कौन सा तेल स्किन एजिंग को धीमा करता है?
आज के दौर में बढ़ती उम्र के निशान चेहरे पर जल्दी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में स्किन को जवान बनाए रखने का तरीका बोतलों में बंद है, या फिर इसका जवाब हमारी परंपरा और आयुर्वेद में छिपा है? आयुर्वेद हजारों सालों से यह मानता आया है कि स्किन की सेहत सीधे शरीर के दोषों वात, पित्त और कफ से जुड़ी होती है। जब खासकर वात दोष असंतुलित होता है, तो त्वचा सबसे पहले असर दिखाती है। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपकी स्किन के लिए कौन-सा तेल सबसे बेहतर है और किस तरह देसी तेल एजिंग की रफ्तार को कम कर सकते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है।
कौन सा तेल स्किन एजिंग को धीमा करता है?
आयुर्वेद के अनुसार स्किन की उम्र बढ़ने का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। जब वात बढ़ता है, तो स्किन रूखी, बेजान और झुर्रियों वाली हो जाती है। इसके अलावा दोषों का असंतुलन, गलत तेल का उपयोग और ऋतु के अनुसार देखभाल न करना भी स्किन एजिंग को तेज करता है। ''तेल वही फायदेमंद होता है जो दोषों को संतुलित रखे और शरीर की प्रकृति के अनुसार हो।''
नॉर्थ इंडिया के लिए सरसों का तेल क्यों है बेहतर?
आयुर्वेद के अनुसार नॉर्थ इंडियन लोगों के लिए सरसों का तेल सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह तेल गर्म तासीर का होता है, जो वात दोष को संतुलित करता है। सरसों का तेल पूरे साल उपयोग किया जा सकता है और यह त्वचा में गहराई तक जाकर पोषण देता है। नियमित अभ्यंग से त्वचा में रक्त संचार बेहतर होता है, रूखापन कम होता है और एजिंग की प्रक्रिया धीमी होती है।
साउथ इंडिया और नॉर्थ ईस्ट के लिए नारियल तेल
साउथ इंडियन और नॉर्थ ईस्ट के लोगों के लिए नारियल तेल सबसे अच्छा विकल्प है। यह शीतल प्रकृति का होता है और वहां के मौसम व शरीर की प्रकृति के अनुकूल है। नारियल तेल न सिर्फ स्किन को मॉइश्चराइज करता है, बल्कि स्किन पर नेचुरल ग्लो भी लाता है। इसका नियमित उपयोग स्किन बैरियर को मजबूत करता है और समय से पहले झुर्रियां आने से बचाता है।
गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मूंगफली का तेल
गुजरात जैसे क्षेत्रों में जहां मूंगफली प्रचुर मात्रा में उगती है, वहां मूंगफली का तेल स्किन के लिए बेहतर माना जाता है। यह तेल वहां के लोगों के दोषों को संतुलित रखता है और त्वचा को पोषण देता है। आयुर्वेद मानता है कि स्थानीय रूप से उगने वाली चीजें शरीर और स्किन के साथ बेहतर तालमेल बनाती हैं।
ऋतु के अनुसार तेल
आयुर्वेद में ऋतु के अनुसार तेल बदलने पर भी जोर दिया गया है। शिशिर ऋतु यानी शीत काल में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे त्वचा ज्यादा रूखी और बेजान हो सकती है। ऐसे में नॉर्थ इंडिया में तिल के तेल का उपयोग बेहद लाभकारी माना जाता है। तिल का तेल त्वचा को गहराई से पोषण देता है और एजिंग के लक्षणों को कम करता है।
स्किन एजिंग स्लो करने के लिए क्या रखें ध्यान?
सिर्फ सही तेल ही नहीं, बल्कि सही समय और सही तरीका भी जरूरी है। रोज या सप्ताह में 2-3 बार अभ्यंग, मौसम के अनुसार तेल का चयन और प्राकृतिक तेलों का उपयोग स्किन एजिंग को काफी हद तक धीमा कर सकता है।
निष्कर्ष
आयुर्वेद के अनुसार स्किन एजिंग को स्लो करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है, क्षेत्र, ऋतु और शरीर की प्रकृति के अनुसार सही तेल का चुनाव। जो तेल जहां उगता है, वही वहां के लोगों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। इसलिए विदेशी तेलों के बजाय सरसों, नारियल, मूंगफली, तिल और घृत जैसे देसी विकल्प अपनाकर आप त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी, सॉफ्ट और युवा बनाए रख सकते हैं।





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