश के लिए आ रहे हैं। आभूषणों की मांग धीमी हुई है, लेकिन लोग सोने की छड़ें और सिक्के खरीद रहे हैं। इस त्योहारी मौसम और शादी के मौसम से पहले हम सोने और चांदी की छड़ों की काफी मांग देख रहे हैं।'' उन्होंने बताया, ‘‘कई खरीदार अग्रिम बुकिंग या सोने के सिक्के खरीदकर मौजूदा कीमतों पर ही खरीदारी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और तेज़ी आने की उम्मीद है।'' जैन ने कहा कि उपभोक्ता अक्सर सोने को एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखते हैं और भारत में इसका गहरा सांस्कृतिक महत्व भी है क्योंकि धनतेरस जैसे त्योहारों और शादियों जैसे अवसरों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। झावेरी बाज़ार में आए एक ग्राहक देवरस भाई परमार ने जैन की बात से सहमति जताई।परमार ने कहा, ‘दिवाली के दौरान सोना खरीदना शुभ माना जाता है और यह एक निवेश है। आपात स्थिति में हम सोने के बदले नकद प्राप्त कर सकते हैं... मेरे परिवार में हर दिवाली पर सोना खरीदने की परंपरा रही है।'' भारतीय सर्राफा आभूषण संघ के प्रवक्ता कुमार जैन ने ‘ठोस सर्राफा' खरीदने के चलन की पुष्टि की।उन्होंने आगे कहा, ‘‘शादियों के लिए लोग अपने पुराने सोने को पुनचक्रण करवाने आ रहे हैं और मांग में कोई कमी नहीं आई है। अमेरिकी व्यापार युद्ध, स्टाम्प शुल्क में वृद्धि, यूक्रेन-रूस और पश्चिम एशिया के बीच तनाव... इन सबने सोने की कीमतों में उछाल ला दिया है।'' झावेरी बाज़ार की एक अन्य ग्राहक शर्मिला ने कहा कि वह हर साल सोना खरीदती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कीमतों में उछाल के बावजूद, मैं इस बार भी सोना खरीदूंगी, शायद थोड़ी कम मात्रा में... मैं अपने बच्चों को शुभ अवसरों पर सोना खरीदने की परंपरा और यह कैसे भविष्य के लिए एक निवेश है, इसके बारे में भी सिखाना चाहती हूँ। अगर मैं कार खरीदूँगी, तो कुछ साल बाद उसकी कीमत मुझे आधी भी नहीं मिलेगी, जबकि सोने की कीमत दोगुनी हो जाएगी।'' - नयी दिल्ली. कृषि नवोन्मेषकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए बुधवार को अंतरराष्ट्रीय कृषि-मंच 'ग्लोबल एग्जेलरेट' पेश किया गया जिससे भारत को वैश्विक कृषि-नवाचार नेटवर्क में एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस मंच को एग्वाया और बायोएसटीएल ने भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (इक्रियर) और भारतीय बीज उद्योग महासंघ (एफएसआईआई) के सहयोग से शुरू किया है। यह मंच भारत, अमेरिका, ब्राजील, ब्रिटेन, नीदरलैंड, इजराइल, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया के स्टार्टअप, इनक्यूबेटरों और निवेशकों को जोड़ने का काम करेगा। सेंट लुइस स्थित गैर-लाभकारी संस्था बायोएसटीएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉन रुबिन ने कहा, “वैज्ञानिक नवाचार दुनिया भर में हो रहे हैं लेकिन उनके वाणिज्यिक उपयोग और विस्तार में खाई है। एग्जेलरेट के माध्यम से हम भारत की कृषि पारिस्थितिकी को सेंट लुइस के नवाचार केंद्र से जोड़ना चाहते हैं।” एग्वाया एलएलपी में साझेदार और एफएसआईआई के सलाहकार राम कौंडिन्य ने कहा कि यह मंच विज्ञान, स्टार्टअप और बाजारों के बीच पुल का काम करेगा। उन्होंने कहा, “यह न केवल वैश्विक तकनीकों को भारतीय किसानों तक लाएगा, बल्कि भारतीय नवाचारों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंचाने में मदद करेगा।” बायोएसटीएल ने 140 से अधिक स्टार्टअप को स्थापित करने में मदद की है और अपनी बायोजेनरेटर शाखा के जरिये तीन अरब डॉलर से अधिक की उद्यम पूंजी जुटाई है।






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