जियो शुल्क बढ़ाने के बजाय अतिरिक्त सेवाओं से बढ़ाएगी आयः आकाश अंबानी
मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल एवं दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने बृहस्पतिवार को कहा कि अपना प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) बढ़ाने के लिए कंपनी शुल्क बढ़ाने के बजाय अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश पर अधिक ध्यान देगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ाने का विकल्प भी है। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित 30,213 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अंबानी ने कहा कि कंपनी प्रति गीगाबाइट डेटा की कीमत बढ़ाने के बजाय ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं देकर उनसे अधिक राजस्व अर्जित करना चाहती है। उन्होंने कहा, ''हमारे पास शुल्क बढ़ाने की क्षमता हमेशा रहती है।'' हालांकि, उन्होंने शुल्क बढ़ोतरी की कोई समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा कि 2016 में जियो के दूरसंचार बाजार में कदम रखने के बाद से भारत की प्रति व्यक्ति आय में दूरसंचार पर प्रति उपयोगकर्ता खर्च की हिस्सेदारी घटकर करीब एक प्रतिशत रह गई है, जो पहले की तुलना में लगभग आधी है। इस मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पंकज पवार ने कहा कि शुल्क बढ़ाना एआरपीयू बढ़ाने के कई उपायों में से एक है। आकाश अंबानी ने कहा कि जियो प्रति गीगाबाइट डेटा के लिए करीब 4.9 रुपये लेती है, जबकि उद्योग का औसत लगभग 7.5 रुपये है। कंपनी के ग्राहकों की औसत मासिक डेटा खपत 43.7 जीबी है। उन्होंने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2030-31 तक 1,400 अरब डॉलर का होने का अनुमान जताते हुए कहा कि जियो इसमें बड़ी बाजार हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है। उन्होंने मोबाइल सेवाओं, घरेलू ब्रॉडबैंड तथा उद्यम एवं अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को कंपनी की वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि जियो देश के वायरलेस डेटा ट्रैफिक का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालती है।
अंबानी ने कहा कि दूरसंचार सेवाओं के अलावा कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित वॉयस सुविधा जैसी नई सेवाएं भी कंपनी की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कर-पूर्व लाभ (ईबीआईटीडीए) मार्जिन 53.3 प्रतिशत रहा, जो करीब तीन साल पहले लगभग 50 प्रतिशत था। विदेशी बाजारों में विस्तार की योजना पर उन्होंने कहा कि जियो अपनी आंतरिक रूप से विकसित नेटवर्क प्रौद्योगिकी विदेशी दूरसंचार कंपनियों को प्रबंधित सेवाओं के रूप में उपलब्ध कराएगी। कंपनी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर लाइसेंस बेचने के बजाय प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं देगी। इस कारोबार के लिए बड़े पूंजीगत व्यय की जरूरत नहीं होगी। अंबानी ने कहा कि विदेशी कारोबार से होने वाली आय की हिस्सेदारी कंपनी के शुरुआती अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के जुड़ने के बाद स्पष्ट होगी। कंपनी विवरण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उसके कुल राजस्व में भारत की हिस्सेदारी 96.62 प्रतिशत थी। जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। निर्गम में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल नहीं है। ऊपरी मूल्य दायरे पर कंपनी आईपीओ से करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है। यह अक्टूबर, 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़कर देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है। ऐसा होने पर कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये होगा। आईपीओ के लिए बोली प्रक्रिया 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक चलेगी, जबकि एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे। कंपनी के शेयर के 28 अक्टूबर को बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, निर्गम से प्राप्त राशि का इस्तेमाल दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज समय-पूर्व चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
जून, 2026 के अंत तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहकों की संख्या 53.33 करोड़ थी, जिनमें 28.49 करोड़ 5जी उपयोगकर्ता शामिल थे। अंबानी ने कहा कि चीन के बाहर जियो का 5जी ग्राहक आधार सबसे बड़ा है। इस दौरान कंपनी का एआरपीयू 215.6 रुपये रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 76,225 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ दर्ज किया था। वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच इसमें 17.8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर रही। अंबानी ने घरेलू ब्रॉडबैंड को कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बताया। उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जियो के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 2.86 करोड़ थी और देश में इस दौरान जुड़े नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहकों में कंपनी की हिस्सेदारी 67.5 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 के बीच देश में 4जी और 5जी ग्राहकों की संख्या में उद्योग स्तर पर 34 करोड़ की वृद्धि होने का अनुमान है। जियो उद्यम सेवाओं के क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं के लिए भारत के अनुमानित 5.1 लाख करोड़ रुपये के बाजार को भी लक्ष्य बना रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा मेटा प्लेटफॉर्म्स से संबद्ध इकाई की 9.98 प्रतिशत और गूगल इंटरनेशनल की 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है।








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