बस्तर दशहरा में 13 अक्टूबर को होगा भीतर रैनी एवं 14 को बाहर रैनी विधान
जगदलपुर, 11 अक्टूबर। विश्व प्रसिद्व बस्तर दशहरे में आगामी 13 अक्टूबर को भीतर रैनी विधान होगा। इस विधान में विधि-विधान पूर्वक पूजा अनुष्ठान के बाद शाम को मां दन्तेश्वरी के छत्र को नवनिर्मित विशालकाय दो मंजिला रथ में आरूढ कर सीरासार चौक होते हुए गोलबाजार चौक, मिताली चौक से परिक्रमा कर वापस सिंहड्योढी (मां दन्तेश्वरी मंदिर के सामने) लायेंगे। इसके बाद मांई जी के छत्र को ससम्मान उतारकर मां दन्तेश्वरी मंदिर में रख देंगे। गौरतलब हो कि इस दौरान रथ को विशेष जाति के लोग ही रथ को खींचते हैं।
इसके बाद मध्यरात्रि को परम्परानुसार कुछ विध्नसंतोषी लोग जो एक विशेष जाति के होते है वे इस रथ को चोरी करके कुम्हड़ाकोट के जंगल में ले जाकर छिपा देंगे। इस रस्म को ही भीतर रैनी कहते हैं।
इसके बाद आगामी 14 अक्टूबर को बाहर रैनी विधान होगा। इस रस्म में भीतर रैनी विधान के तहत चोरी हो गए उक्त विशाल रथ की खोज बिन के बाद जब राजा को पता चलता है कि उक्त रथ को चोरी कर कुम्हाड़ोट को जंगल में कुछ लोग छिपा कर रखें हैं, तो राजा उन लोगों से चर्चा करके उनके साथ भोजन करते है। इस तरह राजपरिवार सहित अनके लोग इस दिन नया खाई भी करते हैं। भोजन के बाद शाम को उक्त रथ में मांई जी के छत्र को आरूढ़ कर बाजे-गाजे एवं आतिश बाजी के साथ वापस लाते हैं और दन्तेश्वरी मंदिर के सामने पहुंचने पर रथ से मांई जी के छत्र को उतार कर मंदिर में ससम्मान रखते हैं। इसे ही बाहर रैनी विधान कहते हैं। भीतर रैनी एवं बाहर रैनी विधान के अवसर पर सम्पूर्ण बस्तर सहित देश विदेश से भारी संख्या में लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।








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