वसंत पंचमी की मंगल कामनाएँ
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
हे पद्मजा सुरवंदिता, माँ शारदे वरदान दे।
विचलित नहीं पथ से रहूँ, कर्त्तव्य का संज्ञान दे।।
सौदामिनी हे विधिप्रिया, वागीश्वरी हंसासिनी।
ब्रह्मात्मजा ज्योतिर्मयी, पद पंकजा पद्मासिनी ।
माँ बुद्धिदात्री भारती, भुवनेश्वरी वरदायिनी।
दुर्गा भवानी अंबिका, सुखदायिनी स्वरदायिनी ।।
वर दे शुभे विद्योत्तमे ,शुचि भक्ति का अभिमान दे ।।
जगदंबिका हे ज्ञानदा, मन का अँधेरा दूर कर ।
माँ श्वेतवस्त्रा शोभिता, पीड़ा जगत की शीघ्र हर।
कर वेद-पुस्तकधारिणी, उत्थान कर ममतामयी ।
हो श्रीप्रदा हे वैष्णवी, दिव्यांगना करुणामयी ।।
माँ चंद्रिका शुभदा सदा, सच-झूठ पथ का भान दे ।।
सौम्या सुरासुर है नमन, हे कालरात्री माँ सुनो।
चित्रांबरा श्वेतासना, आवास हित मम उर चुनो ।
हे चित्रगंधा वरप्रदा, भंडार गीतों का भरो।
माँ पद्मनिलया मालिनी,भयमुक्त मन निर्मल करो ।।
आशीष देकर लेखनी , नव चेतना उत्थान दे ।।





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